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CTET level 1 hindi practice test

Q1. निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
 प्रगतिवाद का सम्बन्ध जीवन और जगत के प्रति नष्ट दृष्टिकोण से हैं। इस भौतिक जगत को सम्पूर्ण सत्य मानकर, उसमें रहने वाले मानव समुदाय के मंगल की कामना से प्रेरित होकर प्रगतिवादी साहित्य की रचना की गई है। जीवन के प्रति लौकिक दृष्टि इस साहित्य का आधार हैं और सामाजिक यथार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन उसे बदलने और बेहतर बनाने की कामना के साथ। प्रगतिवादी कवि न तो इतिहास की उपेक्षा करता है, न वर्तमान का अनादर, न ही वह भविष्य के रंगीन सपने बुनता है। इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँचते-परखते हुए, वह वर्तमान को समझने की कोशिश करता है और उसी के आधार पर भविष्य के लिए अपना मार्ग चुनता है। यही कारण है कि प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना अनिवार्यतः विद्यमान रहती है। प्रगतिवादी कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ पर केन्द्रित रहती हैं, वह अपने परिवेश और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव से प्रेरित होता है तथा जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। मानव को वह सर्वोपरि मानता हैं।
प्रगतिवादी कवि के पास सामाजिक यथार्थ को देखने की विशेष दृष्टि होती है। एक वर्ग चेतना प्रधान दृष्टि। नागार्ज़ेन यदि दुखरन झा जैसे प्राइमरी स्कूल के अल्पवेतन भोगी मास्टर का यथार्थ चित्रण करते हैं, तो सामाजिक विषमता के यथार्थ को ध्यान में रखते हुए। इस सरल यथार्थ को कविता में व्यक्त करने के लिए यथार्थ रूपों की समझ जरूरी हैं। कवि का वास्तव बोध और वस्तुपरक निरीक्षण दोनों पर ध्यान जाना चाहिए। प्रगतिशील चेतना के कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ के अनेक रूपों की ओर जाती हैं। कवि सामाजिक विषमता को उजागर करता हुआ कभी अपना विक्षोभ व्यक्त करता है, तो कभी अपना सात्विक क्रोध कभी वह अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सिंह गर्जना करता है, तो कभी शोषण और दमन के दृश्य देखकर अपना दु:ख व्यक्त करता हैं।
प्रगतिवादी चेतना के कवि को प्रकृति और परिवेश के प्रति कवि का लगाव भी ध्यान आकृष्ट करता है। प्रगतिवादी कवि प्रकृति में जिस जीवन सक्रियता का आभास पाता है, उसके लिए एक प्रकार का स्थानिक लगाव जरूरी हैं।
प्रगतिवादी कवि किससे जुड़ाव महसूस करता है?
(a ) भौतिक सुख-सुविधाओं से
(b ) प्रकृति से
(c ) इन दोनों से
(d ) इनमें से कोई नहीं

Q2.
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
 प्रगतिवाद का सम्बन्ध जीवन और जगत के प्रति नष्ट दृष्टिकोण से हैं। इस भौतिक जगत को सम्पूर्ण सत्य मानकर, उसमें रहने वाले मानव समुदाय के मंगल की कामना से प्रेरित होकर प्रगतिवादी साहित्य की रचना की गई है। जीवन के प्रति लौकिक दृष्टि इस साहित्य का आधार हैं और सामाजिक यथार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन उसे बदलने और बेहतर बनाने की कामना के साथ। प्रगतिवादी कवि न तो इतिहास की उपेक्षा करता है, न वर्तमान का अनादर, न ही वह भविष्य के रंगीन सपने बुनता है। इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँचते-परखते हुए, वह वर्तमान को समझने की कोशिश करता है और उसी के आधार पर भविष्य के लिए अपना मार्ग चुनता है। यही कारण है कि प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना अनिवार्यतः विद्यमान रहती है। प्रगतिवादी कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ पर केन्द्रित रहती हैं, वह अपने परिवेश और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव से प्रेरित होता है तथा जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। मानव को वह सर्वोपरि मानता हैं।
प्रगतिवादी कवि के पास सामाजिक यथार्थ को देखने की विशेष दृष्टि होती है। एक वर्ग चेतना प्रधान दृष्टि। नागार्ज़ेन यदि दुखरन झा जैसे प्राइमरी स्कूल के अल्पवेतन भोगी मास्टर का यथार्थ चित्रण करते हैं, तो सामाजिक विषमता के यथार्थ को ध्यान में रखते हुए। इस सरल यथार्थ को कविता में व्यक्त करने के लिए यथार्थ रूपों की समझ जरूरी हैं। कवि का वास्तव बोध और वस्तुपरक निरीक्षण दोनों पर ध्यान जाना चाहिए। प्रगतिशील चेतना के कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ के अनेक रूपों की ओर जाती हैं। कवि सामाजिक विषमता को उजागर करता हुआ कभी अपना विक्षोभ व्यक्त करता है, तो कभी अपना सात्विक क्रोध कभी वह अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सिंह गर्जना करता है, तो कभी शोषण और दमन के दृश्य देखकर अपना दु:ख व्यक्त करता हैं।
प्रगतिवादी चेतना के कवि को प्रकृति और परिवेश के प्रति कवि का लगाव भी ध्यान आकृष्ट करता है। प्रगतिवादी कवि प्रकृति में जिस जीवन सक्रियता का आभास पाता है, उसके लिए एक प्रकार का स्थानिक लगाव जरूरी हैं।
लेखक क्या कहना चाहता है?
(a ) प्रगतिवादी कवि महान होते हैं
(b ) मनुष्य की प्रगति के लिए प्रगतिशीलता अनिवार्य है
(c ) प्रगतिवाद क्या हैं और प्रगतिवादी कवि के दृष्टिकोण क्या होते हैं
(d ) प्रगतिवादी चेतना के द्वारा सृष्टि का भला कैसे किया जा सकता है

Q3.
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
 प्रगतिवाद का सम्बन्ध जीवन और जगत के प्रति नष्ट दृष्टिकोण से हैं। इस भौतिक जगत को सम्पूर्ण सत्य मानकर, उसमें रहने वाले मानव समुदाय के मंगल की कामना से प्रेरित होकर प्रगतिवादी साहित्य की रचना की गई है। जीवन के प्रति लौकिक दृष्टि इस साहित्य का आधार हैं और सामाजिक यथार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन उसे बदलने और बेहतर बनाने की कामना के साथ। प्रगतिवादी कवि न तो इतिहास की उपेक्षा करता है, न वर्तमान का अनादर, न ही वह भविष्य के रंगीन सपने बुनता है। इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँचते-परखते हुए, वह वर्तमान को समझने की कोशिश करता है और उसी के आधार पर भविष्य के लिए अपना मार्ग चुनता है। यही कारण है कि प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना अनिवार्यतः विद्यमान रहती है। प्रगतिवादी कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ पर केन्द्रित रहती हैं, वह अपने परिवेश और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव से प्रेरित होता है तथा जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। मानव को वह सर्वोपरि मानता हैं।
प्रगतिवादी कवि के पास सामाजिक यथार्थ को देखने की विशेष दृष्टि होती है। एक वर्ग चेतना प्रधान दृष्टि। नागार्ज़ेन यदि दुखरन झा जैसे प्राइमरी स्कूल के अल्पवेतन भोगी मास्टर का यथार्थ चित्रण करते हैं, तो सामाजिक विषमता के यथार्थ को ध्यान में रखते हुए। इस सरल यथार्थ को कविता में व्यक्त करने के लिए यथार्थ रूपों की समझ जरूरी हैं। कवि का वास्तव बोध और वस्तुपरक निरीक्षण दोनों पर ध्यान जाना चाहिए। प्रगतिशील चेतना के कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ के अनेक रूपों की ओर जाती हैं। कवि सामाजिक विषमता को उजागर करता हुआ कभी अपना विक्षोभ व्यक्त करता है, तो कभी अपना सात्विक क्रोध कभी वह अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सिंह गर्जना करता है, तो कभी शोषण और दमन के दृश्य देखकर अपना दु:ख व्यक्त करता हैं।
प्रगतिवादी चेतना के कवि को प्रकृति और परिवेश के प्रति कवि का लगाव भी ध्यान आकृष्ट करता है। प्रगतिवादी कवि प्रकृति में जिस जीवन सक्रियता का आभास पाता है, उसके लिए एक प्रकार का स्थानिक लगाव जरूरी हैं।
कौन-सा कथन असत्य हैं?
(a ) प्रगतिवाद का सम्बन्ध जीवन और जगत के प्रति नये दृष्टिकोण से है
(b ) प्रगतिवादी कवि समाज का यथार्थ चित्रण करता है
(c ) प्रगतिवाद मानव को सर्वोपरि मानता है
(d ) जीवन के प्रति अलौकिक दृष्टि प्रगतिवादी साहित्य का आधार है

Q4.
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
 प्रगतिवाद का सम्बन्ध जीवन और जगत के प्रति नष्ट दृष्टिकोण से हैं। इस भौतिक जगत को सम्पूर्ण सत्य मानकर, उसमें रहने वाले मानव समुदाय के मंगल की कामना से प्रेरित होकर प्रगतिवादी साहित्य की रचना की गई है। जीवन के प्रति लौकिक दृष्टि इस साहित्य का आधार हैं और सामाजिक यथार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन उसे बदलने और बेहतर बनाने की कामना के साथ। प्रगतिवादी कवि न तो इतिहास की उपेक्षा करता है, न वर्तमान का अनादर, न ही वह भविष्य के रंगीन सपने बुनता है। इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँचते-परखते हुए, वह वर्तमान को समझने की कोशिश करता है और उसी के आधार पर भविष्य के लिए अपना मार्ग चुनता है। यही कारण है कि प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना अनिवार्यतः विद्यमान रहती है। प्रगतिवादी कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ पर केन्द्रित रहती हैं, वह अपने परिवेश और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव से प्रेरित होता है तथा जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। मानव को वह सर्वोपरि मानता हैं।
प्रगतिवादी कवि के पास सामाजिक यथार्थ को देखने की विशेष दृष्टि होती है। एक वर्ग चेतना प्रधान दृष्टि। नागार्ज़ेन यदि दुखरन झा जैसे प्राइमरी स्कूल के अल्पवेतन भोगी मास्टर का यथार्थ चित्रण करते हैं, तो सामाजिक विषमता के यथार्थ को ध्यान में रखते हुए। इस सरल यथार्थ को कविता में व्यक्त करने के लिए यथार्थ रूपों की समझ जरूरी हैं। कवि का वास्तव बोध और वस्तुपरक निरीक्षण दोनों पर ध्यान जाना चाहिए। प्रगतिशील चेतना के कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ के अनेक रूपों की ओर जाती हैं। कवि सामाजिक विषमता को उजागर करता हुआ कभी अपना विक्षोभ व्यक्त करता है, तो कभी अपना सात्विक क्रोध कभी वह अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सिंह गर्जना करता है, तो कभी शोषण और दमन के दृश्य देखकर अपना दु:ख व्यक्त करता हैं।
प्रगतिवादी चेतना के कवि को प्रकृति और परिवेश के प्रति कवि का लगाव भी ध्यान आकृष्ट करता है। प्रगतिवादी कवि प्रकृति में जिस जीवन सक्रियता का आभास पाता है, उसके लिए एक प्रकार का स्थानिक लगाव जरूरी हैं।
प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना विद्यमान रहने का क्या कारण है?
(a ) प्रगतिवादी कवि इतिहास की तो उपेक्षा नहीं करता है, किन्तु वर्तमान का अनादर करता है
(b ) प्रगतिवादी कवि भविष्य के रंगीन सपने बुनता है
(c ) प्रगतिवादी कवि इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँच-परख कर वर्तमान के बारे में लिखता है
(d ) प्रगतिवादी कवि भविष्य के प्रति चिन्तित नहीं रहता, वह इतिहास के प्रति चिन्तित रहता है

Q5.
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
 प्रगतिवाद का सम्बन्ध जीवन और जगत के प्रति नष्ट दृष्टिकोण से हैं। इस भौतिक जगत को सम्पूर्ण सत्य मानकर, उसमें रहने वाले मानव समुदाय के मंगल की कामना से प्रेरित होकर प्रगतिवादी साहित्य की रचना की गई है। जीवन के प्रति लौकिक दृष्टि इस साहित्य का आधार हैं और सामाजिक यथार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन उसे बदलने और बेहतर बनाने की कामना के साथ। प्रगतिवादी कवि न तो इतिहास की उपेक्षा करता है, न वर्तमान का अनादर, न ही वह भविष्य के रंगीन सपने बुनता है। इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँचते-परखते हुए, वह वर्तमान को समझने की कोशिश करता है और उसी के आधार पर भविष्य के लिए अपना मार्ग चुनता है। यही कारण है कि प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना अनिवार्यतः विद्यमान रहती है। प्रगतिवादी कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ पर केन्द्रित रहती हैं, वह अपने परिवेश और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव से प्रेरित होता है तथा जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। मानव को वह सर्वोपरि मानता हैं।
प्रगतिवादी कवि के पास सामाजिक यथार्थ को देखने की विशेष दृष्टि होती है। एक वर्ग चेतना प्रधान दृष्टि। नागार्ज़ेन यदि दुखरन झा जैसे प्राइमरी स्कूल के अल्पवेतन भोगी मास्टर का यथार्थ चित्रण करते हैं, तो सामाजिक विषमता के यथार्थ को ध्यान में रखते हुए। इस सरल यथार्थ को कविता में व्यक्त करने के लिए यथार्थ रूपों की समझ जरूरी हैं। कवि का वास्तव बोध और वस्तुपरक निरीक्षण दोनों पर ध्यान जाना चाहिए। प्रगतिशील चेतना के कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ के अनेक रूपों की ओर जाती हैं। कवि सामाजिक विषमता को उजागर करता हुआ कभी अपना विक्षोभ व्यक्त करता है, तो कभी अपना सात्विक क्रोध कभी वह अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सिंह गर्जना करता है, तो कभी शोषण और दमन के दृश्य देखकर अपना दु:ख व्यक्त करता हैं।
प्रगतिवादी चेतना के कवि को प्रकृति और परिवेश के प्रति कवि का लगाव भी ध्यान आकृष्ट करता है। प्रगतिवादी कवि प्रकृति में जिस जीवन सक्रियता का आभास पाता है, उसके लिए एक प्रकार का स्थानिक लगाव जरूरी हैं।
प्रस्तुत गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक निम्नलिखित में से क्या होगा?
(a ) प्रगति
(b ) प्रगतिवाद
(c ) प्रगति के प्रयास
(d ) मानव एवं प्रगति

Q6.
अत्याचारका सन्धि-विच्छेद है
(a ) अत्य + आचार
(b ) अति + आचार
(c ) अत्य + अचार
(d ) अत्या + चार

Q7.
स्थानिक की तरह कौन-सा विशेषण शब्द प्रस्तुत गद्यांश में प्रयुक्त नहीं हुआ है?
(a ) भौतिक
(b ) लौकिक
(c ) आर्थिक
(d ) सामाजिक

Q8.
सात्विक हैं
(a ) क्रिया
(b ) संज्ञा
(c ) विशेषण
(d ) सर्वनाम

Q9.
दमनका तात्पर्य है
(a ) दबाया जाना
(b ) दमा की बीमारी
(c ) दाब
(d ) दबाव

Q10.
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
एक नये भौगोलिक अध्ययन का दावा है कि प्रशान्त महासागर में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले कई द्वीप डूब नहीं रहे हैं बल्कि उनका विस्तार हो रहा है। अध्ययन के अनुसार तुवालू किरिबास और माइक्रोनेशिया गणराज्य ऐसे द्वीपीय देश हैं जिनका आकार मूंगे की चट्टानों और समुद्र के भीतर कणों आदि जमा होने से बनी अवसादी चट्टानों के कारण बढ़ गया है।
इस अध्ययन से यह अनुमान लगाया गया है कि इन द्वीपों का अस्तित्व अगले सौ वर्षों तक भी बना रहेगा। हालाँकि भले ही ये द्वीप ना डूबे लेकिन आगे चलकर ऐसे द्वीप बसने लायक रहेंगे कि नहीं, यह निश्चित नहीं हैं।

हाल के समय में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले प्रशान्त महासागर के कई द्वीपों के निवासियों को ये चिन्ता सता रही हैं कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से उनका द्वीप नक्शे से गायब हो जाएगा। इस अध्ययन के दौरान 27 द्वीपों का पिछले 60 वर्षों का लेखा-जोखा लिया गया जिसके लिए पुरानी तस्वीरों और उपग्रह से लिए गए चित्रों का सहारा लिया गया। भूगर्भशास्त्रियों ने पाया कि 80% द्वीप जैसे थे वैसे ही रहे या उनका आकार बढ़ गया और उनमें भी कुछ तो बहुत ही अधिक बढ़ गए।
अध्ययन दल में शामिल आकलैंण्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रोफेसर पॉल केन्च का कहना है कि इन द्वीपों का अस्तित्व समाप्त हो जाए, इसका खतरा निकट भविष्य में बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा, इन देशों के बारे में वो निराशाजनक सोच बिल्कुल गलत हैं। हमारे पास इस बात के प्रमाण हैं कि ये द्वीप अगले सौ साल तक रहेंगे। तो उनको अपने देश से भागने की कोई जरूरत नहीं हैं। लेकिन ये पता चलने के बावजूद कि आागे चलकर ये द्वीप लोगों के रहने लायक भी नहीं रहेंगे, वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इन द्वीपों पर रहने वाले लोगों के जन-जीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है|
प्रशान्त महासागर में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले कई द्वीपों का विस्तार कैसे हो रहा है?
(a ) समुद्रीं जीव-जन्तुओं के कारण
(b ) द्वीप पर रहने वाले लोगों के कारण
(c ) मूंगे की चट्टानों और समुद्र के भीतर कणों आदि के जमा होने से
(d ) इनमें से कोई नहीं

Q11.
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
एक नये भौगोलिक अध्ययन का दावा है कि प्रशान्त महासागर में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले कई द्वीप डूब नहीं रहे हैं बल्कि उनका विस्तार हो रहा है। अध्ययन के अनुसार तुवालू किरिबास और माइक्रोनेशिया गणराज्य ऐसे द्वीपीय देश हैं जिनका आकार मूंगे की चट्टानों और समुद्र के भीतर कणों आदि जमा होने से बनी अवसादी चट्टानों के कारण बढ़ गया है।
इस अध्ययन से यह अनुमान लगाया गया है कि इन द्वीपों का अस्तित्व अगले सौ वर्षों तक भी बना रहेगा। हालाँकि भले ही ये द्वीप ना डूबे लेकिन आगे चलकर ऐसे द्वीप बसने लायक रहेंगे कि नहीं, यह निश्चित नहीं हैं।

हाल के समय में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले प्रशान्त महासागर के कई द्वीपों के निवासियों को ये चिन्ता सता रही हैं कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से उनका द्वीप नक्शे से गायब हो जाएगा। इस अध्ययन के दौरान 27 द्वीपों का पिछले 60 वर्षों का लेखा-जोखा लिया गया जिसके लिए पुरानी तस्वीरों और उपग्रह से लिए गए चित्रों का सहारा लिया गया। भूगर्भशास्त्रियों ने पाया कि 80% द्वीप जैसे थे वैसे ही रहे या उनका आकार बढ़ गया और उनमें भी कुछ तो बहुत ही अधिक बढ़ गए।
अध्ययन दल में शामिल आकलैंण्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रोफेसर पॉल केन्च का कहना है कि इन द्वीपों का अस्तित्व समाप्त हो जाए, इसका खतरा निकट भविष्य में बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा, इन देशों के बारे में वो निराशाजनक सोच बिल्कुल गलत हैं। हमारे पास इस बात के प्रमाण हैं कि ये द्वीप अगले सौ साल तक रहेंगे। तो उनको अपने देश से भागने की कोई जरूरत नहीं हैं। लेकिन ये पता चलने के बावजूद कि आागे चलकर ये द्वीप लोगों के रहने लायक भी नहीं रहेंगे, वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इन द्वीपों पर रहने वाले लोगों के जन-जीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है|
प्रस्तुत गद्यांश में निम्नलिखित में से किस देश की चर्चा नहीं की गई है?
(a ) माइक्रोनेशिया गणराज्य
(b ) इण्डोनेशिया
(c ) तुवालू
(d ) किरिबास

Q12.
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
एक नये भौगोलिक अध्ययन का दावा है कि प्रशान्त महासागर में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले कई द्वीप डूब नहीं रहे हैं बल्कि उनका विस्तार हो रहा है। अध्ययन के अनुसार तुवालू किरिबास और माइक्रोनेशिया गणराज्य ऐसे द्वीपीय देश हैं जिनका आकार मूंगे की चट्टानों और समुद्र के भीतर कणों आदि जमा होने से बनी अवसादी चट्टानों के कारण बढ़ गया है।
इस अध्ययन से यह अनुमान लगाया गया है कि इन द्वीपों का अस्तित्व अगले सौ वर्षों तक भी बना रहेगा। हालाँकि भले ही ये द्वीप ना डूबे लेकिन आगे चलकर ऐसे द्वीप बसने लायक रहेंगे कि नहीं, यह निश्चित नहीं हैं।

हाल के समय में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले प्रशान्त महासागर के कई द्वीपों के निवासियों को ये चिन्ता सता रही हैं कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से उनका द्वीप नक्शे से गायब हो जाएगा। इस अध्ययन के दौरान 27 द्वीपों का पिछले 60 वर्षों का लेखा-जोखा लिया गया जिसके लिए पुरानी तस्वीरों और उपग्रह से लिए गए चित्रों का सहारा लिया गया। भूगर्भशास्त्रियों ने पाया कि 80% द्वीप जैसे थे वैसे ही रहे या उनका आकार बढ़ गया और उनमें भी कुछ तो बहुत ही अधिक बढ़ गए।
अध्ययन दल में शामिल आकलैंण्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रोफेसर पॉल केन्च का कहना है कि इन द्वीपों का अस्तित्व समाप्त हो जाए, इसका खतरा निकट भविष्य में बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा, इन देशों के बारे में वो निराशाजनक सोच बिल्कुल गलत हैं। हमारे पास इस बात के प्रमाण हैं कि ये द्वीप अगले सौ साल तक रहेंगे। तो उनको अपने देश से भागने की कोई जरूरत नहीं हैं। लेकिन ये पता चलने के बावजूद कि आागे चलकर ये द्वीप लोगों के रहने लायक भी नहीं रहेंगे, वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इन द्वीपों पर रहने वाले लोगों के जन-जीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है|
प्रशान्त महासागर के कई द्वीपों के निवासी क्यों चिन्तित हैं?
(a ) समुद्र का जल स्तर बढ़ने से
(b ) समुद्री जीव-जन्तुओं से
(c ) समुद्र के भीतर कणों आदि के जमा होने से
(d ) इनमें से कोई नहीं

Q13.
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
एक नये भौगोलिक अध्ययन का दावा है कि प्रशान्त महासागर में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले कई द्वीप डूब नहीं रहे हैं बल्कि उनका विस्तार हो रहा है। अध्ययन के अनुसार तुवालू किरिबास और माइक्रोनेशिया गणराज्य ऐसे द्वीपीय देश हैं जिनका आकार मूंगे की चट्टानों और समुद्र के भीतर कणों आदि जमा होने से बनी अवसादी चट्टानों के कारण बढ़ गया है।
इस अध्ययन से यह अनुमान लगाया गया है कि इन द्वीपों का अस्तित्व अगले सौ वर्षों तक भी बना रहेगा। हालाँकि भले ही ये द्वीप ना डूबे लेकिन आगे चलकर ऐसे द्वीप बसने लायक रहेंगे कि नहीं, यह निश्चित नहीं हैं।

हाल के समय में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले प्रशान्त महासागर के कई द्वीपों के निवासियों को ये चिन्ता सता रही हैं कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से उनका द्वीप नक्शे से गायब हो जाएगा। इस अध्ययन के दौरान 27 द्वीपों का पिछले 60 वर्षों का लेखा-जोखा लिया गया जिसके लिए पुरानी तस्वीरों और उपग्रह से लिए गए चित्रों का सहारा लिया गया। भूगर्भशास्त्रियों ने पाया कि 80% द्वीप जैसे थे वैसे ही रहे या उनका आकार बढ़ गया और उनमें भी कुछ तो बहुत ही अधिक बढ़ गए।
अध्ययन दल में शामिल आकलैंण्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रोफेसर पॉल केन्च का कहना है कि इन द्वीपों का अस्तित्व समाप्त हो जाए, इसका खतरा निकट भविष्य में बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा, इन देशों के बारे में वो निराशाजनक सोच बिल्कुल गलत हैं। हमारे पास इस बात के प्रमाण हैं कि ये द्वीप अगले सौ साल तक रहेंगे। तो उनको अपने देश से भागने की कोई जरूरत नहीं हैं। लेकिन ये पता चलने के बावजूद कि आागे चलकर ये द्वीप लोगों के रहने लायक भी नहीं रहेंगे, वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इन द्वीपों पर रहने वाले लोगों के जन-जीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है|
प्रस्तुत गद्यांश में चर्चित द्वीपों के कब तक बने रहने की सम्भावना है?
(a ) अगले दो सौ वर्षों तक
(b ) ये शीघ्र विलुप्त हो जाएँगे
(c ) अगले दस वर्षों तक
(d ) अगले सौ वर्षों तक

Q14.
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
एक नये भौगोलिक अध्ययन का दावा है कि प्रशान्त महासागर में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले कई द्वीप डूब नहीं रहे हैं बल्कि उनका विस्तार हो रहा है। अध्ययन के अनुसार तुवालू किरिबास और माइक्रोनेशिया गणराज्य ऐसे द्वीपीय देश हैं जिनका आकार मूंगे की चट्टानों और समुद्र के भीतर कणों आदि जमा होने से बनी अवसादी चट्टानों के कारण बढ़ गया है।
इस अध्ययन से यह अनुमान लगाया गया है कि इन द्वीपों का अस्तित्व अगले सौ वर्षों तक भी बना रहेगा। हालाँकि भले ही ये द्वीप ना डूबे लेकिन आगे चलकर ऐसे द्वीप बसने लायक रहेंगे कि नहीं, यह निश्चित नहीं हैं।

हाल के समय में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले प्रशान्त महासागर के कई द्वीपों के निवासियों को ये चिन्ता सता रही हैं कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से उनका द्वीप नक्शे से गायब हो जाएगा। इस अध्ययन के दौरान 27 द्वीपों का पिछले 60 वर्षों का लेखा-जोखा लिया गया जिसके लिए पुरानी तस्वीरों और उपग्रह से लिए गए चित्रों का सहारा लिया गया। भूगर्भशास्त्रियों ने पाया कि 80% द्वीप जैसे थे वैसे ही रहे या उनका आकार बढ़ गया और उनमें भी कुछ तो बहुत ही अधिक बढ़ गए।
अध्ययन दल में शामिल आकलैंण्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रोफेसर पॉल केन्च का कहना है कि इन द्वीपों का अस्तित्व समाप्त हो जाए, इसका खतरा निकट भविष्य में बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा, इन देशों के बारे में वो निराशाजनक सोच बिल्कुल गलत हैं। हमारे पास इस बात के प्रमाण हैं कि ये द्वीप अगले सौ साल तक रहेंगे। तो उनको अपने देश से भागने की कोई जरूरत नहीं हैं। लेकिन ये पता चलने के बावजूद कि आागे चलकर ये द्वीप लोगों के रहने लायक भी नहीं रहेंगे, वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इन द्वीपों पर रहने वाले लोगों के जन-जीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है|
भूगर्भशास्त्रियों ने किसका अध्ययन किया?
(a ) प्रशान्त महासागर का
(b ) द्वीपों का
(c ) चट्टानों का
(d ) समुद्र के जल स्तर का

Q15.
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
एक नये भौगोलिक अध्ययन का दावा है कि प्रशान्त महासागर में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले कई द्वीप डूब नहीं रहे हैं बल्कि उनका विस्तार हो रहा है। अध्ययन के अनुसार तुवालू किरिबास और माइक्रोनेशिया गणराज्य ऐसे द्वीपीय देश हैं जिनका आकार मूंगे की चट्टानों और समुद्र के भीतर कणों आदि जमा होने से बनी अवसादी चट्टानों के कारण बढ़ गया है।
इस अध्ययन से यह अनुमान लगाया गया है कि इन द्वीपों का अस्तित्व अगले सौ वर्षों तक भी बना रहेगा। हालाँकि भले ही ये द्वीप ना डूबे लेकिन आगे चलकर ऐसे द्वीप बसने लायक रहेंगे कि नहीं, यह निश्चित नहीं हैं।

हाल के समय में निचले समुद्र तल में पड़ने वाले प्रशान्त महासागर के कई द्वीपों के निवासियों को ये चिन्ता सता रही हैं कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से उनका द्वीप नक्शे से गायब हो जाएगा। इस अध्ययन के दौरान 27 द्वीपों का पिछले 60 वर्षों का लेखा-जोखा लिया गया जिसके लिए पुरानी तस्वीरों और उपग्रह से लिए गए चित्रों का सहारा लिया गया। भूगर्भशास्त्रियों ने पाया कि 80% द्वीप जैसे थे वैसे ही रहे या उनका आकार बढ़ गया और उनमें भी कुछ तो बहुत ही अधिक बढ़ गए।
अध्ययन दल में शामिल आकलैंण्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रोफेसर पॉल केन्च का कहना है कि इन द्वीपों का अस्तित्व समाप्त हो जाए, इसका खतरा निकट भविष्य में बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा, इन देशों के बारे में वो निराशाजनक सोच बिल्कुल गलत हैं। हमारे पास इस बात के प्रमाण हैं कि ये द्वीप अगले सौ साल तक रहेंगे। तो उनको अपने देश से भागने की कोई जरूरत नहीं हैं। लेकिन ये पता चलने के बावजूद कि आागे चलकर ये द्वीप लोगों के रहने लायक भी नहीं रहेंगे, वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इन द्वीपों पर रहने वाले लोगों के जन-जीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है|
अस्तित्वशब्द है
(a ) संज्ञा
(b ) सर्वनाम
(c ) विशेषण
(d ) क्रिया
 
1. (b ) 2. (c ) 3. (d ) 4. (c ) 5. (b ) 6. (b ) 7. (c ) 8. (c ) 9. (a ) 10. (c ) 11. (b ) 12. (a ) 13. (d ) 14. (b ) 15. (a )

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