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CTET hindi quiz

Q1. निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
 दैन्य दुःख अपमान ग्लानि चिर श्रुसित पिपासा, मृत अभिलाषा बिना आय की कलांति बन रही उसके जीवन की परिभाषा जङ्ग अनाज के ढेर सदृश ही वह दिन-भर बैठा गद्दी पर बात बात पर झुल बोलता कड़िी-की स्पर्धा में मर-मर। फिर भी क्या कुटुम्ब पलता है? रहते स्वच्छ सुधर सब परिजन? खना पा रहा हैं वह पक्का घर? मन में सुख हैं? ज गुटता है धन? खिसक गई कन्धों से कथड़ी ठिठुर रहा। अब सर्दी से तन, सोच रहा बस्ती का बनिया घोर विवशता का निज कारण|
इस पद्यांश में किस समस्या का वर्णन किया गया है?
(a ) बाल मजदूरी
(b ) आतंकवाद
(c ) प्रदूषण
(d ) गरीबी

Q2.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
 दैन्य दुःख अपमान ग्लानि चिर श्रुसित पिपासा, मृत अभिलाषा बिना आय की कलांति बन रही उसके जीवन की परिभाषा जङ्ग अनाज के ढेर सदृश ही वह दिन-भर बैठा गद्दी पर बात बात पर झुल बोलता कड़िी-की स्पर्धा में मर-मर। फिर भी क्या कुटुम्ब पलता है? रहते स्वच्छ सुधर सब परिजन? खना पा रहा हैं वह पक्का घर? मन में सुख हैं? ज गुटता है धन? खिसक गई कन्धों से कथड़ी ठिठुर रहा। अब सर्दी से तन, सोच रहा बस्ती का बनिया घोर विवशता का निज कारण|
इस पद्यांश में बस्ती के बनिए की समानता किससे स्थापित की गई है?
(a ) कथडी रो
(b ) धन से
(c ) कौडी से
(d ) जड़

Q3.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
 दैन्य दुःख अपमान ग्लानि चिर श्रुसित पिपासा, मृत अभिलाषा बिना आय की कलांति बन रही उसके जीवन की परिभाषा जङ्ग अनाज के ढेर सदृश ही वह दिन-भर बैठा गद्दी पर बात बात पर झुल बोलता कड़िी-की स्पर्धा में मर-मर। फिर भी क्या कुटुम्ब पलता है? रहते स्वच्छ सुधर सब परिजन? खना पा रहा हैं वह पक्का घर? मन में सुख हैं? ज गुटता है धन? खिसक गई कन्धों से कथड़ी ठिठुर रहा। अब सर्दी से तन, सोच रहा बस्ती का बनिया घोर विवशता का निज कारण|
अनाज के ढेर से मृत का विलोम है
(a ) स्वस्थ
(b ) सन्तोष
(c ) जीवन
(d ) जीवित

Q4.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
 दैन्य दुःख अपमान ग्लानि चिर श्रुसित पिपासा, मृत अभिलाषा बिना आय की कलांति बन रही उसके जीवन की परिभाषा जङ्ग अनाज के ढेर सदृश ही वह दिन-भर बैठा गद्दी पर बात बात पर झुल बोलता कड़िी-की स्पर्धा में मर-मर। फिर भी क्या कुटुम्ब पलता है? रहते स्वच्छ सुधर सब परिजन? खना पा रहा हैं वह पक्का घर? मन में सुख हैं? ज गुटता है धन? खिसक गई कन्धों से कथड़ी ठिठुर रहा। अब सर्दी से तन, सोच रहा बस्ती का बनिया घोर विवशता का निज कारण|
इनमें से कौन-सा शब्द अभिलाषाका पर्याय नहीं है?
(a ) मनोरथ
(b ) आकांक्षा
(c ) लालसा
(d ) दंभ

Q5.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
 दैन्य दुःख अपमान ग्लानि चिर श्रुसित पिपासा, मृत अभिलाषा बिना आय की कलांति बन रही उसके जीवन की परिभाषा जङ्ग अनाज के ढेर सदृश ही वह दिन-भर बैठा गद्दी पर बात बात पर झुल बोलता कड़िी-की स्पर्धा में मर-मर। फिर भी क्या कुटुम्ब पलता है? रहते स्वच्छ सुधर सब परिजन? खना पा रहा हैं वह पक्का घर? मन में सुख हैं? ज गुटता है धन? खिसक गई कन्धों से कथड़ी ठिठुर रहा। अब सर्दी से तन, सोच रहा बस्ती का बनिया घोर विवशता का निज कारण|
जड़ का विलोम होता है
(a ) पेड़
(b ) चेतन
(c ) खुशी
(d ) स्वच्छ

Q6.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
 दैन्य दुःख अपमान ग्लानि चिर श्रुसित पिपासा, मृत अभिलाषा बिना आय की कलांति बन रही उसके जीवन की परिभाषा जङ्ग अनाज के ढेर सदृश ही वह दिन-भर बैठा गद्दी पर बात बात पर झुल बोलता कड़िी-की स्पर्धा में मर-मर। फिर भी क्या कुटुम्ब पलता है? रहते स्वच्छ सुधर सब परिजन? खना पा रहा हैं वह पक्का घर? मन में सुख हैं? ज गुटता है धन? खिसक गई कन्धों से कथड़ी ठिठुर रहा। अब सर्दी से तन, सोच रहा बस्ती का बनिया घोर विवशता का निज कारण|
अपमान में उपसर्ग है
(a ) मान
(b ) सम्मान
(c )
(d ) अप

Q7.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
अनुशासन में उपसर्ग है
(a ) शासन
(b ) सन
(c ) अन्
(d ) अनु

Q8.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
महेन्द्र कपूर की छवि किस प्रकार की हैं?

(a ) सहज व्यक्त
(b ) शालीन व्यक्ति
(c ) अनुशासित व्यक्ति
(d ) ये सभी

Q9.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
वे गीत जिनका देश से वास्ता होता है, कहलाते हैं

(a ) राष्ट्रीय गीत
(b ) कोमल स्वर
(c ) देशभक्ति गीत
(d ) इनमें से कोई नहीं

Q10.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
शब्ददेशभक्तिमें प्रयुक्त सभास है

(a ) अव्ययीभाव
(b ) कर्मधारय
(c ) द्वंद्व
(d ) तत्पुरूषं

Q11.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए

(a ) गायक
(b ) महेन्द्र कपूर
(c ) यशस्वी गायक
(d ) देशभक्त गायक

Q12.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
मद्धिम स्वरका तात्पर्य है

(a ) धीमे स्वर
(b ) गम्भीर स्वर
(c ) ढीले स्वर
(d ) कोमल स्वर

Q13.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
शख्सियतका तात्पर्य है

(a ) आदमीयत
(b ) इन्सानियत
(c ) व्यक्तित्व
(d ) मानवीयता

Q14.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
महेन्द्र कपूर ने किस तरह के गाने गाए हैं?

(a ) परम्परागत
(b ) संस्कारों से युक्त
(c ) रूमानी
(d ) देशभक्ति से ओतप्रोत

Q15.
निमंलिखित पदांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दी गए पर्सनो के उत्तर दीजिये
देशभवित के गीतों की परम्परा में महेन्द्र कपूर का नाम महत्वपूर्ण है। जब भी हम महेन्द्र कपूर का जिक्र करते हैं तो हमारे मन में उनकी छवि देशराग के एक अहम् गायक के रूप में कौंधती हैं। यह सच हैं कि देशभक्ति और परम्परागत मूल्यों के जितने लोकप्रेिय अनूठे गाने महेन्द्र कपूर ने गाए हैं उतनी संख्या में उतने श्रेष्ठ गाने दूसरे गायक ने नहीं गाए होंगे। महेन्द्र कपूर के नाम का स्मरण करते ही हमारे जेहन में एक ऐसे गायक की छवि कौंध जाती है जो मद्धिम स्वरों में भी उतनी ही खूबसूरती से गाता है जितना की ऊँचे सुरो में। एक ऐसा गायक जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक साथ तमाम वे गीत आने-जाने लगते हैं जिनका देश से वास्ता होता हैं, जिनका मान-मर्यादा से वास्ता होता है, जिनका संस्कारों से वास्ता होता है। महेन्द्र कपूर न सिर्फ गायक बल्कि Uक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी छवि बेहद सहज और शालीन इन्सान की है। वे बेहद अनुशासन के साथ अपने सुरों को साधते हैं। सचमुच वे दिलों को जीत लेते हैं, जब वे गर्व से कहते हैं-जीते हैं तुमने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता हैं।
जिक्रका प्रर्याय होगा।

(a ) वर्णन
(b ) विवरण
(c ) चर्चा
(d ) अवसर
 
1. (d ) 2. (a ) 3. (d ) 4. (d ) 5. (b ) 6. (b ) 7. (d ) 8. (d ) 9. (c ) 10. (d ) 11. (d ) 12. (d ) 13. (c ) 14. (d ) 15. (c )

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