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CTET hindi level 1 hindi quiz

Q1. निम्नलिखित में से किसकी चर्चा देश-प्रेम के एक रूप के तौर पर नहीं की गई है?
(a ) अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए ईमानदार एवं देशभक्त जनप्रतिनिधि का चयन करना
(b ) देश को जाति, सम्प्रदाय तथा प्रान्तीयता की राजनीति से मुक्त करना
(c ) अपने हित को सर्वोपरि समझना
(d ) अशिक्षा, निर्धनता, बेरोजगारी, व्यभिचार एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ना

Q2.
राष्ट्रीय एकता में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
(a ) देशप्रेम
(b ) नागरिकों में देश-प्रेम का अभाव
(c ) अन्धविश्वास एवं छूआछूत
(d ) जाति-प्रथा एवं दहेज-प्रथा

Q3.
राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता क्यों है?
(a ) केवल स्वतन्त्रता की रक्षा के लिए
(b ) जाति-प्रथा एवं दहेज-प्रथा की समाप्ति के लिए
(c ) अन्धविश्वास एवं छूआछूत की समाप्ति के लिए
(d ) स्वतन्त्रता की रक्षा एवं राष्ट्र की उन्नति के लिए

Q4.
प्रस्तुत गद्यांश में किस पेशेवर की चर्चा नहीं की गई है?
(a ) चिकित्सक
(b ) शिक्षक
(c ) समाज सेवक
(d ) किसान

Q5.
प्रस्तुत गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक निम्नलिखित में से कौन-सा होगा?
(a ) देश-प्रेम
(b ) देश का विकास
(c ) हमारा कर्त्तव्य
(d ) रास्ट्रीय एकता

Q6.
इत्यादि का सन्धि-विच्छेद है
(a ) इति + आदि
(b ) इत्या + आदि
(c ) इति + अदि
(d ) इति + आदि

Q7.
प्रगति के पथ पर अग्रसर रहता है
(a ) सुगठित राष्ट्र
(b ) संगठित राष्ट्र
(c ) सुव्यवस्थित राष्ट्र
(d ) अव्यवस्थित राष्ट्र

Q8.
सर्वोपरि है
(a ) देश
(b ) राज्य
(c ) परिवार
(d ) व्यक्तिगत जीवन

Q9.
अग्रसर का तात्पर्य है
(a ) आगे की ओर बढ़ना
(b ) आगे नहीं बढ़ना
(c ) आगे होना
(d ) आज्ञाकारी होना

Q10.
निम्नलिखित गदांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और पर्सनो के उत्तर दे :
पुरुषार्थ दार्शनिक विषय है, पर दर्शन का जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। वह थोड़े-से विद्यार्थियों का पाठ्य विषय मात्र नहीं है। प्रत्येक समाज को एक दार्शनिक मत स्वीकार करना होता है। उसी के आधार पर उसकी राजनीतिक, सामाजिक और कौटुम्बिक व्यवस्था का व्यूह खड़ा होता हैं। जो समाज अपने वैयक्तिक और सामूहिक जीवन को केवल प्रतीयमान उपयोगिता के आधार पर चलाना चाहेगा उसको बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। एक विभाग के आदर्श दूसरे विभाग के आदर्श से टकराएँगे। जो बात एक क्षेत्र में ठीक ऊँचेगी वही दूसरे क्षेत्र में अनुचित कहलाएगी और मनुष्य के लिए अपना कर्तव्य स्थिर करना कठिन हो जाएगा। इसका परिणाम आज दिख रहा हैं। चोरी करना बुरा है, पर पराट देश का शोषण करना बुरा नहीं है। झूठ बोलना बुरा है, पर राजनीतिक क्षेत्र में सच बोलने पर अड़े रहना मूर्खता है। घर वालों के साथ, देशवासियों के साथ और परदेशियों के साथ बर्ताव करने के लिए अलग-अलग आचारावलियाँ बन गई हैं। इससे विवेकशील मनुष्य को कष्ट होता हैं।
सामाजिक व्यवस्था को चलाने के लिए आवश्यकता होती है
(a ) आचार संहिता बनाने की
(b ) विशेष दर्शन बनाने की
(c ) विरोधाभासों को दूर करने की
(d ) एक सफल रणनीति बनाने की

Q11.
निम्नलिखित गदांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और पर्सनो के उत्तर दे :
पुरुषार्थ दार्शनिक विषय है, पर दर्शन का जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। वह थोड़े-से विद्यार्थियों का पाठ्य विषय मात्र नहीं है। प्रत्येक समाज को एक दार्शनिक मत स्वीकार करना होता है। उसी के आधार पर उसकी राजनीतिक, सामाजिक और कौटुम्बिक व्यवस्था का व्यूह खड़ा होता हैं। जो समाज अपने वैयक्तिक और सामूहिक जीवन को केवल प्रतीयमान उपयोगिता के आधार पर चलाना चाहेगा उसको बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। एक विभाग के आदर्श दूसरे विभाग के आदर्श से टकराएँगे। जो बात एक क्षेत्र में ठीक ऊँचेगी वही दूसरे क्षेत्र में अनुचित कहलाएगी और मनुष्य के लिए अपना कर्तव्य स्थिर करना कठिन हो जाएगा। इसका परिणाम आज दिख रहा हैं। चोरी करना बुरा है, पर पराट देश का शोषण करना बुरा नहीं है। झूठ बोलना बुरा है, पर राजनीतिक क्षेत्र में सच बोलने पर अड़े रहना मूर्खता है। घर वालों के साथ, देशवासियों के साथ और परदेशियों के साथ बर्ताव करने के लिए अलग-अलग आचारावलियाँ बन गई हैं। इससे विवेकशील मनुष्य को कष्ट होता हैं।
समाज के लिए दर्शन महत्वपूर्ण है, क्योंकि

(a ) इससे समाज की व्यवस्था संचालित होती है
(b ) इससे सामाजिक जीवन की उपयोगिता में वृद्धि होती है
(c ) यह समाज को सही दृष्टि प्रदान करता है
(d ) इससे राजनीति की रणनीति निर्धारित होती है

Q12.
निम्नलिखित गदांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और पर्सनो के उत्तर दे :
पुरुषार्थ दार्शनिक विषय है, पर दर्शन का जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। वह थोड़े-से विद्यार्थियों का पाठ्य विषय मात्र नहीं है। प्रत्येक समाज को एक दार्शनिक मत स्वीकार करना होता है। उसी के आधार पर उसकी राजनीतिक, सामाजिक और कौटुम्बिक व्यवस्था का व्यूह खड़ा होता हैं। जो समाज अपने वैयक्तिक और सामूहिक जीवन को केवल प्रतीयमान उपयोगिता के आधार पर चलाना चाहेगा उसको बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। एक विभाग के आदर्श दूसरे विभाग के आदर्श से टकराएँगे। जो बात एक क्षेत्र में ठीक ऊँचेगी वही दूसरे क्षेत्र में अनुचित कहलाएगी और मनुष्य के लिए अपना कर्तव्य स्थिर करना कठिन हो जाएगा। इसका परिणाम आज दिख रहा हैं। चोरी करना बुरा है, पर पराट देश का शोषण करना बुरा नहीं है। झूठ बोलना बुरा है, पर राजनीतिक क्षेत्र में सच बोलने पर अड़े रहना मूर्खता है। घर वालों के साथ, देशवासियों के साथ और परदेशियों के साथ बर्ताव करने के लिए अलग-अलग आचारावलियाँ बन गई हैं। इससे विवेकशील मनुष्य को कष्ट होता हैं।
समाज में जीवन प्रतीयमान उपयोगिता के आधार पर नहीं चल सकता, क्योंकि

(a ) सभी व्यक्तियों का जीवन-दर्शन भिन्न होता है
(b ) आचार संहिताएँ सभी के लिए अलग-अलग हैं
(c ) एक ही बात भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में उचित या अनुचित हो सकती है
(d ) सभी मनुष्य विवेकशील नहीं होते

Q13.
निम्नलिखित गदांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और पर्सनो के उत्तर दे :
पुरुषार्थ दार्शनिक विषय है, पर दर्शन का जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। वह थोड़े-से विद्यार्थियों का पाठ्य विषय मात्र नहीं है। प्रत्येक समाज को एक दार्शनिक मत स्वीकार करना होता है। उसी के आधार पर उसकी राजनीतिक, सामाजिक और कौटुम्बिक व्यवस्था का व्यूह खड़ा होता हैं। जो समाज अपने वैयक्तिक और सामूहिक जीवन को केवल प्रतीयमान उपयोगिता के आधार पर चलाना चाहेगा उसको बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। एक विभाग के आदर्श दूसरे विभाग के आदर्श से टकराएँगे। जो बात एक क्षेत्र में ठीक ऊँचेगी वही दूसरे क्षेत्र में अनुचित कहलाएगी और मनुष्य के लिए अपना कर्तव्य स्थिर करना कठिन हो जाएगा। इसका परिणाम आज दिख रहा हैं। चोरी करना बुरा है, पर पराट देश का शोषण करना बुरा नहीं है। झूठ बोलना बुरा है, पर राजनीतिक क्षेत्र में सच बोलने पर अड़े रहना मूर्खता है। घर वालों के साथ, देशवासियों के साथ और परदेशियों के साथ बर्ताव करने के लिए अलग-अलग आचारावलियाँ बन गई हैं। इससे विवेकशील मनुष्य को कष्ट होता हैं।
विवेकशील मनुष्य को कष्ट पहुँचाने वाले विरोधाभास हैं

(a ) सभी व्यक्तियों पर एक ही दर्शन थोपने का प्रयास
(b ) परिवार, देश और विदेशी लोगों के लिए पृथक आचार संहिता
(c ) समाज विशेष के लिए नैतिक मूल्य और नियमों का निर्धारण
(d ) दर्शन के अनुसार राजनीतिक, सामाजिक तथा पारिवारिक-व्यवस्था का निर्धारण

Q14.
निम्नलिखित गदांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और पर्सनो के उत्तर दे :
पुरुषार्थ दार्शनिक विषय है, पर दर्शन का जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। वह थोड़े-से विद्यार्थियों का पाठ्य विषय मात्र नहीं है। प्रत्येक समाज को एक दार्शनिक मत स्वीकार करना होता है। उसी के आधार पर उसकी राजनीतिक, सामाजिक और कौटुम्बिक व्यवस्था का व्यूह खड़ा होता हैं। जो समाज अपने वैयक्तिक और सामूहिक जीवन को केवल प्रतीयमान उपयोगिता के आधार पर चलाना चाहेगा उसको बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। एक विभाग के आदर्श दूसरे विभाग के आदर्श से टकराएँगे। जो बात एक क्षेत्र में ठीक ऊँचेगी वही दूसरे क्षेत्र में अनुचित कहलाएगी और मनुष्य के लिए अपना कर्तव्य स्थिर करना कठिन हो जाएगा। इसका परिणाम आज दिख रहा हैं। चोरी करना बुरा है, पर पराट देश का शोषण करना बुरा नहीं है। झूठ बोलना बुरा है, पर राजनीतिक क्षेत्र में सच बोलने पर अड़े रहना मूर्खता है। घर वालों के साथ, देशवासियों के साथ और परदेशियों के साथ बर्ताव करने के लिए अलग-अलग आचारावलियाँ बन गई हैं। इससे विवेकशील मनुष्य को कष्ट होता हैं।
प्रस्तुत गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक क्या हो सकता है?

(a ) समाज औद दर्शन
(b ) दर्शन और सामाजिक आचरण
(c ) दर्शन और सामाजिक व्यवस्था
(d ) समाज में दर्शन का महत्व

Q15.
निम्नलिखित गदांश को ध्यानपूर्वक पढ़े और पर्सनो के उत्तर दे :
पुरुषार्थ दार्शनिक विषय है, पर दर्शन का जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। वह थोड़े-से विद्यार्थियों का पाठ्य विषय मात्र नहीं है। प्रत्येक समाज को एक दार्शनिक मत स्वीकार करना होता है। उसी के आधार पर उसकी राजनीतिक, सामाजिक और कौटुम्बिक व्यवस्था का व्यूह खड़ा होता हैं। जो समाज अपने वैयक्तिक और सामूहिक जीवन को केवल प्रतीयमान उपयोगिता के आधार पर चलाना चाहेगा उसको बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। एक विभाग के आदर्श दूसरे विभाग के आदर्श से टकराएँगे। जो बात एक क्षेत्र में ठीक ऊँचेगी वही दूसरे क्षेत्र में अनुचित कहलाएगी और मनुष्य के लिए अपना कर्तव्य स्थिर करना कठिन हो जाएगा। इसका परिणाम आज दिख रहा हैं। चोरी करना बुरा है, पर पराट देश का शोषण करना बुरा नहीं है। झूठ बोलना बुरा है, पर राजनीतिक क्षेत्र में सच बोलने पर अड़े रहना मूर्खता है। घर वालों के साथ, देशवासियों के साथ और परदेशियों के साथ बर्ताव करने के लिए अलग-अलग आचारावलियाँ बन गई हैं। इससे विवेकशील मनुष्य को कष्ट होता हैं।
अनुचितमें कौन-सा उपसर्ग है?

(a ) अनु
(b ) अन

(c ) अनुच
(d ) किसान
 
1. (c ) 2. (b ) 3. (d ) 4. (c ) 5. (a ) 6. (a ) 7. (d ) 8. (a ) 9. (a ) 10. (b ) 11. (a ) 12. (c ) 13. (b ) 14. (c ) 15. (b )

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