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CTET hindi level 1 hindi questions

Q1. निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं होने के कारण के रूप में निम्नलिखित में से किसकी चर्चा नहीं की गई है?
(a ) प्रशासनिक खामियाँ
(b ) ग्रामीणों का अशिक्षित होना
(c ) योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया
(d ) योजनाओं का ग्रामीणों के अनुकूल नहीं होना

Q2.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
योजनाओं का पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को क्यों नहीं मिल पाता?
(a ) ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होने के कारण
(b ) आर्थिक अभाव के कारण
(c ) गरीबी के कारण
(d ) पारम्परिक कुरीतियों के कारण

Q3.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
किस कारण व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता है?
(a ) बेरोजगारी के कारण
(b ) गरीबी के कारण
(c ) पारम्परिक कुरीतियों के कारण
(d ) सरकारी योजनाओं के कारण

Q4.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से लेखक क्या बताना चाहता है?
(a ) ग्रामीण क्षेत्र के बारे में
(b ) रोजगारोन्मुख योजनाओं के बारे में
(c ) बेरोजगारी एवं इसके कुप्रभाव के बारे में
(d ) स्वरोजगार के बारे में

Q5.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
प्रस्तुत गद्यांश में किसके महत्व पर जोर दिया गया है?
(a ) बेरोजगारी
(b ) रोजगारोन्मुख योजनाओं
(c ) निजी उद्यम एवं स्वरोजगार
(d ) आर्थिक सम्पन्नता

Q6.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
रोजगारोन्मुखीका सन्धि-विच्छेद है
(a ) रोजगार + मुखी
(b ) रोजगार + उन्मुखी
(c ) रोजगार + ओन्मुखी
(d ) रोजगारोत् + मुखी

Q7.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a ) लोगों को सामान्य शिक्षा देकर उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने को बाध्य किया जाना चाहिए
(b ) लोगों को व्यावसायिक शिक्षा देकर उन्हें अपना व्यवसाय करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है
(c ) सरकारी योजनाओं का पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को मिलता है
(d ) सभी सरकारी योजनाएँ कागज तक ही सीमित रह जाती हैं

Q8.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
बेरोजगारी और अपराध के सम्बन्ध के बारे में लेखक क्या कहना चाहता है?
(a ) बेरोजगारी के कारण ही समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती है
(b ) बेरोजगारी यदि नहीं हो तो समाज में अपराध एवं हिंसा कम हो जाएगा
(c ) समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि का एक कारण बेरोजगारी भी है
(d ) उपरोक्त सभी

Q9.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
ग्रामीण क्षेत्र के लिए अनेक रोजगारोन्मुख योजनाएँ चलाए जाने के बावजूद बेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति के कई कारण हैं। कभी-कभी योजनाओं को तैयार करने की दोषपूर्ण प्रक्रिया के कारण इनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता या ग्रामीणों के अनुकूल नहीं हो पाने के कारण भी कई बार ये योजनाएँ कारगर साबित नहीं हो पातीं। प्रशासनिक खामियों के कारण भी योजनाएँ या तो ठीक ढंग से क्रियान्वित नहीं होती या ये इतने देर से प्रारम्भ होती हैं कि इनका पूरा-पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। इसके अतिरिक्त भ्रष्ट शासन तन्त्र के कारण जनता तक पहुँचने के पहले ही योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से दो-तिहाई तक बिचौलिए खा जाते हैं। फलतः योजनाएँ या तो कागज़ तक सीमित रह जाती हैं या फिर वे पूर्णतः निरर्थक साबित होती हैं। बेरोजगारी एक अभिशाप है, इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि बाधित होती हैं। समाज में अपराध एवं हिंसा में वृद्धि होती हैं। और सबसे बुरी बात तो यह हैं कि बेरोजगार व्यक्ति को अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत रहते हुए अपने घर ही नहीं बाहर के लोगों द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ता सम्भव है जब व्यावहारिक एवं व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात् निजी उद्यम एवं व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया जाए।
क्रियान्वयनका विशेषण है
(a ) क्रियान्वित
(b ) क्रियाशील
(c ) कार्मिक
(d ) कर्मशील

Q10.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
सत् और चरित्र इन दो शब्दों के मेल से सच्चरित्र शब्द बना है तथा इस शब्द में ता प्रत्यय लगने से सच्चरित्रता शब्द की उत्पति हुई हैं। सत् का अर्थ होता सदाचार इत्यादि। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः परस्पर सहोपकारिता द्वारा ही उसका जीवन-यापन सम्भव है। इसके लिए व्यक्ति में ऐसे गुणों का होना आवश्यक हैं जिनके द्वारा वह समाज में शान्तिपूर्वक रहते हुए देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। काम, क्रोध, लोभ, मोह, सन्ताप, निर्दयता एवं ईष्य जैसे अवगुण मनुष्य के सामाजिक जीवन में अशान्ति उत्पन्न करते हैं। अतः ऐसे अवगुणों से युक्त व्यक्ति को दुराचारी की संज्ञा दी विनम्रता, सहिष्णुता, सत्यभाषण एवं उद्यमशीलता सच्चरित्रता की अन्य विशेषताएँ हैं। किसी व्यक्ति का सच्चरित्र होना इस बात पर निर्भर नहीं करता हैं कि वह कितना पढ़ा-लिखा है। एक अनपढ़ व्यक्ति भी अपने मर्यादित एवं संयमपूर्ण जीवन से सच्चरित्र की संज्ञा पा सकता है जबकि एक उच्च शिक्षित व्यक्ति भी यदि भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो उसे दुश्चरित्र ही कहा जाएगा। प्रायः देखने में आता हैं कि कुछ लोग गरीबों का शोषण ही नहीं करते बल्कि अपने धन, शक्ति या प्रभाव के अभिमान में चूर होकर उन पर कई प्रकार के जुल्म भी करने से नहीं चूकते। ऐसे लोग ही दुराचारी या दुश्चरित्र की श्रेणी में आते हैं।
परस्पर सहोपकारिता द्वारा ही मनुष्य का जीवन-यापन क्यों सम्भव है?
(a ) क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है
(b ) क्योंकि इससे लोगों का कल्याण होता है
(c ) क्योंकि इससे सच्चरित्रता में वृद्धि होती है
(d ) क्योंकि इससे परस्पर प्रेम बढ़ता है

Q11.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
सत् और चरित्र इन दो शब्दों के मेल से सच्चरित्र शब्द बना है तथा इस शब्द में ता प्रत्यय लगने से सच्चरित्रता शब्द की उत्पति हुई हैं। सत् का अर्थ होता सदाचार इत्यादि। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः परस्पर सहोपकारिता द्वारा ही उसका जीवन-यापन सम्भव है। इसके लिए व्यक्ति में ऐसे गुणों का होना आवश्यक हैं जिनके द्वारा वह समाज में शान्तिपूर्वक रहते हुए देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। काम, क्रोध, लोभ, मोह, सन्ताप, निर्दयता एवं ईष्य जैसे अवगुण मनुष्य के सामाजिक जीवन में अशान्ति उत्पन्न करते हैं। अतः ऐसे अवगुणों से युक्त व्यक्ति को दुराचारी की संज्ञा दी विनम्रता, सहिष्णुता, सत्यभाषण एवं उद्यमशीलता सच्चरित्रता की अन्य विशेषताएँ हैं। किसी व्यक्ति का सच्चरित्र होना इस बात पर निर्भर नहीं करता हैं कि वह कितना पढ़ा-लिखा है। एक अनपढ़ व्यक्ति भी अपने मर्यादित एवं संयमपूर्ण जीवन से सच्चरित्र की संज्ञा पा सकता है जबकि एक उच्च शिक्षित व्यक्ति भी यदि भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो उसे दुश्चरित्र ही कहा जाएगा। प्रायः देखने में आता हैं कि कुछ लोग गरीबों का शोषण ही नहीं करते बल्कि अपने धन, शक्ति या प्रभाव के अभिमान में चूर होकर उन पर कई प्रकार के जुल्म भी करने से नहीं चूकते। ऐसे लोग ही दुराचारी या दुश्चरित्र की श्रेणी में आते हैं।
सच्चरित्रता की विशेषताओं के रूप में निम्नलिखित में से किसकी चर्चा नहीं की गई है?
(a ) विनम्रता
(b ) सहोपकारिता
(c ) आत्मबलिदान
(d ) लगनशीलता

Q12.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
सत् और चरित्र इन दो शब्दों के मेल से सच्चरित्र शब्द बना है तथा इस शब्द में ता प्रत्यय लगने से सच्चरित्रता शब्द की उत्पति हुई हैं। सत् का अर्थ होता सदाचार इत्यादि। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः परस्पर सहोपकारिता द्वारा ही उसका जीवन-यापन सम्भव है। इसके लिए व्यक्ति में ऐसे गुणों का होना आवश्यक हैं जिनके द्वारा वह समाज में शान्तिपूर्वक रहते हुए देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। काम, क्रोध, लोभ, मोह, सन्ताप, निर्दयता एवं ईष्य जैसे अवगुण मनुष्य के सामाजिक जीवन में अशान्ति उत्पन्न करते हैं। अतः ऐसे अवगुणों से युक्त व्यक्ति को दुराचारी की संज्ञा दी विनम्रता, सहिष्णुता, सत्यभाषण एवं उद्यमशीलता सच्चरित्रता की अन्य विशेषताएँ हैं। किसी व्यक्ति का सच्चरित्र होना इस बात पर निर्भर नहीं करता हैं कि वह कितना पढ़ा-लिखा है। एक अनपढ़ व्यक्ति भी अपने मर्यादित एवं संयमपूर्ण जीवन से सच्चरित्र की संज्ञा पा सकता है जबकि एक उच्च शिक्षित व्यक्ति भी यदि भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो उसे दुश्चरित्र ही कहा जाएगा। प्रायः देखने में आता हैं कि कुछ लोग गरीबों का शोषण ही नहीं करते बल्कि अपने धन, शक्ति या प्रभाव के अभिमान में चूर होकर उन पर कई प्रकार के जुल्म भी करने से नहीं चूकते। ऐसे लोग ही दुराचारी या दुश्चरित्र की श्रेणी में आते हैं।
प्रस्तुत गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक निम्नलिखित में से कौन-सा होगा?
(a ) उद्यमशीलता
(b ) सच्चरित्रता
(c ) सहिष्णुता।
(d ) त्याग

Q13.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
सत् और चरित्र इन दो शब्दों के मेल से सच्चरित्र शब्द बना है तथा इस शब्द में ता प्रत्यय लगने से सच्चरित्रता शब्द की उत्पति हुई हैं। सत् का अर्थ होता सदाचार इत्यादि। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः परस्पर सहोपकारिता द्वारा ही उसका जीवन-यापन सम्भव है। इसके लिए व्यक्ति में ऐसे गुणों का होना आवश्यक हैं जिनके द्वारा वह समाज में शान्तिपूर्वक रहते हुए देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। काम, क्रोध, लोभ, मोह, सन्ताप, निर्दयता एवं ईष्य जैसे अवगुण मनुष्य के सामाजिक जीवन में अशान्ति उत्पन्न करते हैं। अतः ऐसे अवगुणों से युक्त व्यक्ति को दुराचारी की संज्ञा दी विनम्रता, सहिष्णुता, सत्यभाषण एवं उद्यमशीलता सच्चरित्रता की अन्य विशेषताएँ हैं। किसी व्यक्ति का सच्चरित्र होना इस बात पर निर्भर नहीं करता हैं कि वह कितना पढ़ा-लिखा है। एक अनपढ़ व्यक्ति भी अपने मर्यादित एवं संयमपूर्ण जीवन से सच्चरित्र की संज्ञा पा सकता है जबकि एक उच्च शिक्षित व्यक्ति भी यदि भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो उसे दुश्चरित्र ही कहा जाएगा। प्रायः देखने में आता हैं कि कुछ लोग गरीबों का शोषण ही नहीं करते बल्कि अपने धन, शक्ति या प्रभाव के अभिमान में चूर होकर उन पर कई प्रकार के जुल्म भी करने से नहीं चूकते। ऐसे लोग ही दुराचारी या दुश्चरित्र की श्रेणी में आते हैं।
मनुष्य के सामाजिक जीवन में अशान्ति उत्पन्न करने वाले अवगुणों के रूप में निम्नलिखित में से किसकी चर्चा प्रस्तुत गद्यांश में नहीं की गई है?
(a ) क्रोध
(b ) निर्दयता
(c ) सन्ताप
(d ) मिथ्याभाषण

Q14.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
सत् और चरित्र इन दो शब्दों के मेल से सच्चरित्र शब्द बना है तथा इस शब्द में ता प्रत्यय लगने से सच्चरित्रता शब्द की उत्पति हुई हैं। सत् का अर्थ होता सदाचार इत्यादि। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः परस्पर सहोपकारिता द्वारा ही उसका जीवन-यापन सम्भव है। इसके लिए व्यक्ति में ऐसे गुणों का होना आवश्यक हैं जिनके द्वारा वह समाज में शान्तिपूर्वक रहते हुए देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। काम, क्रोध, लोभ, मोह, सन्ताप, निर्दयता एवं ईष्य जैसे अवगुण मनुष्य के सामाजिक जीवन में अशान्ति उत्पन्न करते हैं। अतः ऐसे अवगुणों से युक्त व्यक्ति को दुराचारी की संज्ञा दी विनम्रता, सहिष्णुता, सत्यभाषण एवं उद्यमशीलता सच्चरित्रता की अन्य विशेषताएँ हैं। किसी व्यक्ति का सच्चरित्र होना इस बात पर निर्भर नहीं करता हैं कि वह कितना पढ़ा-लिखा है। एक अनपढ़ व्यक्ति भी अपने मर्यादित एवं संयमपूर्ण जीवन से सच्चरित्र की संज्ञा पा सकता है जबकि एक उच्च शिक्षित व्यक्ति भी यदि भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो उसे दुश्चरित्र ही कहा जाएगा। प्रायः देखने में आता हैं कि कुछ लोग गरीबों का शोषण ही नहीं करते बल्कि अपने धन, शक्ति या प्रभाव के अभिमान में चूर होकर उन पर कई प्रकार के जुल्म भी करने से नहीं चूकते। ऐसे लोग ही दुराचारी या दुश्चरित्र की श्रेणी में आते हैं।
निम्नलिखित में से दुश्चरित्र व्यक्ति कौन नहीं हैं?
(a ) गरीबों का शोषण करने वाला
(b ) लोगों पर जुल्म करने वाला
(c ) मर्यादित जीवन जीने वाला
(d ) अभिमान में चूर व्यक्ति

Q15.
निर्देश : निमंलिखित गदांश को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
सत् और चरित्र इन दो शब्दों के मेल से सच्चरित्र शब्द बना है तथा इस शब्द में ता प्रत्यय लगने से सच्चरित्रता शब्द की उत्पति हुई हैं। सत् का अर्थ होता सदाचार इत्यादि। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः परस्पर सहोपकारिता द्वारा ही उसका जीवन-यापन सम्भव है। इसके लिए व्यक्ति में ऐसे गुणों का होना आवश्यक हैं जिनके द्वारा वह समाज में शान्तिपूर्वक रहते हुए देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। काम, क्रोध, लोभ, मोह, सन्ताप, निर्दयता एवं ईष्य जैसे अवगुण मनुष्य के सामाजिक जीवन में अशान्ति उत्पन्न करते हैं। अतः ऐसे अवगुणों से युक्त व्यक्ति को दुराचारी की संज्ञा दी विनम्रता, सहिष्णुता, सत्यभाषण एवं उद्यमशीलता सच्चरित्रता की अन्य विशेषताएँ हैं। किसी व्यक्ति का सच्चरित्र होना इस बात पर निर्भर नहीं करता हैं कि वह कितना पढ़ा-लिखा है। एक अनपढ़ व्यक्ति भी अपने मर्यादित एवं संयमपूर्ण जीवन से सच्चरित्र की संज्ञा पा सकता है जबकि एक उच्च शिक्षित व्यक्ति भी यदि भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो उसे दुश्चरित्र ही कहा जाएगा। प्रायः देखने में आता हैं कि कुछ लोग गरीबों का शोषण ही नहीं करते बल्कि अपने धन, शक्ति या प्रभाव के अभिमान में चूर होकर उन पर कई प्रकार के जुल्म भी करने से नहीं चूकते। ऐसे लोग ही दुराचारी या दुश्चरित्र की श्रेणी में आते हैं।
सच्चरित्रताका सन्धि-विच्छेद है
(a ) सत् + चरित्रतता
(b ) सच + चरित्रतता
(c ) सत्य + चरित्रतता
(d ) सच्च + चरित्रतता
 
1. (b ) 2. (a ) 3. (a ) 4. (c ) 5. (c ) 6. (b ) 7. (b ) 8. (c ) 9. (a ) 10. (a ) 11. (c ) 12. (b ) 13. (d ) 14. (c ) 15. (c )

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