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045 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. किस शब्द का सन्धि-विच्छेद शुद्ध नहीं है?
(1) सदा एव ृ सदैव
(2) मात्रा आनन्द ृ मात्रानन्द
(3) पितृ अनुमति ृ पित्रनुमति
(4) परम औदार्य ृ परमौदार्य
Ans: (2) मातृ + आनन्द मात्रानन्द (ऋ + आ रा) अयादि सन्धि – ए, ऐ, ओ, अथवा औ, के बाद जब कोई स्वर आता है तब ‘ए’ के सथान पर ‘अय्‌’, ओ के स्थान पर ‘अव्‌’ ऐ के स्थान पर ‘आय्‌’ तथा औ के स्थान पर ‘आव्‌’ हो जाता है। तो यह अयादि सन्धि कहलाती है। सदा + एव सदैव (वृद्धिसन्धि) परम + औदार्य परमौदार्य (वृद्धि सन्धि) पितृ + अनुमति पित्रनुमति (दीर्घसन्घि)
Q2. कौन-सा शब्द ‘कामदेव’ का पर्याय नहीं है?
(1) मनसिज
(2) अनंग
(3) कदर्प
(4) अरविन्द
Ans: (4) अरविन्द ‘कामदेव’ का पर्यायवाची नही है। ‘अरविन्द’ कमल का पर्यायवाची है। कमल के अन्य पर्यायवाची – उत्पल, कुवलय, इन्दीवर, पद्‌म, नलिन, सरोद, शतपत्र, सरसिज, शतदल, राजीव, कंज, अम्भोज, पंकज, अंबुल, पायोज, पुण्डरीक, वारिज, सरोरूह, जलज, नीरज, कोकनद। कामदेव के पर्यायवाची – मदन, मनोभव, पंचशर, मार, स्मर, मनसिज, मन्मथ, मीन, केतु, कन्दर्प, अनंग, रतिपति, मनोज, मयन, मकरध्वज, कुसुमशर, केतन, पुष्पधन्वा है।
Q3. ‘ख’ है–
(1) अल्पप्राण व्यंजन
(2) अघोष व्यंजन
(3) घोष व्यंजन
(4) विवृत
Ans: (2) प्रत्येक वर्ग का प्रथम एवं द्वितीय वर्ण (क, ख, च, छ, ट,ठ, त, थ, प, फ) तथा उष्म व्यंजन श, स, ष अघोष व्यंजन कहलाते हैं। घोषवर्ण – प्रत्येक वर्ण का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण, समस्त स्वर तथा य, र, ल, व और ह घोष वर्ण कहलाते हैं। महाप्राण व्यंजन – प्रत्येक वर्ग का द्वितीय व चतुर्थ वर्ण तथा समस्त ऊष्म वर्ण महाप्राण होते है। श, ष, स तथा ह भी ऊष्म वर्ण होते है। अल्पप्राण व्यंजन – प्रत्येक वर्ग का प्रथम, तृतीय तथा चतुर्थ तथा अंतस्थ (य, र, ल, व) भी अल्पप्राण होते है।
Q4. ‘ऋणमुत्त’ समस्त पद का विग्रह है–
(1) ऋण की मुत्ति
(2) ऋण मुत्त
(3) ऋण और मुत्त
(4) ऋण से मुत्त
Ans: (4) ऋणमुत्त ऋण से मुत्त (तत्पुरुषसमास) जिस समास का उत्तर अर्थात, अन्तिम पद प्रधान हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें बाद वाले पद की प्रधानता रहती है। कर्त्ताकारक और सम्बोधन को छोड़कर शेष सभी कारकों में विभत्तियाँ लगाकर इसका समास विग्रह होता है।
5. निम्न में से तत्सम शब्द है–
(1) बहिन
(2) लौंग
(3) पृष्ठ (s) जवान
Ans: (3)
5.‘पृष्ठ’ तत्सम शब्द है इसका तद्‌भव पन्ना होता है। लौंग, बहिन तथा जवान शब्द तद्‌भव है। इनका तत्सम लवंग, भगिनी तथा युवा होगा।
Q6. बहुव्रीहि समास का उदाहरण नहीं है –
(1) बारहसिंगा
(2) पंसेरी
(3) कुसुमायुध
(4) दीर्घ-बाहु
Ans: (1) बहुव्रीहि समास में कोई भी शब्द प्रधान नही होता है, अर्थात दोनो शब्द मिलकर एक नया अर्थ प्रकट करते है। जैसे- दशानन – दश है आनन जिसके अर्थात रावण चक्रधर – चक्र को धारण करने वाले अर्थात विष्णु
Q7. निम्न में से अकर्मक क्रिया बताइए–
(1) लेना
(2) पढ़ना
(3) खाना
(4) रोना
Ans: (4) ‘रोना’ अकर्मक क्रिया है जबकि अन्य सभी सकर्मक क्रिया में हैं। सकर्मक क्रिया – ‘सकर्मक क्रिया’ उसे कहते हैं, जिसका कर्म हो या जिसके साथ कर्म की सम्भावना हो। अकर्मक क्रिया – जिन क्रियाओं का व्यापार और फल कर्त्ता पर ही हो, वे ‘अकर्मक क्रिया’ कहलाती हैं।
Q8. ‘रघुपति’ शब्द किस समास का उदाहरण है?
(1) द्वन्द्व
(2) द्विगु
(3) बहुब्रीहि
(4) कर्मधारय
Ans: (3) ‘रघुपति’ शब्द बहुव्रीहि समास का उदाहरण है। इसका विग्रह है- रघुकुल का पति (राजा) है जो अर्थात राम।
Q9. संस्कृति की दूसरी मंजिल है –
(1) संगीत कला आदि का संरक्षक
(2) चिरन्तन मूल्यों का संरक्षक
(3) परम्परा और रूढ़ि का आश्रय स्थल
(4) उपरोत्त सभी
Ans: (4) चिरन्तन मूल्यों का, परम्परा और रूढ़ि का आश्रय स्थल तथा संगीत कला आदि का संरक्षण संस्कृति की दूसरी मंजिल है।
Q10. निम्न में से कौन-सा ‘वारिद’ का पर्यायवाची शब्द नहीं है?
(1) पयोद
(2) मेघ
(3) घन
(4) अम्बुज
Ans: (4) ‘अम्बुज’ कमल का पर्यायवाची है। कमल के अन्य पर्यायवाची हैं – उत्पल, कुवलय, इन्दीवर, पद्य, नलिन, सरोद, शतपत्र, सरसिज, शतदल, सरसीरूह, राजीव, कंज, अम्बुज, पंकज, पयोज, पुण्डरीक, वारिज, सरोरूह, जलज, नीरज, कोकनद। मेघ, घन, पयोद, अभ्र, जीमूत, नीरद, वारिधर, जलधर, जलद, परजन्य, पयोधर, सारंग आदि वारिद के पर्यायवाची है।
Q11. यण्‌ सन्धि का उदाहरण नहीं है–
(1) स्वच्छ
(2) स्वल्प
(3) स्वागत
(4) स्वांग
Ans: (4) ‘स्वांग’ शब्द यण्‌ सन्धि का उदाहरण नही है। यण सन्धि- ह्रस्व अथवा दीर्घ इ, उ, ऋ, के बाद यदि कोई अवर्ण (इनसे भिन्न) स्वर आता है तो इ अथवा ई के बदले य, उ अथवा ऊ के बदले व, ऋ के बदले र हो जाता है। इसे यण सन्धि कहते हैं।
Q12. किस शब्द में विसर्ग सन्धि नहीं है?
(1) मनोनुकूल
(2) अनुस्वार
(3) मनस्ताप
(4) पयोद
Ans: (2) अनुस्वार शब्द में विसर्ग सन्धि नहीं है। मनस्ताप मनः + ताप (विसर्ग सन्धि) मनोनुकुल मनः + अनुकूल (विसर्ग सन्धि) पयोद पयः + द (विसर्ग सन्धि) ‘अनुस्वार’ में ‘अनु’ उपसर्ग तथा ‘स्वर’ मूल शब्द है। अतः इसी में विसर्ग संधि नहीं है, शेष सभी विसर्ग संधि युत्त शब्द हैं।
Q13. किस शब्द में कोई भी उपसर्ग नहीं है?
(1) अप्रत्याशित
(2) असुरक्षित
(3) स्वागत
(4) स्वार्थ
Ans: (4) ‘स्वार्थ’ शब्द में कोई उपसर्ग नहीं लगा है। असुरक्षित तथा अप्रत्याशित में ‘अ’ उपसर्ग है जबकि स्वागत शब्द में ‘सु’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है।
Q14. ‘अधि’ उपसर्ग से बना शब्द नहीं है
(1) अध्यवसाय
(2) अध्यापन
(3) अधीर
(4) अध्यादेश
Ans: (3) अधीर शब्द में ‘अ’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है – अधीर अ + धीर। जबकि अध्यापन, अध्यवसाय तथा अध्यादेश शब्द में ‘अधि’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है।
Q15. ‘निरपराध’ में प्रयुत्त उपसर्ग है
(1) ने
(2) नि
(3) निर्‌
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (3) ‘निरपराध’ शब्द में निर्‌ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। ‘निर्‌’ का अर्थ बाहर, निषेध, रहित होता है।
निर्देश (प्र. सं. 1620) निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। संस्कृति किसी दो मंजिला मकान की तरह होती है। पहली मंजिल पर एकदम मूलभूत मगर चिरन्तन जीवन-मूल्य होते हैं। इसमें परस्पर सहकार्य, न्याय, सौन्दर्य जैसे मूलभूत तत्व आते हैं। ये मूल्य समय से परे होते हैं। पहली मंजिल पर दूसरी मंजिल का निर्माण किसी समाज की विशिष्ट आवश्यकता के अनुरूप होता है। धार्मिक, ऐतिहासिक परम्परा, आर्थिक लेन-देन, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध और परिस्थितिजन्य अन्य मूल्यों का निर्माण में योगदान होता है। यह व्यवस्था मूलतः संरक्षणात्मक होने के कारण तरह-तरह के प्रतीक, परम्परा, रूढ़ि और अन्धविश्वास का सड़ा-सा पिंजरा बनाती है। इससे पहली मंजिल के मूलभूत मूल्यों की उपेक्षा होने लगती है। समाज को भ्रम होने लगता है कि दूसरी मंजिल की मूल व्यवस्था ही अपनी सच्ची संस्कृति है। भ्रम से कई तरह की विकृति उत्पन्न होती है, जो सामाजिक परिवर्तन से संघर्ष करने लगती है। वस्तुतः आज इन्हीं परिस्थितियों को मात देकर नई संस्कृति का निर्माण करना देश के सामने सबसे बड़ा कार्य है। इसमें शिक्षा पद्धति और प्रसार माध्यम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा से भावी पीढ़ी पर सांस्कृतिक निष्ठा के संस्कार डाले जाते हैं। हमारी शिक्षा इस कसौटी पर खरी नहीं उतरी है। समाज में विषमता की खाई चौड़ी करने में ही इसका योगदान रहा है। यह अमीरों की दोस्त और गरीबों की दुश्मन हो गई है। एकाध ठीक-ठाक पाठशाला में बच्चे को प्रवेश दिलाने में बीस हजार रुपये तक हफ्ता देना पड़ता है।
Q16. परस्पर सहकार्य, न्याय तथा सौन्दर्य को संस्कृति के मूल तत्व क्यों कहा गया है?
(1) इन्हें प्राप्त करने में बहुत कठिनाई होती है
(2) ये समय के साथ बदलते हैं
(3) इनकी जड़ें बहुत गहरी हैं
(4) इसमें समाज की अधिक आस्था होती है
Ans: (4) परस्पर सहकार्य, न्याय तथा सौन्दर्य को संस्कृति के मूल तत्व इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें समाज की अधिक आस्था होती है।
Q17. संस्कृति के मूल तत्वों की उपेक्षा क्यों होने लगती है?
(1) पुरानी रूढ़ियाँ और परम्पराएँ हम पर हावी हो जाती हैं और हम ठीक प्रकार से नहीं सोच पाते
(2) संस्कृति के मूल तत्व इतने दुःसाध्य हैं कि उन्हें हर समय बनाए रखना कठिन है
(3) उसका निर्माण अलग-अलग लोग करते हैं इसलिए कोई अपना उत्तरदायित्व नहीं मानता
(4) संस्कृति अदृश्य है अतः सामान्य जनता उसके महत्व को नहीं जानती
Ans: (1) संस्कृति के मूल तत्वों की उपेक्षा इसलिए होने लगी क्योंकि पुरानी रूढ़ियाँ और परम्पराएँ हम पर हावी हो जाती हैं और हम ठीक प्रकार से नहीं सोच पाते हैं।
Q18. संस्कृति को दो मंजिला मकान की तरह क्यों बताया गया है?
(1) उसके दो अलग-अलग घटक हैं
(2) उसके निर्माण में श्रम और समय दोनों लगते हैं
(3) उसका सम्बन्ध उच्च और निम्न वर्ग दोनों से है
(4) वह किसी भी राष्ट्र की दो स्थितियों को स्पष्ट करती है
Ans: (3) संस्कृति को दो मंजिला मकान की तरह बताया गया है उसका सम्बन्ध उच्च और निम्न दोनों वर्ग से है। संस्कृति किसी दो मंजिला मकान की तरह होती है। इसमें प्रथम मंजिल पर मूलभूत चिरन्तन जीवन-मूल्य होते हैं तथा द्वितीय मंजिल का निर्माण समाज की विशिष्ट आवश्यकता के अनुरूप होता है।
Q19. संस्कृति के पुनर्निमाण में सबसे अधिक सहायक कौन हो सकता है?
(1) संस्कृति का सरलीकरण
(2) लोगों की दृढ़ इच्छाशक्ति
(3) शिक्षा पद्धति में बदलाव
(4) संस्कृति का सामान्य जनों में उचित प्रसार-प्रचार
Ans: (4) संस्कृति के पुनर्निर्माण में सबसे अधिक सहायक संस्कृति का सामान्य जनों में उचित प्रचार-प्रसार हो सकता है। शिक्षा से भावी पीढ़ी में सांस्कृतिक निष्ठा के संस्कार डाले जा सकते हैं।
Q20. शिक्षा पद्धति सफल क्यों नहीं हो रही है?
(1) शिक्षा बहुत महँगी हो गई है
(2) वह अमीरों और गरीबों के बीच खाई चौड़ी कर रही है
(3) वह संस्कृति के प्रति पूज्य भाव के संस्कार नहीं डाल पा रही है।
(4) वह हर बार बदल दी जाती है
Ans: (2) हमारी शिक्षा पद्धति सफल इसलिए नही हो पा रही है क्योंकि वह अमीरो और गरीबों के बीच खाई चौड़ी कर रही है। समाज में हमारी शिक्षा पद्धति ने विषमता की खाई चौड़ी करने में प्रमुख योगदान दिया है।
Q21. स्त्री-पुरुष में प्रयुत्त समास है –
(1) कर्मधारय
(2) अव्ययीभाव
(3) द्वन्द्व
(4) द्विगु
Ans: (3) स्त्री-पुरुष स्त्री और पुरुष (द्वन्द्व समास) जिसके दोनो पद प्रधान हो, दोनो संज्ञाएँ अथवा विशेषण हो, वह द्वन्द्व समास कहलायेगा। इसका विग्रह करने के लिए दो पदों के बीच और अथवा या जैसा योजक अव्यय लिखा जाता है। अव्ययीभाव समास – इस समास में प्रधान पद अव्यय और द्वितीय पद संज्ञा होता है। समस्त पद में अव्यय के अर्थ की ही प्रधानता रहती है। पूरा शब्द क्रिया-विशेषण के अर्थ में व्यवहृत होता है। जैसेयथाशक्ति – शक्ति के अनुसार कर्मधारय समास- कर्मधारय का एक पद विशेषण और दूसरा विशेष्य अथवा संज्ञा होता है। नराधम अधम है नर जो द्विगु समास – जिस समासिक पद का पूर्वपद संख्या बोधक हो वह द्विगु समास कहलाता है। जैसे- त्रिभुवन – तीनों भुवनों का समाहार
Q22. वाक्यांश के लिए कौन-सा शब्द अशुद्ध है?
(1) जिसकी आशा न की गई हो- अप्रत्याशित
(2) क्षण में या शीघ्र टूटने वाला-खण्डहर
(3) जिसे जाना न जा सके- अज्ञेय
(4) दोपहर के पहले का समय- पूर्वाह्न
Ans: (2) वाक्यांश – शब्द क्षण में या शीघ्र टूटने वाला – क्षणभंगुर जिसकी आशा न की गई हो – अप्रत्याशित जिसे जाना न जा सके – अज्ञेय दोपहर के पहले का समय – पूर्वाह्न
Q23. वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध शब्द है –
(1) तदोपरान्त
(2) सदुपदेश
(3) वाल्मीकि
(4) अकिंचन
Ans: (1) ‘तदोपरान्त’ का शुद्ध रूप तदुपरान्त होगा। जबकि अन्य शब्द सदुपदेश, वाल्मीकि तथा अकिंचन शुद्ध रूप में है।
Q24. प्रताप को ‘परताप’ उच्चारण करना, कौन-से प्रकार के अशुद्ध उच्चारण का भेद है?
(1) स्वरालाप
(2) स्वरागम
(3) आकार-इकार भ्रम
(4) आगम
Ans: (1) ‘प्रताप’ को ‘परताप’ उच्चारण करना स्वरालाप अशुद्ध उच्चारण दोष के अंतर्गत आता है।
Q25. भाषा संरचना में अपेक्षित भाषा के प्रमुख अंग होते हैं-
(1) दो
(2) एक
(3) तीन
(4) चार
Ans: (1) भाषा संरचना में अपेक्षित भाषा के दो प्रमुख अंग होते हैं- (i) लिखित (ii) मौखिक
Q26. प्राथमिक स्तर पर भाषा अध्ययन में मुख्य तत्व होगा
(1) शब्द-भण्डार-अभिवृद्धि
(2) व्याकरण का उपयोग
(3) साहित्यिक समझ
(4) उच्चारण की स्पष्टता
Ans: (4) प्राथमिक स्तर पर भाषा अध्ययन में मुख्य तत्व उच्चारण की स्पष्टता होती है।
Q27. जातिवाचक एवं व्यत्तिवाचक संज्ञाओं का कौन-सा युग्म गलत है?
(1) नगर-जयपुर
(2) कुत्ता-पिल्ला
(3) पर्वत-हिमालय
(4) स्त्री-श्वेता
Ans: (2) कुत्ता और पिल्ला दोनों ही जातिवाचक संज्ञा हैं। जबकि नगर-जयपुर, पर्वत-हिमालय तथा स्त्री-श्वेता आदि जातिवाचक एवं व्यत्तिवाचक संज्ञा हैं।
Q28. ‘अवर’ शब्द का विलोम होगा–
(1) अपर
(2) दूसरा
(3) प्रवर
(4) अधम
Ans: (3) ‘अवर’ शब्द का विलोम ‘प्रवर’ होता है। जबकि ‘दूसरा’ का विलोम पहला, अधम का विलोम उत्तम होता है।
Q29. ऊष्म महाप्राण वर्ण है –
(1) च्‌
(2) ख्‌
(3) ट्‌
(4) ष्‌
Ans: (4) ऊष्ण महाप्रण व्यंजन वर्ण श, स, ष, ह आदि है। ख महाप्राण व्यंजन है जबकि च और ट अल्पप्राण व्यंजन है। अल्पप्राणव्यंजन – प्रत्येक वर्ग का प्रथम, तृतीय एवं पंचम वर्ण तथा अंतस्थ (य,र,ल,व) अल्प प्राण व्यंजन है। महाप्राण – प्रत्येक वर्ग का द्वितीय एवं चतुर्थ वर्ण तथा समस्त उष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) महाप्राण होते हैं।
Q30. अन्त और विदेश शब्दों में क्रमशः प्रत्यय का शुद्ध विकल्प है
(1) य और श
(2) त्य और य
(3) य और ईय
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (4) अन्त और विदेश शब्दों में क्रमशः प्रत्यय का शुद्ध विकल्प इनमें से कोई नहीं है।
निर्देश (प्र. सं. 15) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सबसे उचित विकल्प चुनिए।

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