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038 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. हिन्दी भाषा में सतत्‌ और व्यापक आकलन का उद्देश्य यह जानना है कि –
(1) बच्चे किस तरह की त्रुटियाँ करते हैं
(2) बच्चे क्या नहीं जानते
(3) बच्चे कैसे सीखते हैं
(4) बच्चों को अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाए अथवा नहीं
Ans: (3) हिन्दी भाषा में सतत्‌ एवं व्यापक आकलन का उद्देश्य यह जानना है कि बच्चे कैसे सीखते हैं।
Q2. ‘‘बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात योग्यता होती है।’’ यह विचार है –
(1) चॉम्सकी का
(2) पावलॉव का
(3) वाइगोत्स्की का
(4) पाणिनी का
Ans: (1) ‘‘बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात योग्यता होती है’’ यह विचार चॉम्सकी का था। (स्रोत-शिक्षण एवं अधिगम का मनोविज्ञान-आर. के. मिश्र)
Q3. एक भाषा शिक्षक के रूप में आपका क्या दायित्व है?
(1) बच्चों के सीखने के तरीकों के बारे में जानना ताकि उसी के अनुरूप शिक्षण कार्य सम्पादित किया जा सके
(2) बच्चों को भाषा सीखने का समृद्ध वातावरण उपलब्ध कराना
(3) बच्चों द्वारा की जाने वाली त्रुटियों के कारणों की पहचान करते हुए उपयुत्त उपचार करना
(4) उपरोत्त सभी
Ans: (4) एक भाषा शिक्षक के रुप में एक शिक्षक का दायित्व है कि वह बच्चों को भाषा सीखने का समृद्ध वातावरण उपलब्ध कराए तथा उनके सीखने के बारे में जाने ताकि उसी के अनुरूप शिक्षण कार्य सम्पादित किया जा सके एवं उनकी त्रुटियों के कारणों की पहचान करते हुए उसका उपयुत्त उपचार किया जा सके।
Q4. ‘‘बच्चे अपने समाज-सांस्कृतिक परिवेश से अर्थ ग्रहण करते है।’’ यह विचार है –
(1) चॉम्स्की का
(2) पावलॉव का
(3) स्किनर का
(4) वाइगोत्स्की का
Ans: (4) ‘‘बच्चे अपने समाज-सांस्कृतिक परिवेश से अर्थ ग्रहण करते हैं’’ यह विचार वाइगोत्स्की का है।
Q5. प्रिन्ट/मुद्रित अथवा लिखित भाषित परिवेश–
(1) भाषा सीखने में सहायक है
(2) भाषा सीखने में सहायक नहीं है
(3) समय और ऊर्जा की बचत है
(4) बच्चों का मनोरंजन करता है
Ans: (2) प्रिन्ट/मुद्रित अथवा लिखित भाषित परिवेश भाषा सीखनें में सहायक नहीं है।
निर्देश (प्र. सं. 611) नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए। रूढ़ संज्ञा और कथापूर्व विशेषण देकर घटना या संवाद को पहले से तय कर देने वाली कहानियों की ही पूरक वे तमाम रचनाएँ कही जा सकती हैं, जिन्हें ‘कविता’ कहकर हिन्दी पाठ्‌यपुस्तकों में शामिल किया जाता है। हिन्दी विषय के अन्तर्गत पढ़ाई जाने वाली तथाकथित कविताएँ पढ़कर बच्चे को दी गई पंत्तियों का लक्ष्यार्थ पहचानना और लिखना होता है। जिसे मैं लक्ष्यार्थ कह रहा हूँ, वह प्रायः एक घिरते हुए प्रतीकार्थ जैसा दिखता अवश्य है, पर इसे प्रतीकार्थ कहना ठीक नहीं होगा। प्रतीकों में आभा का गुण होता है यानी जिस भाव या अनुभव की क्षणिक रचना वे मन में करते है, उनके इर्द-गिर्द एक आभावृत्त की गुंजाइश रहती है। इस आभावृत्त को हम ऐसा निर्जन क्षेत्र कह सकते हैं, जिसमें हमारी कल्पना कविता की मदद से थोड़ी देर विचर लेती है और ऐसा कुछ देखने में समर्थ हो जाती है जो निर्दिष्ट नहीं था- कवि के द्वारा तो नहीं ही था, हमारे होशियार मन द्वारा भी नहीं। इसी निर्जन क्षेत्र के दरवाजे खोलने की क्षमता के कारण ही कविता की शिक्षा को भाषा-शिक्षण की सामान्य, सीमित परिधि के परे जाने वाली शिक्षा माना जा सकता है। कविता ही भाषा-शिक्षण में यह मुत्तिदायी आयाम जोड़ सकती है। लेकिन यह सम्भावना तथाकथित कविताओं की मदद से नहीं खोली जा सकती जो हिन्दी की पाठ्‌यपुस्तक में अनिवार्य रूप से शामिल रहती है।
Q6. अनुच्छेद में ‘पूरक’ शब्द किसके लिए प्रयुत्त हुआ है?
(1) कहानी
(2) पाठ्‌यपुस्तक
(3) कविता
(4) रचनाएँ
Ans: (3) अनुच्छेद में ‘पूरक’ शब्द कविता के लिए आया है क्योंकि अनुच्छेद में वर्णित है कि पूरक में वे तमाम रचनाएँ कही जा सकती है, जिन्हें कविता कह कर हिन्दी पाठ्‌यपुस्तक में शामिल किया जाता है।
Q7. प्रतीकों में कौन-सा गुण होता है?
(1) लक्ष्यार्थ का
(2) आभा का
(3) भाव से जुड़ी वैविध्यपूर्ण कल्पनाओं का
(4) अनुभव का
Ans: (2) अनुच्छेद के अनुसार प्रतीकों में ‘आभा’ का गुण होगा।
Q8. ‘निर्जन क्षेत्र’ किस अर्थ की ओर संकेत करता है?
(1) खामोश जगह
(2) सुनसान जगह
(3) आभावृत
(4) पहले से तय किसी भाव/अर्थ से मुत्त मन
Ans: (3) ‘निर्जन क्षेत्र’ ‘आभा वृत’ की ओर संकेत करता है, जिस भाव या अनुभव की क्षणिक रचना वे मन में करते हैं, उनके इर्द-गिर्द एक आभावृत्त की गुंजाइश रहती है। इस आभावृत को हम ऐसा निर्जन क्षेत्र कह सकते हैं।
Q9. कविता की शिक्षा को भाषा-शिक्षण की सामान्य परिधि के परे जाने वाली शिक्षा क्यों माना जाता है?
(1) सामान्य भाषा-शिक्षण अनुमान, कल्पना करने का अवसर नहीं देता जबकि कविता में बिना किसी पूर्वधारणा के कल्पना करने के पर्याप्त अवसर होते हैं
(2) कविता मनोरंजन करती है
(3) सामान्य भाषा-शिक्षण में अनेक कमियाँ हैैं, जो कविता शिक्षण में नहीं हैं
(4) सामान्य भाषा-शिक्षण में कहानियाँ होती है जो बच्चों को कल्पना करने का अवसर नहीं देती जबकि कविता कल्पना करने के अवसर देती है
Ans: (1) सामान्य भाषा शिक्षण में अनुमान, कल्पना करने का अवसर नहीं देता, जबकि कविता में बिना किसी पूर्णधारणा के कल्पना करने के अवसर होते हैं इसी लिए कविता की शिक्षा को भाषा-शिक्षण की सामान्य परिधि को परे ले जाने वाली शिक्षा माना जाता है।
Q10. उन तथाकथित कविताओं की मदद………जो………वाक्य में किन कविताओं की ओर संकेत किया गया है?
(1) जो हिन्दी की है
(2) जो अनिवार्य हैं
(3) जो कल्पना द्वारा अप्रत्यक्ष भावों को समझने का अवसर देती हैं
(4) जो मुत्तिदायी हैं
Ans: (3) उन तथाकथित कविताओं की मदद ‘जो कल्पना द्वारा अप्रत्यक्ष भावों को समझने का अवसर देती है’ की तरफ संकेत किया गया है।
Q11. प्रायः ‘लक्ष्यार्थ’ कैसा दिखाता है?
(1) प्रतीकार्य जैसा
(2) मुख्यार्थ से मिलता-जुलता
(3) अभिधार्थ जैसा
(4) उपरोत्त में से कोई नहीं
Ans: (1) प्रायः लक्ष्यार्थ प्रतीकार्य जैसा दिखता है। क्योंकि गद्यांश के अनुसार जो तथा कथित कविताओं को पढ़कर बच्चों को लक्ष्यार्थ पहचानना होता है वह लक्ष्यार्थ एक प्रतीकार्य जैसा दिखता है।
Q12. व्याकरण शिक्षण की आगमन विधि में–
(1) उदाहरण से नियम की ओर जाते है
(2) नियम के उदाहरण की ओर जाते हैं
(3) सूत्र कण्ठस्थ कराते हैं
(4) पाठ्‌यपुस्तक का प्रयोग करते हैं
Ans: (1) व्याकरण शिक्षण की आगमन विधि में- उदाहरण से नियम की ओर जाते है। आगमन विधि में प्रत्यक्ष अनुभवों उदाहरणों तथा प्रयोगों का अध्ययन कर नियम निकाले जाते हैं तथा ज्ञात तथ्यों के आधार पर सूझ-बूझ से निर्णय लिया जाता है। इसमें अध्यापन-प्रत्यक्ष से प्रमाण की ओर, उदाहरण से नियम की ओर तथा स्थूल से सूक्ष्म की ओर जाते हैं।
Q13. भाषा के आधारभूत कौशल
(1) अन्तःसम्बन्धित हैं
(2) एक क्रम में सीखे जाते हैं
(3) विद्यालय में ही सीखे जाते हैं
(4) अन्तःसम्बन्धित नहीं होते हैं
Ans: (2) भाषा के आधार भूत कौशल एक क्रम से सीखे जाते हैं।
Q14. हिन्दी भाषा सीखने में पाठ्‌यपुस्तक –
(1) साधन है
(2) साध्य है
(3) एकमात्र संसाधन है
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (1) हिन्दी भाषा सीखने में पाठ्‌यपुस्तक एक साधन है।
Q15. तन्वी जब भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए खड़ी होती है, वह बोलने में हकलाने लगती है-इसका कारण है –
(1) आत्मविश्वास के साथ बोलने की योग्यता नहीं रखती
(2) उसे बोलना नहीं आता
(3) औपचारिक स्थितियों में बोलने में वह मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस करती है
(4) ‘b’ और ‘c’ दोनों
Ans: (4) तन्वी का बोलने में हकलाना इस बात का प्रमाण है कि उसमें आत्मविश्वास के साथ बोलने की योग्यता में कमी है तथा औपचारिक स्थितियों में बोलने में वह मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस करती है।
Q16. सुहैल की मातृभाषा भोजपुरी है। वह हिन्दी वाक्य लिखते समय अक्सर ‘ने’ का सही प्रयोग नहीं करता, इसका सम्भावित कारण क्या है?
(1) वह लापरवाह है
(2) सुहैल हिन्दी भाषा नहीं जानता
(3) वह ध्यान से नहीं लिखता
(4) यह उसकी मातृभाषा का प्रभाव है, जहाँ बोलते समय अक्सर आवश्यक स्थितियों में ‘ने’ का प्रयोग नहीं किया जाता
Ans: (4) सुहैल द्वारा हिन्दी वाक्य लिखते समय ‘ने’ का सही प्रयोग न करने का एक मात्र कारण उसकी मातृभाषा का प्रभाव है जहां बोलते समय अक्सर आवश्यक स्थितियों में ‘ने’ का प्रयोग नहीं किया जाता।
Q17. ‘द्रौपदी’ का पर्याय नहीं है –
(1) याज्ञसेनी
(2) द्रुपद सुता
(3) पांचाली
(4) रमणी
Ans: (4) द्रौपदी का पयार्य रमणी नहीं है रमणी का पयार्य है तरुणी, प्रमदा, यौवनवती, मनोज्ञा, जबकि द्रौपदी का पर्याय द्रुपद सुता, याज्ञसेनी, पांचाली, कृष्णा है। (स्रोत- हिन्दी भाषा-शब्द अर्थ प्रयोग -डा . हरदेव बाहरी)
Q18. सही शब्द है –
(1) ईर्षा
(2) इर्षा
(3) इर्ष्या
(4) ईर्ष्या
Ans: (4) सही शब्द- ‘‘ईर्ष्या’’ है।
Q19. ‘कष्ट’ का अर्थ है–
(1) शारीरिक असुविधा
(2) खेद
(3) दुख
(4) शोक
Ans: (2) ‘कष्ट’ का अर्थ दुःख से है।
Q20. दो पहाड़ों के बीच खाली स्थान को क्या कहते है?
(1) उपत्यका
(2) घाटी
(3) जमीन
(4) ये सभी
Ans: (2) दो पहाड़ों के बीच खाली स्थान को घाटी कहते है जबकि पहाड़ के निचले भाग को उपत्यका कहते है। (स्रोत- प्रामाणिक हिन्दी – पृथ्वी नाथ पाण्डेय)
Q21. निम्न में कौन-सा सही है?
(1) वह टका-सा प्रश्न करता है
(2) वह टका-सा उत्तर देता है
(3) वह टका-सा जवाब देता है
(4) उपरोत्त सभी
Ans: (3) ‘वह टका-सा जबाब देता है’ सही वाक्य है। ‘टका-सा’ का प्रयोग उत्तर देने और प्रश्न करने के लिए अभीष्ट नहीं है।
Q22. आवरण में कौन-सा उपसर्ग लगाकर नया शब्द बनाया जा सकता है?
(1) निवा
(2) नि
(3) परि
(4) पर्य
Ans: (3) ‘आवरण’ में ‘परि’ उपसर्ग लगाकर नया शब्द ‘पर्यावरण’ बनाया जा सकता है। उपसर्ग उस ‘शब्दांश’ या ‘अव्यय’ को कहते हैं, जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करता है। (स्रोत-आधुनिक हिन्दी व्याकरण-डा . वासुदेव नन्दन प्रसाद)
Q23. ‘कल्पना’, ‘शिक्षा’ में इक प्रत्यय का प्रयोग करने से शब्द बनेंगे –
(1) कल्पनिक, शैक्षिक
(2) काल्पनिक, शिक्षिक
(3) कल्पनिक, शिक्षिक
(4) काल्पनिक, शैक्षिक
Ans: (4) ‘कल्पना’ में ‘इक’ प्रत्यय लगाने से काल्पनिक तथा ‘शिक्षा’ में ‘इक’ प्रत्यय लगाने से शैक्षिक शब्द बनेंगे। शब्दों के बाद में जो अक्षर या अक्षर समूह लगाया जाता है, उसे प्रत्यय कहते हैं।
Q24. ‘अष्टाध्यायी’ समास है –
(1) द्विगु
(2) द्वन्द्व
(3) तत्पुरुष
(4) कर्मधारय
Ans: (1) अष्टाध्यायी में द्विगु समास होगा। क्योंकि अष्टाध्यायी का अर्थ है आठ अध्याय। संख्या पूर्वो द्विगुः। अर्थात्‌ जिस समास में पूर्व पद संख्यावाची हो वहां द्विगु समास होगा। त्रिलोकी, पंचवटी, पंचाग, चतुर्युगम।
Q25. ‘निषेध’ का विलोम है–
(1) स्वीकृत
(2) विधि
(3) निश्चित
(4) स्वीकार
Ans: (2) निषेध का विलोम विधि है, निश्चित का विलोम अनिश्चित तथा स्वीकार का विलोम अस्वीकार होगा। (स्रोत- हिन्दी भाषा-शब्द अर्थ प्रयोग – डा . हरदेव बाहरी)
Q26. भाषा अर्जन और भाषा अधिगम में क्या अन्तर होता है?
(1) भाषा अर्जन में अर्थ भी समाज से स्वतः ही प्राप्त होते है जबकि भाषा अधिगम में कई बार अर्थ सीखने पड़ते हैं
(2) सहज एवं स्वाभाविक रूप से परिवेश के माध्यम से भाषा अर्जित की जाती है जबकि भाषा अधिगम प्रयासपूर्ण होता है
(3) भाषा अर्जन में मुख्यतः सुनना, बोलना कौशल शामिल है जबकि भाषा अधिगम में अनेक बार सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना- चारों कौशल सीखने पड़ते हैं
(4) उपरोत्त सभी
Ans: (4) भाषा अर्जन सहज एवं स्वाभाविक रूप से परिवेश के माध्यम से अर्जित की जाती है तथा उसके अर्थ भी समाज से स्वतः प्राप्त होते हैं और उसमें मुख्यतः सुनना, बोलना, कौशल शामिल है जबकि भाषा अधिगम प्रयास पूर्ण होता इसमें कई बार अर्थ सीखने पड़ते हैं और इसमे सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना चारों कौशल सीखनें पड़ते हैं।
Q27. भाषायी विविधता –
(1) भाषा की कक्षा में एक संसाधन है
(2) भारतीय कथाओं का सत्य है
(3) बहुभाषिक बच्चों के संज्ञानात्मक विकास की ओर संकेत करती है
(4) उपरोत्त सभी
Ans: (3) भाषायी विविधता बहुभाषित बच्चों के संज्ञानात्मक विकास की ओर संकेत करती है।
Q28. मौन पठन का मुख्य उद्देश्य है–
(1) गहन अर्थ ग्रहण करना
(2) सतही ढंग से पाठ खत्म करना
(3) बिना बोले पढ़ने की कुशलता का विकास करना
(4) शान्ति के साथ पढ़ना
Ans: (1) मौन पठन का मुख्य उद्देश्य है ‘गहन अर्थ ग्रहण करना’।
Q29. निम्न में से कौन पठन का प्रकार नहीं है?
(1) मौन पठन
(2) सस्वर पठन
(3) अर्थ पठन
(4) द्रुत पठन
Ans: (3) ‘सस्वर पठन, मौन पठन, द्रुत पठन (त्वरित पठन)’ पठन क्रिया का एक प्रकार है जबकि अर्थ पठन पठन का प्रकार नहीं है।
Q30. उच्च प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण का मुख्य उद्देश्य है
(1) साहित्यिक विधाओं से परिचय और व्याकरणिक नियम सिखाना
(2) प्रसिद्ध साहित्यकारों से परिचित कराना
(3) हिन्दी भाषा की पाठ्‌यपुस्तक पढ़ाना
(4) उपरोत्त में से कोई नहीं
Ans: (1) उच्च प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण का मुख्य उद्देश्य साहित्यिक विधाओं से परिचय एवं व्याकरणिक नियमों को सिखाना होना चाहिए।

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