You are here
Home > QB Subjectwise > 037 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

037 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. बच्चे के घर की भाषा और विद्यालय की भाषा के बीच के सम्बन्ध को –
(1) उपेक्षित करना चाहिए
(2) कठोरता से देखना चाहिए
(3) उसकी विविधता और लचीलेपन के साथ देखना चाहिए
(4) समाप्त कर देना चाहिए
Ans: (3) बच्चों के घर की भाषा और विद्यालय की भाषा के बीच के सम्बन्ध को उनकी विविधता और लचीलेपन के साथ देखना चाहिए। क्योंकि बच्चों की घर तथा समाज की भाषा तथा विद्यालय की भाषा में भिन्नता होती है।
Q2. पहले बच्चों के लिए लिपिबद्ध और उनसे जुड़ी ध्वनियाँ-
(1) सार्थक होती है
(2) निरर्थक होती है
(3) मूर्त होती है
(4) अमूर्त होती है
Ans: (2) सर्वप्रथम बच्चों के लिए लिपिबद्ध और उनसे जुड़ी ध्वनियाँ निरर्थक होती हैं। सर्वप्रथम बच्चों को भाषा सिखाने के लिए उन्हें वर्णमाल, स्वर एवं व्यंजन का ज्ञान करना चाहिए। फिर लिपि ज्ञान एवं उच्चारण ज्ञान करना चाहिए।
Q3. बच्चों की भाषा के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही है?
(1) बच्चों की भाषा में नियमबद्ध व्यवस्था की झलक मिलती है
(2) बच्चों की भाषा में बहुत अधिक व्याकरणिक त्रुटियाँ होती हैं
(3) बच्चों की भाषा तार शैली में ही रहती है
(4) बच्चों की भाषा को सुधारने के लिए दण्ड एवं पुरस्कार आवश्यक है
Ans: (2) बच्चों की भाषा में बहुत अधिक व्याकरणिक त्रुटियाँ होती हैं। यह कथन बच्चों की भाषा के सन्दर्भ में सही है।
Q4. ‘‘भाषा की कक्षा में बच्चे स्वाभाविक अभिव्यत्ति के लिए किसी भी प्रकार का रेखांकन कर सकते हैं।’’ यह कथन –
(1) सही हो सकता है
(2) गलत है
(3) सही है, क्योंकि रेखांकन भी अन्ततः भाषा की तरह अभिव्यत्ति का साधन है
(4) सही है, क्योंकि भाषा की पुस्तक में भी चित्र होते हैं
Ans: (2) ‘‘भाषा की कक्षा में बच्चे स्वाभाविक अभिव्यत्ति के लिए किसी प्रकार का रेखांकन कर सकते हैं।’’ यह कथन गलत है। भाषा की कक्षा में बच्चों द्वारा अध्यापक द्वारा दिखाई गई चीजों का ही वास्तविक रेखांकन करते हैं।
Q5. सृजनात्मकता का विकास करने में कौन-सा सहायक नहीं है?
(1) चित्र पर आधारित मौखिक अथवा लिखित वर्णन
(2) कविता पूरी करना
(3) प्रश्नों के उत्तर लिखना
(4) अधूरी कहानी को पूरा करना
Ans: (3) बच्चो में सृजनात्मकता का विकास करने में कविता पूरी करना, चित्रों पर आधारित मौखिक अथवा लिखित वर्णन तथा अधूरी कहानी को पूरा करना सहायक क्रिया-कलाप है, जबकि प्रश्नों के उत्तर लिखना मूल्यांकन में सहायक होता है न कि सृजनात्मकता के विकास में।
Q6. भाषा की कक्षा में-
(1) शिक्षक द्वारा प्रयुत्त गतिविधयाँ और युत्तियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं
(2) दीवारें चार्ट से भरी हों
(3) औपचारिक रूप से आकलन पर बल दिया जाए
(4) व्याकरणिक नियमों पर बल देना चाहिए
Ans: (1) भाषा की कक्षा में शिक्षक द्वारा प्रयुत्त गतिविधियाँ और युत्तियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भाषा कक्षा में शिक्षक की भाषा महत्पवूर्ण होती है, वह विद्यार्थी को स्वर, व्यंजन का ज्ञान कराते हैं तथा उच्चारण का सही ज्ञान कराते हैं।
Q7. हिन्दी भाषा के अतिरित्त कौन-सी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है?
(1) मराठी
(2) पंजाबी
(3) उर्दू
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (1) हिन्दी भाषा के अतिरित्त मराठी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। उर्दू भाषा की लिपि अरबी तथा पंजाबी भाषा की लिपि गुरूमुखी होती है।
Q8. भाषा शिक्षण का बहुभाषित सन्दर्भ-
(1) एक से अधिक भाषाओं में शिक्षण-सामग्री है
(2) एक से अधिक भाषाएँ सीखने की ओर संकेत करता है
(3) एक समस्या है
(4) बच्चों द्वारा एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करने की ओर संकेत करता है
Ans: (1) भाषा शिक्षण का बहुभाषिक सन्दर्भ एक से अधिक भाषाओं में शिक्षण-सामग्री है। भारत में भाषा शिक्षण एक से अधिक भाषाओं में होता है। हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी आदि भाषाओं का शिक्षण होता है।
Q9. हिन्दी भाषा शिक्षण का एक मुख्य उद्देश्य है –
(1) प्रश्न पूछने, अपनी बात कहने का अवसर देना
(2) भाषा का ज्ञान देना
(3) मौन पठन के उपरान्त शब्दार्थ कराना
(4) व्याकरणिक नियम कण्ठस्थ कराना
Ans: (2) हिन्दी भाषा शिक्षण का एक मुख्य उद्देश्य भाषा का ज्ञान देना है। शिक्षण में बच्चे को किसी भी भाषा का शिक्षण का एक मात्र लक्ष्य बच्चों को उस भाषा का सम्पूर्ण व्याकरण का ज्ञान कराना होता है।
Q10. जब भाषा सीखने की प्रक्रिया बच्चे के दैनिक जीवन की जरूरतों से जुड़ी हो, तो –
(1) भाषा सीखना निरर्थक होता है
(2) भाषा सीखना सार्थक होता है
(3) भाषा सीखना कठिन हो जाता है
(4) बच्चों को विशुद्ध मनोरंजन की प्राप्ति होती है
Ans: (2) जब भाषा सीखने की प्रक्रिया बच्चों के दैनिक जीवन की जरूरतों से जुड़ी हो, तो भाषा सीखना सार्थक होता है। बच्चों की रूचि प्रायः उसी भाषा में होती है जो उसके आसपास प्रयुत्त होती है अतः वह अपनी जरूरतों के हिसाब से भाषा सीखता है। जो उसके लिए सार्थक होती है।
Q11. बच्चे विद्यालय आने से पहले –
(1) अपनी भाषा का व्याकरण जानते हैं
(2) भाषा नहीं जानते
(3) वर्णमाला जानते हैं
(4) भाषा के सभी कौशलों में पारंगत होते हैं
Ans: (2) बच्चे विद्यालय आने से पहले भाषा नही जानते हैं। वो केवल भाषा बोलते है लेकिन उसका व्याकरणिक ज्ञान उनको नही होता है। बच्चों को विद्यालय में वर्णमाला तथा भाषा का व्याकरण सिखाया जाता है तथा उच्चारण का पूर्ण ज्ञान कराया जाता है। उसके उपरान्त बच्चे भाषा के सभी कौशलों में पारंगत होते हैं।
Q12. पाठ्‌य-पुस्तक में दिए गए अभ्यास कैसे हों?
(1) जो अनुमान और कल्पना पर आधारित हों
(2) जिनके उत्तर निश्चित हों
(3) जो बहुविकल्पीय हों
(4) जो व्याकरण पर ही आधारित हों
Ans: (2) पाठ्य पुस्तक में दिए गए अभ्यास का विद्यार्थीयों द्वारा उन्हीं प्रश्न का अभ्यास करना चाहिए जिनका उत्तर निश्चित हैं यदि विद्यार्थी बिना सही उत्तर के प्रश्न का अभ्यास करेंगे तो उनके मस्तिष्क में वही उत्तर बैठ जायेगा। अतः विद्यार्थी को जिन प्रश्नों के उत्तरों का ज्ञान हो उन्हीं प्रश्नों का अभ्यास करना चाहिए।
Q13. प्रायः बच्चे/बच्चियाँ विद्यालय में स्वयं को अभिव्यत्त करने में संकोच करते हैं, क्योंकि –
(1) उन्हें अभिव्यत्ति का ज्ञान नहीं है
(2) वे भाषा नहीं जानते
(3) वे जिस भाषा में सहज अभिव्यत्ति कर सकते हैं वह प्रायः विद्यालयों में स्वीकृत नहीं होती
(4) शिक्षक/शिक्षिका व बाकी साथी उनका मजाक उड़ाते हैं
Ans: (3) बच्चे/बच्चियाँ प्रायः विद्यालय में स्वयं को अभिव्यत्त करने में संकोच करते हैं, क्योंकि वे जिस भाषा में सहज अभिव्यत्ति कर सकते हैं, वह प्रायः विद्यालयों में स्वीकृत नहीं होती है। विद्यालय में मानक भाषा का प्रयोग होता है जबकि घर तथा समाज में बच्चे क्षेत्रीय भाषा/बोली का सामान्यतः प्रयोग करते हैं।
Q14. भाषा शिक्षक के रूप में आप –
(1) प्रश्नों के उत्तर पूछेंगे
(2) पाठ्‌य-पुस्तक पर बल देंगे
(3) ड्राइंग बनाएँगे
(4) बच्चों को अपने अनुभव और विचार बताने के लिए उनमें उत्सुकता जगाएँगे
Ans: (4) भाषा शिक्षक के रूप में आप (शिक्षक) विद्यार्थियों को अपने अनुभव और विचार बताने के लिए उनमें उत्सुकता जगाएँगे क्योकि विद्यार्थी (बच्चे) प्रेरणाओं द्वारा अधिक ज्ञान अर्जित करते हैं। अधिकतम अभिव्यक्ति के अवसर द्वारा ही भाषायी कौशल प्राप्त किया जा सकता है।
Q15. बच्चे अपनी बोलचाल की भाषा का अनुभव –
(1) विद्यालय से प्राप्त करते हैं
(2) समाज, परिवार से प्राप्त करते हैं
(3) थोड़ा-बहुत रखते हैं
(4) उपरोत्त में से कौन नहीं
Ans: (2) बच्चे अपनी बोलचाल की भाषा का अनुभव समाज परिवार से प्राप्त करते हैं। बच्चे परिवार/समाज प्रथम पाठशाला माना जाता है क्योंकि सर्वप्रथम बच्चों को भाषा का ज्ञान परिवार तथा समाज से होता है।
Q16. व्यत्तिवाचक संज्ञा है-
(1) देवनागरी
(2) लिपि
(3) बच्चे
(4) भाषा
Ans: (1) देवनागरी व्यत्तिवाचक संज्ञा है। जिस शब्द से किसी एक वस्तु या व्यत्ति के नाम का बोध हो उसे व्यत्तिवाचक संज्ञा कहते हैं, जैसे- भारत, गंगा, हिमालय, इलाहाबाद आदि। जबकि लिपि, भाषा तथा बच्चे जातिवाचक संज्ञा हैं। जिन संज्ञाओं से एक ही प्रकार की वस्तुओं अथवा व्यत्तियों का बोध हो, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
Q17. ‘‘बच्चे बहुत-सी गलतियाँ मात्राओं के प्रयोग में करते हैं’’ वाक्य में रेखांकित अंश है-
(1) निश्चित संख्यावाचक विशेषण
(2) गुणवाचक विशेषण
(3) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
(4) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
Ans: (4) बच्चे बहुत-सी गलतियाँ मात्राओं के प्रयेाग में करते है। वाक्य में रेखांकित अंश अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण है। अनिश्चित परिमाण वाचक विशेषण किसी वस्तु की नाप तथा तौल की अनिश्चित मात्रा का बोध कराता है। जैसे- बहुत दूध, सबधन, पूरा आनंद, बहुत गलतियाँ आदि। गुणवाचक विशेषण- जिस शब्द से संज्ञा का गुण, दशा, स्वभाव, आदि लक्षित हो, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- नया, पुराना, लाल, पीला, दुबला, पतला, भला, बुरा, उचित, अनुचित आदि। संख्यावाचक विशेषण- जिन शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम ही संख्या लक्षित होती हो, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। (2) निश्चित संख्यावाचक विशेषण – एक, पचीस, नौ आदि। (1) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण – कुछ, सब, अनेक, सैकड़ों।
Q18. गुणवाचक, परिमाणबोधक, सार्वनामिक, संख्यावाचकये सभी निम्न में से किसके उदाहरण हैं?
(1) सर्वनाम
(2) संज्ञा
(3) विशेषण
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (3) गुणवाचक, परिणामबोधक, सार्वनामिक, संख्यावाचक ये सभी विशेषण के भेद हैं। भाववाचक, जातिवाचक, व्यत्तिवाचक, गुणवाचक तथा द्रव्यवाचक सभी संज्ञा के भेद हैं। जबकि पुरुषवाचक, निजवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, सम्बन्धवाचक, प्रश्नवाचक आदि सर्वनाम के भेद हैं।
Q19. ‘पुस्तक’ है –
(1) स्त्रीलिंग
(2) पुल्लिंग
(3) नपुंसकलिंग
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (1) संज्ञा के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की नर या मादा जाति का बोध हो, उसे व्याकरण में लिंग कहते हैं। लिंग संस्कृत भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है, चिह्न या निशान। चिह्न या निशान किसी संज्ञा का होता है। संज्ञा किसी वस्तु के नाम को कहते हैं और वस्तु या तो पुरुषजाति की होगी या स्त्री जाति की। तात्पर्य यह है कि प्रत्येक संज्ञा पुलिंग या स्त्रीलिंग होती है।
Q20. निम्नांकित में कौन-सा वाक्य सही है?
(1) देश भर में बात फैल गई
(2) तमाम देश भर में बात फैल गई
(3) पूरे देश भर में बात फैल गई
(4) सम्पूर्ण देश भर में बात फैल गई
Ans: (1) देश भर में बात फैल गई। वाक्य सही है। अन्य सभी विकल्प असंगत (गलत) है। ‘देश भर’ समूचे देश का सूचक है इसके साथ अन्य विशेषण की आवश्यकता नहीं है।
Q21. किस शब्द में ‘इत’ प्रत्यय है?
(1) प्रोत्साहित
(2) प्रत्येक
(3) उपस्थिति
(4) निश्चित
Ans: (1) प्रोत्साहित में इत प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। प्रत्येक में प्रति उपसर्ग, उपस्थित में उप उपसर्ग तथा निश्चित शब्द में निस्‌ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है।
Q22. ‘प्रत्येक’ का सन्धि-विच्छेद है –
(1) प्रत्य एक
(2) प्र त्येक
(3) प्रति एक
(4) प्रति ऐक
Ans: (3) प्रति + एक प्रत्येक (यण सन्धि) ह्रस्व अथवा दीर्घ इ, उ, ऋ के बाद यदि कोई भिन्न स्वर आता है तो ‘इ’ अथवा ‘ई’ के बदले ‘य’ , ‘उ’ अथवा ‘ऊ’ के बदले ‘व’ , ‘ऋ’ के बदले ‘र’ हो जाता है। इसे यण सन्धि कहते हैं।
Q23. ‘छात्र’ का बहुवचन है –
(1) छात्र
(2) छात्रों
(3) छात्राएँ
(4) छात्रे
Ans: (2) छात्र का बहुवचन छात्रों होता है। जबकि अन्य सभी विकल्प असंगत है।
Q24. ‘लिखने-पढ़ने’ में कौन-सा समास है?
(1) द्वन्द्व
(2) द्विगु
(3) तत्पुरुष
(4) कर्मधारय
Ans: (1) लिखने-पढ़ने में द्वन्द्व समास हैं इसका विग्रह लिखने और पढ़ने होगा। जिसके दोनों पद प्रधान हों, दोनों संज्ञाएँ अथवा विशेषण हो, वह द्वन्द्व समास कहलाएगा। इसका विग्रह करने के लिए दो पदों के बीच और, अथवा, या जैसे योजक अव्यय लिखे जाते हैं। द्विगु समास- जिस सामासिक पद का पहला पद संख्यावाचक हो और उससे एक समुदाय का बोध हो, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे- नवग्रह, चौमासा, त्रिफला। तत्पुरुष समास- जिस समास में अन्तिम पद प्रधान होता है उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। नेत्रहीन – नेत्र से हीन मदान्ध – मद में अंधा कर्मधारय समास- कर्मधारय का एक पद विशेषण और दूसरा विशेष्य अथवा संज्ञा होता है। पीताम्बर – पीत है जो अम्बर महावीर – महान है जो वीर
निर्देश (प्र. सं. 2530) नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़िए और प्रश्नों के लिए सही विकल्प का चयन कीजिएजो सबसे महत्वपूर्ण बात इस प्रशिक्षण के दौरान सामने आई- वह थी छात्रों तथा शिक्षकों के बीच परस्पर सम्बन्ध। हमने अध्यापकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया था कि वे प्रत्येक छात्र की भावना की कद्र करें तथा यह देखें कि छात्र क्या चाहता है। यदि एक बार छात्र शिक्षक से डरना बन्द कर देता है तथा दोनों के बीच एक दोस्ताना रिश्ता कायम हो जाता है तो छात्र/छात्रा के लिए सीखना आनन्ददायक और आसान हो जाता है। शिक्षक की निकटता और उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है, चाहे वह कक्षा में बैठकर हो या स्कूल के बाद खेल के मैदान में। इससे शिक्षक एवं छात्र एक दूसरे के निकट आ जाते हैं तथा छात्र के सम्पूर्ण विकास में इसका बहुत योगदान रहता है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शासकीय शिक्षकों के साथ भी एक रिश्ता बनाए रखना चाहिए क्योंकि समान्तर शिक्षकों के रहते नियमित शिक्षक प्रायः यह समझने लगते हैं कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं है। एक तरह से वे निश्चिन्त हो जाते हैं तथा सारा काम समान्तर शिक्षकों पर डाल देते हैं।
Q25. बच्चों के सीखने में सबसे महत्त्वपूर्ण है –
(1) शिक्षक की विद्वता
(2) शिक्षक का सौम्य स्वभाव
(3) शिक्षक और बच्चों के बीच मित्रवत सम्बन्ध
(4) शिक्षक की संवेदनशीलता
Ans: (3) शिक्षक और बच्चों के बीच मित्रवत सम्बन्ध बच्चों के अधिगम सीखने में सबसे महत्वपूर्ण हैं जब शिक्षक छात्र से मित्रवत व्यवहार करते हैं तो बच्चों के अन्दर डर समाप्त हो जाता है तथा वह अपनी समस्याओं को सरलतापूर्वक अध्यापक से कह सकता है।
Q26. प्रत्येक छात्र/छात्रा की भावना की कद्र होती है –
(1) यह जानने से कि वे क्या जानते हैं
(2) उनकी बातों को ध्यान से सुनने से
(3) उनका सम्मान करने से
(4) उपरोत्त सभी
Ans: (4) प्रत्येक छात्र की बातों को ध्यान से सुनना, यह जानने से कि वे क्या जानते हैं तथा उनका सम्मान करने से प्रत्येक छात्र/छात्रा की भावना की कद्र होती है।
Q27. शिक्षक विद्यालय के बाद भी बच्चों से रिश्ता बनाए रखता है-
(1) ऐसा करना ठीक नहीं है क्योंकि यह परम्परा के विरुद्ध है
(2) ऐसा करना ठीक नहीं है क्योंकि विद्यालय के बाहर शिक्षक-शिक्षक नहीं रहता
(3) ऐसा करना ठीक है क्योंकि शिक्षक की जिम्मेदारी विद्यालय के बाद समाप्त नहीं हो जाती
(4) ऐसा करना ठीक है क्योंकि ऐसा करने से शिक्षक और बच्चों के बीच निकटता और विश्वास का रिश्ता बनता है जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक है
Ans: (4) शिक्षक विद्यालय के बाद भी बच्चों (विद्यार्थियों) से रिश्ता बनाए रखता है ऐसा करना ठीक है क्योंकि ऐसा करने से शिक्षक और बच्चों के बीच निकटता और विश्वास का रिश्ता बनता है जो बच्चो के सर्वांगीण विकास में सहायक है।
Q28. नियमित शिक्षकों को ऐसा क्यों लगता है कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं है?
(1) समान्तर शिक्षक ही विद्यालय की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार हैं
(2) समान्तर शिक्षकों पर पूर्ण निश्चिन्त होकर काम डाल दिया जाता है
(3) समान्तर शिक्षक नियमित नहीं होते और उनकी नौकरी स्थायी नहीं होती, इसलिए उन्हें सभी के कार्य करने पड़ते हैं
(4) समान्तर शिक्षक का यह दायित्व है कि वह नियमित शिक्षक का बोझ कम करे
Ans: (2) समान्तर शिक्षकों पर पूर्ण निश्चित होकर काम डाल दिये जाने से नियमित शिक्षकों को ऐसा लगता है कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं है।
Q29. शिक्षक और छात्रों के बीच कैसा सम्बन्ध लेखक को प्रिय है?
(1) शिक्षक के प्रति श्रद्धापूर्ण व्यवहार
(2) मित्रवत्‌ सम्बन्ध
(3) अनुशासन में रहकर शिक्षक की बात सुनी जाए
(4) उपरोत्त सभी
Ans: (2) शिक्षक और छात्रों के मध्य मित्रवत सम्बन्ध लेखक को प्रिय है। इस प्रकार के सम्बन्ध से छात्र/छात्रा के लिए सीखना अनन्ददायक और आसान हो जाता है। शिक्षक से छात्रों की निकटता और उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है।
Q30. छात्र के सम्पूर्ण विकास में शिक्षक की भूमिका है –
(1) छात्र/छात्रा को पाठ समझकर उन्हें याद करा दे
(2) छात्र/छात्रा की स्थिति और आकांक्षा समझकर शिक्षक उनके अनुरूप प्रशिक्षण दे
(3) छात्र/छात्रा को दण्डित करे
(4) उपरोत्त में से कोई नहीं
Ans : (2) छात्र के सम्पूर्ण विकास में शिक्षक की भूमिका छात्र/छात्रों की स्थिति और आकांक्षा समझकर शिक्षक उनके अनुरूप प्रशिक्षण देने की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जिस कारण छात्र/छात्रो बड़ी सरलता से शिक्षा ग्रहण करते है।

Top
error: Content is protected !!