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036 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. कौन-सा व्यंजन ‘त’ वर्ग का नहीं है?
(1) म
(2) न
(3) द
(4) ध
Ans: (1) उपर्युत्त में ‘म’, ‘त’ वर्ग व्यंजन में नहीं आयेगा अपितु ‘म’ ‘प’ वर्ग व्यंजन का वर्ण है। हिन्दी वर्ण माला में वर्णों का क्रम हैस्वर- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ अयोगवाह- अं, अः व्यंजन- क वर्ग – क, ख, ग, घ, ङ च वर्ग – च, छ, ज, झ, ञ ट वर्ग – ट, ठ, ड, ढ, ण त वर्ग – त, थ, द, ध, न प वर्ग – प, फ, ब, भ, म अन्तस्थ व्यंजन – य, र, ल, व ऊष्म व्यंजन – श, ष, स, ह (स्रोत- आधुनिक हिन्दी व्याकरण एवं रचना – डा . वासुदेव नन्दन प्रसाद)
Q2. ‘राजा-नगर में आए’ अर्थ के अनुसार यह वाक्य निम्नलिखित में से किस प्रकार के अन्तर्गत है?
(1) विधानार्थक वाक्य
(2) सन्देश सूचक वाक्य
(3) संकेतार्थक वाक्य
(4) इच्छाबोधक वाक्य
Ans: (1) ‘राजा नगर में आए’ अर्थ के आधार पर यह विधानार्थक या विधिवाचक वाक्य है। विधिवाचक वाक्य में किसी कार्य के होने का बोध होता है। जैसे- राधा ने पढ़ लिया। राम आ गये, मैने भोजन कर लिया। (स्रोत- आधुनिक हिन्दी व्याकरण एवं रचना – डा . वासुदेव नन्दन प्रसाद)
Q3. निम्नांकित शब्दों में से ‘सम्बन्ध बहुव्रीहि’ सामासिक शब्द है
(1) लुप्तपद
(2) दशानन
(3) प्राप्तोदक
(4) उपहृतपशु
Ans: (2) उपर्युत्त विकल्प (2) दशानन में बहुव्रीहि समास होता है। नोट- जहाँ पर प्रथम पद दूसरे की विशेषता बताता है और दोनों पद मिल कर किसी और की विशेषता बताते हैं। वहां बहुव्रीहि समास होता है। (स्रोत- प्रामाणिक हिन्दी- डा . पृथ्वी नाथ पाण्डेय)
Q4. इस वाक्य में किस लोकोक्ति का प्रयोग होगा? ‘‘तीर्थों के पण्डे पुजारी प्रायः ऐसे यजमानों की खोज में रहते हैं जो………..हों’’
(1) मान न मान मैं तेरा मेहमान
(2) आँख के अन्धे, गाँठ के पूरे
(3) गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास
(4) आप काज महाराज
Ans: (2) तीर्थों के पण्डे पुजारी प्रायः ऐसे यजमानों की खोज में रहते हैं जो आंख के अंधे, गांठ के पूरे हों अर्थात धनी मूर्ख हो जिससे उन्हें आसानी से बहलाया जा सके इसलिए आँख के अंधे, गांठ के पूरे सही लोकोत्ति होगी। (स्रोत- प्रामाणिक हिन्दी -डा . पृथ्वी नाथ पाण्डेय)
Q5. मैं अपना सिर खुजाता हूँ। इस वाक्य में है –
(1) सकर्मक क्रिया
(2) अकर्मक क्रिया
(3) अकर्मक सकर्मक दोनों क्रिया
(4) अकर्मक सकर्मक दोनों नहीं
Ans: (1) मैं अपना सिर खुजाता हूँ में सकर्मक क्रिया है। जहां वाक्य में कर्म का प्रयोग हो वहां सकर्मक क्रिया होगी अथवा जब क्रिया का प्रभाव कर्त्ता के बजाय कर्म पर पड़े तब उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। और यहां पर ‘खुजाना’ क्रिया का प्रभाव ‘कर्म’ सिर पर पड़ रहा है अतः यहां सकर्मक क्रिया होगी। (स्रोत-हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग – डा . हरदेव बाहरी)
Q6. ‘‘मैं खाना खा चुका, तब वह आया’’ यह वाक्य है–
(1) संयुत्त वाक्य
(2) सरल वाक्य
(3) मिश्र वाक्य
(4) संक्षिप्त वाक्य
Ans: (3) ‘‘मैं खाना खा चुका, तब वह आया’’ मिश्र वाक्य का उदाहरण है। मिश्र वाक्य में एक प्रधान वाक्य और दूसरा उपवाक्य होता है, उपवाक्य स्वतन्त्र न होकर प्रधान वाक्य पर निर्भर रहता है। यहां पर प्रधान वाक्य ‘मै खाना खा चुका’ है एवं उप वाक्य है ‘वह आया’ और दोनों को समुच्च बोधक शब्द ‘तब’ से जोड़ा गया है अतः यह मिश्र वाक्य का उदाहरण है। (स्रोत-हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग – डा . हरदेव बाहरी)
Q7. ‘‘मेरा कुत्ता काला है।’’ इस वाक्य में काला शब्द है–
(1) संज्ञा
(2) सर्वनाम
(3) विशेषण
(4) क्रिया
Ans: (3) ‘‘मेरा कुत्ता काला है।’’ में काला शब्द कुत्ते की विशेषता बता रहा है। नोट- संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं और उपर्युत्त वाक्य में संज्ञा ‘कुत्ता’ की विशेषता काला होना है, अतः काला शब्द विशेषण है।
Q8. निम्नलिखित वाक्य में एक विराम चिह्न का लोप है वह विराम चिह्न कौन सा है। वाक्य ‘‘आप एक ऐसे मनुष्य की खोज कराइए, जिसने कभी दुख का नाम न सुना हो
(1) आश्चर्य सूचक चिह्र (विराम)
(2) अर्द्ध विराम
(3) अल्प विराम
(4) पूर्ण विराम
Ans: (4) उपर्युत्त दिए गये वाक्य में पूर्ण विराम (। ) तथा उद्धरण चिह्न (‘‘ ’’) का लोप हुआ है। किन्तु विकल्प में केवल पूर्ण विराम ही है इसलिए उत्तर अपूर्ण है।
Q9. संस्कृत के मूल शब्द जो हिन्दी भाषा में प्रचलित है वे कहलाते हैं–
(1) विदेशी शब्द
(2) तद्‌भव शब्द
(3) तत्सम शब्द
(4) देशज शब्द
Ans: (3) संस्कृत के वे शब्द जो हिन्दी में ज्यों के त्यों प्रयोग किए जाते हैं, तत्सम कहलाते हैं और संस्कृत के वे शब्द जो पालि प्राकृत अपभ्रंश से परिवर्तित होकर हिन्दी में प्रयुत्त होने लगे हैं, तद्‌भव कहलाते हैं। (स्रोत-आधुनिक हिन्दी व्याकरण एवं रचना – डा . वासदेव नन्दन प्रसाद)
Q10. ‘‘एक अनार सौ बीमार’’ यह एक–
(1) वाक्य है
(2) मुहावरा है
(3) वाक्यांश है
(4) लोकोत्ति है
Ans: (4) ‘‘एक अनार सौ बिमार’’ यह एक लोकोक्ति है। जिसका अर्थ है- ‘वस्तु की पूर्ति कम और माँग अधिक’ और प्रयोग होगा- ‘अधिक इमारतों के निर्माण के कारण सीमेन्ट की स्थिति एक अनार सौ बिमार जैसी हो गई है? (स्रोत-हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग – डा . हरदेव बाहरी)
Q11. कोप शब्द का पर्यायवाची शब्द है–
(1) कृतान्त
(2) अवितथ
(3) अमर्ष
(4) मृषा
Ans: (3) ‘अमर्ष’ कोप शब्द का पर्यायवाची शब्द है। कोप के अन्य पर्यायवाची शब्द है- गुस्सा, अमर्ष, रोष, आव्रोश आदि हैं। (स्रोत-हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग – डा . हरदेव बाहरी)
Q12. भिन्न-भिन्न स्वरों के मेल से जो स्वर उत्पन्न होता है उसे–
(1) दीर्घ स्वर
(2) संयुत्त स्वर
(3) सन्धि स्वर
(4) मूल स्वर
Ans: (2) स्वर उन वर्णों को कहते हैं जिनका उच्चारण बिना किसी विघ्न बाधा के होता है, इनके उच्चारण में किसी दूसरे वर्ण की सहायता नहीं ली जाती है और भिन्न-भिन्न स्वरों के मेल से जो स्वर उत्पन्न होते हैं उन्हें संयुत्त स्वर कहते हैं।
Q13. ‘गौरव-गाथा’ इन दोनों शब्दों के बीच में लगा चिह्र कहलाता है?
(1) हंसपद चिह्र
(2) लाघव चिह्र
(3) योजक चिह्र
(4) अवतरण चिह्र
Ans: (3) गौरव-गाथा के बीच लगने वाला चिह्न (-) योजक चिह्न कहलाता है। पूर्ण विराम (। ) अल्प विराम (,) प्रश्नवाचक चिह्न (?) विस्मयादिबोधक (
) उद्धरण चिह्न – (‘‘ ’’) (स्रोत-हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग – डा . हरदेव बाहरी)
Q14. ‘पा किटमार’ शब्द में समास है–
(1) तत्पुरुष
(2) अव्ययीभाव
(3) कर्मधारय
(4) द्वन्द्व
Ans: (1) ‘पॉकिटमार’ ‘पाकिट को मारने वाला’ जिस समास में अन्तिम पद प्रधान होता है वहां तत्पुरुष समास होता है और जब तत्पुरुष समास में ‘को’ कारक का लोप हो तब वहां कर्म तत्पुरुष होगा अतः पॉकिटमार में तत्पुरुष समास है।
Q15. प्रधान अध्यापक की बातें सुनकर मैं शर्म के मारे चुप हो गया। रेखांकित वाक्यांश का भाव किस मुहावरे से व्यत्त होता है-
(1) अपना-सा मुँह लेकर रह गया
(2) आकाश पाताल एक कर गया
(3) अपना उल्लू सीधा करने लग गया
(4) उल्टी गंगा बहाने लगा
Ans: (1) रेखांकित वाक्यांश ‘शर्म के मारे चुप हो गया’ का भाव है अपना सा मुह लेकर रह गया। (स्रोत-प्रामाणिक हिन्दी – डा . पृथ्वी नाथ पाण्डेय)
Q16. ‘आँखे दिखाना’ मुहावरा किस अर्थ में प्रयुत्त होता है?
(1) स्वागत करना
(2) लज्जित करना
(3) सावधान करना
(4) व्रोध से देखना
Ans: (4) आँख दिखाना मुहावरे को अर्थ है डराना या व्रोध से देखना।
Q17. ‘‘कहु रावण, रावण जग केते’’ पद में रावण शब्द का प्रयोग क्रमशः हुआ है–
(1) व्यत्तिवाचक संज्ञा एवं व्यत्तिवाचक संज्ञा
(2) जातिवाचक संज्ञा एवं व्यत्तिवाचक संज्ञा
(3) व्यत्तिवाचक सज्ञा एवं जातिवाचक संज्ञा
(4) जातिवाचक संज्ञा एवं जातिवाचक संज्ञा
Ans: (3) ‘‘कहु रावण, रावण जग केते’’ में पहले रावण का प्रयोग व्यत्ति वाचक संज्ञा के रूप में हुआ है तथा दूसरे रावण का प्रयोग जातिवाचक संज्ञा के रूप में हुआ है। व्यत्तिवाचक संज्ञा किसी व्यत्ति के नाम, स्थान के नाम, तिथि, दिन के नाम को व्यत्त करता है जबकि जातिवाचक संज्ञा किसी वस्तु, व्यत्ति, जीव आदि के कार्य या प्रवृत्ति की जाति का बोध कराता है। (स्रोत-आधुनिक हिन्दी व्याकरण-डा . वासुदेव नन्दन प्रसाद)
Q18. भगवद्‌भत्ति में सन्धि है–
(1) स्वर सन्धि
(2) विसर्ग सन्धि
(3) व्यंजन सन्धि
(4) गुण स्वर सन्धि
Ans: (3) भगवद्‌भत्ति में व्यंजन संधि है। जब व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से विकार उत्पन्न हो तब वहां व्यंजन संधि होगा। यहां भगवद्‌भत्ति का विच्छेद भगवत्‌ भत्ति होगा जब – क, च, ट, त, प, के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आये तो क, च, ट, त के स्थान पर अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ग हो जाता है। (स्रोत-आधुनिक हिन्दी व्याकरण-डा . वासुदेव नन्दन प्रसाद)
Q19. अनुकरणीय में लगा है प्रत्यय–
(1) करण
(2) अनु
(3) इय
(4) ईय
Ans: (4) ‘अनुकरण’ मूल शब्द है उसमें ‘ईय’ प्रत्यय लगाने से ‘अनुकरणीय’ शब्द बना है। अतः अनुकरणीय में ‘ईय’ प्रत्यय लगा है। नोट- शब्दों के बाद जो अक्षर या अक्षर समूह लगाया जाता है उसे प्रत्यय कहते हैं।
Q20. वर्तनी की दृष्टि से कौन-सा शब्द सही है?
(1) दन्द्व
(2) द्वन्द
(3) द्वंद्व
(4) द्वन्द्व
Ans: (4) वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द ‘द्वन्द्व’ है।
Q21. किसी वाक्य के अंश को हम निम्नलिखित में से क्या कहेंगे?
(1) पदतल
(2) पदबन्ध
(3) पदरूप
(4) पदत्राण
Ans: (2) किसी वाक्य के अंश को हम ‘पदबन्ध’ कहते हैं। डॉ. हरदेव बाहरी के अनुसार- वाक्य के उस भाग को, जिसमें एक से अधिक पद परस्पर सम्बद्ध होकर अर्थ तो देते हैं, किन्तु पूरा अर्थ नहीं देते पदबन्ध कहलाते हैं। (स्रोत- आधुनिक हिन्दी व्याकरण और रचना – वासुदेव नन्दन प्रसाद (पृष्ठ 200))
Q22. रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून पानी गए न उबरे मोती मानुष चून इसमें शब्द शक्ति पहचानिए–
(1) अभिधा शब्द शक्ति
(2) लक्षणा शब्द शक्ति
(3) माधुर्य शब्द शक्ति
(4) व्यंजना शब्द शक्ति
Ans: (4) उपर्युत्त पंत्तियों में व्यंजना शब्द शक्ति होगी। नोट- जहां पर अभिधा और लक्षणा में बाधा हो फिर भी अर्थ की सम्भावना हो उसे व्यंजना शब्द शक्ति कहते हैं। या जिस शब्द से व्यंग्यार्थ की प्रतीति होती है, उसे व्यंजना शब्द शक्ति कहते हैं।
Q23. ‘जिस मूल शब्द में विकार होने से क्रिया बनती है, उसे क्या कहते हैं?
(1) क्रिया
(2) धातु
(3) मूल धातु
(4) यौगिक धातु
Ans: (4) मूल शब्द में विकार होने से जो क्रिया बनती है उसे यौगिक धातु कहते है जैसे ‘भू’ धातु में ही क्रिया लगा कर ‘होना’ शब्द बना है। इसलिए मूलशब्द ‘धातु’ होती है उसमें क्रिया लगा कर यौगिक धातु बनाई जाती है।
Q24. संज्ञा का वह रूप जिससे क्रिया के आधार का बोध होता है–
(1) सम्बन्ध कारक
(2) करण कारक
(3) सम्प्रदान कारक
(4) अधिकरण कारक
Ans: (4) अधिकरण कारक संज्ञा का ऐसा रूप है जिससे क्रिया के आधार का बोध होता है।
निर्देश (प्र. सं. 2527) निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। जीवों और उनके परस्पर क्रियाओं का अध्ययन ही पारिस्थितिकी या इकोलॉजी कहलाता है। जीव अपने पर्यावरण के अजीवित तत्त्वों या घटकों से क्रिया करते हुए सम्मिलित रूप से एक तन्त्र का निर्माण करते हैं। इसे पारिस्थितिकी तन्त्र या इकोतन्त्र कहा जाता है। विभिन्न इकोतन्त्रों का संघठन भिन्न-भिन्न होता है। इकोतन्त्र यथार्थ में कार्बनिक या जैविक और अकार्बनिक या अजैविक घटकों की आपस में अन्तःक्रियाओं और उनकी परस्पर निर्भरता का समुच्चय है। इस शब्द का प्रयोग मूल रूप से जीवों के समूहों और आवास के परस्पर मिलने से निर्मित एक क्रियाशील इकाई के निर्माण को प्रकट करने के लिए किया गया था। इस ग्रह पर उपस्थित समस्त इको तन्त्र को सम्मिलित रूप से ‘जैव मण्डल’ की संख्या दी जा सकती है। परिस्थितिकी तन्त्र के घटकों में सूर्य का प्रकाश, अकार्बनिक पदार्थ, जलवायु, उत्पादक, उपभोत्ता (सूक्ष्म एवं बड़े उपभोत्ता) शामिल हैं। इकोतन्त्र को सुरक्षित रखते हुए विकास की योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वय हमारी जिम्मेदारी है।
Q25. जीवों और उनके पर्यावरण की परस्पर क्रियाओं का अध्ययन कहलाता है–
(1) एन्थ्रोपोलॉजी
(2) इकोलॉजी
(3) बायोलॉजी
(4) एण्डोव्रायनोलॉजी
Ans: (2) उपर्युत्त गद्यांश के अनुसार जीवों और उनके पर्यावरण की परस्पर क्रियाओं का अध्ययन इकोलॉजी कहलाता है।
Q26. पृथ्वी पर उपस्थित समस्त इकोतन्त्र को सम्मिलित रूप से कहते हैं–
(1) जैवमण्डल
(2) सौरमण्डल
(3) तारामण्डल
(4) इनमें से कोई भी नहीं
Ans: (1) पृथ्वी पर उपस्थित समस्त इकोतन्त्र को सम्मिलित रूप से जैवमण्डल कहा जाता है।
Q27. पारिस्थितिकी तन्त्र या इकोतन्त्र का यह घटक नहीं है–
(1) कार्बनिक पदार्थ
(2) सूर्य का प्रकाश
(3) परमाणु ऊर्जा
(4) मौसम
Ans: (3) गद्यांश के अनुसार परमाणु ऊर्जा को पारिस्थितिकी तन्त्र या इकोतन्त्र का घटक नहीं माना जाता है, जबकि सूर्य का प्रकाश, कार्बनिक पदार्थ, मौसम, अकार्बनिक पदार्थ, उत्पादक, उपभोत्ता, पारिस्थितिकी तन्त्र या इकोतन्त्र के घटक है।
Q28. पढ़ने को दैनिक जीवन की जरूरतों से जोड़ना-यह किस भाषाई कौशल का उद्देश्य है?
(1) लेखन कौशल का
(2) श्रवण कौशल का
(3) बोलने के कौशल का
(4) पठन कौशल का
Ans: (4) पठन कौशल का उद्देश्य पढ़ने को दैनिक जीवन की जरूरतों से जोड़ना है।
Q29. लेखन कौशल से सम्बन्धित नहीं है–
(1) लेख को कुशलतापूर्वक लिखना
(2) विषय-वस्तु को स्पष्ट व तार्किक रूप से संघठित करना
(3) व्याकरण का सही उपयोग
(4) विचारों के बीच सम्बन्ध स्थापित करना।
Ans: (4) विचारों के बीच सम्बन्ध स्थापित करना लेखन कौशल से सम्बन्धित नहीं है जबकि- व्याकरण का सही उपयोग, कुशल लेख एवं विषय वस्तु का स्पष्ट एवं तार्किक रूप लेखन कौशल से सम्बन्धित है।
Q30. ‘बलाघात’ का प्रयोग होगा–
(1) बोलने के कौशल में
(2) श्रवण कौशल में
(3) पठन कौशल में
(4) लेखन कौशल में
Ans: (1) बोलने के कौशल में बलाघात का प्रयोग होता है।

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