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034 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. ‘थ’ किस वर्ग का व्यंजन है?
(1) तालव्य
(2) ओष्ठय
(3) दन्त्य
(4) ऊष्म
Ans: (3) ‘थ’ दन्त्य वर्ग का व्यंजन है। उच्चारण-स्थान के आधार पर निम्नलिखित वर्ग के व्यंजनकण्ठ ्य (कण्ठ से) – क, ख, ग, घ, ङ तालव्य (तालु से) – च, छ, ज, झ, ञ, य, श मूर्धन्य (तालु के मूर्धाभाग से) – ट, ठ, ड, ढ, ण दन्त्य (दाँतों के मूल से) – त, थ, द, ध वर्त्स्य (दन्तमूल से) – न, स, र, ल ओष्ठ्य (दोनों होंठो से) – प, फ, ब, भ, म दन्तोष्ठ्‌य (निचले होंठ और ऊपर के दाँतों से) – व, फ स्वर यन्त्रीय (काकल्य) – ह
Q2. ‘पन्नग’ का समानार्थी शब्द है –
(1) पिक
(2) उरग
(3) पिनाक
(4) केशरी
Ans: (2) ‘पन्नग’ का समानार्थी उरग होता है। इसके अन्य पर्यायवाची अहि, सर्प, भुजंग, विषधर, व्याल, फणी, नाग, सांप, फणिधर, सरीसृप आदि है। केशरी का पर्यायवाची सिंह, पिनाक का पर्यायवाची धनुष तथा पिक का पर्यायवाची कोयल होता है।
Q3. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि। सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि।। उपरोत्त दोहे में ‘अँधियारा और दीपक’ किसके प्रतीक हैं?
(1) बुरे और अच्छे के
(2) अन्धेरे व प्रकाश के
(3) अज्ञान और ज्ञान के
(4) प्रभु और प्राप्ति के
Ans: (3) जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि। सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि।। इस दोहे में कवि ने ‘अँधियारा और दीपक’ के प्रतीक के रूप में अज्ञान और ज्ञान की बात करता है।
Q4. ‘यामा’ किसकी रचना है?
(1) महादेवी वर्मा
(2) भवानी प्रसाद मिश्र
(3) अज्ञेय
(4) मुत्तिबोध
Ans: (1) ‘यामा’ छायावाद की प्रमुख कवयित्री महादेवी वर्मा का काव्य संग्रह है। इनके अन्य काव्य संग्रह – नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा तथा सप्तपर्णा है। ‘यामा’ काव्यसंग्रह पर सन्‌ 1982 में महादेवी वर्मा को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था। महादेवी वर्मा को आधुनिक युग की मीरा कहा जाता है, इन्हें बौद्ध धर्म से प्रभावित रहस्यवादी कवयित्री के रूप में स्वीकार किया जाता है।
Q5. जो शब्दांश किसी शब्द के अन्त में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं, उसे कहते हैं –
(1) सन्धि
(2) समास
(3) प्रत्यय
(4) उपसर्ग
Ans: (3) जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं, उन्हे प्रत्यय कहते हैं। उपसर्ग – ‘उपसर्ग’ उस शब्दांश या अव्यय को कहते हैं, जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करता है। समास- दो या अधिक शब्दों (पदों) का परस्पर सम्बन्ध बताने वाले शब्दों अथवा प्रत्ययों का लोप होने पर उन दो या अधिक शब्दों से जो एक स्वतन्त्र शब्द बनता है, उस शब्द को सामासिक शब्द कहते हैं और उन दो या अधिक शब्दों का जो संयोग होता है वह समास कहलाता है। सन्धि – दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहते हैं। दो निर्दिष्ट अक्षरों के पास-पास आने के कारण, उनके संयोग से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे सन्धि कहते हैं।
Q6. स्थिति में परिवर्तन न होने के भाव को व्यत्त करने वाली सही कहावत है –
(1) न सुख में मोटे न दुःख में दुबले
(2) जस दूल्हा तस बनी बराता
(3) न गरजे न बरसे वही धूप की धूप
(4) वही ढांक के तीन पात
Ans: (4) स्थिति में परिवर्तन न होने के भाव को व्यत्त करने वाली कहावत ‘‘वही ढांक के तीन पात’’ है। जस दूल्हा तस बनी बराता का अर्थ ‘‘नेतृत्वकर्ता के स्वभाव के अनुसरण कर्ता होते है’’। न सुख में मोटे न दुःख में दुबले कहावत का अर्थ है- ‘‘सभी परिस्थितियों में एक समान रहना।’’
Q7. क्रिया से बनने वाली भाववाचक संज्ञा है–
(1) बुराई
(2) थकावट
(3) आलस्य
(4) बुढ़ापा
Ans: (2) ‘थकावट क्रिया’ से बनने वाली भाववाचक संज्ञा है। जिसमें थकना क्रिया है। बुढ़ापा जातिवाचक संज्ञा है, जबकि बुराई तथा आलस्य भी भाववाचक संज्ञा है लेकिन इनका निर्माण क्रिय से नही होता है।
Q8. ‘रीत्यनुसार’ का सही सन्धि-विच्छेद है–
(1) रीत + अनुसार
(2) रीत्य + अनुसार
(3) रीति + अनुसार
(4) रीत्य + नुसार
Ans: (3) रीति + अनुसार रीत्यनुसार (यणसन्धि) यण सन्धि (इको यणचि) – यदि ‘इ’, ‘ई’, ‘उ’, ‘ऊ’ और ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए, तो इ-ई का य, उ-ऊ का व और ऋ का र हो जाता है।
Q9. ‘अनुरूप’ समस्त पद में कौन-सा समास है?
(1) कर्मधारय
(2) तत्पुरुष
(3) अव्ययीभाव
(4) बहुब्रीहि
Ans: (3) ‘अनुरूप’ शब्द के समस्त पद में अव्ययीभाव समास है। अनुरूप शब्द में अनु एक अव्यय है। जिसमें पूर्वपद की प्रधानता हो और सामासिक या समस्त पद अव्यय हो जाए वहाँ अव्ययीभाव समास होता है। तत्पुरुष समास – तत्पुरुष समास में अन्तिम पद प्रधान होता है। इस समास में साधारणतः प्रथम पद विशेषण और द्वितीय पद विशेष्य होता है इस कारण इस समास में उसकी प्रधानता रहती है। माखनचोर – माखन को चुराने वाला कर्मधारय समास – जिस (कर्मधारय) समास का प्रथम पद विशेषण और द्वितीय पद विशेष्य अथवा संज्ञा होता है उसे कर्मधारय समास कहते हैं। महाकवि – महान है जो कवि बहुब्रीहि समास – इस समास में दोनों में से कोई भी पद प्रधान नहीं होता है, दोनों शब्द मिलकर एक नया अर्थ प्रकट करते हैं। पीताम्बर पीले वध्िां हैं जिसके अर्थात्‌ विष्णु
Q10. कौन-सा शब्द ‘भ्रमर’ का पर्यायवाची नहीं है?
(1) मधुकर
(2) षट्‌पद
(3) अलि
(4) प्रभाकर
Ans: (4) प्रभाकर शब्द भ्रमर का पर्यायवाची नहीं है। भ्रमर के पर्यायवाची शब्द – मधुकर, मधुप, अलि, भृंग, भौंरा, षट्‌पद, मधुराज, मधुमक्षा आदि हैं। प्रभाकर सूर्य का पर्यायवाची है, इसके अन्य पर्यायवाची शब्द – रवि, भानु, दिनकर, दिवाकर, भास्कर, सविता, पतंग, आदित्य आदि हैं।
Q11. ‘ऋजुता’ का सही विलोम है –
(1) वक्रता
(2) टेढ़ापन
(3) बाँकापन
(4) तिरछापन
Ans: (1) ‘ऋजुता’ का विलोम वक्रता है। टेढ़ापन का विलोम सीधापन होता है।
Q12. ‘जो पसीने से उत्पन्न हो’ के लिए एक उपर्युत्त शब्द है –
(1) जरायुज
(2) स्वयंभू
(3) स्वेदज
(4) अण्डज
Ans: (3) जो पसीने से उत्पन्न हो – स्वेदज जिसका जन्म अण्डे से हो – अण्डज जो अपने आप उत्पन्न हुआ हो – स्वयंभू जरायु (खेंड़ी) या गर्भाशय से उत्पन्न होने वाला – जरायुज
Q13. साखी का मूल तत्सम शब्द क्या है?
(1) साक्षी
(2) शिक्षा
(3) सखी
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (1) साखी का मूल तत्सम शब्द साक्षी होता हे।
Q14. हिन्दी का ‘कौन’-सा प्रेमाख्यान कवि एक आँख का काना था?
(1) शेखनवी
(2) ईश्वर दास
(3) कुतुबन
(4) जायसी
Ans: (4) हिन्दी साहित्य प्रेममार्गी (सूफी) शाखा के प्रमुख प्रेमाख्यान कवि जायसी एक आँख से अन्धे थे। जायसी प्रसिद्ध सूफी शेख मोहिदी (मुहीउद्दीन) के शिष्य थे और शेरशाह के समकालीन कवि थे तथा अमेठी के जायस नामक स्थान पर रहते थे। पद्ममावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरानामा, मसलानामा तथा कन्हावत आदि मलिक मुहम्मद जायसी के ग्रंथ हैं। जबकि सत्यवती कथा ईश्वरदास, ‘ज्ञानदीप’ शेखनवी की तथा ‘मृगावती’ कुतुबन का ग्रंथ है।
Q15. ‘कवि’ शब्द में कौन-सी संज्ञा है?
(1) जातिवाचक
(2) व्यत्तिवाचक
(3) द्रव्यवाचक
(4) भाववाचक
Ans: (1) ‘कवि’ शब्द जातिवाचक संज्ञा है। जिन संज्ञाओं से एक ही प्रकार की वस्तुओं अथवा व्यत्तियों का बोध हो, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- मनुष्य, घर, पहाड़, नदी। व्यत्तिवाचक संज्ञा – जिस शब्द से किसी एक वस्तु या व्यत्ति का बोध हो, उसे व्यत्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – राम, गंगा, काशी, हिमालय, रामचरितमानस भाववाचक संज्ञा – जिस संज्ञा शब्द से व्यत्ति या वस्तु के गुण या धर्म, दशा अथवा व्यापार का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – लम्बाई, बुढ़ापा, नम्रता, मिठास द्रव्यवाचक संज्ञा – जिस संज्ञा से नाप तौल वाली वस्तु का बोध हो उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।
Q16. सस्वर वाचन का मुख्य उद्देश्य है –
(1) बच्चों की पढ़ने सम्बन्धी झिझक को समाप्त करना
(2) पढ़ने में आनन्द की अनुभूति करना
(3) बोल-बोलकर पढ़ना
(4) द्रुत गति से वाचन करना
Ans: (1) सस्वर वाचन का मुख्य उद्देश्य बच्चों (छात्रों) की पढ़ने सम्बन्धी झिझक को समाप्त करना। सस्वर वाचन द्वारा बच्चों को शब्दों का सही ज्ञान होता है तथा उच्चारण सम्बन्धी सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान शिक्षक करता है। सस्वर पाठन से बच्चों में बोलने की शैली का विकास होता है।
Q17. हिन्दी भाष सीखने में पाठ्य पुस्तक –
(1) साधन है
(2) साध्य है
(3) एकमात्र संसाधन है
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (1) हिन्दी भाषा सीखने में पाठ्य पुस्तक साधन है। छात्रों को सर्वप्रथम भाषा में शब्दों का ज्ञान कराया जाता है, शब्दो का ज्ञान कराने के लिए बच्चों को पुस्तक की आवश्यकता पड़ती है तथा प्रत्येक स्तर पर बच्चों को उनकी पाठ्य पुस्तकों के अनुरूप हिन्दी भाषा का ज्ञान देते हैं। पुस्तक एक विद्यार्थी के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है जिसका प्रयोग वह अपने सम्पूर्ण छात्र जीवन में करता है।
Q18. भाषा शिक्षण का आदर्श वातावरण है –
(1) भाषागत शुद्धता पर बल
(2) विद्यार्थियों को अभिव्यत्ति की पूरी आजादी
(3) अध्यापक का एकालाप
(4) श्रव्य-दृश्य सामग्री का प्रचुर उपयोग
Ans: (2) भाषा शिक्षण का आदर्श वातावरण विद्यार्थियों को अभिव्यत्ति की पूरी आजादी प्रदान करता है। छात्र जिस भाषा को सीखता है वह उसी भाषा के माध्यम से अपनी अभिव्यत्ति भी करता है। विद्यार्थियों को कक्षा में अपनी अभिव्यत्ति की आजादी होनी चाहिए, जिससे कक्षा का माहौल आदर्श होता है।
Q19. ‘‘वह लेख जिसमें किसी मुद्दे के प्रति समाचार-पत्र की अपनी राय प्रकट होती है’’ को कहते हैं –
(1) विशेष रिपोर्ट
(2) आलेख
(3) सम्पादकीय
(4) उल्टा पिरामिड
Ans: (3) वह लेख जिसमें किसी मुद्दे के प्रति समाचार पत्र की अपनी राय प्रकट हाती है उसे सम्पादकीय कहते हैं।
Q20. ‘जहाँ-जहाँ’ शब्द व्याकरण की दृष्टि से क्या है?
(1) विपरीतार्थक शब्द-युग्म
(2) भिन्नार्थी शब्द-युग्म
(3) पुनरुत्त शब्द-युग्म
(4) एकार्थी शब्द-युग्म
Ans: (3) ‘जहाँ-जहाँ’ शब्द व्याकरण की दृष्टि से पुररूत्त शब्द युग्म हैं इसके अन्य उदाहरण – कहाँ-कहाँ, अभी-अभी, कभी-कभी, जैसे-जैसे आदि हैं। भिन्नार्थी शब्द युग्म का अर्थ ऐसे शब्द जो एक दूसरे से भिन्न हो। विपरीतार्थक शब्द युग्म का अर्थ ऐसे शब्द जो एक दूसरे के विपरीत (विलोम/उल्टा) हो। एकार्थी शब्द युग्म का अर्थ है ऐसे शब्द जो एक दूसरे के समान है।
Q21. किसी वस्तु को दूसरे देश से अपने देश में क्रय कर लाने की क्रिया कहलाती है –
(1) निर्यात
(2) आयात
(3) प्रेषण
(4) वाहन
Ans: (2) किसी वस्तु को दूसरे देश से अपने देश में क्रय कर लाने की क्रिया को ‘आयात’ कहते हैं। जबकि किसी वस्तु को अपने देश से दूसरे देश में बेचने की क्रिया को ‘निर्यात’ कहते हैं। किसी वस्तु या पत्र को कहीं भेजने की प्रक्रिया को ‘प्रेषण’ कहते हैं।
Q22. ‘वह तोड़ती पत्थर, देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर।’ उपरोत्त पंक्यिाँ किसकी हैं?
(1) भवानी शंकर पन्त
(2) सुमित्रानन्दन पन्त
(3) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
(4) नागार्जुन
Ans: (3) ‘वह तोड़ती पत्थर, देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर।’ उपरोत्त पंत्तियाँ प्रमुख छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला है। (2) छोड़ द्रुमो की मृदु छाया, तोड़ प्रकृति से भी माया (सुमित्रानंदपंत) बाले तेरे बाल जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन? (1) कई दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उसके पास। (नागार्जुन)
Q23. सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात। मनो नीलमणि शैल पर, आतप परयो प्रभात।। प्रस्तुत पंत्तियों में कौन-सा अलंकार है?
(1) उपमा
(2) अनुप्रास
(3) रूपक
(4) उत्प्रेक्षा
Ans: (4) सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात। मनो नीलमणि शैल पर, आतप परयो प्रभात।। प्रस्तुत पंत्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार है। जहाँ उपमेय (प्रस्तुत) में कल्पित उपमान (अप्रस्तुत) की संभावना को उत्प्रेक्षा अलंकार कहते हैं। उपमा अलंकार – दो वस्तुओं में समानधर्म के प्रतिपादन को उपमा अलंकार कहते हैं। उपमा का अर्थ है – समता, तुलना या बराबरी। रूपक अलंकार – उपमेय या उपमान का आरोप या उपमान और उपमेय का अभेद ही रूपक अलंकार है। अनुप्रास अलंकार – वर्णों की आवृत्ति को अनुप्रास अलंकार कहते हैं। आवृत्ति का अर्थ किसी वर्ण का एक से अधिक बार आना है।
Q24. ‘गीता मन्द-मन्द मुस्कुरा रही है’ इस वाक्य में ‘मन्द-मन्द’ व्याकरण की दृष्टि से क्या है?
(1) क्रिया-विशेषण
(2) विशेषण
(3) संज्ञा
(4) सर्वनाम
Ans: (1) मंद-मंद शब्द युग्म किसी क्रिया की विशेषता बताता है। अतः यह क्रिया-विशेषण है। जो शब्द क्रिया की विशेषता बतायें उसे क्रिया-विशेषण कहते हैं। संज्ञा – संज्ञा उस विकारी शब्द को कहते हैं, जिससे किसी विशेष वस्तु, भाव और जीव के नाम का बोध हो। सर्वनाम – सर्वनाम उस विकारी शब्द को कहते हैं, जो पूर्वा-पर सम्बन्ध से किसी भी संज्ञा के बदले आता है। विशेषण – जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए उसे विशेषण कहते हैं। जिसकी विशेषता बताई जाए, वह विशेष्य कहलाता है।
Q25. ज्ञानपीठ पुरस्कार किस क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने पर दिया जाता है?
(1) सिनेमा
(2) समाज सेवा
(3) विज्ञान
(4) साहित्य
Ans: (4) ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय भाषाओं में श्रेष्ठ साहित्य सृजन पर दिया जाता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत में साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार है। ज्ञानपीठ पुरस्कार का प्रारम्भ सन्‌ 1964 ई. से किया गया था। सन्‌ 1984 ई. के बाद ज्ञानपीठ पुरस्कार लेखक के समग्र साहित्यिक योगदान पर दिया जाने लगा।
निर्देश (प्र. सं. 2630) निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के सही उत्तर चुनिए। गद्यांश डॉ. रामकुमार वर्मा ने ऐतिहासिक एवं समस्यामूलक एकांकियों की रचना की है। उनके एकांकियों का मूल स्वर आदर्शवादी है। प्रेम, सेवा, उदारता, त्याग और बलिदान की भावनाओं से ओत-प्रोत इन ऐतिहासिक एकांकियों में भारत के अतीत गौरव को प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीयता की भावना जगाने का प्रयास किया गया है। समस्यामूलक एकांकियों में वर्मा जी ने शिक्षित मध्यमवर्गीय दम्पतियों की अनेक समस्याओं – प्रेम, सेक्स, सन्देह, दम्भ आदि को कथानक का विषय बनाया है, किन्तु उनकी परिणति आदर्श में हुई है क्योंकि उनके एकांकियों की नायिकाएँ अन्ततः अपने पति के सम्मान की रक्षा करती हुई दिखाई पड़ती हैं यथा ‘रेशमी टाई’ की ललिता और ‘एक्ट्रेस’ एकांकी की नायिका प्रभात कुमारी। अतिशय आदर्शवादिता के कारण वर्मा जी के एकांकी यथार्थ से दूर हो गए जान पड़ते हैं, किन्तु एकांकी की शिल्प की दृष्टि से वे हिन्दी के युग प्रवर्तक एकांकी माने जा सकते हैं। आरम्भ, कौतुहल, संकलन त्रय, चरम सीमा आदि तत्व उनके एकांकियों में बड़ी सूक्ष्मता से विद्यमान है। रंगमंचीयता एवं अभिनेयता के गुणों से भी उनके एकांकी सम्पन्न है तथा उनमें सरसता के साथ-साथ शिल्प की प्रौढ़ता भी विद्यमान है। वस्तुतः एकांकी कला को चरम यौवन पर पहुँचाने का श्रेय डॉ. रामकुमार वर्मा को ही दिया जाता है।
Q26. उपरोत्त गद्यांश का उपयुत्त शीर्षक क्या होगा?
(1) डॉ. रामकुमार वर्मा के एकांकी
(2) डॉ. वर्मा की लेखन शैली
(3) डॉ. रामकुमार वर्मा के नाटकों में राष्ट्रीयता
(4) डॉ. वर्मा के एकांकियों में रंगमंचीयता
Ans: (1) गद्यांश का उपर्युत्त शीर्षक डॉ. रामकुमार वर्मा की एकांकी होगा।
Q27. उपरोत्त गद्यांश में प्रयुत्त शैली है –
(1) विवेचनात्मक
(2) विवरणात्मक
(3) आलोचनात्मक
(4) गवेषणात्मक
Ans: (3) गद्यांश में आलोचनात्मक शैली का प्रयोग हुआ है। वर्मा जी अपने इस एकांकी में समाज में व्याप्त कुरीतियों तथा शिक्षित मध्यम वर्गीय दम्पत्तियों की अनेक समस्याओं- प्रेम, सेक्स, सन्देह, दम्भ आदि का विस्तृत आलोचनात्मक वर्णन किया है।
Q28. डा . रामकुमार वर्मा के एकांकियों का मूल स्वर है –
(1) आदर्शवादी
(2) यथार्थवादी
(3) आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी
(4) उपरोत्त में से कोई नहीं
Ans: (1) डॉ. रामकुमार वर्मा के एकांकियों का मूल स्वर आर्दशवादी है। उन्होंने अपने एकांकियों के माध्यम से प्रेम, सेवा, उदारता, त्याग और बलिदान की भावनाओं से ओत-प्रोत होती है तथा एकांकियों के माध्यम से भारत के अतीत के गौरव को तथा राष्ट्रीय भावना को जागृति किया है।
Q29. रंगमंचीयता एवं अभिनेयता की दृष्टि से वर्मा जी के एकांकी –
(1) असफल है
(2) सफल है
(3) सम्पादन माँगते है
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans: (2) रंगमंचीयता एवं अभिनेयता की दृष्टि से डॉ. रामकुमार वर्मा जी के एकांकी सफल है। रंगमंचीयता एवं अभिनेयता के गुणों के साथ-साथ उनमें सरसता एवं शिल्प कौशल की प्रौढ़ता भी विद्यमान थी।
Q30. वर्मा जी के समस्यामूलक एकांकियों में चित्रण किया गया है –
(1) राजनीतिक समस्या का
(2) शिक्षित मध्यमवर्गीय दम्पत्तियों की समस्या का
(3) शोषण की समस्या का
(4) सामाजिक समस्या का
Ans: (2) डॉ. रामकुमार वर्मा जी के समस्यामूलक एकांकियो में शिक्षित मध्यम वर्गीय दम्पत्तियों की अनेक समस्याओं – प्रेम, सेक्स, सन्देह, दम्भ आदि को प्रस्तुत किया है। अत्यधिक आदर्शवादिता के कारण वर्मा जी के एकांकी यथार्थ से परे दिखाई पड़ती है।

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