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033 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. ‘धर्म-कर्म’ किस प्रकार का शब्द है?
(1) युग्म
(2) विकारी
(3) विशेषण
(4) अव्यय
Ans: (1) जब दो अलग-अलग अर्थ वाले शब्दों को एक कर दिया जाता है तथा वह विशिष्ट अर्थ में प्रयुत्त होता है तब उसे शब्द युग्म या युग्मक कहते हैं। यहाँ पर धर्म तथा कर्म दो अलग- अलग अर्थ देने वाले शब्दों को एक कर दिया गया है इसलिए यह युग्म कहलाते हैं। (स्रोत- आधुनिक हिन्दी व्याकरण एवं रचना : डा . वासुदेव नन्दन प्रसाद)
Q2. ‘मैंने तो कुछ नहीं किया’ प्रस्तुत वाक्य में ‘तो’ व्याकरण की दृष्टि से क्या है?
(1) कर्ता
(2) क्रिया-विशेषण
(3) कारक
(4) निपात
Ans: (4) ‘मैनें तो कुछ नहीं किया’ वाक्य में ‘तो’ व्याकरण की दृष्टि से निपात है। नोट- साधारणतः निपात अव्यय ही है, हिन्दी में अधिकतर निपात शब्द समूह के बाद आते हैं, जिनको वे बल प्रदान करते हैैं। निपात के नौ प्रकार होते हैं- 1. स्वीकार्य निपात – हाँ, जी, जी हाँ। 2. नकारार्थक निपात – नहीं, जी नहीं। 3. निषेधात्मक निपात- मत। 4. प्रश्नबोधक – क्या? न 5. विस्मयादिबोधक – क्या
, काश
, काश कि
6. सीमाबोधक निपात – तो, ही, तक, पर, सिर्फ, केवल। 7. तुलनाबोधक निपात – सा। 8. अवधारण बोधक निपात – ठीक, लगभग 9. आदर बोधक निपात – जी। (स्रोत- आधुनिक हिन्दी व्याकरण एवं रचना : डा . वासुदेव नन्दन प्रसाद)
Q3. ‘किए गए उपकार का फल न मानने वाला’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है –
(1) कृतज्ञ
(2) कृतघ्न
(3) अपकृत
(4) उपकृत
Ans: (2) किए गए उपकार का फल न मानने वाला ‘कृतघ्न’ कहलाता है। जबकि किए गए उपकार को मानने वाले के लिए एक शब्द ‘कृतज्ञ’ होता है। (स्रोत- हिन्दी व्याकरण : डा . हरदेव बाहरी)
Q4. निम्नलिखित में से शुद्ध वाक्य है –
(1) तुलसी की कविता माधुर्यगुण प्रधान है
(2) तुलसी की कविता में माधुर्यता है
(3) तुलसी की कविता में मधुरतापन है
(4) तुलसी की कविता मधुराई से पूर्ण है
Ans: (1) ‘तुलसी की कविता माधुर्यगुण प्रधान है।’ वाक्य शुद्ध है। ‘माधुर्यता’ तथा ‘मधुरतापन’ शब्द त्रुटिपूर्ण हैं इनका शुद्ध रूप क्रमशः ‘माधुर्य’ एवं ‘मधुरता’ होता है।
Q5. ‘न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी’ का भाव है–
(1) खूब काम करना
(2) काम न करने का बहाना बनाना
(3) काम से दिल ऊबना
(4) काम में आलस्य करना
Ans: (2) ‘न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी’ का भाव हैकाम न करने का बहाना बनाना।
निर्देश (प्र. सं. 69) निम्नलिखित गद्यांश का ध्यानपूर्वक अध्ययन करके इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। मनुष्य नाशवान प्राणी है। वह जन्म लेने के बाद मरता अवश्य है। अन्य लोगों की भाँति महापुरुष भी नाशवान हैं। वे भी समय आने पर अपना शरीर छोड़ देते हैं, पर वे मरकर भी अमर हो जाते हैं। वे अपने पीछे छोड़े गए कार्य के कारण अन्य लोगों के द्वारा याद किए जाते हैं। उनके ये कार्य चिरस्थायी होते हैं और समय के साथ-साथ परिणाम और बल में बढ़ते जाते हैं। ऐसे कार्य के पीछे जो उच्च आदर्श होते हैं, वे स्थायी होते हैं और बदली परिस्थितियों में नये वातावरण के अनुसार अपने को ढाल लेते हैं। संसार ने पिछली पच्चीस शताब्दियों से भी अधिक में जितने भी महापुरुषों को जन्म दिया है, उनमें गाँधीजी को यदि बड़ा माना जाता है, तो भविष्य में भी उन्हें सबसे बड़ा माना जाएगा क्योंकि उन्होंने अपने जीवन की गतिविधियों को विभिन्न भागों में नहीं बाँटा, बल्कि जीवनधारा को हमेशा एक और अविभाज्य माना। जिन्हें हम सामाजिक, आर्थिक और नैतिक के नाम से पुकारते हैं, वे वास्तव में उसी धारा की उपधाराएँ है, उसी भवन के अलग-अलग पहलू हैं। उन्होंने सदा साध्य को ही महत्व नहीं दिया, बल्कि उस साध्य को पूरा करने के लिए अपनाए जाने वाले साधनों का भी ध्यान रखा। साध्य के साथ-साथ उसकी पूर्ति के लिए अपनाए गए साधन भी उपयुत्त होने चाहिए।
Q6. सामान्य पुरुष की तुलना में महापुरुष में सर्वाधिक विशेषता क्या है?
(1) महापुरुष मरकर भी अमर हो जाते हैं
(2) महापुरुष के कार्य समय के साथ परिणाम और बल में बढ़ते जाते हैं
(3) महापुरुष शरीर छोड़ने के बाद भी लोगों द्वारा याद किए जाते हैं
(4) महापुरुष जीवन में महान कार्य करते हैं
Ans: (1) सामान्य पुरुषों की तुलना में महापुरुषों में सर्वाधिक विशेषता यह है कि महापुरुष मरकर भी अमर हो जाते हैं और उनके द्वारा किए गये कार्यों के कारण लोग उन्हें याद रखते हैं।
Q7. महापुरुष मरकर भी अमर क्यों हो जाते हैं?
(1) उनके कार्य भावी पीढ़ी के लिए अनुकरणीय होते हैं
(2) महापुरुष बदली परिस्थितियों में नये वातावरण के अनुसार अपने को ढाल लेते हैं
(3) महापुरुष आजीवन लोक मंगल की साधना में तत्पर रहते हैं
(4) वे अपने पीछे छोड़ गए चिरस्थायी आदर्श कार्यों के कारण अन्य लोगों द्वारा याद किए जाते हैं
Ans: (4) महापुरुष अपने पीछे छोड़ गये चिरस्थायी आदर्श कार्यों के कारण मर कर भी अमर हो जाते हैं- और अन्य लोगों द्वारा याद किए जाते हैं।
Q8. गाँधीजी को सबसे बड़ा महापुरुष क्यों माना जाता है?
(1) क्योंकि उन्होंने अपने जीवन की गतिविधियों को विभिन्न भागों में नहीं बाँटा
(2) क्योंकि वह पिछली पच्चीस शताब्दियों में सबसे महान थे
(3) गाँधीजी का एकमात्र लक्ष्य दरिद्रनारायण के सामाजिक,आर्थिक और नैतिक स्तर को सुदृढ़ करना था और इसके लिए वे समर्पित थे
(4) उन्होंने साध्य व साधन को समान महत्व नहीं दिया
Ans: (1) गांधी जी ने अपने जीवन की गतिविधियों को विभिन्न भागों में नहीं बांटा, अपितु जीवन धारा को एक और अविभाज्य माना जिन्हें हम सामाजिक, आर्थिक और नैतिक के नाम से पुकारते हैं उन्होंने सदा साध्य को महत्व न देकर साधन को ही महत्व दिया इसलिए हम गांधी जी को सबसे बड़ा महापुरुष मानते हैं।
Q9. गाँधीजी के अनुसार साध्य और साधन में अधिक महत्वपूर्ण क्या है?
(1) साध्य व साधन दोनों का पारस्परिक समान महत्त्व है
(2) साधन का ध्यान रखना अधिक महत्त्वपूर्ण है
(3) साध्य के बिना साधन अर्थहीन है
(4) साधन व साध्य दोनों का अलग-अलग महत्त्व है
Ans: (1) गांधी जी के अनुसार, साध्य और साधन दोनों का पारस्परिक समान महत्व है क्योंकि गांधी जी ने कहा कि साध्य के साथ-साथ उसकी पूर्ति के लिए अपनाए गए साधन भी उपयुत्त होने चाहिए। उत्तम साध्य की प्राप्ति उत्तम साधन से होती है।
Q10. वर्तनी की दृष्टि से कौन-सा शब्द शुद्ध है?
(1) विरहिणी
(2) विरहणी
(3) विरिहणी
(4) विरहिणि
Ans: (1) निम्नलिखित में वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द विरहिणी है।
Q11. ‘नैसर्गिक’ का विलोम है
(1) कल्पित
(2) सात्विक
(3) कृत्रिम
(4) जटिल
Ans: (3) नैसर्गिक का विलोम – कृत्रिम है। जबकि, कृत्रिम का विलोम – स्वाभाविक/प्रकृत एवं जटिल का विलोम – सरल, सात्विक का विलोम – तामसिक तथा कल्पित का विलोम – वास्तविक होता है। (स्रोत- हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग : डा . हरदेव बाहरी)
Q12. ‘चन्द्रशेखर’ शब्द में समास है
(1) द्विगु
(2) तत्पुरुष
(3) बहुब्रीहि
(4) कर्मधारय
Ans: (3) ‘चन्द्रशेखर’ शब्द में बहुब्रीहि समास है। चन्द्रशेखर का विग्रह है – चन्द्र है शिखर पर जिसके अर्थात्‌ शिव। बहुब्रीहि समास – इस समास में दोनों में से कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ को स्पष्ट करते हैं। जैसे– दशानन – दस है आनन जिसके (रावण) चतुर्भुज – चार भुजाएं हैं जिसके (विष्णु) अंशुमाली – अंशु (किरणें) हैं माला जिसकी (सूर्य) आदि। बहुब्रीहि समास- जहाँ पर प्रथम पद द्वितीय पद की विशेषता बताए और फिर दोनों पद मिलकर किसी अन्य पद की विशेषता बताते है, वहाँ बहुब्रीहि समास होता है। (स्रोत-आधुनिक हिन्दी व्याकरण : वासुदेव नन्दन)
Q13. सूर्य का पर्याय कौन नहीं है?
(1) सुधांशु
(2) आदित्य
(3) दिवाकर
(4) अंशुमाली
Ans: (1) सुधांशु सूर्य का पर्यायवाची नहीं है। यह चन्द्रमा का पर्यायवाची है चन्द्रमा के अन्य पर्यायवाची हैं- निशानाथ, इन्दु, विधु, शशांक, हिमकर, रजनीश आदि। जबकि- आदित्य, दिवाकर, अशुंमाली सूर्य के पर्यायवाची हैं। (स्रोत- हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग : हरदेव बाहरी)
Q14. निम्नलिखित में से पवन का पर्यायवाची शब्द है
(1) अनिल
(2) अनल
(3) नलिन
(4) सलिल
Ans: (1) ‘अनिल’ पवन का पर्यायवाची शब्द है, ‘पवन’ के अन्य पर्यायवाची हैं- वायु, समीर, मारुत, प्रभंजन, हवा। जबकि ‘अनल’ ‘अग्नि’ का पर्यायवाची शब्द है (स्रोत- हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग : हरदेव बाहरी)
Q15. ‘लोकायतन’ किस कवि की रचना है?
(1) सुमित्रानन्दन पन्त
(2) सोहनलाल द्विवेदी
(3) श्रीधर पाठक
(4) महादेवी वर्मा
Ans: (1) ‘लोकायतन’ सुमित्रानन्दन पंत की रचना है। यह महाकाव्य है तथा महात्मा गाँधी के जीवन पर लिखा गया है सुमित्रानन्दन पंत को ‘लोकायतन’ पर सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला।
Q16. निम्नलिखित में से आचार्य चतुरसेन रचित उपन्यास का नाम है
(1) गुढ़ कुण्डार
(2) गोदान
(3) चन्द्रकान्ता
(4) सोमनाथ
Ans: (4) ‘सोमनाथ’ चतुरसेन शास्त्री का उपन्यास है इनके अन्य उपन्यासों में- वैसाली की नगर वधू, वयं रक्षामः, रत्त की प्यास एवं आलमगीर है। गोदान उपन्यास मुंशी प्रेमचन्द्र का तथा ‘गढ़कुण्डार’ वृन्दावन लाल वर्मा का उपन्यास है। ‘चन्द्रकान्ता’ उपन्यास देवकी नन्दन खत्री का है (स्रोत- हिन्दी साहित्य का इतिहास : डा . नगेन्द्र)
Q17. ‘हरि-पद कोमल कमल से’ इस पद में अलंकार है –
(1) रूपक
(2) उपमा
(3) प्रतीप
(4) उत्प्रेक्षा
Ans: (2) ‘हरि-पद कोमल कमल से’ यहां हरि (विष्णु) के पैर की तुलना कोमल कमल से की गई है अतः यहां पर उपमा अलंकार होगा। उपमा की परिभाषा-जहां समान गुण धर्म के आधार पर एक वस्तु की तुलना दूसरे वस्तु से की जाती है वहां उपमा अलंकार होता है। (स्रोत- हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग : डा . हरदेव बाहरी)
Q18. ‘पेड़ पर पक्षी बैठे है।’ इस वाक्य में ‘पेड़ पर’ पद में कौन-सा कारक है?
(1) अपादान
(2) करण
(3) सम्बन्ध
(4) अधिकरण
Ans: (4) पेड़ पर पक्षी बैठे हैं। वाक्य में ‘पेड़ पर’ में अधिकरण कारक हैं। कारक के आठ भेद है- 1. कर्ता – ने 2. कर्म – को 3. करण – से 4. सम्प्रदान – के लिए 5. अपादान – से (अलगाव के लिए) 6. सम्बन्ध – का, की, के, रा, री रे 7. अधिकरण – में, पर 8. सम्बोधन, हे
, अजी
, अहो
, अरे
, आदि (स्रोत-आधुनिक हिन्दी व्याकरण एवं रचना : डा . वासुदेव नन्दन)
Q19. ‘वह आजकल दिल्ली में है’। इस वाक्य में रेखांकित शब्द है –
(1) अव्यय
(2) क्रिया-विशेषण
(3) सर्वनाम
(4) क्रिया
Ans: (1) वह आजकल दिल्ली में है इस वाक्य में ‘आजकल’ अव्यय है। जिसका व्यय न हो अव्यय है। जो शब्द लिंग, वचन, काल, पुरूष के आधार पर परिवर्तित नहीं होते अव्यय कहलाते है। ‘आजकल’ अवधि वाचक अव्यय है। (स्रोत-आधुनिक हिन्दी व्याकरण एवं रचना : डा . वासुदेव नन्दन)
Q20. रामचरितमानस्‌ की रचना की गई है –
(1) ब्रजभाषा में
(2) अवधी में
(3) भोजपुरी में
(4) मैथिली में
Ans: (2) रामचरितमानस की रचना महाकवि तुलसीदास ने अवधी भाषा में की है। रामचरितमानस में प्रधान रस शांत है तथा इसमे सात काण्ड है, इसे तुलसी जी ने 2 वर्ष सात माह 26 दिन में पूर्ण किया। (स्रोत-हिन्दी साहित्य का इतिहास-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल)
Q21. निम्नलिखित में ‘तत्सम’ शब्द है
(1) बादल
(2) जलद
(3) हवा
(4) पानी
Ans: (2) निम्न में तत्सम शब्द ‘जलद’ है, जबकि ‘बादल’ का तत्सम वारिद है तथा ‘हवा’ का तत्सम वायु है। (स्रोत-हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग : डा . हरदेव बाहरी)
Q22. निम्नलिखित शब्दों में कौन-सा शब्द ‘तत्सम’ नहीं है?
(1) मेघ
(2) आकाश
(3) पवन
(4) सियार
Ans: (4) निम्नलिखित में ‘सियार’ तद्‌भव शब्द है सियार का तत्सम ‘शृंगाल’ होता है जबकि आकाश, मेघ, पवन, तत्सम शब्द है। (स्रोत-हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग : डा . हरदेव बाहरी)
Q23. ‘महर्षि’ शब्द में कौन-सी सन्धि है?
(1) वृद्धि सन्धि
(2) दीर्घ सन्धि
(3) गुण सन्धि
(4) यण्‌ सन्धि
Ans: (3) ‘महर्षि’ शब्द में गुण सन्धि है यह स्वर सन्धि का भेद है महर्षि का सन्धि विच्छेद है- महा ऋषि ृ आ ऋ ृ ‘अर’ इसलिए यह गुण संधि का उदाहरण है। (स्रोत-हिन्दी भाषा शब्द अर्थ प्रयोग : डा . हरदेव बाहरी)
Q24. ‘उल्लास’ का सन्धि-विच्छेद है
(1) उल्ल आस
(2) उल आस
(3) उल्‌ लास
(4) उत्‌ लास
Ans: (4) उल्लास का सन्धि-विच्छेद उत्‌ लास होगा। यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। क्योंकि व्यंजन सन्धि के सूत्र तोर्लि के अनुसार यदि ‘त’, ‘द’ के बाद ‘ल’ आये तो ‘त’, ‘द’ दोनों ‘ल’ में बदल जाते है- अतः यहां उल्लास का सन्धि विच्छेद- उत्‌ लास होगा। (स्रोत-आधुनिक हिन्दी व्याकरण एवं रचना : डा . वासुदेव नन्दन)
Q25. किसी विषय में विद्वता प्राप्त करने के लिए……. आवश्यक है।
(1) अध्यवसाय
(2) प्रतियोगिता
(3) चिन्तन
(4) मनन
Ans: (1) किसी विषय में विद्वता प्राप्त करने के लिए ‘अध्यवसाय’ की आवश्यकता होती है।
Q26. सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म……….में हुआ था।
(1) कौसानी
(2) भवाली
(3) नैनीताल
(4) अल्मोड़ा
Ans: (1) सुमित्रानन्दन पंत का जन्म 1900 ई. में कौसानी (अल्मोडा) में हुआ था। तथा मृत्यु 1977 में इलाहाबाद में हुई थी इनके बचपन का नाम ‘गुसाई दत्त’ था। इन्हें प्रकृति का सुकुमार कवि कहा गया। (स्रोत- हिन्दी साहित्य का इतिहास : डा . नगेन्द्र)
Q27. ‘भगवान भारतवर्ष में गूँजे हमारी भारती’ किस कवि की रचना की पंत्ति है?
(1) रामनरेश त्रिपाठी
(2) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(3) श्यामनारायण पाण्डेय
(4) मैथिलीशरण गुप्त
Ans: (4) उपर्युत्त पंत्ति मैथिली शरण गुप्त की है यह उनकी कृति भारत-भारती (1912) से ली गई है। (स्रोत- हिन्दी साहित्य का इतिहास : डा . नागेन्द्र)
Q28. ‘पहाड़ पर लालटेन’ किसकी रचना है?
(1) शिवानी
(2) रमेशचन्द्र शाह
(3) मंगलेश डबराल
(4) नागार्जन
Ans: (3) ‘पहाड़ पर लालटेन’ मंगलेश डबराल की रचना है यह उनका काव्य संग्रह है, इनकी और रचनाएं निम्न है – घर का रास्ता, हम जो देखते है, आवाज भी एक जगह है।
Q29. जयशंकर प्रसाद बहुत बड़े नाटककार थे। उन्होंने………… नाटक की रचना की।
(1) शशिगुप्त
(2) अजातशत्रु
(3) झाँसी की रानी
(4) राजमुकुट
Ans: (2) जयशंकर प्रसाद युग प्रवर्तक नाटककार है उन्होंने ‘अजातशत्रु’ नाटक की रचना की इनके प्रमुख नाटक निम्न हैसज्जन, कल्याणी परिणय, करुणालय, स्कन्धगुप्त, प्रायश्चित, धुवस्वामिनी आदि। ‘झाँसी की रानी’ वृन्दावन लाल वर्मा का नाटक है तथा ‘राजमुकुट’ गोबिन्द बल्लभ पंत का नाटक है। (स्रोत- हिन्दी साहित्य का इतिहास – डा . नगेन्द्र)
Q30. निम्नलिखित में से रीतिकालीन कवि कौन हैं?
(1) सूरदास
(2) मीराबाई
(3) नाभादास
(4) बिहारी लाल
Ans: (4) बिहारी लाल रीति कालीन कवि हैं यह रीतिकाल के रीतिसिद्ध धारा में आते हैं। जबकि मीराबाई, सूरदास और नाभादास भत्तिकाल के कवि हैं। (स्रोत- हिन्दी साहित्य का इतिहास : आचार्य शुक्ल)

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