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032 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. इस गद्यांश का मूल कथन क्या है?
(1) विश्व में शध्िांाध्िांों की होड़
(2) आतंक और सर्वनाश का भय
(3) द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका
(4) निःशस्त्रीकरण और विश्व शान्ति
Ans: (4) इस गद्यांश का मूल कथानक निःशस्त्रीकरण और विश्वशान्ति है। गद्यांश के माध्यम से लेखक सर्व विनाशकारी शध्िां से बचने तथा देशों के बीच आपस में शान्ति तथा सौहार्द स्थापित करने की बात करता है।
Q2. भयंकर विनाशकारी आधुनिक शस्त्राध्िांों को बनाने की प्रेरणा किसने दी?
(1) अमेरिका की विजय ने
(2) अमेरिका ने
(3) जापान पर गिराए गए ‘अणु बम’ ने
(4) बड़े देशों की पारस्परिक प्रतिस्पर्द्धा ने
Ans: (1) द्वितीय विश्वयुद्ध में अजेय जापान को अमेरिका ने पराजित कर दिया। वही से भयंकर विनाशकारी आधुनिक शध्िांास्त्रों को बनाने की प्रेरणा विश्व के अन्य देशों (रूस, ब्रिटेन, प्रांस आदि) को मिली तथा वो सर्वविनाशकारी शस्त्रास्त्र बनाने लगे।
Q3. एटम बम की अपार शक्ति का प्रथम अनुभव कैसे हुआ?
(1) जापान की अजेय शक्ति की पराजय से
(2) जापान में हुई भयंकर विनाशलीला से
(3) अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और प्रांस की प्रतिस्पर्द्धा से
(4) अमेरिका की विजय से
Ans: (1) एटम बम का प्रथम प्रयोग द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अजेय शक्ति मानी जाने वाली जापान के ऊपर अमेरिका ने किया तथा कुछ ही क्षणों में जापान को पराजित कर दिया। जापान पर अमेरिका द्वारा एटम बम के प्रयेाग से उसकी अपारशक्ति का प्रथम अनुभव हुआ।
Q4. बड़े-बड़े देश आधुनिक विनाशकारी शस्त्रास्त्र क्यों बना रहे हैं?
(1) अपने संसाधनों का प्रयोग करने के उद्देश्य से
(2) अपनी-अपनी सेनाओं में कमी करने के उद्देश्य से
(3) अपना-अपना सामरिक व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से
(4) पारस्परिक भय के कारण
Ans: (4) बड़े-बड़े देश आधुनिक विनाशकारी शध्िांास्त्र पारस्परिक भय के कारण बनाने लगे। शध्िांाध्िांों के निर्माण द्वारा अपनी वैश्विक सामरिक शक्ति का प्रदर्शन करते हैं।
Q5. आधुनिक युद्ध भयंकर व विनाशकारी होते हैं, क्योंकि –
(1) अधिकांश जनता और उनकी सम्पत्ति नष्ट हो जाती है
(2) दोनों देशों के शस्त्राध्िां इन युद्धों में समाप्त हो जाते हैं
(3) दोनों देशों में महामारी और भुखमरी फैल जाती है
(4) दोनों देशों की सेनाएँ इन युद्धों में मारी जाती हैं
Ans: (1) आधुनिक युद्ध भयंकर व विनाशकारी होते हैं, क्योंकि आधुनिक युद्ध आधुनिक हथियारों (एटम बम) द्वारा अधिकांश जनता और उनकी सम्पत्ति नष्ट हो जाती है।
Q6. ‘प्रायः निर्दलीय, सत्तारूढ़ दल में सम्मिलित होकर लाभ उठा लेते हैं।’ उपरोत्त वाक्य के लिए सर्वाधिक उपयुत्त मुहावरा होगा–
(1) पाँव जमीन पर न रखना
(2) बहती गंगा में हाथ धोना
(3) नहले-पे-दहला मारना
(4) दो नावों पर पाँव रखना
Ans: (2) ‘प्रायः निर्दलीय, सत्तारूढ़ दल में सम्मिलित होकर लाभ उठाते हैं।’ उपरोत्त वाक्य के लिए सर्वाधिक उपयुत्त मुहावरा है- ‘‘बहती गंगा में हाथ धोना’’। इसका शाब्दिक अर्थ होता है- ‘अवसर का लाभ उठाना’।
Q7. ‘अनुरोध-आग्रह’ शब्द युग्म में अनुरोध का अर्थ होता है विनयपूर्वक याचना करना, तो ‘आग्रह’ का आशय होगा–
(1) अधिकार-भावना से सहृदय याचना करना
(2) अधिकार-भावना से उद्‌भूत याचना
(3) अधिकार-भावना को स्वीकार करना
(4) अधिकार- भावना की कदापि उपेक्षा न करना
Ans: (1) अनुरोध-आग्रह शब्द युग्म में अनुरोध का अर्थ विनयपूर्वक याचना करना तथा आग्रह का अर्थ अधिकार-भावना से सहृदय याचना करना होगा।
Q8. ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ के लेखक हैं –
(1) नागार्जन
(2) यशपाल
(3) गजानन माधव मुत्तिबोध
(4) अमृतराय
Ans: (3) ‘‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’’ काव्यकृति के रचयिता गजानन माधव मुत्तिबोध हैं। इनकी एक अन्य काव्यकृति ‘भूरि-भूरि खाक धूल’ है। अँधेरे में, ब्रह्म राक्षस, तथा भूलगलती इनकी प्रमुख कविताएँ हैं। नागार्जुन के प्रमुख काव्य संग्रह – युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आँखें, भस्मांकुर, तालाब की मछलियाँ, खिचड़ी, विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार-हजार बाँहों वाली, पुरानी जूतियों का कोरस आदि हैं। जबकि यशपाल एवं अमृतराय गद्य लेखक हैं।
Q9. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना नहीं है –
(1) रेणुका
(2) उर्वशी
(3) रश्मिरथी
(4) स्वर्णधूलि
Ans: (4) ‘स्वर्णधूलि’ सुमित्रानंदन पंत की रचना है। पंत की अन्य रचनाएँ – उच्छवास, ग्रन्थि, वीणा, पल्लव, गुंजन, युगांत, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्णकिरण, युगपथ, अन्तरा, कला और बूढ़ाचाँद, अतिमा, लोकायतन तथा चिदम्बरा है। जबकि रेणुका, हुँकार, रसवंती, द्वन्द्वगीत, कुरूक्षेत्र, सामधेनी, रश्मिरथी, नीलकुसुम, दिल्ली, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा, आत्मा की आँखें, हारे को हरीनाम, धूप और धुँआ, नीम के पत्ते, तथा इतिहास के आँसू रामधारी सिंह दिनकर की रचनाएँ हैं।
Q10. धातु में प्रत्यय जोड़ने से बने शब्द कहलाते हैं –
(1) कृदन्त
(2) विशेषण
(3) क्रिया
(4) तद्धितान्त
Ans: (1) क्रिया या धातु के अंत में प्रयुत्त होने वाले प्रत्ययों को कृत, प्रत्यय कहते हैं और उनके मेल से बने शब्द को कृदंत कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के अंत में लगने वाले प्रत्यय को तद्धित कहा जाता है और उसके मेल से बने शब्द को तद्धितांत कहते हैं। क्रिया – जिन शब्द से काम का करना या होना समझा जाए उसे क्रिया कहते हैं।
Q11. निम्नलिखित विकल्पों में से ‘तद्‌भव’ शब्द है –
(1) आश्रय
(2) अगम
(3) अवगुण
(4) स्नेह
Ans: (2) ‘अगम’ तद्‌भव शब्द है इसका तत्सम अगम्य होता है। जबकि अवगुण, आश्रय, स्नेह तत्सम शब्द है इनका तद्‌भव अवगुन आसरा, सनेह आदि होता है।
Q12. ‘हरियाली’ है-
(1) समूहवाचक संज्ञा
(2) जातिवाचक संज्ञा
(3) भाववाचक संज्ञा
(4) विशेषण
Ans: (3) ‘हरियाली’ भाववाचक संज्ञा का उदाहरण है। जिस संज्ञा शब्द से व्यत्ति या वस्तु के गुण या धर्म, दशा अथवा व्यापार का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जातिवाचक संज्ञा- जिन संज्ञाओं से एक ही प्रकार की वस्तुओं अथवा व्यत्तियों का बोध हो, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। समूहवाचक संज्ञा- जिस संज्ञा से वस्तु अथवा व्यत्ति के समूह का बोध हो उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं। विशेषण – जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताएँ उसे विशेषण कहते है। जिसकी विशेषता बताई जाए, वह विशेष्य कहलाता है।
Q13. निम्नलिखित में ‘पुल्लिंग’ शब्द है –
(1) जड़ता
(2) बुढ़ापा
(3) घटना
(4) दया
Ans: (2) बुढ़ापा एक ‘पुलिंग’ शब्द है। जिन भाववाचक संज्ञाओं के अंत में ना, आव, पन, वा, पा, होता है वह पुलिंग शब्द होता है। जबकि घटना, जड़ता तथा दया स्त्रीलिंग है। हिन्दी में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग दो ही लिंग होते हैं।
Q14. कौन-सा शब्द ‘अव्यय’ नहीं है?
(1) कल
(2) आज
(3) इधर
(4) किसे
Ans: (4) ‘किसे’ शब्द ‘अव्यय’ नही है। यह प्रश्नवाचक शब्द है। ‘इधर’ शब्द स्थानवाचक अव्यय है जबकि आज तथा कल एक कालवाचक अव्यय है। अव्यय – ‘अव्यय’ ऐसे शब्द को कहते हैं, जिसके रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक इत्यादि के कारण कोई विकार उत्पन्न नहीं होता है।
Q15. रीतिवाचक ‘क्रिया-विशेषण’ है
(1) आजकल
(2) अत्यन्त
(3) कदाचित्‌
(4) बाहर
Ans: (3) ‘कदाचित’ रीतिवाचक क्रिया विशेषण है। क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्दों को क्रिया विशेषण कहते हैं। रीतिवाचक, स्थानवाचक, परिणामवाचक तथा कालवाचक कियाविशेष् ाण के चार भेद हैं। अचानक, धीरे-धीरे, एकाएक, शनैः शनैः आदि रीतिवाचक क्रिया-विशेषण के उदाहरण हैं।
Q16. ‘गुडाकेश’ का सन्धि-विच्छेद है –
(1) गुडाके ईश
(2) गुडा केश
(3) गुडाका ईश
(4) गुड आकेश
Ans: (3) गुडाका + ईश गुडाकेश (गुण सन्धि) यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ’ या ‘ई’, ‘उ’ या ‘ऊ’ और ऋ आए, तो दोनो मिलकर क्रमशः ‘ए’ ‘ओ’ और ‘अर्‌’ हो जाते हैं।
Q17. निम्नलिखित में लोकोत्ति कौन-सी है?
(1) उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे
(2) आसमान पर थूकना
(3) गूलर का फूल होना
(4) कोढ़ में खाज होना
Ans: (1) ‘उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे’ एक लोकोत्ति/कहावत है। इसका अर्थ दोषी व्यत्ति निर्दोष पर दोष लगाये या अपराध करने वाले का लज्जित होने के बजाय अकड़ दिखाना। अन्य सभी मुहावरे हैं- (2) आसमान पर थूकना (महापुरुषों का निरादर करना) (1) कोढ़ में खाज होना (दुःख में और अधिक दुःखों का पहाड़ टूटना) (3) गूलर का फूल होना (कभी-कभी दिखायी पड़ना)
Q18. ‘निर्विवाद’ में समास है –
(1) अव्ययीभाव
(2) कर्मधारय
(3) तत्पुरुष
(4) बहुव्रीहि
Ans: (1) ‘निर्विवाद’ शब्द में अव्ययी भाव समास है। निर्विवाद बिना विवाद का। अव्ययी भाव समास में प्रथम पद अव्यय तथा द्वितीय पद संज्ञा होता है। समस्त पद में अव्यय के अर्थ की ही प्रधानता रहती है। समस्त पद क्रिया-विशेषण के अर्थ में व्यवहृत होता है। तत्पुरुष समास – जिस समास का अन्तिम पद प्रधान हो, उसे तत्परुष समास कहते हैं। कर्त्ता कारक और सम्बोधन को छोड़कर शेष सभी कारकों को विभत्तियाँ लगाकर इसका समास विग्रह किया जाता है। जैसे- मोक्षप्राप्त – मोक्ष को प्राप्त कर्मधारय समास – कर्मधारय समास का प्रथम पद विशेषण और दूसरा विशेष्य अथवा संज्ञा होता है जैसे – पीतसागर – पीत है जो सागर बहुव्रीहि समास – इस समास में कोई भी शब्द प्रधान नही होता है। दोनों शब्द मिलकर एक नया अर्थ प्रकट करते हैं। जैसे- जलज -जल में उत्पन्न होता है जो अर्थात्‌ कमल।
Q19. निम्न में तत्पुरुष समास का उदाहरण है –
(1) धनंजय
(2) एकतरफा
(3) आत्मनिर्भर
(4) वक्रतुण्ड
Ans: (3) आत्मनिर्भर – अपने आप पर निर्भर (तत्पुरुष समास) जिस समास का उत्तर पद अर्थात अन्तिम पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। कर्त्ता कारक और सम्बोधन को छोड़कर आवश्यकता शेष सभी कारकों की आवश्यकतानुसार विभत्तियाँ लगाकर इनका समास विग्रह होता है।
Q20. निम्नलिखित विकल्पों में से ‘तत्सम’ शब्द है–
(1) उपरोत्त
(2) नारियल
(3) तुरन्त
(4) आलस्य
Ans: (4) आलस्य तत्सम शब्द है, इसका तद्‌भव आलस होता है। जबकि नारियल, उपरोत्त तथा तुरन्त तद्‌भव शब्द हैं, इनका तत्सम नारिकेल, उपर्युत्त तथा त्वरित होता है।
Q21. ‘जो किसी बात या उत्ति को तुरन्त सोच ले’ के लिए एक शब्द होगा–
(1) कुशाग्रबुद्धि
(2) प्रतिभाशाली
(3) प्रत्युत्पन्नमति
(4) बुद्धिमान
Ans: (3) वाक्यांश – एक शब्द जो किसी बात या उत्ति को तुरन्त सोच ले – प्रत्युत्पन्नमति जिसकी बुद्धि कुशा के अग्र भाग – कुशाग्रबुद्धि (नोक) के समान तीक्ष्ण हो जिसमें अपार प्रतिभा पाई जाती हो – प्रतिभाशाली जिसके पास बहुत बुद्धि (दिमाग) हो – बुद्धिमान
Q22. ‘प्रागैतिहासिक’ का अर्थ है–
(1) आदि मानव की संस्कृति
(2) सभ्यता के विकास का इतिहास
(3) लिखित इतिहास के बाद का
(4) लिखित इतिहास के पहले का
Ans: (4) ‘प्रागैतिहासिक’ का अर्थ है लिखित इतिहास के पहले का इतिहास अर्थात उस काल का इतिहास जिसका कोई लिखित साक्ष्य प्राप्त नहीं है। इस काल का अध्ययन केवल, पत्थरों, आभूषणों तथा चित्रों के माध्यम से साक्ष्य जुटाकर किया जाता है। यह काल मानव जीवन की उत्पत्ति तथा विकास के प्रथम चरण के ज्ञान का प्रमुख स्रोत है।
Q23. निम्नलिखित में से किस शब्द का निर्माण उपसर्ग से नहीं हुआ है?
(1) उन्नति
(2) अवसाद
(3) सज्जन
(4) प्रहार
Ans: (*) ‘अवसाद’ में ‘अव’, ‘उन्नति’ में ‘उत्‌’, ‘सज्जन’ में ‘सत्‌’ तथा ‘प्रहार’ में ‘प्र’ उपसर्ग प्रयुक्त है। इस प्रकार दिए गए विकल्पों में कोई भी शब्द बिना उपसर्ग के नहीं है। अतः प्रश्न त्रुटिपूर्ण है। (स्रोत- हिन्दी शब्द-अर्थ-प्रयोग – डा . हरदेव बाहरी)
Q24. निम्नलिखित में प्रत्यय युत्त शब्द नहीं है –
(1) भाषा
(2) बोली
(3) पिपासा
(4) अंकुर
Ans: (4) ‘अंकुर’ शब्द में प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है। जबकि बोली में ‘ई’ प्रत्यय, भाषा में ‘आ’ प्रत्यय तथा पिपासा में ‘आ’ प्रत्यय का प्रयोग हुआ है।
Q25. निम्नलिखित में प्रत्यय युत्त शब्द है –
(1) सावधान
(2) सादर
(3) स्वभाव
(4) समझदार
Ans: (4) ‘समझदार’ शब्द में ‘दार’ प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। जबकि सावधान में स्वभाव तथा सादर में कोई भी प्रत्यय प्रयुक्त नहीं है।
Q26. निम्नलिखित शब्द की सही वर्तनी कौन-सी है?
(1) ज्योत्स्ना
(2) ज्योत्सना
(3) ज्योतस्ना
(4) ज्योस्तना
Ans: (1) ‘ज्योत्स्ना’ शब्द की वर्तनी शुद्ध है। जबकि अन्य सभी विकल्प असंगत हैं।
Q27. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द ‘रात्रि’ का पर्यायवाची नहीं है?
(1) शशक
(2) क्षपा
(3) शर्वरी
(4) यामिनी
Ans: (1) ‘शशक’ खरगोश का पर्यायवाची शब्द है। जबकि क्षपा, शर्वरी, यामिनी, रैन, रात्रि, रजनी, निशा, निशीथ, विभावरी, तमी, त्रियामा, तमिदाा, तमदााा तथा विभा आदि ‘रात्रि’ के पर्यायवाची हैं।
Q28. ‘निषिद्ध’ शब्द का विलोम है –
(1) संदिग्ध
(2) विहित
(3) अनुपयोगी
(4) प्रतिबन्धित
Ans: (2) ‘निषिद्ध’ शब्द का विलोम विहित है जबकि अनुपयोगी का विलोम उपयोगी, संदिग्ध का विलोम असंदिग्ध तथा प्रतिबन्धित का विलोम स्वतन्त्र होता है।
Q29. निम्नलिखित शब्दों में से ‘अग्नि’ का पर्यायवाची है–
(1) पावक
(2) पीयूष
(3) अम्बर
(4) मयंक
Ans: (1) ‘अग्नि’ शब्द का पर्यायवाची ‘पावक’ है। इसके अन्य पर्यायवाची – आग, दव, धूम्रकेतु, धनंजय, जातदेव, हुताशन, वैश्वानर, ज्वाला, वायुसखा, दहन, ज्वलन, कृषानु, रोहिताश्व तथा वह्नि होता है। जबकि पीयूष का पर्यायवाची अमृत, अम्बर का पर्यायवाची आकाश तथा मयंक का पर्यायवाची चन्द्रमा है।
Q30. निम्नलिखित वाक्यों में से कौन-सा वाक्य सर्वाधिक सही है?
(1) यद्यपि तुम अजनबी हो, मैं तुम्हें ही अपना मानता हूँ
(2) यद्यपि तुम अजनबी हो, परन्तु मैं तुम्हें अपना मानता हूँ
(3) यद्यपि तुम अजनबी हो, किन्तु मैं तुमको ही अपना मानता हूँ
(4) यद्यपि तुम अजनबी हो, तथापि मैं तुम्हें अपना मानता हूँ
Ans: (4) ‘‘यद्यपि तुम अजनबी हो, तथापि मैं तुम्हें अपना मानता हूँ’’ वाक्यों में सर्वाधिक शुद्ध वाक्य है। अन्य सभी विकल्प के वाक्य गलत है।

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