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030 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. कवि ने ‘चिर महान’ किसे कहा है?
(1) जो सत्य और सुन्दर से सम्पूर्ण हो
(2) ईश्वर को
(3) शक्ति को
(4) मानव को
Ans: (4) दी गई पंत्ति में कवि ने चिर महान मानव को कहा है।
Q2. कवि कैसा प्रकाश बनना चाहता है?
(1) जो जीने की शक्ति देता है
(2) अन्धकार दूर हो जाए
(3) जिसमें मनुष्य सभी भेदभाव भुलाकर एक हो जाते है
(4) जिससे सब तरफ उजाला हो जाए
Ans: (3) कवि ऐसा प्रकाश बनना चाहता है जिसमें सभी भेद भाव भुला कर एक हो जाते हैं। वह कहता है कि हे ईश्वर हमें वह शक्ति और प्रकाश मिले जिससे जीवन के सभी भय संशय और अन्धकार दूर हो जाये।
Q3. कवि ने ‘अखिल व्यत्ति’ का प्रयोग क्यों किया है?
(1) कवि भारत के व्यत्तियों की ओर संकेत करना चाहता है
(2) कवि अमीर लोगों की बात करना चाहता है
(3) कवि सांसारिक बात करना चाहता है
(4) कवि समस्त विश्व के व्यत्तियों की बात करना चाहता है
Ans: (4) कवि अखिल व्यत्ति का प्रयोग कर समस्त विश्व के व्यत्तियों की बात करना चाहता है। क्योंकि वह बताना चाहता है कि जिसमें सम्पूर्ण मानव भलाई हो मुझे वह शक्ति मिले।
Q4. कविता के किस अंश में तर्कहीन आस्था का उल्लेख हुआ है?
(1) मैं वह प्रकाश बन सकूँ, नाथ

(2) मिल जावें जिसमें अखिल व्यत्ति

(3) जिससे मानव-हित हो समान

(4) छूटे भय-संशय, अंध-भत्ति,
Ans: (4) उपरोत्त दी गई पंत्ति ‘छूटे भय-संशय अंध-भत्ति में’ तर्क हीन आस्था का उल्लेख हुआ है। क्योंकि कवि बताना चाहा है कि हमें ऐसा मनुष्य बनना है जिससे जीवन में शक्ति मिले तथा हम सभी अंधकार और संशय से दूर रहें।
Q5. कवि ने कविता की पंत्तियों के अन्त में विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग क्यों किया है?
(1) इससे कविता का सौन्दर्य बढ़ता है
(2) कवि अपनी इच्छा प्रकट कर रहा है
(3) पूर्ण विराम की लीक से हटने के लिए
(4) कविता को तुकान्त बनाने के लिए
Ans: (2) कवि अपनी इच्छा प्रकट करने के लिए कविता की पंत्तियों के अन्त में विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग करता है (
) विस्मयादि बोधक चिह्न का प्रयोग इच्छासूचक वाक्य में किया जाता है।
Q6. कविता का मूल भाव क्या है?
(1) विश्व-परिवार की भावना
(2) अमर दान का प्राप्ति
(3) सत्य की प्राप्ति
(4) कल्याण
Ans: (4) कविता का मूलभाव कल्याण है। क्योंकि उपरोत्त कविता में सुमित्रानन्दन पंत जी मानव के कल्याण, उसको भय मुत्त तथा अन्ध भत्ति से बचने की कल्पना की है।
निर्देश (प्र. सं. 715) गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। मैं जिस घर में रहती थी, वहाँ मेरी आदत बहुत सवेरे उठने की थी। एक दिन उतने सवेरे एक छोटा बच्चा, जो शायद डेढ़ साल से कम का होगा, मेरे कमरे में आया। मैंने सोचा कि यह शायद भूखा होगा और उससे पूछा कि वह कुछ खाना चाहता है? उसने उत्तर दिया, ‘कीड़े।’ मैंने आश्चर्य से कहा, ‘कीड़े?’ जब उसने देखा कि मेरी समझ में उसकी बात नहीं आ रही है तो मेरी सहायता के लिए उसने एक शब्द और जोड़ा ‘अण्डा।’ मैंने अपने मन में सोचा कि इतने सवेरे कुछ पीना चाहता है क्या? यह आखिर कहना क्या चाह रहा है? उसने फिर कहा, ‘नीना, अण्डे, कीड़े।’ अब मुझे पूरी बात समझ में आ गई। एक दिन पहले, उसकी बहन नीना कागज़ पर अण्डे की शक्ल बनाकर उसमें रंग भर रही थी। इस बच्चे की इच्छा थी कि वह भी रंग भरे, पर नीना ने उसे गुस्से में आकर भगा दिया। उसने नीना का विरोध नहीं किया और बड़े धैर्य और लगन के साथ मौके का इन्तजार करता रहा। मैंने उसे व्रेयॉन का रंग दे दिया और
Q7. बच्चे ने ‘कीड़े’ के बाद ‘अण्डा’, ‘नीना, अण्डे, कीड़े’ शब्दों का प्रयोग किया, क्योंकि–
(1) वह अण्डा बनाना चाहता था
(2) वह रंग भरने की बात बताना चाहता था
(3) वह कागज़ और व्रेयॉन चाहता था
(4) वह जान गया था कि लेखिका उसकी बात समझ नहीं पाई है
Ans: (4) बच्चें ने ‘कीड़े’ के बाद अण्डा, नीना अण्डे कीड़े शब्दों का प्रयोग किया क्योंकि वह जान गया था कि लेखिका उसकी बात समझ नहीं पाई है। इसलिए वह उसे बताना चाहता था।
Q8. अनुच्छेद से पता चलता है कि डेढ़ साल के बच्चे –
(1) सम्प्रेषण के लिए कथ्य के मुख्य शब्दों का प्रयोग करते हैं
(2) कागज चाहते हैं
(3) रंग चाहते हैं
(4) तस्वीरें चाहते हैं
Ans: (1) अनुच्छेद से पता चलता है कि डेढ़ साल के बच्चे सम्प्रेषण के लिए कथ्य के मुख्य शब्दों का प्रयोग करते हैं।
Q9. टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों को ‘कीड़े’ कहना इस ओर संकेत करता है कि बच्चा–
(1) लकीरों को कीड़ा मानता है
(2) हर हालत में अपनी बात कह देता है
(3) टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें ही बना सकता है
(4) दो अलग चीज़ों में आकृति के आधार पर समानता खोज लेता है
Ans: (4) बच्चे के द्वारा टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों को कीड़े कहना इस ओर संकेत करता है कि बच्चा दो अलग-अलग चीजों में आकृति के आधार पर समानता खोज लेता है।
Q10. डेढ़ साल का बच्चा ‘अण्डा’ नहीं बना पाया। यह बात किस ओर संकेत करती है?
(1) बच्चे ने अण्डा देखा नहीं इसलिए वह अण्डा नहीं बना पाया
(2) बच्चा चित्र बनाने में सक्षम नहीं है
(3) उसका अभी अपने हस्त संचालन की गति और दिशा पर नियन्त्रण नहीं हो पाया है
(4) बच्चा अण्डा नहीं बना सकता
Ans: (3) डेढ़ साल के बच्चे का ‘अण्डा’ का चित्र न बना पाना इस बात की ओर संकेत करता है कि बच्चे का अभी अपने हस्त चालन की गति और दिशा पर नियन्त्रण नहीं हो पाया है।
Q11. रेखाओं को बच्चे ने ‘कीड़े’ कहा। बच्चा वृत को क्या कह सकता है?
(1) पेड़
(2) चूड़ी
(3) छतरी
(4) चम्मच
Ans: (2) जिस प्रकार से बच्चें ने सादृश्यता के आधार पर रेखाओं को कीड़ा कहा उसी प्रकार बच्चा वृत्त को चूड़ी कह सकता है क्योंकि बच्चें को टेड़ी मेड़ी रेखा कीड़े के समान दिखाई पड़ी और बच्चा कीड़े के बारे में जानता है इसलिए उसने रेखा को कीड़ा कहा, इसलिए वृत का आकार और चूड़ी का आकार समान होने के कारण बच्चा वृत्त को चूड़ी कह सकता है।
Q12. ‘उतने सवेरे’ पद में ‘उतने’ शब्द किस ओर संकेत करता है?
(1) सवेरे का वह समय जितने बजे लेखिका को उठने की आदत है
(2) बहुत सवेरे की ओर
(3) बहुत जल्दी
(4) सवेरे की ओर
Ans: (1) प्रस्तुत गद्यांश में ‘उतने सवेरे’ में उतने शब्द सवेरे के उस समय जितने बजे लेखिका उठती है की तरफ संकेत कर रहा है। क्योंकि लेखिका कहती है मेरी आदत बहुत सबेरे उठने की थी और वह कहती है कि वह बच्चा जो उसके पास उतने सवेरे आता है जब वह उठती है अतः पद में ‘उतने’ शब्द सवेरे का वह समय लेखिका जब उठती के तरफ संकेत करता है।
Q13. अनुच्छेद में से मिश्रित वाक्य का उदाहरण है–
(1) अब मुझे पूरी बात समझ में आ गई
(2) यह आखिर कहना क्या चाह रहा है?
(3) मैंने आश्चर्य से कहा, ‘कीड़े?’
(4) उसने नीना का विरोध नहीं किया और बड़े धैर्य और लगन के साथ मौके का इन्तजार करता रहा
Ans: (3) मैने आश्चर्य से कहा, ‘कीड़े ?’ वाक्य मिश्रित वाक्य है। मिश्र वाक्य में दो या दो से अधिक सरल वाक्य होते हैं। इसमें एक प्रधान उपवाक्य एवं दूसरा आश्रित उपवाक्य होता है। दोनों वाक्यों को सामान्यतः कि, जोकि, ताकि, क्योंकि, यद्यपि….तथापि आदि संयोजकों से जोड़ते हैं। कभी-कभी इनका लोप करके कामा (,) का प्रयोग किया जाता है।
Q14. ‘उसका चेहरा खुशी से दमक उठा।’ वाक्य में रेखांकित अंश के स्थान पर कौन-सा मुहावरा आएगा?
(1) खुशी से फूला न समाया
(2) खुश हो गया
(3) गद्‌-गद्‌ हो गया
(4) खिल उठा
Ans: (4) उसका चेहरा खुशी से दमक उठा वाक्य में रेखांकित अंश खुशी से दमक उठा के लिए उपयुक्त मुहावरा है ‘खिल उठा’।
Q15. ‘इतने सवेरे कुछ पीना चाहता है क्या?’ वाक्य में ‘कुछ’ शब्द है–
(1) अनिश्चयवाचक सर्वनाम
(2) प्रश्नवाचक सर्वनाम
(3) निश्चयवाचक सर्वनाम
(4) अनिश्चय संख्यावाचक विश्लेषण
Ans: (1) इस वाक्य में ‘कुछ’ शब्द अनिश्चयवाचक सर्वनाम है। खाने-पीने, तौलने, नापने की वस्तुओं के लिए परिमाण वाचक सर्वनाम का प्रयोग होता है। इसके दो भेद हैं- (2) निश्चित परिमाणवाचक (1) अनिश्चित परिमाणवाचक
निर्देश : निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सबसे उचित विकल्प चुनिए।
Q16. भाषा सीखने में जो त्रुटियाँ होती हैं–
(1) उन्हें जल्दी से दूर किया जाना चाहिए
(2) उन्हें कठोरता से लेना चाहिए
(3) वे बच्चों की त्रुटियों की ओर संकेत करती है
(4) वे सीखने की प्रक्रिया और स्वाभाविक हिस्सा होती हैं जो समय के साथ दूर होने लगती है।
Ans: (4) भाषा सीखने की त्रुटियाँ सीखने की प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा होती हैं जो समय के साथ दूर होने लगती हैं। क्योंकि सीखना एक सतत्‌ परिपक्वता की ओर अग्रसर प्रक्रिया है। बालक जितना सीखने का प्रयास करेगा उसके सीखने में त्रुटियाँ उतनी कम होती जायेगी।
Q17. ‘पढ़ना’ कौशल में सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है–
(1) केवल अक्षर पहचान
(2) शब्दों-वाक्यों को शुद्ध रूप से उच्चरित करना
(3) तेज गति से पढ़ना
(4) सन्दर्भानुसार अर्थ ग्रहण करना
Ans: (4) पठन कौशल में तेजगति से पढ़ना-अक्षर पहचानना तथा शब्द वाक्यों को शुद्ध रूप से उच्चारित करने की अपेक्षा सबसे महत्वपूर्ण है सन्दर्भानुसार अर्थ ग्रहण करना।
Q18. सुलेखा ने पाठ को पढ़ते हुए ‘जीवन’ को ‘जिन्दगी’ पढ़ा। यह इस ओर संकेत करता है कि–
(1) उसे केवल पठन-अभ्यास की बहुत आवश्यकता है
(2) उसे अक्षरों की पहचान में भ्रम हो जाता है
(3) सुलेखा ध्यान से नहीं पढ़ती
(4) वह अक्षर-पहचान की बजाय अर्थ को समझते हुए पढ़ रही है।
Ans: (4) सुलेखा के द्वारा पाठ को पढ़ते हुए जीवन को जिन्दगी पढ़ा जाना इस बात की ओर संकेत करता है कि वह अक्षर पहचानने की बजाय अर्थ को समझते हुए पढ़ रही है। क्योंकि यदि बच्चे पाठ को पढ़ते हैं तो कई जगह शब्द की जगह अर्थ का उच्चारण कर देते हैं।
Q19. ‘बच्चे भाषा सीखने की क्षमता के साथ पैदा होते हैं।’ मुख्यतः यह किसका विचार है?
(1) ईवान पैवलोव
(2) एल. एस. वाइगोत्स्की
(3) नॉओम चॉम्सकी
(4) जीन पियाजे
Ans: (3) नॉओम चॉम्सकी के अनुसार बच्चे भाषा सीखने की क्षमता के साथ पैदा होते है।
Q20. ‘मैंने चाट खाई और फिर मैंने हँसी।’ शर्मिला का यह भाषा-प्रयोग मुख्यतः किस ओर संकेत करता है?
(1) नियमों का अति समान्यीकरण
(2) व्याकरणिक नियमों की जानकारी न होना
(3) भाषा-प्रयोग में असावधानी
(4) भाषा की समझ न होना
Ans: (2) ‘मैंने, चाट खाई और फिर मैने हँसी।’ शर्मिला का यह भाषा प्रयोग उसके व्याकरणिक नियमों की जानकारी न होने की तरफ संकेत कर रहा है।
Q21. लिखित कार्य की जाँच में बच्चों की सहायता लेने से –
(1) बच्चे ज्यादा गलतियाँ ढूँढ़ना सीख जाते हैं
(2) केवल पठन-कौशल का अभ्यास होता है
(3) बच्चों को दूसरों के हस्तलिखित सामग्री को पढ़ने का अवसर और अवलोकन-क्षमता के विकास का अवसर मिलता है
(4) बच्चे दूसरों के विचारों से परिचित होते हैं
Ans: (3) लिखित कार्यों की जाँच में बच्चों की सहायता लेने से बच्चों के दूसरे के हस्तलिखित सामग्री के पढ़ने का अवसर और अवलोकन क्षमता के विकास का अवसर मिलेगा और ऐसा करने से बच्चों को जब दूसरों के लिखित कार्यों के जाँच करने का मौका मिलेगा तब वह उसकी कमियों और अच्छाइयों को जान सकेगें जिससे उनके अपनी भी कमियों को पूरा करने का पर्याप्त अनुभव हो जायेगा।
Q22. लोकगीतों को भाषा की कक्षाओं में स्थान दिया जाना चाहिए, क्योंकि –
(1) लोकगीत गाए जा सकते हैं
(2) लोकगीतों को बढ़ावा देना भाषा-शिक्षण का मुख्य उद्देश्य है
(3) केवल लोकगीतों के माध्यम से पारम्परिक मूल्यों की शिक्षा दी जा सकती है
(4) इससे बच्चे संस्कृतिगत विशेषताओं से परिचित होते हैं
Ans: (4) बच्चों को संस्कृतिगत विशेषताओं से परिचित कराने के लिए लोकगीतों को भाषा की कक्षाओं में स्थान देना चाहिए क्योंकि लोकगीत हमारे देश एवं संस्कृति की परिचायक है।
Q23. पाठ पढ़कर बच्चों से प्रश्न बनवाने से –
(1) शिक्षक को यह जानने का अवसर मिलता है कि बच्चों ने पाठ को कितनी गहराई से समझा है
(2) इस बात का पता चलता है कि बच्चे प्रश्नवाचक शब्दों से परिचित है या नहीं
(3) कक्षा-कार्य की अच्छी युत्ति पूरी होती है
(4) प्रश्न बनाने की आदत का विकास होता है
Ans: (1) पाठ पढ़कर बच्चों से प्रश्न बनवाने से शिक्षक को यह जानने का अवसर मिलता है कि बच्चों ने पाठ को कितनी गहराई से समझा है।
Q24. किसी भाषा कक्षा में कहानी-कथन की आवश्यकता के सन्दर्भ में कौन-सा तर्क उचित नहीं है?
(1) सभी बच्चों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए यह उचित नहीं है
(2) सभी बच्चों को भाषा सुनने का परिवेश मिलता है।
(3) बच्चों को शब्द-भण्डार के विकास के अवसर प्राप्त होते है।
(4) सभी बच्चों की क्षमता-अनुसार कल्पना-शक्ति का विकास होता हैं।
Ans: (4) किसी भाषा कक्षा में कहानी कथन की आवश्यकता के सन्दर्भ में यह कहना कि सभी बच्चों की क्षमता अनुसार कल्पना शक्ति का विकास होता है उचित तर्क नहीं है। जबकि भाषा की कक्षा कहानी कथन से बच्चों के शब्द भण्डार में विकास होगा तथा उन्हें भाषा सुनने के परिवेश के साथ-साथ उनके अवलोकन की क्षमता का भी विकास होगा।
Q25. एल. एस. वाइगोत्स्की के अनुसार–
(1) चिन्तन भाषा को निर्धारित करती है
(2) भाषा चिन्तन को निर्धारित करती है
(3) भाषा एवं चिन्तन एक-दूसरे से स्वतन्त्र रूप से विकसित होते हैं
(4) भाषा एक अर्जित योग्यता है
Ans: (4) एल.एस. वाइगोत्स्की के अनुसार भाषा एक अर्जित योग्यता है। वाइगोत्स्की एक मनोवैज्ञानिक था उसने बालकों के समाजिक विकास से सम्बन्धित सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिसमें बताया जाता है कि बालक के विकास में समाज का क्या योगदान है और उसमें किस प्रकार का परिवर्तन आता है। वह कहता है कि भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में केवल भाषाई शुद्धता पर ही अधिक बल रहता है सही नहीं है। जबकि भाषा अर्जन और भाषा अधिगम में अन्तर होता है क्योंकि भाषा अर्जन से आशय है हमने क्या सीखा है और भाषा अधिगम से तात्पर्य है हम क्या सीख रहें हैं। हमारा भाषा परिवेश जितना संबद्ध और विस्तृत होगा उतना ही हमें भाषा सीखने में सरलता होगी।
Q26. भाषा-शिक्षण के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(1) भाषा-शिक्षण में केवल भाषायी शुद्धता पर ही अधिक बल रहता है
(2) भाषा-अर्जन और भाषा-अधिगम में अन्तर होता है
(3) भाषा सीखने में अन्य विषयों को अध्ययन-अध्यापन सहायक होता है
(4) समृद्ध भाषा-परिवेश भाषा अर्जित करने में सहायक होता है
Ans: (1) भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में भाषा शिक्षण में केवल भाषाई सुन्दरता पर ही बल रहता है कथन सही नहीं है बल्कि भाषा अधिगम के साथ-साथ अन्य विषयों के अध्ययन अध्यापन में सहायक होता है।
Q27. एक बहुसांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाली कक्षा में भाषा सीखने के बारे में कौन-सा विचार उचित है?
(1) भाषा सिखाने के लिए व्याकरणिक नियमों का और अधिकाधिक प्रयोग होना चाहिए
(2) अधिकाधिक पुस्तकों का निर्माण किया जाए
(3) भाषा परिवेश का निर्माण किया जाए ताकि भाषा-अर्जन की सहज स्थिति बन सके
(4) बच्चों में भाषा सीखने की क्षमता बलपूर्वक विकसित करनी होती है
Ans: (3) एक बहुसांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाली कक्षा में भाषा सीखने के लिए भाषा परिवेश का निर्माण किया जाय ताकि भाषा अर्जन की सहज स्थिति बन सके। क्योंकि जब तक बच्चों को भाषा सीखने का समुचित वातावरण नहीं मिलेगा तब तक भाषा सीखने की सहज स्थिति नहीं बन सकती।
Q28. स्वलीन विकार (आ टिस्टिक डिस्आ र्डर) में बच्चा–
(1) सामाजिक अन्तःक्रिया और सम्प्रेषण में कठिनाई का अनुभव करता है
(2) अपने हाथ-पैर हिलाने में कठिनाई का अनुभव करता है
(3) अक्सर खाने से मना कर देता है
(4) अपने ही कार्यों में लीन रहता है
Ans: (1) स्वलीन विकार (ऑटिस्टिक डिस्ऑर्डर) में बच्चा सामाजिक अन्तःक्रिया और सम्प्रेषण में कठिनाई का अनुभव करता है।
Q29. भाषा-शिक्षण का सम्प्रेषणपरक उपागम –
(1) सन्दर्भ में भाषा-प्रयोग की कुशलता पर बल देता है
(2) भाषिक संरचनाओं की जानकारी पर बल देता है
(3) मातृभाषा-प्रयोग का निषेध करता है
(4) ‘बोलना’ कौशल पर बल देता है
Ans: (1) भाषा शिक्षण के सम्प्रेषणपरक उपागम सन्दर्भ में भाषाप्रयोगों की कुशलता पर बल देना भाषा शिक्षण का सम्प्रेषणपरक उपागम है।
Q30. भाषा-शिक्षण की कौन-सी विधि मातृभाषा को मध्यस्थ बनाए बिना दूसरी भाषा को सिखाने पर बल देती है?
(1) अनुवाद विधि
(2) द्विभाषीय विधि
(3) व्याकरण एवं अनुवाद विधि
(4) प्रत्यक्ष विधि
Ans: (4) भाषा शिक्षण की प्रत्यक्ष विधि मातृभाषा को मध्यस्थ बनाए बिना दूसरी भाषा को सीखने पर बल देती है और प्रत्यक्ष विधि मूर्त से अमूर्त की तरफ चलती है।

निर्देश (प्र.सं. 15) : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्नों के सही उत्तर विकल्प का चयन कीजिए। इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषण। मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्री निःसन्देह पठनीय शास्त्री है। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि ‘‘साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ’’ वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्री मनुष्यों की उद्‌भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्री और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नीवन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्री के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्त्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त हैं। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियंत्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार सोचता है कि अब चेतन चित्त की शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम तो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुतः वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे हैं और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है।

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