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026 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. ‘मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के’ पत्ति का भाव किसमें है?
(1) बादलों ने बिजली से शृंगार किया है
(2) बादलों ने सूरज को ढक लिया है
(3) बादल सज-धज कर आए हैं
(4) भूरे-काले बादल आकाश में घिर आए हैं
Ans: (3) ‘मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के’ पंत्ति का भाव है कि बादल सज धज कर आ गए हैं। अर्थात अब बारिस होने वाली है। क्योंकि कवि कह रहा कि बदल अपने सभी साजो सज्जा अर्थात पानी और वायु को लेकर आकाश में आ गये हैं बादलों का बन-ठन कर कहना उनका सजने-संवरने से है और उनका सजना संवरना पानी तथा वायु को साथ लेकर आने से है।
Q2. मेघों के आने से लगता है –
(1) मानों कही उत्सव मनाया जा रहा है
(2) बादल आसमान में छा गए है
(3) मानों गाँव में शहर से मेहमान आए हों
(4) उपरोत्त में से कोई नहीं
Ans: (3) मेघ के आने से हवाएँ चलने लगी हैं जिसके कारण दरवाजे खिडकियां खुलने लगी हैं और तब ऐसा प्रतीत होता है कि मानो गाँव में शहर से मेहमान आए हों।
Q3. ‘बरस बाद सुधि लीन्ही’-इस पंत्ति का भाव किसमें है?
(1) बादलों ने याद किया है
(2) बादल एक बरस के बाद आए हैं
(3) बादल बन सँवर कर आए हैं
(4) बादल मेहमान बन कर आए हैं
Ans: (2) ‘बरस बाद सुधि लीन्ही’ का भाव है कि बादल एक बरस बाद आए हैं। क्योंकि उपर्युत्त पंत्तियों में कवि बता रहा कि वर्षा की ऋतु एक वर्ष बाद आयी है और बादल पुनः एक वर्ष बाद आये हैं और उनके आने से लोगों के अन्दर इतना उत्साह व्याप्त हो गया है, जिसे देखकर लोग मेहमान की भाँति स्वागत कर रहे हैं।
Q4. पूरी कविता में कौन-सा अलंकार है?
(1) रूपक अलंकार
(2) श्लेष अलंकार
(3) मानवीकरण अलंकार
(4) उत्प्रेक्षा अलंकार
Ans: (3) पूरी कविता में मानवीकरण अलंकार है। क्योंकि मेघ (बादलों) को मेहमान (मानव) के रूप में, हवाओं, पेड़ों, धूल, नदी, पीपल, लता, ताल आदि की क्रियाओं को मानव की क्रियाओं के रूप में प्रकट किया गया है और जब प्राकृतिक अवयवों की क्रियाओं को मानव व्यवहार (क्रियाओं) के रूप में प्रकट किया जाय तो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
Q5. बूढ़े पीपल ने किस प्रकार मेघों का स्वागत किया?
(1) प्रसन्न होकर
(2) झुककर प्रणाम करके
(3) गले लगाकर
(4) उलाहना देकर
Ans: (2) बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर झुक कर बादलों का स्वागत किया पद्यांश में निहित है। बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की, का यही आशय है। ‘जुहार’ शब्द का अर्थ होता है ‘झुककर’ स्वागत करना। यह एक देशज शब्द है।
Q6. ‘पाहुन’ शब्द का क्या अर्थ है?
(1) पालना
(2) आना
(3) मेहमान
(4) पैर
Ans: (3) ‘पाहुन’ शब्द का अर्थ ‘मेहमान’ है। पाहुन एक देशज शब्द है।
निर्देश (प्र. सं. 715) निम्नलिखित गद्यांश ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। गिजुभाई न केवल बच्चों की क्षमताओं, बौद्धिकता में विश्वास व्यत्त करते हैं अपितु वे उनकी सृजनात्मकता में भी अगाध आस्था रखते हैं। उनके अनुसार कुछ हत्याएँ पीनल कोड की धारा के अधीन नहीं आती। उनमें कानूनवेत्ताओं को अपराध जैसी कोई चीजें नजर नहीं आती। कानूनवेत्ताओं की न्याय नीति-सम्बन्धी मर्यादाएँ सिर्फ पीनल कोड से बँधी होती हैं। शिक्षाशास्त्रियों के पास राज्य, रूढ़ि अथवा धर्म की कोई सत्ता नहीं है इसलिए जीवन के प्रति जो अपराध होते हैं उसके लिए न कोई पीनल कोड, न कोई उन्हें निंदनीय मानता है, न कोई धार्मिक भय है। जीवन के प्रति होने वाला एक ऐसा ही अपराध है- बालक की सृजन-शक्ति की हत्या। ईश्वर ने मनुष्य का सृजन किया और उसे अपनी सृजन-शक्ति प्रदान की तथा ईश्वर की शक्ति मनुष्य के सृजन की अनन्त शक्ति के समान ही अनगिनत है। साहित्य एक सृजन है, चित्रकला दूसरा सृजन है, संगीत तीसरा सृजन है और स्थापत्य चौथा सृजन है। इस तरह गिनने बैठा जाए तो मनुष्य के द्वारा बनाई गई अनेकानेक कृतियों को गिनाया जा सकता है। जब शिक्षक या अभिभावक यह तय करते हैं कि बच्चे को क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए- वस्तुतः इस निर्णयों में ही वे बालक की सृजन-शक्ति का दमन कर देते हैं।
Q7. गिजुभाई का किसमें विश्वास नहीं है?
(1) उनके भविष्य का निर्णय शिक्षकों एवं अभिभावकों द्वारा तय करने में
(2) उनकी रचनात्मकता में
(3) बच्चों की बौद्धिकता में
(4) उनकी क्षमताओं में
Ans: (1) गिजुभाई का विश्वास बच्चों के भविष्य का निर्णय शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा तय करने में नहीं है क्योंकि वह मानते है कि उसके द्वारा बच्चों की सृजन शक्ति का दमन होगा।
Q8. कौन-सा अपराध पीनल कोड की धारा के अधीन नहीं आता है?
(1) रिश्वत लेना
(2) बालक की सृजन-शक्ति का दमन
(3) धोखाधड़ी करना
(4) चोरी करना
Ans: (2) उपर्युत्त गद्यांश के अनुसार बालक की सृजन शक्ति का दमन पीनल कोड की धारा के अधीन नहीं है जबकि रिश्वत लेना, धोखाधड़ी करना एवं चोरी करना पीनल कोड की धारा के अधीन है।
Q9. ‘बच्चे क्या करें और क्या न करें’ जब शिक्षक और अभिभावक यह तय करते हैं तब –
(1) अभिभावक व बच्चों के सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आती है
(2) बच्चे में रचनात्मकता भर जाती है
(3) बच्चे में पढ़ने-लिखने के प्रति रुचि जाग्रत हो जाती है
(4) बच्चे में सृजन-शक्ति का दमन होता है
Ans: (4) बच्चे क्या करें और क्या न करें जब शिक्षक और अभिभावक यह तय करते हैं तब बच्चों में सृजन-शक्ति का दमन होता है, क्योंकि बच्चों को स्वतन्त्रता नहीं मिलेगी तो उनकी सृजनात्मक शक्ति का दमन होगा और वह उसके विकास में अवरोधक के रूप में होगी। इसलिए अभिभावक और शिक्षक को चाहिए की बच्चों को अपने विचारों को रखने की पूर्ण स्वतन्त्रता दें।
Q10. निम्नलिखित में से ‘सृजन’ के अन्तर्गत नहीं आता है –
(1) प्रश्नों के उत्तर रटना
(2) किसी विषय पर अपने विचार लिखना
(3) कहानी-लेखन
(4) मिट्‌टी से खिलौने बनाना
Ans: (1) प्रश्नों के उत्तर रटना सृजन के अन्तर्गत नहीं आता जबकि कहानी लिखना, मिट्‌टी के खिलौने बनाना तथा किसी विषय पर अपने विचार लिखना सृजन के अन्तर्गत आता है।
Q11. ‘साहित्य’ शब्द में ‘इक’ प्रत्यय लगाने पर शब्द बनेगा-
(1) सहित्यिक
(2) साहित्यीक
(3) साहित्यिक
(4) साहित्यइक
Ans: (3) साहित्य में ‘इक’ प्रत्यय लगाने से साहित्यिक शब्द बनेगा। प्रत्यय – शब्दो के बाद जो अक्षर या अक्षर समूह लगाया जाता है उसे प्रत्यय कहते है। प्रत्यय दो शब्दो से बना है प्रतिअय। ‘प्रति’ का अर्थ ‘साथ में, पर बाद में’ है और ‘अय’ का अर्थ है ‘चलने वाला’ अतः प्रत्यय का अर्थ है ‘शब्दों के साथ में पर बाद में लगने वाला या चलने वाला’।
Q12. बौद्धिक, ऐतिहासिक शब्दों में मूल शब्द तथा प्रत्यय हैं-
(1) बुद्ध (मूल शब्द) ‘इक’ प्रत्यय, इतिहास (मूल शब्द) ‘इक’ प्रत्यय
(2) बौद्ध (मूल शब्द) ‘इक’ प्रत्यय, ऐतिहास (मूल शब्द) ‘इक’ प्रत्यय
(3) बौद्धि (मूल शब्द) ‘क’ प्रत्यय, ऐतिहास (मूल शब्द) ‘इक’ प्रत्यय
(4) बुद्धि (मूल शब्द) ‘इक’ प्रत्यय, इतिहास (मूल शब्द) ‘इक’ प्रत्यय
Ans: (4) बौद्धिक तथा ऐतिहासिक में मूल शब्द बुद्धि तथा इतिहास है। बुद्धि (मूल शब्द) में ‘इक’ प्रत्यय लगाने से बौद्धिक तथा इतिहास (मूल शब्द) में ‘इक’ प्रत्यय लगाने से ऐतिहासिक बना है।
Q13. न्याय-नीति में………..समास है।
(1) द्वन्द्व समास
(2) कर्मधारय
(3) अव्ययीभाव
(4) तत्पुरुष
Ans: (1) न्याय-नीति में द्वन्द्व समास है। जिस समास में दोनों पद प्रधान होता है वहाँ द्वन्द्व समास होता है। जबकि कर्मधारय समास – जहाँ विशेषण विशेष्य हो वहाँ कर्मधारय समास होता है। अव्ययी भाव समास – जिस समास में पूर्व पद प्रधान होता है और उत्तर पद गौण है वहाँ अव्ययी भाव समास होता है। तत्पुरुष – इसमें प्रथम पद गौण और उत्तर पद प्रधान होता है।
Q14. ‘ईश्वर’ का पर्यायवाची नहीं है –
(1) परमेश्वर
(2) जगदीश
(3) परमात्मा
(4) ब्रह्मा
Ans: (4) ब्रह्मा ईश्वर का पर्यायवाची शब्द नहीं है, जबकि जगदीश, परमेश्वर, परमात्मा, ईश्वर के पर्यायवाची शब्द है।
Q15. ‘समान’ का विलोम शब्द है –
(1) असमानता
(2) सामना
(3) सामान
(4) असमान
Ans: (4) ‘समान’ का विलोम असमान होगा। जबकि असमानता का विलोम समानता होगा तथा सामना और सामान का विलोम नहीं होगा।
निर्देश (प्र. सं. 1620) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए।
Q16. भाषा –
(1) सीखने-सिखाने में पाठ्‌य-पुस्तकों का विशेष महत्व होता है
(2) जानने का अर्थ उसका व्याकरण जानना है
(3) जीवन की विभिन्न स्थितियों को साधती है
(4) व्याकरण पर ही आधारित होती है
Ans: (3) भाषा जीवन की विभिन्न स्थितियों को साधती है। क्योंकि भाषा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने विचारों को दूसरों के साथ रख सकते हैं।
Q17. भाषा की कक्षा में समाचार-पत्र-पत्रिकाओं का उपयोग यह सुनिश्चित करता है कि –
(1) बच्चों की भाषा पर समाचार-पत्र-पत्रिकाओं का प्रभाव पड़े
(2) शिक्षण-सामग्री का उपयोग हो रहा है
(3) बच्चों को मुख्य शीर्षक याद है
(4) बच्चे प्रमाणित लेख, समाचार आदि पर अपनी प्रतिक्रिया देने की क्षमता रखते हैं
Ans: (4) भाषा की कक्षा में समाचार पत्र-पत्रिकाओं का उपयोग यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे प्रमाणित लेख, समाचार आदि पर अपनी प्रतिक्रिया देने की क्षमता रखते हैं।
Q18. सुलेखा जब-तब बच्चों के साथ बातचीत करती रहती है। वह –
(1) सदैव बच्चों की परीक्षा ले रही है
(2) बच्चों को वाचाल बनाना चाहती है
(3) समय नष्ट कर रही है
(4) बच्चों को भाषा अर्जित करने के लिए परिवेश दे रही है
Ans: (4) सुलेखा के द्वारा बच्चों से बातचीत करने का कारण है कि वह बच्चों को भाषा अर्जित करने के लिए परिवेश दे रही है।
Q19. सुमन बचपन से ही गुजराती बोल-समझ लेती है। वह कभी विद्यालय नहीं जाती है। यह उदाहरण है –
(1) सुमन की प्रतिभा का
(2) भाषा-अर्जन का
(3) भाषा सीखने का
(4) भाषा में पिछड़ेपन का
Ans: (2) सुमन द्वारा कभी विद्यालय न जाना तथा बचपन से ही गुजराती बोल समझ लेना भाषा अर्जन का उदाहरण है। हम अपने परिवेश, वातावरण, परिवार और क्षेत्र से जो भाषा सीखते हैं वह भाषा-अर्जन के अन्तर्गत आता है।
Q20. भाषा मे सतत्‌ और व्यापक मूल्यांकन का उद्देश्य है –
(1) केवल यह जानना कि बच्चों ने कितना सीखा
(2) केवल बच्चों की कमियाँ जानना
(3) बच्चों को उत्तीर्ण-अनुत्तीर्ण श्रेणी में रखना
(4) बच्चों द्वारा भाषा सीखने की प्रक्रिया को जानना, समझना
Ans: (4) भाषा में सतत्‌ और व्यापक मूल्यांकन का उद्देश्य-बच्चों द्वारा भाषा सीखने की प्रक्रिया को जानना समझना है। क्योंकि सतत्‌ एवं व्यापक मूल्यांकन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया के द्वारा हम यह पता लगाते हैं कि बच्चे किस तरह सीख रहे हैं? उन्होंने कितना सीखा है? और उन्हें किस प्रकार के अधिगम की आवश्यकता है?
Q21. सस्वर पठन का मुख्य उद्देश्य है –
(1) बच्चों की पढ़ने-सम्बन्धी झिझक को समाप्त करना
(2) मौन पठन करना
(3) बोल-बोलकर पढ़ना
(4) द्रुत गति से पठन करना
Ans: (1) सस्वर पाठन का मुख्य उद्देश्य बच्चों की पढने सम्बन्धी झिझक को समाप्त करना है। सस्वर पाठन में सभी बच्चे एक साथ पाठ का उच्चारण करते हैं और ऐसा करते समय जो संकोची और शर्मीले स्वभाव के बालक होंगे उन्हें भी पाठन में रुचि होगी।
Q22. भाषा-शिक्षण में कौन-सा बिन्दु सबसे कम महत्वपूर्ण है?
(1) भाषिक परिवेश
(2) भाषायी अभ्यास
(3) पाठ्‌य-सामग्री
(4) परीक्षाएँ
Ans: (3) भाषा शिक्षण में भाषायी अभ्यास, भाषिक परिवेश तथा परिक्षाओं की तुलना में पाठ्‌य-सामग्री सबसे कम महत्वपूर्ण है। क्योंकि बालक का भाषायी अभ्यास और भाषिक परिवेश में जितनी अधिक पकड़ होगी परीक्षाओं में उपलब्द्धि उतनी ही अच्छी होगी और वे अपनी परीक्षाओं में उतना ही रुचि लेंगे।
Q23. सतत्‌ मूल्यांकन का एक निहितार्थ है –
(1) बच्चों के परीक्षा-सम्बन्धी भय को समाप्त करना
(2) बच्चों के भाषा-प्रयोग का निरन्तर अवलोकन करना
(3) प्रतिदिन परीक्षाएँ लेना
(4) हर महीने परीक्षाएँ लेना
Ans: (2) बच्चों के भाषा प्रयोग का निरन्तर अवलोकन करना सतत मूल्यांकन का निहितार्थ है। क्योंकि सतत्‌ मूल्यांकन एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है इसके द्वारा हम यह अवलोकन करते हैं कि शिक्षार्थी ने क्या सीखा उसने कितना सीखा तथा उसके ज्ञान में कितनी वृद्धि हुई है।
Q24. भाषा के आधारभूत कौशल –
(1) हमेशा अर्जित किए जाते हैं
(2) क्रमबद्ध रूप से चलते हैं
(3) सर्वथा पृथक्‌ हैं
(4) अन्तः सम्बन्धित होते हैं
Ans: (1) भाषा के आधारभूत कौशल हमेशा अर्जित किए जाते हैं तथा भाषा एक अर्जित किए जाने की प्रक्रिया है। क्योंकि बच्चों का पहला विकास उसके वातावरण पर आधारित होता है और भाषा अर्जन के लिए वह अपने परिवार और वातावरण पर निर्भर रहता है जबकि भाषा अधिगम में ऐसा नहीं है।
Q25. शिक्षक की स्वयं की भाषा-प्रयोग की कुशलता है-
(1) बच्चों के भाषा-प्रयोग पर कोई प्रभाव नहीं डालती है
(2) बच्चों के भाषा-प्रयोग के लिए आदर्श रूप प्रस्तुत करती है
(3) बच्चों को आलंकारिक भाषा-प्रयोग के लिए प्रेरित करती है
(4) बच्चों की भाषा का अनुकरण करने के लिए बाध्य करती है
Ans: (2) शिक्षक के स्वयं की भाषा प्रयोग की कुशलता बच्चों के भाषा प्रयोग के लिए आदर्श रूप प्रस्तुत करती है। क्योंकि शिक्षक का जितना स्वयं की भाषा पर पकड़ होगा तथा उसके जो गुण होते हैं बच्चे पूरी तरह से अनुकरण करते हैं। अतः शिक्षक को भाषा की कुशलता का पूरा प्रयोग करना चाहिए।
Q26. भाषा-अर्जन और भाषा-अधिगम में महत्त्वपूर्ण अन्तर है
(1) भाषा की पाठ्‌य-पुस्तक
(2) भाषा का कठिनाई-स्तर
(3) भाषा सीखने-सिखाने की पद्धति
(4) भाषिक परिवेश की उपलब्धता
Ans: (4) भाषा-अर्जन और भाषा-अधिगम में महत्वपूर्ण अन्तर भाषिक परिवेश की उपलब्धता है।
Q27. भाषा की पाठ्‌य-पुस्तक में……से सम्बन्धित पाठ होने चाहिए।
(1) साहित्य
(2) संस्कृति
(3) विज्ञान
(4) ये सभी
Ans: (1) भाषा की पाठ्‌य-पुस्तक में साहित्य से सम्बन्धित पाठ होने चाहिए।
Q28. आकलन –
(1) केवल यह बताता है कि बच्चे ने क्या नहीं सीखा
(2) मूलतः शिक्षक-केन्द्रित ही होता है
(3) भाषा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग है
(4) पाठ-समाप्ति पर ही किया जाता है
Ans: (3) आकलन भाषा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग है।
Q29. मौखिक भाषा के आकलन का सर्वोत्तम तरीका है-
(1) अन्त्याक्षरी
(2) किताब पढ़ना
(3) प्रश्नों के तयशुदा उत्तर देना
(4) अनुभव बाँटना व बातचीत
Ans: (4) अनुभव बाँटना व बातचीत करना मौखिक भाषा के आकलन का सर्वोत्तम तरीका है। क्योंकि अपने अनुभवों को बाटने से और बातचीत करने से बच्चों के अन्दर मौखिक भाषा सीखने का बल मिलता है।
Q30. स्वाभाविक अभिव्यत्ति, कल्पनाशीलता, कौशल और सोच को विकसित करना-
(1) भाषा-शिक्षण का एकमात्र उद्देश्य है
(2) भाषा-शिक्षण को किसी प्रकार की दिशा नहीं देता
(3) भाषा-शिक्षण का उद्देश्य नहीं है
(4) भाषा-शिक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है
Ans: (4) स्वाभाविक अभिव्यत्ति, कल्पनाशीलता कौशल और सोच को विकसित करना भाषा शिक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। ऐसा करने से उनकी स्वयं को अभिव्यत्ति और कल्पना का पता चलेगा।
निर्देश : निम्नलिखत प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सबसे उचित विकल्प चुनिए।

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