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025 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. एक भाषा-शिक्षक के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
(1) बच्चों को भाषा-प्रयोग के अवसर उपलब्ध कराना।
(2) भाषा का आकलन
(3) भाषा की त्रुटियों के प्रति कठोर रवैया अपनाना
(4) भाषा की पाठ्य-पुस्तक
Ans: (1) एक भाषा शिक्षक के लिए यह जरूरी है कि वह अपने बच्चों को भाषा प्रयोग के अवसर उपलब्ध कराये ताकि भाषा सम्बन्धी उनकी पकड़ मजबूत हो सके। इससे उनमें भाषागत बोधगम्यता बढ़ेगी।
Q2. भाषा की कक्षा में एक शिक्षक बच्चों से क्या अपेक्षा करता है?
(1) बच्चे अपनी मातृभाषा का बिल्कुल भी प्रयोग न करें।
(2) संस्कृतनिष्ठ भाषा में ही जवाब दें
(3) बच्चे सवालों के बँधे-बँधाए जवाब न दें
(4) बच्चे सवालों के बँधे-बँधाए जवाब दें
Ans: (3) भाषा की कक्षा में एक शिक्षक बच्चों से यह अपेक्षा करते हैं कि उनसे बच्चों से जो प्रश्न पूछे जाये उसका उत्तर अक्षरशः (बँधे बँधाये) न देकर अपितु अपनी स्वयं की मौलिक अभिव्यक्ति में हो।
Q3. भाषा स्वयं में –
(1) एक जटिल चुनौती है
(2) एक नियमबद्ध व्यवस्था है
(3) एक विषय मात्र है
(4) संप्रेषण का एकमात्र साधन है।
Ans: (2) भाषा का जहाँ तक प्रश्न है, यह स्वयं में एक नियमबद्ध व्यवस्था है, जो अपने व्याकरण के दायरे में आबद्ध रहकर गतिमान होती है। ध्यातव्य हो कि यह सम्प्रेषण का एकमात्र साधन है।
Q4. भाषा का प्रयोग –
(1) जीवन के विभिन्न संदर्भो में होता है
(2) केवल मुद्रित सामग्री में होता है
(3) केवल परीक्षा में होता है
(4) केवल पाठ्य-पुस्तक में होता है
Ans: (1) भाषा का दृष्टिकोण एकांकी ही नहीं होता, बल्कि यह जीवन के विभिन्न संदर्भों से जुड़ी हुई होती है। यह केवल पाठ्‌य पुस्तक या परीक्षा अथवा मुद्रण सामग्री से भी सम्बद्ध नहीं होती।
Q5. बच्चें अपने परिवेश में स्वयं भाषा अर्जित करते है। इसका एक निहितार्थ यह है कि –
(1) बच्चों को अत्यंत सरल भाषा का परिवेश उपलब्ध कराया जाए
(2) बच्चों को केवल लक्ष्य भाषा का ही परिवेश उपलब्ध कराया जाए
(3) बच्चों को बिल्कुल भी भाषा न पढ़ाई जाए
(4) बच्चों को समृद्ध भाषिक परिवेश उपलब्ध कराया जाए।
Ans: (4) बच्चे अपने परिवेश में स्वयं भाषा अर्जित करते हैं अतएव यह आवश्यक है कि उन्हें (बच्चों को) समृद्ध भाषिक परिवेश उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
Q6. भाषा सीखने-सिखाने का उद्देश्य है –
(1) अपनी बात की पुष्टि के लिए तर्क देना
(2) दूसरों की बात समझना सीखना
(3) विभिन्न स्थितियों में भाषा का प्रभावी प्रयोग करना।
(4) अपनी बात कहना सीखना
Ans: (3) भाषा के सीखने अथवा सिखाने के पीछे निहित उद्‌देश्य यह होता है कि विभिन्न स्थितियों में भाषा का प्रभावी प्रयोग किया जा सके।
Q7. भाषा-अर्जन में महत्वपूर्ण है –
(1) भाषा के विभिन्न रूपों का प्रयोग
(2) भाषा का शिक्षक
(3) भाषा का व्याकरण
(4) पाठ्य-पुस्तक
Ans: (1) भाषा अर्जन के पीछे निहित उद्‌देश्य यह होना चाहिए कि भाषा के विभिन्न रूपों का प्रयोग किया जा सके एवं साथ ही साथ भाषागत व्यापक पकड़ होनी चाहिए।
Q8. बच्चों की भाषा-संबंधी क्रमिक प्रगति का लेखा-जोखा करना ………. से संभव है।
(1) पोर्टफोलियों
(2) मौखिक परीक्षा
(3) उत्तर-पुस्तिकाओं
(4) लिखित परीक्षा
Ans: (1) बच्चों की भाषा सम्बन्धी क्रमिक प्रगति का लेखा-जोखा रखना पोर्टफोलियो से ही संभव है।
Q9. भाषा की पाठ्य-पुस्तवें –
(1) भाषा सीखने का एकमात्र संसाधन हैं
(2) साध्य है
(3) अभ्यासपरक ही होनी चाहिए
(4) साधन है
Ans: (4) भाषा की पाठ्‌य-पुस्तवें साध्य नहीं अपितु एक साधन है जिसके द्वारा हम ज्ञान प्राप्त करते हैं। यह कहा जाय कि ये पुस्तवें एकमात्र संसाधन हैं, उचित नहीं होगा।
Q10. पत्र-पत्रिकाएँ भाषा सीखने में –
(1) त्रुटियों को बढ़ावा देती है
(2) बाधक है
(3) बड़ों के पढ़ने की वस्तु हैं
(4) साधक है
Ans: (4) पत्र-पत्रिकाओं में भाषा का प्रयोग सामान्य से लेकर विशेष तक होता है। यह सहजता से लेकर साहित्यिकता तक भरा होता है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि पत्र-पत्रिकाएँ भाषा सीखने में साधक होती हैं।
Q11. बच्चों की भाषा के आकलन का सर्वाधिक प्रभावी तरीका है –
(1) प्रश्नों के उत्तर देना
(2) लिखित परीक्षा
(3) प्रश्न पूछना और पढ़ी गई सामग्री पर प्रतिक्रिया व्यत्त करना।
(4) श्रुतलेख
Ans: (3) बच्चों की भाषा के आकलन का सर्वाधिक प्रभावी तरीका यह है कि उनसे पाठ्‌य-सामग्री पर प्रश्न पूछे जायें एवं उस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की जाय।
Q12. प्रश्न पूछना, प्रतिक्रिया व्यत्त करना, परिचर्चा में भाग लेना, वर्णन करना –
(1) भाषा-आकलन के तरीके मात्र हैं
(2) केवल साहित्यिक गतिविधियाँ है
(3) भाषा-सीखने-सिखाने तथा आकलन के तरीके हैं
(4) केवल शिक्षण पद्धति हैं
Ans: (3) भाषा सीखने-सिखाने एवं आकलन के तरीकों के अंतर्गत निम्न महत्वपूर्ण बातें ध्यातव्य हैं – (i) प्रश्न पूछना, (ii) प्रतिक्रिया व्यक्त करना, (iii) परिचर्चा में भाग लेना एवं (iv) वर्णन करना।
Q13. बहुभाषिक एवं बहुसांस्कृतिक कक्षा में –
(1) बच्चों की मातृभाषा को समुचित सम्मान, स्थान देते हुए मानक भाषा से भी परिचय कराना चाहिए
(2) बच्चों को मातृभाषा का प्रयोग वर्जित होना चाहिए
(3) बच्चों को केवल मानक भाषा के प्रयोग के लिए ही पुरस्कृत करना चाहिएः
(4) बच्चों की मातृभाषा का ही सदैव प्रयोग किया जाना चाहिए।
Ans: (1) ऐसी कक्षाएँ जहाँ अनेक भाषाओं एवं अनेक संस्कृतियों के विषय में जानकारी दी जाती हो, वहाँ सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि बच्चों की मातृभाषा को समुचित सम्मान देते हुए मानक भाषा से परिचय कराना चाहिए।
Q14. भाषा के व्याकरण की समझ को –
(1) केवल लघुत्तर प्रश्नों के माध्यम से आँका जाना चाहिए
(2) केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के माध्यम से आँका जाना चाहिए
(3) निबंधात्मक प्रश्नों के माध्यम से आँका जाना चाहिए
(4) संदर्भपरक प्रश्नों के माध्यम से आँका जाना चाहिए
Ans: (4) जहाँ तक भाषा के व्याकरण की समझ का प्रश्न है, इसे महत्वपूर्ण संदर्भपरक प्रश्नों के माध्यम से आकलित करना चाहिए न कि लघुत्तर, वस्तुनिष्ठ एवं संदर्भपरक प्रश्नों के माध्यम से।
Q15. निम्नलिखित में से कौन-सा भाषा-शिक्षण का उद्देश्य है?
(1) भाषा सीखते समय त्रुटियाँ बिल्कुल न करना
(2) निजी अनुभवों के आधार पर भाषा का सृजनशील प्रयोग करना
(3) भाषा की बारीकी और सौंदर्यबोध को सही रूप से समझने की क्षमता को प्रोत्साहित करना।
(4) भाषा के व्याकरण सीखने पर बल देना।
Ans: (3) भाषा शिक्षण का उद्‌देश्य है – भाषा की बारीकियों को समझना एवं सौंदर्यबोध को सम्यव्‌ रूप से समझने की क्षमता को प्रोत्साहित करना।
निर्देश : कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्र.सं. 16 से 21) सबसे उचित विकल्प चुनिए। सुनता हूँ मैंने भी देखा, काले बादल में रहती चाँदी की रेखा। काले बादल जाति-द्वेष के, काले बादल विश्व-क्लेश के, काले बादल उठते पथ पर नवस्वतंत्रता के प्रवेश के सुनता आया हूँ, है देखा काले बादल में हँसती चाँदी की रेखा
(चाँदी की रेखा, सुमित्रानन्दन पंत)
Q16. ‘‘काले बादल में रहती चाँदी की रेखा’’ पंत्ति का भाव है
(1) बादलों के टकराने से बिजली चमकती है
(2) विपत्तियों के बीच आशा की किरण दिखाई देती है।
(3) अँधेरे के बाद प्रकाश आता है
(4) काले बादलों में चाँदी की रेखा रहती है
Ans: (3) ‘‘काले बादल में रहती चाँदी की रेखा’’ पंक्ति का भाव है, अंधेरे के बाद प्रकाश का आवर्तन होता है। अंधेरा और उजाला ये दो घटक हैं जिनका क्रमिक आगमन होता रहता है। ये उसी प्रकार है, जैसे – सुख-दुख, लाभ-हानि, रात-दिन और जीवन-मरण।
Q17. ‘काले बादल’ प्रतीक है ……………..के
(1) मानसून द्वारा आने वाली खुशहाली
(2) जातिगत वैमनस्य
(3) तूफान
(4) गर्मी से मुत्ति
Ans: (2) प्रस्तुत काव्यगत पंक्तियों में काले बादल जातिगत वैमनस्य के प्रतीक के रूप में यहाँ दर्शाये गये हैं न कि मानसून, तूफान एवं गर्मी के संदर्भ में।
Q18. ‘काले बादल में रहती चाँदी की रेखा’ में कौन-सा अलंकार है?
(1) उत्प्रेक्षा अलंकार
(2) रूपक अलंकार
(3) श्लेष अलंकार
(4) उपमा अलंकार
Ans: (3) ‘काले बादल में रहती चाँदी की रेखा’ में श्लेष अलंकार निहित है। यहाँ पर श्लेष का अर्थ है – ‘‘चिपका हुआ’’। इस अलंकार में प्रयुक्त शब्द विशेष में कई अर्थ चिपके रहते हैं। दूसरे शब्दों में जहाँ एक शब्द के प्रकरण में अपेक्षित अनेक अर्थ हो, वहाँ श्लेष अलंकार होता है। यह दो प्रकार का होता है – (i) अभंग श्लेष और (ii) सभंग श्लेष।
Q19. निम्न में से ‘बादल’ का पर्यायवाची शब्द नहीं हैः
(1) घन
(2) जलद
(3) पयोधर
(4) जलज
Ans: (4) प्रश्नान्तर्गत बादल का पर्यायवाची शब्द जलज नहीं है, जबकि जलद, घन एवं पयोधर इसके पर्याय शब्द हैं।
Q20. ‘स्वतंत्रता’ का विलोम शब्द है
(1) परतंत्रता
(2) गुलाम
(3) पराधीनता
(4) परतंत्र
Ans: (3) स्वतंत्रता का विलोम शब्द पराधीनता होता है।
Q21. कवि क्या सुनने और देखने की बात कहता है?
(1) आशा की किरण को
(2) बिजली को
(3) निराशा को
(4) बादलों को
Ans: (1) प्रस्तुत काव्य में कवि आशा की किरण को देखने एवं सुनने की बात करता है। कारण यह है कि आशा पर ही समग्र सृष्टि अवलम्बित है। आशा ही जीवन है।
निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्र.सं. 22 से 30) सबसे उचित विकल्प चुनिए। मुझे मालूम नहीं था कि भारत में ‘तिलोनिया’ नाम की भी कोई जगह है जहाँ हमारे देश के समसामयिक इतिहास का एक विस्मयकारी पन्ना लिखा जा रहा है। उस वत्त तक तिलोनिया के बारे में मुझे इतनी ही जानकारी थी की वहाँ पर एक स्वावलंबी विकास-वेंन्द्र चल रहा है, जिसे स्थानीय ग्रामवासी, स्त्री-पुरुष मिलजुलकर चला रहे हैं। मुझे वहाँ जाने का अवसर मिला। बस्ती क्या थी, कुछ पुराने और कुछ नए छोटे-छोटे घरों का झुरमुट थी। वहाँ एक सज्जन ने बताया कि एक सुशिक्षित तथा उसके दो साथियों टाइपिस्ट तथा फोटोग्राफर ने मिलकर 1972 में इस संस्थान की स्थापना थी। संस्थान का नाम था- सामजिक कार्य तथा शोधसंस्थान( एस.डब्ल्यू आर.सी.)। मेरे मन में संशय उठने लगे थे। आज के जमाने में वैज्ञानिक उपकरणों और जानकारी के बल पर ही तरक्की की जा सकती है। उससे कटकर और अवेहलना करते हुए नहीं की जा सकती। एक पिछड़े हुए गाँव के लोग अपनी समस्याएं स्वयं सुलझा लेगें, यह नामुमकिन था। वह सज्जन कहे जा रहे थे ‘‘हमारे गाँव आज नहीं बसे हैं इन गाँवो मेंं शताब्दियों से हमारे पूर्वज रहते आ रहे हैं पहले जमाने में भी हमारे लोग अपनी सूझ और पहलकदमी के बल पर ही अपनी दिक्कते सुलझाते रहे होगे। जरूरत इस बात की है कि हम शताब्दियों की इस परंपरागत जानकारी को नष्ट न होने दें उसका उपयोग करें।’’ फिर मुझे समझाते हुए बोले ‘‘हम बाहर की जानकारी से भी पूरा-’पूरा लाभ उठाते है, पर मूलतः स्वावलंबी बनना चाहते हैं, स्वावलंबी, आत्मनिर्भर।’’ मुझे बार-बार गाँधीजी के कथन याद आ रहे थे। मैंने गाँधीजी का जिक्र किया तजो वह बड़े उत्साह से बोले ‘‘आपने ठीक ही कहा है। यह संस्थान गाँधी जी की मान्यताओं के अनुरूप ही चलता है- सादापन, कर्मठता, अनुशासन, सहभागिता। यहाँ सभी निर्णय मिल-बैठकर किए जाते है। आत्मनिर्भरता…..।’’ आत्मनिर्भरता से मतलब कि ग्रामवासियों की छिपी क्षमताओं को काम में लाया जाए और गाँधी जी के अनुसार, ग्रामवासी अपनी अधिकांश बुनियादी जरूरत की वस्तुओं का उत्पादन स्वयं करें। (एक तीर्थ यात्रा, भीष्म साहनी)
Q22. सामाजिक कार्य तथा शोध-संस्थान का उद्देश्य था
(1) उन्हें स्वावलंबी आत्मनिर्भर बनाना
(2) उन्हें केवल अनुशासित करना
(3) उन्हें प्राचीन परंपराओं से परिचित कराना
(4) ग्रामवासियों को देश-विदेश की जानकारी प्रदान करना।
Ans: (1) सामाजिक कार्य तथा शोध संस्थान की स्थापना का उद्‌देश्य था – उन्हें स्वावलम्बी एवं आत्मनिर्भर बनाना। स्वावलम्बी व्यक्ति कभी पराधीन नहीं होता। वह स्वयं अपना विकास करता है। वह अपने जीवन की नींव खुद तैयार करता है।
Q23. लेखक का मानना था।
(1) ग्रामवासियों को अपनी समस्याएं स्वयं सुलझाने की आदत है।
(2) ग्रामवासी अपनी समस्याएं स्वयं सुलझा सकते है
(3) आधुनिक समय में वैज्ञानिक उपकरणें और जानकारी से कटकर या उसकी अवहेलना करके तरक्की नहीं की जा सकती है।
(4) आधुनिक समय में वैज्ञानिक उपकरणें और जानकारी के बल पर ही तरक्की नहीं की जा सकती है।
Ans: (3) लेखक का मानना था कि आधुनिक समय में वैज्ञानिक उपकरणों और जानकारी से कटकर या उसकी अवहेलना करके तरक्की नहीं की जा सकती है। तरक्की के लिए आवश्यक है कि इस नवीन उपकरणों का ज्ञान हो।
Q24. संस्थान के निर्णय और संचालन में आधारभूत भूमिका इनमें से किसकी है?
(1) उस गाँव में रहने वाले सभी लोगों की
(2) केवल गरीब और दलित महिलाओं की
(3) गाँव-प्रधान की
(4) संस्थापक की
Ans: (1) संस्थान के निर्णय और संचालन में आधारभूत भूमिका उस गांव में रहने वाले सभी लोगों से सम्बन्धित होती है न कि किसी एक व्यक्ति की।
Q25. ‘आत्म’ उपसर्ग किस शब्द में नहीं है?
(1) आत्मीय
(2) आत्मसम्मान
(3) परमात्मा
(4) आत्मनिर्भर
Ans: (3) आत्म उपसर्ग, आत्म सम्मान, आत्मीय और आत्मनिर्भर में है। परमात्मा में यह उपसर्ग नहीं है।
Q26. लेखक के अनुसार ‘‘तिलोनिया’’ गाँव में हमारे देश के आजकल के इतिहास का विस्मयकारी पन्ना लिखा जा रहा है’’ इसका कारण है –
(1) वहाँ के लोग अनुदान पर आश्रित हैं
(2) वहाँ एक स्वावलंबी विकास-केन्द्र चल रहा है
(3) केन्द्र में इतिहास पर विस्मयकारी शोध किया जा रहा है
(4) ‘तिलोनिया’ गाँव पिछड़े गाँव के रूप में जाना जाता है।
Ans: (2) तिलोनिया गांव में हमारे देश के आजकल के इतिहास का विस्मयकारी पन्ना लिखा जा रहा है, इसका कारण यह है कि वहाँ एक स्वावलम्बी विकास वेंद्र चल रहा है।
Q27. ‘शताब्दी’ …………समास का उदाहरण है।
(1) तत्पुरूष
(2) द्विगु
(3) अव्ययीभाव
(4) बहुव्रीहि
Ans: (2) इसमें द्विगु समास है। जिस समास का प्रत्यय प्रथम पद संख्यावाचक हो और अंतिम पद संज्ञा हो, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे – चतुर्दिक – चारों दिशाएँ, त्रिफला – तीन फलों का समाहार, चतुर्युग – चार युगों का समाहार।
Q28. गाँधीजी …………..को मान्यता नहीं देते हैं।
(1) अकर्मण्यता
(2) कर्मठता
(3) सादापन
(4) आत्मनिर्भरता
Ans: (1) गाँधीजी अकर्मण्यता को मान्यता नहीं देते थे। इसके अतिरिक्त वे सादापन, कर्मठता एवं आत्मनिर्भरता पर बल देते थे।
Q29. निम्नलिखित में से संज्ञा का उदाहरण नहीं है
(1) अनुशासन
(2) स्वावलंब
(3) अनुशासित
(4) आत्मनिर्भरता
Ans: (3) उक्त विकल्पों में अनुशासित संज्ञा का उदाहरण नहीं है।
Q30. ‘उपयोगी’ शब्द का विलोम है
(1) अनपयोगी
(2) अनुपयोगी
(3) उपयोगिता
(4) अउपयोगी
Ans: (2) उपयोगी शब्द का विलोम अनुपयोगी होता है।
निर्देश – निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर, इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। मेघ आए, बड़े बन-ठन के सँवर के आगे-आगे नाचती गाती बयार चली दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली पाहुन ज्यों आए हो गाँव में शहर के मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के पेड़ झुक-झाँकने लगे गरदन उचकाए आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए, बाँकी चितवन उठा नदी ठिठकी घूँघट सरके। मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के। बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की बरस बाद सुधि लीन्ही बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की हरसाया ताल लाया पानी परात भर के मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के क्षितिज-अटारी गहराई दामिनी दमकी, क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की बाँध टूटा झर-झर मिलन के अश्रु ढरके, मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।

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