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023 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. ‘भी’ शब्द है –
(1) क्रियाविशेषण
(2) क्रिया
(3) संबंधवाचक
(4) निपात
Ans: (4) ‘भी’ निपात शब्द है। इसके अलांवा अन्य निपात शब्द हैं – ही, तो, हाँ, मत, नहीं आदि।
Q2. इसके विपरीत हर घर की दूसरी सच्चाई यह भी है कि…
(1) वास्तविक
(2) सूत्ति
(3) वास्तविकता
(4) सद्‌वचन
Ans: (3) वाक्य के अंतर्गत रेखांकित अंश का समानार्थी शब्द है – वास्तविकता।
Q3. ‘घर के टूटने-बिखरने का मुख्य कारण क्या है?
(1) माता-पिता बनने का अर्थ न जानना
(2) बच्चों के बारे में न जानना
(3) दाम्पत्य का अर्थ न जानना
(4) घर बसाने की जल्दी करना
Ans: (3) घर के टूटने-बिखरने का मुख्य कारण है – दाम्पत्य का अर्थ न जानना। सम्प्रति गद्यांश में लेखक ने स्पष्ट किया है कि दाम्पत्य की शुरुआत कैसे करनी चाहिए? यह जीवन निश्चय ही जीवनरूपी धुरी के दो पहिये के समान है, जिसे समझना परमावश्यक है।
Q4. हर घर में किस चीज का आग्रह बना हुआ है?
(1) बहुत छोटे बच्चे को स्कूल में पढ़ाने का
(2) बच्चों को स्कूल न भेजने का
(3) बहुत छोटे बच्चे की दुकान भेजने का
(4) बहुत छोटे बच्चे को स्कूल में बिठाकर आने का
Ans: (4) हर घर में बहुत छोटे बच्चे को स्कूल में बिठा आने का आग्रह बना हुआ है।
Q5. लेखक के लिए किसका शिक्षण प्राप्त करना जरूरी है?
(1) बच्चों को किसी भी प्रकार की शिक्षा देने का
(2) पति-पत्नी बनने का
(3) अच्छे माता-पिता बनने का
(4) छोटे-छोटे बच्चों को उच्च विद्यालयों में प्रवेश दिलाने का
Ans: (3) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक का कहना है कि सभी को अच्छे माता-पिता बनने का शिक्षण प्राप्त करना जरूरी है। तभी वह अपने बच्चों की सही ढंग से परवरिश कर सकता है।
Q6. माता-पिता को बच्चों की सही शिक्षा के बारे में जानना क्यों जरूरी है?
(1) ताकि बच्चों को उच्च डिग्रियाँ प्राप्त करवाई जा सवें।
(2) बच्चों को ज्ञानवान्‌ बनाया जा सके।
(3) ताकि बच्चे स्वयं प्रवेश लेने योग्य बन सवें।
(4) जिससे बेहतर समाज का निर्माण किया जा सके।
Ans: (4) माता-पिता को बच्चों की सही शिक्षा के बारे में जानना इसलिए आवश्यक है कि अच्छी शिक्षा-दीक्षा से वे एक अच्छे समाज का निर्माण कर सकते हैं। समाज से ही बढ़ता हुआ एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण भी संभव है।
Q7. समाज और सत्ता किसके प्रति सजग नहीं है?
(1) ज्ञानवान्‌ समाज न बन पाने के घोर संकट के प्रति
(2) अभिभावको के द्वारा शिक्षा प्राप्त न करने के प्रति
(3) घर बसाने की शिक्षा देने वाली शाला खोलने के प्रति
(4) माता-पिता द्वारा बच्चें का पालन-पोषण न करने के प्रति
Ans: (3) समाज और सत्ता में निश्चय ही इस बात की जागरूकता नहीं है कि ऐसी शाला या संस्थान की स्थापना की जाय जिसके माध्यम से लोगों को ऐसी तालीम दी जाय ताकि घर समाज का वातावरण बेहतर हो सके।
Q8. लेखक के अनुसार सबसे पहले क्या जानना जरूरी है?
(1) बच्चों के बारे में
(2) दाम्पत्य की शुरुआत कैसे की जानी चाहिए
(3) बच्चों की शिक्षा के बारे में
(4) माता-पिता के शिक्षा-स्तर को
Ans: (2) लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि लोग शादी तो कर लेते हैं किन्तु इसका मतलब नहीं समझते। वे यह जानते ही नहीं कि यह कितना मधुर एवं पावन बन्धन है, अतएव हमारे लिए यह जरुरी है कि इसकी शुरुआत हम कैसे करें।
Q9. ‘माता-पिता ’ शब्द युग्म है
(1) सार्थक शब्द-युग्म
(2) सार्थक-निरर्थक शब्द-युग्म
(3) निरर्थक शब्द-युग्म
(4) पुररुवत शब्द-युग्म
Ans: (1) ‘माता-पिता’ एक सार्थक युग्म शब्द है।
निर्देश : नीचे दी गई पंत्तियों को पढ़कर सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिएः पूछो किसी भाग्यवादी से, यदि विधि-अंक प्रबल है। पद पर क्यों देती न स्वयं वसुधा निज रतन उगल है।
Q10. ‘प्र’ उपसर्ग से बनने वाला शब्द-समूह है
(1) प्रत्येक, प्रभाव, प्रदेश
(2) प्रत्युत्तर, प्रदेश, प्रपत्र
(3) प्रसाद, प्रत्येक, प्रपत्र
(4) प्रभाव, प्रदेश, प्रपत्र
Ans: (4) ‘प्र’ उपसर्ग से बनने वाला शब्द समूह है – प्रभाव, प्रदेश एवं प्रपत्र।
Q11. कवि ने किसकी महिमा का खंडन किया है?
(1) विधि के विधान का
(2) रतनों का
(3) भाग्यवाद का
(4) वसुधा का
Ans: (3) कवि ने भाग्यवाद की महिमा का खण्डन किया है।
Q12. विधि-अंक से तात्पर्य है
(1) न्याय-अंक
(2) न्यायवादी
(3) ‘विधाता’ लिखा होना
(4) भाग्य का लिखा हुआ
Ans: (4) विधि-अंक से आशय ‘भाग्य में जो लिखा हुआ’ से है।
Q13. कवि के अनुसार यदि भाग्य ही सब कुछ होता तो क्या होता?
(1) रत्न मिल जाते।
(2) रत्न स्वयं प्रकाश युत्त हो उठते।
(3) पैरा के नीचे वसुधा होती।
(4) धरती स्वयं ही रत्न रूपी संपत्ति उगल देती।
Ans: (4) कवि के अनुसार यदि भाग्य ही सब कुछ होता तो धरती स्वयं ही रत्न रूपी सम्पत्ति उगल देती। कुछ पाने के लिए कुछ करना ही पड़ता है।
Q14. तुकबंदी के कारण कौन-सा शब्द बदले हुए रूप में प्रयुत्त हुआ है?
(1) रतन
(2) उगल
(3) प्रबल
(4) स्वयं
Ans: (1) तुकबंदी के कारण ‘रतन’ शब्द बदले हुए रूप में प्रयुत्त हुआ है। रत्न शुद्ध स्वरूप है।
Q15. इनमें से कौन-सा ‘वसुधा’ का समानार्थी है?
(1) वसुंधरा
(2) जलधि
(3) महीप
(4) वारिधि
Ans: (1) वसुधा का समानार्थी शब्द वसुंधरा है, जबकि जलधि एवं वारिधि दोनों समुद्र के पर्याय हैं और महीप राजा का पर्याय है।
निर्देशः सबसे सही विकल्प चुनिए :
Q16. बच्चों की मौखिक भाषा का सतत आकलन करने का सबसे बेहतर तरीका है –
(1) प्रश्नों के उत्तर पूछना
(2) शब्द पढ़वाना
(3) विभिन्न संदर्भों में बातचीत
(4) सुने हुए को दोहराने के लिए कहना
Ans: (3) बच्चों की मौखिक भाषा का सतत आकलन करने का सर्वाधिक अच्छा तरीका है – विभिन्न संदर्भों में बातचीत करना।
Q17. भाषा में सतत और व्यापक आकलन का उद्देश्य है –
(1) भाषा के व्याकरण का आकलन करना
(2) वर्तनी की अशुद्धि के बिना लिखने की क्षमता का आकलन
(3) भाषा के मौखिक और लिखित रूपों के प्रयोग की ़क्षमता का आकलन
(4) पढ़कर समझने की क्षमता का आकलन
Ans: (3) भाषा में सतत एवं व्यापक आकलन का उद्‌देश्य है – भाषा के मौखिक और लिखित रूपों के प्रयोग की क्षमता का आकलन करना।
Q18. भाषा-कक्षा में विभिन्न दृश्य-श्रव्य साधनों का उपयोग का उद्देश्य नहीं है-
(1) सभी प्रकार के बच्चों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना।
(2) आधुनिक तकनीक को कक्षा में लाना।
(3) सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को रुचिकर बनाना।
(4) विद्यालय-प्रमुख के निर्देशों का पालन करना।
Ans: (4) भाषा कक्षा में विभिन्न दृश्य-श्रव्य साधनों का उपयोग का उद्‌देश्य है – (i) आधुनिक तकनीक को कक्षा में लाना, (ii) सभी प्रकार के बच्चों की आवश्यकताओं पर ध्यान देना, (iii) सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को रुचिकर बनाना। न कि विद्यालय प्रमुख के निर्देशों का पालन करना।
Q19. पाठ्य-पुस्तक की भाषा –
(1) तत्समय प्रधान होनी चाहिए।
(2) बच्चों की घर व समुदाय की भाषा से मिलती-जुलती होनी चाहिए।
(3) तद्‌भव प्रधान होनी चाहिए।
(4) अधिकाधिक कठिन शब्दों से युत्त होनी चाहिए।
Ans: (2) पाठ्य-पुस्तक की भाषा बच्चों की घर व समुदाय की भाषा से मिलती-जुलती होनी चाहिए।
Q20. प्राथमिक स्तर पर ‘भाषा-सिखाने’ से तात्पर्य है –
(1) भाषा का व्याकरण सिखना
(2) भाषावैज्ञानिक तथ्य स्पष्ट करना
(3) उच्चस्तरीय साहित्य पढ़ना
(4) भाषा का प्रयोग सिखाना।
Ans: (4) प्राथमिक स्तर पर भाषा सिखाने का आशय है – भाषा के प्रयोग को सिखाना।
Q21. घर की भाषा और विद्यालय में पढ़ाई जाने वाली भाषा-
(1) सदैव समान होती है।
(2) सदैव टकराहट से गुजरती है।
(3) समान हो सकती है।
(4) सदैव अलग होती है
Ans: (3) घर की भाषा और विद्यालय में पढ़ाई जाने वाली भाषा समान हो सकती है।
Q22. प्राथमिक स्तर पर हिंदी ‘भाषा-शिक्षण’ के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है –
(1) पाठ्य-पुस्तक
(2) भाषा-प्रयोग के अवसर
(3) उच्चस्तरीय तकनीकी यन्त्र
(4) व्याकरणिक नियमों का स्मरण
Ans: (2) प्राथमिक स्तर पर हिंदी ‘भाषा-शिक्षण’ के लिए भाषाप्रयोग के अवसर अधिक महत्वपूर्ण है।
Q23. हिंदी-प्रयोग के विविध रूपों को जानने के लिए सर्वाधिक उपयोगी साधन हो सकता है –
(1) शिक्षण की विधियों का संपूर्ण ज्ञान
(2) बाल साहित्य का विविध उपयोग
(3) सुन्दर ढंग से छपी पुस्तवें
(4) उच्चस्तरीय लेखन सामग्री
Ans: (2) हिन्दी प्रयोग के विभिन्न रूपों को जानने के लिए सर्वाधिक उपयोगी साधन हो सकता है – बाल साहित्य ‘का’ विविध उपयोग।
Q24. कक्षा ‘एक और दो’ के बच्चों के लिए आप किस तरह की कहानी का चयन करेंगे?
(1) जिसमें बहुत सारे पात्र हों ।
(2) जो बहुत छोटी हो।
(3) जिसमें दो ही पात्र हों
(4) जिसके शब्दों, वाक्यों और घटनाओं के वर्णन की शैली चित्रात्मक हो।
Ans: (4) कक्षा एक और दो के बच्चों के लिए कहानी का चयन करने हेतु यह आवश्यक है कि शब्दों, वाक्यों और घटनाओं के वर्णन शैली चित्रात्मक हो ताकि वे बड़ी आसानी से यह रुचिकर ढंग से कहानी के तत्व को समझ सके।
Q25. प्राथमिक स्तर पर भाषा-शिक्षण की प्राथमिकता होनी चाहिए –
(1) कविता और कहानी के द्वारा केवल श्रवण-कौशल का विकास करना।
(2) केवल बोलकर पढ़ने की क्षमता विकसित करना।
(3) बच्चों की रचनात्मकता और मौलिकता को पोषित करना।
(4) बच्चों की चित्रांकन-क्षमता का विकास करना।
Ans: (3) प्राथमिक स्तर पर बच्चों के भाषा-शिक्षण सम्बन्धी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि उनमें रचनात्मक और मौलिकता के तत्वों को पोषित किया जाय ताकि उनका आंतरिक विकास हो सके।
Q26. पढ़ने का प्रारंभ –
(1) कहानियों से होना चाहिए।
(2) वर्णमाला से होना चाहिए।
(3) कविताओं से होना चाहिए।
(4) अर्थ-पूर्ण सामग्री से होना चाहिए।
Ans: (4) जब भी हम कोई पठन कार्य करें, महत्वपूर्ण यह है कि सारगर्भित सामग्री का ही चयन हो, इससे मानसिक पोषण होता है। साथ ही साथ थोथे विचारों से मन-मस्तिष्क बच जाता है।
Q27. भाषा के बारे में कौन-सा कथन उचित है?
(1) भाषा नियमबद्ध व्यवस्था है।
(2) भाषा अनिवार्यतः लिखित होती है।
(3) भाषा व्याकरण का अनुसरण करती है।
(4) भाषा और बोली में कभी भी कोई भी सबंध नहीं होता।
Ans: (1) भाषा नियमबद्ध व्यवस्था है।
Q28. प्राथमिक कक्षाओं में ‘रोल प्ले’(भूमिका निर्वाह) का उद्देश्य होना चाहिए –
(1) एक पद्धति के रूप में इसका उपयोग करना।
(2) बच्चों को अभिनय सिखाना।
(3) विभिन्न संदर्भों में भाषा प्रयोग के अवसर प्रदान करता।
(4) बच्चों को अनुशासित रखना।
Ans: (3) प्राथमिक कक्षाओं में ‘रोल प्ले’ अर्थात्‌ भूमिका निर्वाह का उद्देश्य विभिन्न संदर्भों में भाषा प्रयोग के अवसर प्रदान करता है।
Q29. भाषा हमारे परिवेश में बिखरी मिलती है। यह कथन किस पर लागू नहीं होता?
(1) अखबार
(2) भाषा-प्रयोगशाला
(3) विज्ञापन
(4) साइनबोर्ड
Ans: (2) भाषा हमारे परिवेश में बिखरी मिलती है। यह कथन भाषा-प्रयोगशाला पर लागू नहीं होता?
Q30. कक्षा में कुछ बच्चें लिखते समय वर्तनी संबंधी त्रुटियाँ करते हैं। एक भाषा-शिक्षक के रूप में आप क्या करेंगे?
(1) उन्हें सख्त निर्देश देंगे कि वे आगे से गलती न करें।
(2) शब्दों का सही रूप लिखते हुए बच्चों को दोनों तरह के शब्दों का अवलोकन करके अंतर पहचानने का अवसर देंगे।
(3) उनकी त्रुटियों पर बिलकुल ध्यान नहीं देंगे।
(4) उनसे शब्दों को बीस बार लिखने के लिए कहेंगे।
Ans: (2) कतिपय बच्चे कक्षा में लिखते समय वर्तनी सम्बन्धी त्रुटियाँ करते हैं। एक भाषा शिक्षक के रूप में हमारा कर्तव्य होगा कि शब्दों का सही रूप लिखते हुए बच्चों को दोनों तरह के शब्दों का अवलोकन करके अंतर पहचानने का अवसर देंगे।
निर्देश (प्र. सं. 19) निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के लिए सबसे उचित विकल्प चुनिए। किसे कहूँ मैं शिक्षा? क्या है शिक्षा का सच? कैसा होता है शिक्षित व्यत्ति और कैसा होता है पढ़ा-लिखा समाज? मेरे गुरु श्री दयालचन्द्र जी सोनी तो पूरी एक काव्यात्मक पुस्तक लिख गए। इस पुस्तक का नाम है, हूँ अणिभणियों शिक्षित हूँ’। उनका आशय स्पष्ट है कि हर पढ़ा-लिखा आदमी अनपढ़ है। उन्होंने जब यह पुस्तक लिखी तो साफ कहा कि यह किताब उनके पूरे जीवन की शिक्षा का सार है। तब फिर हमें यह भी मान लेना चाहिए कि हमारा पूरा पढ़ालिखा समाज खासा अनपढ़ है, अशिक्षित है। तब फिर बताइए कि शिक्षा को कहाँ खोजें?र्किंहते हैं कि शिक्षा बालक के जन्म के साथ बालक को मिली प्रतिभा का विकास है। उसकी सोई हुई शक्तियों को जगाने का नाम शिक्षा है। मगर ऐसा तो तब सम्भव है जब हम जान लें कि कौनकौन सा बालक कौन-कौन सी प्रतिभा के साथ पैदा हुआ है? उसके शरीर में एवं उसके मन-मस्तिष्क में कौन-कौन सी शक्तियाँ सोई हुई है? इसका अर्थ यह हुआ कि जो बालक शाला में आया है उसको हम पहले पढ़े। हर बालक को पढ़-पढ़ कर पहचाने कि वह क्या है? उसकी प्रदत्त प्रतिभा क्या है? और कौन-कौन सी सुषुप्त शक्तियों को लिए हुए वह हमारे सामने उपस्थित हुआ है?

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