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022 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. काव्य में किस जनता की ओर संकेत किया गया है?
(1) जो रथ चलाती है
(2) जो खेतो-खलिहानों, कारखानों में काम करती है
(3) जिसे बोध है
(4) जिसे साँप काटते है
Ans: (2) उपर्युत्त दी गयी पंत्तियों में उस जनता की तरफ संकेत किया गया है, जो खेतों खलिहानों, कारखानों में काम करती है। क्योंकि रामधारी सिंह दिनकर ने शोषकों को सचेत करना चाहा है कि तुम्हारे द्वारा शोषित उपेक्षित जनता जो खेतों खलिहानों में काम करती है, वह जाग चुकी है।
Q2. ‘‘समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो’’ पंत्ति का आशय है-
(1) समय ने युद्ध-नाद बजा दिया है
(2) समय कोलाहल कर रहा है
(3) अब समय बदल रहा है
(4) समय का रथ बढ़ा आ रहा है
Ans: (1) ‘समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो’ पंत्ति का आशय है कि समय ने युद्ध नाद बजा दिया है। क्योंकि यह कविता रामधारी सिंह की नई कविता परक रचना- नीलकुसुम के (जनतन्त्र का जन्म) से है और उसमें दिनकर ने सदियों से ठण्डी पड़ी जनता को जगाने का प्रयास किया है।
Q3. ‘‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।’’ पंत्ति का भाव है –
(1) राजतन्त्र के विरुद्ध लोकतन्त्र का स्वागत
(2) सारी जनता अब सिंहासनो पर ही बैठेगी
(3) राजा के सिंहासन को खाली करना होगा
(4) जनता, राजा का सिंहासन हिला देगी
Ans: (1) ‘‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’’ पंत्ति का भाव है- राजतन्त्र के विरुद्ध लोकतन्त्र का स्वागत अर्थात कवि के द्वारा शासन कर रहे शासकों को सन्देश दिया जा रहा है कि अब समय बदल चुका है और राजतन्त्र के विरुद्ध लोगों की आवाज उठ चुकी है।
Q4. सामान्य जनता ने अब तक बहुत कष्ट सहे हैं-इस भाव को व्यत्त करने वाली पंत्ति है –
(1) मिट्‌टी सोने का ताज पहन इठलाती है
(2) सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी
(3) जनता,हाँ, मिट्‌टी की अबोध मूरतें वही
(4) जाड़े-पाले की कसक सदा सहने वाली
Ans: (4) उपर्युत्त विकल्प (4) ‘जाड़े पाले की कसक सदा सहने वाली सामान्य जनता’ इस भाव को प्रकट करने वाली पंक्ति है। राजतन्त्र के लोगों द्वारा सीधी-साधी सामान्य जनता का प्रतिदिन शोषण किया जाता है, पर वह सब कुछ चुपचाप सहती रहती है।
Q5. ‘साँप’ किसकी ओर संकेत करता है?
(1) सूदखोरों की ओर
(2) शोषकों की ओर
(3) विषैल साँपों की ओर
(4) जमीदारों की ओर
Ans: (2) उपर्युत्त पंत्तियों में साँप उन शोषकों की तरफ संकेत कर रहा है, जो सीधी-साधी जनता का शोषण करते हैं।
Q6. ‘सुगबुगा उठना’ का अर्थ है-
(1) अपने हक के लिए प्रयत्नशील होना
(2) धीरे-धीरे कहना
(3) राख का जल उठना
(4) अफवाह फैलाना
Ans: (1) सुगबुगा उठना का अर्थ है अपने हक के लिए प्रयत्नशील होना उपर्युत्त पंक्ति के अनुसार सदियों से अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों को सहते-सहते उनके अन्दर की अग्नि प्रज्वलित हो उठी है।
निर्देश (प्र. सं. 715) नीचे दिए गए प्रश्नों में सबसे सही विकल्प का चयन कीजिए।
Q7. उच्च प्राथमिक स्तर पर भाषा-शिक्षण का सर्वोपरि उद्देश्य है –
(1) सरसरी तौर पर तीव्र गति से पढ़ना
(2) विभिन्न साहित्यिक विधाओं का गहनतम ज्ञान प्राप्त करना
(3) भाषा के सौन्दर्यशास्त्र से परिचय
(4) निजी अनुभवों के आधार पर भाषा का सृजनशील इस्तेमाल
Ans: (4) उच्च प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण का सर्वोपरि उद्देश्य अपने निजी अनुभवों के आधार पर भाषा का सृजनशील इस्तेमाल है।
Q8. सुनी, पढ़ी और समझी हुई भाषा को सहज और स्वाभाविक लेखन द्वारा अभिव्यत्त करने की क्षमता का विकास करने में निम्नलिखित में से कौन सहायक है?
(1) ‘मेरा प्रिय विद्यालय’ विषय पर निबन्ध लिखना
(2) सुनी, देखी, पढ़ी घटना को अपने शब्दों में लिखित रूप में अभिव्यत्त करना
(3) औपचारिक पत्र-लेखन
(4) किसी पढ़ी हुई कहानी को संक्षेप में लिखना
Ans: (2) सुनी, देखी, पढ़ी घटना को अपने शब्दों में लिखित रूप में अभिव्यत्त करना स्वाभाविक लेखन करने की क्षमता का विकास करने में सर्वाधिक सहायक है। ऐसा करने से बच्चों की अपनी कार्य कुशलता बौद्धिकता को प्रकट करने का भरपूर अवसर मिल सकेगा।
Q9. भाषा के सन्दर्भ में स्कूली जीवन का यह उच्च प्राथमिक चरण, और बोध के विकास की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
(1) सौन्दर्य बोध, साहित्य बोध, सामाजिक-राजनैतिक
(2) साहित्य, सराहना, सामाजिक
(3) भाषा, साहित्य, ऐतिहासिक
(4) साहित्य बोध, सराहना बोध, ऐतिहासिक
Ans: (1) भाषा के सन्दर्भ में स्कूली जीवन का यह कथन उच्च प्राथमिक चरण सौन्दर्य बोध, साहित्य बोध और सामाजिक राजनैतिक बोध के विकास की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। क्योंकि बच्चों को जब तक सौन्दर्यबोध और साहित्य बोध का ज्ञान नहीं होगा तब तक उनका सामाजिक राजनैतिक विकास पूर्ण रूप से नही हो सकता।
Q10. उच्च प्राथमिक स्तर पर व्याकरण-शिक्षण का उद्देश्य…….. में सहायक होगा।
(1) भाषा की प्रकृति, प्रकार्य और व्याकरणिक नियमों को कण्ठस्थ करने
(2) भाषा की नियमबद्ध प्रकृति को अत्यधिक महत्व देने
(3) व्याकरण की परिभाषाओं को कण्ठस्थ करने
(4) भाषा की नियमबद्ध प्रकृति को समझने और उसका विश्लेषण करने
Ans: (4) भाषा की नियमबद्ध प्रकृति को समझना और उसका विश्लेषण करना उच्च प्राथमिक स्तर पर व्याकरण शिक्षण का उद्देश्य है। अतः भाषा की नियमबद्ध प्रकृति को समझने के लिए और उसका विश्लेषण करने के लिए व्याकरण शिक्षण आवश्यक है।
Q11. उच्च प्राथमिक स्तर पर हिन्दी भाषा-विकास के लिए कौन-सी गतिविधि उपयोगी नहीं हो सकती?
(1) सूचना, डायरी-लेखन, विज्ञापन-लेखन आदि का कार्य करवाना
(2) मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्य बनाना
(3) पढ़ी गई कहानियों का समूह में नाट्‌य-रूपान्तरण
(4) विज्ञापनों, पोस्टरों, साइनबोर्ड और भाषा के अन्य उपयोगों का विश्लेषण करना
Ans: (2) उच्च प्राथमिक स्तर पर हिन्दी भाषा के विकास के लिए मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्य बनाना उपयोगी गतिविधि नहीं है जबकि विज्ञापनों, पोस्टरों, साइनबोर्ड और भाषा के अन्य उपयोग का विश्लेषण करना, पढ़ी गई कहानियों का नाट्‌य रूपान्तरण करना एवं सूचना, डायरी-लेखन एवं विज्ञापन लेखन का कार्य करवाना भाषा विकास के लिए उपयोगी विधि है।
Q12. उच्च प्राथमिक स्तर पर व्याकरण-शिक्षण की सर्वाधिक उचित विधि है –
(1) सूत्र विधि
(2) भाषा-संसर्ग विधि
(3) निगमन विधि
(4) आगमन विधि
Ans: (4) उच्च प्राथमिक स्तर पर व्याकरण शिक्षण की सर्वाधिक उचित विधि आगमन विधि है। आगमन विधि विशिष्ट से सामान्य की ओर उदाहरण से निष्कर्ष की ओर, आधार वाक्य से नियम की ओर तथा तर्क वाक्य से सिद्धान्त की ओर चलता है।
Q13. बच्चों का भाषायी विकास सर्वाधिक रूप में निर्भर करता है –
(1) संचार-माध्यमों पर
(2) आकलन की औपचारिकता पर
(3) पाठ्‌य-पुस्तक पर
(4) समृद्ध भाषा-परिवेश पर
Ans: (4) बच्चों का भाषाई विकास सर्वाधिक रूप से समृद्ध भाषा परिवेश पर निर्भर करता है। क्योंकि भाषा एक संचित कौशल है जो उपयुक्त परिवेश में अधिक परिपक्व होता है।
Q14. उच्च प्राथमिक स्तर पर यह जरूरी है कि बच्चे –
(1) भाषा का अतिरित्त अभ्यास करें और परियोजना कार्य में इण्टरनेट का प्रयोग करें
(2) भाषा के आकलन के लिए की जाने वाली सभी गतिविधियों में समान रूप से हिस्सा लें
(3) समाचार-पत्र में छपी किसी खबर, लेख या कही गई बात का निहितार्थ समझ सवें
(4) अपनी पाठ्‌य-पुस्तक के सभी पाठों का अभ्यास कर सवें
Ans: (3) उच्च प्राथमिक स्तर पर यह जरूरी है कि बच्चे समाचार-पत्र में छपी किसी खबर, लेख या कही गई बात का निहितार्थ समझ सवें। क्योंकि यह उनके भाषायी विकास का परिचायक है।
Q15. भाषा सीखने का अर्थ उस भाषा की……….सीखना भी है, क्योंकि भाषा किसी भी……….का अभिन्न हिस्सा होती है।
(1) संस्कृति, संस्कृति
(2) ऐतिहासिकता, इतिहास
(3) बारीकी, व्याकरण
(4) नियमबद्धता, व्याकरण
Ans: (1) भाषा सीखने का अर्थ उस भाषा की संस्कृति सीखना भी है क्योंकि भाषा किसी भी संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा होती है। जब तक हम उस भाषा की संस्कृति को नहीं सीखेगें तब हम उस भाषा से पूर्णतः परिचित नहीं हो सकते।
Q16. कक्षा आठ के बच्चों के लिए साहित्य का चयन करते समय आपके लिए क्या जानना सर्वाधिक जरूरी है?
(1) अच्छे साहित्य के प्रकाशक, लेखक
(2) बच्चों के भाषा-प्रयोग का स्तर
(3) बच्चों की भाषिक पृष्ठभूमि
(4) बच्चों की मनोवैज्ञानिक विशेषताएँ और भाषा-प्रयोग की क्षमता
Ans: (4) कक्षा आठ के बच्चों के लिए साहित्य का चयन करते समय बच्चों की मनोवैज्ञानिक विशेषताएँ और भाषा प्रयोग की क्षमता को जानना सर्वाधिक जरूरी होता है, क्योंकि जब तक हम उनकी भाषा प्रयोग की क्षमता और उनकी मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का अवलोकन नही कर लेगें तब तक हम उनके लिए उपयुक्त साहित्य का चुनाव नहीं कर सकते।
Q17. नाटक, सिनेमा, परिचर्चा, वाद-विवाद आदि बच्चों की……… व स्वाभाविक,………एवं……..प्रतिक्रिया व्यत्त करने की क्षमता का विकास करने में मदद करते हैं।
(1) स्वतन्त्र, प्रभावी, संस्कृतनिष्ठ
(2) स्वतन्त्र, मौखिक, लिखित
(3) मानक, सहज, प्रभावी
(4) मानक, प्रभावी, संस्कृतनिष्ठ
Ans: (2) नाटक, सिनेमा, परिचर्चा, वाद, विवाद आदि बच्चों की स्वतन्त्र व स्वाभाविक मौखिक एवं लिखित प्रतिक्रिया व्यत्त करने की क्षमता का विकास करने में मदद करते है।
Q18. हमारे अनुभवों को आकार देने में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसका शैक्षिक निहितार्थ यह है कि भाषा की कक्षा में –
(1) बच्चों को विविध सन्दर्भों में अनुभव करने, विविध अनुभवों से स्वयं को जोड़ने के अवसर दिए जाएँ
(2) डायरी-लेखन पर जोर दिया जाए ताकि लेखन परिपक्व बन सके
(3) सदैव अनुभवों पर बातचीत की जाए
(4) अनुभवों को लेखन-कार्य बढ़ाया जाए
Ans: (1) हमारे अनुभवों को आकार देने में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसका शैक्षिक निहितार्थ है कि बच्चों को विविध संदर्भों में अनुभव करने, विविध अनुभवों से स्वयं को जोड़ने के अवसर दिए जाएँ।
Q19. मुदिता आठवीं कक्षा में हिन्दी भाषा पढ़ाती है। कविता के भाव के बारे में बातचीत करते समय आप उन्हें किस बात के प्रति सचेत रहने की सलाह देंगे?
(1) कविता की भाषा, व्याकरण पर विशेष बल दिया जाए
(2) कविता को गद्य में परिवर्तित करवाने वाली गतिविधि कविता-शिक्षण का अनिवार्य पक्ष है
(3) कविता में अलंकार, रस पर विशेष बल दिया जाए
(4) कविता का एक निश्चित भाव, अर्थ नहीं हो सकता
Ans: (4) मुदिता को इस बात के प्रति सचेत रहने की सलाह देंगे के कविता का एक निश्चित भाव, अर्थ नहीं हो सकता। क्योंकि कविता का एक जैसा भाव नहीं होता वह अलग-अलग कविताओं में अलग-अलग भाव देती है तथा उसका अलग-अलग अर्थ निकलता है।
Q20. हिन्दी भाषा का आकलन करते समय ‘पोर्टफोलियो’ बच्चों के बारे में यह बताता है कि –
(1) उनकी प्रगति में शिक्षकों की भूमिका कितनी है?
(2) उनकी प्रगति में माता-पिता की भूमिका कैसी है?
(3) वे क्या जानते है?
(4) क्रमशः उनकी प्रगति किस प्रकार हो रही है?
Ans: (4) हिन्दी भाषा का आकलन करते समय पोर्टफोलियो यह बताता है कि बालक की क्रमशः प्रगति किस प्रकार हो रही है।
Q21. किस साहित्यिक विधा को पढ़ाते समय आप सस्वर पठन पर अनिवार्यतः बल देंगे?
(1) एकांकी
(2) आत्मकथा
(3) जीवनी
(4) यात्रा-वृत्तान्त
Ans: (1) एकांकी विधा को पढ़ते समय सस्वर पठन पर अनिवार्यतः बल दिया जाता है क्योंकि इससे भावानुसार शब्दों के उच्चारण कौशल में विकास होता है। जबकि आत्मकथा यात्रावृतान्त तथा जीवनी में सस्वर पाठन अपेक्षित नहीं है।
निर्देश (प्र. सं. 2230) नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। समूची स्वार्थी व अहं-प्रेरित प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं, ऐसे कर्मों में ऊँचे उद्देश्य नहीं होते, उनमें लोक-संग्रह नहीं होता, भव्य आदर्श नहीं होते। दूसरे, भले ही आप अपने सामने एक ऊँचा आदर्श रखें, तो भी आपके कर्म यदि आपके मन के चाहे या अनचाहे से प्रेरित है, तो वे ह्रासमान ही होंगे, क्योंकि पसन्द-नापसन्द से किए जाते कार्य वासनाओं को बढ़ाए बिना नहीं रहते। कोई कार्य आपको महज इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह आपको पसन्द है। उसी तरह कोई कार्य करने से आपको महज इस आधार पर नहीं कतराना चाहिए कि वह कार्य आपका मनचाहा नहीं है। कार्य का निर्णय बुद्धि-विवेक के आधार पर होना चाहिए, मनचली भावनाओं, तुनकमिजाजी के आधार पर कतई नहीं। इस एक बात को हमेशा याद रखिए कि पसन्द और नापसन्द आपके सबसे बड़े शत्रु है। आप इन्हें पहचानते तक नहीं। उल्टे आप इन्हें पाल-पोसकर दुलारते हैं। वे तो हर क्षण आपकी हानि व ह्रास करने पर ही तुले हैं। इनसे निबटने का व्यावहारिक मार्ग यह है कि अपनी रुचि और अरुचि का विश्लेषण करें।
Q22. कैसी प्रवृत्तियाँ नकारात्मक हैं?
(1) जिनमें अहं और स्व-हित का भाव हो
(2) जिनमें अर्थ का भाव हो
(3) जो स्वयं का हित देखती हों
(4) जो अहं से ग्रसित हों
Ans: (1) ऐसी प्रवृत्तियाँ जिनमें अहं और स्व-हित का भाव हो जो स्वार्थी हों वे नकारात्मक प्रवृतियाँ कहलाती हैं। क्योंकि ऐसे कर्मो में उद्देश्य नहीं होते तथा उनमें लोक संग्रह नही होता और अहं और स्व-हित से प्रेरित भावनाओं को आप अपने सामने भले ही आदर्श रखें तो भी वे नकारात्मक प्रवृत्ति ही कहलाएगी।
Q23. कौन-से कार्य हानि की ओर ले जाते हैं?
(1) जिनमें संग्रह कूट-कूटकर भरा होता है
(2) जिनमें संग्रह अनुपस्थित होता है
(3) जो मन के अनुसार और हित साधते हैं
(4) जो अपनी पसन्द-नापसन्द के आधार पर किए जाते हैं
Ans: (4) ऐसे कार्य जो अपनी पसन्द-नापसन्द के आधार पर किए जाते हैं। जिनमे अहं भाव तथा स्वयं का स्वार्थ होता है ऐसे कार्य जिनमें लोक संग्रह नहीं होता भव्य आदर्श नही होता हानि की ओर ले जाते हैं।
Q24. इस गद्यांश में किस प्रकार के कार्यों का समर्थन किया गया है?
(1) जो मनचली भावनाओं और बुद्धि से परे होते हैं
(2) जो बुद्धि और विवेक-शक्ति के आधार पर किए जाते हैं
(3) जो मनचाहे होते हैं
(4) जो मनचाहे नहीं होते हैं
Ans: (2) उपर्युत्त गद्यांश में ऐसे कार्यों का समर्थन किया गया है जो बुद्धि विवेक-शक्ति के आधार पर किए जाते हैं।
Q25. इस गद्यांश में किन्हें शत्रु कहा गया है?
(1) रुचि-अरुचि
(2) अहं और स्वार्थ
(3) मनचली भावनाएँ
(4) तुनकमिजाजी
Ans: (1) प्रस्तुत गद्यांश में रुचि-अरुचि, पसंद-नापसन्द तथा स्वार्थी एवं अहं प्रेरित लोगों को शत्रु कहा गया है।
Q26. लेखक ने इन शत्रुओं से निबटने का कौन-सा मार्ग सुझाया है?
(1) कर्म करना
(2) लोक-संग्रह करना
(3) विश्लेषण करना
(4) भव्य आदर्श रखना
Ans: (3) लेखक ने इन शत्रुओं से निपटने के लिए विश्लेषण करने का मार्ग सुझाया है, क्योंकि लेखक ने कहा है कि पंसद और नापसन्द आप के सबसे बड़े शत्रु हैं। आप इन्हें पहचानते तक नहीं, उल्टे आप इन्हें पाल पोशकर बड़ा करते हैं और ये हर पल आप की हानि ही करते हैं। इसलिए इससे बचने का व्यवहारिक मार्ग है अपनी रुचि और अरुचि का विश्लेषण करना।
Q27. ‘नकारात्मक’ का विलोम शब्द है–
(1) असकारात्मक
(2) अननकारात्मक
(3) अनकारात्मक
(4) सकारात्मक
Ans: (4) नकारात्मक का विलोम सकारात्मक होता है। ऐसे शब्द जो अपने समाने वाले शब्द के सर्वथा विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहलाते हैं।
Q28. ‘‘वे तो हर क्षण आपकी हानि व ह्रास करने पर ही तुले है।’’ वाक्य में ‘वे’ सर्वनाम किसके लिए आया है?
(1) पसन्द-नापसन्द के लिए
(2) स्वार्थ-प्रेरित प्रवृत्तियों के लिए
(3) मनचली भावनाओं के लिए
(4) अहं-प्रेरित प्रवृत्तियों के लिए
Ans: (1) गद्यांश में वर्णित ‘‘वे तो हर क्षण आपकी हानि या ह्रास करने पर ही तुले हैं’’ वाक्य में ‘वे’ सर्वनाम पसन्द-नापसन्द के लिए प्रयोग किया गया है। सर्वनाम- सभी नामों के बदले आने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते है इनकी संश्या 11 है जो 6 भेदों में विभत्त है- 1. पुरुषवाचक सर्वनाम- मैं, तुम 2. निजवाचक सर्वनाम- आप 3. निश्चयवाचक सर्वनाम-यह, वह 4. अनिश्चयवाचक सर्वनाम- कोई, कुछ 5. प्रश्नवाचक सर्वनाम- कौन, क्या 6. सम्बन्धवाचक सर्वनाम-जो, सो
Q29. किस शब्द में ‘ना’ उपसर्ग का प्रयोग नहीं किया जा सकता है?
(1) वाक़िफ़
(2) पसन्द
(3) क़ाबिल
(4) हाज़िर
Ans: (4) हाज़िर शब्द में ‘ना’ उपसर्ग का प्रयोग नहीं किया जा सकता बल्कि हाजिर में ‘गैर’ उपसर्ग लगाकर नया शब्द गैरहाजिर बनाया जा सकता है। उपसर्ग उस शब्दांश या अव्यय को कहते हैं, जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करता है। यह दो शब्दों (उपसर्ग) के योग से बना है, ‘उप’ का अर्थ है ‘समीप’ सर्ग का अर्थ है ‘सृष्टि करना’ अतः उपसर्ग का अर्थं है पास में बैठकर दूसरा नया अर्थ देनें वाला शब्द।
Q30. ‘विश्लेषण’ का विलोम है –
(1) संक्षेपण
(2) संश्लिष्ट
(3) संश्लेषण
(4) अविश्लेषण
Ans: (3) विश्लेषण का विलोम संश्लेषण होगा तथा संश्लिष्ट का विश्लिष्ट होगा। संक्षेपण का विक्षेपण होगा विलोम- ऐसे शब्द जो अपने सामने वाले के सर्वथा विपरीत अर्थ प्रकट करें विलोम या विपरार्थक शब्द कहलाते हैं।
निर्देशः नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। समाज में पाठ्यशालाओं, स्कूलों अथवा शिक्षा की दूसरी दुकानों की कोई कमी नहीं है। छोटे से छोटे बच्चे को माँ-बाप स्कूल भेजने की जल्दी करते हैं। दो-ढाई साल के बच्चे को भी स्कूल में बिठाकर आ जाने का आग्रह भी हर घर में बना हुआ है। इसके विपरीत हर घर की दूसरी सच्चाई यह भी है कि कोई भी माँ-बाप बालकों के बारे में, बालकों की सही शिक्षा के बारे में और साथ ही सच्चा एवं अच्छा माता-पिता अथवा अभिभावक होने का शिक्षण कहीं से भी प्राप्त नहीं करता। माता-पिता बनने से पहले किसी भी नौजवान जोड़े को यह नहीं सिखाया जाता है कि माँ-बाप बनने का अर्थ क्या है? इससे पहले किसी भी जोड़े को यह भी नहीं सिखाया जाता है कि अच्छे और सच्चे दाम्पत्य की शुरुआत कैसे की जानी चाहिए? पति-पत्नी होने का अर्थ क्या है? यह भी कोई नहीं बताता। परिणाम साफ है कि जीवन शुरू होने से पहले ही घर टूटने बिखरने लगते हैं। घर बसाने की शाला न आज तक कहीं खुली है और न खुलती दिखती है। समाज और सत्ता दोनों या तो इस संकट के प्रति सजग नहीं है या फिर इसे अनदेखा कर रहे हैं।

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