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017 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. भाषा सीखने की कौन-सी विधि मातृ भाषा को मध्यस्थ बनाए बिना दूसरी भाषा को सीखने में सहायक होती है?
(1) द्विभाषी विधि
(2) अनुवाद विधि
(3) अप्रत्यक्ष विधि
(4) प्रत्यक्ष विधि
Ans: (4) भाषा सीखने की प्रत्यय विधि मातृ भाषा को मध्यस्थ बनाये बिना दूसरी भाषा सीखने में सहायक होती है।
Q2. भाषा-शिक्षण में खेल का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि –
(1) खेल भाषा को विस्तार देते हैं
(2) भाषा-शिक्षक को कम श्रम करना पड़ता है
(3) खेल में आनन्द आता है
(4) खेल में शरीरिक विकास होता है
Ans: (1) खेल के दौरान विभिन्न लोगों के मेलजोल से भाषा का विस्तार होता है, इसलिये भाषा शिक्षण में खेल का भी योगदान माना जाता है।
Q3. पाठ के अन्त में अभ्यास और गतिविधियों का उद्देश्य — —नहीं है।
(1) सृजनात्मकता का विकास करना
(2) भाषा का विस्तार करना
(3) बच्चों को अभिव्यत्ति के अवसर प्रदान करना
(4) प्रश्नों के उत्तर सरलता से याद करवाना
Ans: (4) विद्यार्थियों को प्रश्नों के उत्तर सरलता से याद करवाने का कार्य पाठ के अंत में अभ्यास और गतिविधियों का उद्‌देश्य नहीं है।
Q4. पठन-पाठन के अन्त में ऐसे अभ्यास एवं गतिविधियाँ हों जो –
(1) बच्चों को स्वयं कुछ करने और सीखने का अवसर प्रदान करें
(2) सरल भाषा वाले हों
(3) केवल पाठ से ही सम्बन्धित हों
(4) पाठ पर बिल्कुल आधारित न हों
Ans: (1) विद्यालय में हमेशा पठन-पाठन के अंत में शारीरिक, मानसिक अभ्यास के कार्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम अनिवार्य रूप से होने चाहिये क्योंकि इससे बच्चे प्रेरित होते हैं तथा कुछ नया सीखते हैं।
Q5. भाषा-शिक्षण में बालक में मौखिक कौशल के विकास के लिए—- सबसे कम महत्वपूर्ण है।
(1) बच्चों की बात को धैर्य से सुनना
(2) किसी विषय पर चर्चा करना
(3) प्रश्नों के उत्तर पूछना
(4) अपनी बात कहने का पूरा मौका देना
Ans: (3) भाषा शिक्षण में बालक में मौखिक कौशल के विकास के लिये परमावश्यक तत्व हैं कि विषयवस्तु पर सम्यक चर्चा हो तथा उस पर बच्चों की बातों को ध्यान से सुना जाय, न कि प्रश्नोत्तरी हो।
Q6. भाषा सीखने में मातृ भाषा का व्याघात
(1) पूर्ण रूप से होता है
(2) आंशिक रूप से होता है
(3) नहीं होता है
(4) होता है
Ans: (2) भाषा सीखने में मातृ भाषा का व्याख्यात आंशिक रूप से होता है।
Q7. भाषायी कौशलों के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
(1) भाषायी कौशल एक-दूसरे से स्वतंत्र होते हैं।
(2) भाषायी कौशल एक साथ सीखे जाते हैं, क्रम से नहीं।
(3) भाषायी कौशल एक क्रम से सीखे जाते हैं।
(4) भाषायी कौशल एक-दूसरे को अप्रभावित नहीं करते।
Ans: (2) भाषायी कौशलों के संदर्भ में यह सत्य है कि भाषायी कौशल एक साथ सीख जाते हैं न कि क्रम से।
Q8. भाषा सीखने में होने वाली त्रुटियों के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(1) त्रुटियाँ अस्थायी होती हैं।
(2) त्रुटियाँ सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग है।
(3) भाषा सीखने में होने वाली त्रुटियाँ स्थायी होती हैं।
(4) भाषा सीखने में होने वाली त्रुटियाँ यह समझने में मदद करती हैं कि बच्चे के मस्तिष्क में क्या चल रहा है।
Ans: (3) भाषा सीखने में होने वाली त्रुटियाँ अस्थायी होती हैं तथा ये सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग है एवं त्रुटियों से बच्चों की मानसिक स्थिति भी स्पष्ट होती है।
Q9. एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में आप सतत और व्यापक आकलन करते समय किसे सर्वोपरि मानते हैं?
(1) लिखित प्रश्न-पत्र
(2) कठिन शब्दों का श्रुतलेखन
(3) पाठ से देखकर सुलेख लिखना
(4) बच्चों द्वारा विभिन्न संदर्भों में भाषा-प्रयोग की क्षमता
Ans: (4) प्राथमिक शिक्षक के रूप में बच्चों द्वारा विभिन्न संदर्भों में भाषा प्रयोग की कला की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए अन्यथा बच्चा बोलने में त्रुटियाँ करेगा। अतः शिक्षक को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
Q10. प्राथमिक स्तर पर बच्चों की पठन-क्षमता का आकलन करने में किस प्रकार की सामग्री सर्वाधिक महत्वपूर्ण है?
(1) बाल साहित्य की कोई संवादात्मक कहानी
(2) आतंकवाद पर आधारित निबन्ध
(3) पाठ्य-पुस्तक
(4) औपचारिक पत्र (परीक्षा तिथि : 22 फरवरी, 2015)
Ans: (1) प्राथमिक स्तर पर बच्चों की पठन क्षमता का आकलन करने में बाल साहित्य की कोई संवादात्मक कहानी का होना अनिवार्य है। इससे बच्चों की मानसिक विकास में तीव्रता आती है।
Q11. पहली और दूसरी कक्षा में भाषा-शिक्षण के साथ ही कला शिक्षा को समेकित करने का उद्देश्य नहीं हैं –
(1) बच्चों द्वारा आनन्द की प्राप्ति
(2) चित्रों के माध्यम से अभिव्यत्ति का विकास
(3) बच्चों के लेखन में परिपक्वता लाना
(4) बच्चों की रचनात्मकता का विकास
Ans: (3) पहली और दूसरी कक्षा में भाषा शिक्षण के साथ ही कला शिक्षा को समेकित करने का उद्‌देश्य बच्चों के लेखन कार्य में परिपक्वता लाना नहीं है। अपितु भाषा के उच्चारण पर उनकी विशेष निगरानी करना है।
Q12. प्राथमिक स्तर पर बच्चों की घर की भाषा को अपनी कक्षा में स्थान देना जरूरी है, क्योंकि घर की भाषा –
(1) बच्चे ने अभी पूर्णतः नहीं सीखी है
(2) सरल होती है
(3) बच्चे की भाषायी पूँजी है
(4) मानक स्वरूप लिए होती है
Ans: (3) प्राथमिक स्तर पर बच्चों की घर की भाषा को अपनी कक्षा में स्थान देना आवश्यक इसलिए है क्योंकि घर की भाषा बच्चे की भाषाई पूँजी होती है। बच्चे का बहुतायत समय अपने परिवार के बीच बीतता है और वह उसके लिए सहज ग्राह्य बन जाती है।
Q13. भाषा सीखने-सिखाने के संदर्भ में गृहकार्य का उद्देश्य होता है –
(1) अभिभावकों को प्रसन्न करना
(2) सीखने को विस्तार देना
(3) बच्चों को कार्य में व्यस्त रखना
(4) कॉपियाँ भरवाना
Ans: (2) भाषा सीखने सिखाने के संदर्भ में गृहकार्य का उद्‌देश्य सीखने में विस्तार देना है। गृहकार्य देने से बच्चों को स्कूल के अलावा घर पर भी भाषागत अभ्यास होता है। इससे भाषा सीखने में उसे मदद होती है।
Q14. भाषा अर्जन के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सत्य है?
(1) समाज-सांस्कृतिक परिवेश के अनुसार अर्थ-ग्रहण की प्रक्रिया स्वाभाविक होती है।
(2) भाषा सीखना एक उद्देश्य होता है।
(3) भाषा अर्जन में बच्चे को बहुत अधिक प्रयास करना पड़ता है।
(4) भाषा अर्जन में किसी अन्य भाषा का व्याघात होता है।
Ans: (1) भाषा अर्जन से समाज सांस्कृतिक परिवेश के अनुसार अर्थग्रहण की प्रक्रिया स्वाभाविक होती है।
Q15. भाषा विकास के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(1) बड़ों का सम्पर्क भाषा विकास की गति को तीव्र कर देता है।
(2) भाषा विकास व्यत्ति निरपेक्ष है।
(3) भाषा विकास व्यत्ति सापेक्ष है।
(4) प्रारम्भिक भाषायी परिवेश की समृद्धता भाषायी विकास में सहायक होता है।
Ans: (2) भाषा विकास व्यत्ति निरपेक्ष है।
निर्देशः नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्र. सं. 16 से 24) में सबसे उचित विकल्प चुनिए। सारा संसार नीले गगन के तले अनंत काल से रहता आया है। हम थोड़ी दूरी पर ही देखते हैं क्षितिज तक, जहाँ धरती और आकाश हमें मिलते दिखाई देते हैं। लेकिन जब वहाँ पहुँचते हैं, तो यह नजारा आगे खिसकता चला जाता है और इस नजारे का कोई ओर-छोर हमें नहीं दिखाई देता है। ठीक इसी तरह हमारा जीवन भी है। जिंदगी की न जाने कितनी उपमाएँ दी जा चुकी हैं, लेकिन कोई भी उपमा पूर्ण नहीं मानी गई, क्योंकि जिंदगी के इतने पक्ष हैं कि कोई भी उपमा उस पर पूरी तरह फिट नहीं बैठती। बर्नार्ड शॉ जीवन को एक खुली किताब मानते थे, और यह भी मानते थे कि सभी जीवों को समान रूप से जीने का हक है। वह चाहते थे कि इंसान अपने स्वार्थ में अंधा होकर किसी दूसरे जीव के जीने का हक न मारे। यदि इंसान ऐसा करता है, तो यह बहुत बड़ा अन्याय है। हमारे विचार स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे से मेल नहीं खाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि हम दूसरों को उसके जीने के हक में वंचित कर दें। यह खुला आसमान, यह प्रकृति और यह पूरा भू-मंडल हमें दरअसल यही बता रहा है कि हाथी से लेकर चींटी तक सभी को समान रूप से जीवन बिताने का हक है। जिस तरह से खुले आसमान के नीचे हर प्राणी बिना किसी डर के जीने, साँस लेने का अधिकारी है, उसी तरह से मानव-मात्र का स्वभाव भी होना चाहिए कि वह अपने जीने के साथ दूसरों से उनके जीने का हक न छीने। यह आसमान हमें जिस तरह से भय से छुटकारा दिलाता है, उसी तरह से हमें भी मानव-जाति से इतर जीवों को डर से छुटकारा दिलाकर उन्हें जीने के लिए पूरा अवसर देना चाहिए। दूसरों के जीने के हक को छीनने से बड़ा अपराध या पाप कुछ नहीं हो सकता।
Q16. ‘क्षितिज’ किसे कहते हैं?
(1) जहाँ धरती और आकश पास-पास होते हैं
(2) जहाँ धरती और आसमान मिले हुए दिखाई देते हैं
(3) जहाँ तक धरती दिखाई पड़ती है
(4) जहाँ से धरती और आकाश दिखाई पड़ते हैं
Ans: (2) जहाँ पर धरती और आसमान मिले हुए दिखाई देते हैं, क्षितिज कहलाते हैं।
Q17. यदि किसी का ओर-छोर नहीं है, तो –
(1) उसका सिरा नहीं मिलता
(2) उसके बहुत से सिरे हैं
(3) उसकी सीमा नहीं है
(4) उसका विस्तार अधिक है
Ans: (3) यदि किसी का ओर-छोर नहीं है, उसके लिए उपयुक्त शब्द होगा – सीमा रहित अर्थात्‌ जिसकी सीमा न हो।
Q18. ‘फिट’ और ‘इंसान’ शब्द है –
(1) आगत
(2) देशज
(3) तत्सम
(4) तद्‌भव
Ans: (1) ‘फिट’ और ‘इंसान’ शब्द आगत शब्द है। यह बाहर की भाषाओं से ग्रहण किया हुआ शब्द है। न कि देशज, तत्सम और तद्‌भव। ‘फिट’ अंग्रेजी एवं ‘इंसान’ अरबी भाषा का शब्द है।
Q19. बर्नार्ड शा ने जीवन की उपमा किससे दी है?
(1) खुली पुस्तक से
(2) पढ़ी जा रही पुस्तक से
(3) सभी जीवों से
(4) क्षितिज से
Ans: (1) बर्नार्ड शा ने जीवन की उपमा खुली पुस्तक से दिया है।
Q20. हम बहुत बड़ा अन्याय कर रहे होते हैं, यदि –
(1) किसी को लूट लेते हैं
(2) किसी से दुश्मनी रखते हैं
(3) किसी को टिकने नहीं देते
(4) किसी को जीने का अधिकार नहीं देते
Ans: (4) सबसे बड़ा अन्याय तो यह है कि हम किसी को जीने की स्वतंत्रता नहीं प्रदान करते। प्रत्येक प्राणी को प्रकृति ने जीने का हक दिया है। यही व्यवस्था ऐहिक जगत की ईश्वरीय उपहार है।
Q21. प्रकृति और खुला आसमान बता रहे हैं कि सबको –
(1) मनमर्ज़ी करने का हक है
(2) निडर बने रहना चाहिए
(3) प्रकृति से पे्रम करना चाहिए
(4) जीने का हक है
Ans: (4) प्रकृति और खुला आसमान यह निर्देशित करते हैं कि सभी प्राणियों को स्वच्छन्द जीने का अधिकार है भगवान द्वारा निर्मित इस धरा पर निर्बाध ढंग से जीवन यापन करें।
Q22. आसमान हमें दिलाता है –
(1) साथ-साथ रहने का अनुशासन
(2) रक्षा करने का वचन
(3) भय से छुटकारे का आश्वासन
(4) भयभीत न करने का आग्रह
Ans: (3) खुला आसमान यह स्पष्ट संकेत करता है कि सर्वत्र व्याप्त ईश्वर का साम्राज्य है इसलिए भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
Q23. किस शब्द में ‘इक’ प्रत्यय का प्रयोग नहीं किया जा सकता ?
(1) जीव
(2) भय
(3) स्वभाव
(4) प्रकृति
Ans: (2) निर्दिष्ट शब्दों में ‘भय’ ही ऐसा शब्द है जहाँ पर ‘इक’ प्रत्यय का प्रयोग नहीं हो सकता। अन्य दिये गये शब्दों में इसका प्रयोग किया जा सकता है, जैसे – स्वभाव में इक प्रत्यय लगाने पर स्वाभाविक होगा। इसी प्रकार जीव का जैविक और प्रकृति का प्राकृतिक होगा।
Q24. ‘अपराध’ शब्द है –
(1) पदार्थवाचक संज्ञा
(2) भाववाचक संज्ञा
(3) व्यत्तिवाचक संज्ञा
(4) जातिवाचक संज्ञा
Ans: (2) अपराध शब्द है– भाववाचक संज्ञा। चूँकि अपराध भाव से प्रकट होकर मूर्त रूप लेता है। अतः यह भाववाचक संज्ञा है।
निर्देशः नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्र. सं. 25 से 30) में सबसे उचित विकल्प चुनिए। चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचातीं जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुँचा कभी चीटियाँ से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती हैं कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे से टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए।
Q25. चींटियाँ आपस में बातचीत कैसे करती हैं?
(1) बोलकर
(2) छूकर
(3) संदेशों से
(4) संकेतों से
Ans: (4) उक्त पद्यांश द्वारा यह स्पष्ट है कि चीटियाँ आपस में बातचीत अपने संकेतों के आधार पर करती हैं।
Q26. ‘ईर्ष्यालु’ किसे कहा जाता है?
(1) सबसे घृणा करने वाला
(2) दूसरों से जलने वाला
(3) पाने की इच्छा करने वाला
(4) कुछ भी न चाहने वाला
Ans: (2) ईर्ष्यालु शब्द का प्रयोग ‘‘दूसरों से जलने वाला’’ अर्थ में होता है।
Q27. चींटियों के स्वभाव में नहीं है –
(1) संदेश पहुँचाना
(2) ईर्ष्या करना
(3) दौड़-भाग करना
(4) जीवन को परखना
Ans: (2) चीटियों के स्वभाव में ईर्ष्या करना नहीं होता है। ईर्ष्या तो सिर्फ विशेष रूप से मानवीय समाज की एक बुराई है।
Q28. बिखरी हुई चींटियाँ फिर से एकजुट कैसे होती हैं?
(1) रास्ता टटोलने से
(2) पूर्वजों की गंध से
(3) मित्रों के सहयेाग से
(4) शत्रुओं की चुनौती से
Ans: (2) बिखरी हुई चीटियाँ अपने अग्रज की गंध से एकजुट हो जाती हैं।
Q29. मित्र और शत्रु के चेहरों को चीटियाँ –
(1) बिखेर देती हैं
(2) पहचानती नहीं हैं
(3) भूल जाती हैं
(4) याद रखती है
Ans: (4) मित्र और शत्रु के चेहरों की चीटियों को स्मृति रहती है।
Q30. काव्यांश में ‘मगर’ का अर्थ है –
(1) परन्तु
(2) केवल
(3) मगरमच्छ
(4) घड़ियाल
Ans: (1) वाक्यांश में दिया गया ‘मगर’ का अर्थ है – परन्तु।
निर्देश (प्र. सं. 16) दी गई कविता की पंत्तियाँ पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए। चमकीली है सुबह आज की आसमान में, निश्चय कल की सुबह और चमकीली होगी, बेचैनी की बाँहों में कल फूल खिलेंगे, घुटन गमकती साँसों की आवाज सुनेगी। कुण्ठाओं की टहनी छिन्न-भिन्न होगी फिर, आशा अपने हाथों से अब कुसुम चुनेगी, चटकीली है आज चहकती हुई चाँदनी, कल चन्दा की किरण और चटकीली होगी, खुल जाएँगे अब सबके दिल के दरवाजे, आँखें अपनी आँखों को पहचान सवेंगी।

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