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015 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. मनुष्य को बाहरी सुख क्यों लुभाते हैं?
(1) भरे-पूरे जीवन के लिए
(2) सम्पन्नता के लिए
(3) अच्छे जीवन के लिए
(4) आराम के लिए
Ans : (3) मनुष्य को बाहरी सुख ‘अच्छे जीवन के लिए’ लुभाते हैं। परन्तु महत्व इस बात का होता है कि हमने अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया या नहीं। यदि लक्ष्य प्राप्त कर लिया तभी इन सुख सुविधाओं का हमारे जीवन में महत्व है, नहीं तो इनका कुछ भी महत्व नहीं है। लक्ष्य प्राप्ति के बिना संतुष्टि संभव नहीं है, भौतिक सुख भले ही प्राप्त हो जाय।
Q2. ‘‘जो व्यत्ति रचनात्मक कार्य करने में समर्थ हैं……..।’’ वाक्य में रेखांकित शब्द के स्थान पर कौन-सा शब्द प्रयुत्त नहीं किया जा सकता है?
(1) सक्षम
(2) क्षमतावान
(3) शक्तिशाली
(4) सामर्थ्यवान
Ans : (3) ‘‘जो व्यत्ति रचनात्मक कार्य करने में समर्थ हैं……।’’ वाक्य में प्रयुत्त रेखांकित शब्द ‘समर्थ’ के स्थान पर ‘क्ष़्ामतावान’, ‘सक्षम’ तथा ‘सामर्थ्यवान’ ये तीनों शब्द प्रयुत्त किये जा सकते हैं, परन्तु भिन्नार्थक होने के कारण ‘शक्तिशाली’ शब्द प्रयुत्त नहीं किया जा सकता। ‘शक्तिशाली’ शब्द शारीरिक शक्ति को तथा शेष मानसिक एवं शारीरिक शक्ति के समन्वित रूप को प्रकट करते हैं।
Q3. ‘प्रतिष्ठा के अम्बारों से लाद दिया जाता।’ रेखांकित का तात्पर्य है–
(1) आभार से
(2) ढेर से
(3) कृतज्ञता से
(4) भार से
Ans : (2) ‘प्रतिष्ठा के अम्बारों से लाद दिया जाता।’ वाक्य में रेखांकित शब्द ‘अम्बारों से’ का आशय ‘ढेर से’ है। इस शब्द से अत्यधिक सम्मान की ओर इंगित किया जा रहा है।
Q4. ‘भली-भाँति निर्वाह कर चुका था।’ उपरोत्त वाक्यांश में क्रिया-विशेषण है–
(1) निर्वाह
(2) भली-भाँति
(3) कर चुका
(4) भली
Ans : (2) ‘भली-भाँति निर्वाह कर चुका था।’ वाक्य में ‘भली- भाँति’ शब्द युग्म क्रिया विशेष है जो ‘निर्वाह करना’ क्रिया की विशेषता बता रहा है। यह रीतिवाचक क्रिया विशेषण है। क्रियाविशेष् ाण के मुख्यतः चार भेद होते हैं, जो इस प्रकार हैं- (2) कालवाचक, (1) स्थानवाचक, (3) रीतिवाचक, (4) परिमाणवाचक।
Q5. ‘महत्वाकांक्षा’ किन शब्दों से मिलकर बना है?
(1) महत्व + आकांक्षा
(2) महत्त्व + आकांक्षा
(3) महत्त्व + कांक्षा
(4) महत्‌ + आकांक्षा
Ans : (2) ‘महत्त्वाकांक्षा’ शब्द ‘महत्त्व + आकांक्षा’ शब्दों से मिलकर बना है। शेष विकल्प त्रुटिपूर्ण हैं।
Q6. भौतिक लाभ किन्हें नहीं लुभाते?
(1) जीवन का लक्ष्य पूरा करने वालों को
(2) सामर्थ्यवान लोगों को
(3) रचनात्मक कार्य करने वालों को
(4) धन-सम्पन्न लोगों को
Ans : (3) जो व्यत्ति रचनात्मक कार्य करने में समर्थ हैं, उन्हें भौतिक स्थूल लाभ अथवा प्रलोभन न तो लुभाते हैं और नहीं प्रोत्साहित करते हैं।
Q7. ‘पूँजी’ का रचयिता कार्ल मार्क्स कथन से संकेत मिलता है कि ‘पूँजी’ का अर्थ है–
(1) एक ग्रन्थ
(2) एक विचार
(3) विरासत
(4) धन-सम्पत्ति
Ans : (1) ‘पूँजी’ का रचयिता कार्ल मार्क्स कथन से संकेत मिलता है कि ‘पूँजी’ का अर्थ एक ग्रन्थ से है। कार्ल मार्क्स ने ‘दास कैपिटल’ नाम से पुस्तक लिखी, यहाँ ‘कैपिटल’ का अर्थ ‘पूँजी’ है। इसमें ‘पूँजी’ की विस्तृत व्याख्या की है। यहाँ पूँजी से इसी पुस्तक ‘दास कैपिटल’ की ओर संकेत मिलता है।
Q8. विचारकों की एक विशेषता यह है कि उनमें–
(1) पद-प्रतिष्ठा प्राप्त करने की इच्छा होती है
(2) भौतिक महत्त्वकांक्षाएँ कम होती हैैं
(3) रचनात्मक कार्य करने की क्षमता होती है
(4) महत्त्वाकांक्षाएँ नहीं होतीं
Ans : (2) विचारकों की एक विशेषता यह है कि उनमें भौतिक महत्त्वाकांक्षाएँ कम होती हैं।
Q9. सुकरात को अपना काम न करने देने की स्थिति कठोर दण्ड जैसी प्रतीत होती, क्योंकि–
(1) वह स्थूल प्रलोभनों की अपेक्षा नहीं करता था
(2) वह जीवन के कार्य समाप्त कर चुका था
(3) उसे जीवन का उद्देश्य प्राप्त करने में रोक दिया गया होता
(4) वह अन्तिम क्षणों में भी शान्त था
Ans : (3) यदि सुकरात को उसके जीवन के उद्देश्य प्राप्त करने से रोक दिया गया होता तो यह स्थिति उसके लिए किसी दण्ड से कम नहीं होती, क्योंकि जो व्यत्ति रचनात्मक प्रवृत्ति के होते हैं। वे केवल रचनात्मक कार्य से ही संतुष्ट होते हैं कोई भी भौतिक प्रलोभन उन्हें रचनात्मकता से रोक नहीं पाते, बल्कि वे ऐसे व्यत्ति के लिए दण्ड स्वरूप ही होते हैं।
निर्देश (प्र. सं. 1015) निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए। रोना और मचल जाना भी क्या आनन्द दिखाते थे। बड़े-बड़े मोती से आँसू, जयमाला पहनाते थे। मैं रोई, माँ काम छोड़कर आई, मुझको उठा लिया। झाड़-पोछकर चूम-चूम गीले गालों को सुखा दिया। आ जा बचपन
एक बार फिर दे-दे अपनी निर्मल शान्ति। व्याकुल व्यथा मिटाने वाली, वह अपनी प्राकृत विश्रान्ति वह भोली-सी मधुर सरलता, वह प्यारा जीवन निष्पाप। क्या फिर आकर मिटा सकेगा तू मेरे मन का सन्ताप?र्मिैंं बचपन को बुला रही थी, बोल उठी बिटिया मेरी। नंदन-वन-सी फूल उठी, यह छोटी-सी कुटिया मेरी।
Q10. ‘बचपन’ शब्द है–
(1) क्रिया-विशेषण
(2) विशेषण
(3) सर्वनाम
(4) संज्ञा
Ans : (4) ‘बचपन’ संज्ञा शब्द है। यह भाववाचक संज्ञा है। संज्ञा के तीन भेद हैं- (2) व्यत्तिवाचक, (1) जातिवाचक, (3) भाववाचक। जिस संज्ञा शब्द से व्यत्ति या वस्तु के गुण या धर्म, दशा अथवा व्यापार का बोध होता है, उसे ‘भाववाचक संज्ञा’ कहते हैं। ‘बच्चा’ शब्द में ‘पन’ उपसर्ग लगाने से ‘बचपन’ शब्द बनता है, जो अवस्था विशेष का बोध कराता है। अतः यह भाववाचक संज्ञा है।
Q11. ‘नन्दन-वन-सी फूल उठी, यह छोटी-सी कुटिया मेरी’ का भाव है–
(1) कुटिया में आनन्द उमड़ उठा
(2) कुटिया सुन्दर हो गई
(3) कुटिया में शान्ति छा गई
(4) छोटी कुटिया बड़ी हो गई
Ans : (1) ‘नन्दन- वन-सी फूल उठी, यह छोटी-सी कुटिया मेरी का भाव है- कुटिया में आनन्द उमड़ उठा।
Q12. ‘मिटा सकेगा तू मेरे मन संताप?’ उत्त पंत्ति में ‘तू’ किसे कहा गया है?
(1) कवि को
(2) बचपन को
(3) पाठक को
(4) बच्चे को
Ans : (2) ‘मिटा सकेगा तू मेरे मन का संताप?’ उत्त पंत्ति में ‘तू’ बचपन को कहा गया है। सम्पूर्ण काव्यांश बचपन को सम्बोधित करके लिखा गया है।
Q13. कवयित्री अपने बचपन को क्यों बुलाना चाहती है?
(1) बचपन के आनन्द की याद में
(2) अपनी बिटिया की याद में
(3) बचपन के खेलों की याद में
(4) अपनी माँ की याद में
Ans : (1) कवयित्री को अपने बचपन के दिनों को याद करते समय उसे बचपन के आनन्द याद आ जाते हैं। अतः वह अपने बचपन को सम्बोधित करते हुए, उसके फिर से लौट आने की कामना करती है।
Q14. बच्चे की आँखों से निकलते आँसुओं को देखकर क्या अनुभूति होती है?
(1) विजय की
(2) सुख की
(3) प्यार की
(4) कष्ट की
Ans : (3) बच्चे के आँखों से निकलते आँसुओं को देखकर प्यार की अनुभूति होती है। शेष विकल्प असंगत हैं।
Q15. ‘व्याकुल व्यथा मिटाने वाली’ में प्रयुत्त अलंकार है–
(1) उपमा अलंकार
(2) रूपक अलंकार
(3) अनुप्रास अलंकार
(4) यमक अलंकार
Ans : (3) ‘व्याकुल व्यथा मिटाने वाली’ पंत्ति में अनुप्रास अलंकार प्रयुत्त है। जहाँ वर्ण विशेष की आवृत्ति के कारण चमत्कार उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। यहाँ ‘व्‌’ वर्ण की आवृत्ति हुई है, अतः यहाँ अनुप्रास अलंकार है।
Q16. किसी भी भाषा पर अधिकार प्राप्त करने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है–
(1) उस भाषा की वाक्य-संरचना जानना
(2) शब्दों के अर्थ जानना
(3) उस भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करना
(4) उस भाषा का व्याकरण जानना
Ans : (3) किसी भी भाषा पर अधिकार प्राप्त करने के लिए उस भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करना सबसे महत्वपूर्ण है। भाषा एक अर्जित कौशल है जो अधिगम में अभ्यास के नियम द्वारा अधिकाधिक विकसित किया जा सकता है। भाषा पर अधिकार प्राप्त करने के लिए शब्दों के अर्थ जानना, उस भाषा की वाक्य-संरचना जानना तथा उस भाषा का व्याकरण जानना महत्वपूर्ण है, परन्तु इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करना है।
Q17. समावेशी कक्षा में बच्चों की आवश्यकाताओं को पूरा करने में भाषा-शिक्षक के रूप में आपकी मुख्य जिम्मेदारी नहीं है–
(1) बच्चों की विभिन्न प्रकार की दृश्य-श्रव्य सामग्री उपलब्ध कराना
(2) बच्चों की भाषा सम्बन्धी क्षमताओं की पहचान करना
(3) बच्चों का आकलन करते समय अति उदार बनना
(4) विभिन्न आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए उपलब्ध संसाधनों की खोज करना
Ans : (3) समावेशी कक्षा में बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने में भाषा-शिक्षक के रूप में मुख्य जिम्मेदारी होती है कि बच्चों की भाषा सम्बन्धी क्षमताओं की पहचान की जाय, बच्चों की विभिन्न प्रकार की दृश्य-श्रव्य सामग्री उपलब्ध करायी जाय तथा विभिन्न आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए उपलब्ध संसाधनों की खोज की जाय। बच्चों का आकलन करते समय अति उदार बनना भाषा शिक्षक का उत्तरदायित्व नहीं है।
Q18. पढ़ने की संस्कृति के विकास के क्रम में……… पठन को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।
(1) सस्वर
(2) वैयत्तिक
(3) मौन
(4) सामूहिक
Ans : (2) पढ़ने की संस्कृति के विकास के क्रम में वैयत्तिक पठन को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। क्योंकि किसी भी कौशल के विकास के लिए व्यत्तिगत प्रयास का विशेष महत्व होता है या कह सकते हैं कि व्यत्तिगत प्रयास के बिना सीखना सम्भव नहीं है।
Q19. भाषा की पाठ्‌य-पुस्तक में सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष है–
(1) पाठों का उद्देश्यपूर्ण चयन
(2) आकर्षक चित्र
(3) अभ्यासों की बहुलता
(4) कागज की गुणवत्ता
Ans : (1) पाठों का उद्देश्यपूर्ण चयन भाषा की पाठ्‌य- पुस्तक में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। भाषा की पुस्तक का गठन इस तरह होना चाहिए की प्रत्येक पाठ किसी न किसी उद्देश्य की पूर्ति कर किसी न किसी भाषाई कौशल का विकास कर सके, जैसे-किसी पाठ से उच्चारण की शुद्धता, किसी से शब्द भण्डार में वृद्धि, किसी से वर्तनी की शुद्धता, किसी से वाक्य गठन आदि भाषाई कौशल का विकास हो।
Q20. समग्र भाषा पद्धति पर आधारित कक्षा–
(1) बच्चों के भाषायी विकास की स्पष्ट समझ पर बल देती है
(2) गतिविधियों के आयोजन पर बल देती है
(3) बाल साहित्य को पढ़कर सुनाने पर बल देती है
(4) सभी भावाओं को सीखने पर बल देती है
Ans : (1) समग्र भाषा पद्धति पर आधारित कक्षा बच्चों के भाषायी विकास की स्पष्ट समझ पर बल देती है।
Q21. विद्यालय के बाहर का जीवन और वहाँ प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव भाषा सीखने के लिए आवश्यक प्रेरणा देते हैं, क्योंकि–
(1) लेखन की विभिन्न शैलियों का परिचय मिलता है
(2) मानक वर्तनी का सम्यक्‌ ज्ञान मिलता है
(3) समृद्ध भाषिक परिवेश मिलता है
(4) इससे व्याकरणिक नियमों की जानकारी प्राप्त होती है
Ans : (3) विद्यालय के बाहर का जीवन और वहाँ प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव भाषा सीखने के लिए आवश्यक प्रेरणा देते हैं, क्योंकि समृद्ध भाषिक परिवेश मिलता है।
Q22 पहली कक्षा में प्रवेश लेने से पहले आमतौर पर बच्चे–
(1) स्व-अभिव्यत्ति जानते हैं
(2) पठन-लेखन में दक्ष होते हैं
(3) भाषा के व्याकरणिक नियम जानते हैं
(4) तुतलाकर बोलते हैं
Ans : (1)
S22 पहली कक्षा में प्रवेश लेने से पहले आमतौर पर बच्चे– पहली कक्षा में प्रवेश लेने से पहले आमतौर पर बच्चे स्व- अभिव्यत्ति जानते हैं। वे जिस आयुवर्ग (सामान्यतः 5-6 वर्ष) में होते हैं, उस आयुवर्ग में सामान्यतः बच्चों में इतना भाषायी कौशल विकसित हो चुका होता है कि वे अपनी जरूरतें, परेशानियाँ व्यत्त कर सकते हैं। वे शब्दों के लिंग, वचन आदि जानते हैं तथा दैनिक आवश्यकता की वस्तुओं के नाम उनके कार्य एवं शब्दों के अर्थ के साथ समन्वय स्थापित कर लेते हैं।
Q23. सुरभि अकसर ‘ड़’ वाले शब्दों को गलत तरीके से उच्चारित करती है। आप क्या करेंगे?
(1) उसे ‘ड़’ वाले शब्दों को अपने पीछे-पीछे दोहराने के लिए कहेंगे
(2) उसे ‘ड़’ वाले शब्दों की सूची पढ़ने एवं लिखकर अभ्यास करने के लिए देंगे
(3) उसे सहजता के साथ अपनी बात कहने के लिए प्रोत्साहित करेंगे
(4) उसे ‘ड़’ वाले शब्दों की सूचना पढ़ने एवं बोलकर अभ्यास करने के लिए लेंगे
Ans : (4) यदि कोई बच्चा किसी विशेष वर्ण वाले शब्दों का उच्चारण गलत तरीके से करता है तो इस समस्या के निराकरण हेतु मुख्यतः दो चरण होते हैं। पहला ऐसे शब्दों का शुद्ध उच्चारण बच्चा सुने एवं दूसरा ज्यों का त्यों उच्चारण का अधिकतम प्रयास करे। इस आशय की अधिकतम पूर्ति विकल्प (4) से हो रही है। अतः विकल्प (4) ‘‘उसे ‘ड़’ वाले शब्दों की सूचना पढ़ने एवं बोलकर अभ्यास करने के लिए देंगे’’ सही उत्तर है।
Q24. प्राथमिक स्तर पर पढ़ने की क्षमता का आकलन करने की दृष्टि से सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है–
(1) पढ़ने में प्रवाह
(2) विराम-चिह्नों का ज्ञान
(3) अर्थ का निर्माण
(4) वर्णों की पहचान
Ans : (4) प्राथमिक स्तर पर पढ़ने की क्षमता का आकलन करने की दृष्टि से सबसे अधिक महत्वपूर्ण वर्णों की पहचान करना है। विराम-चिह्नों का ज्ञान एवं पढ़ने में प्रवाह कौशलों का विकास उच्चप्राथमिक स्तर एवं अर्थ का निर्माण मूलतः माध्यमिक स्तर का विषय है।
Q25. भाषा की कक्षा में कहानी सुनाने का मूल उद्देश्य है–
(1) बच्चों में ‘सुनकर दोहराने’ की आदत का विकास
(2) बच्चों की कल्पनाशक्ति का विकास
(3) बच्चों को अनुशासन में रखना
(4) बच्चों का मनोरंजन करना
Ans : (2) भाषा की कक्षा मेंं कहानी सुनाने का मूल उद्देश्य बच्चों की कल्पना शक्ति का विकास करना है। कहानियों से बच्चों में अवधारणाओं का निर्माण भी होता है। मनोरंजन भी होता है, उनमें प्रेरणा भी जागृत होती है। परन्तु कल्पनाशक्ति का विकास करना इसका मूल उद्देश्य है।
Q26. प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे बहुत कुछ लेकर विद्यालय आते हैैं, जैसे-अपनी……….अपने अनुभव, दुनिया को देखने का अपना दृष्टिकोण आदि।
(1) भाषा
(2) समस्याएँ
(3) पाठ्‌य-पुस्तवें
(4) कमियाँ
Ans : (1) प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे बहुत कुछ लेकर विद्यालय आते हैं, जैसे-अपनी भाषा, अपने अनुभव, दुनिया को देखने का अपना दृष्टिकोण आदि।
Q27. बच्चों की मौखिक अभिव्यत्ति के विकास का अर्थ यह नहीं है–
(1) कहानी सुनकर शब्दशः दोहराना
(2) वाद-विवाद में बोझिझक होकर बोलना
(3) अपनी कल्पनाओं की मौखिक अभिव्यत्ति
(4) बातचीत में सक्रिय भागीदारिता का निर्वाह करना
Ans : (1) कहानी सुनकर शब्दशः दोहराना बच्चों की मौखिक अभिव्यत्ति के विकास का अर्थ नहीं होता है, बल्कि मौलिक विचारों को व्यत्त करना मौखिक अभिव्यत्ति की श्रेणी में आता है। अतः वाद-विवाद में बेझिझक होकर बोलना, अपनी कल्पनाओं की मौखिक अभिव्यत्ति तथा बातचीत में सक्रिय भागीदारिता का निर्वाह करना मौखिक अभिव्यत्ति के विकास के उदाहरण हैं। विकल्प (1) ‘कहानी सुनकर दोहराना’ मौखिक अभिव्यत्ति के विकास का उदाहरण नहीं है।
Q28. भाषा की कक्षा में यह जरूरी है कि–
(1) भाषा-शिक्षक बच्चों की उच्चारणगत शुद्धता पर विशेष ध्यान दे
(2) भाषा-शिक्षक भाषा का पूर्ण ज्ञाता हो
(3) भाषा-शिक्षक बच्चों की वर्तनी को बहुत कठोरता से ले
(4) स्वयं भाषा-शिक्षक की भाषा प्रभावी हो
Ans : (4) भाषा की कक्षा में यह जरूरी है कि स्वयं भाषा-शिक्षक की भाषा प्रभावी हो। जिससे बच्चे प्रेरित होकर विभिन्न भाषायी कौशलों में पारंगत हो सवें।
Q29. प्राथमिक स्तर पर बच्चों की भाषायी क्षमताओं का विकास करने का अर्थ है–
(1) भाषा-प्रयोग की कुशलता पर अधिकार
(2) भाषिक संरचनाओं पर अधिकार
(3) भाषा-अनुकरण की कुशलता पर अधिकार
(4) भाषिक नियमों पर अधिकार
Ans : (3) प्राथमिक स्तर पर बच्चों की भाषायी क्षमताओं का विकास करने का अर्थ है- भाषा अनुकरण की कुशलता पर अधिकार प्राप्त करना।
Q30. व्याकरण-शिक्षण की आगमन विधि की विशेषता है–
(1) पहले नियम का विश्लेषण करना
(2) पहले नियम बताना
(3) पहले मनोरंजक गतिविधियाँ कराना
(4) पहले उदाहरण प्रस्तुत करना
Ans : (4) व्याकरण-शिक्षण की आगमन विधि की विशेषता हैपहले उदाहरण प्रस्तुत करना। आगमन विधि में पहले कई उदाहरण प्रस्तुत किए जाते हैं और बाद में उन्हीं का सामन्यीकरण करके नियम बताए जाते हैं। आगमन विधि व्याकरण-शिक्षण की सर्वोत्तम विधि मानी जाती है। निगमन विधि में पहले नियम बताए जाते हैैं बाद में उदाहरणों द्वारा उन्हें प्रमाणित किया जाता है। यह गणितशिक्ष् ाण की उत्तम विधि है।
निर्देश : (प्र. सं. 19) नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए। ‘‘किसी को देखने के लिए आँख की नहीं, दृष्टि की आवश्यकता होती है’’ स्वामी विवेकानन्द का यह कथन इस महिला के जीवन का दर्शन बन गया है। इसी जीवन दर्शन के सहारे उन्होंने एक ओर कठिनाइयों का सामना किया, तो दूसरी ओर सफलता का मार्ग ढूँढ़ा और उस पर निर्भयता से बढ़ चलीं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं मुम्बई की रेवती रॉय की। रेवती रॉय वह महिला हैं जिन्होंने महिलाओं की कठिनाइयों को ध्यान में रख केवल उन्हीं की सुविधा के लिए ‘फॉरशी’ नाम से कैब सेवा प्रारम्भ की। उद्देश्य स्पष्ट था- कामकाजी और जरूरतमन्द महिलाओं को अपने शहर में सुरक्षित सफर का भरोसा देना। यह सेवा उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई जिन्हें महानगरों में मुँह बाए बैठे अपराधी तत्वों या परपीड़ा में आनन्द लेने वालों से प्रायः रोज ही जूझना पड़ता है। खतरों और आशंकाओं से भरी सड़क-परिवहन की जिन्दगी में कदम रखने का निर्णय लेना रेवती के लिए सरल नहीं था। लेकिन कभीकभी विवशता भी प्रेरणा देती है। ऐसे ही अवसरों पर ‘आँख नहीं, दृष्टि’ वाला दर्शन प्ररेक होता है। गम्भीर बीमारी से जूझ रहे पति के इलाज में सारी जमापूँजी चुक जाने के बाद रेवती को अपने अस्तित्व के लिए कुछ-न-कुछ करना था। सो उन्होंने एकदम नया रास्ता चुनाकैब के द्वारा महिलाओं को सुरक्षित यात्रा का आश्वासन।

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