You are here
Home > QB Subjectwise > 005 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

005 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. संकर शब्द किसे कहते हैं?
(1) संस्कृत भाषा का शब्द
(2) ग्रामीण भाषा का शब्द
(3) ग्रामीण व संस्कृत भाषा के कुछ विशेष शब्द
(4) दो भाषा के शब्दों से मिलकर बना शब्द
Ans : (4) दो भाग के शब्दों से मिलकर बना शब्द संकर शब्द कहलाता है।
Q2. ‘सुत्‌’ शब्द को स्त्रीवाचक बनाने के लिए किस प्रत्यय का प्रयोग होगा?
(1) ई
(2) ईय
(3) इक
(4) आ
Ans : (4) ‘सुत्‌’ शब्द का स्त्रीवाचक बनाने के लिए ‘आ’ प्रत्यय का प्रयोग होता है ‘सुत’ का स्त्रीवाचक सुता होता है। ‘आ’ प्र्रत्यय से बने शब्द- घाटा, घेरा, छापा, गुजारा, चढ़ा, रखा, कहा, कोडा, झोंका, धड़का, डेरा। ‘ई’ प्रत्यय से बने शब्द- चढ़ाई, लडाई, बड़ाई, पढ़ाई, लिखाई, हँसी, बोली, धमकी, धुड़की, झिड़की, सिसकी। ‘इक’ प्रत्यय से बने शब्द- कार्मिक, धार्मिक, तार्किक, कारुणिक, साम्प्रदायिक, पाशविक। ‘ईय’ प्रत्यय से बने शब्द- पाणिनीय, पठनीय, राष्ट्रीय।
Q3. ‘नाक का बाल होना’ मुहावरे का अर्थ है-
(1) कष्ट देना
(2) अधिक समीप होना
(3) अधिक प्रिय होना
(4) पालतू होना
Ans : (3) ‘नाक का बाल होना’ मुहावरे का अर्थ है अधिक प्रिय होना। अन्य सभी विकल्प असंगत है।
Q4. ‘अश्व’ का पर्यायवाची शब्द निम्नलिखित में से कौनसा नहीं है?
(1) घोटक
(2) घोड़ा
(3) कटक
(4) हय
Ans : (3) ‘कटक’ अश्व का पर्यायवाची नहीं है। अश्व के पर्यायवाची- घोड़ा, घोटक, हय, बाजि, तुरंग, रविसुत तथा सैंघव आदि होते हैं।
Q5. ‘जो एक स्थान पर टिककर नहीं रहता’ वाक्य के लिए एक शब्द कौन-सा है?
(1) अडिग
(2) अस्थिर
(3) यायावर
(4) गतिशील
Ans : (3) जो एक स्थान पर टिककर नहीं रहता- यायावर जो एक स्थान पर स्थिर नहीं रहता- अस्थिर जो अपनी बातों तथा वादों पर टिका रहे- अडिग जो सदैव चलता रहे- गतिशील
6. ‘‘बुन्देले हरबोलो के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।’’ प्रस्तुत पंत्तियों के रचयिता कौन हैं?
(1) सुभद्राकुमारी चौहान
(2) माखनलाल चतुवेंदी
(3) सोहनलाल द्विवेदी
(4) रामनेरश त्रिपाठी
Ans : (1)
6.‘‘बुन्देले हरबोलो के मुँह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी’’- सुभद्रा कुमारी चौहान पराधीन रहकर अपना सुख शोक न कह सकता है। वह अपना जगत में केवल पशु ही सह सकता हैरामनरेश त्रिपाठा अबला जीवन हाय
तुम्हारी यही कहानी आँचल में है दूध और आँखो में पानीमैथिलीशरण गुप्त
Q7. ‘समास’ का अर्थ हैं–
(1) विच्छेद
(2) संक्षेप
(3) विस्तार
(4) नवीन अर्थ
Ans : (2) जब संक्षेप के लिए आपस में सम्बन्ध रखने वाले दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया शब्द बनाया जाता है, तब उस मेल को ‘समास’ कहते हैं। सामान्यतः समास का अर्थ संक्षेप करना भी होता है।
Q8. भाषा के सम्बन्ध में उपचारात्मक शिक्षण का उद्देश्य है-
(1) बच्चों को व्यस्त रखना
(2) भाषा प्रयोग सम्बन्धी कठिनाइयों की पहचान तथा उनका निदान
(3) बच्चों को श्रेणीवार विभत्त करना
(4) बच्चों के त्रुटियों की केवल सूची बनाना
Ans : (2) भाषा के सम्बन्ध में उपचारात्मक शिक्षण उद्देश्य भाषा प्रयोग सम्बन्धी कठिनाइयों की पहचान तथा उनका निदान होता है। कक्षा में शिक्षक द्वारा छात्रों की भाषा के सम्बन्ध में समस्या को पहचान कर उनकी कठिनाइयों को दूर करना उपचारात्मक शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है।
Q9. प्रमुख भाषायी कौशल के अन्तर्गत इनमें से कौन एक नहीं आता है?
(1) बोलना
(2) सुनना
(3) हँसना
(4) लिखना
Ans : (3) भाषा के सम्बन्ध में चार प्रमुख कौशल आते है- (i) लिखना (लेखन कौशल) (ii) सुनना (श्रवणकौशल) (iii) बोलना (मौखिक कौशल) (iv) पढ़ना (पठन कौशल)
Q10. हिन्दी दिवस मनाया जाता है-
(1) 05 सितम्बर को
(2) 14 सितम्बर को
(3) 02 अक्टूबर को
(4) 26 जनवरी को
Ans : (2) 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। 14 सितम्बर, 1949 ई. को भारत के संविधान में हिन्दी को राजभाषा (Official Language) की मान्यता प्रदान की गई। भारतीय संविधान के भाग-17 में अनुच्छेद 343-351 तक राजभाषा का संविधान में प्रावधान किया गया है तथा संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है।
Q11. काव्य शिक्षण का उद्देश्य है-
(1) व्याकरणिक नियमों की जानकारी देना
(2) भाषा में प्रयुत्त होने वाले विराम चिह्नों से परिचित कराना
(3) संगीत कला में निपुण बनाना
(4) रसानुभूति एवं आनन्दनुभूति कराना
Ans : (4) साहित्य में काव्य शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य छात्रों को रस तथा आनन्द की अनुभूति कराना है।
Q12. निम्न में से किस वाक्य में विशेषण का प्रयोग हुआ है?
(1) सीता फल खाती है
(2) राम जाता है
(3) मेरी गाय काली है
(4) जल्दी उठना स्वास्थ्यवर्द्धक होता है
Ans : (3) ‘‘मेरी गाय काली है।’’ इस वाक्य में ‘मेरी’ शब्द एक सार्वनामिक विशेषण हैं। जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए, उसे विशेषण कहते हैं। विशेषण चार प्रकार का होता है- (i) सार्वनामिक विशेषण (ii) गुणवाचक विशेषण (iii) संख्यावाचक विशेषण (iv) परिणामवाचक विशेषण
Q13. नाटक शिक्षण में ‘कक्षाभिनय प्रणाली’ के प्रयोग से-
(1) पात्रानुसार बच्चों द्वारा अभिनय से सीखने की प्रक्रिया में तेजी आती है
(2) शिक्षक एवं बच्चों का समय व्यर्थ होता है
(3) बच्चों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है
(4) उपरोत्त में से कोई नहीं
Ans : (1) नाटक शिक्षण में ‘कक्षाभिनय प्रणाली’ के प्रयोग से पात्रों के अनुसार छात्रों (बच्चों) में अभिनय सीखने की प्रक्रिया का तेजी से विकास होता है।
Q14. निम्न शब्द में अधिकरण कारक का प्रयोग हुआ है-
(1) सत्ताधीश
(2) वाहनारूढ़
(3) गंगाजल
(4) रेखाचित्र
Ans : (2) जहाँ अधिकरण तत्पुरुष में कारक चिह्न का लोप हो वहाँ अधिकरण तत्पुरुष समास होता है। इसका कारक चिह्न ‘‘में’’ ‘‘पर’’ आदि है। वाहनारुढ़ वाहन पर आरुढ़ (अधिकरण तत्पुरुष समास) गंगाजल गंगा का जल (सम्बन्ध तत्पुरुष समास)
Q15. किस रस को ‘रसराज’ कहा जाता है?
(1) वीर रस
(2) शृंगार रस
(3) हास्य रस
(4) इनमें से कोई नहीं
Ans : (2) शृंगार रस को कार्य व्यापार की व्यापकता के कारण ‘रसराज’ कहा जाता है। भारत मुनि आठ प्रकार के रसों का उल्लेख किया है जबकि अभिनव गुप्त ने मूलतः रसों की संख्या नौ माना है- (i) शृंगार रस (vi) भयानक रस (ii) हास्य रस (vii) अदभूत रस (iii) करुण रस (viii) वीभत्स रस (iv) वीर रस (ix) शान्तरस (v) रौद्र रस
Q16. घनानन्द को किस युग का कवि माना जाता है?
(1) भत्तिकाल
(2) आदिकाल
(3) रीतिकाल
(4) भारतेन्दु काल
Ans : (3) घनानन्द रीतिकाल की रीतिमुत्त काव्यधारा के प्रमुख कवि हैं। घनानन्द का जन्म (1689-1739 ई.) बुलंदशहर (उ.प्र.) में हुआ था। ये निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित थे इनकी प्रेयसी गणिका सुजान थी तथा घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीले के आश्रय में थे। घनानंद द्वारा रचित ग्रंथ-सुजानसार, इश्कलता, विरहलीला, वियोग बेलि, कोकसार, कृपाकंद, रस केलि वल्ली तथा यमुनायश।
Q17. निम्नलिखित में से शुद्ध वर्तनी वाला शब्द है-
(1) आशीरवाद
(2) आशिर्वाद
(3) आशीर्वाद
(4) आर्शिवाद
Ans : (3) आशीर्वाद शुद्ध वर्तनी वाला शब्द है। जबकि अन्य सभी विकल्प असंगत है।
Q18. ‘को’ से किस कारक चिह्न का बोध होता है?
(1) करण कारक
(2) कर्म कारक
(3) सम्प्रदान कारक
(4) अधिकरण कारक
Ans : (2) ‘को’ से कर्मकारक चिह्न का बोध होता है। कारक तथा उनकी कारक चिह्न निम्नलिखित हैकारक चिह्न (विभत्ति) कर्ता कारक – ने कर्म कारक – को करण कारक – से सम्प्रदादान कारक – को, के लिए अपादान कारक – से (अलग होने के अर्थ में) सम्बन्ध कारक – का, के, की, रा, रे, री अधिकर कारक – में, पर सम्बोधन कारक – हे, अजी, अहो इत्यादि।
Q19. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन का उपनाम है–
(1) निराला
(2) हरिऔध
(3) अज्ञेय
(4) गुलेरी
Ans : (3) कवि उपनाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन – अज्ञेय सूर्यकान्त त्रिपाठी – निराला चन्द्रधर शर्मा – गुलेरी अयोध्या सिंह उपाध्याय – हरिऔध
Q20. ‘बिहारी’ के प्रसिद्ध है-
(1) सवैया
(2) कवित
(3) पद
(4) दोहा
Ans : (4) बिहारी रीतिकाल के रीतिसिद्ध काव्य धारा के एक मात्र कवि हैं। जिन्होंने केवल एक रचना ‘बिहारी सतसई’ (दोहा छन्द में) की है। बिहारी सतसई की भाषा परिनिष्ठित साहित्यिक ब्रजभाषा है। इसमें दोहों की संख्या 719 है। बिहारी निम्बार्क सम्प्रदाय में दीक्षित, इसके पिता केशवदास तथा गुरू नरहरिदास थे बिहारी महाराजा जय सिंह के आश्रय में थे।
Q21. ‘पुनर्जन्म’ शब्द का सही सन्धि-विच्छेद है –
(1) पुरन्‌ + जन्म
(2) पुनः + जन्म
(3) पुन्‌ + जन्म
(4) पुनः + आजन्म
Ans : (2) पुनः + जन्म पुनर्जन्म (विसर्ग सन्धि) विसर्ग के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मिलने से जो विकार उत्पन्न होता है उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं।
Q22. ‘शोक’ किस रस का स्थायी भाव है?
(1) करुण
(2) शान्त
(3) हास्य
(4) वीर
Ans : (1) मन के विकार को ‘भाव’ कहते हैं और जो भाव आस्वाद, उत्कटता, सर्वजन सुलभता, चार पुरुषार्थों की उपयोगिता और औचित्य के नाते हृदय में बराबर बना रहे वह ‘स्थायी भाव’ कहलाता है। रस तथा उसके स्थायी भाव निम्नवत हैं – रस स्थायी भाव शृंगार रस रति हास्य रस हास करुण रस शोक वीर रस उत्साह रौद्र रस व्रोध भयानक रस भय अद्‌भुत रस विस्मय वीभत्स रस जुगुप्सा/घृणा शान्त रस निर्वेद (शम्‌)
Q23. ‘सूरदास’ ने किस भाषा में ‘सूरसागर’ की रचना की?
(1) ब्रज
(2) अवधी
(3) खड़ीबोली
(4) राजस्थानी
Ans : (1) सूरदास जी भत्तिकाल सगुण काव्यधारा के कृष्ण भत्ति शाखा के प्रमुख कवि हैं। इनकी तीन रचनाएँ हैं- सूरसागर, सूरसारावली और साहित्य लहरी। सूरदास जी की भाषा ब्रजभाषा थी। हिन्दी साहित्य में भ्रमरगीत काव्य परम्परा का प्रर्वतन सूरदास जी ने किया है।
Q24. ‘दोहा’ में कितनी मात्राएँ होती हैं?
(1) छब्बीस
(2) चौबीस
(3) अट्‌ठाइस
(4) तीस
Ans : (2) दोहा वह अर्द्धसम मात्रिक छंद है जिसके प्रथम व तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय एवं चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं और सम चरणों के अन्त में गुरू लघु होता है। अतः इस छन्द को कुल 24 मात्राएँ होती है। रोला, दोहा, सोरठा तथा रूपमाला में 24 मात्राएँ, गीतिका में 26 मात्राएँ, हरिगीतिका, उल्लाला तथा वीर में 28 मात्राएँ तथा ताटंक छंद में 30 मात्राएँ होती है।
Q25. ‘जो अच्छे कुल में उत्पन्न हुआ हो’ इस शब्द समूह के लिए एक शब्द क्या है?
(1) समृद्ध
(2) कुलीन
(3) धनी
(4) कृपण
Ans : (2) जो अच्छे कुल में उत्पन्न हुआ हो- कुलीन जो बहुत कंजूस हो – कृपण जिसके पास आधार धन सम्पदा हो – समृद्ध जो पैसे वाला हो – धनी
Q26. ‘दाता’ शब्द का स्त्रीलिंग शब्द क्या है?
(1) दातृ
(2) दाती
(3) दात्री
(4) धात्री
Ans : (3) दाता का स्त्रीलिंग शब्द दात्री होगा। अन्य सभी विकल्प असंगत हैं।
Q27. ‘लड़का पेड़ से गिरा’ में कौन-सा कारक है?
(1) सम्प्रदान कारक
(2) अपादान कारक
(3) कर्म कारक
(4) अधिकरण कारक
Ans : (2) ‘लड़का पेड से गिरा’। इस वाक्य में अपादानकारक चिह्न (से) का प्रयोग हुआ है। संज्ञा के जिस रूप से किसी वस्तु के अलग होने का भाव प्रकट होता है, उसे अपादानकारक कहते हैं। कारक चिह्न (विभत्ति) कर्त्ता कारक – ने कर्म कारक – को करण कारक – से, के द्वारा ] सम्प्रदान कारक – को, के लिए अपादान कारक – से (अलग होने के अर्थ में) सम्बन्ध कारक – का, के, की, रा, रे, री अधिकरण कारक – में, पर सम्बोधन कारक – हे, अजी, अहो इत्यादि।
Q28. ‘पापी’ में कौन-सा विशेषण है?
(1) सार्वनामिक विशेषण
(2) संख्यावाचक विशेषण
(3) गुणवाचक विशेषण
(4) परिमाणवाचक विशेषण
Ans : (3) पापी गुण वाचक विशेषण है। जिस शब्द से संज्ञा का गुण, दशा, स्वभाव आदि लक्षित हो उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं। विशेषणों में इनकी सर्वाधिक संख्या है। काल- नया, पुराना, अगला, पिछला, भूत, भविष्य स्थान- भीतरी, बाहरी, दायाँ, बायाँ, स्थानीय, देशीय, बंगाली, नेपाली आकार- गोल, लम्बा, सुन्दर, सुडौल, चौकोर, नुकीला, सीधा, तिरछा रंग- लाल, पीला, नीला, हरा, सफेद, सुनहरा, चमकीला, फीका दशा- दुबला, पतला, मोटा, भारी, गीला, सूखा, गरीब, अमीर, पालतू, रोगी गुण- भला, बुरा, उचित, अनुचित, सच्चा, झूठा, पापी, दानी, न्यायी, सीधा, शांत, दुष्ट
Q29. ‘नवल सुन्दर श्याम-शरीर की, सजल नीरद-सी कलकान्ति थी।’ में कौन-सा अलंकार है?
(1) रूपक
(2) उपमा
(3) श्लेष
(4) उत्प्रेक्षा
Ans : (2) ‘‘नवल सुन्दर श्याम शरीर की, सजल नीरद सी कलकान्ति थी।’’ इस वाक्य में उपमा अलंकार है। उपमा अलंकार- जहाँ उपमेय के साथ उपमान की, किसी समान धर्म को लेकर तुलना की जाये वहाँ उपमा अलंकार होता है। पीपर पात सरिस मन डोला रुपक अलंकार- जहाँ उपमेय और उपमान में भेद रहित आरोप किया जाता है। वहाँ रुपक अलंकार होता हैजैसे- उदित उदय गिरी मंच पर रघुबर बाल पतंग। विकसेऊ संत सरोज सब हरसे लोचन भृंग।। श्लेष अलंकार- श्लेष का अर्थ है चिपकना, मिलना अथवा संयोग। जहाँ एक शब्द के साथ अनेक अर्थ चिपके रहते हैं वहाँ श्लेष अलंकार होता हैचिरजीवौ जोरी जुएै, क्यों न सनेह गंभीर। को घटि ये वृष भानुजा, वे हलधर के बीर।। उत्प्रेक्षा अलंकार- जब उपमेय में उपमान की सम्भावना या कल्पना कर ली जाये, तब उत्प्रेक्षा अलंकार माना जाता हैसोहत ओढ़े पीट पट स्याम सलोने गात। मनहुँ नील मनि सैल पर आतप पर्‌यो प्रभात।।
Q30. ‘बीजक’ किसकी रचना है?
(1) तुलसी
(2) सूर
(3) कबीर
(4) जायसी
Ans : (3) ‘बीजक’ भत्तिकाल के निर्गुण काव्यधारा के ज्ञानाश्रयीशाखा के प्रमुख कवि कबीर की रचना है। ‘बीजक’ साखी, सबद तथा रमैनी तीनो का संकलन है। इसका संकलन कबीर के शिष्य धर्मदास ने ‘बीजक’ नाम से सन्‌ 1464 ई. में किया था। कबीरदास की भाषा को पंचमेल खिचड़ी, सधुक्कड़ी आदि नामों से अभिहित किया जाता है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को ‘‘भाषा का डिक्टेटर’’ कहा है।

Top
error: Content is protected !!