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004 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. ‘नई कविता’ पत्रिका का प्रकाशन कहाँ से आरम्भ हुआ?
(1) लखनऊ
(2) इलाहाबाद
(3) कलकत्ता
(4) दिल्ली
Ans : (2) ‘नई कविता’ पत्रिका इलाहाबाद से प्रकाशित होती थी। ‘नई कविता’ पत्रिका का सर्वप्रथम प्रकाशन सन्‌ 1954 ई. में डॉ. जगदीश चन्द्र गुप्त के सम्पादकत्व में प्रारम्भ हुआ, यह एक अर्धवार्षिक पत्रिका थी। ‘नयी कविता’ नाम अज्ञेय का दिया हुआ है। अपनी एक रेडियो वार्ता में उन्होंने इस पद का सर्वप्रथम प्रयोग किया था।
Q2. अयोगवाह कहा जाता है –
(1) महाप्राण को
(2) विसर्ग को
(3) संयुत्त व्यंजन को
(4) अल्पप्राण को
Ans : (2) अनुस्वार (अं) तथा विसर्ग (अः) का स्वर और व्यंजन के साथ योग न होने के कारण, इन ध्वनियों को ‘अयोगवाह’ कहते हैं- क्ष, त्र, ज्ञ, श्र को संयुत्त व्यंजन कहा जाता है। प्रत्येक वर्ग का द्वितीय व चतुर्थ वर्ण तथा श, ष, स, ह महाप्राण कहलाते हैं तथा प्रत्येक वर्ग का प्रथम, तृतीय व पंचम वर्ण अल्पप्राण कहलाते हैं।
Q3. वाचन के समय पुस्तक की आँखों से दूरी होनी चाहिए।
(1) 10 इंच
(2) 9 इंच
(3) 11 इंच
(4) 12 इंच
Ans : (4) अध्ययन (वाचन) के समय पुस्तक की आँखों से दूरी 12 इंच होनी चाहिए।
Q4. ‘तोड़ने ही होंगे मठ और गढ़ सब’- किसकी पंत्ति है?
(1) नागार्जुन
(2) निराला
(3) रघुवीर सहाय
(4) मुत्तिबोध
Ans : (4) पंत्ति कवि तोड़ने ही होगे मठ और गढ़ सब – मुत्तिबोध अशब्द अधरों का सुना भाषा – निराला घुन खाये शहतीरों पर बारह खड़ी – नागार्जुन विधाता बाँचे राष्ट्रगीत में भला कौन वह भारत-भाग्य – रघुवीर सहाय विधाता है
Q5. किस दृश्य-उपकरण में पारदर्शी (ट्रांसपरेन्सी) का प्रयोग होता है?
(1) स्लाइड प्रक्षेपक (प्रोजेक्टर) में
(2) ओवरहैंड प्रक्षेपक (प्रोजेक्टर) में
(3) अपारदर्शी प्रक्षेपक (ओपेक प्रोजेक्टर) या एपिडाइस्कोप में
(4) फिल्म स्ट्रिप में
Ans : (2) ओवर हैड प्रक्षेपक (प्रोजेक्टर) OHP का दृश्य उपकरण में पारदर्शी (ट्रांसपरेन्सी) का प्रयोग होता है।
Q6. मौन पठन के विषय में धारणा है-
(1) एकाग्रचित होकर पढ़ने का अभ्यास होता है
(2) इसमें पठन की गति धीमी हो जाती है
(3) पढ़ने की धीमी ध्वनि होंठों से निकलती है
(4) इसे आदर्श वाचन के तुरन्त बाद किया जाता है
Ans : (1) मौन पठन के विषय में यह धारणा है कि इससे विद्यार्थी बिना आवाज किये अपने पाठ को पढ़ता हैं। मौन में बिना बोले विद्यार्थी एकाग्रचित होकर पढ़ने का अभ्यास करता है। इसमें सुनने की क्रिया प्रायः शून्य होती है।
Q7. ‘तदीय समाज’ की स्थापना किसने की थी?
(1) राजा राममोहन राय
(2) दयानन्द सरस्वती
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(4) केशवचन्द्र सेन
Ans : (3) संस्था संस्थापक तदीप समाज भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ब्रह्म समाज राजा राममोहन राय आर्य समाज दयानन्द सरस्वती
Q8. ‘तथैव’ शब्द का सन्धि-विच्छेद है
(1) तथे + एव
(2) तथ + एव
(3) तथा + ऐव
(4) तथा + एव
Ans : (4) तथैव तथा + एव (वृद्धि सन्धि) यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘ए’ या ‘ऐ’ आए तो दोनों के स्थान में ‘ऐ’ तथा ‘ओ’ या ‘औ’ आए तो दोनों के स्थान पर ‘औ’ हो जाता है।
Q9. ‘चरण-कमल बन्दौ हरिराई।’ उपरोत्त पंत्ति में अलंकार है
(1) यमक
(2) उत्प्रेक्षा
(3) रूपक
(4) उपमा
Ans : (3) ‘चरण कमल बन्दौं हरिराई’ इस पंत्ति में रूपक अलंकार है। जहाँ ‘उपमेय’ और ‘उपमान’ में भेदरहित आरोप किया जाता है, वही ‘रूपक’ अलंकार होता है। यमक अलंकार- जहाँ एक या एक से अधिक शब्द एक से अधिक बार प्रयुत्त हो एवं अर्थ भी प्रत्येक बार भिन्न हो, वहाँ यमक अलंकार होता है। उपमा अलंकार- उपमा का शाब्दिक अर्थ है- सादृश्य, समानता या तुलना। जहाँ उपमेय और उपमान में गुण, रूप या चमत्कृत सौन्दर्य मूलक सादृश्य का प्रतिमान किया जाय, वहाँ ‘उपमा अलंकार’ होता है। उत्प्रेक्षा अलंकार- जब उपमेय में उपमान की सम्भावना या कल्पना कर ली जाये, तब वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार माना जाता है।
Q10. मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ै गिरिवर गहन। जासु कृपा सु दयाल, द्रवहु सकल कलिमल दहन।। उपरोत्त में छन्द है
(1) चौपाई
(2) दोहा
(3) सोरठा
(4) रोला
Ans : (3) मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ै गिरिवर गहन जासु कृपा सु दयाल, द्रवहु सकल कलिमल दहन।। उपरोत्त छन्द में सोरठा छंद है। यह एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है। सोरठा दोहे का उल्टा होता है अर्थात्‌ इसमें प्रथम एवं तृतीय चरण में 11-11 और द्वितीय और चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती है।
Q11. ‘मधुलिका’ जयशंकर प्रसाद की किस कहानी की पात्र है?
(1) इन्द्रजाल
(2) आकाशदीप
(3) गुण्डा
(4) पुरस्कार
Ans : (4) मधुलिका, अरुण, कौशल नरेश तथा सेनापति आदि जयशंकर प्रसाद जी द्वारा रचित कहानी ‘पुरस्कार’ के पात्र हैं। देवदासी, ममता, छाया, ग्राम, घीसू, विसाती, चूड़ीवाली, सालवती मधुआ, गुण्डा, इन्द्रजाल, छोटा, जादूगर, पत्थर की पुकार, उस पार का आकशद्वीप, योगी, चंदा, खण्डहर की लिपि तथा नूरी आदि जयशंकर प्रसाद की प्रतिनिधि कहानियाँ है।
Q12. ‘आधे-अधूरे’ नाटक के रचनाकार है
(1) मन्नू भण्डारी
(2) अमृतलाल नागर
(3) मोहन राकेश
(4) निर्मल वर्मा
Ans : (3) आधे-अधूरे नाटक के रचनाकार मोहन राकेश हैं। आषाढ़ का एकदिन, लहरों के राजहंस तथा पैर तले जमीन (अधूरा) आदि मोहन राकेश के अन्य नाटक है। बिना दिवारों का घर तथा महाभोज मन्नू भण्डारी के नाटक है।
Q13. वर्तनी की दृष्टि से निम्नलिखित मेंं शुद्ध शब्द है
(1) रचयिता
(2) रचियता
(3) रचईता
(4) रचियिता
Ans : (1) वर्तनी की दृष्टि से रचयिता शब्द शुद्ध है।
Q14. ‘कर्म कारक’ का चिह्न है
(1) से, द्वारा
(2) ने
(3) को
(4) को, के लिए, हेतु
Ans : (3) कारक कारक चिह्न कर्त्ता ने कर्म को करण से, के द्वारा सम्प्रदान के लिए, हेतू निर्मित, वास्ते अपादान से (अलग होने का भाव) सम्बन्ध का, की, के, रा, री, रे, ना, नी, ने अधिकरण में, भीतर, पर, सम्बोधन हे
हो
अजी
अरे
रे

Q15. ‘बाजार’ से किस संज्ञा का बोध होता है?

(1) समूहवाचक
(2) भाववाचक
(3) जातिवाचक
(4) व्यत्तिवाचक
Ans : (1) ‘बाजार’ समूह वाचक संज्ञा है। जिस संज्ञा से वस्तु अथवा व्यत्ति के समूह का बोध हो उसे ‘समूहवाचक संज्ञा’ कहते हैं। ‘बाजार’ व्यक्तियों अथवा लोगों का समूह होता है अतः यह समूह वाचक संज्ञा है। इसके अन्य उदाहरण- सभा, दल, गिरोह, मंडल आदि है। भाववाचक संज्ञा- जिस संज्ञा शब्द से व्यक्ति, वस्तु के गुण या धर्म, दशा अथवा व्यापार का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं जैसे- लम्बाई, बुढ़ापा, नम्रता, मिठास, समझ, चाल आदि है। व्यत्तिवाचक संज्ञा-जिस शब्द से किसी एक वस्तु या व्यत्ति का बोध हो, उसे व्यत्तिवाचक संज्ञा कहते हैं, जैसे- राम, गाँधी जी, गंगा, काशी इत्यादि। जातिवाचक संज्ञा- जिन संज्ञाओं से एक ही प्रकार की वस्तुओं अथवा व्यत्तियों का बोध हो, उन्हें ‘जातिवाचक संज्ञा’ कहते हैं। जैसे- मनुष्य, घर, पहाड़, नदी इत्यादि।
Q16. निम्नलिखित में से कौन गुणवाचक विशेषण नहीं है?
(1) अधिक
(2) गोल
(3) नुकीला
(4) भीतरी
Ans : (1) अधिक गुणवाचक विशेषण नहीं है। जबकि गोल, नुकीला तथा भीतरी आदि गुणवाचक विशेषण हैं। जिस शब्द से संज्ञा का गुण, दशा स्वभाव आदि लक्षित हो, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- प्राचीन, देशीय, सुडौल, लाल, दुबला, अनुचित, सच्चा, बड़ा सा, छोटी सी आदि।
Q17. मुख्य क्रिया के अर्थ को स्पष्ट करने वाली क्रिया होती है
(1) प्ररेणार्थक क्रिया
(2) सहायक क्रिया
(3) नामबोधक
(4) नामधातु
Ans : (2) मुख्य क्रिया के अर्थ को स्पष्ट करने वाली क्रिया सहायक क्रिया होती है। प्रेरणार्थक क्रिया- जिन क्रियाओं से इस बात का बोध हो कि कर्त्ता स्वयं कार्य न कर किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है, वे ‘प्रेरणार्थक क्रियाएँ’ कहलाती हैं। नामधातु- जो धातु संज्ञा या विशेषण से बनती हैं, उसे ‘नामधातु’ कहते हैं। नामबोधक क्रिया- संज्ञा अथवा विशेषण के साथ क्रिया जोड़ने से जो संयुत्त क्रिया बनती है, उसे ‘नामबोधक क्रिया’ कहते हैं।
Q18. ‘यथाशक्ति’ में कौन-सा समास है?
(1) तत्पुरुष
(2) कर्मधारय
(3) द्वन्द्व
(4) अव्ययीभाव
Ans : (4) यथाशक्ति शक्ति के अनुसार (अव्ययीभाव समास) इस समास में पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा होता है। समस्त पद में अव्यय के अर्थ की ही प्रधानता रहती है। पूरा शब्द क्रिया-विशेषण के अर्थ में प्रयोग होता है। कर्मधारय समास-कर्म धारय का प्रथम पद विशेषण और दूसरा विशेष्य अथवा संज्ञा होता है। महाकवि – महान है जो कवि पीताम्बर – पीत है जो अम्बर तत्पुरुष समास- जिस समास का उत्तर अर्थात्‌ अन्तिम पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। गगनचुम्बी – गगन को चूमने वाला स्वर्ग प्राप्त – स्वर्ग को प्राप्त द्वन्द्व समास- जिसके दोनों पद प्रधान हो या दोनो संज्ञाएँ विशेषण हों, वह द्वन्द्व समास कहलायेगा। रात-दिन – रात और दिन माता-पिता – माता और पिता
Q19. ‘अजातशत्रु’ में कौन-सा समास है?
(1) द्वन्द्व
(2) तत्पुरुष
(3) कर्मधारय
(4) बहुब्रीहि
Ans : (4) अजातशत्रु- जिसका कोई शत्रु न हो वह अर्थात व्यक्ति विशेष बहुब्रीहि समास – इस समास में कोई भी शब्द प्रधान नहीं होता है। दोनों शब्द मिलकर एक नया अर्थ प्रकट करते हैं। दशानन- दश है आनन जिसके अर्थात्‌ रावण चक्रधर- चक्र को धारण करने वाला अर्थात्‌ विष्णु
Q20. कौन-सा महीना ‘भाद्रपद’ महीने के बाद आता है?
(1) अश्विन
(2) श्रावण
(3) पौष
(4) आषाढ़
Ans : (1) ‘भाद्रपद’ महीने के बाद अश्विन मास आता है। हिन्दी महीने के अनुसार वर्ष भर में महीनो के नाम निम्नवत है- चैत्र → वैशाख → ज्येष्ठ → आषाढ़ → सावन → भाद्रपद → अश्विन (क्वार) → कार्तिक → अगहन → पूस → माघ → फाल्गुन
Q21. ‘सावधान मनुष्य
यदि विज्ञान है तलवार, तो इसे दे पेंक, तजकर मोह, स्मृति के पार’ पंत्तियों के रचयिता हैं

(1) दिनकर
(2) नागार्जुन
(3) अज्ञेय
(4) निराला
Ans : (1) पंत्ति कवि सावधान मनुष्य
यदि विज्ञान है तलवार तो – दिनकर इसे दे पेंक तजकर मोह, स्मृति के पार। होगा फिर से दुर्घर्ष समर – निराला जड़ से चेतन का निशिबासर। कई दिनों तक चूल्हा रोया चक्की – नार्गाजुन रही उदास। कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उसके पास। साँप
तुम सभ्य तो हुए नहीं – अज्ञेय नगर में बसना भी तुम्हे नही आया।
Q22. ‘लघूर्मि’ में कौन-सी सन्धि है?
(1) दीर्घ स्वर सन्धि
(2) अयादि स्वर सन्धि
(3) वृद्धि स्वर सन्धि
(4) यण स्वर सन्धि
Ans : (1) लघूर्मि लघु + ऊर्मि (दीर्घ स्वर सन्धि) दो सवर्ण स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते है। यदि ‘अ’ , ‘आ’, ‘ई’, ‘उ’, ‘ऊ’ और ‘ऋ’ के बाद वे ही ह्रस्व या दीर्घ स्वर आएँ तो दोनों मिलकर क्रमशः ‘आ’, ‘ई’, ‘ऊ’ और ऋ हो जाते है। जैसेमंजु + ऊषा मंजूषा सिन्धु + ऊर्मि सिन्धूर्मि
Q23. ‘कपूर’ शब्द है
(1) तद्‌भव
(2) तत्सम
(3) देशज
(4) विदेशज
Ans : (1) ‘कपूर’ तद्‌भव शब्द है इसका तत्सम कर्पूर होता है। तत्सम शब्द- वे संस्कृत शब्द है, जो अपने असली स्वरूप में हिन्दी भाषा में प्रचलित है। तद्‌भव शब्द- वे शब्द है जो या सीधे प्राकृत से हिन्दी भाषा में आ गये हें या प्राकृत के द्वारा संस्कृत से निकले हैं। देशज- वे शब्द जिनकी व्युत्पत्ति का पता नहीं चलता उन्हें देशज कहते हैं। विदेशज- विदेशी भाषा से हिन्दी में आए शब्दो को विदेशी या आगत शब्द कहते है।
Q24. ‘एक मुँह दो बात’ मुहावरे का अर्थ है
(1) बहुत कम बोलना
(2) अत्यधिक बातें करना
(3) अपनी बात से पलट जाना
(4) बात बनाना
Ans : (3) ‘एक मुँह दो बात, मुहावरे का अर्थ ‘अपनी बात से पलट जाना’ है।
Q25. प्रत्येक चरण में 16 मात्रा वाला चार चरणों का सममात्रिक छन्द है
(1) सोरठा
(2) दोहा
(3) रोला
(4) चौपाई
Ans : (4) प्रत्येक चरण में 16 मात्रा वाला चार चरणों का सममात्रिक छन्द चौपाई है। दोहा- दोहा वह अर्द्धसम मात्रिक छंद है। जिसके प्रथम व तृतीय चरण में 13-13 और द्वितीय तथा चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। सोरठा छंद-यह अर्द्धसम मात्रिक छंद है। यह दोहे का उलटा है। अर्थात्‌ इसके प्रथम तथा तृतीय चरण में 11-11 और द्वितीय और चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती है। रोला छंद- यह सममात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएं होती है और प्रत्येक चरण में 11 और 13 मात्राओं पर यति होती है।
Q26. ‘अधरों में राग अमन्द पिए, अलकों में मलयज बन्द किए, तू अब तक सोई है आली। आँखों में भरे विहाग री।’ पत्ति में कौन-सा रस है?
(1) शान्त
(2) करुण
(3) शृंगार
(4) वात्सल्य
Ans : (3) ‘अधरो में राग अमन्द पिए, अलकों में मलयज बंद किए’ तू अब तक सोई है आली। आँखों में भरे विहाग री इस पंत्ति में शृंगार रस की निष्पत्ति हुई है। नायक-नायिका के सौन्दर्य तथा प्रेम सम्बन्धी वर्णन की परिपक्व अवस्था को शृंगार रस कहते हैं।
Q27. ‘अन्धा-कुआँ नाटक के लेखक है
(1) विष्णु प्रभाकर
(2) मोहन राकेश
(3) जगदीशचन्द्र माथुर
(4) लक्ष्मीनारायण लाल
Ans : (4) ‘अन्धा कुआँ’ नाटक के लेखक लक्ष्मीनारायण लाल है। इनके अन्य नाटक – मादा कैक्टस, तीन आँखों वाली मछली, सूखा सरोवर, नाटक बहुरंगी, नाटक तोता मैना, रातरानी, दर्पण, स्क्तमाल, सूर्यमुख, कलंकी, मिस्टर अभिमन्यू, कर्फ्यू, दूसरा दरवाजा, अब्दुल्ला दीवाना, नरसिंह कथा, व्यत्तिगत, गूढ़ यक्ष प्रश्न, एक सौतन, हरिश्चन्द्र, गंगामाटी, सगुन पंक्षी, सब रंग मोहभंग, पंचपुरुष, राम की लड़ाई, बलराम की तीर्थयात्रा, कजरी वन, सुन्दर रस, कॉफी हाउस में इंतजार, हाथी घोड़ा, चूहा आदि।
Q28. ‘अज्‌’ शब्द को स्त्रीवाचक बनाने के लिए किस प्रत्यय का प्रयोग होगा?
(1) इक
(2) ईय
(3) आ
(4) ई
Ans : (3) ‘अज्‌’ शब्द को स्त्रीवाचक बनाने के लिए ‘आ’ प्रत्यय का प्रयोग होगा। ‘अज’ शब्द का अर्थ बकरा होता है, इसका स्त्रीलिंग बकरी के लिए ‘अज’ में ‘आ’ प्रत्यय लगाने से ‘अजा’ बनेगा।
Q29. प्रथम ‘तारसप्तक’ का प्रकाशन वर्ष है
(1) 1938
(2) 1943
(3) 1954
(4) 1941
Ans : (2) तार सप्तक का आरम्भ सन्‌ 1943 ई. मेंं सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के सम्पादकत्व में होता है। ‘तार सप्तक’ में सात कवि की रचनाएँ संगृहीत हैं। दूसरा सप्तक (1951), तीसरा सप्तक (1959) तथा चौथा सप्तक (1979) में प्रकाशित हुआ। सभी सप्तकों का सम्पादन अज्ञेय ने किया है।
Q30. ‘उल्का सी रानी दिशा दीप्त करती थी’ पत्ति में कौन-सा अलंकार है?
(1) रूपक
(2) यमक
(3) उत्प्रेक्षा
(4) उपमा
Ans : (4) ‘उल्का सी रानी दिशा दीप्त करती थी’ इस पंत्ति में उपमा अलंकार है। उपमा का शाब्दिक अर्थ है- सादृश्य, समानता या तुलना। जहाँ उपमेय और उपमान में गुण, रूप या चमत्कृत सौन्दर्य मूलक सादृश्य का प्रतिपादन किया जाय वहाँ उपमा अलंकार होता है। यमक अलंकार- जहाँ एक या एक से अधिक शब्द एक से अधिक बार प्रयुत्त हों एवं अर्थ भी प्रत्येक बार भिन्न हो वहाँ यमक अलंकार होता है। रुपक अलंकार- जहाँ उपमेय और उपमान में भेद रहित आरोप किया जाता है। वहाँ रुपक अलंकार होता है। उत्प्रेक्षा अलंकार-जब उपमेय में उपमान की सम्भावना या कल्पना कर ली जाये, तब उत्प्रेक्षा अलंकार माना जाता है।

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