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003 Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Hindi Language Previous Year Questions for CTET & TET Exams

Q1. अष्टछाप के कवि नहीं हैं –
(1) कृष्णदास
(2) नाभादास
(3) परमानन्ददास
(4) नन्ददास
Ans: (2) नाभादास अष्टछाप के कवि नही है। अष्टछाप कि स्थापना बल्लभाचार्य के पुत्र गोस्वामी विठ्ठलनाथ ने सन्‌ 1565 ई. में चार बल्लभाचार्य के तथा चार अपने शिष्यों को मिलाकर किया था। वल्लभाचार्य के शिष्य- कुम्भनदास, सूरदास, परमानंददास, तथा कृष्णदास थे जबकि विठ्ठलनाथ के शिष्य- गोविन्द स्वामी छीतस्वामी, चतुर्भुजदास तथा नंददास थे।
Q2. जो वाणी द्वारा व्यत्त न किया जा सके –
(1) स्वानुभूति
(2) आत्मसाक्षात्कार
(3) अनिर्वचनीय
(4) रहस्य
Ans: (3) जो वाणी द्वारा व्यत्त न किया जा सके- अनिर्वचनीय स्वयं के बारे ज्ञान होना या जानना – आत्मसाक्षात्कार किसी वस्तु का स्वतः अनुभूति करना – स्वानुभूति जो बात किसी को न ज्ञात हो – रहस्य
Q3. ‘आचरण की सभ्यता’ किसका निबन्ध है?
(1) सरदार पूर्ण सिंह
(2) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(3) रामचन्द्र शुक्ल
(4) पद्मसिंह
Ans: (1) आचरण की सभ्यता सरदार पूर्ण सिंह का निबन्ध है। इनके अन्य निबन्ध है- मजदूरी और प्रेम, सच्ची वीरता, पवित्रता, कान्यादान तथा अमेरीका का मस्त कवि वाल्ट हिटमैन। जबकि सम्पत्तिशास्त्र, रसज्ञ रंजन, लेखांजलि, नाट्‌य शास्त्र, कालिदास के समय का भारत, दंडदेव का आत्मनिवेदन, भाषा और व्याकरण, महाकवि माघ का प्रभात वर्णन, आत्मनिवेदन, प्रभात, नेपाल तथा म्युनिसिपैलिटी के कारनामे आदि महावीर प्रसाद द्विवेदी के निबन्ध हैं। मुझे मेरे मित्रों से बचाओ, दयानन्द सरस्वती मर गए तथा हिन्दी के प्राचीन साहित्य का उद्धार आदि पद्मसिंह शर्मा के निबन्ध हैं। भाव या मनोविकार, उत्साह, श्रद्धा और भक्ति, करूणा, लज्जा और ग्लानि, लोभ और प्रीति, घृणा, ईर्ष्या, भय, व्रोध, कविता क्या है, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, तुलसी का भत्तिमार्ग, मानस की धर्मभूमि, काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था, काव्य में रहस्यवाद तथा काव्य में अभिव्यंजनावाद आदि आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध हैं।
Q4. ‘भूषण’ किस काल के कवि हैं?
(1) भत्तिकाल
(2) वीरगाथाकाल
(3) रीतिकाल
(4) आदिकाल
Ans: (3) भूषण, रीतिकाल के कवि है। भूषण (1613-1715) का जन्म तिकवांपुर कानपुर में हुआ था, भूषण आचार्य चिंतामणि, जटाशंकर तथा मतिराम के भाई थे। भूषण महाराज छत्रसाल तथा शिवाजी के आश्रय में थे। भूषण वीर रस के कवि हैं। चित्रकूट के सोलंकी राजा रूद्र ने इन्हें कवि भूषण की उपाधि दी थी। शिवराज भूषण, शिवबावनी तथा छत्रसाल दशक आदि भूषण के प्रमुख काव्य ग्रंथ हैं।
Q5. ‘उत्साह’ किस रस का स्थायी भाव है?
(1) वीर
(2) करूण
(3) हास्य
(4) शृंगार
Ans: (1) रस स्थायी भाव शृंगार रस रति हास्य रस हास करूण रस शोक रौद्र रस व्रोध वीर रस उत्साह भयानक रस भय वीभत्स रस जुगुप्सा/घृणा अद्‌भुत रस विस्मय शांत रस निर्वेद/शम्‌/वैराग्य वात्सल्य रस वत्सलता भत्ति रस ईश्वर विषयकरति प्रेयान रस स्नेह
Q6. ‘कवितावली’ के रचनाकार हैं-
(1) जायसी
(2) सूरदास
(3) तुलसीदास
(4) घनानन्द
Ans: (3) ‘कवितावली’ ब्रजभाषा में रचित गोस्वामी तुलसीदास की रचना है। यह मुत्तक काव्य, कवित्त तथा छप्पय छंदो में 7 काण्डों की रचना है। कवितावली में बनारस (काशी) के तत्कालीन समय में फैले महामारी का तथा कलिकाल का वर्णन किया है। तुलसीदास द्वारा रचित अन्य रचनाएँ – बैराग्य संदीपनी, रामाज्ञा प्रश्न, रामलला नहछू, जानकी मंगल, रामचरितमानस, पार्वती मंगल, कृष्ण गीतावली, गीतावली, विनयपत्रिका, दोहावली, बरवै रामायण आदि है। जबकि सूरसागर, सूरसरावली तथा साहित्य लहरी सूरदास जी के काव्य ग्रंथ है। पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरानामा, मसलानामा तथा कन्हावत आदि सूफी काव्यधारा के प्रमुख कवि जायसी के काव्यग्रंथ हैं। सुजान सार, इश्कलता, विरहलीला, वियोगबेलि, कोकसार, कृपानंद, रस केलिवल्ली तथा यमुनायश आदि घनानन्द की रचनाएँ हैं।
Q7. विनय पत्रिका की भाषा कौन-सी है?
(1) खड़ीबोली
(2) अवधी
(3) ब्रजभाषा
(4) अपभ्रंश
Ans: (3) गोस्वामी तुलसीदास रचित ग्रंथ विनयपत्रिका एक गीतिकाव्य है जो ब्रजभाषा में रचित है, जिसका मुख्य रस भक्तिरस है। तुलसीदास जी ने राम के दरबार में अर्जी रखने के रूप में विनय पत्रिका ग्रंथ की रचना की थी।
Q8. ट वर्ग में किस प्रकार के व्यंजन हैं?
(1) तालव्य
(2) कंठ्‌य
(3) मूर्धन्य
(4) दन्त्य
Ans: (3) कण्ठ्‌य (कण्ठ से) – क, ख, ग, घ, ङ तालव्य (तालु से) – च, छ, ज, झ, ञ, मूर्धन्य (ताल्यु के मूर्धभाग से) – ट, ठ, ड, ढ, ण दन्त्य (दाँतो के मूल से) – त, थ, द, ध वर्त्स्य (दन्त मूल से) – न, ल, र, स ओष्ठ्‌य (दोनों होठों से) – प, फ, ब, भ, म दन्तोष्ठ्‌य – व, फ स्वर यन्त्रीय (काकल्य) – ह
Q9. ‘अन्धेर-नगरी’ के लेखक हैं –
(1) हरिकृष्ण प्रेमी
(2) प्रतापनारायण मिश्र
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(4) रामकुमार वर्मा
Ans: (3) अन्धेर नगरी नामक नाटक के लेखक भारतेन्दु हरिशचन्द्र है। इनके अन्य नाटक- वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति, विषस्य विषमौषधम, प्रेमयोगिनी, चन्श्ववली, भारत दुर्दशा, नीलदेवी, तथा सती प्रताप आदि हैं। जबकि रक्षाबंधन, पाताल विजय, प्रतिशोध, शिवसाधना, छाया, बंधन, स्वप्न भंग, आहुति, उद्धार, प्रकाश स्तम्भ, कीर्ति स्तम्भ, शतरंज के खिलाड़ी, संरक्षक, साँपो की सृष्टि, रक्तदान, आन का मान, अमर आन, अमर बलिदान तथा अमृतपुत्री आदि हरिकृष्ण प्रेमी के नाटक है। कौमुदी महोत्सव, विजयपर्व, राजरानी सीता तथा चारूमित्रा आदि रामकुमार वर्मा के नाटक है।
Q10. आदिकाल में पहेलियाँ लिखने वाले कवि थे –
(1) खुसरो
(2) जगनिक
(3) सरहपा
(4) गोरखनाथ
Ans: (1) आदिकाल में पहेलियाँ लिखने वाले कवि अमीर खुसरो थे। इनका वास्तविक नाम अबुल हसन था तथा ये निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे। अमीर खुसरो खड़ी बोली के आदि (प्रथम) कवि माने जाते हैं। अमीर खुसरो द्वारा रचित ग्रंथ- खालिक बारी, पहेलियाँ, मुकरियाँ, दो सुखने तथा गजल आदि हैं। सरहपा आदिकाल के कवि हैं तथा इन्हें हिन्दी का प्रथम कवि माना जाता है। इन्हें सरोज वज्र, राहुल भद्र आदि नामों से जाना जाता है। दोहाकोश, सरहपा का प्रसिद्ध ग्रंथ है। आदिकाल के कवि गोरखनाथ को नाथ साहित्य का आरम्भकर्ता माना जाता है। गोरखनाथ ने हिन्दी साहित्य में षट्‌चव्रों वाला योग-मार्ग का प्रारम्भ किया। जगनिक आदि काल के रासो साहित्य परम्परा के कवि हैं। जगनिक परमालरासो नामक वीररस युत्त ग्रंथ की रचना की जिसे आल्हाखण्ड के नाम से भी जाना जाता है।
Q11. ‘पेड़ से बन्दर कूदा’, वाक्य में कौन-सा कारक है?
(1) कर्म कारक
(2) अपादान
(3) सम्प्रदान कारक
(4) करण कारक
Ans: (2) ‘पेड़ से बन्दर कूदा’ वाक्य में अपादान कारक है। वाक्य कारक चिह्न कर्त्ता कारक – ने कर्म कारक – को करण कारक – से, द्वारा सम्प्रदान कारक – को, के लिए अपादान कारक – से (अलग होने के संदर्भ में) सम्बन्ध कारक – का, के, की, रा, रे, री अधिकरण कारक – में, पर सम्बोधन कारक – हे, अजी, अहो
Q12. शृंगार रस का स्थायी भाव है –
(1) रति
(2) हास
(3) व्रोध
(4) उत्साह
Ans: (1) रस – स्थायी रस शृंगार – रति हास्य रस – हास करूण रस – शोक रौद्र रस – व्रोध वीर रस – उत्साह भयानक रस – भय वीभत्स रस – जुगुप्सा/घृणा अद्‌भुत रस – विस्मय शांत रस – निर्वेद्‌/शम्‌/वैराग्य वात्सल्य रस – वल्सलता भत्ति रस – ईश्वर विषयक रति
Q13. निम्नलिखित में तद्‌भव शब्द है-
(1) अग्नि
(2) भ्रमर
(3) मस्तक
(4) मछली
Ans: (4) ‘मछली’ तद्‌भव शब्द है इसका तत्सम मत्स्य है। जबकि भ्रमर, अग्नि तथा मस्तक आदि तत्सम शब्द है- जिसका तद्‌भव क्रमशः- भँवरा, आग, तथा माथा है।
Q14. ‘चौपाई’ छन्द के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?
(1) सोलह
(2) चौबीस
(3) ग्यारह
(4) तेरह
Ans: (1) चौपाई यह सममात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ है और अन्त में दो गुरू वर्ण होते है तथा अंत में जगण और तगण का आना वर्जित होता है।
Q15. ‘तेरी बरछी ने बर छीने हैं, खलन के’ पंत्ति में कौन-सा अलंकार है?
(1) अनुप्रास
(2) रूपक
(3) श्लेष
(4) यमक
Ans: (4) ‘तेरी बरछी ने बर छीने है, खलन के’। इस पंत्ति में यमक अलंकार का प्रयोग हुआ है। जहाँ एक या एक से अधिक शब्द एक से अधिक बार प्रयुत्त हों एवं अर्थ भी प्रत्येक बार भिन्न हो, वहाँ यमक अलंकार होता है। अनुप्रास अलंकार – जहाँ वर्णों या व्यंजनों की साम्य के आधार पर आवृत्ति हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। श्लेष अलंकार – श्लेष का अर्थ है- चिपकना, मिलना अथवा संयोग। जहाँ एक शब्द के साथ अनेक अर्थ चिपके रहते हैं। वहाँ श्लेष अलंकार होता है। रूपक अलंकार – जहाँ उपमेय और उपमान में भेदरहित आरोप किया जाता है, वहाँ ‘रूपक’ अलंकार होता है।
Q16. ‘हिन्दी प्रदीप’ पत्रिका का सम्पादन किया है –
(1) बालकृष्ण भट्ट
(2) बदरीनारायण चौधरी प्रेमधन
(3) प्रतापनारायण मिश्र
(4) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
Ans: (1) ‘हिन्दी प्रदीप’ पत्रिका का सम्पादन बालकृष्ण भट्ट ने किया था। हिन्दी प्रदीप 1877 में प्रकाशित हुआ था यह एक मासिक पत्रिका है। जबकि भारतेन्दु हरिशचन्द्र ने कविवचन सुधा, हरिश्चन्द्र मैगजीन तथा बालाबोधिनी नामक पत्रिका का सम्पादन किया है। आनन्द कादंबिनी तथा नागरी नीरद पत्रिका का संपादन बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ ने किया। प्रतापनारायण मिश्र ने ब्राह्मण नामक पत्रिका का सम्पादन किया।
Q17. ‘सूर्योदय’ शब्द का सन्धि-विच्छेद है-
(1) सूर्य + उदय
(2) सूर्यो + दय
(3) सूर्यः + उदय
(4) सूर्ये + उदय
Ans: (1) सूर्य + उदय सूर्योदय (गुणसंधि) यदि प्रथम शब्द के अन्त में ह्रस्व अथवा दीर्घ ‘अ’ और दूसरे शब्द के आदि ह्रस्य अथवा दीर्घ इ, उ, ऋ में कोई वर्ण हो तो अ + इ ए अ + उ ओ अ + ऋ अर्‌ हो जाते है। यह गुण सन्धि कहलाती है।
Q18. यथाशक्ति में समास है-
(1) तत्पुरुष
(2) अव्ययीभाव
(3) द्विगु
(4) कर्मधारय
Ans: (2) यथाशक्ति शक्ति के अनुसार (अव्ययीभाव) इस समास में पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा होता है। समस्त पद में अव्यय के अर्थ की ही प्रधानता रहती है। पूरा शब्द क्रिया विशेषण के अर्थ में व्यवहृत होता है। तत्पुरुष समास – जिस समास का उत्तर पद अर्थात अन्तिमपद प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। गगन चुम्बी – गगन को चूमने वाला कर्मधारय समास – कर्मधारय का प्रथम पद विशेषण और विशेष्य अथवा संज्ञा होता है। अर्थात विशेषण + विशेष्य (संज्ञा) कर्मधारय महाकवि महान है जो कवि द्विगु समास – जिस कर्मधारय का पूर्वपद संख्याबोधक हो वह द्विगु कर्मधारय समास कहलाता है। जैसे- चौराहा, अष्टाध्यायी, त्रिभुवन
Q19. इनमें कौन-सा शब्द तद्‌भव है?
(1) भ्रमर
(2) मधुप
(3) मधुकर
(4) भँवरा
Ans: (4) भँवरा एक तद्‌भव शब्द है इसका तत्सम भ्रमर होता है।
Q20. ‘मुदरी’ का तत्सम रूप है-
(1) मुन्दरी
(2) मुश्वी
(3) मुदरिका
(4) मुद्रिका
Ans: (4) मुदरी शब्द तद्‌भव है इसका तत्सम मुद्रिका होता है। अन्य विकल्प असंगत है।
Q21. निम्नलिखित में से कौन-सा निबन्ध हजारीप्रसाद द्विवेदी का नहीं है?
(1) कुटज
(2) अशोक के फूल
(3) विचार प्रवाह
(4) वृत्त और विकास
Ans: (4) ‘वृत्त और विकास’ शांतिप्रिय द्विवेदी के निबन्ध हैं। इनके अन्य निबन्ध – कवि और काव्य, साहित्यिकी, जीवनयात्रा, संचारिणी, युग और साहित्य सामायिकी, धरातल, प्रतिष्ठान, साकल्य आधान आदि हैं। जबकि अशोक के फूल, कुटज तथा विचार और वितर्क, कल्पलता, मध्यकालीन धर्म साधना, विचारप्रवाह, साहित्य सहचर तथा आलोक पर्व आदि हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबन्ध संग्रह हैं।
Q22. परमाल रासो किसके द्वारा रचित है?
(1) नरपति नाल्ह
(2) नल्लसिंह
(3) चन्दबरदाई
(4) जगनिक
Ans: (4) ग्रंथ रचनाकार परमाल रासो – जगनिक (आल्ह खण्ड) वीसलदेव रासो – नरपतिनाल्ह विजयपाल रासो – नल्ह सिंह पृथ्वीराज रासो – चन्दबर दाई
Q23. ‘‘दुलहिन गावहु मंगलचार, हम घरि आए राजा राम भरतार।’’ ये किसकी पंत्तियाँ हैं?
(1) कबीरदास
(2) तुलसीदास
(3) सूरदास
(4) रैदास
Ans: (1) पंत्ति कवि दुलहिन गावहु मंगलचार, हम घरि आए राजा राम कबीरदास भरतार तुम जिन जानो गीत है, यह निज ब्रह्म विचार कबीरदास प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग अंग रैदास वास समानी लरिकाई कौ प्रेम कहौ अलि कैसे करि के छूटत सूरदास
Q24. ‘मृगावती’ किसकी रचना है?
(1) मंझन
(2) उसमान
(3) कुतुबन
(4) जायसी
Ans: (3) मृगावती (1503) सूफी कविता अवधी भाषा में लिखित कुतुबन की रचना है। चित्रावली (1613) उसमान की तथा मधुमालती (1945) मंझन की रचना है। जबकि पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा, कहरानामा, मसलानामा तथा कन्हावत आदि जायसी की रचनाएँ हैं।
Q25. निम्नलिखित में से शुद्ध वर्तनी वाला शब्द है-
(1) अन्तरराष्ट्रीय
(2) अन्तर्राष्ट्रीय
(3) अर्न्तराष्ट्रीय
(4) अन्तराष्ट्रीय
Ans: (2) अन्तर्राष्ट्रीय शुद्ध वर्तनी वाला शब्द है।
Q26. ‘आगे कुआँ पीछे खाई’ का अर्थ है-
(1) रास्ते का बन्द होना
(2) चारों तरफ जल ही जल होना
(3) दोनों ओर मुसीबत
(4) बीच में निकल भागना
Ans: (3) ‘आगे कुआँ पीछे खाई’ का अर्थ है – दोनों ओर मुसीबत।
Q27. ‘रामचरितमानस’ की भाषा क्या है?
(1) ब्रज
(2) अवधी
(3) खड़ीबोली
(4) भोजपुरी
Ans: (2) गोस्वामी तुलसीदास द्वारा कृत रामचरितमानस (1570) अवधी भाषा में रचित एक महाकाव्य ग्रंथ है। रामचरितमानस में गोस्वामी जी ने रामकथा का वर्णन किया है। मानस में सात काण्ड या सोपान है जो क्रमशः इस प्रकार है- (2) बालकाण्ड (1) अयोध्याकाण्ड (3) अरण्यकाण्ड (4) किष्किन्धाकाण्ड (5) सुन्दरकाण्ड (6) लंकाकाण्ड (7) उत्तरकाण्ड रामचरित मानस की रचना गोस्वामी जी ने स्वान्तः सुखाय के साथसाथ लोकहित एवं लोक मंगल के लिए किया है। रामचरित मानस पर सर्वाधिक प्रभाव अध्यात्म रामायण का पड़ा है। तुलसीदास ने सर्वप्रथम मानस को रसखान को सुनाया था।
Q28. आदिकाल के लिए ‘वीरगाथाकाल’ नाम किसने प्रस्तावित किया?
(1) महापण्डित राहुल सांकृत्यायन
(2) डॉ. रामकुमार वर्मा
(3) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(4) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
Ans: (3) आदिकाल का नामाकरण प्रयोक्ता चारणकाल – जार्ज ग्रियर्सन प्रारम्भिक काल – मिश्र बंधु बीजवपन काल – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी वीरगाथा काल – आचार्य रामचंद्र शुक्ल सिद्ध सामंत काल – पं. राहुल सांकृत्यायन संधिकाल एवं चारण काल – डॉ. राम कुमार वर्मा आदि काल – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
Q29. ‘उत्कर्ष’ शब्द का विलोम लिखिए।
(1) अपकर्ष
(2) पतन
(3) अपभ्रष्ट
(4) विकर्ष
Ans: (1) ‘उत्कर्ष’ शब्द का विलोम अपकर्ष होता है। पतन का विलोम उत्थान होता है।
Q30. ‘आनन्द कादम्बिनी’ के सम्पादक कौन थे?
(1) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
(2) बाबू महादेव सेठ
(3) बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमधन’
(4) अम्बिकाप्रसाद व्यास
Ans: (3) आनन्द कादम्बिनी (1881) के सम्पादक बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ हैं। यह एक मासिक पत्रिका है जिसका प्रकाशन मिर्जापुर से होता है। इनकी एक अन्य पत्रिका नागरी नीरद (1893) मिर्जापुर से ही साप्ताहिक प्रकाशित होती थी। अम्बिकादत्त ब्यास द्वारा सम्पादित पत्रिका का नाम ‘पीयूष प्रवाह’ (1884) है, जो काशी से प्रकाशित होती थी। चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा सम्पादित पत्रिका समालोचक (1902) मासिक जयपुर से प्रकाशित होती थी।

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