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GEOGRAPHY UGC NTA NET JRF PREVIOUS PAPERS IN HINDIयूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ दिसम्बर- 2005 भूगोल व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल 0036.

GEOGRAPHY UGC NTA NET JRF PREVIOUS PAPERS IN HINDIयूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ दिसम्बर- 2005 भूगोल व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल

1. वायुमंडल में धूल के कणों पर जल वाष्प के संघनन से किस सूत्रपात का आरम्भ होता है।
(a) कुहरा (b) तुषार
(c) ओला (d) मेघ
उत्तर-(*) : गैस तथा वाष्प के अलावा वायुमण्डल के कुछ सूक्ष्म ठोस कण भी पाए जाते है। इनमें धूलकण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इनकी स्थिति के कारण वायुमण्डल में अनेक घटनाएँ घटती रहती है। सूर्य से आने वाला किरणों में प्रकीर्णन इन्ही कणों के द्वारा होता है। जिस कारण आकाश का रंग सूर्योदय तथा सूर्यास्त एवं गोधूलि के स्थान नयनाभिराम रंग संभव हो पाते है। नमक तथा धुऐं के कण जलवाष्प को आकृष्ट करने के लिए आर्द्रताग्राही नाभिक हुआ करते है जिसके चारो तरफ सघनन के कारण जल बूदों का निर्माण होता है। वर्षा‚ कुहरा‚ बादल इन्ही का प्रतिफल है।
2. समुद्र में अधिकतम लवणता की उत्पत्ति कहाँ से हुई?
(a) समुद्रतल से
(b) जलवायु से
(c) समुद्री जीवों के अवशेषो से
(d) महाद्वीपों से
उत्तर-(d) : समुद्र में अधिकतम लवणता की उत्पत्ति महाद्वीपों से होती है सागरीय लवणता का मुख्य दोत पृथ्वी ही है। प्रारम्भ में जब पृथ्वी की उत्पत्ति हुई तथा क्रस्ट का निर्माण हुआ उस समय क्रस्ट में लवण की मात्रा अधिक थी। क्रस्ट के विघटन तथा वियोजन के कारण अपरदन के कारको के द्वारा लवण सागर में पहुँचाये जाने लगा। अत: स्पष्ट है कि समुद्र में अधिकतम लवणता की उत्पत्ति महाद्वीपों से हुयी है। इसके अलावा लवणता को प्रभावित करने वाले अन्य कारक निम्न है- वाष्पीकरण‚ स्वच्छ जल की आपूर्ति‚ पवनों की दिशा एवं प्रकृति‚ नदी जल की मात्रा‚ समुद्री धाराएँ आदि।
3. किस प्रक्रिया द्वारा सूर्य की ऊर्जा शक्ति पृथ्वी के चारों ओर प्रवाहित होती है।
(a) महासागरीय लहरें (b) पवन
(c) महासागरीय ज्वार (d) टोरनैडो
उत्तर-(a) : महासागरीय लहरों द्वारा सूर्य की ऊर्जा शक्ति पृथ्वी के चारों ओर प्रवाहित होती है। ये लहरें पृथ्वी पर तापमान के सन्तुलन में पर्याप्त सहयोग प्रदान करती है। टारनैडो आकार (विस्तार) की दृष्टि से सभी वायुमण्डलीय तूफानों में सबसे छोटा होता है परन्तु प्रभाव की दृष्टि से सबसे अधिक प्रलयकारी तथा प्रचण्ड होता है। टारनैडो प्रचण्ड रूप से घूर्णन करती हुयी वायु के सिस्टम होते है जिनमें ऊपरी वायु धरातलीय सतह की वायु को तीव्र गति से ऊपर खीचती है जिस कारण उत्थापित वायु के फलस्वरूप संवहनीय अस्थिरता उत्पन्न होती है।
4. समुद्र की सतह पर किस प्रकार के शैल का अत्यधिक बाहुल्य है।
(a) कायांतरित शैल (b) द्वितीयक शैल
(c) आग्रेय शैल (d) अवसादी शैल
उत्तर-(c) : समुद्र की सतह पर आग्नेय शैल का अत्यधिक बाहुल्य है। मध्य महासागरीय कटक के द्वारा निरन्तर समुद्री सतह का विस्तार होता रहता है जिससे अनवरत रूप से मैग्मा तथा लावा निकलता रहता है और समुद्री सतह का विस्तार होता रहता है। चूंकि आग्नेय शैल का निर्माण तप्त एवं तरल मैग्मा के शीतल होने से होता है अत: समुद्री की सतह पर सर्वाधिक आग्नेय शैल का विस्तार पाया जाता है। आग्नेय चट्टाने अत्यन्त कठोर होती है तथा रवेदार होती है। आग्नेय चट्टानों में परतें नही पायी जाती है।
5. किस प्रकार की जलवायु अवस्था में अपरदन की गति अतिशीघ्र होती है।
(a) उष्ण और आर्द्र (b) शीत और शुष्क
(c) उष्ण और शुष्क (d) शीत और आर्द्र
उत्तर-(a) : उष्ण और आर्द्र जलवायु अवस्था में अपरदन की गति अतिशीघ्र होती है। उष्ण और आर्द्र अवस्था में अपरदन के कारण अत्यन्त प्रभावी तथा सक्रिय होते है।
6. सेफ की उत्पत्ति किसके द्वारा होती है।
(a) गुरुत्वाकर्षण से (b) वायु से
(c) लहर से (d) सरिता से
उत्तर-(b) : सेफ की उत्पत्ति वायु द्वारा होती है। सेफ को स्तूप समूह या स्तूप माला या स्तूप शृंखला के नाम से भी जाना जाता है। 322
7. प्रत्युनवर्ती सरिता बहुधा किस दिशा में बहती है।
(a) मूल अनुवर्ती सरिता की दिशा में
(b) मूल अनुवर्ती सरिता की विमुख दिशा में
(c) मूल अनुवर्ती जल सरिता के समकोणी दिशा में
(d) सरिता की विकर्णी दिशा में
उत्तर-(b) : प्रधान अनुवर्ती सरिता की प्रवाह की दिशा के विपरीत दिशा में प्रवाहित होने वाली सरिता को प्रतिअनुवर्ती कहा जाता है। वास्तव में प्रतिअनुवर्ती भी अनुवर्ती सरिता ही होती है क्योंकि वह भी ढाल के अनुरूप ही प्रवाहित होती है प्रतिअनुवर्ती परवर्ती से समकोण पर मिलती है। उदाहरण के लिए शिवालिक श्रेणियों से निकलकर उत्तर दिशा में प्रवाहित होने वाली सरिताएँ प्रति अनुवर्ती है क्योंकि ये दक्षिण दिशा में प्रवाहित होने वाली प्रधान अनुवर्ती गंगा तथा यमुना की सहायक पूर्व पश्चिम दिशा में प्रवाहित होने वाली परवर्ती नदियों से समकोण पर मिलती है। प्रधान अनुवर्ती सरिता की प्रवाह दिशा के अनुरूप दिशा में प्रवाहित होने वाली सरिताओं को नवानुवर्ती कहा जाता है।
8. भूमध्य रेखा से ध्रुवबिन्दु को गतिशील धरातल हवाओं का काल्पनिक विश्व व्यापी रूप क्या है।
(a) डोलड्रम्स-व्यापारिक हवायें- पश्चिमी हवायें-पूर्वी हवायें
(b) डोलड्रम्स-व्यापारिक हवायें- पूर्वी हवायें-पश्चिमी हवायें
(c) डोलड्रम्स-पश्चिमी हवायें- व्यापारिक हवायें-पूर्वी हवायें
(d) डोलड्रम्स-पूर्वी हवायें-व्यापारिक हवायें-पश्चिमी हवायें
उत्तर-(a) : भूमध्य रेखा से ध्रुव बिन्दु को गतिशील घरातल हवाओं का काल्पनिक विश्वव्यापी रूप इस प्रकार है- डोलड्रम्स- व्यापारिक हवाएँ- पश्चिमी हवाएँ- पूर्वी हवाएँ
9. वे पौधे जो एक ऋतु में जीरोफाईट रूप का व्यवहार करते है और दूसरे ऋतु में हाईड्रोफाईट रूप का व्यवहार करते हैं। उनको क्या कहा जाता है।
(a) हैट्रोफाईट्स (b) ट्रोपोफाईट्स
(c) ओमनी फाईट्स (d) ट्रोपोमनी फाईट्स
उत्तर-(b) : वे पौधे जो एक ऋतु में जीरोफाइट रूप का व्यवहार करते है और दूसरी ऋतु में हाइड्रोफाइट रूप का व्यवहार करते है उनको ट्रोपोफाइट्स कहते है।
10. समुद्रतल पर हवा का दबाव कितना होता है।
(a) 1034 ग्राम्स/सेन्टीमीटर रक्वायर
(b) 1024 ग्राम्स/सेन्टीमीटर रक्वायर
(c) 1014 ग्राम्स/सेन्टीमीटर रक्वायर
(d) 1044 ग्राम्स/सेन्टीमीटर रक्वायर
उत्तर-(a) : समुद्र पर हवा का दबाव 1034 ग्राम/सेमी. स्क्वायर होता है। यदि वायु का तापमान अधिक होता है तो वायुदाब कम होता है और यदि तापमान कम होता है तो वायुदाब अधिक होता है।
11. खुले समुद्र में उच्च ज्वार एवं निम्न ज्चार में पाया जाने वाला अन्तर कितना होता है।
(a) 1.0 मीटर (b) 1.5 मीटर
(c) 0.5 मीटर (d) 2.5 मीटर
उत्तर-(*) : खुले समुद्र में उच्च ज्वार एवं निम्न ज्वार में पाया जाने वाला अन्तर 6 मीटर (2 फीट होता है) सर्य तथा चन्द्रमा की सापेक्ष स्थितियों में परिवर्तन होता रहता है जब सूर्य‚ पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सरल रेखा में होते है तो इस स्थिति की युति-वियुति या सिजगी कहते है। यह उच्च ज्वार की दशा होती है। प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष तथा कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी को सूर्य‚ पृथ्वी तथा चन्द्रमा समकोणिक स्थिति में होते है अर्थात ये मिलकर समकोण बनाते है यह स्थिति निम्न ज्वार की होती है।
12. ‘‘इजिप्ट नील का दिया हुआ उपहार है’’ ये वक्तव्य किस का है?
(a) अरिस्टाटल (b) सिनेका
(c) हेरोडोटस (d) हाईपोक्रेटिस
उत्तर-(c) : इजिप्ट नील का दिया हुआ उपहार है यह वक्तव्य हेरोडोटस का है। हेरोडोटस को इतिहास का पिता माना जाता है। वह प्रथम भूगोलवेत्ता थे जिन्होंने कैस्पियन सागर को आन्तरिक सगार माना तथा उन्होंने डेन्यूब नदी को विश्व की सबसे बड़ी नदी माना।
13. इनमें से कौन सा देश ‘सार्क’ का सदस्य नही है।
(a) मालद्वीव (b) भूटान
(c) श्रीलंका (d) म्याँमार
उत्तर-(d) : दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) की स्थापना 7-8 दिसम्बर‚ 1985 ई. में की गयी थी। इसका मुख्यालय काठमाण्डू में है। इसके सदस्य देश है- भारत‚ पाकिस्तान‚ बाग्लादेश‚ नेपाल‚ भूटान‚ मालद्वीप‚ श्रीलंका एवं अफगानिस्तान।
14. बान्टू जन जाति कहाँ पाई जाती है।
(a) दक्षिणी अफ्रीका (b) पूर्वी अफ्रीका
(c) सहारा के उत्तर दिशा में (d) पश्चिमी अफ्रीका
उत्तर-(a) 323 व्याख्या : बान्टू जनजाति मध्य तथा दक्षिणी अफ्रीका में निवास करने वाली एक प्रमुख जनजाति है।
15. खिरगी़ज खानावदोश कहाँ पाये जाते हैं।
(a) सहारा मरूस्थल प्रदेश में (b) कांगो बेसिन
(c) मध्य एशिया (d) सऊदी अरबिया
उत्तर-(c) : खिरगी़ज खानाबदोश मध्य एशिया के ऊँचे पठारी भू-
भाग में निवास करते है। इसके प्रान्त का नाम खिरगिजिया है‚ जो पूर्ववर्ती सोवियत संघ का राज्य है। खिरगी़ज क्षेत्र के निवासी की भूमि विषम स्थलाकृति की दर है। यह क्षेत्र एशिया महाद्वीप के आन्तरिक भाग में स्थित है जो महासागरों से बहुत दूर है। इन लोगों का प्राचीन काल से मुख्य उद्यम पशुपालन है। खिरगी़ज जनजाति के निवास क्षेत्र में प्राकृतिक घास के बड़े-बड़े चारागाह पाये जाते है इसी कारण इन लोगों के पास भेड़ो के बड़े-बड़े झुण्ड पाये जाते है तथा दूध देने वाले पशुओं में गायें तथा याक होते है। खिरगी़ज लोगों के वध्Eा ऊन तथा खाल के बने होते है।
16. इनमें से कौन सा संसाधन नवीकरणीय है।
(a) तेल (b) भूमि
(c) कोयला (d) लोहा
उत्तर-(b) : भूमि नवीकरणीय संसाधन है। इस वर्ग में ऐसे संसाधन सम्मिलित होते है जिनके स्वरूप या गुण में परिवर्तन करके उनके उपयोग अवधि तथा उपयोगिता आदि में वृद्धि या सुधार सम्भव है।
17. गंगा-सिन्धू के मैदान का उर्ववरक होने का क्या कारण है।
(a) खारी परत
(b) ज्वालामुखी मलबा
(c) कायंमित शैली
(d) परिवहित जलोदक (alluvium)
उत्तर-(d) : गंगा- सिन्धु के मैदान का उर्वरक होने का कारण परिवहित जलोदक है हिमालय पर्वत के दक्षिण के सिन्धु‚ गंगा तथा ब्रहमपुत्र जैसी नदियों की निक्षेप क्रिया द्वारा निर्मित एक विशाल मैदान स्थित है जिसे उत्तर भारत का विशाल मैदान कहते है। यह हिमालय एवं प्रायद्वीपिय पठार के बीच सिन्धु गंगा तथा ब्रहमपुत्र नदियों के अवसादों से निर्मित मैदान है जो 7 लाख वर्ग किमी.
क्षेत्र पर विस्तृत है। गंगा व सिन्धु नदियों के मुहाने के बीच पूर्व पश्चिम दिशा में इसकी लम्बाई लगभग 3200 किमी है तथा चौड़ाई 150 से 300 किमी. है। यह मैदान पश्चिम से पूर्व की ओर सॅकरा होता जाता है। विशेषताओ के आधार पर इस मैदान को भावर‚ तराई‚ बॉगर तथा खादर में विभाजित किया जाता है।
18. निम्नलिखित में से कौन से पौधे में काष्ठ नहीं होता है।
(a) लेयाना (b) जड़ी
(c) झाड़ी (d) वृक्ष
उत्तर-(b) : जड़ी बूटी में काष्ठ नही होती है। जड़ी-बूटी का प्राय:
प्रयोग औषधि बनाने के लिए किया जाता है जड़ी में काष्ठ नही होता जबकि लेयामा‚ झाड़ी तथा वृक्ष में काष्ठ पाया जाता है।
19. किस राज्य में सिंचाई के लिये नहर प्रणाली की सबसे अधिक लम्बाई है।
(a) उत्तर प्रदेश (b) राजस्थान
(c) पंजाब (d) हरियाणा
उत्तर-(a) : उत्तर प्रदेश में सिचाई के लिए नहर प्रणाली का सबसे अधिक लम्बाई उत्तर प्रदेश में पायी जाती है नहरे भारत में सिंचाई का सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण साधन है। भारत की जितनी भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है उनका 40% भाग नहरों द्वारा ही सींचा जाता है।
20. निम्नलिखित में से कौन अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास के लिये एक प्रवासी कारक है।
(a) आन्तरिक संघर्ष
(b) अत्यधिक स्वतन्त्रता
(c) विदेश में अधिक पारिश्रमिक
(d) अत्यधिक सुरक्षा
उत्तर-(c) : अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास के अन्तर्गत एक देश में दूसरे देश के लिए होने वाला मानव स्थानान्तरण आता है। जहाँ से अथवा जहाँ के लिए प्रवास होता है। ऐसे दोनों देश एक ही महाद्वीप में था अलग-अलग महाद्वीप में हो सकते है। इस प्रवास में अन्तर्राष्ट्रीय सीमा को पार करना अनिवार्य होता है। अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास के लिए एक प्रवासी कारक विदेश में अधिक पारिश्रमिक का मिलना है। इसके साथ ही इस प्रवास के भौतिक कारक में जलवायु परिवर्तन सर्वाधिक शक्तिशाली है। इसी प्रकार आर्थिक कारक के अन्तर्गत अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास के दो मूल कारक है- पहला आर्थिक आकर्षण और दूसरा आर्थिक कठिनाई। जिन देशों में जनसंख्या वृद्धि और आर्थिक संसाधनों की कमी से जीवनस्तर में गिरावट आने लगती है और विभिन्न आर्थिक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो जाती है वहाँ के बहुत से लोग ऐसे देशों तथा प्रदेशों के जाने के इच्छुक एवं तत्पर होते है जहाँ उपजाऊ कृषि भूमि‚ खनिज पदार्थ आदि के रूप में पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध होते है।
21. मानव संसाधन का विकास मुख्यरूप से आवश्यक है‚ क्यों कि लोग
(a) अधिक पारिश्रमिक पा सकते है
(b) अच्छे कार्य के लिये प्रवसन कर सकते हैं
(c) छोटे परिवार के मानक को अपना सकते है
(d) प्राकृतिक संसाधनो को विकसित कर सकते हैं
उत्तर-(d) 324 व्याख्या : मानव संसाधन का विकास मुख्य रूप से आवश्यक है क्योंकि लोग इससे प्राकृतिक संसाधनों को विकसित कर सकते है। मानव विकास के मापन में संसाधनो तक पहुँच को क्रय शक्ति
(अमेरिकी डॉलर) के सन्दर्भ में मापा जाता है।
22. व्यापारिक पैमाने पर पशुपालन विकसित हुआ है।
(a) मानसून प्रदेश में (b) सवाना प्रदेश में
(c) साहिल प्रदेश में (d) प्रेयरी एवं स्टेपी प्रदेश में
उत्तर-(d) : व्यापारिक पैमाने पर पशुपालन प्रेयरी तथा स्तेपी प्रदेश में विकसित हुआ है। प्रेयरी तथा स्टैपी प्रदेशों में बड़े पैमाने पर व्यापारिक पशुपालन का कारण यहाँ पाये जाने वाले बड़े-बड़े घास के मैदान है।
23. मंगोलायड प्रजाती प्रमुख रूप से पायी जाती है।
(a) दक्षिणी अफ्रिका में (b) पूर्वी एशिया में
(c) पश्चिमी अफ्रिका में (d) पूर्वी अफ्रिका में
उत्तर-(b) : मंगोलायड प्रजाति मुख्य रूप से पूर्वी एशिया में पायी जाती है। मंगोलायड प्रजाति का एशियाई-अमेरिका प्रजाति के नाम से भी जाना जाता है ग्रिफिथ टेलर के अनुसार यह सबसे नवीन और बाद की अल्पाइन प्रजाति है जो इतिहास के आरम्भिक काल में एशिया के विशाल केन्द्रीय भाग में रहती थी। बाद में पश्चिम में तुर्किस्तान और पूर्व में महाद्वीपीय तटों तक फैल गयी। मंगोलायड प्रजाति के अन्तर्गत सम्पूर्ण मानव जाति का एक-तिहाई से अधिक भाग सम्मिलित है जिनमें से लगभग आधे लोग चीन में है।
24. निम्नलिखित में से कौन से कोल क्षेत्र में कोयले की तहों में मिथेन गैस के व्यापारिक दोहन की अधिक सम्भावना की पहचान की गयी है।
(a) झारिया (b) कान्हन घाटी
(c) ताल्वर (d) गोदावरी घाटी
उत्तर-(d) : गोदावरी घाटी कोल क्षेत्र में कोयले की तहो में मीथेन गैस के व्यापारिक दोहन के अधिक सम्भावना की पहचान की गयी।
25. किसी भी देश की जनसंख्या वृद्धि के लिये किस प्रकार का केन्द्रीय मापन उपयोग होता है।
(a) गणितीय माध्य (b) हारमोनिक माध्य
(c) ज्योमेट्रिक माध्य (d) माध्यिका
उत्तर-(a) : किसी भी देश की जनसंख्या वृद्धि के लिए गणितीय माध्य का केन्द्रीय मापन उपयोग होता है। गणितिय माध्य को समानान्तर माध्य भी कहते है यह इस माध्य की गणना विधि सरल है तथा सदैव निश्चयात्मक होता है। माध्यिका बहुलक के विपरीत गणितीय माध्य श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित होता है। अपने विशिष्ट बीजगणितीय गुणों के कारण सांख्यिकीय विश्लेषण की अनेक विधियाँ जैसे-अपकिरण विषमता व सह-सम्बन्ध आदि में उसका काफी उपयोग किया जाता है।
26. राष्ट्रीय दूर संवेदी संस्था कहाँ स्थित है।
(a) दिल्ली (b) कोलकाता
(c) चेन्नई (d) हैदराबाद
उत्तर-(d) : राष्ट्रीय दूरसंवेदी केन्द्र इसरो का एक प्रमुख केन्द्र है। यह हैदराबाद में स्थित है।
27. मंगोलायड जन जाति ‘खासी’ विशेषकर कहाँ पाई जाती है।
(a) मणिपुर (b) असम
(c) मेघालय (d) उड़ीसा
उत्तर-(c) : मंगोलायड जनजाति खासी विशेषकर मेघालय में पायी जाती है। खासी जाति का पेशा सीढ़ीदार खेतों में कृषि करना है‚ जो नदी की घाटियों और चोरस घाटियों में होता है। भारत में अंग्रेजी राज्य के समय से ईसाई मत के प्रचारकों ने बहुत से खासी आदिवासियों को ईसाई बना दिया है।
28. किस उत्तर पूर्वी राज्य में जनजाति की जनसंख्या का जमाव न्यूनतम है।
(a) मेघालय (b) म़िजोरम
(c) असम (d) अरुणाचल प्रदेश
उत्तर-(d) : अरुणाचल प्रदेश में मेघालय‚ मिजोरम तथा असम की अपेक्षा कम जनजाति समूह पाया जाता है अरूणाचल प्रदेश के प्रमुख जनजाति समूह मेजो‚ डफला‚ अप्तानी है।
29. चाय के बागान कहाँ विकसित किये जाते है?
(a) विषुवतीय रेखीय प्रदेश
(b) उष्णंकटिबंधी पतझड प्रदेश
(c) उष्णंकटिबंधी घास स्थल प्रदेश
(d) उपोष्ण घास स्थल के प्रदेश
उत्तर-(b) : चाय के बागान उष्ण कटिबन्धीय पतझड़ के प्रदेश में पाये जाते है। चाय के लिए 240 C से 300 C का तापमान आवश्यक होता है। 150 सेमी. से 250 सेमी. की वार्षिक वर्षा उपयुक्त होती है तथा इसके लिए सुवाहित गहरी भुरभुरी मिट्टी आवश्यक होती है। चाय के प्रमुख उत्पादक राज्य निम्न है असम पश्चिम बंगाल‚ तमिलनाडु तथा केरल आदि।
30. साल एवं टीक सामान्य रूप से पाये जाते हैं।
(a) विषुवत्रेखीय वन (b) मानसून वन
(c) मैग्रोव वन (d) सवाना
उत्तर-(b) : साल एवं टीक सामान्य रूप से मानसूनी वन प्रदेश में पाये जाते है। उष्ण कटिबन्धीय वर्णपाती अथवा मानसूनी वन 100 सेमी. से 200 सेमी. वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाये जाते है। इन वनो का विस्तार गंगा की मध्य एवं निचली घाटी अर्थात भॉवर एवं प्रदेश महाराष्ट्र‚ कर्नाटक तमिलनाडु तथा केरल के कुछ भागों में मिलता है। इन वनों के प्रमुख वृक्ष है- साल‚ टीक‚ सागवान‚ शीशम‚ चन्दन तथा आम। 325
31. विश्व में खजूर के मुख्य निर्यातक है:
(a) ईरान (b) इराक
(c) टर्की (d) अफगानिस्तान
उत्तर-(a) : विश्व में खजूर का मुख्य निर्यातक देश ईरान है।
32. जन जातीय लोगों द्वारा स्थानांतरीय कृषि मुख्य रूप से की जाती है‚ क्यों कि:
(a) मृदा उर्वरकता कुछ वर्षो के उपरान्त कम हो जाती है।
(b) कुछ वर्षो के उपरान्त वन पुन: स्थापित कर लेते है
(c) लोग प्रवासिक जीवन को चाहते है
(d) पुन: उर्वरकता प्राप्त करने के लिये भूमि की परती छोड़ दिया जाता है
उत्तर-(c) : जनजातीय लोग द्वारा स्थानांतरीय कृषि मुख्य रूप से की जाती है क्योंकि लोग प्रवासी जीवन को चाहते हैं।
33. किसी भी प्रदेश में संसाधन का विकास मुख्य रूप से निर्भर करता है।
(a) जनसंख्या का घनत्व
(b) प्राकृतिक पर्यावरण
(c) लोगों की आवश्यकतायें एवं महत्वकाक्षायें।
(d) पूँजी की उपलब्धता
उत्तर-(c) : किसी भी प्रदेश में संसाधन का विकास मुख्य रूप से निर्भर करता है लोगों की आवश्यकताएँ एवं महत्वाकांक्षाओं पर। पृथ्वी पर अथवा अन्य ग्रहों पर एवं उपग्रहों पर पाया जाने वाला प्रत्येक पदार्थ जो मनुष्य के लिए उपयोगी है‚ संसाधन कहलाता है। मनुष्य के ज्ञान एवं तकनीक के विकास के साथ-साथ नये-नये संसाधन अस्तित्व में आते हैं जिससे संसाधनों की संख्या बढ़ती जाती है।
34. निम्नलिखित सूची- I का सूची- II के साथ मिलान कीजिए एवं दिये गये संकेतो से सही उत्तर चुनिये। सूची- I सूची- II
(a) प्रतिचक्रवात (i) मारबट
(b) क्षरण के आधार तल (ii) गिलबर्ट
(c) पेडोकाल्स तथा पेडाल्फर (iii) गाल्टन
(d) बसाला सैपिन्ग (iv) जान्सन
कूट:
(a) (b) (c) (d)
(a) (iii) (ii) (i) (iv)
(b) (iii) (iv) (ii) (i)
(c) (iv) (ii) (i) (iii)
(d) (iii) (ii) (iv) (i)
उत्तर-(a) : सूची का सुमेलन इस प्रकार हैसूची I सूची II प्रतिचक्रवात − गाल्टन क्षरण के आधार तल − गिल्बर्ट पेडोकाल्स तथा पेडाल्फर − मारबट बसाल सैपिंग − जोन्सन
35. कांगलोमरेट चट्टान में क्या अप्रांसगिक है?
(a) परिवहन (b) नदीय
(c) कायान्तरण (d) संपिण्डन
उत्तर-(c) : कांगलोमरेट चट्टानों में कायान्तरण अप्रासंगिक है इन चट्टानों में कायान्तरण का अभाव पाया जाता है।
36. निम्नलिखित मुख्य मृदा प्रकारों को उसके तहों में मोटाई के बढ़ते क्रम को व्यगस्थित करें।
(i) अल्युवियल मृदा (ii) चेस्टनट मृदा
(iii) चरनोजम मृदा (iv) लेटराईट मृदा
कूट:
(a) (iii) (i) (ii) (iv) (b) (iii) (ii) (iv) (i)
(c) (iii) (ii) (i) (iv) (d) (iii) (iv) (i) (ii)
उत्तर-(b) : मुख्य मृदा प्रकारों को उनके तहों में मोटाई के बढ़ते क्रम में निम्न प्रकार से व्यवस्थित किया जा सकता हैचरनोजम मृदा ↓चेस्टनट मृदा ↓लैटेराइट मृदा ↓अल्युवियल मृदा
37. निम्नलिखित सूची- I का सूची- II के साथ मिलान कीजिए एवं दिये गये संकेतो से सही उत्तर चुनिये। सूची- I सूची- II
(a) मानोर्मी (Breaker) (i) प्रवाल भित्ती
(b) भाटा धारायें (ii) समुद्री दिशा में बहाव
(c) सामुद्रीक वेदिका (Terrace) (iii) उद्यावन
(d) प्रवाल द्वीप-वलय (iv) समुद्र तटीय उठान 326
कूट:
(a) (b) (c) (d)
(a) (ii) (i) (iii) (iv)
(b) (iii) (ii) (iv) (i)
(c) (iii) (ii) (i) (iv)
(d) (ii) (i) (iv) (iii)
उत्तर-(b) :सूची I सूची II मानोर्मी − उद्यावन भाटा धाराएँ − समुद्री दिशा में बहाल सामुद्रिक वेदिका − समुद्री तटीय उठान प्रवाल द्वीप वलय − प्रवाल भित्ति
38. निम्नलिखित सूची- I का सूची- II के साथ मिलान कीजिए एवं दिये गये संकेतों से सही उत्तर चुनिये। सूची- I सूची- II
(a) आईसोहेलाइन (i) वर्षा
(b) आईसोवाल (ii) लवणता
(c) आईसोहाईट (iii) गति
(d) आईसोबार (iv) दबाव
कूट:
(a) (b) (c) (d)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (ii) (iii) (iv) (i)
(c) (ii) (iii) (i) (iv)
(d) (i) (ii) (iv) (iii)
उत्तर-(c) : सूची I सूची II आईसोहेलाइन − लवणता आईसोवाल − गति आईसोहाइट − वर्षा आईसोबार − दबाव
39. निम्नलिखित सूची- I का सूची- II के साथ मिलान कीजिए एवं दिये गये संकेतो से सही उत्तर चुनिये। सूची- I सूची- II
(a) लेपिस (i) एवेन्स
(b) सिंकहोल्स (ii) कोरी
(c) फिल्सेनमीर (iii) बोगाज
(d) सर्क (iv) हाईड्रो फ्रेक्चरिंग
कूट:
(a) (b) (c) (d)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (ii) (i) (iv) (iii)
(c) (iii) (i) (iv) (ii)
(d) (ii) (i) (iii) (iv)
उत्तर-(c) : सूची I सूची II लेपीज − बोगाज सिंकहोल्स − एवेन्स फिल्सेनमीर − हाइड्रोफेक्चरिंग सर्क − कोरी
40. नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं। एक को कथन (A) और दूसरे के कारण (R) से वर्गीकृत किया गया है। दिये गए
कूट में से अपना उत्तर चुनिये।
कथन (A) :
स्थलमंडल स्थैनोस्फियर जो उसके नीचे स्थित है दबाव की स्थिति में व्यवहार में अंतर के आधार पर विभेदित किया जाता है।
कारण (R) : स्थल मंडल कठोर है किन्तु स्थैनोस्फियर लचीले बहाव के लिये सक्षम है।
कूट:
(a) दोनों (A) तथा (R) सही है और (R) का सही स्पष्टीकरण (A) है।
(b) दोनों (A) तथा (R) सही है और (R) का सही स्पष्टीकरण (A) नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
उत्तर-(a) : स्थलमण्डल स्थैनोस्फियर जो इसके नीचे स्थित है दबाव की स्थित में व्यवहार में अन्तर के आधार पर विभेदित किया जाता है क्योंकि स्थल मण्डल कठोर है किन्तु स्थैनोस्फियर लचीला बहाव के लिए सक्षम है। पृथ्वी की आन्तरिक संरचना में 100 से 200 किमी. तक का भाग स्थैनोस्फियर कहलाता है। यह अर्द्धद्रवित अवस्था में है। P तथा S लहरों की गति यहाँ मन्द हो जाती है जिस कारण इसे ‘जोन ऑफ ली वेलोसिटी’ कहते हैं।
41. नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं। एक को कथन (A) और दूसरे के कारण (R) से वर्गीकृत किया गया है। दिये गए
कूट में से अपना उत्तर चुनिये।
कथन (A) :
अधिकांश परिवर्तन वादी भूगोलवेताओ के अति शक्तिशाली मार्कसवादी आधार है।
कारण (R) : परिवर्तन वादी भूगोल वेताओ ने भूगोल विषय को स्थापित करने से गहन पैठ बनाया है।
कूट:
(a) (A) तथा (R) दोनो सही है और (R) का सही स्पष्टीकरण (A) द्वारा मिलता है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही है और (R) का सही स्पष्टीकरण (A) नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
उत्तर-(b) 327 व्याख्या : परिवर्तनवादी भूगोलवेत्ता मार्क्स के सिद्धान्तों से सर्वाधिक प्रभावित थे उसी कारण इन्होंने अपने सिद्धान्त में मार्क्स के विचारों को स्थान दिया। इनके नवीन विचार ही भूगोल विषय में इनकी पैठ को मजबूत किया। लेकिन एक स्वतंत्र विषय बनने का आधार नहीं बन सके। इस तरह कथन एवं कारण दोनों सत्य है लेकिन कारण कथन का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
42. नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं। एक को कथन (A) और दूसरे के कारण (R) से वर्गीकृत किया गया है। दिये गए
कूट में से अपना उत्तर चुनिये।
कथन (A) :
समतापमंडल में ऊँचाई के अनुरूप तापमान में वृद्धि होती है।
कारण (R) : समतापमंडल की उष्मता मुख्यत: ओजोन अणुओं के द्वारा के सूर्य पराबैगनी रश्मि के विकरण के अवशोषण द्वारा होता है।
कूट:
(a) (A) तथा (R) दोनो सही है और (R) का सही स्पष्टीकरण (A) है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही है और (R) का सही स्पष्टीकरण (A) नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
उत्तर-(a) : समतापमण्डल में ऊंचाई के अनुरूप तापमान में वृद्धि होती है क्योंकि समतापमण्डल की उष्मता मुख्यत: ओजोन अणुओं के द्वारा सूर्य पराबैंगनी रश्मि के विकिरण के अवशोषण द्वारा होता है। समतापमण्डल क्षोभमण्डल के ऊपर 16 किमी. से 50 किमी. तक व्याप्त है। समतापमण्डल में ओजोन अणुओं के अविर्भाव के कारण ऊँचाई के साथ तापमान में वृद्धि पायी जाती है। समतापमण्डल में 16 किमी. से 35 किमी. तक ओजोन का सघनतम विसतार पाया जाता है।
43. निम्नलिखित मुख्य मृदा प्रकारों को उसके तहों में मोटाई के बढ़ते क्रम को व्यगस्थित करें।
(i) सौर्य (ii) जैविक
(iii) पवन (iv) सामुद्रिक उष्मता
कूट:
(a) (i) (iii) (iv) (ii)
(b) (i) (ii) (iii) (iv)
(c) (i) (iv) (ii) (iii)
(d) (i) (iii) (ii) (iv)
उत्तर-(a) : भारत के गैरपरम्परागत ऊर्जा संसाधनों का उनकी विभव (पोटेंशियल) के अनुसार सही क्रम हैसौर्य ↓पवन ↓सामुद्रिक उष्मता ↓जैविक
44. सूची- I और सूची- II को सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये कूटसे सही उत्तर चुनिये। सूची- I सूची- II
(भूगोलबेता) (सिद्धांत)
(a) विडाल डी लो ब्लाश (i) यूनिटी इन डाइवरसिटी
(b) जीन ब्रान्चेज (ii) सोशल डिटरमिनिस्म
(c) कार्ल रिटर (iii) टेरेस्ट्रियल होल
(d) फ्रेड रैट्जेल (iv) इन्टरऍक्शन
कूट:
(a) (b) (c) (d)
(a) (iii) (ii) (iv) (i)
(b) (iv) (ii) (i) (iii)
(c) (iii) (iv) (i) (ii)
(d) (ii) (i) (iii) (iv)
उत्तर-(b) :
भूगोलवेत्ता सिद्धांत
विडाल डि ला ब्लांश − इंटरैक्शन जोन ब्रन्स − सोशल डिटरमिनिज्म कार्ल रिटर − यूनिटी इन डाइवरसिटी फ्रेड रेटजेल − टेरेस्ट्रियल होल
45. निम्नलिखित समुद्री जलधाराओं में से प्रशांत महासागर की गल्फ जलधारा चुनिये।
(a) आयोशियो (b) क्यूरोशिवो
(c) अल्यूशियन (d) क्यूराइल
उत्तर-(b) : गल्फ स्ट्रीम तन्त्र के समरूप ही प्रशान्त महासागर में क्यूरोशिवो तन्त्र है। क्यूरोशिवो गर्म जल धारा है। यह ताइवान से रिक्यू द्वीपों तक प्रवाहित होती है यह धारा अटलाण्टिक की फ्लोरिडा धारा से समता रखती है 328 निम्नलिखित पैसेज को ध्यानपूर्वक पढ़े तथा नीचे दिये गये प्रश्नों के सही उत्तर बतायें− जलधारा‚ एक नियत ढाँचे तथा प्रति-खंडों सहित धरातल के एक सुस्पष्ठ जलमार्ग के अंतर्गत आबद्ध होती है‚ जो दोत से निकासमार्ग तक परिवर्तित होती है तथा जल-निकास प्रणाली के विकास के साथ-साथ अपना स्वरूप बदलती रहती है। कुछ स्पष्टता तथा सटीकता लाने हेतु‚ मुख्यतया सिविल इंजीनियरों के द्वारा एक विशिष्ट तथा एक विशिष्ट तथा कक्षिय सुस्पष्ट शब्दावली प्रस्तुत की गई है। किनारे से किनारे तक (जलमार्ग का सीमांत) मापी गई पानी की गहराई तथा चौड़ाई को निर्दिष्ट करना सदा संभव नहीं हो पाता‚ क्योंकि जब तक बाढ़-नियंत्रण‚ नौगम्यता या बिजली उत्पादन के लिए जलधारा का नियमन नहीं कर दिया जाता‚ तब तक प्रति-खंड एक सुस्पष्ट आयत नहीं बन पाता; अत: एक औसत गहराई का आम तौर पर उपयोग किया जाता है। इसका संबंध फार्म रेशियों के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। यह अभिव्यक्ति गहराई। चौड़ाई से (1:50) के रूप में व्युत्पन्न है जहाँ चौड़ाई 50 मीटर (150 फीट)‚ औसत गहराई 1 मीटर (3 फीट) होती है। कभी-कभी किनारे सुस्पष्ट तथा सुपरिभाषित होते हैं। अन्य स्थानों पर रेत तथा बजरी की असमान परतें जल-तट से शनै: शनै: खड़ी ढाल के रूप में हो सकती है। जो स्वयं भी उâँची-नीची होती है। जलसिक्र परिधि पर- जलधारा के संपर्क में आनेवाले खंड की एक किनारे से दूसरे किनारे तक की लंबाई तथा प्रति-खंडीय क्षेत्र या किसी बिंदु-विशेष पर जल के प्रति-खंड‚ जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है‚ को द्योतित करता है। जलीय त्रिज्या एकअन्य संबंध है जो इसलिए महत्वपूर्ण है कि वह जल तथा जलमार्ग के बीच के घर्षण की मात्रा के परिप्रेक्ष्य में पथप्रदर्शक का काम करता है और इसलिए ऊर्जा-ह्रास का सूचक है। जलीय त्रिज्या जलसिक्र परिधि द्वारा विभाजित प्रति-खंडीय क्षेत्र है। एज न्यून जलीय-त्रिज्या‚ जहाँ एक छिछली जलधारा एक अत्यधिक बड़े जलभाग को आवेष्टित करती‚ ऊर्जा के परिप्रेक्ष्य में अत्यल्प कार्यक्षम होती है। किसी नदी का जलाधार प्रवाह जल-मात्रा का वह भाग है जो धरातलीय जल के अंतर्प्रवाह से आता है; यह वर्ष-पर्यन्त सामान्य जल-स्तर के साथ घटता-बढ़ता रहता है‚ परन्तु संपूर्ण जलमार्ग को आवेष्टित नहीं करता। वर्षा होने या बर्फ पिघलने के कारण जब स्थलीय का जमीनी बहिप्रवाह बढ़ जाता है तब गहराई भी निश्चित रूप से बढ़ेगी। जब यह सम्पूर्ण जलमार्ग को आवेष्टित कर लेगा‚ यह लबालब भरे किनारों की अवस्था में होगा जिसके बहिप्रवाह होने पर यह बाढ़ (अथवा किनारों से बाहर) की अवस्था में होगा जब यह किनारों से बाहर छलकने लगता है।
46. किन परिस्थितियों में नदी के प्रवाह मार्ग की आकृति ज्यामितीय होगी।
(a) जब नदी बाढ़ के समय नया मार्ग बनाती है।
(b) नदी की पुन: नवीनीकरण की अवस्था
(c) जब नदी जल का उपयोग आर्थिक कार्यों के लिये उपयोग होता है।
(d) जब नदी दोनो किनारों तक भरी होती है।
उत्तर-(a) : जब नदी बाढ़ के समय नया मार्ग बनाती है तब नदी के प्रवाह मार्ग की आवृत्ति ज्यामितीय हो जाती है। नदी बाढ़ के समय मियाण्डर का निर्माण करती है।
47. नदी मार्ग की गहराई एवं चौड़ाई का अनुपात निर्धारित करता है:
(a) नदी मार्ग की आकृति (b) नदी मार्ग का आकार
(c) नदी मार्ग की संरचना (d) उपर्युक्त सभी
उत्तर-(d) : नदी मार्ग की गहराई एवं चौड़ाई का अनुपात नदी मार्ग की आकृति‚ नदी मार्ग का आकार‚ नदी मार्ग की संरचना आदि द्वारा निर्धारित करता है।
48. नदी की आद्र परिमिति का मापन किस प्रकार होता है?
(a) नदी का क्रास सेक्शन एवं चौड़ाई
(b) जलीय अर्धव्यास एवं डिस्चार्ज
(c) डिस्चार्ज एवं वेग
(d) क्रास सेक्शनल क्षेत्र एवं जलीय अर्धव्यास
उत्तर-(a) : नदी की आद्र परिमिति का मापन क्रास सेक्शन एवं चौड़ाई के आधार पर होता है।
49. आधार बहाव किस प्रकार परिवर्तित होता है।
(a) जब नदी दोनों किनारे तक भरी होती है
(b) जब सतही प्रवाह में वृद्धि होती है
(c) जब बाढ़ आती है
(d) जल तल में परिवर्तन होता है
उत्तर-(c) : बाढ़ के समय नदी का आधार बहाव परिवर्तित हो जाता है।
50. जल मार्ग प्रवाह प्रभावी होती है:
(a) जब नदी की गहराई छिछली होती है
(b) जब निस्सरण सामान्य होता है
(c) जब गति अधिक होती है
(d) जब वेग एवं डिस्चार्ज अधिक होता है
उत्तर-(a) : जब नदी की गहराई छिछली होती है तब जल मार्ग प्रवाह प्रभावी होता है। 329

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