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GEOGRAPHY UGC NTA NET JRF PREVIOUS PAPERS IN HINDIयूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ जून- 2007 भूगोल व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल 0034.

GEOGRAPHY UGC NTA NET JRF PREVIOUS PAPERS IN HINDIयूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ जून- 2007 भूगोल व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल

1. ह्वेलबैक बालुकास्तूप विशिष्ट लक्षण है।
(a) थार मरूस्थल के
(b) गोबी मरूस्थल के
(c) आस्ट्रेलियाई मरूस्थल के
(d) सहारा के मरूस्थल के
उत्तर(a) : ह्वेलबैक बालुका स्तूप थार मरूस्थल का विशिष्ट लक्षण है। मोटी रेत से निर्मित स्तूप को ह्वेलवैक स्तूप तथा उसके वृहद रूप को द्रास कहते है। राजस्थान के थार के रेगिस्तान के पश्चिमी भाग में लम्बे-लम्बे पवनानुवर्ती या अनुदैर्घ्य स्तूप अधिक संख्या में मिलते है जिनकी ऊँचाई 5-95 मीटर तक होती है।
2. नीचे दो वक्तव्य दिये गये हैं‚ एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है। दिये गये संकेतों से अपना उत्तर चुनिये।
कथन (A) :
शुष्क एवं अर्धशुष्क प्रदेशों में जलसंघातपूर
(शीटफ्लड) एक महत्वपूर्ण स्थलरूप निर्माणक प्रक्रम है।
कारण (R) : शुष्क एवं अर्धशुष्क प्रदेशों में उच्च तीव्रतावाली अल्पकालिक वर्षा होती है।
(a) (A) तथा (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(c) (A) तथा (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(d) (A) गलत है। किन्तु (R) सही है
उत्तर(a) : शुष्क एवं अर्धशुष्क क्षेत्रों में विविध प्रकार के स्थलाकृति का निर्माण जल बहाव (शीट फ्लड) के द्वारा होता है। चूंकि इस क्षेत्र में अल्पकालिक एवं तीव्र वर्षा होती है जो जलबहाव की गति को तीव्र कर देती है जिससे मृदा के जमाव एवं कटाव के कारण नवीन स्थलाकृति का निर्माण होता है। इस तरह कारण एवं कथन दोनों सत्य है और कारण कथन की सही व्याख्या भी कर रहा है।
3. नीचे दो वक्तव्य दिये गये हैं‚ एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है। दिये गये संकेतों से अपना उत्तर चुनिये।
कथन (A) :
हिमनदीय द्रोणीका का तल असाधारण रूप से सपाट होता है।
कारण (R) : हिमनदीय द्रोणीका में सपाट तल समरूप हिमनदीय अपरदन द्वारा निर्मित होता है।
(a) (A) तथा (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है। किन्तु (R) गलत है
उत्तर(c) : हिमनदीय द्रोणिका का तल असाधारण रूप से सपाट होता है जो ‘U’ आकार की घाटी के समान दिखता है। यद्यपि इस सपाट तल का निर्माण अपरदनात्मक क्रिया द्वारा नहीं होता है। इस तरह कथन सत्य है जबकि कारण असत्य है।
4. सूची -I को सूची -II से सुमेलित कीजिए और दिये गये संकेतों से सही उत्तर चुनिये:
लेखक पुस्तक
a थार्नबरी i रिवर्स ऐंड रिवर टेरेसेटज b ड्यूरी ii प्रिन्सिपल्स ऑफ ज्योमार्फालॉजि c स्टियर्स iii फिजिकल ज्योग्राफ d स्ट्रालर iv दि अन्स्टेबल अर्थ संकेत :
(a) (b) (c) (d)
(a) (ii) (i) (iv) (iii)
(b) (ii) (iv) (i) (iii)
(c) (ii) (i) (iii) (iv)
(d) (ii) (iii) (i) (iv)
उत्तर(a) : लेखक पुस्तक थार्नबरी प्रिसिपल्स ऑफ जियोमार्फीलॉजी ड्यूरी रिवर्स एवं रिवर टेरेसेटज स्टियर्स द अनेस्टेबल अर्थ स्ट्रालर फिजिकल जियोग्राफी
5. भू-आकृतिविज्ञान में गतिक संतुलन की अवधारणा का प्रतिपादन किसने किया?
(a) डेविस (b) किंग
(c) हैक (d) क्रिकमे
उत्तर(c) : भू-आकृति विज्ञान में गतिक सन्तुलन की अवधारणा का प्रतिपादन जे0टी0 हैक ने किया। हैक के अनुसार अपरदनात्मक स्थलाकृति की व्याख्या गतिक सन्तुलन के नियमों पर की जाती है। हैक का सिद्धान्त विवृत तन्त्र की संकल्पना पर आधारित है इसके अनुसार जब तक विवृत तन्त्र में उâर्जा स्थिर रहती है‚ तब तक स्थलरूप भी स्थित रहते है। यद्यपि अपरदन द्वारा स्थलखण्ड में अवनयन होता रहता है।
6. धरातलीय ताप का भूमण्डलीय प्रतिरूप सामान्यत:
नियन्त्रित होता है:
(a) अक्षांश‚ देशान्तर तथा ऊँचाई द्वारा
(b) अक्षांश‚ देशांतर तथा महाद्वीप-महासागर विषमता
(c) महाद्वीप-महासागर विषमता‚ देशान्तर तथा ऊँचाई
(d) महाद्वीप-महासागर विषमता‚ अ्क्षांश तथा ऊँचाई
उत्तर(d) : धरातलीय ताप का भूमण्डलीय प्रतिरूप सामान्यत:
महाद्वीप‚ महासागर विषमता (जिन भागों में महाद्वीपीय भाग अधिक पाया जाता है वहाँ तापमान ज्यादा हो जायेगा क्योंकि स्थल की विशिष्ट उâष्मा सामर्थ्य कम होती है। जबकि जिन महासागरीय भागों की विशिष्ट उâष्मा सामर्थ्य अधिक होने की कारण कम तापमान पाया जाता है।) अक्षांश (विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर ताप क्रमश: कम होता जाता है।) ऊँचाई‚
(समुद्र तट से दूरी समुद्र के किनारे वाले स्थलीय नाम का तापमान बहुत अधिक नहीं होता है।) प्रचलित पवनें तट के समानान्तर फैली श्रेणियों और समुद्री धाराओं द्वारा नियन्त्रित होती है।
7. थार्नथ्वेट द्वारा विश्व के जलवायु-वर्गीकरण में प्रमुख मानदण्ड है:
(i) वर्षा की प्रभावशीलता
(ii) तापीय दक्षता
(iii) सम्भाव्य वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन
(iv) विकिरण दक्षता नीचे दिये गये संकेतों से अपना उत्तर चुनिये:
संकेत:
(a) (i), (ii) तथा (iv)
(b) (i), (ii) तथा (iii)
(c) (i), (iii) तथा (iv)
(d) (ii), (iii) तथा (iv)
उत्तर(b) : थार्नथ्वेट ने सर्वप्रथम अपना वर्गीकरण 1931 में प्रस्तुत किया। पुन: 1948 में संशोधित वर्गीकरण प्रस्तुत किया। कोपेन की भांति थार्नथ्वेट ने भी यह स्वीकार किया कि वनस्पति जलवायु की सूचक होती है तथा वनस्पति पर वर्षा की मात्रा तथा तापमान का पर्याप्त प्रभाव होता है। इसी के साथ उन्होंने वाष्पीकरण को भी ध्यान में रखा। इसी आधार पर उन्होंने वर्षा की प्रभावशीलता तापीय दक्षता तथा सम्भाव्य वाष्पन वाष्पोत्सर्जन को अपने जलवायु प्रदेश के सीमा निर्धारण में महत्व प्रदान किया।
8. पृथ्वी का अनुमानित औसत एल्बिडो है:
(a) 32 प्रतिशत (b) 40 प्रतिशत
(c) 21 प्रतिशत (d) 50 प्रतिशत
उत्तर(*) : सफेद तथा चिकने पदार्थों का एल्बिडो सर्वाधिक होता है। इसी कारण बर्फ तथा बादल का एल्बिडो सर्वाधिक होता है। किसी तल द्वारा परावर्तित विकिरण तथा उस तल द्वारा कुल प्राप्त की गयी विकिरण के अनुपात को सम्बन्धित तल का एल्बिडो कहते है। पृथ्वी का औसत एल्विडो 30 प्रतिशत है। यद्यपि इसकी मात्रा भूमध्य रेखीय क्षेत्रों की अपेक्षा ध्रुवीय क्षेत्रों में अधिक है। इस तरह कोई भी विकल्प सही सुमेलित नहीं है।
9. प्रत्यनुवर्ती सरिता सामान्यतया प्रवाहित होती है:
(a) अनुवर्ती सरिता के अनुरूप
(b) अनुवर्ती सरिता के विपरीत
(c) अनुवर्ती सरिता के समकोण पर
(d) अनुवर्ती सरिता के विकर्ण
उत्तर(b) : प्रधान अनुवर्ती सरिता के प्रवाह दिशा के विपरीत दिशा में प्रवाहित होने वाली सरिता को प्रतिअनुवर्ती कहा जाता है। वास्तव में प्रतिअनुवर्ती की अनुवर्ती सरिता ही होती है क्योंकि वह भी जल के अनुरूप ही प्रवाहित होती है। प्रतिअनुवर्ती परवर्ती से समकोण पर मिलती है। उदाहरण के लिये शिवालिक श्रेणियों से निकलकर उत्तर दिशा में प्रवाहित होने वाली सरिताएँ प्रति अनुवर्ती है‚ क्योंकि ये दक्षिण दिशा में प्रवाहित होने वाली प्रधान अनुवर्ती गंगा तथा यमुना की सहायक पूर्व पश्चिम दिशा में प्रवाहित होने वाली परवर्ती नदियों से समकोण पर मिलती है। प्रधान अनुवर्ती सरिता की प्रवाह दिशा के अनुरूप दिशा में प्रवाहित होने वाली सरिताओं को नवानुवर्ती कहा जाता है।
10. भूआकृतिविज्ञान में एकरूपतावाद के सिद्धांत के प्रथम पोषक कौन थे?
(a) डेविस (b) प्लेफेयर
(c) गिल्बर्ट (d) हट्टन
उत्तर(d) : भू-आकृति विज्ञान में एकरूपतावाद के सिद्धान्त के पोषक जेम्स हट्टन थे। जेम्स हट्टन ने बताया कि ‘‘भूगर्भिक प्रक्रम भूगर्भिक इतिहास के प्रत्येक काल में समान रूप से सक्रिय है। इसी आधार पर उन्होंने प्रतिपादित किया कि वर्तमान भूत की कुन्जी है।
11. भारत के निम्नलिखित इस्पात संयंत्रों में किस संयंत्र की वेबर द्वारा प्रतिपादित आदर्श स्थानिक त्रिभुज में निम्नतम स्थानीकरण लागत है?
(a) बोकारो (b) भिलाई
(c) राउरकेला (d) दुर्गापुर
उत्तर(a) : जब दो कच्चे माल स्थानिक तथा भार हासमान पदार्थ हो तो उद्योग की अवस्थिति की समस्या जटिल हो जाती है। इसके समाधान के लिये वेबर ने स्थानिक त्रिभुज की रचना की। बोकारो इस्पात संयंत्र की वेबर द्वारा प्रतिपादित आदर्श स्थानिक त्रिभुज में निम्नतम स्थानीयकरण लागत है।
12. गौडों का बृहद् संकेन्द्रण है:
(a) कोरापुट प्रदेश (b) अरावली प्रदेश
(c) छोटा नागपुर प्रदेश (d) बस्तर प्रदेश
उत्तर(d) : गौडों का वृहद संकेन्द्रण छत्तीसगढ़ के बस्तर प्रदेश में पाया जाता है इसके साथ ही गौंड जनजाति मध्यप्रदेश‚ आन्ध्र प्रदेश के पठारी क्षेत्र दोनों में रहते है। बस्तर पठार में इनके प्रमुख वर्ग मारिया‚ भटरा‚ गडाबा‚ हालबा तथा ठाकर है।
13. भारत में स्थलाकृति मानचित्रों का निर्माण किया जाता है?
(a) एनÊ एÊ टीÊ एमÊ ओÊ
(b) भारत का सर्वेक्षण विभाग
(c) एनÊ आरÊ एसÊ एÊ
(d) डीÊ आरÊ डीÊ ओÊ
उत्तर(a) : भारत में स्थलाकृति मानचित्रों का निर्माण एन0ए0टी0एम0ओ0 (National Atlas Thematic Mapping Organisation) द्वारा किया जाता है। यह संगठन कोलकाता में स्थित है।
14. निम्नलिखित में से केन्द्रीय प्रवृत्ति का सामान्यत:
उपयोग में आने वाला मापन कौन सा है?
(a) माध्य (b) माध्यिका
(c) बहुलक (d) हरात्मक माध्य
उत्तर(b) : केन्द्रीय प्रवृत्ति का सामान्यत: उपयोग में आने वाला मापक माध्यिका है। किसी समंक श्रेणी के मूल्यों को आरोही तथा अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने के पश्चात जो मूल्य श्रेणी के मध्य में स्थित होता है‚ उसे उस श्रेणी का माध्यिका मूल्य कहते है।
15. ‘ज्यॉग्राफिका’ शीर्षक से कई ग्रन्थ लिखने वाले लेखक की पहचान कीजिए।
(a) इरैटोस्थनीज (b) टॉलेमी
(c) स्ट्रैबो (d) हेरोडोटस
उत्तर(c) : स्ट्रैबो ने पृथ्वी को 360 अंशों में विभक्त किया तथा प्रत्येक अंग की पारस्परिक दूरी 700 स्टेडिया निर्धारित की स्ट्रैबो ने पृथ्वी को कुल 5 कटिबन्धों विषुवतरेखीय कटिबन्ध विषुवत रेखा के उत्तर-दक्षिण दो उष्ण कटिबन्ध और दो ध्रुवीय कटिबन्धों में बाँटा।
16. भारत में हरित क्रान्ति के सम्बन्ध में कौन सा कथन सही नहीं है?
(a) उन्नत बीजों‚ सघन सिंचाई तथा रासायनिक उर्वरकों का उपयोग इसकी विशेषता थी।
(b) यह पंजाब‚ हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहँू के उत्पादन में वृद्धि से प्रारम्भ हुई।
(c) इसके परिणाम स्वरूप ग्रामीण आय में विषमता बढ़ी।
(d) इसके कारण मोटे अनाजों के उत्पादन में प्रचुर वृद्धि हुई।
उत्तर(d) : हरित क्रांति के कारण मोटे अनाजों के उत्पादन में प्रचुर वृद्धि नहीं हुयी है। बल्कि गेहूँ‚ चावल जैसे अनाजों के उत्पादन में प्रचुर वृद्धि हुयी।
17. जैसे फसल पर अनेक कारणों के दुष्प्रभाव की सम्भावना होती है‚ जिनमें सबसे महत्वपूर्ण कारण है:
(a) अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यों में ह्नास
(b) मारक कीटों एवं बीमारियों का आक्रमण
(c) व्यापार में तटकर अवरोध
(d) स्थानापन्नों (विकल्पों) का विकास
उत्तर(d) : फसल पर अनेक कारणों के दुष्प्रभाव की सम्भावना होती है जिनसे सबसे महत्वपूर्ण कारण है-स्थानापन्नों का विकास । जब बाजार में दूसरी स्थानापन्न वस्तुयें सस्ते दामों पर मिलने लगती है तो मुख्य फसल की मांग कम हो जाती है जैसे काफी के महंगे होने पर तथा चाय के सस्ते होने पर व्यक्ति काफी का स्थानापन्न चाय को प्राथमिकता देने लगेगा।
18. टॉफे के परिवहन मॉडल में कई विकास की अवस्थायें है। इन अवस्थाओं की संख्या है:
(a) चार (b) दो
(c) छ: (d) आठ
उत्तर(a) : टॉफे के परिवहन मॉडल में विकास की चार अवस्थाएं बतायी गयी हैं।
19. मिट्टी‚ जल तथा ऊष्मा की उपलब्धता के क्रम में निम्नलिखित में से जीवोम की कौन सी व्यवस्था सही है?
(a) सवाना‚ घासस्थल‚ वन‚ टुन्ड्रा और मरुस्थल
(b) सवाना‚ वन‚ घासस्थल‚ टुन्ड्रा और मरुस्थल
(c) टुन्ड्रा‚ वन‚ घासस्थल‚ सवाना और मरुस्थल
(d) वन‚ सवाना‚ घासस्थल‚ मरुस्थल और टुन्ड्रा
उत्तर(d) : वन‚ सवाना‚ घासस्थल‚ मरुस्थल तथा टुण्ड्रा में क्रमश: मिट्टी तथा जल की उपलब्धता कम होती जाती है। वन क्षेत्र में वृक्षों की अधिकता के कारण मृदा का बहाव कम एवं वर्षा अधिक होती है सवाना वन उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में होने के कारण जल एवं उष्मा की मात्रा सर्वाधिक होती है और यह क्रमश: ध्रुवीय क्षेत्रों में कम होती है।
20. कच्छ वनस्पति (मैन्ग्रोव) के वन मुख्य रूप से निम्नलिखित किस नदी के डेल्टा के समुद्र में पाये जाते है?
(a) महानदी (b) कृष्णा
(c) कावेरी (d) गंगा
उत्तर(c) : कच्छ वनस्पति के वन मुख्य रूप से कावेरी नदी के डेल्टा के समुद्र में पाये जाते हैं। तात्पर्य कच्छ में जिस प्रकार की वनस्पतियाँ पायी जाती हैं उसी प्रकार की वनस्पतियाँ कावेरी के डेल्टा में भी पायी जाती है।
21. निम्नलिखित में से कौन सा भूमण्डल का ‘कार्बन कुंड’ कहलाता है?
(a) प्रशान्त महासागर
(b) विषुवतरेखीय वर्षा के वन
(c) अंटार्कटिक
(d) सवाना
उत्तर(b) : विषुवत रेखीय वर्षा के वन भूमण्डल के कार्बन कुण्ड कहलाते हैं इन क्षेत्रों में वनों की अधिक संख्या होने के कारण ये बड़ी मात्रा में कार्बन डाई आक्साइड को श्वसन क्रिया के द्वारा अपने अन्दर लिये रहते हैं तथा O2का बड़ी मात्रा में उत्पादन करते हैं।
22. गंभीर समुद्री नितल में निम्नलिखित में से कौन से निक्षेप मिलते है?
(a) पंक और बालू
(b) बालू और बजरी
(c) पंक और बजरी
(d) पंक और लाल मिट्टी
उत्तर(d) : गम्भीर समुद्री नितल में पंक और लाल पंक के निक्षेप पायी जाती है पंक बहुत ही महीन कणों वाले निक्षेप होते है। बजरी तथा रेत की मात्रा पंक की धरातत्व पर विघटन के कारण उत्पन्न होते है जो नदियों तथा वायु द्वारा सागरीय नितल पर जमा किये जाते है। जल पंक में लोहे के ऑक्साइड की अधिकता है तथा इसमें चूना 32 प्रतिशत तक पाया जाता है। यह पलों‚ सागर‚ ब्राजील के तट तथा अटलांटिक महासागर के बेसिन पर इसका सर्वाधिक विस्तारहै। लाल पंक के अलावा पंक के दो प्रमुख भाग और हैनीला पंक तथा हरा पंक ।
23. निम्नलिखित में से कौन सबसे महत्वपूर्ण वायु प्रदूषक है?
(a) कार्बन डाईऑक्साइड
(b) सल्फर डाईऑक्साइड
(c) हाइड्रोकार्बन
(d) एसÊ पीÊ एमÊ
उत्तर(a) : कार्बन डाईऑक्साइड सबसे महत्वपूर्ण वायु प्रदूषक है वायुमण्डल में कार्बन डाईऑक्साइड की अत्यधिक मात्रा होने पर भूमण्डलीय उष्मन की प्रक्रिया प्रभावी हो जाती है जिस कारण समुद्री जल स्तर में धनात्मक वृद्धि प्रवाल विरंजन‚ त्वचा कैंसर जैसे अनेक दुष्परिणाम हमारे सामने आते हैं।
24. कृषि का मशीनीकरण किन देशों के लिए सबसे उपर्युक्त है?
(a) उच्च जनसंख्या घनत्व वाले देश
(b) न्यून जनसंख्या घनत्व वाले देश
(c) विस्तृत कृषि भूमि वाले देश
(d) उच्च जीवन-स्तर वाले देश
उत्तर(c) : कृषि का मशीनीकरण विस्तृत कृषि भूमि वाले देशों के लिये सबसे उपयुक्त है।
25. निम्नलिखित में से किस फसल की अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारी मात्रा प्रवेश करती है?
(a) चावल (b) गेहँू
(c) मक्का (d) जौ
उत्तर(b) : गेंहूँ की फसल अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारी मात्रा में प्रवेश करती है। गेंहूँ के प्रमुख उत्पादक देश हैं- चीन‚ यू.एस.ए.‚ रूस‚ भारत‚ कनाडा आदि।
26. ‘‘सोसियो-इकोनामिक मॉडल्स’’ शीर्षक पुस्तक के सम्पादक थे:
(a) स्पेट तथा लियरमांथ (b) हर्बर्ट तथा स्मिथ
(c) जॉन्सटन तथा हर्बर्ट (d) चोर्ले तथा हैगेट
उत्तर(d) : सोसियो इकोनामिक मॉडल्स शीर्षक पुस्तक के सम्पादक चोर्ले तथा हैगेट हैं। ये मात्रात्मक क्रान्ति के प्रवर्तक है। इन्होंने भूगोल में मॉडल तथा तन्त्र विश्लेषण के प्रयोग को विकसित किया।
27. निम्नलिखित में से किस भूगोलवेत्ता ने भारत में अनेक वर्ष व्यतीत किये और भारत पर एक ग्रन्थ लिखा?
(a) इब्न-बतूता (b) अल-इदरीसी
(c) इब्न-खालदून (d) अल-बरूनी
उत्तर(d) : अलबरूनी ने भारत में कई वर्ष व्यतीत किये और भारत पर एक ग्रन्थ लिखा। अलबरूनी के प्रमुख ग्रन्थ इस प्रकार है –
किताब अल हिन्द अल कानून अल नसूदी दी वेस्टीज ऑफ द पास्ट तारीखुल हिन्द
28. किस ने राज्य का जैव सिद्धांत प्रतिपादित किया?
(a) हम्बोल्ट (b) रिचथोफेन
(c) रेटजेल (d) रिटर
उत्तर(c) : राज्य का जैव सिद्धान्त रेटजेल ने प्रस्तुत किया। उन्होंने राज्य की तुलना एक जीव से की। इनका कथन है कि ‘‘राज्य का या तो सामान्य जीव की तरह विकास करना चाहिए या उसे समाप्त हो जाना चाहिए‚ वह कभी भी स्थिर नहीं रह सकता। वास्तव में रेटजेल सामाजिक डार्विनवाद की विचारधारा के समर्थक थे।
29. द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व सबसे पहले ज्योपोलिटिक शब्द का प्रयोग करने वाला विद्वान कौन था?
(a) मैकिन्डर (b) जेलान
(c) हाउशोफर (d) स्पाइकमैन
उत्तर(b) : द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व जेलॉन महोदय ने सबसे पहले ‘ज्योपोलिटिक शब्द का प्रयोग करने वाला विद्वान था।
30. अरूणाचल प्रदेश का पूर्व नाम था:
(a) पश्चिमोत्तरी सीमान्त प्रदेश
(b) पूर्वोत्तरी सीमान्त प्रदेश
(c) मध्यवर्ती (बफर) कटिबन्ध
(d) सीमान्त
उत्तर(b) : पूर्वोत्तरी सीमान्त प्रदेश अरुणाचल प्रदेश का पूर्व नाम है। ज्ञातव्य है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक उत्तर-पूर्वी राज्य है। अरुणाचल का अर्थ हिन्दी में ‘उगते सूर्य का पर्वत’ है।
31. निम्नलिखित में से कौन सा जनजातीय संयोजन पूर्वोत्तर के एक राज्य में सीमित है?
(a) खासी – नागा
(b) गारो – खासी
(c) नागा – मिजो
(d) खासी – मिजो
उत्तर(b) : खासी जनजातीय संयोजन मेघालय राज्य में सीमित है। इन गारो जनजातीय समूह में परिवार की छोटी पुत्री का स्थान महत्वपूर्ण होताहै। वही परिवार की सम्पत्ति की उत्तराधिकारी होती है।
32. निम्नलिखित में से कौन सा सूचक सामाजिक कल्याण के सन्दर्भ में प्रासंगिक नहीं है?
(a) आवास का प्रावधान
(b) स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहँुच में सुधार
(c) शिक्षा-सुविधाओं का प्रावधान
(d) विकासशील देशों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का प्रवेश
उत्तर(d) : विकसशील देशों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का प्रवेश सामाजिक कल्याण के सन्दर्भ में प्रासंगिक नहीं है जबकि आवास का प्रावधान‚ स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच में सुधार तथा शिक्षा सुविधाओं का प्रावधान सामाजिक कल्याण के सन्दर्भ में प्रासंगिक है।
33. सांस्कृतिक स्थल (हार्थ) की अवधारणा का सर्वप्रथम प्रयोग किया:
(a) भूगोल के बर्कले सम्प्रदाय ने
(b) भूगोल के फ्रान्सीसी सम्प्रदाय ने
(c) भूगोल के जर्मन सम्प्रदाय ने
(d) भूगोल के शिकागो सम्प्रदाय ने
उत्तर(a) : सांस्कृतिक स्थल (हार्थ) की अवधारणा का सर्वप्रथम प्रयोग भूगोल के वर्केले सम्प्रदाय ने किया था।
34. उत्तरी भारत के मैदान में शीतकालीन वर्षा लाने वाले चक्रवात आते हैं:
(a) अरब सागर से (b) बंगाल की खाड़ी से
(c) भूमध्य सागर से (d) प्रशान्त महासागर से
उत्तर(c) : उत्तरी भारत के मैदान में शीतकालीन वर्षा लाने वाले चक्रवात भूमध्य सागर से आते है। भारत में उत्तरी मैदानों में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा पश्चिमी विक्षोम द्वारा होती है। ये अतिरिक्त उष्ण कटिबन्धीय गर्त होते है। इनकी उत्पत्ति मुख्यत: भूमध्य सागर तथा अटलांटिक महासागर में होती है। जहाँ से ये आर्द्रता ग्रहण करते है। उत्तरी भारत में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली वर्षा गेहूं की खेती के लिये अत्यधिक लाभकारी होती है।
35. सूची -I को सूची -II से सुमेलित कीजिए और दिये गये संकेतों से सही उत्तर चुनिये:
सूची -I सूची -II
a पेट्रोलियम i अमलाई b कागज का कारखाना ii झारखण्ड c अभ्रक iii उड़ीसा d हीराकुण्ड परियोजना iv खम्भात बेसिन संकेत :
(a) (b) (c) (d)
(a) (iv) (i) (ii) (iii)
(b) (iii) (ii) (i) (iv)
(c) (ii) (iii) (iv) (i)
(d) (i) (iv) (iii) (ii)
उत्तर(a) : सूची का सुमेलन इस प्रकार हैसूची-
प्रथम सूची-द्वितीय
पेट्रोलियम खम्भात बेसिन कागज का कारखाना अमलाई अभ्रक झारखण्ड हीराकुण्ड परियोजना ओडिशा
36. भारत का सर्वप्रमुख केसर उत्पादक राज्य है:
(a) हिमाचल प्रदेश (b) अरूणाचल प्रदेश
(c) जम्मू और कश्मीर (d) नागालैण्ड
उत्तर(c) : भारत का सर्वप्रमुख केसर उत्पादक राज्य जम्मू और कश्मीर है जम्मू कश्मीर राज्य में केसर के उत्पादन हेतु करेवा मिट्टी पायी जाती है।
37. जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत के प्रतिपादक थे:
(a) वारेने थाम्पसन
(b) सीÊपीÊ ब्लेकर
(c) फ्रैंक नोटेस्टाइन
(d) एÊ जेÊ कोल और ईÊ एमÊ हूवर
उत्तर(c) : जनांकिकीय संक्रमण सिद्धान्त का प्रतिपादन नोटेस्टीन ने सन् 1945 में किया था। नोटेस्टीन ने पश्चिमी यूरोपीय देशों के अनुभवों का प्रयोग करके जनसंख्या के कालिक वृद्धि प्रतिरूप का सामान्यीकरण जन्मदर और मृत्युदर में होने वाले कालानुक्रमीय परिवर्तनों के आधार पर किया।
38. जनसंख्या घनत्व के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सही क्रम है?
(a) अफ्रीका‚ एशिया‚ अमेरिका‚ यूरोप
(b) अमेरिका‚ एशिया‚ अफ्रीका‚ यूरोप
(c) यूरोप‚ एशिया‚ अमेरिका‚ अफ्रीका
(d) एशिया‚ यूरोप‚ अफ्रीका‚ अमेरिका
उत्तर(c) : जनसंख्या घनत्व के सम्बन्ध में महाद्वीपों का सही क्रम इस प्रकार हैयूरोप-
एशिया-अमेरिका-अफ्रीका
39. निम्नलिखित में से कौन विकास में प्रादेशिक असन्तुलन का प्रत्यक्ष प्रमाण है?
(a) कुल भौगोलिक क्षेत्र में कृषि भूमि का प्रतिशत
(b) प्रति व्यक्ति उपभोक्ता व्यय
(c) सड़कों तक पहँुच
(d) साक्षरता
उत्तर(a) : कुल भौगोलिक क्षेत्र में कृषि भूमि का प्रतिशत प्रादेशिक असन्तुलन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रादेशिक असन्तुलन का मापन एक कठिन कार्य है क्योंकि यह कई कारकों पर निर्भर करता है इसके मापन के लिये कसौटी मापक तथा तकनीकी का प्रयोग किया जाता है।
40. निम्नलिखित में से कौन विशेषता क्षेत्रीय आंकड़ा आधारित नहीं है?
(a) स्थिति (b) रेखाएँ
(c) बहुभुज (d) त्रिभुज
उत्तर(d) : उपरोक्त प्रश्न में त्रिभुज विशेषता क्षेत्रीय आँकड़ा आधारित नहीं है।
41. निम्नलिखित जोड़ों में कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?
(a) मलाजखंड – कोयला
(b) बैलाडीला – लौह अयस्क
(c) कुद्रेमुख – लौह अयस्क
(d) निवेली – लिग्नाइट
उत्तर(a) : मलाजखण्ड‚ बालाघाट‚ मध्य प्रदेश का एक प्रमुख ताबाँ उत्पादक क्षेत्र है। बैलाडीला की खान छत्तीसगढ़ में‚ कुद्रेमुख कनार्टक में तथा निवेली तमिलनाडु में स्थित है।
42. भारत में आद्य महाकल्पीय एवं कड़प्पा भूवैज्ञानिक क्रमों पर विकसित प्रमुख मृदा प्रकार है:
(a) काली मिट्टी
(b) जलोढ़ मिट्टी
(c) लाल मिट्टी
(d) अन्त:स्तरी मिट्टियाँ
उत्तर(c) : भारत में आद्य महाकल्पीय एवं कडप्पा भू-वैज्ञानिक क्रमों पर विकसित प्रमुख मृदा लाल मिट्टी है। लाल मृदा का विस्तार दक्षिण में तमिलनाडु से उत्तर में बुन्देलखण्ड तक‚ पश्चिम में कच्छ तथा पूर्व में राजमहल पहाड़ियों तक पाया जाता है। लाल मृदा का लाल रंग फेरिक आक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है। इस मृदा में चूना कंकड तथा कार्बोनेट नहीं पाये जाते है।
43. सियाचिन हिमनद स्थित है?
(a) बृहत हिमालय में
(b) ट्रांस हिमालय में (हिमालय पार)
(c) लघु हिमालय में
(d) उप हिमालय में
उत्तर(b) : सियाचिन हिमनद ट्रांस हिमालय में स्थित है। यह पूर्वी कराकोरम रेंज में भारत-पाक नियन्त्रण रेखा के पास स्थित है। यह कराकोरम के पाँच बड़े हिमनदों में सबसे बड़ा हिमनद है। सियाचिन के अलावा कराकोरम के प्रमुख ग्लेशियर निम्न है – बान्टोरा‚ बटूरा तथा हिस्पास।
44. विश्व में हरी चाय का सर्वप्रमुख उत्पादक देश है:
(a) चीन (b) श्रीलंका
(c) केन्या (d) भारत
उत्तर(a) : विश्व में हरी चाय के सर्वप्रमुख उत्पादक देशों का क्रम इस प्रकार है – चीन – जापान – भारत
45. किसने मुख्य रूप से मानव को केन्द्र में रखते हुए पर्यावरण की अवधारणा का परिष्कार करके भूगोल में द्वैधता की समस्या का हल करने का प्रयास किया?
(a) विडाल डि-लॉ ब्लाश
(b) एचÊ एचÊ बैरोज
(c) ईÊ हंटिंग्टन
(d) ई. सी. सेम्पल
उत्तर(a) : विडाल डि-लॉ ब्लाश ने मुख्य रूप से मानव को केन्द्र में रखते हुये पर्यावरण की अवधारणा का परिष्कार करके भूगोल में द्वैधता की समस्या का हल करने का प्रयास किया है।
46. निम्नलिखित जोड़ों में से किसमें सही सुमेल नहीं है?
(a) सतपुड़ा पर्वत – महादेव पहाड़ी
(b) छोटा नागपुर का पठार – राजमहल पहाड़ी
(c) हिमालय पर्वत – खासी पहाड़ी
(d) विंध्य श्रेणी – भाँड़ेर श्रेणी
उत्तर(c) : विन्ध्य श्रेणी नर्मदा नदी के उत्तर में उसके समानान्तर पश्चिम से पूर्व की ओर विस्तृत है। आगे चलकर यह उत्तर पूर्व दिशा में मुड़ जाती है और भाँड़ेर तथा कैमूर श्रेणियों के नाम से विख्यात है। इसकी लम्बाई लगभग 1200 किमी है। इसकी ऊँचाई पूर्वी एवं पश्चिमी भागों में 500 मी0 तथा मध्यवर्ती भाग से 600 मी0 है। यह पर्वतमाला गंगा नदी के क्रम को दक्षिणी भारत की नदियों के क्रम से अलग करती है। निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िये तथा उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिये। संघीय राज्यों के विशेष सन्दर्भ में राष्ट्रीय नियोजन के अन्तर्गत प्रादेशिक विकास नीति बनाने के लिए राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख खंडों के स्थानिक एवं अवस्थितिक प्रतिरूपों की विवरण सूची आवश्यक है। इस सूची के विश्लेषण के आधार पर देश को संघीय राज्यों के समूहों वाले 5 या 6 बृहज प्रदेशों में विभाजित किया जा सकता है। प्रादेशिक सीमांकन में संलग्रता‚ अन्तर्राज्यीय एवं अन्त: राज्यीय सम्बन्ध और विशिष्ट प्रादेशिक अर्थव्यवस्थाओं के विकास के लिए संसाधन सम्भाव्यताएँ प्रदेशों के सीमांकन के आधार हो सकते है। ये प्रदेश राष्ट्रीय योजना में प्रादेशिक विकास की व्यूह रचना के लिए हो सकते है। इस उद्देश्य के लिए राष्ट्रीय विकास योजनाओं के वर्तमान स्थानिक एवं अवस्थितिक अवयवों के विश्लेषण का‚ और प्रत्येक बृहत् प्रदेश के अन्तर्गत वैकल्पिक अवस्थानों तथा क्षेत्रों‚ जिन्हें उत्पादन के अतिरीक्त लक्ष्य नियम किये जा सकते हैं‚ को इंगित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। इस विश्लेषण के अन्तर्गत व्यक्तिात खंड के स्थानिक आयाम ओर प्रादेशिक एवं अन्तप्र्रादेशिक विश्लेषण शामिल है। किसी भी अन्तर्राज्यीय खंडीय योजना एवं सम्बन्धित अवस्थितिक ढाँचे की स्वीकृति राजनैतिक निरूपणों पर भी आधारित होगी। इस प्रकार इस संदर्भ में राष्ट्रीय योजना में प्रादेशिक विकास नीति का निर्माण होना चाहिए। आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लक्ष्यों पर इस विकास नीति के प्रभाव की विवेचना और आगे बृहत प्रदेशों के घटक संघीय राज्यों के आधार पर भी होना चाहिए। क्योंकि अवस्थितिक एवं स्थानिक आयामों पर विवरण सूची के अभाव‚ और विकास योजनाओं के अपर्याप्त प्रादेशिक आर्थिक विश्लेषण के कारण राष्ट्रीय योजनाएँ राज्यों के समुच्चयित खंडीय योजनाओं तथा विकास के चुने हुए खंडों की अन्तर्राज्यीय तुलना पर बहुत अधिक आश्रित हो जाती है। ऊपर वर्णित तरीके से निर्मित स्थानिक एवं अवस्थितिक ढाँचा विकास के क्षेत्रों एवं सम्बन्धित अवस्थानों जो कि राष्ट्रीय योजना के प्रमुख खंडों से सम्बन्धित है‚ को स्पष्ट रूप से इंगित करने में मदद करता है। राजनैतिक कारकों जो वास्तव में नीति निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण हैं‚ को तब तर्कसंगत आधार मिल जाएगा। राज्यों के अन्तर्गत विभिन्न उपप्रदेशों की योजनाओं में प्रादेशिक विकास नीति सम्बन्धी विचार से विकसित विकास क्षेत्रों एवं विकास बिन्दुओं के एकीकरण के लिए राज्य स्तर पर अधिक गहन विश्लेषण आवश्यकता है।
47. गद्यांश का मूल विषय सम्बन्धित है:
(a) प्रादेशिक विकास नीति से
(b) स्थानिक तथा अवस्थितिक प्रतिरूपों की विवरण सूची से
(c) आर्थिक तथा सामाजिक विकास के लक्ष्यों से
(d) राज्यों के खंडीय योजनाओं से
उत्तर(a) : उपरोक्त गद्यांश का मूल विषय प्रादेशिका विकास की नीति से सम्बन्धित है।
48. प्रादेशिक विकास नियोजन की समस्या का मूल विषय है:
(a) राज्य के खंडीय योजनाओं पर अधिक अवलम्बन
(b) वास्तविक नीति निर्माण में राजनैतिक कारकों का प्रवेश
(c) विकास क्षेत्रों तथा विकास बिन्दुओं का एकीकरण
(d) स्थानिक तथा अवस्थितिक आयामों की विवरण सूची का अभाव
उत्तर(a) : राज्य के खण्डीय योजनाओं पर अधिक अवलम्बन सम्बन्धित विषय प्रादेशिक विकास नियोजन की मूल समस्या है।
49. देश को संघीय राज्यों के समूहों वाले बृहत् प्रदेशों में विभाजन किस आधार पर हो सकता है?
(a) अन्तर्राज्यीय तथा अन्त:राज्यीय योजनाएँ
(b) विवरण सूची का विश्लेषण
(c) व्यक्तिगत खंडों का विश्लेषण
(d) अन्तरप्रादेशिक विश्लेषण
उत्तर(b) : विवरण सूची का विश्लेषण देश को संघीय राज्यों के समूहों वाले वृहत् प्रदेशों में विभाजन का प्रमुख आधार हो सकता है।
50. राजनैतिक सोच विचार अत्यधिक आवश्यक हैं?
(a) राजनैतिक नियोजन में
(b) प्रादेशिक विकास नीति में
(c) अन्तर खंडीय विकास में
(d) उपर्युक्त सभी में
उत्तर(d) : उपरोक्त सभी तर्कों के सन्दर्भ में राजनैतिक सोचविचार अत्यधिक आवश्यक है। 314

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