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GEOGRAPHY UGC NTA NET JRF PREVIOUS PAPERS IN HINDIयूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ जून- 2009 भूगोल व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल 0030.

GEOGRAPHY UGC NTA NET JRF PREVIOUS PAPERS IN HINDIयूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ जून- 2009 भूगोल व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल

1. ढाल प्रतिस्थापन मॉडल सर्वप्रथम किसके द्वारा प्रस्तावित किया गया था?
(a) ए. यंग (b) ए.एन. स्ट्रालर
(c) डब्ल्यू पैन्क (d) एल.सी. किंग
उत्तर-(c) : ढाल प्रतिस्थापन मॉडल सर्वप्रथम डब्ल्यू पेंक द्वारा प्रस्तावित किया गया था। पेंक के विचार डेविस के विचारों से सर्वथा भिन्न है। पेंक के अनुसार ढालों का रूप अपरदन की तीव्रता पर निर्भर करता है जो मुख्यत: उत्थान की प्रकृति से नियन्त्रित होता है। तीव्र उत्थान की अवस्था में नदी अपरदन की तीव्रता भी अधिक होती है और घाटियों के ढाल उत्तल होते हैं स्थिर उत्थान की स्थिति में ढाल सीधा होता है और कम उत्थान या उत्थान की घटती दर एवं स्थिरता की अवस्था में जब अपरदन की तीव्रता कम रहती है तो अवतल ढालों का निर्माण होता है।
2. परवर्ती अपवाह सामान्यत: होता है :
(a) अनुवर्ती अपवाह के अनुरूप
(b) अनुवर्ती अपवाह के विपरीत
(c) अनुवर्ती अपवाह के समकोण पर
(d) अनुवर्ती अपाह के विकर्ण पर
उत्तर-(b) : परवर्ती अपवाह सामान्यत: अनुवर्ती अपवाह के विपरीत पर होता है। किसी भी क्षेत्र में सर्वप्रथम अनुवर्ती सरिता का उद्भव होता है। अनुवर्ती नदियाँ प्रादेशिक ढाल का अनुसरण करती है इन्हें नति सरिता (diprtreams) कहते हैं। वलित पर्वतीय क्षेत्रों में अनुवर्ती नदियों का अभिनवीय गर्तो में उद्भव होता है। ऐसी नदियों को अभिनतीय अनुवर्ती सरिता कहते हैं।
3. नीचे दो कथन दिये गये हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है‚ नीचे दिये कूट से अपने उत्तर का चयन कीजिए :
अभिकथन (A):
मेगमा अपवर्तक पटल सीमारेखा पर निसुंत होता है।
कारण (R) : उर्ध्वगामी मेगमा संरचनात्मक पटल सीमा पर अपवर्तिक पटल के शीर्ष पर पहुँचता है ।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही हैं परन्तु (R), (A) गलत है।
(d) (A) गलत हैं परन्तु (R) सही है।
उत्तर-(a) : मेग्मा अपवर्तक पटल सीमा रेखा पर निसृन्त होता है क्योंकि उर्ध्वगामी मेग्मा संरचनात्मक पटल सीमा पर अपवर्तिक पटल के शीर्ष पर पहॅुंचता है। संवहन धाराओं के अनुरूप प्लेट का विस्थापन 3 प्रकार का होता है-
(i) अपसारी सीमान्त- ये वे सीमान्त होते हैं जहाँ मैग्मा ऊपर उठकर विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होता हैं इस क्रिया से प्लेटें एक दूसरे से दूर हटती है तथा महासागरीय तली का प्रसरण होता है।
(ii) अभिसारी समीान्त- जब दो भिन्न दिशाओं से संवहन धाराएँ परस्पर मिलती हैं तथा दूसरी उसके ऊपर चढ़ जाती है। अभिसारी सीमान्त पर खाइयाँ होती हैं जिनसे होकर अवतलित प्लेट का पिघला हुआ पदार्थ पुन: बाहर निकलकर ज्वालामुखियों‚ ज्वालामुखी शृंखलाओं तथा द्वीपीय पापो का रूप धारण कर लेता है।
(iii) परवर्ती सीमान्त- इन्हें संरक्षी प्लेट सीमान्त कहते हैं।
4. निम्नांकित अन्त: हिमनद कालों को कालक्रमानुसार क्रमबद्ध करें तथा नीचे दिये कूट को प्रयोग करते हुए सही उत्तर का चयन करें।
(i) वुर्म (ii) रीश
(iii) मिन्डल (iv) गुन्ज
कूट :
(a) (iv) (iii) (ii) (i)
(b) (iii) (i) (iv) (ii)
(c) (i) (ii) (iii) (iv)
(d) (i) (ii) (iv) (iii)
उत्तर-(a) :
हिमयुग यूरोप उत्तरा अमेरिका पहला गुंज नेब्रास्का दूसरा मिंडेल कन्सास तीसरा रिस इलिनोइन चौथा वुर्म विस्कान्सीन दो हिम युगों के मध्य के काल को ‘आवान्तर हिम युग’ कहा गया जो निम्न है-
(1) आफ्टोनियन आवान्तर हिमयुग – नेब्रास्का तथा कन्सास के मध्य
(2) यारमाउथ आवान्तर हिमयुग – कन्सास तथा इलिनोइन के मध्य
(3) संगमम आवान्तर हिमयुग इलिनोइन तथा विस्कान्सिन के मध्य
5. सूची I को सूची- II से सुमेलित कर सुचियों के नीचे दिये गये कूटों का उपयोग कर सही उत्तर चुनें। सूची- I सूची- II
(सिद्धांत) (लेखक)
(A) प्लानेटीसिमल सिद्धांत (i) कोबर
(B) तापीय संकुचन सिद्धांत (ii) चेम्बरलिन
(C) भूद्रोणीय उत्पत्ति सिद्धांत (iii) डैली
(D) महाद्वीपीय विसर्पण सिद्धांत (iv) जैफ्रीज
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (ii) (iv) (i) (iii)
(b) (iii) (iv) (ii) (i)
(c) (i) (ii) (iii) (iv)
(d) (iv) (iii) (ii) (i)
उत्तर-(a) : सूची I सूची II प्लानेटोसिमल सिद्धान्त चेम्बरलिन तापीय संकुचन सिद्धान्त जेफ्रीज भूद्रोणीय उत्पत्ति सिद्धान्त कोबर महाद्वीपीय विसर्पण सिद्धान्त डेली
6. हरित-गृह प्रभाव निम्नलिखित द्वारा है :
(a) समुद्री जल द्वारा पराबैगनी विकीरण के अवशोषण द्वारा
(b) वातावरण की कार्बन डाई ऑक्साईड तथा जल-वाष्प के अवशोषण द्वारा
(c) समुद्री सतहों द्वारा अवरक्त प्रतिबिम्बन द्वारा
(d) वनस्पति के अवरक्त विकीरण के अवशोषण द्वारा
उत्तर-(b) : हरित गृह प्रभाव सूर्याताप के पार्थिव विकिरण के वायुमण्डल द्वारा रोके जाने की क्रिया है जो सम्पूर्ण ग्लोब के तापमान को क्रमश: बढा रही है। इसके लिए प्रमुख रूप से CO2 गैसे हैं जिन्हें हरित गृह गैंसे कहा जाता है। इसके अतिरिक्त हरित गह गैसों के लिए मीथेन क्लोरो प्लोरो कार्बन‚ नाइट्स आक्साइड आदि भी उत्तरदायी है।
7. निम्नलिखित में से कौन सी दशा सूर्याताप की न्यूनतम मात्रा प्रदान करेगी?
(a) सूर्य क्षितिज के समीप है
(b) पृथ्वी सूर्य की अपनी कक्षा में समीपतम बिन्दु पर है
(c) दिन की लम्बाई अधिकतम है
(d) रात्रि की लम्बाई अपने न्यूनतम स्तर पर है
उत्तर-(a) : सूर्य क्षितिज के समीप है‚ यह दशा सूर्यालाप की न्यूनतम मात्रा प्रदान करेगी। सामान्यत: वायुमण्डल एवं पृथ्वी की उष्मा का प्रमुख ध्Eोत सूर्य है। पृथ्वी को प्राप्त इसी सौर उर्जा को सूर्याताप कहते हैं। दूसरे शब्दों में‚ लघु तरंगों के रूप में संचालित एवं 1‚86000 मील प्रति सेकेण्ड की गति से भ्रमण करती हुई तथा प्राप्त सौर्यिक उर्जा को सूर्याताप कहते हैं। सौर मण्डल में उष्मा के प्रमुख ध्Eोत सूर्य के तत्व का औसत तापमान 60000C तथा आन्तरिक भाग का तापमान 50 करोड़ F बतायाजाता है।
8. नीचे दो कथन दिये गये हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है‚ नीचे दिये संकेतों से अपने उत्तर का चयन कीजिए :
अभिकथन (A):
अपने सौरमंडल के प्रत्येक गृह का एक वायुमंडल है।
कारण (R) : वायुमंडल जलवायु के प्रत्येक तत्व का आधार है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही हैं परन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत हैं परन्तु (R) सही है।
उत्तर-(b) : अपने सौरमण्डल के प्रत्येक गृह का एक वायुमण्डल है। सूर्य‚ सौरमण्डल केकेन्द्र में स्थित हैं सौरमण्डल में स्थित सभी आठ गृह निश्चित कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। गृह सूर्य के जितना निकट है उसकी परिभ्रमण गति भी उतनी ही अधिक है। ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता है जबकि तारों का अपना प्रकाश होता है। बुध शुक्र‚ पृथ्वी‚ मंगल ग्रह आन्तरिक ग्रह कहलाते हैं इनका आकार छोटा तथा घनत्व अधिक है। जबकि वृहस्पति‚ शनि‚ अरुण‚ वरुण वाह्य ग्रह कहलाते हैं। इनका आकार बड़ा तथा घनत्व कम का है।
9. सूची I को सूची- II से सुमेलित कर सुचियों के नीचे दिये गये कूटों का उपयोग कर सही उत्तर चुनें। सूची- I सूची- II
(A) फराबैंगनी (i) > 0.8 m
(B) वायुमंडलीय खिड़की (ii) < 0.3 m
(C) आयोनीय विकरण (iii) 8 m से 13 m
(D) समीप अवरक्त (iv) एक्स रे तथा गामा किरणें
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (iv) (iii) (ii) (i)
(b) (iii) (iv) (i) (ii)
(c) (ii) (i) (iii) (iv)
(d) (ii) (iii) (iv) (i)
उत्तर-(b) : सूची I सूची II पराबैगनी – 8 m से 13 m वायुमण्डलीय खिड़की – एक्स रे तथागामा किरणें आयोनीय विकिरण – .8 समीप अपरक्त – ∠0.3 m
10. वायुमण्डल की लम्बवत परतों को पृथ्वी से बाहर की ओर क्रमबद्ध कीजिये/ नीचे दिये कूटों में से उत्तर चुनिये:
(i) ओजोनोस्फियर (ii) ट्रोपोस्फियर
(iii) स्ट्रेटोस्फियर (iv) ओयोनोस्फियर
कूट :
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (ii) (i) (iii) (iv)
(c) (ii) (iii) (i) (iv)
(d) (i) (iii) (ii) (iv)
उत्तर-(c) : वायुमण्डल की लम्बवत परतों को पृथ्वी से बाहर की ओर क्रमबद्ध स्थिति निम्न हैट्र ोपोस्फियर ↓स्ट्रेटोस्फियर ↓ओजोनोस्फियर ↓आयोनोस्फियर ट्रोपोस्फियर- यह वायुमण्डल की सबसे निचली परत है‚ जिसमें वायु के सम्पूर्ण भार का लगभग 75% भाग पाया जाता है। ट्रोपोस्फियर का नामकरण टीजरेन्स डी वोर्ट ने किया है। इसे विक्षोभ मण्डल तथा संवहनीय परत भी कहते हैं। धरातल से इस परत की औसत ऊँचाई 14 किमी. मानी जाती है साथ ही भूमध्य रेखा से धु्रवों की ओर क्षोभमण्डल की उâॅचाई में कमी आती है। भूमध्य रेखा पर संवहनीय तरंगों के कारण इसकी औसत उâँचाई 16 किमी. तथा ध्रुवों पर 6.0 किमी. है। स्ट्रेटोस्फियर- इसकी औसत उâँचाई धरातल से 50 किमी. तक पायी जाती है। ओजोनोस्फियर- इस मण्डल की सघनता 15 से 35 किमी. की ऊँचाई के मध्य पायी जाती हैं क्लोरो-फ्लोरो -कार्बन (CFC) जैसी गैसों द्वारा इस परत को सर्वाधिक नुकसान पहॅुंचा है।
11. जलराशि स्थल भाग से अधिक धीमी गति से गर्म होती है क्योंकि :
(a) पानी की विशिष्ट उष्मा कम होती है
(b) वाष्पीकरण जल भाग को गर्म करता है
(c) विकिरण जलसतह परत से नीचे नहीं पहुँच सकता है
(d) जलसतह परत आसानी से मिश्रित हो जाती है
उत्तर-(c) : जलराशि स्थल भाग से अधिक धीमीगति से गर्म होती है क्योंकि विकिरण जलसतह परत से नीचे नहीं पहँुच सकता है साथ ही साथ जलराशि की गुप्त उष्मा सामर्थ्य अधिक होती है जिस कारण वह देर से गर्म तथा देर से ठण्डी होती है।
12. निम्नांकित में से किसकी फनेरोफाइट्स की विशेषता नहीं है?
(a) वे अत्यधिक शीत अथवा उष्ण तापक्रमों‚ सूखे और तीव्रगामी हवाओं के प्रभाव को सह सकती है
(b) वे सामान्यत: शीतोष्ण और आर्द्र उष्णकटिबन्धीय प्रदेशों में पाये जाते हैं।
(c) वे ऊँचे चिरस्थायी वृक्ष‚ झाड़ और छोटे पौधे होते हैं।
(d) इन पौधों के पुन: पैदा होने वाली कलियाँ सदैव दबी रहती हैं
उत्तर-(d) : फनेरोपइट्स सामान्यत: शीतोष्ण और आर्द्र उष्ण कटिबन्धीय प्रदेशों में पाया जाने वाला पौधा है। इन पौधों में पुन:
उगने वाली कलियाँ सदैव दबी हुई न रहकर कुछ उभर लिए हुए होती है।
13. निम्नलिखित क्रम में से कौन सी में लवण की सघनता बढ़ते हुए क्रम में है?
(a) लाल सागर- केलीफोर्निया की खाड़ी- आर्कटिक सागरबाल्टिक सागर
(b) केलीफोर्निया की खाड़ी- बाल्टिक सागर- लाल सागर-
आर्कटिक सागर
(c) बाल्टिक सागर- आर्कटिक सागर- केलीफोर्निया की खाड़ी-लाल सागर
(d) आर्कटिक सागर – केलीफोर्निया की खाड़ी- बाल्टिक सागर- लाल सागर
उत्तर-(c) : लवण की सघनता बढ़ते हुए क्रम में निम्न हैबाल्टिक सागर- आर्कटिक सागर- कैलिफोनिर्या की खाड़ी -लाल सागर बाल्टिक सागर लवणता बहुत ही कम है।यहाँ स्वीडन के तट के निकट 11 प्रति हजार तथा बोथनिया की खाड़ी के मुहाने के निकट केवल 2 प्रति हजार लवणता पायी जाती हैं यहाँ तापमान कम होने के कारण वाष्पीकरण कम है।
14. निम्नलिखित में से किस में सबसे अच्छे ढंग से वर्णित किया गया है कि ट्रोफिक स्तर की अवधारणापर थर्मोडाइनामिक्स की द्वितीय विधि लागू होती है?
(a) एक ट्रोफिक स्तर पर सभी जैविक तत्व अगले उच्च स्तर के ट्रोफिक स्तर परिवर्तित हो जाते हैं
(b) अगले ट्रोफिक स्तर पर परिवर्तन के क्रम में कोई भी उपयोगी उर्जा ताप के रूप में नष्ट नहीं होती है
(c) अगले ट्रोफिक स्तर पर परिवर्तन के क्रम में अधिक ऊर्जा ताप के रूप में नष्ट होती है
(d) ऊर्जा प्रवाह 100% क्षमता एक ट्रोफिक स्तर से अगले ट्रोफिक स्तर पर प्रवाहित होती है
उत्तर-(d) : उर्जा प्रवाह 100% क्षमता एक ट्रोफिक स्तर से अगले ट्रोफिक स्तर पर प्रवाहित होती है इसमें ट्राफिक स्तर की अवधारणा पर थर्मोडाइनामिक्स की द्वितीय विधि लागू होती हैं
15. नीचे दो कथन दिये गये हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है‚ नीचे दिये संकेतों से अपने उत्तर का चयन कीजिए :
अभिकथन (A):
बसंत ज्वार पूर्णिमा एवं अमावस्या को उत्पन्न होते हैं।
कारण (R) : पूर्णिमा एवं अमावस्या को सूर्य तथा चंद्रमा सदैव पृथ्वी के समकोण पर होते हैं संकेत :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही हैं परन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत हैं परन्तु (R) सही है।
उत्तर-(c) : बसंत ज्वार पूर्णिमा एवं अमावस्या को उन्नत होते हैं पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन सूर्य‚ पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सीध में आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर चन्द्रमा तथा सूर्य के सम्मिलित गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पड़ता है। फलस्वरूप बसंत ज्वार का निर्माण होता है। पूर्णिमा तथा अमावस्या को सूर्य‚ पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सरल रेखा में होते हैं‚ इस दिन दीर्घ ज्वार आता है। इस स्थिति को सिजगी कहते हैं। जब सूर्य तथा चन्द्रमा दोनों पृथ्वी के एक ओर होते हैं तो उसे युति कहते हैं। जब सूर्य तथा चन्द्रमा के बीच पृथ्वी की स्थिति होती है तो उसे वियुति कहते हैं।
16. नीचे दो कथन दिये गये हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है‚ नीचे दिये संकेतों से अपने उत्तर का चयन कीजिए :
अभिकथन (A):
क्षेत्रों के अभिज्ञान के लिये अनिवार्य है कि उनकी समानताओं और स्थानिक विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाये।
कारण (R) : स्थानिक विभिन्हृताओं का अध्ययन क्षेत्रों के बीच समानता एवं विभिन्नता का स्थापित करना होता है। संकेत :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही हैं परन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत हैं परन्तु (R) सही है।
उत्तर-(a) : क्षेत्रों के अभिज्ञान के लिए अनिवार्य है कि उनकी क्षमताओं और स्थानिक विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाए‚ कथन सत्य है तथा कारण कथन की व्याख्या कर रहा हैं
17. कल्याणगारी भूगोल में किस अध्ययन की समीक्षा को महत्व दिया जाता है?
(a) प्रादेशिक संतुलित विकास
(b) विकास में लोक-निजी भागीदारी
(c) नगरीय- औद्योगिक विकास
(d) जीवन गुणवत्ता के पक्ष
उत्तर-(d) : कल्याणकारी भूगोल में जीवन गुणवत्ता के पक्ष के अध्ययन की समीक्षा को महत्व दिया जाता है। कल्याणकारी भूगोल का विकास 1970 के दशक में हुआ जो कि सामाजिक समस्याओं के समाधन से सम्बन्धित है। कल्याणकारी भूगोल का विकास भावात्मक क्रान्ति‚ स्थानिक विश्लेषण एवं आचारपरक क्रान्ति के प्रति प्रतिक्रियाके रूप में हुआ हैं कल्याणकारी भूगोल के विकास में डी.एम. स्मिथ‚ ए. जी. फ्रैक आदि विद्वानों का महत्वपूर्ण योगदान है।
18. डेविड हार्वे को निम्नलिखित में योगदान के लिये जाना जाता है:
(a) नगरीय भूगोल (b) अतिवादी भूगोल
(c) राजनीति भूगोल (d) नव आर्थिक भूगोल
उत्तर-(b) : मात्रात्मक क्रान्ति एवं स्थानिक विश्लेषण के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में 1970 के दशक में अतिवादी भूगोल का विकास हुआ। यह मात्रात्मकम विश्लेषण एवं पॉजिटिविस्टिक विश्लेषण द्वारा प्राप्त सैद्धान्तिक नियमों को अस्वीकार करता है। डेविड हावे जे.आर. पीट जैसे विद्वानों ने भी इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अतिवादी भूगोल के विकास में एण्टीपोड नामक पत्रिका एवं क्लार्क विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान है।
19. नीचे दो कथन दिये गये हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है‚ नीचे दिये संकेतों से अपने उत्तर का चयन कीजिए :
अभिकथन (A):
विश्व की जनसंख्या का विवरण अत्यधिक असमान है।
कारण (R) : जनसंख्या के असमान वितरण के लिए राजनैतिक पर्योवरण उत्तरदायी है। संकेत :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) गलत हैं परन्तु (R) सही है
(d) (A) सही हैं परन्तु (R) गलत है।
उत्तर-(a) : विश्व में जनसंख्या के विवरण पर भौतिक (जलवायु‚ स्थलाकृति मिट्टी‚ खनिज आदि) सामाजिक‚ सांस्कृतिक‚ राजनीतिक‚ आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय कारकों का प्रभाव पड़ा है। विश्व का 60% जनसंख्या 200 मीटर से कम एवं 80% जनसंख्या 500 मीटर से कम ऊँचाई वाले भागों में निवास करती है। विश्व की कुल जनसंख्या का 90% भाग उत्तरी गोलार्द्ध में एवं 10% दक्षिणी गोलार्द्ध में निवास करता है।
20. महानगरीय शहरों के विकास को किन संयोजक तत्वों द्वारा सही तरीके से समझाया जा सकता है?
(i) क्षेत्रीय सीमाओं का विस्तार
(ii) उच्च जन्म-दर
(iii) अप्रवास
(iv) परिधि के अधिवासों का समावेलन संकेत :
(a) (i) (ii) (iii)
(b) (ii) (iii) (iv)
(c) (iii) (iv) (i)
(d) (i) (ii) (iv)
उत्तर-(c) : महानगरीय शहरों के विकास को समझने के लिए क्षेत्रीय सीमाओं का विस्तार‚ अप्रवास‚ परिधि के अधिवासों का समविलन अधिवासों कावितरण नगरों का अरीय स्वरूप आदि महत्वपूर्ण संयांजन तत्व है।
21. वे अधिवास समवितरित माने जाते हैं जिनकी R मूल्य के समान है
(a) 0.5 (b) 1.0
(c) 1.5 (d) 2.0
उत्तर-(d) : वे अधिवास समवितरित माने जाते हैं जिनकी R मूल्य 2.0 के समान है। Rn तालिका 0.00 – 0.09 – पूर्ण संकेन्द्रण 0.10 – 0.50 – उच्च संकेन्द्रण 0.51- 0.99 – गुच्छेदार क्रम 1.00 – 1.19 – दैव प्रतिरूप 1.20 – 1.99 – उपागमीय प्रवृत्ति 1.50 – 2.14 – परिक्षेपित क्रम 2.1491-2.15 – पूर्ण षटकोणीय
22. भारतीय जनगणना के अनुसार एक नगरीय अधिवास को सिटी (शहर) की श्रेणी में तभी वर्गीकृत किया जा सकता है जब उसकी न्यूनतम जनसंख्या हो :
(a) 1 लाख (b) 3 लाख
(c) 5 लाख (d) 10 लाख
उत्तर-(d) : भारतीय जनगणना के अनुसार एक नगरीय अधिवास को सिटी (शहर) की श्रेणी में तभी वर्गीकृत किया जा सकता है जब उसकी न्यूनतम जनसंख्या 10 लाख हो भारत में नगरीय बस्तियों के लिए न्यूनतम जनसंख्या घनत्व 1000 व्यक्ति प्रति मील (400 व्यािäत / वर्ग किमी.) हैं भारतमें नगरीय बस्तियों के लिए यह आवश्यक है कि उसकी 75% पुरुष कार्यशील आबादी गैर कृषि कार्यों में संलग्न है।
23. नीचे दो कथन दिये गये हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है‚ नीचे दिये संकेतों से अपने उत्तर का चयन कीजिए :
अभिकथन (A):
शहर जिनमें वृद्धिदर बहुत अधिक है उनमें पुरुष वयस्क जनसंख्या अधिक है।
कारण (R) : शहरी की ओर अप्रवास लिंग एवं आयु वरण होता है। संकेत :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही हैं परन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत हैं परन्तु (R) सही है।
उत्तर-(a) : शहर जिनमें वृद्धि दर अधिक है‚ उनमें पुरुष वयस्क जनसंख्या अधिक है‚ क्योंकि शहर की ओर अप्रवास लिंग एवं आयु वरण होता है।
24. कूलगार्डी तथा कालगूर्ली निम्नलिखित के लिए प्रसिद्ध है :
(a) प्रमोद नगर (b) खनन नगर
(c) औद्योगिक नगर (d) संस्थात्मक नगर
उत्तर-(b) : कूलगाड़ी तथा कालगूर्ली प्रमुख खनन नगर है जो सोना उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। सोना तुलनात्मक रूप से शुद्ध रूप में नसों (Vcins) में एवं प्लेसर निक्षेप के रूप में पाया जाता है। विश्व में सोने का सर्वाधिक संचित भण्डार दक्षिण अफ्रीका में है। आस्ट्रेलिया के प्रमुख सोना उत्पादक क्षेत्र निम्न हैपश्चिमी आस्ट्रेलिया – कालगुर्ली‚ कुलगार्डी विक्टोरिया – बेलारेट‚ बेंडिगो क्वींसलैण्ड – माउण्ट मोर्गान 25 निम्नांकित में से कौन सा जैविक संसाधन है?
(a) लोहा (b) कोयला
(c) ताँबा (d) अभ्रक
उत्तर-(b) : कोयला परतदार चट्टानों में पाया जाता हैं विश्व में कोयला का निर्माण मुख्यत: कार्बोनिफेरसयुग में हुआ।इसके अलावा कुछ कोयले का निर्माण टार्शियरी युग में हुआ। कोयले के प्रमुख प्रकार
(1) एन्थ्रोसाइट
(2) बिटुमिनस
(3) लिग्नाइट
(4) पीट भारत में उच्च कोटि का बिटुमिनस कोयला पाया जाता हैं यहाँ कोयले के प्रमुख क्षेत्र पं. बंगाल झारखण्ड‚ छत्तीसगढ़‚ मध्य प्रदेश‚ आन्ध्र प्रदेश एवं उड़ीसा में स्थित है।
26. निम्नांकित में से कौन सा निम्नतम मूल्य के सिद्धान्त पर आधारित है?
(a) वेबर का सिद्धान्त
(b) लॉश का सिद्धान्त
(c) स्मिथ का क्षेत्रीय लाभकारी सिद्धान्त
(d) वोनथ्यूनन का सिद्धान्त
उत्तर-(a) : अल्फ्रेड बेंबर उद्योग के स्थानीयकरण के सिद्धान्त को प्रस्तुत करने वाले प्रथम विद्वान थे। स्थानीयकरण की विचारधारा को इससे पहले सन् 1882 तथा 1885 के बीच विल्हेम लौन्हार्ट ने प्रस्तुत किया था। जिसमें उन्होंने न्यूनतम लागत अवस्थिति सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। वेबर का सिद्धान्त इस परिकल्पना पर आधारित है कि उद्योगों के स्थानीयकरण पर परिवहन मूल्य का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।
27. सूची I को सूची- II से सुमेलित कर सुचियों के नीचे दिये गये कूटों का उपयोग कर सही उत्तर चुनें। सूची- I सूची- II
(A) फ्रांस (i) सालगिल्टर क्षेत्र
(B) यूक्रेन (ii) मसाबी क्षेत्र
(C) जर्मनी (iii) लारेन क्षेत्र
(D) यू.एस.ए. (iv) क्रिवोय रोग क्षेत्र
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (iv) (iii) (i) (ii)
(b) (iii) (iv) (i) (ii)
(c) (i) (ii) (iv) (iii)
(d) (iv) (i) (iii) (ii)
उत्तर-(b) : सूची I सूची I फ्रांस – लारेन क्षेत्र यूकेन – क्रिवायरॉग जर्मनी – सालमिल्टर क्षेत्र U.S.A. – मसाबी क्षेत्र
28. निम्नलिखित को भारत में अम्बारीय जहाजरानी व्यापार
(2001) के संदर्भ में घटते क्रम में श्रेणीबद्ध कीजिये :
(a) काँडला‚ चैन्नई‚ मुम्बई‚ विशाखापटनम्
(b) मुम्बई‚ काँडला‚ चेन्नई‚ विशाखापटनम्
(c) विशाखापट्नम्‚ चेन्नई‚ कॉडला‚ मुम्बई
(d) मुम्बई‚ चेन्नई‚ विशाखापटनम्‚ काँडला
उत्तर-(d) : अम्बरीय जहाज व्यापार (2001) के सन्दर्भ में घटते क्रम निम्न हैंमुम्बई‚ चेन्नई‚ विशाखापट्टनम‚ काूडल्प
29. मैकिन्डर के हृदयस्थल सिद्धान्त में हिन्द महासागर को सम्मिलित किया गया था।
(a) बाहरी परत (b) आन्तरिक परत
(c) द्वितीयक हृदय स्थल (d) विश्व द्वीप
उत्तर-(a) : मैकिण्डर ने हृदय स्थल सिद्धान्त में हिन्द महासागर को बाहरी परत में सम्मिलित किया। मैकिण्डर ने ह दयस्थल की परिकल्पना 1904 में अपने निबन्ध इतिहास की भौगोलिक धुरी में प्रस्तुत किया। मैकिण्डर ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया कि समुद्री शक्तियाँ क्षीण हो रही हैं और अन्तिम विजय महाद्वीपीय शक्तियों की ही होगी। उन्होंने विश्व के स्थलीय क्षेत्र की 3 स्तरों में व्यक्त किया जिनके नाम हैं-
(i) हृदय स्थल
(ii) आन्तरिक अर्द्ध चन्द्राकार पेंटी
(iii) वाह्य अर्द्ध चन्द्राकार पेटी
30. यह कथन किसका है कि जो भी युरेशिया पर राज्य करता है वह विश्व के भाग पर नियंत्रण करता है?
(a) स्पाइकमेन (b) जेलॉन
(c) मेकेन्डर (d) हासोफर
उत्तर-(a) : स्पाइकमैन के अनुसार स्थल शक्ति की अपेक्षा समुद्री गतिशीलता ही विश्व में विशाल साम्राज्य की स्थापना में सहायक है। स्पाइकमैन ने 1944 में शन्ति का भूगोल नामक पुस्तक लिखी। जिसमें उन्होंने रिमलैण्डके सिद्धान्त को प्रस्तुत कया। स्पाइकमैन ने कहा कि- जो रिमलैण्ड को नियन्त्रित करेगा‚ वह यूरेशिया पर राज्य करेगा। जो यूरेशियापर राज्य करेगा‚ वह विश्व के भाग्य पर नियंत्रण करेगा।
31. निम्नलिखित जनजातियों के युग्मों में से कौन सा
उत्तर-पूर्वी भारत के एक ही राज्य में सीमित है?
(a) खासी-नागा (b) गारो- खासी
(c) नागा -मीजो (d) खासी- मीजो
उत्तर-(b) : गारो -खासी जनजाति के लोग मेघालय राज्य की खासी और जयन्तियाँ पहाड़ियों में निवास करते हैं। इन लोगों का मुख्य धन्धा कृषि है।यहाँ की 80% जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती ह। ये लोग झूमिंग प्रकार की कृषि करत हैं‚ जिसमें पहाड़ी ढाल के जंगलों को काटकर दो यातीन वर्षोंतक कृषि की जाती है।
32. निम्नांकित युग्मों में से कौनसा द्रवीडियन भाषा समूह का है?
(a) कन्नड‚ तेलगू (b) मराठी‚ गुजराती
(c) मलयालम‚ उड़िया (d) तमिल‚ मराठी
उत्तर-(a) : द्रविड़ मात्राऐं आर्य भाषाआं से अधिक पुरानी हैं। द्रविड भाषएं बोलने वाली लगभग सारी जनसंख्या दक्षिण भारत में सीमित है। द्रविड़ परिवार की मुख्य भाषाएँ तमिल‚ तलगू कन्नड तथा मलयालम है। ये क्रमश: तमिलनाडु आन्ध्र प्रदेश‚ कर्नाटक तथा केरल में बोली जाती है।
33. स्थान-लोक-कार्य की संकल्पना की थी:
(a) क्लारेन्स स्टेन (b) ला प्ले
(c) वाइडल डी.ला. ब्लाश (d) जिन ब्रंश
उत्तर-(b) : ला प्ले (LE PLAY) फ्रांसीसी समुदाय का एक महान भूगोल वेदता था। ला प्ले ने स्थान-लोक-कार्य की संकल्पना प्रतिपादित की जिसका उल्लेख अपनी रचना स्थान कार्य एवं परिवार नामक ग्रंथ में किया।
34. नीचे दो कथन दिये गये हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है‚ नीचे दिये संकेतों से अपने उत्तर का चयन कीजिए :
अभिकथन (A):
भारत में उत्तर उदारीकरण के समय में प्रादेशिक एवं अन्तर वैयक्तिक स्तरों में प्रादेशिक विषमता में वृद्धि हुई है।
कारण (R) : नव-उदारीकरण की नीतियाँ तुलनात्मक लाभ के सिद्धान्तों पर आधारित है और क्षमता मानकों से जुड़ी है। संकेत :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही हैं परन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत हैं परन्तु (R) सही है
उत्तर-(b) : भारत में उत्तर उदारीकरण के समय में प्रादेशिक एवं अन्तर वैयक्तिक स्तरों में प्रादेशिक विषमता में वृद्धि हुई है‚ सत्य है परन्तु कारण कथन की व्याख्या नहीं कर रहा है।
35. नगरनियोजन में समीपस्त इकाई की अवधारणा प्रतिपादित की थी:
(a) ला कारबूजिए (b) क्लेरेन्स पेरी
(c) लुई मम्फोर्ड (d) फ्रेंक लाँयड राइट
उत्तर-(b) : नगर नियोजन में समीपस्त इकाई की अवधारणा क्लेरेन्स पैरी ने प्रतिपादित की थी। लुई मेमफोर्ड ने अपनी पुस्तक (Culture of the Cities) में नगरों के प्राचीनकाल में उद्भव से लेर आधुनिक स्वरूप में विकसित होने की अवस्था के आधार पर नगरों को निम्नंकित भागों में विभाजित किया है-
(i) इयोपोलिस
(ii) पोलिस
(iii) मेट्रोपोलिस
(iv) मैगालोपोलिस
(v) टायरपोलिस
(vi) नेक्रोपोलिस
36. भारत को नियोजन प्रदेशों में विभाजित करने का एक समग्र प्रयास किया था:
(a) भारतीय योजना आयोग
(b) नगर एवं ग्राम नियोजक संगठन
(c) राष्ट्रीय व्यावहारिक आर्थिक शोध
(d) भारतीय लोक प्रशासन संस्थान
उत्तर-(b) : भारत को नियोजन प्रदेशों में विभाजित करने का एक समग्र प्रयास किया गया था- नगर एवं ग्राम नियोजक संगठन के द्वारा । भारत में प्रकाश राव पहले भूगोल विद् थे जिन्होंने 1949 में देश को नियोजन की दृष्टि से प्रदेशों के महत्व को सर्वप्रथम बताया था। सन् 1961 में रामचन्द्रन ने पहली बार भारत को 5 स्थल प्रदेशों में विभक्त किया। उनके उपरान्त 1962 में सेन गुप्ता ने भी देश को 6 स्थल प्रदेशों में विभक्त किया था।
37. लक्ष्यद्वीप है :
(a) ज्वालामुखी उत्पन्न (b) प्रवाल उत्पन्न
(c) विवर्तनिक उत्पन्न (d) कछारी उत्पन्न
उत्तर-(b) : लक्षद्वीप के अधिकांश द्वीप प्रवाल उत्पत्ति के हैं। लक्षद्वीप अरब सागर में केरल तट से 200-300 किमी. की दूरी पर विस्तृत द्वीपों का समूह है।लक्षद्वीप समूह में द्वीपों की कुल संख्या 36 है जबकि इनमें केवल 11 ही आबाद हैं।
38. वृक्षों एवं पशुओं के घरेलूकरण का प्रारम्भ काल में हुआ था :
(a) इओलिथिक काल (b) मसोलिथिक काल
(c) निओलिथिक काल (d) पैलिओलिथिक काल
उत्तर-(c) : वृक्षों एवं पशुओं के घरेलूकरण का प्रारम्भ काल निओलिथिक काल में हुआ था। इओलिथिक काल 7 करोड़ वर्ष पूर्व से लेकर 4 करोड़ वर्ष पूर्व तक लगभग 3 करोड वर्षों तक रहा। इसी काल में वृहद हिमालय की उत्पत्ति हुई तथा पिछले युग में निर्मित पर्वतों की उचाईयाँ में वृद्धि हुई। हाथी‚ घोड़ा‚ राइनोसेरस के पूर्वजों का जन्म इसी इसी युग में हुआ।
39. निम्नलिखित में से कौन सा ऐतिहासिक स्थल दिल्ली से सम्बन्धित नहीं है?
(a) गेट वे आफ इंडिया (b) अप्पुघर
(c) कुतुबमीनार (d) रेडफोर्ट (लाल किला)
उत्तर-(a) : ऐतिहासिक स्थल गेटवे आफ इण्डिया मुम्बई से सम्बन्धित है। कुतुबमीनार तथा रेडफोर्ट (लाल किला) दिल्ली से सम्बन्धित है।
40. हिमालय के उत्थान का सर्वप्रथम प्रारम्भ किस काल में हुआ था?
(a) मध्य प्लीओसीन (b) मध्य ओलिगोसीन
(c) मध्य इओसीन (d) मध्य मायोसीन
उत्तर-(b) : भारत के विख्यात भूगर्भशास्त्री डी.एन. वाडियाके अनुसार महान हिमालय का जन्म लगभग 12 करोड़ वर्ष पूर्व क्रिटेशियस युग में हुआ जबकि हिमालय का उत्थान का सर्वप्रथम प्रारम्भ ओलिगोसीन में हुआ‚ इस युग में वृहद हिमालय काविकास पूर्णता को प्राप्त कर रहा था। मध्य हिमालय का उत्थान मायोसीन शक में हुआ था। हिमालय की तीसरी शृंखला शिवालिक का उत्थान प्लायोसीन शक में हुआ। इसी शक में काला सागर कैस्पियन सागर‚ उत्तरी सागर एवं अरब सागर की उत्पत्ति हुई। इसी काल में मानव सहरा पृच्छहीन बन्दरों का विकास हुआ।
41. सूची I को सूची- II से सुमेलित कर सुचियों के नीचे दिये गये कूटों का उपयोग कर सही उत्तर चुनें। सूची- I सूची- II
(A) मेघालय (i) कोहिमा
(B) मणीपुर (ii) आइजोल
(C) नागालैंड (iii) शिलांग
(D) मिलोरम (iv) इम्फाल
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (iii) (ii) (iv) (i)
(b) (iii) (iv) (i) (ii)
(c) (ii) (iii) (i) (iv)
(d) (iii) (ii) (i) (iv)
उत्तर-(b) : सूची I सूची II मेघालय – शिलांग मणिपुर – इम्फाल नागालैण्ड – कोहिमा मिजोरम – आइजोल
42. अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्र निम्नलिखित दर्शाने के लिये है :
(a) नगरीय क्षेत्र (b) धरातल तथा अपवाह
(c) फसलों का वितरण (d) प्लॉट/क्षेत्र की सीमायें
उत्तर-(d) : अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्र प्लाँट /क्षेत्र की सीमाएँ दर्शाने के लिए है। जहाँ भूम्पत्ति मानचित्रों में व्यक्तिगत भवनों एवं क्षेत्रों की सीमाएँ अंकित होती हैं वही स्थलाकृतिक मानचित्रों में स्थलाकृतिक लक्षणों‚ उच्चावच प्रवाह प्रणाली का क्षेत्र जलाशय‚ दलदली क्षेत्र‚ नगर‚ गॉव‚ परिवहन मार्ग आदि को प्रदर्शित किया जाता है।
43. अन्तर्राष्ट्रीय प्रक्षेप निम्नलिखित का संशोधित रूप है :
(a) पोलीक्रोनिक
(b) सिनूसोईडल
(c) बोन
(d) सम-क्षेत्रफल सिलिन्ड्रीकल
उत्तर-(a) : अन्तर्राष्ट्रीय प्रक्षेष पोलिकोनिक का संशोधित रूप है। अन्तर्राष्ट्रीय प्रक्षेप 1 : 10‚00‚000 की मापनी पर बनाया जाता है। बहु शंकु के स्थान पर स्थलाकृतिक अंश चित्रों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय प्रक्षेप का सुझाव जर्मन भूगोल वेत्ता ए पैंक ने दिया था। बहु शंकुक प्रक्षेप की भाँति इस प्रक्षेप में भी अक्षांश वृत्त अंशकेन्द्री होते हैं। देशान्तर रेखाएँ सरल होती है तथा अक्षांश वृत्त वक्राकार होते हैं।
44. निम्नांकित में से कौन जी.आई.एस. का अवयव है?
(a) आँकड़ा – निवेश प्रमाणन उप-पद्धति
(b) आँकड़ा प्रतिवेदन उप- पद्धति
(c) आँकड़ा भण्डारण तथा पुन: प्राप्ति उप-पद्धति
(d) आँकड़ा युक्तियुकृता तथा समीक्षा उप-पद्धति
उत्तर-(c) : ऑकड़ा भण्डारण तथा पुन: प्राप्ति उप पद्धति जी.आई.एस का अवयव है। जी.आई.एस. (भौगोलिक सूचना तन्त्र) एक ऐसा तन्त्र हैजो संगणक पर आधारित है। इससे भू-सन्दर्भित बहुचर ऑकड़ों का प्रसंस्करण तथा विश्लेषण किया जाता है। जी.आई.एस. से वन क्षेत्रों‚ प्रमुख सड़कों तथा प्रशासनिक सीमाओं को दर्शाना आसान हो जाता है। भूमि सूचना प्रणाली तथा पर्यावरणीय सूचनाप्रणाली भौगोलिक सूचना तन्त्र के प्रमुख उदाहरण हैं।
45. नीचे दो कथन दिये गये हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है‚ नीचे दिये संकेतों से अपने उत्तर का चयन कीजिए:
अभिकथन (A) :
माध्यक अति एकक मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है।
कारण (R) : इसमें आँकड़ों का ऊर्ध्वगामी एवं निम्नगामी व्यवस्थान अनिवार्य है संकेत :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है
(b) (A) और (R) दोनों सही है परन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं
(c) (A) सही हैं‚ परन्तु (R) गलत है
(d) (A) गलत है परन्तु (R) सही है
उत्तर-(b) : माध्यम अति एकक मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है‚ सत्य है। यह सदैव निश्चयात्मक होता है। अपने विशिष्‘ट बीजगणितीय गुणों के कारण संख्यिकीय विश्लेषण की अनेक विधियाँ जैसे अपकिरण‚ विषमता व सह सम्बन्ध आदि में इसका काफी उपयोग होता है।
46. सूची I को सूची II से सुमेलित कर सूचियों के नीचे दिये गए कूटों का उपयोग कर सही उत्तर चुनें। सूची – I सूची-II
(a) होमोलोग्राफिक (i) सही दिक्मान
(b) आर्थोमोर्फिक (ii) सम क्षेत्र
(c) इक्वीडिसटेंट (iii) शुद्ध आकृति
(d) एजीमूथल (iv) सम दूरी
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (iii) (ii) (i) (iv)
(b) (ii) (iii) (iv) (i)
(c) (ii) (iii) (i) (iv)
(d) (iv) (ii) (i) (iii)
उत्तर-(c) : होमोलोग्राफिक – समक्षेत्र आर्थोमोफिक – शुद्ध आकृति इक्वीडिसटेन्ट – सही दिक्मान एजीकमूथल – सम दूरी निम्नलिखित उद्धरण को पढकर के प्रश्न संख्या 47 से 50 का उत्तर देंआधुनिक भूआवृतिविज्ञान के आधारभूत सिद्धान्त को एकरूपतावाद के सिद्धान्त के नाम से जाना जाता है। यह सर्वप्रथम हट्टन के द्वारा 1785 में प्रतिपादित किया गया था तथा प्लेफेयर के द्वारा 1802 में अच्छी तरह पुन: आरंभ किया गया तथा लायल ने अपनी पुस्तक ‘प्रिन्सिपल्स ऑफ जियोलॉजी’’ के अनेक संस्करणों द्वारा इसे लोकप्रिय बनाया। हट्टन ने सिखाया कि वर्तमान भूत की वंâुंजी है लेकिन उन्होंने इस सिद्धान्त का अत्यधिक कठोरता से उपयोग किया तथा उन्होंने तर्क दिया कि आज की तरह‚ उसी के समान‚ भूगर्भिक प्रक्रम जो सम्पूर्ण भगर्भिककाल में उसी उत्कटता से क्रियाशील रहे हैं‚ आज भी हैं। आज हम जानते हैं कि यह सही नहीं है। प्लायस्टीन के समय तथा अन्य भूगर्भिक युगों में हिमनद आज की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण रहे हैं। विश्व जलवायु का वितरण भी सदैव वैसा नहीं था‚ जैसा आज है अत: जो क्षेत्र आज आर्द्र है पहले वे मरुस्थल रहे हैं और आज जो क्षेत्र मरुस्थल हैं वे पहले आर्द्र रहे हैं; भूपटल की अस्थिरता ने सापेक्षक भूपटलीय अस्थिरता कालों को विभाजित किया है‚ यद्यपि कुछ लोगों को इसमें शंका है और ऐसा समय भी था जब ज्वालामुखीकरण आज से ज्यादा महत्वपूर्ण था। ऐसे अनेक अन्य उदाहरण हैं जो यह दर्शाते हैं कि विभिन्न भूगर्भिक कालों में भूगर्भिक प्रक्रमों की सघनता परिवर्तित होती रही है लेकिन विश्वास करने का एसा कोई कारण नहीं है कि प्राचीनकाल में नदियाँ अपनी घाटियों को वैसा नहीं काटती थीं जैसा आज काटती हैं तथा अधिक मात्रा और गहन हिमनद घाटी का व्यवहार प्लायस्टीसीन काल में आज के हिमनदों से अलग रहा है। पवन जिन्होंने जूरासिक युग के दौरान नोवाजो बालू के पत्थर का विक्षेपण किया था‚ उनको नियंत्रित करने वाली क्रियाविधि आज के पवन प्रवाह को नियंत्रिक करने वाली क्रियाविधि से भिन्न थी। भूमिगत जल‚ चूना पत्थरों तथा अन्य घुलनशील चट्टानों में घुलनशील पारपथ खोल देते हैं तथा सतह में गर्त बना देते हैं जिन्हें आज घोलरन्ध्र कहा जाता है वे परमियत और पेनसिलवेनियन कालों के दौरान आज से भिन्न थे‚ जैसा कि आज विश्व के कई भागों में है। एकरूपतावाद के सिद्धान्त के बिना भूआवृतिविज्ञान एक विज्ञान नहीं हो सकता‚ जिसे पहले केवल वर्णानात्मक कहा गया था।
47. एकरूपता के सिद्धान्त की मुख्य संकेत क्या है?
(a) भूगर्भिक कालों में जलवायु समरूप रही है।
(b) वर्तमान भूत की वंâुजी है
(c) भूगर्भिक काल में हिमनद सदैव महत्वपूर्ण रहे हैं
(d) भूगर्भिक कालों में भूआकृतिक प्रक्रम आज की तरह समान गहनता से कार्य करते रहे हैं
उत्तर-(b) : एकरूपता के सिद्धान्त का मुख्य संकेत है- वर्तमान भूत की वंâुजी है। आधुनिक भूगोलवेत्ता के आधारभूत सिद्धान्त को एकरूपतावाद के सिद्धान्त के नाम से जाना जाता है।
48. किसने सबसे पहले एकरूपता के सिद्धान्त की अवधारणा प्रस्तुत की?
(a) प्लेफेयर (b) डटन
(c) हटन (d) कोबर
उत्तर-(c) : एकरूपता के सिद्धान्त की अवधारणा सर्वप्रथम हट्टन ने 1785 में प्रतिपादित किया। प्लेफेयर के द्वारा 1802 में अच्दी तरह पुन: प्रारम्भ किया गया तथा लायल ने अपनी पुस्तक प्रिसिंपल आफ जियोग्राफी में अनेक संस्करणों के द्वारा इसे लोकप्रिय बनाया।
49. हिमनद अधिक महत्त्पूर्ण थे भूगर्भिक काल में :
(a) टरसियरी काल (b) प्लाइस्टोसीन काल
(c) इओसिन काल (d) परसियन काल
उत्तर-(b) : प्लाइस्टोसीन काल में हिमनद अधिक महत्वपूर्ण थे।
50. चूनीली स्थलाकृति एक महत्वपूर्ण विशेष आकृति है :
(a) यारडंग (b) घोलरंध्र
(c) बाजादा (d) पेडिमेंट
उत्तर-(b) : भूमिगत जल‚ चूना पत्थरों तथा अन्य घुलनशील चट्टानों में घुलनशील पारपथ खेल देते हैं तथा सतह में गर्तबना देते हैं जिन्हें घोल रन्ध्र कहा जाता है।

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