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यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ दिसम्बर-2018 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल UGC NTA NET JRF Philosophy Previous Papers in Hindi 001.

UGC NTA NET JRF Philosophy Previous Papers in Hindi यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ दिसम्बर-2018 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल

1. नैयायिकों के अनुसार किन इन्द्रियों के द्वारा हम बाह्य द्रव्यों का अनुभव करते हैं?
(i) चाक्षुष (ii) स्पर्श
(iii) श्रवण (iv) स्वाद नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए :
(a) केवल (i) (b) केवल (i) और (ii)
(c) केवल (ii) और (iii) (d) केवल (iii) और (iv)
Ans. (b) नैयायिकों के अनुसार चाक्षुष और स्पर्श के द्वारा हमे बाहृय द्रव्यों का अनुभव होता है।
2. निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है?
यज्ञ स्वर्ग का कारण नहीं है क्योंकि यह क्रियात्वात् है।
(a) सव्यभिचार (b) असिद्ध
(c) निरुद्ध (d) बाधित
Ans. (d) ‘यज्ञ’ का सम्बन्ध स्वर्ग से है। अत: प्रस्तुत उदाहरण में ‘बाधित’ हेत्वाभास है। किसी अनुमान का हेतु किसी अन्य प्रमाण से यदि बाधित हो जाय तो वहां बाधिक हेत्वाभास पाया जाता है।
3. नैयायिकों के अनुसार पात्र और इसके रंग के बीच संबंध को………..के द्वारा अनुभव किया जा सकता है।
(a) समवेत समवाय सन्निकर्ष (b) संयुक्त समवाय सन्निकर्ष
(c) समवाय सन्निकर्ष (d) विशेषणता सन्निकर्ष
Ans. (d) विशेषणता सन्निकर्ष नैयायिकों के अनुसार पात्र और इसके रंग के बीच संबंध को विशेषणता सन्निकर्ष के द्वारा अनुभव किया जा सकता है। नैयायिक मूलत: वस्तुवादी दार्शनिक हैं।
4. न्याय ज्ञान मीमांसा में किस प्रकार के प्रत्यक्ष को अतीन्द्रिय कहा जाता है?
(a) अनुव्यवसाय (b) निर्विकल्पक प्रत्यक्ष
(c) सविकल्पक प्रत्यक्ष (d) अलौकिक प्रत्यक्ष
5. निम्नलिखित में से कौन-सा एक वाक्यार्थबोध की शर्त नहीं है?
(a) असत्ति (b) योग्यता
(c) वाक्यशेष (d) तात्पर्य
Ans. (c) प्रत्येक अर्थपूर्ण वाक्य का अर्थ समझने के लिए
(वाक्यार्थ बोध की शर्त) चार शर्तों को पूरा होना चाहिए। आकांक्षा‚ योग्यता‚ सन्निधि (असत्ति) और तात्पर्यज्ञान। अत: यहां वाक्यांश नहीं होगा।
6. नीचे अभिकथन (A) और तर्क (R) दिए गए हैं। उन पर विचार कीजिए और चार्वाक दर्शन के संदर्भ में नीचे दिए गए सही कूट को चुनिए−
अभिकथन (A) : चेतना केवल चार भूतों-पृथ्वी‚ अप‚ तेजस और वायु का उत्पाद है।
तर्क (R) : चार भूतों से अतिरिक्त और ऊपर कुछ भी नहीं है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या है।
(c) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
(d) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
Ans. (b) चार्वाक दर्शन के अनुसार‚ चार-भूतों से ही सृष्टि का उद्भव और विकास हुआ है। वे अभौतिक तत्व की सत्ता को स्वीकार नहीं करते। चार्वाक दर्शन में चेतना को चार भूतों-पृथ्वी‚ अप‚ तेजस और वायु का उत्पाद माना गया है। इसके अतिरिक्त चेतन तत्व कुछ भी नहीं है।
7. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) कुमारिल (i) अख्याति
(b) नागार्जुन (ii) विपरीत ख्याति
(c) प्रभाकर (iii) अभिनव अन्यथा ख्याति
(d) मध्व (iv) असत् ख्याति
(a) (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)
(b) (a)-(iv), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(i)
(c) (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
(d) (a)-(iv), (b)-(ii), (c)-(i), (d)-(iii)
Ans. (c) कुमारिल विपरीतख्यातिवाद नागार्जुन असत्ख्यातिवाद‚ प्रभाकर अख्यातिवाद और मध्व अभिनवअन्यथा ख्यातिवाद के समर्थक है।
8. किसके अनुसार वेद ईश्वर रचित है?
(a) पूर्व मीमांसा (b) न्याय
(c) सांख्य (d) वैशेषिक
Ans. (b) न्याय दर्शन में वेदों को ईश्वरसृष्टि होने के नाते पौरुषेय माना जाता है। न्याय-दर्शन का तर्क है कि वेदों की प्रामाणिकता का कारण ईश्वर है। भले ही वेदों में भिन्न भाग हो‚ परन्तु उनमें अभिप्राय की एकता है। इससे उनका रचयिता भी नित्य‚ अतीन्द्रियार्थदर्शी‚ पूर्ण सर्वज्ञ एवं सर्वशक्तिमान व्यक्ति ही हो सकता हैं ऐसा रचयिता मनुष्य नहीं हो सकता‚ क्योंकि वह अत्यन्त सीमित है। अत: वेदों का रचयिता ईश्वर है।
9. वह मुख्य बात कौन-सी है जिस पर पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा एकमत हैं?
(a) आत्म (जीव) निष्क्रिय है।
(b) वेद सभी ज्ञान की आधारशिला हैं।
(c) वेद पौरुषेय हैं।
(d) जगत आभास है।
Ans. (b) वेद सभी ज्ञान की आधारशिला है। पूर्वमीमांसा और उत्तर मीमांसा (वेदान्त) ‘वेद’ को सभी प्रकार के ज्ञान का मुख्य आधार मानते हैं। दोनों ही सम्प्रदाय वेद को ‘अपौरुषेय’ मानते हैं।
10. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करता है?
(a) चार्वाक और मध्व (b) ईश्वरकृष्ण और चार्वाक
(c) चार्वाक और शंकर (d) मध्व और उद्यन
Ans. (d) ‘मध्व और उद्यन चार्वाक ईश्वर की सत्ता को नहीं मानते‚ ईश्वरकृष्ण‚ शंकर मध्व और उद्यन आदि ईश्वर की सत्ता को मानते हैं। अत: अभीष्ट विकल्प ‘मध्व और उद्यन’ होगा।
11. निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सा शास्त्रीय सांख्य दर्शन का उपयुक्त विवरण है?
(a) सतत सक्रियवाद का दर्शन
(b) केवल बहुलवादी भौतिकवाद का दर्शन
(c) पुरुष-प्रकृति विवेक ज्ञान का दर्शन
(d) एकेश्वरवाद का दर्शन
Ans. (c) शास्त्रीय सांख्य दर्शन पुरुष-प्रकृति के विवेक ज्ञान पर बल देता है। अर्थात् मोक्ष के लिए पुरुष और प्रकृति का विवेक अर्थात् प्रकृति एवं पुरुष के परस्पर भिन्न होने का ज्ञान होना चाहिए। अर्थात् सांख्य दर्शन तत्वज्ञान को मोक्ष (कैवल्य) का साधन मानता है। जो विवेक ज्ञान है।
12. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) शंकर (i) अनुभाष्य
(b) रामानुज (ii) दृग्दृश्यविवेक
(c) मध्व (iii) वेदार्थसंग्रह
(d) वल्लभ (iv) भाष्य-प्रकाश
(a) (a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(i)
(b) (a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(iv)
(c) (a)-(i), (b) (ii), (c)-(iv), (d)-(iii)
(d) (a)-(iv), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(i)
Ans. (b)
(a) शंकर − दृग्दृश्यविवेक
(b) रामानुज − वेदार्थसंग्रह
(c) मध्व − अनुभाष्य
(d) वल्लभ − भाष्य-प्रकाश
13. यह विचार कि आत्म केवल मनोदशाओं का समुच्चय है‚ किसका है?
(a) न्याय और सांख्य
(b) प्रारम्भिक बौद्धमत और वेदांत
(c) योग और वैशेषिक
(d) केवल प्रारम्भिक बौद्धमत
Ans. (d) प्रारम्भिक बौद्ध दर्शन में आत्मा को क्षणिक मनोदशाओं का संघात (समुच्चय) माना जाता है। इनके अनुसार संसार में सब कुछ क्षणिक‚ परिवर्तनशील है। इनके अनुसार जब हम आत्म तत्व का विश्लेषण करते हुए जब अन्दर की ओर देखते हैं तो हमें सर्दी या गर्मी‚ रोशनी या छाया‚ प्रेम-घृणा‚ सुख-दु:ख आदि मनोदशाओं का ही अनुभव होता है। इनका यह विचार ‘अनात्मवाद’ कहलाता है।
14. निम्नलिखित में से किसका ईश्वर में विश्वास नहीं है?
(a) ईश्वरकृष्ण (b) कणाद
(c) धर्मकीर्ति (d) गौतम
Ans. (c) ईश्वर कृष्ण‚ कणाद और गौतम अपनी रचनाओं में ईश्वर के बारे में तर्क देते हैं‚ जबकि ‘धर्मकीर्ति’ ईश्वर को नहीं मानते। ‘धर्मकीर्ति’ बौद्ध-दार्शनिक है।
15. उपनिषदों के संदर्भ में सही क्रम चिन्हित कीजिए−
(a) प्राज्ञ‚ वैश्वानर‚ तैजस
(b) तैजस‚ वैश्वानर‚ प्राज्ञ
(c) वैश्वानर‚ प्राज्ञ‚ तैजस
(d) तैजस‚ प्राज्ञ‚ वैश्वानर
Ans. () इस प्रश्न को गलत माना गया है। उपनिषदों में जीवात्मा की चार अवस्थाओं को माना गया है जो क्रमश:
है−जाग्रत स्वप्न‚ सुषुप्त तथा तुरीय अवस्था है। जिसमें आत्मा को क्रमश:−‘वैश्वानर’‚ ‘तेजस’‚ ‘प्राज्ञ’ और ब्रह्म कहा जाता हैं।
16. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) हेतु सभी भावात्मक उदाहरणों‚ (i) अबाधित जिनमें साध्य है‚ में अवश्य विद्यमान होगा।
(b) हेतु पक्ष के साथ असंगत (ii) पक्षधर्मता नहीं होगा।
(c) हेतु पक्ष में विद्यमान होगा (iii) सपक्षसत्व
(d) हेतु सभी अभावात्मक उदाहरणों (iv) विपक्षसत्व जिनमें साध्य नहीं हैं‚ में विद्यमान नहीं होगा।
(a) (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)
(b) (a)-(i), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(ii)
(c) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iii), (d)-(iv)
(d) (a)-(iv), (b)-(ii), (c)-(i), (d) (iii)
Ans. (a)
(a) हेतु सभी भावात्मक उदाहरणों‚ (iii) सपक्षसत्व जिनमें साध्य है‚ में अवश्य विद्यमान होगा।
(b) हेतु पक्ष के साथ असंगत नहीं होगा (i) अबाधित
(c) हेतु पक्ष में विद्यमान होगा (ii) पक्षधर्मता
(d) हेतु सभी अभावात्मक उदाहरणों‚ (iv) विपक्षसत्व जिनमें साध्य नहीं है‚ में विद्यमान नहीं होगा।
17. वैदिक परम्परा में ईश्वर की सभी शक्तियों का दोत है−
(a) ब्रह्म (b) प्रजापति
(c) ऋत (d) यज्ञ
Ans. (c) वैदिक परम्परा में ईश्वर की सभी शक्तियों का दोत ‘ऋत’ ही है। समस्त सृष्टि ‘ऋत’ के नियमों से ही संचालित है। वेदों में ‘ऋत’ का प्रयोग विश्व व्यवस्था के साथ-साथ नैतिक व्यवस्था के अर्थ में हुआ हैं।
18. नीचे अभिकथन (A) और तर्क (R) दिए गए हैं। गांधी के आलोक में (A) और (R) पर विचार करते हुए सही
कूट चुनिए−
अभिकथन (A) : सभी धर्म सत्य हैं।
तर्क (R) : सभी धर्मों में कुछ त्रुटियाँ हैं।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलते है किन्तु (R) सही है।
Ans. (b) गाँधी जी के अनुसार सभी धर्म सत्य है और सभी धर्मों में कुछ ऋुटियां हैं परन्तु (A) और (R) दोनों सही होते हुए भी (R),
(A) की सही व्याख्या नहीं है।
19. के.सी. भट्टाचार्य के दर्शन में किसे छोड़ कर निम्नलिखित सभी कथन सही हैं−
(a) तर्कशास्त्र तत्त्वमीमांसा की प्रागपेक्षा है।
(b) तर्कशास्त्र विषय के दर्शन की शाखा है।
(c) तर्कशास्त्र विज्ञान है।
(d) तर्कशास्त्र में तत्त्वमीमांसा स्वयं को परिभाषित करती है।
Ans. (c) के.सी. भट्टाचार्य ने तर्कशास्त्र को विज्ञान न मानकर ‘विषय का दर्शन’ माना है। क्योंकि तर्कशास्त्र तथ्य-निर्देश नहीं करते। तर्कशास्त्र ‘शुद्ध रूपों’ की खोज करता है जो ‘शुद्ध विषयों’ के रूप हैं। ‘शुद्ध-विषय’ दर्शन की दूसरी शाखा तत्त्वदर्शन की विषयवस्तु है। अत: वह तर्कशास्त्र को तत्त्वमीमांसा की प्रागपेक्षा मानते हैं। उनके अनुसार तर्कशास्त्र में तत्त्वमीमांसा स्वयं को परिभाषित करती है।
20. नीचे अभिकथन (A) और तर्क (R) दिए गए हैं। टैगोर की माया की अवधारणा के आलोक में नीचे दिए गए सही कूट को चुनिए−
अभिकथन (A) : माया विश्वभ्रान्ति का कारक सिद्धान्त है।
तर्क (R) : माया ईश्वर का स्वारोपित बंधन है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
Ans. (b) टैगोर के अनुसार ‘माया विश्वभ्रान्ति का कारक सिद्धांत है क्योंकि अर्न्तमन में जगत को गलत दृष्टि से देखने की प्रवृत्ति है और यही माया है। उनके अनुसार माया ईश्वर का स्वारोपित बंधन है। परन्तु (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
21. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) विवेकानन्द (i) समग्र अद्वैतवाद
(b) श्री अरविंद (ii) संपर्क अधिकारी
(c) राधाकृष्णन् (iii) व्यावहारिक वेदान्त
(d) इ़कबाल (iv) इस्लामी सत्यों की पुनर्संरचना
(a) (iii), (b) (i), (c) (ii), (d) (iv)
(a) (i), (b) (ii), (c) (iii), (d) (iv)
(a) (ii), (b) (iv), (c) (i), (d) (iii)
(a) (iv), (b) (iii), (c) (ii), (d) (i)
Ans. (a)
(a) विवेकानन्द − व्यावहारिक वेदान्त
(b) अरविन्द − समग्र अद्वैतवाद
(c) राधाकृष्णन − सम्पर्क अधिकारी
(d) इकबाल − इस्लामी सत्यों की पुनर्संरचना
22. अरविंद के दर्शन में विकास की प्रक्रिया में मन विविध अवस्थाओं को निरूपित करने के सही क्रम का सही
कूट चुनिए−
(a) उच्चतर मन‚ प्रदीप्त मन‚ अधिमन‚ अंतर्भास
(b) उच्चतर मन‚ अधिमन‚ अंतर्भास‚ प्रदीप्त मन
(c) उच्चतर मन‚ प्रदीप्त मन‚ अंतर्भास‚ अधिमन
(d) उच्चतर मन‚ अंतर्भास‚ प्रदीप्त मन‚ अधिमन
Ans. (c) श्री अरविन्द के दर्शन में विकास की प्रक्रिया में मन की विविध अवस्थाएं−उच्चतर मन‚ प्रदीप्त मन‚ अंतर्भास‚ अधिमन।
23. टैगोर के अनुसार निम्नलिखित में से किसे ‘देवता का मंदिर’ माना जाता है?
(a) आत्मा (b) शरीर
(c) मन (d) इन्द्रिय
Ans. (b) टैगोर के अनुसार शरीर ‘देवता का मन्दिर’ है। टैगोर ‘शरीर’ को मानव अस्तित्व को सर्वथा असत् या भ्रामक पक्ष न कहकर यह कहते हैं। किन्तु मन्दिर को ईश्वर (देवता) समझ लेने की भूल नहीं करनी चाहिए। अत: हमारी एकाग्रता शरीर पर न होकर ईश्वर् (देवता) पर होना चाहिए।
24. नीचे अभिकथन (A) और तर्क (R) दिए गए हैं। जैन दर्शन के आलोक में (A) और (R) पर विचार करते हुए सही कूट को चुनिए−
अभिकथन (A) : द्रव्य और गुण अपृथक्करणीय हैं।
तर्क (R) : द्रव्य गुण का आश्रय है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
Ans. (b) जैन दर्शन में द्रव्य और गुण को अपृथक्करणीय माना गया है। द्रव्य को गुण का आश्रय भी माना गया है। परन्तु फिर भी यह व्याख्या अपर्याप्त है।
25. यज्ञ…………..के लाभ के लिए किया जाता है।
(a) यजमान
(b) ऋत्विक
(c) देवता
(d) यजमान और ऋत्विक दोनों
Ans. (a) ‘यज्ञ’ यजमान के लाभ के लिए किया जाता है।
26. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) प्रिंसिपिया फिलोसोफिया (i) बर्कले
(b) एन एम्से कंसनिंग ह्यूमन (ii) ह्यूम अंडरस्टैंडिंग
(c) प्रिंसिपल्स ऑफ ह्यूमन नॉलेज (iii) देकार्त
(d) एन इंक्वायरी कंसर्निंग ह्यूमन (iv) लॉक अंडरस्टैंडिंग
(a) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
(b) (a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(i)
(c) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii)
(d) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(ii), (d)-(i)
Ans. (c)
(a) प्रिंसिपिया फिलासोफिया − देकार्त
(b) एन एस्से कंसर्निंग ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग − लॉक
(c) प्रिसिपल्स ऑफ ह्यूमन नॉलेज − बर्कले
(d) एन इंक्वायरी कंसर्निंग ह्यूमन अंडरस्टैडिंग − ह्यूम
27. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और आधुनिक पाश्चात्य दर्शनशास्त्र के संदर्भ में सही कूट को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) संशयवादी (i) बर्कले
(b) आदर्शवादी (ii) लॉक
(c) गुणों का विभाजन (iii) ह्यूम
(d) ईश्वर-प्रेमोन्मत्त (iv) स्पिनोजा
(a) (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)
(b) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
(c) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iii), (d)-(iv)
(d) (a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(i), (d)-(iv)
Ans. (a) ह्यूम संशयवादी‚ बर्कले आदर्शवादी‚ लॉक गुणों का विभाजन‚ स्पिनोजा ईश्वर्-प्रेमोन्मत दार्शनिक हैं।
28. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और लॉक के संदर्भ में सही कूट को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) बाह्य-प्रत्यक्ष ज्ञान (i) आत्मा का ज्ञान
(b) परोक्ष ज्ञान (ii) जगत का ज्ञान
(c) आन्तर-प्रत्यक्ष ज्ञान (iii) ईश्वर का ज्ञान
(a) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iii)
(b) (a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(i)
(c) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii)
(d) (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii)
Ans. (b) लॉक के दर्शन के सन्दर्भ में−बाह्य-प्रत्यक्ष ज्ञान का जगत का ज्ञान‚ परोक्षज्ञान का ईश्वर का ज्ञान और आन्तर-प्रत्यक्ष ज्ञान का आत्मा का ज्ञान से सम्बन्धित है।
29. सही युग्म को चिन्हित कीजिए−
(a) सार्वभौमिक और अनुभबाश्रित
(b) विशिष्ट और प्रागनुभविक
(c) सार्वभौमिक और प्रागनुभविक
(d) विशिष्ट और अनुभबाश्रित
Ans. (c) सहज प्रत्यय वे प्रत्यय हैं जो सार्वभौमिक और प्रागनुभविक होते हैं। बुद्धवादियों के अनुसार समस्त ज्ञान जन्मजात हमारी बुद्धि में निगूढ़ होता है जिसकी अभिव्यक्ति अनुभव के माध्यम से होती है।
30. हेराक्लाइट्स के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सही कूट को चिह्नित कीजिए।
(i) ब्रह्माण्ड का मूल द्रव्य अग्नि है।
(ii) सत् निरन्तर परिवर्तनशील है।
(iii) सत् अपरिवर्तनशील और स्थाई है।
(a) केवल (i) सही है।
(b) केवल (ii) सही है।
(c) केवल (i) और (iii) सही है।
(d) केवल (i) और (ii) सही है।
Ans. (d) ग्रीक दार्शनिक हेराक्लाइट्स परिवर्तन को ही सत् मानता है। उसके अनुसार सत् निरन्तर परिवर्तनशील है और ब्रह्माण्ड का मूल द्रव्य अग्नि है। यह पार्मेनिडीज के सत अपरिवर्तनशील और स्थाई सिद्धान्त के विपरीत है। अत: कथन (i) और (ii) सत्य है।
31. पारमेनाइडी़ज के आलोक में दिए गए अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए और सही कूट को चिह्नित कीजिए−
अभिकथन (A) : रिक्तता संभव नहीं है।
तर्क (R) : रिक्त स्थान अ-सत् होगा इसलिए इसका अस्तित्व नहीं है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
Ans. (a) चूंकि पार्मेनाइडीज सत् की ही एकमात्र सत्ता मानते हैं तथा वह दैशिक‚ परिमित‚ गोलाकार मानते हैं तथा सत को स्वयं चारों ओर सत् से जकड़ा मानते हैं अत: रिक्तता की बात ही नहीं हो सकती है क्योंकि रिक्त स्थान होने पर सत् सत न होकर अ-सत होगा। अत: (A), (R) दोनों सही हैं और (A), (R) की सही व्याख्या भी है।
32. निम्नलिखित मध्ययुगीन दार्शनिकों में से किसने यह तर्क दिया था कि अस्तित्व वह सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण वास्तविकता है जिसके बिना सार भी वास्तविक नहीं हो सकता है।
(a) संत आगस्टॉइन (b) संत ऐन्सेल्म
(c) थॉमस एक्वीनस (d) हाईपेशिया
Ans. (c) थॉमस एक्वीनस के अनुसार ईश्वर के ‘अस्तित्व’ एवं ‘सारतत्व’ में कोई भेद नहीं है। उसके अनुसार ‘अस्तित्व वह सर्वाधिक महत्वपूर्ण वास्तविकता है जिसके बिना सार भी वास्तविक नहीं हो सकता है। वह एन्सेल्म के सत्तामूलक तर्क का खण्डन करता है।
33. वाक्-क्रिया सिद्धान्त के संदर्भ में यह कथन कि ‘‘मैं निश्चयपूर्वक कहता हूँ कि कृष्ण निर्दोष है’’
(a) निष्पादक वाक्य है
(b) वचन कर्म है
(c) निरर्थक उक्ति है
(d) व्यस्थित रूप से भ्रामक अभिव्यक्ति है
Ans. (a) ‘‘मैं निश्चयपूर्वक कहता हूँ कि कृष्ण निर्दोष है’’ एक निष्पादक वाक्य है। वाक्-क्रिया सिद्धान्त में ‘निस्पादक वाक्य’ वे वाक्य हैं जिनका उच्चारण स्वयं में एक क्रिया का निस्पादन करना है। प्रस्तुत कथन में कृष्ण को निर्दोष साबित करने की क्रिया हो रही है।
34. हाइडेगर की ‘डेसिन’ की संकल्पना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) प्रामाणिक आत्मा ‘दे-सेल्फ’ है।
(b) अप्रामाणिक आत्मा ‘बन्स-सेल्फ’ है।
(c) प्रामाणिक आत्मा ‘फॉलेन-सेल्फ’ है।
(d) अप्रामाणिक आत्मा ‘दे-सेल्फ’ है।
Ans. (d) हाइडेगर की डेसिन का आशय मानव अस्तित्व से है। इसकी संकल्पना के संदर्भ में डेसिन को अप्रामाणिक आत्मा ‘दसेल्फ’ कहा जाता है।
35. तर्कीय प्रत्यक्षवाद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
(a) विश्लेषणात्मक प्रागनुभविक ज्ञान असंभव है।
(b) संश्लेषणात्मक अनुभवाश्रित ज्ञान असंभव है।
(c) संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक ज्ञान असंभव है।
(d) विश्लेषणात्मक अनुभवाश्रित ज्ञान संभव है।
Ans. (c) तर्कीय प्रत्यक्षवादी संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक ज्ञान को असंभव मानते हैं। तर्कीय प्रत्यक्षवादी एयर के अनुसार जब संश्लेषणात्मक ज्ञान की बात की जाती है तो वहां पर मनोवैज्ञानिक आधार होता है तथा जब विश्लेषणात्मक ज्ञान की बात की जाती है तो तार्किक/ध्यातव्य हो कि संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक ज्ञान की संभावना की बात काण्ट ने की थी।
36. यह मत किसने दिया कि ‘‘ईश्वर द्वारा सभी ची़जों की रचना मंगलकारी रूप में की गई और अमंगल उस मंगल का भ्रष्ट रूप है’’?
(a) संत आगस्टॉइन (b) संत ऐन्सेल्म
(c) थॉमस एक्वीनस (d) प्लोटिनस
Ans. (a) संत ऑगस्टाइन के अनुसार ‘ईश्श्वर द्वारा सभी चीजों की रचना मंगलकारी रूप में की गई और अमंगल उस मंगल का भ्रष्ट रूप है।’ सृष्टि ईश्वर के संकल्प-स्वातन्त्र्य का परिणाम या अभिव्यक्ति है। प्रत्येक सत् वस्तु शुभ (मंगलकारी) है। अशुभ
(अमंगल) शुभ (मंगल) का अभाव है।
37. लॉक के अनुसार‚ विस्तार और अवधि के प्रत्यक्ष
(a) सरल हैं‚ इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से ज्ञात हैं
(b) जटिल हैं‚ इसलिए प्रत्यक्ष रूप से ज्ञात हैं
(c) सरल हैं‚ इसलिए प्रत्यक्ष रूप से ज्ञात हैं
(d) सरल और जटिल दोनों हैं और इनहें जाना नहीं जा सकता है
Ans. (c) सरल है‚ इसलिए प्रत्यक्ष रूप से ज्ञात है। लॉक के अनुसार सरल प्रत्यय वे हैं जो संवेदन और स्वसंवेदन दोनों से प्राप्त होते हैं। सुगंध‚ मिठास‚ शीतलता का स्पर्श‚ ध्वनि के संवेदन‚ गति‚ विराम‚ आकार‚ विस्तार‚ संशय करना‚ स्मरण करना‚ चिन्तन करना‚ सुख-दु:ख‚ शक्ति‚ सत्ता‚ एकता‚ अनुक्रम‚ अवधि आदि सरल प्रत्यय हैं। सरल प्रत्यय हमारी आत्मा को प्रदत्त है।
38. कांट के अनुसार ‘कारणता’ है−
(a) प्रागनुभविक संकल्पना (b) वर्णनात्मक विवरण
(c) अनुभबाश्रित संकल्पना (d) विशिष्ट श्रेणी
Ans. (a) काण्ट ने ह्यूम द्वारा प्रतिपादित कारणता की अनुभवसापेक्ष् ा एवं मनोवैज्ञानिक अवधारणा का खण्डन किया। काण्ट कारण-कार्य नियम को बुद्धि विकल्प कहते हैं। अत: यह स्वरूपत:
प्रागनुभविक संकल्पना है। काण्ट इसे अनुभव निरपेक्ष अवधारणा मानता है।
39. थेली़ज दर्शन निम्नलिखित में से एक को छोड़कर सबके साथ सुसंगत है। इसका चयन कीजिए।
(a) पृथ्वी एक सपाट डिस्क है जो जल पर तैरती है
(b) सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड जल से घिरा हुआ है
(c) जल ब्रह्माण्ड का आधारभूत दोत है
(d) एपियरॉन ब्रह्माण्ड का आधारभूत दोत है
Ans. (d) ‘एपिरॉन’ को ब्रह्माण्ड का आधारभूत स्त्रोत थेलीज ने नहीं एनैक्जिमेण्डर ने माना है। थेलीज ने जल को आधारभूत स्त्रोत माना है। उनके अनुसार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड जल से घिरा हुआ है तथा पृथ्वी एक सपाट डिस्क है जो जल पर तैरती है। यह ग्रीक दार्शनिक आयोनियन (मिलेटस) सम्प्रदाय का संस्थापक था।
40. निम्नलिखित में से कौन-सा दार्शनिक ‘सत्य की इच्छा को शक्ति की इच्छा’ के बराबर मानता है?
(a) हाइडेगर (b) विटगेंस्टाइन
(c) नीत्शे (d) पीयर्स
Ans. (c) नीत्शे के अनुसार सभी वस्तुएं ‘शक्ति पाने इच्छा की सृष्टि है। उनके अनुसार‚ ‘प्रबलतम या सबसे शक्तिशाली होना विकास का लक्ष्य है।’ उनके अनुसार ‘विश्व नियत शक्ति कणों से बना है जिनमें मनुष्य भी एक क्षणिक है।’ शक्तिशाली जीवन ही अच्छा जीवन है। उसका आदर्श गतिमान है। वह ‘मूल्यों के मूल्यानतरण’ सिद्धान्त का प्रतिपादक है।
41. यह विचार किसका है−‘‘सम्पूर्ण जीवन और सम्पूर्ण शक्ति की इच्छा से संचालित होते हैं’’?
(a) राइल (b) तीत्शे
(c) हुसर्ल (d) विलियम जेम्स
Ans. (b) नीत्शे के अनुसार‚ ‘सम्पूर्ण जीवन और सम्पूर्ण प्रसन्नता शक्ति की इच्छा से संचालित है। नीत्शे शक्ति का तारतम्य मानता है। शक्ति अल्पतम से अधिकतम होती है। शक्ति शून्यता नाम की कोई चीज नहीं है। अधिकतम शक्ति से बढ़कर अनन्त शक्ति है। मनुष्य के पास बुद्धि होने से पशुओं से अधिक शक्ति।
42. विलियम जेम्स के व्यवहारवादी सिद्धांत के आलोक में दिए गए अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए और सही कूट चिह्नित कीजिए−
अभिकथन (A) : जेम्स ने सत्य की सार्वभौमवादी धारणा को अस्वीकृत किया।
तर्क (R) : जेम्स के लिए‚ ‘प्रत्यय में सत्यता घटित होती है’।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलते है किन्तु (R) सही है।
Ans. (b) विलियम जेम्स उत्कट अनुभववाद के समर्थक दार्शनिक है। उनमें व्यवहारवादी सिद्धान्त के आलोक में अभिकथन (A) सत्य है और तर्क (R) भी सही है परन्तु (R) (A) की व्याख्या नहीं है।
43. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) प्लेटो (i) ‘मेटाफिजिक्स’
(b) अरस्तू (ii) ‘सिम्पोजियम’
(c) स्पिनोजा (iii) ‘एन इंक्वायरी कंसर्निंग ह्यूमन अंडरस्टैन्डिंग’
(d) ह्यूम (iv) ‘इथिक्स’
(a) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
(b) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)
(c) (a)-(iv), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(i)
(d) (a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(i), (d)-(iv)
Ans. (b)
(a) प्लेटो − ‘सिम्पोजियम’
(b) अरस्तू − ‘मेटाफिजिक्स’
(c) स्पिनोजा − ‘इथिक्स’
(d) ह्यूम − ‘एन इंक्वायरी कंसर्निंग ह्यूमन अंडरस्टैंन्डिग
44. पूर्वस्थापित सामंजस्य का सिद्धांत किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया?
(a) बर्कले (b) देकार्त
(c) कांट (d) लाइबऩिज
Ans. (d) लाइबनित़्ज बुद्धिवादी दार्शनिक हैं जो चिदणुवाद के समर्थक हैं। उन्होंने अपने चिदणुओं की व्याख्या और मन-शरीर के सम्बन्ध की व्याख्या के लिए पूर्वस्थापित सामंजस्य सिद्धान्त का समर्थन किया है। लाइबनित्ज के अनुसार ईश्वर ने परस्पर स्वतंत्र चिदणुओं को इस प्रकार बनाया है कि वह एक दूसरे से स्वतंत्र होते हुए भी एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं। यह एकता या सामंजस्य चिदणुओं में ईश्वर ने पहले से स्थापित कर दिया है। यह सार्वभौम पूर्वस्थापित सामंजस्य नियम है।
45. ‘‘किसी वस्तु को जाने बिना‚ मैं स्वयं को जान सकता हूँ।’’− यह विचार निम्नलिखित में से किसका है?
(a) बर्कले और लॉक (b) लॉक और ह्यूम
(c) बर्कले और कांट (d) ह्यूम और बर्कले
Ans. (d) अनुभववादी दार्शनिक ह्यूम और बर्कले के अनुसार‚ ‘‘किसी वस्तु को जाने बिना मैं स्वयं को जान सकता हूँ।’’ लेकिन जहाँ बर्कले आत्मा की सत्ता को मानता है वहीं ह्यूम आत्मा पर संशय करता है।
46. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) वायु ब्रह्माण्ड का आधारभूत (i) एम्पेडॉक्ली़ज दोत है
(b) संख्या ब्रह्माण्ड का आधारभूत (ii) अरस्तू दोत है
(c) चार तत्त्वों का सिद्धांत (iii) पाइथागोरस
(d) ईश्वर अप्रवर्तित प्रवर्तक है (iv) एनेक्सीमेऩिज
(a) (iii), (b) (iv), (c) (ii), (d) (i)
(a) (iv), (b) (iii), (c) (i), (d) (ii)
(a) (i), (b) (ii), (c) (iii), (d) (iv)
(a) (iii), (b) (i), (c) (ii), (d) (iv)
Ans. (b)
(a) वायु ब्रह्माण्ड का आधारभूत दोत है − एनेक्सीमेनिज
(b) संख्य ब्रह्माण्ड का आधारभूत दोत है − पाइथागोरस
(c) चार तत्वों का सिद्धान्त − एम्पेडॉक्लीज
(d) ईश्वर अप्रवर्तित प्रवर्तक है − एनेक्सीमेनिज
47. नीचे अभिकथन (A) और तर्क (R) दिए गए हैं। उन पर विचार कीजिए और सही कूट का चयन कीजिए−
अभिकथन (A) : पार्मेनाइडी़ज एक एकतत्त्ववादी था।
तर्क (R) : पार्मेनाइडी़ज के अनुसार सत्ता एक‚ शाश्वत और अविभाज्य है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
Ans. (a) ग्रीक दार्शनिक पार्मेनडरीज सत् का सिद्धान्त प्रतिपादित करता है। वह केवल सत् को ही एकमात्र तत्व मानता था। वह एकतत्त्ववादी दार्शनिक था। उसके अनुसार सत्ता या सत् एक शाश्वत और अविभाज्य है। (A) और (R) दोनों सही हैं‚ की (R)
(A) व्याख्या है।
48. निम्नलिखित में से कौन-सा एक नित्य द्रव्य नहीं है?
(a) परमाणु (b) त्रसरेणु
(c) आकाश (d) मनस
Ans. (b) चूंकि त्रसरेणु परमाणु से ही निर्मित है। अत: परमाणुओं से निर्मित वस्तुएं अनित्य होंगी। परमाणु नित्य हैं। आकाश और मनस भी नित्य सत्ताएं हैं।
49. किस दर्शन का यह विचार है कि द्रव्य और इसके गुण के बीच समवाय संबंध है किंतु हम इसका प्रत्यक्ष नहीं कर सकते हैं?
(a) न्याय (b) वैशेषिक
(c) मीमांसा (d) वेदांत
Ans. (b) वैशेषिक के अनुसार‚ ‘‘क्रिया गुणवत् समवाय कारण मिति द्रव्य लक्षणम्’। द्रव्य और इसके गुण के बीच समवाय संबंध है किन्तु इसका हम प्रत्यक्ष नहीं कर सकते हैं। गुण‚ द्रव्य में रहता हो किन्तु ‘गुण’ का स्वयं कोई गुण नहीं है। गुण गौण रूप से वस्तु में रहकर सहायक होता है।
50. निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है?
सही कूट चुनिए।
(a) साधारण सव्यभिचार (b) स्वरूपासिद्ध
(c) विरुद्ध (d) बाधित
Ans. (b) स्वरूपासिद्ध हेतु वहां होता है जहां आश्रय या पक्ष सत् होता है‚ किन्तु हेतु अपनी प्रकृति के कारण उसमें असिद्ध होता है। जैसे‚ शब्द नित्य है‚ क्योंकि वह चाक्षुष है‚ जैसे रूप। चाक्षुष होना कान का गुण न होकर आँसू का गुण है।
51. निम्नलिखित में से कौन-सी पद्धति प्रमा की परिभाषा ‘तद्वति तत्प्रकारकोऽनुभवों’ के रूप में करता है?
(a) बौद्ध (b) न्याय
(c) मीमांसा (d) जैन
Ans. (b) न्याय दर्शन एक वस्तुवादी (यथार्थवादी) प्रमाणमीमांसा प्रस्तुत करता है। न्याय दर्शन ज्ञान को अनुभव कहता है जिसके दो भेद प्रमा और अप्रमा करता है। प्रमा यथार्थ अनुभव है अर्थात् यत्र यदस्ति तत्र तस्यानुभव: प्रमा‚ तद्वति तत्प्रकारकानुभवो वा।
52. न्याय दर्शन के संदर्भ में सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) ‘चाय गर्म प्रतीत होती है’ (i) सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष
(b) किसी वर्ग के सभी (ii) ज्ञानलक्षण प्रत्यक्ष सदस्यों का प्रत्यक्ष करना
(c) विगत‚ वर्तमान और (iii) निर्विकल्पक प्रत्यक्ष भविष्य की सभी वस्तुओं का प्रत्यक्षीकरण
(d) नाम से असंबद्ध वस्तु (iv) योगज प्रत्यक्ष का प्रत्यक्षीकरण
(a) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
(b) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)
(c) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii)
(d) (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)
Ans. (b)
(a) ‘चाय गर्म प्रतीत होती है’ − ज्ञानलक्षण प्रत्यक्ष
(b) किसी वर्ग के सभी सदस्यों का − सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष प्रत्यय करना
(c) विगत वर्तमान और भविष्य की − योगज प्रत्यक्ष सभी वस्तुओं का प्रत्यक्षीकरण
(d) नाम से असंबद्ध वस्तु का − निर्विकल्पक प्रत्यक्ष प्रत्यक्षीकरण
53. विज्ञानवादी−बौद्धमत के भ्रम सिद्धांत का नाम है
(a) असत्ख्याति (b) सत्ख्याति
(c) आत्मख्याति (d) अनिर्वचनीय ख्याति
Ans. (c) बौद्ध मत के सम्प्रदायों के भ्रम-सिद्धांत क्रमश: शून्यवाद में असतख्यतिवाद या शून्यताख्यातिवाद या अनिर्वचनीय ख्यातिवाद तथा विज्ञानवाद ‘आत्मख्याति’ या ‘विज्ञानख्यातिवाद’ के नाम से जाना जाता है।
54. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) सांख्य दर्शन (i) अप्रामाण्यम् स्वत: है प्रामाण्यम् परत: है।
(b) बौद्ध दर्शन (ii) प्रामाण्यम् और अप्रामाण्यम् दोनों स्वत: है
(c) न्याय दर्शन (iii) प्रामाण्यम् स्वत: है अप्रामाण्यम् परत: है
(d) पूर्व मीमांसा दर्शन (iv) प्रामाण्यम् और अप्रमाण्यम् दोनों परत: हैं।
(a) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
(b) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)
(c) (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)
(d) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii)
Ans. (b)
(a) सांख्य दर्शन − प्रामाण्यम् और अप्रामाण्यम् दोनों स्वत: है।
(b) बौद्ध दर्शन − अप्रमाण्यम् स्वत: और प्रमाण्यम् परत: है।
(c) न्याय दर्शन − प्रामाण्यम् और अप्रामाण्यम् दोनों परत: है।
(d) पूर्व मीमांसा दर्शन − प्रामाण्यम् स्वत: है अप्रामाण्यम् परत: है।
55. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) शांतरक्षित (i) अन्विताभिधानवाद
(b) प्रभाकर मिश्र (ii) स्फोटवाद
(c) भर्तृहरि (iii) अभिहितान्वयवाद
(d) कुमारिल भट्ट (iv) अपोहवाद
कूट−
(a) (a)-(i), (b)-(iv), (c)-(iii), (d)-(ii)
(b) (a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)
(c) (a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(i)
(d) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
Ans. (b)
(a) शांतरक्षित − अपोहवाद
(b) प्रभाकर मिश्र − अन्विताभिधानवाद
(c) भार्तृहरि − स्फोटवाद
(d) कुमारिल भट्ट − अभिहितान्वयवाद
56. निम्नलिखित में से कौन-सी एक पुनरुक्ति है?
(a) p ∨ p (b) p ⊃ p
(c) p.p (d) p ⊃ q
Ans. (b) ‘p ⊃ p’ एक पुनरुक्ति होगा। जिस वाक्याकार के केवल सत्य-प्रतिस्थापन उदाहरण होते हैं‚ उन्हें पुनर्कथन या पुनरुक्ति कहते हैं। ‘p ⊃ p’ एक पुनरुक्ति है।
57. किसके अनुसार शब्द केवल जाति को निर्दिष्ट करता है?
(a) कुमारिल (b) कणाद
(c) वात्स्यायन (d) धर्मकीर्ति
Ans. (a) कुमारिल के अनुसार शब्द केवल जाति को निर्दिष्ट करता है। कुमारिल का मत अभिहितान्वयवाद है।
58. निम्नलिखित वेदांतियों में से किसके द्वारा अनुप्रमाण और केवल प्रमाण के बीच स्पष्ट भेद किया गया था?
(a) रामानुज (b) निम्बार्क
(c) मध्व (d) शंकर
Ans. (c) माध्वाचार्य उग्र द्वैतवादी वेदान्ती दार्शनिक है। उनके अनुसार ‘यथार्थ प्रमाणम्’। जिसके दो अर्थ−केवल प्रमाण और अनुप्रमाण। केवल प्रमाण को वह यथार्थ ज्ञान तथा उसकी प्राप्ति के साधन को अनुप्रमाण।
59. ज्येष्ठों के व्यवहार से शब्द के अर्थ जानने को कहा जाता है।
(a) आप्तवाक्य (b) प्रसिद्बपदसान्निध्य
(c) विवरण (d) बृद्धव्यवहार
Ans. (d) वृद्धव्यवहार ज्येष्ठों के व्यवहार से शब्द के अर्थ जानने को वृद्धव्यवहार कहा जाता है।
60. वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में किस प्रकार का कारण किसी भी तरह से समवाय के संबंध के द्वारा अपने कार्य से संबंधित नहीं है? सही उत्तर चुनिए।
(a) समवाधि और निमित्त
(b) असमवाधि और निमित्त
(c) समवाधि और असमवाधि
(d) मात्र निमित्त
Ans. (d) वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में तीन प्रकार के कारण माने गये हैं‚ समवापिकरण‚ असमवापिकरण तथ्य निमित्तकरण। जो न तो समवापि कारण है एवं न असमवापिकरण वह निमित्तकरण है। यह कारण किसी भी तरह से समवाय के संबंध द्वारा अपने कार्य से संबंधित नहीं है।
61. निम्नलिखित में से कौन-सा जैनियों के त्रिरत्न में सम्मिलित नहीं है?
(a) सम्यक् ज्ञान (b) सम्यक् कर्मान्त
(c) सम्यक् दर्शन (d) सम्यक् चारित्र
Ans. (b) जैन दर्शन की आचार्यमीमांसा ‘त्रिरत्न’ को मोक्ष मार्ग माना जाता है। यह है−सम्यक् दर्शन‚ समयक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र। यह सम्मिलित रूप से मोक्ष के साधन हैं।
62. न्याय के अनुसार गोत्व…………के द्वारा प्रत्यक्ष किया जा सकता है।
(a) संयोग सन्निकर्ष
(b) समवेत समवाय सन्निकर्ष
(c) संयुक्त समवाय
(d) सामान्य लक्षण सन्निकर्ष
Ans. (c) न्याय के अनुसार गोत्व संयुक्त समवाय के द्वारा प्रत्यक्ष किया जा सकता है। जिस सम्बन्ध में संयोग एवं समवाय दोनों की अपेक्षा होती है। चूंकि नैय्यायिक जाति या सामान्य की स्वतन्त्र सत्ता मानकर इसकी व्याख्या करते हैं।
63. निम्नलिखित में से किसने कहा है कि ‘गीता की शिक्षा कर्म का त्याग नहीं है अपितु कर्म में त्याग है’?
(a) श्री अरविंद (b) तिलक
(c) एम. हिरिपन्ना (d) राधाकृष्णन्
Ans. (c) एम. हिरिपन्ना के अनुसार ‘गीता की शिक्षा कर्म का त्याग नहीं है‚ अपितु कर्म में त्याग है।’
64. सही क्रम बताने वाला विकल्प चुनिए
(a) मैत्री‚ करुणा‚ मुदिता‚ उपेक्षा
(b) मैत्री‚ मुदिता‚ करुणा‚ उपेक्षा
(c) करुणा‚ मुदिता‚ उपेक्षा‚ मैत्री
(d) मुदिता‚ करुणा‚ मैत्री‚ उपेक्षा
Ans. (a) मैत्री‚ करुणा‚ मुदिता‚ उपेक्षा‚ क्रमश:। पातंजलि योगसूत्र में श्लोक ‘‘मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां सुख-दु:ख पुण्यापुण्यविषयाणां भावनातश्चित्त प्रसादनम्’’ सुखी व्यक्तियों के प्रति मित्रता की दु:खी व्यक्तियों के प्रति करुणा की सज्जन/पूण्यात्माओं के प्रति मुदिता
(खुशी) व पापी व दुष्ट व्यक्तियों के प्रति उपेक्षा की भावना रखने से चित्र एकाग्र होता है।
65. निम्नलिखित में से किसका यह विचार है कि ‘भगवद्गीतमात्र कर्ममार्गी’ है?
(a) शंकराचार्य (b) रामानुजाचार्य
(c) तिलक (d) विवेकानंद
Ans. (c) बाल गंगाधर तिलक अपने ‘भगवद्गीता भाष्य’ में यह विचार देते हैं कि ‘भगवद्गीता मात्र कर्मभागी’ है।
66. निम्नलिखित में से कौन-सी सद् हेतु की विशेषता नहीं है?
(a) पक्षसत्व (b) विपक्षासत्व
(c) पक्षता (d) अबाधितविषयत्व
Ans. (c) न्याय दर्शन में सद्-हेतु में पक्ष सत्व‚ सपक्षसत्व‚ विपक्षाऽसत्त्व‚ असत्प्रतिपक्षत्व और अबाधितविषयत्व पांच गुण होने चाहिए। यदि हेतु में इनमें से किसी भी गुण की त्रुटि हो तो वह हेतु न होकर ‘हेत्वभास’ हो जाता है।
67. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) प्राकृत संख्याएँ तार्किक (i) रसेल संख्याओं से निगमित होती हैं
(b) तार्किक परमाणुवाद (ii) फ्रेगे
(c) तार्किक सिद्धांत (iii) विट्गेंस्टाइन
(d) अर्थ का प्रयोग सिद्धांत (iv) स्ट्रॉसन
(a) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)
(b) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
(c) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(ii), (d)-(i)
(d) (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)
Ans. (a)
(a) प्राकृत संख्याएं तार्किक संख्याओं से − फ्रेगे निगमित होती है।
(b) तार्किक परमाणुवाद − रसेल
(c) तार्किक सिद्धान्त − स्ट्रासन
(d) अर्थ का प्रयोग सिद्धान्त − विट्गेंस्टाइन
68. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) फेनोमेनोलॉजी (i) मैं हूँ और केवल मेरा अस्तित्व है
(b) अहंमात्रवाद (ii) चिह्न का सिद्धांत
(c) व्यवहारवादी (iii) प्रमुख संकल्पनाएँ विषयपरक और ज्ञानपरक होती हैं
(d) संकेतविज्ञानवादी (iv) वाक् क्रिया
(a) (i), (b) (iii), (c) (ii), (d) (iv)
(a) (iii), (b) (i), (c) (iv), (d) (ii)
(a) (iv), (b) (ii), (c) (iii), (d) (i)
(a) (ii), (b) (iii), (c) (i), (d) (iv)
Ans. (b)
(a) फेनोभेनोलॉजी − प्रमुख संकल्पनाएं विषयपरक और ज्ञानपरक होती हैं।
(b) अहंमात्रवाद − मैं हूँ‚ और केवल मेरा अस्तित्व है।
(c) व्यवहारवादी − बाक्क्रिया
(d) संकेत विज्ञानवादी − चिन्ह का सिद्धान्त
69. नीचे दो कथन दिए गए हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है। ‘उदारवादी नारीवादी’ के आलोक में (A) और (R) पर विचार करते हुए सही कूट का चयन कीजिए−
अभिकथन (A) : पुरुष और महिलाएँ बराबर हैं।
तर्क (R) : पुरुष और महिलाएँ दोनों ही अनिवार्यत:
बौद्धिक प्राणी हैं।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
Ans. (a) ‘उदारवादी नारीवाद’ में पुरुष और महिलाओं को बराबरी का दर्जा प्राप्त है। इसका कारण पुरुष और महिलाओं दोनों को ही बौद्धिक प्राणी माना जाना है। अत: (A) व (R) सही है तथा (R)
(A) की सही व्याख्या है। 70 न्याय-ज्ञानमीमांसा के अनुसार‚ अधोलिखित में किस प्रकार का अनुमान है?
जो ज्ञेय है वह अभिधेय है घट ज्ञेय है
यह अभिधेय है।
(a) पूर्ववत् (b) शेषवत्
(c) केवलान्वयी (d) केवल-व्यतिरेकी
Ans. (c) केवलान्वयी व्याप्ति के प्रकार भेद से अनुमान भी त्रिविध होता है। केवलान्वयी अनुमान वहां होता है जहां केवल अन्वय व्याप्ति हो। प्रस्तुत अनुमान में केवल अन्वय व्याप्ति का सहारा लिया गया है। अत: यहां पर केवलन्वयी अनुमान होगा।
71. ‘‘तुम्हारा मन प्रत्यय के रूप में प्राप्त द्रव्य की इकाई है‚ और शरीर विस्तार के रूप में प्राप्त द्रव्य की इकाई है’’ −वह दृष्टिकोण किसका है?
(a) देकार्त (b) स्पिनोजा
(c) लॉक (d) बर्कले
Ans. (b) स्पिनोजा ने द्रव्य के दो गुण बताएं हैं−प्रत्यय या विचार तथा विस्तार। उनके अनुसार‚ तुम्हारा मन प्रतयय के रूप में प्राप्त द्रव्य की इकाई है‚ और शरीर विस्तार के रूप में प्राप्त द्रव्य की इकाई है।
72. निम्नलिखित दार्शनिकों में से कौन-सा दार्शनिक प्रत्यक्ष को गतिशील द्रव्य से नि:सृत मानता है?
(a) बर्कले (b) ह्यूम
(c) हॉब्स (d) देकार्त
Ans. (c) हॉब्स गतिशील द्रव्य से प्रत्यक्ष को नि:सृत मानता है।
73. सत्यता के सहभागिता सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
(a) वास्तविक स्थिति सही कथनों के समनुरूप नहीं होती है।
(b) सही कथन वास्तविक स्थिति के समनुरूप होते हैं।
(c) सही कथन वास्तविक स्थिति के समनुरूप नहीं होते हैं।
(d) सही कथन उनकी स्वयं की अर्थविषयक संरचनाओं के सत्य के समनुरूप होते हैं।
Ans. (b) वस्तुवादियों ने सत्यता के सहभागिता सिद्धान्त (सुसंगति सिद्धान्त) का समर्थन किया है। यदि कोई निर्वाध सत्ता का संवादी होता है‚ तो वह सत्य होगा। अर्थात् सही/सत्य कथन वास्तविक स्थिति के समनुरूप होते हैं। प्लेटो‚ लॉक आदि इस सिद्धान्त का प्रयोग करते हैं।
74. कर्म के सिद्धांत का अर्थ है।
(a) वैदिक संस्कार का सिद्धांत
(b) निष्कामकर्म का सिद्धांत
(c) अदृष्टवाद
(d) नैतिक कारणता का सिद्धांत
Ans. (d) कर्म के सिद्धान्त का अर्थ भारतीय दर्शन में नैतिक कारणता का सिद्धान्त है। भारतीय दर्शन की मान्यता है कि मनुष्य द्वारा किये गये कर्मों का फल अवश्य मिलता है। जैसा जिसका कर्म रहेगा उसका वैसा ही परिणाम मिलेगा। वर्तमान जन्म पूर्व जन्म के कर्मों के कारण ही है।
75. बौद्ध धर्म में अनात्मवाद का क्या अर्थ है?
(a) आत्मा शरीर से भिन्न है
(b) आत्मा मन नहीं है
(c) मृत्यु के बाद कोई आत्मा नहीं होती
(d) आत्मा स्कंधों का समुच्चय है
Ans. (d) बौद्ध धर्म में शाश्वत आत्मा के अस्तित्व का निषेध किया गया है और प्रतिक्षण परिवर्तनशील माना गया है। बौद्ध धर्म को आत्मा का सिद्धान्त ‘अनात्मवाद’ कहलाता है। अनात्मवाद के अनुसार‚ ‘आत्मा स्कंधों का समुच्चय है।’
76. कान्ट के नैतिक सूत्रों के आलोक में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सही कूट चिह्नित कीजिए−
(i) उसी सूत्र के अनुसार कार्य कीजिए जिसे आप तत्क्षण संकल्प द्वारा सामान्य नियम के रूप में प्रस्तुत कर सकें।
(ii) इस प्रकार आचरण कीजिए कि मानवता चाहे आप में हो अथवा किसी अन्य के व्यक्तित्व में‚ सदैव साध्य रूप में सम्मानित हो‚ साधन रूप में नहीं।
(iii) इस प्रकार आचरण कीजिए कि साध्यों के साम्राज्य की आप सदस्यता ग्रहण कर सकें। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए
कूट−
(a) केवल (i) सही है
(b) केवल (ii) सही है
(c) केवल (i) और (ii) सही है
(d) सभी (i), (ii) और (iii) सही हैं
Ans. (d) काण्ट अपनी पुस्तक ‘क्रिटिक ऑफ प्रेक्टिकल रीजन’ में नैतिकता पांच सूत्र बताता है जो ये हैं−सार्वभौमविधान का सूत्र‚ प्रकृति विधान का सूत्र‚ स्वयं साध्य का सूत्र‚ स्वतंत्रता का सूत्र तथा साध्यों के राज्य का सूत्र/उपर्युक्त (i), (ii) और (iii) तीनों इन्हीं से सम्बन्धित हैं। इन्हें काण्ट अहैतुक या निरपेक्ष आदेश कहता है।
77. निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत नैतिक निर्णय को विषय के अनुमोदन और निरनुमोदन की अभिव्यक्ति के रूप में मानता है?
(a) नैतिक वस्तुनिष्ठवाद (b) नैतिक विषयनिष्ठवाद
(c) नैतिक प्रकृतिवाद (d) नैतिक सापेक्षवाद
Ans. (b) नैतिक विषयिनिष्ठ वाद (Subjectism) नैतिक निर्णय को विषय के अनुमोहन और निरनुमोदन की अभिव्यक्ति के रूप में मानता है।
78. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) कान्ट (i) फाउन्डेशन्स ऑफ एथिक्स
(b) इंविंग (ii) एथिक्स एंड लैंग्वेज
(c) रॉस (iii) द मेटाफिजिक्स ऑफ मोरल्स
(d) स्टीवेन्सन (iv) सेकंड थॉट्स इन मोरल फिलॉसोफी
(a) (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)
(b) (a)-(iv), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(i)
(c) (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
(d) (a)-(iv), (b)-(ii), (c)-(i), (d)-(iii)
Ans. (b)
(a) काण्ट − द मेटाफिजिक्स ऑफ मोरल्स
(b) ईविंग − सेकण्ड थॉट्स इन मोरल फिलासोफी
(c) रॉस − फाउण्डेशन्स ऑफ एथिक्स
(d) स्टीवेन्सन − एथिक्स एवं लैंग्वेज।
79. निम्नलिखित में से कौन इस विचार का समर्थक है कि ‘‘मानव और प्रत्येक बौद्धिक प्राणी की गरिमा का आधार स्वायत्तता है’’?
(a) हॉब्स (b) स्पेन्सर
(c) कान्ट (d) बेन्थम
Ans. (c) काण्ट अपने नैतिक विचारों के आलोक में कहता है कि ‘‘मानव और प्रत्येक बौद्धिक प्राणाी की गरिमा का आधार स्वायत्तता है।’’ काण्ट ‘संकल्प की स्वतंत्रता’ को एक पूर्वमान्यता के रूप में मानता है। यह स्वायत्ता तभी सम्भव है जब मनुष्य अपने स्वतंत्रसंकल्प से कार्य करे।
80. निम्नलिखित में से कौन-सा दंड के निरोधात्मक सिद्धांत के उद्देश्य के संबंध में सत्य है?
(a) अपराधी को अपराध करने तथा दूसरों को भी अपराध करने से रोकना
(b) अपराध के द्वारा गड़बड़ हो गए नैतिक व्यवस्था के पुनर्स्थापन और सामाजिक एकजुटता को सुदृढ़ करना
(c) अपराधी को पुन: अपराध करने के लिए अनुमति देना
(d) अपराधी को कानून का पालन करने वाला नागरिक बनाना
Ans. (a) दण्ड के तीन सिद्धान्त-प्रतिरोधात्मक या निरोधात्मक‚ सुधारात्मक तथा प्रतिकारात्मक सिद्धान्त। निरोधात्मक सिद्धान्त का उद्देश्य ‘अपराधी को अपराध करने तथा दूसरों को भी अपराध करने से रोकना’ है।
81. निम्नलिखित में से किसका यह विचार है कि ‘‘नैतिकता राज्य के कानून के आज्ञापालन में है’’?
(a) बेन्थम (b) मिल
(c) हॉब्स (d) स्पेन्सर
Ans. (c) हॉब्स ‘मनोवैज्ञानिक स्वार्थवाद’ के प्रमुख समर्थक हैं। उनके अनुसार‚ ‘‘नैतिकता राज्य के कानून के आज्ञापालन में है।’’ यह स्वयं के हित में है।
82. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) कान्ट (i) आदर्श आत्मा नैतिक उत्तरदायित्व का दोत है।
(b) टी.एच. ग्रीन (ii) ईश्वर नैतिक उत्तरदायित्व का दोत है।
(c) मार्टिनो (iii) सभी नैतिकता का चरम दोत और उत्तरदायित्व का आधार दु:ख है जो कर्त्तव्य के उल्लंघन का अनुवर्ती है।
(d) जे.एस. मिल (iv) व्यावहारिक बुद्धि नैतिक उत्तरदायित्व का सच्चा दोत है।
(a) (a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)
(b) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(iii)
(c) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii)
(d) (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)
Ans. (a)
(a) काण्ट के अनुसार − व्यावहारिक बुद्धि नैतिक उत्तरदायित्व का सच्चा दोत है।
(b) टी.एच. ग्रीन − आदर्श आत्मा नैतिक उत्तरदायित्व का दोत है।
(c) मार्टिना − ईश्वर नैतिक उत्तरदायित्व का दोत है।
(d) जे.एस. मिल − सभी नैतिकता का चरम दोत और उत्तरदायित्व का आधार दु:ख है जो कर्त्तव्य के उल्लंघन का अनुवर्ती है।
83. निम्नलिखित में से यह विचार किसका है कि नैतिक नियमों के ज्ञान व्यावहारिक बुद्धि के माध्यम से प्राप्त किए जाते हैं?
(a) कान्ट (b) हाचिसन
(c) क्लार्क (d) मार्टिनो
Ans. (a) काण्ट के अनुसार नैतिक नियमों के ज्ञान व्यावहारिक बुद्धि के माध्यम से प्राप्त किये जाते हैं। काण्ट ने तीन पुस्तकें ‘क्रिटिक ऑफ प्योर रीजन’‚ ‘क्रिटिक ऑफ जजमेण्ट’‚ ‘क्रिटिक ऑफ प्रक्टिकल रीजन’ लिखी है जो क्रमश: ज्ञानमीमांसा‚ सौंदर्यमीमांसा तथा नीतिमीमांसा से सम्बन्धित है।
84. नीचे अभिकथन (A) और तर्क (R) दिए गए हैं। गाँधी के आलोक में (A) और (R) पर विचार करते हुए सही
कूट चुनिए−
अभिकथन (A) : यदि हम साधन का ध्यान रखें तो हम निश्चित रूप से साध्य पर पहुँचेंगे।
तर्क (R) : साधन साध्य का औचित्य सिद्ध करता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R) (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है किन्तु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है किन्तु (R) सही है।
Ans. (a) गाँधी अपने दर्शन में साध्य के अलावा साधन की शुद्धता पर ज्यादा जोर देते हैं उनके अनुसार यदि हम साधन की उचितता पर ध्यान दें तो हम निश्चित रूप से साध्य पर पहुँच जायेंगे क्योंकि यदि साधन पवित्र नहीं है तो साध्य का कोई औचित्य नहीं। अत:
(A) और (R) दोनों सही है तथा (R) (A) की व्यख्या है।
85. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I (लेखन) सूची-II (लेखक)
(a) द सीक्रेट्स ऑफ द सेल्फ (i) टैगोर
(b) द फ्लाइट ऑफ द ईगल (ii) राधाकृष्णन्
(c) क्राइसिस इन सिविलाइजेशन (iii) इकबाल
(d) द रेन ऑफ रिलीजन इन कन्टेम्पररी फिलॉसोफी (iv) जे. कृष्णमूर्ति
(a) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(iii)
(b) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii)
(c) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)
(d) (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)
Ans. (b)
(a) द सीक्रेट ऑफ सेल्फ − इकबाल
(b) द फ्लाइट ऑफ द ईगल − जे. कृष्णमूर्ति
(c) क्राइसिस इन सिविलाइजेशन − टैगोर
(d) द रेन ऑफ रिलीजन इन − राधाकृष्णन कटेम्पररी फिलॉसफी
86. बौद्ध मत के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा दु:ख का तात्कालिक पूर्ववर्ती कारण है?
(a) भव (b) अविद्या
(c) संस्कार (d) जाति
Ans. (d) गौतम बुद्ध के अनुसार‚ दु:ख का कारण है। इसके लिए उनका कारणता सिद्धांत ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ कहलाता है। दु:खों के कारण की खोज की प्रक्रिया में बारह कड़ियों वाली एक लम्बी शृंखला की खोज किया जिसकी अन्तिम कड़ी अविद्या है जो मूलभूत कारण है। परन्तु समस्त दु:खों का सांकेतिक रूप ‘जरा-मरण’ को माना है जिसका तात्कालिक पूर्ववर्ती कारण ‘जाति’ अर्थात् जन्म लेना है।
87. निम्नलिखित दार्शनिकों में से किसका विचार है कि ‘‘चिरस्थायी और अंतिम मानव अधिकारों का कोई भी एक अपरिवर्तनशील सेट नहीं हो सकता क्योंकि मानव स्वभाव में निरंतर परिवर्तन होता है’’?
(a) लॉक (b) रूसो
(c) हॉब्स (d) ह्यूम
Ans. (b) रूसो के अनुसार‚ ‘‘चिरस्थायी और अंतिम मानव अधिकारों का कोई भी एक अपरिवर्तनशील समुच्चय (सेठ) नहीं हो सकता क्योंकि मानव स्वभाव में निरन्तर परिवर्तन होता है।’’
88. पॉपर के आगमन की समस्या के समाधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सही कूट को चिन्हित कीजिए−
(i) आगमन की कोई बौद्धिक रूप से तर्कसंगत पद्धति नहीं है।
(ii) आगमन की कोई विश्वसनीय पद्धति नहीं है।
(iii) आगमन की एक विश्वसनीय पद्धति नहीं है। उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिए−
(a) केवल (i) सही है
(b) केवल (i) और (ii) सही हैं
(c) केवल (ii) सही है
(d) केवल (ii) और (iii) सही हैं
Ans. (b) कार्ल आर. पॉपर मिथ्याकरण सिद्बान्त में विश्वास करते हैं। उनके अनुसार‚ आगमन की समस्या के समाधान के सन्दर्भ में आगमन की कोई बौद्धिक रूप से तर्कसंगत पद्धति नहीं है और आगमन की कोई विश्वसनीय पद्धति नहीं है।
89. मध्व वेदांत में स्वातंत्र्य का अर्थ है−
(a) जीव‚ ईश्वर से पूर्णतया स्वतंत्र है।
(b) जीव अपनी सत्ता (अस्तित्व)‚ ज्ञान और प्रवृत्ति (क्रिया) के संबंध में ईश्वर पर निर्भर है।
(c) जीव ईश्वर के साथ प्रतिस्पर्धी है।
(d) जीव ईश्वर के साथ एकरूप है।
Ans. (b) मध्व-वेदान्त द्वैतवाद को मानता है। मध्व वेदान्त में स्वतंत्रता का अर्थ जीव अपनी सत्ता (अस्तित्व)‚ ज्ञान और प्रवृत्ति
(क्रिया) के संबंध में ईश्वर पर निर्भर है।
90. यदि E, F, और G सत्य कथन हैं तथा M और N असत्य कथन हैं‚ निम्नलिखित में से कौन-सा असत्य है?
(a) ~(E.M) ∨ (F.N)
(b) (G.N) ∨ (F ∨ M)
(c) (E∨G) . (M∨F)
(d) ~ [F.G) ∨ ~ (E.N)]
Ans. (d) ~ [F.G) ∨ ~ (E.N)] असत्य है।
91. ‘‘तर्कवाक्यीय फलन के किसी भी सत्य प्रतिस्थापन उदाहरण से हम वैध रूप से उस तर्कवाक्यीय फलन के सत्तात्मक परिमाण को निगमित कर सकते हैं।’’ नियम को पहचानिए।
(a) सार्वभौमिक उदाहरणीकरण
(b) सत्तात्मक सामान्यीकरण
(c) सत्तात्मक उदाहरणीकरण
(d) सार्वभौमिक सामान्यीकरण
Ans. (b) ‘‘तर्कवाक्यीय फलन के किसी भी सत्य प्रतिस्थापन उदाहरण से हम वैध रूप से उस तर्कवाक्यीय लन के सत्तात्मक परिमाण को निगमित कर सकते हैं।’’
92. यदि तर्कवाक्य ‘सभी मनुष्य मरणशील है’ सत्य है‚ तो तर्कवाक्य ‘कुछ मनुष्य मरणशील नहीं है’ का सत्यता मूल्य क्या है?
(a) सत्य (b) असत्य
(c) अभी तक अनिश्चित (d) न तो सत्य न ही असत्य
Ans. (b) सभी मनुष्य मरणशील है‚ एक सकारात्मक कथन है और इसका निषेधात्मक कथन ‘सभी मनुष्य मरणशील नहीं हैं।’ यदि सकारात्मक कथन सत्य होता है तो निषेधात्मक कथन असत्य होगा।
93. निम्नलिखित में से किसके विचार से ‘प्रत्यक्ष’ की परिभाषा−‘इन्द्रियार्थसन्निकर्षोत्पनं ज्ञानं अव्यपदेश्यम् अव्यभिचारी व्यवसायात्मकम्’ है?
(a) धर्मकीर्ति (b) गौतम
(c) कुमारिल (d) उदयन
Ans. (b) न्याय के प्रवर्तक आचार्य गौतम के अनुसार ‘प्रत्यक्ष’ की परिभाषा‚ ‘इन्द्रियार्थ सन्निकर्षोत्यनं ज्ञानं अव्यपदेश्यम् व्याभिचारी व्यवसायात्मकम्’। यह वस्तुवाद के समर्थक हैं।
94. एक युक्ति आकार अवैध है यदि और मात्र यदि−
(a) इसमें सत्य आधार वाक्य और असत्य निष्कर्ष के साथ कोई प्रतिस्थापन उदाहरण नहीं है।
(b) इसमें सत्य आधार वाक्य और असत्य निष्कर्ष के साथ प्रतिस्थापन उदाहरण हैं।
(c) इसमें असत्य आधार वाक्य और सत्य निष्कर्ष के साथ प्रतिस्थापन उदाहरण नहीं हैं।
(d) इसमें असत्य आधार वाक्यों और सत्य निष्कर्ष के साथ प्रतिस्थापन उदाहरण हैं।
Ans. (b) एक युक्ति आकार अवैध है यदि और मात्र यदि इसमें सत्य और सत्य आधार वाक्य और असत्य निष्कर्ष के साथ प्रतिस्थापन उदाहरण थे।
95. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(तर्कशास्त्रीय (तर्कीय समतुल्यता समतुल्यता का नाम) का आकार)
(a) कम्यूटेशन (i) (p
q) α (~q ~p)
(b) डिस्ट्रिब्यूशन (ii) (p
q) α (qp)
(c) ट्रांसपोजिशन (iii) (p
∨⊃q)α(~pq)
(d) मेटीरियल इम्पलीकेशन (iv)[p.(q
r)]α[(p.q) (q.r)]
कूट−
(a) (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iii), (d)-(iv)
(b) (a)-(i), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(ii)
(c) (a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(i)
(d) (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
Ans. (d)
(a) कम्यूटेशन − (p∨q) α (q∨p)
(b) डिस्ट्रीब्यूशन − [p.(q∨r)]α[(p.q) ∨(q.r)]
(c) ट्रांसपोजिशन − (p∨⊃q)α(~p∨q)
(d) मेटीरियल इम्पलीकेशन − (p⊃q) α (~p∨q)
96. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर को चुनिए− सूची-I सूची-II
(a) बोकार्डो (i) तीसरी आकृति
(b) फ्रेसिसन (ii) पहली आकृति
(c) फरियो (iii) चौथी आकृति
(d) सिजै़र (iv) दूसरी आकृति
कूट−
(a) (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)
(b) (a)-(i), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(iv)
(c) (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(iii)
(d) (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)
Ans. (a) बोकार्डो − तीसरी आकृति फ्रेसिसन − चौथी आकृति फेरियो − पहली आकृति स़िजैर − दूसरी आकृति
97. सत्य ……………..का एक गुण है।
(a) तर्कवाक्य (b) युक्ति
(c) शब्द (d) वाक्य
Ans. (a) सत्य ‘तर्कवाक्य’ का एक गुण है। तर्क वाक्य में तीन पर होते हैं−उद्देश्य‚ विधेय और संयोजक।
98. निम्नलिखित प्रतीकात्मक रूपों में से कौन-सा तादात्म्य के सिद्धांत को सही-सही निरूपित करता है?
(a) p. ~p (b) p ∨~ p
(c) p ⊃ p (d) p ⊃ ~ p
Ans. (c) ‘pp’ तादाम्य के सिद्धान्त को सही सही निरुपित करता है।
99. निम्नलिखित युक्ति-रूपों पर विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूट से इसमें सम्मिलित अनुमान के नियम को चिह्नित कीजिए−
कूट−
(a) हाइपोथ्ेटिकल सिलोजिज़्म
(b) मोडस टॉलेन्स
(c) डिस्जन्कटिव सिलोजिज़्म
(d) कन्स्ट्रक्टिव डायलेमा
Ans. (d) यह युक्ति रूप एक कन्स्ट्रक्टिव डायलेमा है।
100. निम्नलिखित में से कौन-सा सोपाधिक है?
(a) संयोजन (b) वियोजन
(c) आपदन (d) निषेध
Ans. (c) सोपाधिक कथन वे कथन होते हैं जो कारण-कार्य से सम्बन्धित होते हैं। ‘आपदन’ सोपाधिक कथन हैं।

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