You are here
Home > Previous Papers > यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ जुलाई-2018 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल UGC NTA NET JRF Philosophy Previous Papers in Hindi 002.

यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ जुलाई-2018 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल UGC NTA NET JRF Philosophy Previous Papers in Hindi 002.

UGC NTA NET JRF Philosophy Previous Papers in Hindi यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ जुलाई-2018 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) व्याख्या सहित द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल

नोट : इस प्रश्नपत्र में सौ (100) बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के दो (2) अंक हैं। सभी प्रश्न अनवार्य हैं।
1. न्याय के अनुसार वृत्ति किसके बीच का सम्बन्ध है?
(a) दो पदा (b) दो पदार्थों
(c) पद एवं पदार्थ (d) पद एवं वाक्य
Ans. (c) : ‘वृत्ति’-पद में रहने वाला वह सामर्थ्य जिससे पद‚ पदार्थ की अभिव्यक्ति का प्रतिपादन करता है‚ ‘वृत्ति’ है। भारतीय दर्शन‚ डॉ. नन्द किशोर देवराज।
2. न्याय के अनुसार‚ चाक्षुष इंद्रिय की वस्तुएँ स्पर्शेन्द्रिय की वस्तुएं भी होती हैं सिवाय:
(a) केवल रूप (b) केवल रूपत्व
(c) रूप और रूपत्व दोनों (d) रूप और स्पर्श दोनों
Ans. (c) : जिन वस्तुओं को हम अपने चक्षुओं (आंख) से देख सकते हैं वो साकार होती है अत: जब उनका स्पर्श होता है तो उनका प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है‚ परन्तु चाक्षुष के समान क्षमता न होने के कारण उनके रूप और रूपत्व का ज्ञान नहीं होता है। केवल हम स्पर्शेन्द्रिय के द्वारा उनकी उपस्थित का प्रत्यक्ष कर सकते हैं।
3. निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है?
निम्नलिखित में से सही कूट का चयन कीजिए:
मृण्मय: पर्वत: बह्निमान
(a) असाधारण सव्यभिचार (b) स्वरूपसिद्ध हेत्वाभास
(c) आश्रयसिद्ध हेत्वाभास (d) विरुद्ध
Ans. (c) : पक्ष हेतु का आश्रय होता है लेकिन जब पक्ष ही असत् हो तो हेतु उसमें नहीं रह सकता। यहाँ ‘मृण्मय: पर्वत: बह्विमान’ में पक्ष ‘मृण्मय: पर्वत:’ आश्रय है जो सर्वथा असत् है।
(भारतीय दर्शन‚ आलोचन और अनुशीलन‚ चन्द्रधर शर्मा)
4. न्याय के अनुसार घट में पटाभाव किस प्रकार का सन्निकर्ष है?
(a) संयोग (b) संयुक्त समवाय
(c) समवाय (d) विशेषणता
Ans. (d) : प्रत्यक्षज्ञान का जनक इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष छह प्रकार का होता है। न्याय के अनुसार अभाव के प्रत्यक्ष में विशेषणविशेष्यभाव सन्निकर्ष होते हैं। अत: घट में पटाभाव का भी सन्निकर्ष विशेषण विशेष्यभाव अर्थात् विशेषणता का सन्निकर्ष है।
5. वैशेषिक दर्शन में ईश्वर जगत का किस प्रकार का कारण है?
(a) समवायी कारण (b) असमवायी कारण
(c) उपादान कारण (d) निमित्तकारण
Ans. (d) ‘वैशेषिक के अनुसार‚ वेद ईश्वर-वाक्य है। ईश्वर नित्य‚ सर्वज्ञ‚ पूर्ण है। ईश्वर अचेतन अदृष्ट के सञ्चालक है। ईश्वर इस जगत के निमित्तकारण और परमाणु उपादान कारण है। ईश्वर का कार्य सर्ग के समय अदृष्ट से गति लेकर परमाणुओं में आद्यस्पन्दन के रूप में सञ्चरित कर देना और प्रत्यय के समय इस गति का अवरोध करके वापस अदृष्ट में संक्रमित कर देना है।
(भारतीय दर्शन‚ आ. और अनु.‚ C.D. Sharma)
6. निम्नलिखित में से कौन वैशेषिक दर्शन के अनुकूल नहीं है?
(a) प्रत्यक्ष प्रमाण है (b) अनुमान प्रमाण है
(c) शब्द प्रमाण है (d) शब्द स्वतंत्र प्रमाण है
Ans. (d) : शब्द स्वतंत्र प्रमाण है। यह वैशेषिक दर्शन के अनुकूल नहीं है क्योंकि वैशेषिक दर्शन में दो ही स्वतंत्र प्रमाण माने गये हैं‚ प्रत्यक्ष और अनुमान। शब्द और उपमान को अनुमान के अन्तर्गत रखा गया है।
7. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिये गये हैं। उन पर विचार कीजिए और चार्वाक दर्शन के संदर्भ में सही
कूट का चयन कीजिये।
(A) प्रत्यक्ष एकमात्र प्रमाण है।
(R) अनुमान प्रमाण नहीं है।
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है।
(d) (A) गलत है और (R) सत्य है।
Ans. (b): चार्वाक दर्शन में केवल इन्द्रिय और अर्थ के सन्निकर्ष से उत्पन्न ज्ञान को प्रत्यक्ष माना गया है। अत: यह प्रत्यक्ष एकमात्र प्रमाण है ‘और’ अनुमान प्रमाण नहीं है सत्य है। परन्तु यह कथन अनुमान प्रमाण नहीं है’ ‘प्रत्यक्ष को एकमात्र प्रमाण’ कहीं से भी सिद्ध नहीं करता।
(भारतीय दर्शन‚ नन्द किशोर देवीराज)
8. यह विचार कि ईश्वर एक प्रकार की आत्मा है‚ किसके द्वारा स्वीकृत है?
(a) केवल चार्वाक दर्शन द्वारा
(b) केवल वैशेषिक दर्शन द्वारा
(c) केवल न्याय दर्शन द्वारा
(d) न्याय और वैशेषिक दर्शन द्वारा
Ans. (d) : न्याय और वैशेषिक दर्शन में ईश्वर को परम-आत्मा माना गया है।
9. जब शब्द की लक्षणा अपने शक्यार्थ का पूरी तरह त्याग कर देती है तो न्याय प्रमाणमीमांसा में उस लक्षणा को कहते हैं:
(a) जहत् लक्षणा (b) व्यंजना
(c) अजहदलक्षणा (d) जहदजहदलक्षणा
Ans. (a) : लक्ष्यार्थ के शक्यार्थ से पूर्णतया भिन्न होने पर (त्याग दिये जाने पर) जहत् -लक्षणा; लक्ष्यार्थ में शक्यार्थ का समावेश होने पर अजहदलक्षणा; लक्ष्यार्थ में शक्यार्थ के किसी भाग का समावेश होने पर जहत् -अजहत् -लक्षणा होती है। इस प्रकार लक्षणा तीन प्रकार की होती है।
10. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिये गये हैं। उन पर विचार कीजिये और नीचे दिये कूट से सही विकल्प का चयन कीजिये।
(A) परमाणु की सत्ता अवश्य स्वीकार की जानी चाहिये।
(R) द्वयणुक सावयव है।
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) का सही आधार है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) का सही आधार नहीं है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है।
(d) (A) गलत है और (R) सही है।
Ans. (a)
11. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये और नीचे दिये गये कूट से सही विकल्प का चयन कीजिये:
सूची – I सूची – II
(a) प्रत्यक्षम् कल्पनापोढम् – (i) धर्मकीर्ति नामजात्याद्यसंयुक्तम्
(b) ज्ञानाकरणकम् ज्ञानम् प्रत्यक्षम् – (ii) दिङ्नाग
(c) इन्द्रियार्थसन्निकर्षोत्पन्नम् ज्ञानम् – (iii) गंगेश अव्यपदेशम्
(d) प्रत्यक्षं कल्पनापोढम् अभ्रान्तम् – (iv) गौतम
कूट :
(a) (b) (c) (d)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (ii) (iv (iii) (i)
(c) (ii) (iii) (iv) (i)
(d) (iii) (ii) (iv) (i)
Ans. (c) :
(a) प्रत्यक्षम् कल्पनापोढम् नामजात्याद्यसंयुक्तम्
(बौद्ध दर्शन) – (ii) दिङ्नाग
(b) ज्ञानाकरणकम् ज्ञानम् प्रत्यक्षम् (न्याय दर्शन) – (iii) गंगेश
(c) इन्द्रियार्थसन्निकर्षोत्पन्नम ज्ञानम अव्ययदेश्यम् अव्यभिचारी व्यावसायात्मिकम् प्रत्यक्षम्
(न्याय दर्शन) – (iv) गौतम
(d) प्रत्यक्षं कल्पनापोढम अभ्रान्तम्
(बौद्ध दर्शन) – (i) धर्मकीर्ति
12. वैशेषिक दर्शन के अनुसार आकाश है:
(a) केवल एक (b) केवल विभु
(c) केवल नित्य (d) एक‚विभु और नित्य
Ans. (d) : वैशेषिक पांच महाभूत-पृथिवी‚ जल‚ तेज‚ वायु और आकाश मानता है। जिनमें प्रथम चार नित्य परमाणु रूप है। पांचवां महाभूत आकाश है जो परमाणुरूप नहीं है‚ किन्तु विभु या व्यापक‚ नित्य और एक है। जिसका गुण शब्द है। आकाश एक भौतिक द्रव्य भी है।
(भारतीय दर्शन-आ. और अनु. -चन्द्रधर शर्मा)
13. न्याय दर्शन के अनुसार मोक्षावस्था में आत्मा रहित है:
(a) केवल दु:ख (b) केवल सुख
(c) केवल चैतन्य (d) दु:ख‚ सुख और चैतन्य
Ans.(d) : न्याय दर्शन में आत्मा को एक अचेतन द्रव्य माना गया है तथा ज्ञान‚ सुख‚ दु:ख आदि उसका आगन्तुक धर्म है। अत: मोक्ष भी अवस्था में आत्मा अपने स्वरूपावस्था में स्थापित हो जाती है। अर्थात् अचेतन आत्मा द्रव्यमात्र रहता है और उसमें नौ गुणों का अभाव हो जाता है-बुद्धि‚ इच्छा‚ प्रयत्न‚ धर्म‚ अधर्म‚ द्वेष‚ संस्कार‚ सुख-दु:ख आदि।
14. नैयायिकों के अनुसार‚ आत्मा हो सकती है:
(a) केवल ज्ञाता (b) केवल ज्ञात
(c) केवल ज्ञान (d) ज्ञाता और ज्ञात
Ans. (d) : न्याय दर्शन में आत्मा को ज्ञाता‚ कर्त्ता एवं भोक्ता माना गया है। न्याय दर्शन के अनुसार आत्मा एक अभौतिक द्रव्य है जिसमें छह गुण हैं-इच्छा‚ द्वेष‚ प्रयत्न‚ सुख‚ दु:ख और ज्ञान। अपने ज्ञान गुण के कारण आत्मा ‘ज्ञात’ (Known) भी है। आत्मा का ज्ञान इच्छा‚ द्वेष‚ प्रयत्न‚ सुख‚ दु:ख के अनुमान के आधार पर होता है। परन्तु नय नैयायिक मानस प्रत्यक्ष के आधार पर आत्मा के ज्ञान की बात करते हैं।
(भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूपरेखा-राममूर्ति पाठक)
15. वैशेषिकों के अनुसार‚ पट के रंग के संदर्भ में तंतु का रंग किस प्रकार का कारण है?
(a) समवायी (b) असमवायी
(c) निमित्त (d) उपादान
Ans. (b) : न्याय-वैशेषिक में कारण के तीन भेद माने गये हैंसमवायी‚ असमवायी और निमित्त कारण। वह द्रव्य जिससे कार्य उत्पन्न होता है‚ समवायीकरण है। जैसे – मिट्टी से घड़ा‚ तन्तुओं से पट्। जो समवायीकरण से निकट सम्बन्ध रखता है तथा जिसमें कारण का सामान्य लक्षण भी घटित होता है‚ वह असमवायीकरण है। यह वह गुण या कर्म है जो समवायीकरण में समवाय संबंध से रहते हुए कार्योत्पत्ति में सहायक होने के कारण है। ‘तन्तु-संयोग’ और ‘तंतु का रंग’ क्रमश: ‘पट्’ और ‘पट्’ के रंग की उत्पत्ति में सहायक है और समवाय संबंध से उसमें (पट्‚ कार्य में) विद्यमान रहते हैं। अत: पट् के रंग मं ‘तन्तु का रंग’ ‘असमवायी’ कारण है।
16. निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है?
निम्नलिखित में से सही कूट का चयन कीजिये : वह्नि अनुष्ण‚ द्रव्यत्वात्
(a) आश्रयासिद्ध (b) बाधित
(c) विरुद्ध (d) सत्प्रतिपक्ष
Ans. (b) : जिस अनुमान में हेतु अबाधित विषय नहीं होता उसे बाधित हेतु कहते हैं। इसमें हेतु द्वारा प्रतिपादित साध्य प्रत्यक्ष आदि प्रबलतर अनुमानेतर प्रमाणों द्वारा बाधित होता है। वह्नि अनुष्णु‚ द्रव्यत्वात् में वृद्धि की अनुष्णता (शीतलता) का खण्डन प्रत्यक्ष द्वारा हो जाता है जो अनुमानेतर प्रमाण है। अत: इसमें बाधित हेत्वाभास है।
17. सूची – I सूची – II से सुमेलित कीजिये और नीचे दिये गये कूट से सही विकल्प का चयन कीजिये:
सूची – I सूची – II
(a) पूर्व-मीमांस (i) सदसद विलक्षण
(b) अद्वैत वेदान्त (ii) अपृथक् सिद्धि
(c) द्वैत वेदान्त (iii) पराधीन विशेषाप्ति
(d) विशिष्टाद्वैत वेदान्त (iv) जातिशक्तिवाद
कूट :
(a) (b) (c) (d)
(a) (ii) (iii) (i) (iv)
(b) (iv) (i) (iii) (ii)
(c) (iii) (ii) (i) (iv)
(d) (iii) (iv) (ii) (i)
Ans. (b) :
(a) पूर्वमीमांसा (iv) जातिशक्तिवाद
(b) अद्वैत वेदान्त (iv) सदसद विलक्षण
(c) द्वैत वेदान्त (iv) पराधीन विशेषाप्ति
(d) विशिष्टाद्वैत (iv) अपृथक् सिद्धि
18. अधोलिखित में से कौन-सा कथन पूर्व-मीमांसा के कुमारिल सम्प्रदाय के साथ संगत नहीं है?
(a) अभिहितान्वयवाद का समर्थन
(b) प्रत्यक्षगत भ्रम में सीपी और चांदी का परस्पर अध्यारोपण
(c) ज्ञान त्रिपुटि संरचित है
(d) प्रत्यक्षगत भ्रम एक कार्य की स्वीकृति है
Ans. (a) CBSE (NET) ने इस प्रश्न के सभी विकल्पों को सत्य माना है। अभिहितान्वयवाद का समर्थन कुमारिल सम्प्रदाय तो करता है परन्तु अन्य तीन विकल्पों के संबंध में कुछ स्पष्ट नहीं है।
19. निम्नलिखित में से कौन द्वैत वेदान्त के साथ संगत नहीं है?
(a) भेद और विशेष का विचार द्वैत वेदान्त के लिये मौलिक और केन्द्रीय है
(b) जगत् आभास है
(c) बह्म अनन्तकल्याण-गुण परिपूर्ण है
(d) जीव और ब्रह्म का तात्त्विक भेद है
Ans. (b) : द्वैत-वेदान्त के समर्थक मध्वाचार्य‚ शंकर के अद्वैतवाद के विरोध में सविशेष ब्रह्मवाद‚ परिणामवाद‚ जगत्सत्यत्व‚ भक्तिवाद आदि का समर्थन करते हुए आत्यन्तिक भेदवाद के समर्थक है। अद्वैत वेदान्त के जगत आभास है के विपरीत द्वैत वेदान्त में जगत को वास्तविक तथा सप्रयोजन बताया गया है।
(भारतीय दण्ड-डॉ. नन्द किशोर देवराज)
20. उपनिषदों के अनुसार सही क्रम बताइए:
(a) निदिध्यासन‚ मनन‚ श्रवण
(b) मनन‚ श्रवण‚ निदिध्यासन
(c) श्रवण‚ मनन‚ निदिध्यासन
(d) श्रवण‚ निदिध्यासन‚ मनन
Ans. (c) : उपनिषदों में आत्म-साक्षात्कार के लिए श्रवण‚ मनन एवं निदिध्यासन ये तीन मार्ग बतलाये गये हैं। सर्वप्रथम जीव गुरुमुख से ब्रह्म और आत्मा के आभेद-ज्ञान का श्रवण करता है। श्रवण के बाद मनुष्य उस ज्ञान पर तर्कपूर्ण चिंतन अर्थात् मनन करता है। जब मनन द्वारा समस्त शंकाओं का समाधान हो जाता है तो वह पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति के लिए ‘ध्यान’ करता है अर्थात् ब्रह्मात्मैक्यज्ञान का बारम्बार चिंतन अर्थात् ‘ध्यान’। इस ध्यान को उपनिषदों में निदिध्यासन कहा गया है।
21. कुमारिल की ज्ञान-मीमांसा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन असंगत है?
(a) स्वत: प्रामाण्यवाद (b) विपरीतख्याति वाद
(c) परत: प्रामाण्यवाद (d) अभिहितान्वयवाद
Ans. (c) : कुमारिल भी पूर्व मीमांसक है। कुमारिल की ज्ञानमीमांसा में विपरीतख्यातिवाद का सिद्धान्त भ्रम-का सिद्धान्त है‚ शब्द से सम्बन्धित सिद्धान्त अभिहितान्वयवाद और ज्ञान के प्रामाण्य संबंधित सिद्धान्त प्रमाण्यवाद एवं परत: अप्रमाण्यवाद कहलाता है।
22. अन्विताभिधानवाद का समर्थन निम्नलिखित में से किस दार्शनिक द्वय ने किया है?
(a) प्रभाकर और मण्डन (b) कुमारिल और वाचस्पति
(c) गौतम और प्रशस्तपाद (d) नागार्जुन और दिङ्नाग
Ans. (a) :अन्विताभिधानवाद। शब्द और उसके अर्थ को लेकर कुमारिल और प्रभाकर के अपने-अपने मत है। प्रभाकर के मत को अन्विताभिधानवाद कहते हैं। जिसका समर्थन मण्डन मिश्र भी करते हैं। अन्विताभिधान के अनुसार वाक्य के आरंभ से लेकर अन्त तक शब्द इस प्रकार अन्वित रहते हैं कि पूर्ववर्ती शब्द अपने परवर्ती शब्द में अपने अर्थ को समाविष्ट कर देता है। कुमारिल का मत अभिहितान्वयवाद कहलाता है।
23. निम्नलिखित में से कौन ‘शंकर’ के लिये स्वीकार्य है?
(a) ब्रह्म और जीव में परस्पर भिन्नता और तादात्म्य है
(b) ब्रह्म निर्गुण है
(c) वैष्णव धर्म के सनक सम्प्रदाय के प्रवर्तक है
(d) भक्ति से उद्भुत ईश्वर प्रसाद द्वारा ज्ञान से मोक्ष प्राप्तव्य है।
Ans. (b) : आचार्य शंकर अद्वैत वेदान्ती है। अद्वैत वेदान्त में ज्ञान को महत्व दिया गया है। ब्रह्म‚ जीव‚ जगत और जीव‚ ब्रह्म और जगत में द्वैत मात्र आभास है‚ सत्य अद्वैत है। अद्वैत वेदान्त के अनुसार ब्रह्म निर्गुण‚ निर्विशेष है। वह मोक्ष प्राप्ति का साधन प्रमुख रूप से ज्ञान का मानते हैं।
24. जैन दर्शन के अनुसार दूसरों के विचारों का सीधा ज्ञान है:
(a) अवधि (b) मन:पर्याय
(c) मति (d) केवल
Ans. (b): जैन दर्शन में प्रत्यक्ष के कुल पांच भेद प्राप्त होते हैंअवधि ज्ञान‚ मन: पर्यायज्ञान‚ केवल ज्ञान‚ मति ज्ञान और श्रुत ज्ञान। मन: पर्याय ज्ञान में अन्य व्यक्तियों के मन के भावों अैर विचारों का ज्ञान है।
(भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूपरेख -राममूर्ति पाठक)
25. डॉ. अम्बेडकर द्वारा समर्थित त्रयी सिद्धान्त क्या है?
(a) अहिंसा‚ सत्य और शान्ति
(b) असहयोग‚ चोरी न करना और असमानीकरण
(c) क्रान्ति‚ ऐतिहासिक भौतिकवाद और द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद
(d) स्वतन्त्रता‚ समानता और बन्धुत्व
Ans. (d) डॉ. अम्बेडकर द्वारा समर्थित त्रयी सिद्धान्त स्वतंत्रता‚ समानता बन्धुत्व है।
(Pradeep P. Gokhale, Rearch Professor CUTS, Sarnath, Varanasi)
26. निम्नलिखित अनुमान में कौन-सा हेत्वाभास है? सही कूट का चयन करें: शब्द अनित्य चाक्षुषत्वात्
(a) स्वरूपासिद्ध हेत्वाभास (b) बाधित हेत्वाभास
(c) विरुद्ध हेत्वाभास (d) सव्यभिचार हेत्वाभास
Ans. (a) ‘शब्द अनित्य चाक्षुषत्वात्’ में स्वरूपासिद्ध हेत्वाभास है। क्योंकि ‘चाक्षुष होना’ हेतु स्वभावत: पक्ष ‘शब्द’ में असिद्ध है क्योंकि चाक्षुष होना कान का गुण न होकर आँख का गुण है।
27. ‘कर्मयोगी’ के सम्बन्ध में अधोलिखित कथन दिये गये हैं। इनमें से सही कूट का चयन कीजिये:
(a) कर्मयोगी मुक्ति के लिये कार्य करता है
(b) कर्मयोगी स्वर्ग के लिये कार्य करता है
(c) कर्मयोगी समस्त कर्मों के परित्याग के लिये कार्य करता है
(d) कर्मयोगी लोकसंग्रह के लिये कार्य करता है
कूट :
(a) (a) और (b) (b) (b) और (c)
(c) (a) और (d) (d) (b) और (d)
Ans. (c): ‘कर्मयोगी’ भगवद्गीता का एक प्रमुख आदर्श है। इसे ‘स्थितप्रज्ञ’ भी कहते हैं।े जो स्थिर बुद्धि: निष्काम भाव से कर्म करता हुआ आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त होता है। जिसका प्रत्येक कर्म दूसरों की मुक्ति के लिए और लोकसंग्रह के लिए होता है।
(भगवद्गीता-गीताप्रेस)
28. गीता के अनुसार चार प्रकार के वर्णों के विभाजन का आधार क्या है?
(a) केवल गुण (b) केवल कर्म
(c) गुण और कर्म दोनों (d) केवल लोकप्रसिद्धि
Ans. (c): ‘चातुर्ववर्यं’ मया सृष्टं गुणकर्मविभागश:।’ अर्थात् श्री कृष्ण अर्जुन से स्पष्ट कहते हैं कि मैंने चारों वर्णों की रचना गुण और कर्म के आधार पर किया ।
(भगवद्गीता 4/13)
29. सूची – I का सूची – II के साथ मिलान करें और नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करते हुए ख्यातिवाद के संबंध में सही उत्तर का चयन करें:
सूची – I सूची – II
(a) अख्याति (i) विज्ञानवाद
(b) आत्मख्याति (ii) प्रभाकरन मीमांसा
(c) अन्यथाख्याति (iii) न्याय
(d) अनिर्वचनीयख्याति (iv) अद्वैत वेदान्त
कूट :
(a) (b) (c) (d)
(1) (ii) (i) (iii) (iv)
(2) (i) (iii) (ii) (iv)
(3) (i) (ii) (iii) (iv)
(4) (ii) (iii) (i) (iv)
Ans. (a) :
(a) अख्याति (ii) प्रभाकर मीमांसा
(b) आत्मख्याति (i) विज्ञानवाद
(c) अन्यथाख्याति (ii) न्याय
(d) अनिर्वचनीयख्याति (iv) अद्वैत वेदान्त
30. सूची – I का सूची- II के साथ मिलान करें और नीचे दिए कूट का प्रयोग करते हुए प्रामाण्य के संबंध में सही उत्तर का चयन करें:
सूची – I सूची- II
(a) बौद्ध (i) परत: प्रामाण्य‚ अप्रामाण्य
(b) सांख्य (ii) स्वत: प्रामाण्य‚ परत: अप्रामाण्य
(c) मीमांसा (iii) स्वत: प्रामाण्य‚ परत: अप्रामाण्य
(d) न्याय-वैशेषिक (iv) स्वत: प्रामाण्य‚ अप्रामाण्य
कूट :
(a) (b) (c) (d)
(1) (ii) (iii) (i) (iv)
(2) (ii) (iv) (iii) (i)
(3) (iii) (ii) (iv) (i)
(4) (i) (iii) (iv) (ii)
Ans. (b) :
(a) बौद्ध (ii) बौद्धों के प्रामाण्यवाद में स्वत: प्रामाण्य परत: अप्रामाण्य माना है।
(b) सांख्य (iv) सांख्य स्वत: प्रामाण्य और स्वत: अप्रामाण्य मानता है।
(c) मीमांसा (iii) मीमांसा स्वत: प्रामाण्य और परत: अप्रामाण्य
(d) न्याय-वैशेषिक (i) न्याय वैशेषिक परत: प्रामाण्य और परत: अप्रामाण्य मानता है।
31. ‘समान के साथ समान व्यवहार और असमान के साथ असमान व्यवहार यह किसका विचार है?
(a) सुकरात (b) बेन्थम
(c) अरस्तू (d) मिल
Ans. (c) अरस्तू के अनुसार‚ ‘समान के साथ समान और असमान के साथ असमान् व्यवहार करना चाहिए।’ ‘पॉलिटिक्स’ और ‘इथिक्स’ अरस्तू की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।
32. निम्नलिखित में से किसने कहा है कि ‘‘व्यक्तित्व और सम्पत्ति साथ-साथ चलता है’’?
(a) कांट (b) हीगल
(c) रॉस (d) रॉल्स
Ans. (b) : हेगल के अनुसार‚ संपत्ति का विचार व्यक्ति के आत्मा के संकल्प स्वातंन्त्रय की अभिव्यक्ति है। अधिकार स्वतंत्र व्यक्तियों के ही हो सकते हैं‚ वस्तुओं के नहीं। अर्थात् संपत्ति की अवधारणा के हेगेल एक अधिकार मानता है। और अधिकार किसी व्यक्ति के हो सकते हैं जो व्यक्तित्व सम्पन्न हो। हेगेल के अनुसार ‘व्यक्ेितत्व और सम्पत्ति साथ चलते हैं।
33. तीन प्रकार के न्याय-वितरणात्मक‚ दंडात्मक‚ योग्यतानुपाती-की पहचान किसने की है?
(a) प्लेटो (b) अरस्तू
(c) हॉब्स (d) लॉक
Ans. (c) : अरस्तू ने अपने दर्शन में तीन तरह के न्याय बारे में बात करता है। वितरणात्मक न्याय अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यतानुसार न्याय मिलना चाहिए। दण्डात्मक न्याय अर्थात् गलत कार्यों के लिए दण्ड की व्यवस्था भी होनी चाहिए जिसे वह ऋणात्मक पुरस्कार भी कहता है।
34. ‘आदमी को घोड़ा चुराने के लिए फाँसी नहीं दी जाती है बल्कि इसलिए कि कहीं दूसरे के द्वारा घोड़ा चुरा नहीं लिया जाए’ इसका सम्बन्ध किससे है?
(a) दंड का प्रतीकारात्मक सिद्धान्त
(b) दंड का सुधारात्मक सिद्धान्त
(c) फाँसी की सजा का सिद्धान्त
(d) दंड का निवारक सिद्धान्त
Ans. (d) : दण्ड के तीन सिद्धान्त प्रचलित है। दण्ड के प्रतीकारात्मक सिद्धान्त के अनुसार अपराधी को उसके अपराध अनुरूप ही दण्ड मिलना चाहिए। दण्ड के निवारक सिद्धान्त के अनुसार‚ दण्ड को ऐसा होना चाहिए कि वह पूर्व में किये गये अपराध के लिए दण्ड का काम करे और संभावित अपराधों का भी निवारण करे। दण्ड के सुधारात्मक सिद्धान्त के अनुसार अपराधी को नियंत्रण में रखकर दण्ड तो देना ही चाहिए और साथ-साथ ही उसकी अनंत संभाव्यता को देखते हुए सुधारने का भी पूरा प्रयास करना ही चाहिए।
(नीतिशास्त्र: सिद्धान्त और व्यवहार-प्रो. नित्यानंद मिश्र)
35. ‘या तो इच्छा स्वातन्त्रय वास्तविक है या नैतिक भ्रान्ति’ यह किसका कथन है?
(a) हॉब्स (b) मार्टिन्यू
(c) कांट (d) हीगल
Ans. (b) : या तो इच्छा स्वातन्त्रय वास्तविक है या फिर नैतिक निर्णय भ्रान्ति यह कथन मार्टिन्यू का है।
(नीतिशास्त्र: सिद्धान्त और व्यवहार-प्रो. नित्यानंद मिश्र)
36. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन करें :
सूची-I सूची-II
(विचारधारा) (कथन)
(A) अतिवादी नारीवाद (i) ध्Eिायों की स्वतन्त्रता के लिए संघर्ष अनिवार्यत: पूंजीवाद के विरुद्ध संघर्ष से जुड़ा है।
(B) उदारवादी नारीवाद (ii) स्त्री और पुरुष को समान समझना चाहिए
(C) समाजवादी नारीवाद (iii) स्त्री‚ स्त्री के रूप में जन्म नहीं लेती है बल्कि बनाई जाती है।
(D) मार्क्सवादी नारीवाद (iv) पुरुष और स्त्री दोनों अनिवार्यत: बुद्धिमान प्राणी है।
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (iii) (ii) (iv) (i)
(b) (i) (iii) (ii) (iv)
(c) (ii) (i) (iv) (ii)
(d) (iv) (iii) (i) (ii)
Ans. (a) :
(a) अतिवादी नारीवाद (iii) स्त्री‚ स्त्री के रूप में जन्म नहीं लेती है‚ बल्कि बनाई जाती है।
(b) उदारवादी नारीवाद (ii) स्त्री और पुरुष को समान समझना चाहिए
(c) समाजवादी नारीवाद (iv) पुरुष और स्त्री दोनों अनिवार्ययत:
बुद्धिमान प्राणी है।
(d) मार्क्सवादी नारीवाद (i) ध्Eिायों की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष अनिवार्ययत: पूंजीवाद के विरुद्ध संघर्ष से जुड़ा है।
37. स्टीवेन्सन के अनुसार‚ नैतिक निर्णयों की विभेदकारी विशेषता निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(a) आदेशात्मक कथन
(b) कर्म के परिणाम का अनुमोदन
(c) तथ्यात्मक कथन
(d) अभिवृत्तीय असहमति
Ans. (d) : सी.एम. स्टीवेन्सन का नैतिक निर्णय संबंधी मत ज्ञान-निरपेक्ष अभिवृत्यात्मक मत है। अभिवृत्तीय असहमति को नैतिक निर्णयों की विभेदकारी विशेषता माना गया है।
38. यह बताया गया है कि उपयोगितावाद के लिए मिल के तर्क निम्नलिखित दोष से ग्रस्त है :
(a) मुख्य पद दोष (b) अमुख्य पद दोष
(c) अव्याप्त मध्यम पद दोष (d) आलंकारिक दोष
Ans. (d): मिल के उपयोगितावाद के समर्थन में दिये गये तर्कों में आलंकारिक दोष के साथ-साथ प्राकृतिपरक दोष‚ ‘समेकितीकरण दोष’ भी है।
39. ‘किसी कर्म की अच्छाई का निर्धारण उसके परिणाम द्वारा होता है’ इस सिद्धान्त का सम्बन्ध किससे है?
(a) विवरणात्मक (b) फलनिरपेक्षतावाद
(c) निर्देशात्मक (d) प्रयोजनमूलक
Ans. (d): प्रयोजनमूलक सिद्धान्त के अनुसार कोई भी कार्य सप्रयोजन होता है और सदैव अच्छाई के लिए होता है। इसका तो शुभ उद्देश्य होता है।
40. कांट के अनुसार नैतिक नियम :
(a) बुद्धि पर आधारित अनुभव निरपेक्ष होते हैं
(b) बुद्धि पर अनाश्रित अनुभव निरपेक्ष होते हैं
(c) बुद्धि पर अनाश्रित अनुभव सापेक्ष होते हैं
(d) बुद्धि पर आधारित अनुभव सापेक्ष होते हैं
Ans. (a) : कांट के अनुसार‚ नैतिक नियम बुद्धि पर आधारित अनुभव निरपेक्ष होते हैं। कांट ने नैतिकता को व्यावहारिक बुद्धि का विषय माना है। नैतिक नियम को सदिच्छा की संज्ञा कांट अपने दर्शन में देता है।
41. नीचे दिए गए न्याय वाक्यों में निहित दोष की पहचान करें :
– सभी पालतू घरेलू पशु हैं। – कोई भी शेर घरेलू पशु नहीं है। इसलिए कुछ शेर पालतू नहीं हैं।
कूट :
(a) अनन्य पद-दोष (b) अमुख्य पद-दोष
(c) सत्तात्मक -दोष (d) अव्याप्त मध्यम पद-दोष
Ans. (c) : जब दो सर्वव्यापी तर्क वाक्यों से अंशव्यापी निष्कर्ष ेनिगमित किया जाता है‚ तो उसमें एक प्रकार का दोष होता है। जिसे सत्तात्मक दोष कहते हैं।
42. यदि यह नियम कि ‘‘कोई भी पद निष्कर्ष में व्याप्त है उसे आधार वाक्य में भी अवश्य व्याप्त होना चाहिए’’ का पालन नहीं किया जाता है तो कौन-सा दोष संयोजन उत्पन्न होगा?
(a) अव्याप्त मध्यम पद और मुख्य पद दोष
(b) अव्याप्त मध्यम पद और आधार वाक्य का अपवर्जन दोष
(c) मुख्य पद दोष और अमुख्य पद दोष
(d) आधार वाक्य अपवर्जन का दोष और मुख्य पद दोष
Ans. (c) : चूंकि निष्कर्ष में दो पद अमुख्य पद और मुख्य पद होते हैं। वैध निरपेक्ष न्याय वाक्य में कोई भी ऐसा पद निष्कर्ष में व्याप्त नहीं हो सकता जो आधार वाक्यों में व्याप्त न हो। जब किसी न्याय वाक्य का मुख्य पद आधार वाक्य में अव्याप्त और निष्कर्ष में व्याप्त हो तो अनियमित मुख्य पद दोष होता है। इसी तरह अमुख्य पद के लिए अनियमित अमुख्य पद दोष होगा।
43. तात्कालिक अनुमान में प्रतिज्ञप्ति को प्रतिवर्तित करने के लिए:
(a) केवल प्रतिज्ञप्ति के गुण को बदलना होता है।
(b) केवल प्रतिज्ञप्ति के परिमाण को बदलना होता है।
(c) गुण को बदलना होता है और विधेय पद को उसके अवयव के साथ प्रतिस्थापित करना होगा।
(d) मात्रा का बदलना होगा और विधेय पद को उसके अवयव के साथ प्रतिस्थापित करना होगा।
Ans. (c) : अव्यवहित अनुमान (तात्कालिक अनुमान) में प्रतिज्ञप्ति को प्रतिवर्तित (Obvert) करने के लिए किसी तर्कवाक्य का गुण परिवर्तन करते हैं और विधेय के स्थान प उसका पूरक पद रखते हैं। प्रतिवर्तन में उद्देश्य पद अपरिवर्तित रहता है और प्रतिवर्तित होने वाले तर्कवाक्य का परिमाण भी अपरिवर्तित रहता है।
(Introduction of logic: Irving M. Copi)
44. परम्परागत विरोध वर्ग में यदि O सत्य है‚ जो
(a) ‘A’ सत्य है‚ E असत्य है‚ ‘ I ‘ अव्याप्त है।
(b) ‘A’ सत्य है‚ ‘E’ और‚ ‘ I ‘ अव्याप्त हो गए हैं।
(c) ‘A’ असत्य है‚ E और ‘ I ‘अव्याप्त’ है।
(d) ‘A’ असत्य है‚ E और ‘ I सत्य है।
Ans. (c): परम्परागत विरोध वर्ग में यदि:-
‘A’ सत्य हो तो- ‘E’ असत्य है‚ ‘ I ‘ सत्य है‚ ‘O’ असत्य है। ‘E’ सत्य हो तो – ‘A’ असत्य ‘I’ असत्यए ‘O’ सत्य। ‘I’ सत्य हो तो – ‘E’ असत्य‚ ‘A’ और ‘O’ अनिश्चित। ‘O’ सत्य हो तो – ‘A’ असत्य‚ ‘E’ और ‘I’ अनिश्चित। ‘A’ असत्य हो तो – ‘O’ सत्य‚ ‘E’ और ‘I’ अनिश्चित। ‘E’ असत्य हो तो – ‘I’ सत्य‚ ‘A’ और ‘O’ अनिश्चित। ‘I’ असत्य हो तो – ‘A’ असत्य‚ ‘E’ सत्य‚ ‘O’ सत्य । ‘O’ असत्य हो तो – ‘A’ सत्य‚ ‘E’ असत्य‚ ‘I’ सत्य ।
45. सूची-I (आकार) और सूची-II (प्रकार) की सुमेलित करें और नीचे दिएगए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन करें सूची-I सूची-II
(आकार) (प्रकार)
(A) प्रथम आकार (i) Fresison
(B) द्वितीय आकार (ii) Ferio
(C) तृतीय आकार (iii) Festino
(D) चतुर्थ आकार (iv) Ferison
कूट :
(a) (b) (c) (d)
(a) (ii) (iii) (i) (iv)
(b) (ii) (i) (iii) (iv)
(c) (ii) (iii) (iv) (i)
(d) (ii) (iv) (i) (ii)
Ans. (c) :
(A) प्रथम आकार – (ii) FERIO
(B) द्वितीय आकार – (ii) FESTINO
(C) तृतीय आकार – (ii) FERISON
(D) चतुर्थ आकार – (ii) FRESISON
46. निम्नलिखित में से किस मामले में तर्क अवैध हो सकता है।
(a) आधार वाक्य सत्य है और निष्कर्ष सत्य है
(b) आधार वाक्य सत्य है और निष्कर्ष असत्य है
(c) आधार वाक्य असत्य है और निष्कर्ष असत्य है
(d) आधार वाक्य असत्य है और निष्कर्ष सत्य है
Ans. (b) : तर्क की वैधता और अवैधता की बात निगमनात्मक अनुमान में की जाती है। निगमनात्मक युक्ति/अनुमान/तर्क तब वैध होता है जब इसके आधार वाक्य सत्य हो और निष्कर्ष के लिए निश्चायक साक्ष्य प्रस्तुत करते हो अर्थात् आधार वाक्य और निष्कर्ष इस प्रकार सम्बद्ध हो कि आधार-वाक्यों का सत्य होना तब तक असंभव हो जब तक कि निष्कर्ष भी सत्य न हो। तर्कशास्त्र का परिचय- I.M. Copi (पाण्डेय और मिश्र)
47. निम्नलिखित प्रतिज्ञप्तियों पर ध्यान दें और सही उत्तर का चयन करें :
‘‘सभी न्यायाधीश वकील होते हैं।’’ ‘‘कुछ न्यायाधीश वकील नहीं होते हैं।’’
कूट :
(a) दोनों कथन केवल गुण में विरोधी है।
(b) दोनों कथन केवल मात्रा में विरोधी है।
(c) दोनों कथन गुण और मात्रा दोनों में परस्पर विरोधी है।
(d) दोनों कथन गुण में विरोधी है मात्रा में नहीं।
Ans. (c) पहली प्रतिज्ञप्ति सर्वव्यापी स्वीकारात्मक और दूसरी प्रतिज्ञप्ति अंशव्यापी नकारात्मक (निषेधात्मक) है जो क्रमश: ‘A’ और ‘O’ को परस्पर व्याघातक प्रतिज्ञप्तियों के रूप में जाना जाता है। इसका कारण परस्पर गुण और मात्रा दोनों का विरोधी होता है।
(-वही- तर्कशास्त्र का परिचय)
48. यदि दो प्रतिज्ञप्तियाँ सत्य हो सकती हैं परन्तु दोनों एक साथ असत्य नहीं हो सकती है‚ तो उनका सम्बन्ध होगा :
(a) विपरीत (b) परस्पर विरोधी
(c) उप विपरीत (d) उपाश्रयण
Ans. (c): परम्परागत विरोध वर्ग के अनुसार यदि दो प्रतिज्ञप्तियां एक साथ सत्य हो सकती हैं। परन्तु दोनों एक साथ असत्य नहीं हो सकता है तो उनका संबंध उप-विपरीत का होगा।
49. निम्नलिखित तर्क में अनुमान के किस नियम का प्रयोग किया गया है?
[N ⊃ (O.P)] [Q ⊃ (O.R)] N Q ∴ (O.P)  (O.R)
(a) प्राक्कल्पनात्मक न्याय वाक्य
(b) वियोजक न्या वाक्य
(c) रचनात्मक उभयत: पाश
(d) मॉडस पोनेन्स
Ans. (c): अनुमान के नौ नियमों में एक-नियम रचनात्मक उभयत:
पाश (Constractive Delesmet) जिसको साधारणतया निम्न सूत्र है-
(A ⊃ B) . (C ⊃ D) AVC ∴ B V D
50. निम्नलिखित प्रकारों में से कौन-सा प्रकार ‘मोडस टॉलेन्स को प्रदर्शित करता है?
(a) p ⊃ q ∼ q ∴ -p
(b) p  q ∼ p ∴ q
(c) p ⊃ q ∴ p ⊃ (p.q)
(d) p ⊃ q p ∴ q
Ans. (a) : ‘मोडस टॉलेनस’ अनुमान का नियमों में से एक है। जो हैp ⊃ q ∼ q ∴ ∼ P अन्य विकल्प क्रमश: विकल्पन‚ समविलपन व मोडस पोनस
(पूर्ववत अनुमान) के उदाहरण है।
51. प्लेटो की तत्वमीमांसा के प्रकाश में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही कूट का चयन करें:
(A) सचमुच वास्तविक वे वस्तुएं होती हैं जिनका हम संवेदी अनुभव में सामना करते हैं।
(B) सचमुच वास्तविक वे आकार होते हैं जिन्हें केवल बौद्धिक रूप से ग्रहण किया जा सकता है।
(C) आकार शाश्वत और परिवर्तनशील होते हैं।
कूट :
(a) केवल (a) सही है।
(b) केवल (a) और (c) सही है।
(c) केवल (b) सही है।
(d) केवल (b) और (c) सही है।
Ans. (c) : प्लेटो की तत्वमीमांसा बुद्धिवादी प्रत्ययवाद है। जिसमें प्रत्ययों को ही अंतिम रूप से शाश्वत सत्य माना गया है। प्लेटो के प्रत्यय जगत में स्थित वस्तुओं के शुद्ध आकार है जिनको केवल बौद्धिक रूप से ग्रहण किया जा सकता है। प्लेटो के प्रत्यय अपरिवर्तनशील है।
(पा. द. का इतिहास-1 प्रो. दयाकृष्ण)
52. निम्नलिखित में से किनका यह मत था कि ‘‘दर्शनशास्त्र तर्कबुद्धि के उपदेश पर; ईश्वरमीमांसा आस्था पर धारित श्रुति की सत्यताओं पर आधारित होता है और दर्शनशास्त्र ईश्वरमीमांसा के लिए सेवक के रूप में काम करता है।’’
(a) ऑगस्टाइन (b) ऐन्सेल्म
(c) एक्विनॉस (d) अरस्तू
Ans. (c) : ‘दर्शनशास्त्र तर्कबुद्धि के उपदेश पर ईश्वरमीमांसा आस्था पर धारित श्रुति की सत्यताओं पर आधारित होता है और दर्शनशास्त्र ईश्वरमीमांसा के लिए सेवक के रूप में काम करता है। कथन टॉमस एक्विनास का है।
53. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। उन पर प्लेटो के आकार सिद्धान्त के आलोक में विचार करें और सही कूट का चयन करें।
अभिकथन (A) : चक्रीयता भौतिक जगत में विद्यमान नहीं होती है। कारण (R) : चक्रीयता आकार का एक उदाहरण नहीं होता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत नहीं करता है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है।
(d) (R) सही और (A) गलत है।
Ans. (c) : प्लेटो के दर्शन में चक्रीयता को एक सामान्य प्रत्यय माना जायेगा और प्लेटो के ‘सामान्य प्रत्यय’ मानसिक अवधारणाएं नहीं है बल्कि वास्तविक सत्ता है। जो भौतिक जगत की वस्तुओं से अलग प्रत्ययों/सामान्यों के जगत से संबंधित है। चक्रीयता एक तरह का आकार है। अभिकथन (A) सत्य है और अभिकथन (B) गलत है।
54. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन नीत्से की स्थिति का उपयुक्त रूप में द्योतक है?
(A) वे सत्यता की इच्छा को शक्ति की इच्छा के बराबर ठहराते हैं।
(B) अच्छे और बुरे के बीच का विभेद शक्ति की इच्छा पर आधारित होता है।
(C) अच्छे और बुरे के बीच का विभेद विषयनिष्ठता में बद्धमूलक होता है।
(D) सभी प्रकार के जीवन और सभी प्रकार की प्रसन्नता शक्ति की इच्छा के द्वारा शासित होते हैं।
कूट :
(a) केवल (A) और (B) सही है।
(b) केवल (C) और (D) सही है।
(c) केवल (A), (B) और (D) सही है।
(d) केवल (B) और (D) सही है।
Ans. (c) : नीत्से की शक्ति की इच्छा (will to power) सिद्धान्त के अनुसार कथन (a), (b), (d) सही है।
55. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और सही
कूट पर निशान लगाएँ सूची-I सूची-II
(A) फ्रेडरिक नीत्से (i) अपने विचारों को किस प्रकार सुस्पष्ट बनाएं
(B) विलियम जेम्स (ii) शक्ति की इच्छा
(C) सी.एस.पीयर्स (iii) तार्किक अन्वेषण
(D) एडमंड हुसर्ल (iv) सत्यता का अर्थ
कूट :
A B C D
(a) (i) (iii) (ii) (iv)
(b) (ii) (i) (iii) (iv)
(c) (ii) (iv) (i) (iii)
(d) (ii) (iv) (iii) (i)
Ans. (c):
(a) फ्रेडरिक नीत्से (ii) शक्ति की इच्छा
(b) विलियम जेम्स (iv) सत्यता का अर्थ
(c) सी.एस. पीयर्स (i) अपने विचारों को किस प्रकार सुस्पष्ट बनाएं
(d) एडमण्ड हुसर्ल (iii) तार्किक अन्वेषण
56. निम्नलिखित में से किस दार्शनिक के द्वारा प्रत्ययवाद का खंडन किया गया है? सही कूट का चयन करें :
(A) मूर (B) रसेल (C) बर्कले
कूट :
(a) केवल (A) और (C) सही है।
(b) केवल (A) सही है।
(c) केवल (A) और (B) सही है।
(d) केवल (B) और (C) सही है।
Ans. (c) : समकालीन पाश्चात्य दर्शन में मूर‚ रसेल और आर.बी.
पेरी ने प्रत्ययवाद का खण्डन किया है।
(समकालीन पा. दर्शन- बी.के. लाल)
57. निम्नलिखित में से किस तार्किक प्रत्यक्षवादी ने इस आधार पर ‘सत्यापन’ को ‘पुष्टि से प्रतिस्थापित कर दिया कि हालांकि सार्वभौम नियमों का सत्यापन नहीं किया जा सकता‚ लेकिन उनकी पुष्टि की जा सकती है?
(a) कार्नेप (b) एयर
(c) श्लिक (d) डब्ल्यू. वी.ओ. क्वाइन
Ans. (b) : कार्नेप जो तार्किक प्रत्यक्षवादी है ने इस आधार पर ‘सत्यापन’ को ‘पुष्टि’ से प्रतिस्थापित कर दिया। उनके अनुसार सार्वभौमिक नियमों का सत्यापन नहीं किया जा सकता‚ लेकिन उनकी पुष्टि (Confirmation) की जा सकती है।
58. ‘वह सत्ता जो निरपेक्ष है‚ तार्किक संयोजकता के साथ एक ससक्त विचार पद्धति है’‚ इस मत का श्रेय किसे दिया जा सकता है :
(a) हेगल (b) बर्कले
(c) मूर (d) स्पिनोजा
Ans. (a): हेगल जो निरपेक्ष प्रत्ययवाद के समर्थक है। वो सत्ता को तार्किक मानते हैं। उनके अनुसार सत् ही बोध है और बोध ही सत् है। उनके अनुसार वह सत्ता जो निरपेक्ष सत्ता है‚ तार्किक संयोजकता के साथ एक सशक्त विचार पद्धति है।
59. ‘निम्नलिखित में से कौन-सा कथन एनैक्जीमैंडर के दार्शनिक मत को ठीक-ठाक रूप में निरूपित करता है?
(a) ‘असीम’ ऐसी वस्तुओं का सिद्धांत है जो विद्यमान है
(b) यह ‘असीम वायु’ का सिद्धान्त है जिससे सब कुछ जो विद्यमान है‚ अस्तित्व में आया है।
(c) ‘‘असीम संख्या’’ उन वस्तुओं का सिद्धान्त है जो विद्यमान है।
(d) ‘‘असीम पृथ्वी’’ प्रत्येक अस्तित्ववान वस्तु का मूलभूत सिद्धान्त है।
Ans. (a) : एनैक्जिमैंडर माइलेशियन दार्शनिक है। उनके अनुसार जिस तत्व से जगत की उत्पत्ति हुई वह ‘असीम वायु’‚ संख्या पृथ्वी आदि से अधिक मूलभूत है (प्रिमिटिव) और इन्हें उत्पन्न करने में समर्थ है। एनेक्जिमेण्डर के अनुसार यह तत्व ‘असीम’ (बाउण्डलेस अपीरन) है। यहां ‘असीम’ ही ऐसी वस्तुओं का सिद्धान्त है जो विद्यमान है।
(पा. दर्शन का इतिहास -1‚ प्रो. दयाकृष्ण)
60. देहांतर के सिद्धान्त या आत्मा के पुनर्जन्म के सिद्धान्त का श्रेय निम्नांकित में किस सुकरात-पूर्व दार्शनिक को दिया जाता है?
(a) पाइथागोरस (b) एनैक्जीमैंडर
(c) पार्मेनाइडी़ज (d) डेमोक्रॉयटस
Ans. (a) : पाइथागोरस के ऊपर आर्फिक सम्प्रदाय का प्रभाव होने के कारण वो आत्मा के आवागमन अथवा देहान्तर अथवा पुनर्जन्म सिद्धान्त में विश्वास करते थे।
(पा. दर्शन का इतिहास-1‚ प्रो. दयाकृष्ण)
61. हुसर्ल के सांवृत्तिक अपचय का उद्देश्य है:
(a) शुद्ध अवैयक्तिक चेतना द्वारा उत्पन्न अर्थों की जाँच करना।
(b) जगत की वस्तुओं के अर्थ की जाँच करना।
(c) वैयक्तिक चेतना की वस्तुओं के अर्थ की जाँच करना।
(d) शुद्ध अवैयक्तिक चेतना द्वारा उत्पन्न अर्थों की अस्वीकृत करना।
Ans. (a) : हुर्सल चेतना को आन्तरिक विकारों से मुक्त करने के लिए तीन स्तरों का उल्लेख करते हैं। जिनमें प्रथम स्तर को सांस्कृतिक (फैनामेनालाजिकल) अपचयन कहा जाता है जो मनोवैज्ञानिक साहचर्य से चेतना को मुक्त करने की विधि है। इसका उद्देश्य शुद्ध अवैयक्तिक चेतना द्वारा उत्पन्न अर्थों की जांच करना है। इसके अतिरिक्त तात्विक अपचयन और मूर्तकल्पी अपचयन द्वितीय और तृतीय स्तर है।
(स.पा. दर्शन-बी.के. लाल)
62. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और सही
कूट का चयन करें :
सूची-I सूची-II
(A) लॉक (i) इन इन्क्वायरी कन्सर्निंग ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग
(B) बर्कले (ii) क्रिटिक ऑफ प्रैक्टिकल रीजन
(C) ह्मूम (iii) थ्री डायलॉग्स बिटवीन हायलास एण्ड फिलोनीस
(D) कांट (iv) एन एसे कन्सर्निंग ह्मूमन अंडरस्टैंडिंग
कूट :
A B C D
(a) (iv) (iii) (i) (ii)
(b) (ii) (i) (iii) (iv)
(c) (ii) (iv) (i) (iii)
(d) (ii) (iv) (iii) (i)
Ans. (a) :
(a) लॉक (iv) एन एसे कन्सर्निंग ह्ययूमन अण्डरस्टैंडिंग।
(b) बर्कले (iii) थ्री डायलॉग्स बिटवीन हायलास एण्ड फिलोनीस
(c) ह्यूम (i) एन इन्क्वायरी कन्सर्निंग ह्यूमन अण्डरस्टैडिंग।
(d) कांट (ii) क्रिटिक ऑफ प्रैक्टिकल रीजन।
63. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। उन पर विचार करें और सही कूट का चयन करें :
अभिकथन (A) देकार्त के दर्शनशास्त्र के संदर्भ में जो कुछ भी स्पष्ट एवं विशिष्ट है उसे अनिवार्यत: सत्य होना चाहिए। कारण (R): ज्ञान सुस्पष्ट एवं विशिष्ट प्रत्ययों से बना होता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(b) (A) सही है और (R) गलत है।
(c) (A) गलत है और (R) सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
(d) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
Ans. (d) : देकार्त के अनुसार जो कुछ भी स्पष्ट एवं विशिष्ट है वह अनिवार्यत: सत्य है क्योंकि ज्ञान सुस्पष्ट एवं विशिष्ट प्रत्ययों से बना होता है।
(दोत : पाश्चात्य दर्शन का उद्भव एवं विकास प्रो. हरिशंकर उपाध्याय)
64. ‘‘द्रव्य संवेदना की स्थायी संभाव्यता है।’’ यह प्रसिद्ध कथन किसका है?
(a) जेम्स मिल (b) जॉन स्टुअर्ट मिल
(c) लॉक (d) ह्यूम
Ans. (c) : लॉक के अनुसार ‘द्रव्य संवेदना की स्थायी संभाव्यता है।’ क्योंकि संवेदना की उत्पत्ति का कारण द्रव्य ही है।
65. एक के सिवाय निम्नलिखित में से सभी तर्कवाक्य लाइबनी़ज के दर्शन से सुसंगत है:
(a) चिदणु अपरिमित अतिसूक्ष्म आध्यात्मिक सत्ता है।
(b) चिदणुगवाक्षहीन होते हैं।
(c) चिदणुओं के बीच कोई पदानुक्रम नहीं होता है।
(d) चिदणु अविभेद्य होते हैं।
Ans. (c) : लाइबनी़ज के चिदणुवाद के अनुसार‚
(1) चिदणु अपरिमित‚ अतिसूक्ष्म‚ आध्यात्मिक सत्ता है।
(2) चिदणु स्वयं प्रकाश और गवाक्षहीन है।
(3) चिदणु अविभेद्य होते हैं।
(4) प्रत्येक चिदणु में गुणात्मक रूप से कोई भेद नहीं होता है परन्तु परिमाणात्मक भेद पाया जाता है अर्थात् गुणात्मक रूप में प्रत्येक चिदणु चेतन होते हैं परन्तु परिमाणात्मक रूप से चेतना की मात्र का अंतर होता है जिसके कारण एक पदानुक्रम विकसित हो जाता है जिसमें इसके निचले पद पर नग्न चिदणु और सर्वोच्च पद पर परम चिदणु या रानी चिदणु है।
66. देकार्त की अन्योन्यक्रियावाद की हिमायत और स्पिनोजा का समानांतरवाद किसको दुर्बल करता है?
(a) एकतत्ववाद ओर द्वैतवाद (b) द्वैतवाद और बहुलवाद
(c) द्वैतवाद ओर प्रकृतिवाद (d) द्वैतवाद और सर्वेश्वरवाद
Ans. (*) यह प्रश्न संदिग्ध माना गया है।
67. जो ह्मूम के दर्शन से असंगत है उसे चिन्हित करें :
(a) कारणात्मक संबंध जैसी कोई बात नहीं होती है।
(b) तथाकथित आत्मा सिर्फ मानसिक दशाओं का योग होती है।
(c) जगत और इसमें परिवर्तन ईश्वर की सर्वोच्चता के कारण होते हैं।
(d) वह सब कुछ जिसे जाना जा सकता है उसे ‘तथ्य के उपादान’ और प्रत्ययों के संबंधों में विभाजित किया जा सकता है।
Ans. (c) : ह्यूम ईश्वर के अस्तित्व पर संशय करते हैं। अत: यह कथन जगत और इसमें परिवर्तन ईश्वर की सर्वोच्चता के कारण होते हैं‚ ह्यूम के दर्शन से असंगत है।
68. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और सही
कूट का चयन करें :
सूची-I सूची-II
(A) ‘द्रव्य वह कुछ है जिसे मैं नहीं जनता’ (i) बर्कले
(B) द्रव्य मात्र अस्तित्व में नहीं है (ii) लॉक
(C) हम जो कुछ जान सकते हैं (iii) हेगल वह सिर्फ परिघटना होती है
(D) ‘सत्ता युक्तिमूलक है’ (iv) कांट
कूट :
A B C D
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (ii) (i) (iv) (iii)
(c) (iv) (iii) (ii) (i)
(d) (iv) (ii) (iii) (i)
Ans. (b) :
(A) ‘द्रव्य वह कुछ है जिसे मैं नहीं जानता (ii) लॉक
(B) ‘द्रव्य मात्र अस्तित्व में नहीं है (i) बर्कले
(C) हम जो कुछ जान सकते हैं वह सिर्फ परिघटना होती है (iv) कांट
(D) सत्ता युक्तिमूलक है (iii) हेगेल
69. (A), (B), (C) और (D) पर विचार करें और तदुपरांत देकार्त के संदर्भ में सही उत्तर का चयन करें :
(A) विज्ञानों की सत्यताओं पर संदेह किया जा सकता है।
(B) ऐंद्रिक-प्रमाण पर संदेह किया जा सकता है।
(C) आत्मा के सिवाय कुछ पर भी संदेह नहीं किया जा सकता है।
(D) संदेह करने के कृत्य पर संदेह नहीं किया जा सकता है।
(a) केवल (A) और (B) सही है।
(b) केवल (A), (B) और (C) सही है।
(c) केवल (A), (B) और (D) सही है।
(d) केवल (B), (C) और D) सही है।
Ans. (c) : देकार्त के संशयवादी पद्धति के अनुसार सभी वस्तुओं‚ विज्ञानों प्रमाणों यहां तक आत्मा पर भी संदेह किया जा सकता है। परन्तु संदेह पर संदेह नहीं किया जा सकता क्योंकि संदेह पर संदेह करने से संदेहकर्त्ता का अस्तित्व सिद्ध होता है।
(पा. द. का उद्भव एवं विकास-प्रो. हरिशंकर उपाध्याय)
70. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन करें:
सूची-I सूची-II
(A) बर्कले (i) अन्योन्यक्रियावाद
(B) स्पिनोजा (ii) स्थिर संयोजन
(C) देकार्त (iii) समानांतरवाद
(D) ह्मूम (iv) विषयिसापेक्ष प्रत्ययवाद
कूट :
A B C D
(a) (i) (iv) (iii) (ii)
(b) (iv) (iii) (i) (ii)
(c) (iv) (i) (iii) (ii)
(d) (iv) (iii) (ii) (i)
Ans. (b) :
(A) बर्कले (iv) विषयिसापेक्ष प्रत्ययवाद
(B) स्पिनोजा (iii) समानांतरवाद
(C) देकार्त (i) अन्योन्यक्रियावाद
(d) ह्यूम (ii) स्थिर संयोजन
71. अभिकथन (A) और कारण (R) नीचे दिए गए हैं। उन पर विचार करें और लॉक के संदर्भ में सही कूट का चयन करें :
अभिकथन (A)
:लॉक के अनुसार ज्ञान प्रत्ययों को समझने या ग्रहण करने की मानसिक शक्ति पर निर्भर करता है न कि मात्र प्रत्ययों की ग्रहणशीलता पर। कारण (R) : ज्ञान युक्तिमूलक होता है क्योंकि इसमें प्रत्ययों के बीच सहमति और असहमति को देखा जान समाहित होता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
(b) (A) और (R)दोनों सही है और (R) (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत नहीं करता है।
(c) (A) और (R)दोनों गलत है।
(d) (A) सही है और (R) गलत है।
Ans. (*) : यह प्रश्न संदिग्ध है।
72. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं और सही कूट का चयन करें:
अभिकथन (A)
: ह्मू संस्कारों को ज्ञान की मूलभूत कसौटी के रूप में मानते हैं। कारण (R) : साहचर्य के नियम की सहायता से ह्मूम दर्शाते हैं कि कार्यकारण-भाव में कोई तर्कसंगत नहीं अपितु मनौवैज्ञानिक आवश्यकता होती है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों गलत है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
(c) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की व्याख्या प्रस्तुत नहीं करता है।
(d) (A) सही है और (R) गलत है।
Ans. (c) : अभिकथन (A) में संस्कार ज्ञान के एक प्रकार के रूप में है। (R) कारण कार्य से संबंधित ह्यूम की समस्या का मनोवैज्ञानिक हल जो दोनों तो सत्य है परन्तु एक दूसरे से भिन्न परिपे्रक्ष्य में है।
73. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। उन पर विचार करें और बर्कले के संदर्भ में सही कूट का चयन करें :
अभिकथन (A)
: बर्कले ने वस्तुओं को विधि बनाने के बजाय प्रत्ययों को वस्तु बनाने की चेष्टा की। ‘मैं वस्तुओं को प्रत्ययों में बदलने का पक्षधर नहीं हूँ‚ इसके बजाय मैं प्रत्ययों को वस्तुएं बनाना चाहता हूँ। कारण (R) : बाह्य वस्तुएं सर्वोच्च चेतना या ईश्वर द्वारा कारित होती है जो किसी भी परिमित चेतनाओं से बाह्य होती है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है। ।
(b) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत नहीं करता है।
(c) (A) और (R) दोनों गलत है।
(d) (A) सही है और (R) गलत है।
Ans. (b) : अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है। परन्तु दोनों दो अलग-अलग परिप्रेक्ष्य में सही है।
74. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन करें :
सूची-I सूची-II
(A) सर्वेश्वरवाद (i) कांट
(B) द्वैतवाद (ii) स्पिनोजा
(C) अतींद्रिय भ्रम (iii) देकार्त
(D) बहुलवाद (iv) लाइबऩिज
कूट :
A B C D
(a) (i) (ii) (iv) (iii)
(b) (ii) (i) (iii) (iv)
(c) (ii) (iii) (i) (iv)
(d) (iii) (ii) (iv) (i)
Ans. (c) :
(a) सर्वेश्वरवाद (ii) स्पिनोजा
(b) द्वैतवाद (iii) देकार्त
(c) अतीन्द्रिय भ्रम (i) काण्ट
(d) बहुलवाद (iv) लाइवनित्ज
75. सही विकल्प का चयन करें। कांट के लिए वैज्ञानिक ज्ञान का मान है:
(a) संश्लेषणात्मक अनुभवाश्रित निर्णय
(b) विश्लेषणात्मक प्रागनुभविक निर्णय
(c) संश्लेषणात्मक प्रागुभविक निर्णय
(d) विश्लेषणात्मक अनुभवाश्रित निर्णय
Ans. (c) : कांट ने अपने दर्शन संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक निर्णय को वैज्ञानिक ज्ञान का प्रतिमान (Standard) कहा है क्योंकि इसमें नवीनता के साथ-साथ अनिवार्यता और सार्वभौमिकता है।
76. वैदिक परम्पराओं में ऋत को किसके साथ पहचाना जाता है?
(a) केवल सत्य (b) केवल धर्म
(c) केवल कर्म (d) सत्य और धर्म
Ans. (d) ‘ऋत’ वैदिक परम्परा में शाश्वत नियमों के प्रतीक के रूप में सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त एक व्यवस्था का नाम है। ऋत को सत्य और धर्म के लिए पहचाना जाता है। वरुण को ऋत के संरक्षक/गोपा के रूप में जाना जाता हैं (ऋतस्य गोपा)।
(नीतिशास्त्र: सिद्धान्त और व्यवहार-प्रो. नित्यानन्द मिश्र)
77. औपनिषदिक आत्मा की अवस्थाओं के ठीक-ठाक अनुक्रम का चयन करें :
(a) सुषुप्ति‚ स्वप्न‚ जाग्रत‚ तुरीया
(b) जाग्रत‚ स्वप्न सुषुप्ति‚ तुरीया
(c) जाग्रत‚ सुषुप्ति‚ स्वप्न‚ तुरीया
(d) तुरीया‚ स्वप्न‚ सुषुप्ति‚ जाग्रत
Ans. (b) : माण्डक्योपनिषद के में आत्मा की चार अवस्थाओं का वर्णन क्रमश: जाग्रत‚ स्वप्न‚ सुषुप्ति और तुरीय का वर्णन है। जाग्रत अवस्था में आत्मा वैश्वानर‚ स्वप्न में तेजस‚ सुषुप्ति में प्राज्ञ बतलाया गया है। तुरीय‚ ब्रह्म से अभिन्न है। तुरीय को लेकर आत्मा को चतुष्यात कहा गया है।
78. न्याय के अनुसार किस सन्निकर्ष से हम एक पुष्प और उसके लाल रंग के बीच के संबंध का बोध करते हैं।
(a) संयोग (b) समवाय
(c) विशेषणता (d) समवेत समवाय
Ans. (c): विशेषणता सन्निकर्ष के द्वारा हम एक पुष्प और उसके लाल रंग के बीच के संबंध का बोध करते हैं।
79. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन चर्वाक को स्वीकार्य नहीं है?
(a) चेतना उत्पन्न की हुई है
(b) चेतना सत नहीं है।
(c) चेतना भौतिक तत्त्व के द्वारा उत्पन्न है।
(d) चेतना शरीर के साथ अवश्य जायेगी।
Ans. (b) : चेतना सत् नहीं है अर्थात् चेतना असत् और यह चार्वाक को स्वीकार्य नहीं है।
80. वैशेषिकों द्वारा मुक्त आत्मा में ज्ञान के किस प्रकार के अभाव की बात मानी गई है?
(a) प्रागभाव (b) ध्वंसाभाव
(c) अत्यन्ताभाव (d) अन्योन्याभाव
Ans. (b) : वैशेषिकों के अनुसार मुक्त आत्मा में ज्ञान का आभाव ध्वंसाभाव के कारण है। प्रध्वंसाभाव किसी उत्पन्न हुए कार्य का विनाश होने पर उसके समवायीकरण में उसका आभाव है। आत्मा में ज्ञान उत्पन्न होता है और मुक्त आत्मा उसका विनाश हो जाता है।
(भा.द. की समीक्षात्मक रूपरेखा-राममूर्ति पाठक)
81. वैशेषिकों के अनुसार सामीप्य और दूरी के ज्ञान का क्या कारण है?
(a) काल (b) आकाश
(c) दिक् (d) मनस
Ans. (c) : वैशेषिक दर्शन दिक् को द्रव्य मानता है। जो सह-
अस्तित्व का प्रतिपादन करता है। दिक् दृश्यमान पदार्थों का वर्णन करता है। अर्थात् उनमें समीप्य और दूरी का ज्ञान कराता है। आकाश और दिक् एक नहीं है। आकाश दिक् में भरा हुआ है ईश्वर सदृश द्रव्य है जिसमें शब्द गुण है।
(भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूपरेखा-राममूर्ति पाठक)
82. किस प्रमाण के द्वारा न्याय सम्प्रदाय ने निर्विकल्पक प्रत्यक्ष की अवस्था को सिद्ध किया?
(a) प्रत्यक्ष (b) अनुमान
(c) उपमान (d) शब्द
Ans. (b) : न्याय दर्शन में निर्विकल्पक प्रत्यक्ष की अवस्था को अनुमान के आधार पर स्वीकार किया गया है।
83. निम्नलिखित अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार करें और वैशेषिक दृष्टिकोण से सही कूट का चयन करें :
अभिकथन (A)
: परमाणु विभाज्य नहीं होता है। कारण (R) : जो कुछ भी दृश्य नहीं है वह विजाज्य भी नहीं है।
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत नहीं करता है।
(c) (A) और (R) दोनों गलत है।
(d) (A) गलत है और (R) सही है।
Ans. (c) : वैशेषिकों के अनुसार परमाणु विभाज्य नहीं होता है। लेकिन एक द्वयणुक दृश्य न होकर भी विभाज्य है। अत: अभिकथन ‘A’ सत्य है परन्तु कारण (R) असत्य।
84. निम्नलिखित में से कौन व्याप्तिग्रह का एक साधन नहीं है?
(a) तर्क (b) सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष
(c) आप्तवाक्य (d) उपाधिनिरास
Ans. (c) : आप्तवाक्य‚ व्याप्तिग्रह का साधन नहीं है।
85. निम्नलिखित अनुमान द्वारा किस प्रकार का हेत्वाभास किया जाता है? सही कूट का चयन करें यह प्राणि अवश्य रूप से एक गाय होनी चाहिए क्योंकि इसमें घोड़त्व है।
(a) सत्प्रतिपक्ष (b) सव्यभिचार
(c) विरुद्ध (d) बाधित
Ans. (c) ‘घोड़त्व है’ हेतु ‘घोड़ा’ नामक प्राणि का लक्षण है। अत:
यह गाय के रूप को नहीें ‘अभाव’ को सिद्ध कर रहा है। अत: यहां विरुद्ध हेतु हेत्वाभास है। इसमें हेतु स्वव्याघाती होता है। जिसके कारण व्याप्ति संबंध साध्य के साथ न होकर साध्य के आभाव के साथ होता है।
86. वैशेषिकों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन एक नित्यद्रव्य नहीं है?
(a) परमाणु (b) द्वयणुक
(c) मनस (d) दिक्
Ans. (b) : द्वयणुक परमाणु संयोग से बनते हैं और जिनमें संयोग होता है उनमें वियोग भी संभव है अत: द्वयणुक अनित्य द्रव्य है।
87. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और सही
कूट से सही उत्तर का चयन करें :
सूची-I सूची-II
(A) सवितर्क (i) जब चित्त ध्यान के सूक्ष्म विषय पर केन्द्रित हो जैसे तन्मात्र।
(B) सविचार (ii) जब चित्त अब भी ध्यान के सूक्ष्म विषय पर केन्द्रित हो जो सुख उत्पन्न करता है जैसे इंद्रिय।
(C) सानंद (iii) जब चित्त ध्यान के स्थूल विषय पर केन्द्रित हो।
(D) सास्मित (iv) जब चित्त अहं पर केन्द्रित हो जिसके साथ सामान्यतया आत्मा का तादात्म्य होता है।
कूट :
A B C D
(a) (iii) (i) (ii) (iv)
(b) (i) (ii) (iii) (iv)
(c) (ii) (i) (iv) (iii)
(d) (iv) (iii) (ii) (i)
Ans. (a) : योग दर्शन में सम्प्रज्ञात समाधि की चार अवस्थाएं क्रमश: सवितर्क‚ सविचार‚ सानन्द और सास्मित।
88. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। उन पर विचार करें और बौद्ध मत के संदभ में नीचे दिए ए
कूट में से सही कूट का चयन करें:
अभिकथन (A)
: निर्वाण दु:खरहित नहीं हो सकता। कारण (R) : सर्वम् दु:खम् दु:खम् ।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है। ।
(b) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं प्रस्तुत करता है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है।
(d) (A) गलत है और (R) सही है।
Ans. (d) : बौद्ध दर्शन में ‘निर्वाण’ की अवधारणा सभी दु:खों का नाश होने से संबंधित है औरे उसका प्रथम आर्य सत्य सर्वम् दु:खम् दु:खम्। अत: अभिकथन (A) गलत और कारण (R) सही है।
89. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। उन पर विचार करें और बौद्ध मत के संदर्भ में नीचे दिए गए कूट में से सही कूट का चयन करें:
अभिकथन (A)
: दुनिया में कष्ट है। कारण (R) : इसकी उत्त्पत्ति हमारे द्वारा नहीं की गयी है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत नहीं करता है।
(c) (A) गलत है और (R) सही है।
(d) (A) सही है और (R) गलत है।
Ans. (d) : ‘दुनिया में कष्ट है’ यह कथन सत्य है परन्तु कारण (R) असत्य है क्योंकि द्वादश-निदान चक्र के अनुसार हमारा भव-चक्र में फंसना ही हमारे दु:खों की उत्पत्ति का मूल कारण है।
90. एक के सिवाय निम्नलिखित में से सभी तर्क वाक्य पूर्व-मीमांसा के प्रभाकर सम्प्रदाय से सुसंगत हैं?
(a) ज्ञान त्रिपुटी से बना है।
(b) अन्विताभिधानवाद की हिमायत
(c) एक स्वतंत्र प्रमाण के रूप में अनुपलब्धि की हिमायत
(d) अकारण की क्रिया के रूपमें प्रत्यक्षपरक गलती
Ans. (c) : प्रभाकर ‘अनुपलब्धि’ को स्वतंत्र प्रमाण के रूप में नहीं मानते हैं जबक कुमारिल जो कि प्रभाकर की तरह पूर्वमीमांसक है ‘अनुपलब्धि’ को स्वतंत्र प्रमाण स्वरूप मानते हैं।
91. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। उन पर विचार करें तथा सही कूट का चयन करें :
अभिकथन (A)
: मध्व की राय में ब्रह्म‚ जो महावस्तु है‚ अनंत-कल्याण-गुण-परिपूर्ण है। कारण (R) : यहाँ तक कि एक साधारण वस्तु भी गुणों से रहित नहीं हो सकती।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
(b) (A) सही है और (R) गलत है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं प्रस्तुत नहीं करता है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
(d) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
Ans. (d): मध्व जो प्रबल द्वैतवादी है। जिनका दर्शन द्वैत-वेदान्त है। प्रत्येक जगह द्वैत को स्वीकार करते हैं। प्रत्येक वस्तु को गुण सम्पन्न मानते हैं। अत: वह ब्रह्म को भी अनंत कल्याण-गुण परिपूर्ण मानते हैं।
92. विशिष्टाद्वैत वेदांत की दृष्टि में असंगत को चिन्ह्ति करें:
(a) मोक्ष का साधन ज्ञान-कर्म-समुच्चय है।
(b) जीवात्मा ब्रह्म के साथ एकाकार है।
(c) सत्ख्याति प्रत्यक्षपरक गलती की संतोषजनक तरीके से व्याख्या करता है।
(d) सप्तविध अनुपपत्तियों का ध्येय माया का खंडन करता है।
Ans. (b) विशिष्टाद्वैत वेदान्त के अनुसार जीवात्मा मुक्त अवस्था में ब्रह्म में विलीन नहीं होता है अर्थात् एकाकार न होकर ब्रह्म के समान उसका शुद्ध अंग बन जाता है। यहां ब्रह्म साकार सगुण है।
(भा. दर्शन -आलोचना और अनुशीलन-चन्द्रधर शर्मा)
93. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और सही
कूट का चयन करें :
सूची-I सूची-II
(A) शंकर (i) नित्यविभूति
(B) रामानुज (ii) विशेष
(C) मध्व (iii) पुष्टिमार्ग
(D) वल्लभ (iv) अध्यास
कूट :
A B C D
(a) (ii) (iv) (iii) (i)
(b) (iii) (ii) (i) (iv)
(c) (iv) (i) (ii) (iii)
(d) (ii) (iii) (iv) (i)
Ans. (c) :
(a) शंकर (iv) अध्यास
(b) रामानुज (i) नित्यविभूति
(c) मध्व (ii) विशेष
(d) वल्लभ (iii) पुष्टिमार्ग
94. किसके अनुसार अनुपलब्धि एक स्वतंत्र प्रमाण है?
(a) रामानुज (b) मध्व
(c) कुमारिल (d) प्रभाकर
Ans. (c) : कुमारिल ने कुल छ: प्रमाणों को माना है-प्रत्यक्ष‚ अनुमान‚ शब्द‚ उपमान‚ अर्थापत्ति और अनुपलब्धि। आभाव का ज्ञान अनुपलब्धि प्रमाण से।
(भा.द. आ. और अनु. -चन्द्रधर शर्मा)
95. निम्नलिखित में से कौन जैन दर्शन को स्वीकार्य नहीं है?
(a) वास्तव एवं बहुलवाद
(b) ‘द्रव्य’ और ‘गुण’ अवियोज्य होते हैं।
(c) हम एक वस्तु को उसके सभी पहलुओं में जान सकते हैं।
(d) केवल-ज्ञान असीमित और निरपेक्ष ज्ञान है।
Ans. (c) : जैन के अनुसार हम एक वस्तु को उसके सभी पहुलुओं से नहीं जान सकते हैं। उनके अनुसार वस्तु के अन्तर्गत गुण धर्म होते हैं। हम वस्तु के कुछ ही धर्मों को जान पाते हैं।
96. अम्बेडकर का सम्बंध-सिद्धांत अनिवार्यत: है:
(a) आध्यात्मिक (b) तात्त्विक
(c) प्रकृतिवादी (d) शास्त्रार्थमीमांसक
Ans. (c): अम्बेडकर संबंध सिद्धान्त अनिवार्यत: प्रकृतिवादी है।
97. निम्नलिखित में से कौन के.सी. भट्टाचार्य के वस्तुदर्श न की दो शाखाओं के संबंधे में सही है?
(a) नीतिशास्त्र एवं तर्क
(b) धर्म एवं नीतिशास्त्र
(c) तर्क एवं तत्त्वमीमांसा
(d) भौतिकी एवं तत्त्वमीमांसा
Ans. (c) : के.सी. भट्टाचार्य के वस्तु-दर्शन (Philosophy of object) से तर्क एवं तत्वमीमांसा नामक शाखाएं संबंधित है।
98. नीचे अस्तित्व के चार सिद्धांत दिए गए हैं।
(A) परात्म-मूल सिद्धांत
(B) ब्रह्माण्डमूलक या इहलौकिक
(C) पारलौकिक
(D) पूर्ण अद्वैतवादी या सांश्लैषिक निम्नलिखित में से किस दार्शनिक ने अपने दर्शन में उल्लेख किया है?
(a) विवेकानंद (b) के.सी. भट्टाचार्य
(c) इकबाल (d) श्री अरबिंद
Ans. (d) : श्री अरविन्द का दर्शन ही पूर्ण-अद्वैतवादी (Integral) है। जिसमें विभिन्न प्रकार का सिद्धान्त है।
99. गांधी का न्यास संबंधी मत किसके निमित्त नहीं बनाया गया था?
(a) एक नई समाज व्यवस्था बनाने के लिए
(b) लोगों के बीच पे्रम एवं त्याग को बढ़ावा देने के लिए
(c) एक व्यक्ति को ऊपर उठने के लिए हर प्रकार का अवसर देने के लिए
(d) अभिजात्य वर्ग को उनके धन से वंचित करने के लिए बल का प्रयोग करने के लिए।
Ans. (d) : गाँधी जी कभी किसी वर्ग को उसके धन से वंचित नहीं करने का विचार देते हैं। वो व्यक्ति को सम्पत्ति का स्वामी नहीं‚ अपितु सम्पत्ति का न्यासी मानते हैं।
100. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
(चिंतक) (कृति)
(a) श्री अरविंद : दी ह्यमून साइकल‚ फ्रीडम्स बैट्टल
(b) टैगोर : लवर्स गिफ्ट एण्ड क्रॉसिंग‚ माई सोल्स एगोनी
(c) गांधी : दी व्हील ऑफ फारचुन‚ दिल्ली डायरी
(d) राधाकृष्णन : रिलीजन एण्ड सोसायटी‚ मासेज फ्रॉम द ईस्ट
Ans. (c) : गांधी- दी व्हील ऑफ फारचुन‚ दिल्ली डायरी।

Top
error: Content is protected !!