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यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ दिसम्बर-2014 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) व्याख्या सहित तृतीय प्रश्न-पत्र का हल UGC NTA NET JRF Philosophy Previous Papers in Hindi 008.

UGC NTA NET JRF Philosophy Previous Papers in Hindi यूजीसी नेट/जेआरएफ परीक्षा‚ दिसम्बर-2014 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY) व्याख्या सहित तृतीय प्रश्न-पत्र का हल

नोट : इस प्रश्नपत्र में पचहत्तर (75) बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के दो (2) अंक हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
1. न्याय मत के अनुसार निम्नलिखित में से किस सन्निकर्ष के द्वारा हम एक जाति के सभी सदस्यों का प्रत्यक्ष प्राप्त करते हैं?
(a) विशेषणता (b) योगज
(c) संयोग (d) सामान्यलक्षण
Ans. (d) : न्याय दर्शन‚ सामान्य लक्षण नामक अलौकिक सन्निकर्ष को मानता है। जिसके अनुसार‚ सामान्य लक्षण सन्निकर्ष द्वारा हम एक जाति के सभी सदस्यों का प्रत्यक्ष प्राप्त करते हैं।
2. वैशेषिक मत के संदर्भ में उस विकल्प का चयन करें जिसके अनुसार द्रव्य न तो भूत है न मूर्त :
(a) आकाश‚ काल‚ दिक् (b) काल‚ दिक्‚ आत्मा
(c) दिक्‚ आत्मा‚ मनस् (d) आकाश‚ आत्मा‚ काल
Ans. (b) : वैशेषिक दर्शन द्वारा स्वीकृत नौ द्रव्यों में पृथ्वी‚ अग्नि‚ जल‚ वायु और आकाश भूत द्रव्य है तथा दिक्‚ काल‚ आत्मा और मनस् अभौतिक द्रव्य है। वैशेषिक में मनस् को अणुरूप माना गया है‚ अत: यह अमूर्त नहीं है। जबकि आकाश भौतिक है। अत:
काल‚ दिक् और आत्मा न तो भूत है न मूर्त है।
3. वैशेषिक तत्त्वमीमांसा में निम्नलिखित में से कौन नित्यद्रव्य नहीं है?
(a) परमाणु (b) द्वयणुक
(c) काल (d) मनस्
Ans. (b) : परमाणु‚ काल‚ मनस् को वैशेषिक में नित्य द्रव्य माना गया है। परन्तुे ‘द्वयणुक’ जो कि परमाणुओं के मिलने से बनते हैं‚ नष्टप्राय है। अत; नित्यद्रव्य नहीं है।
4. सूची – I और सूची- II पर विचार करें और नीचे दिए गए कूट में से सही विकल्प का चयन वैशेषिक तत्त्वमीमांसा के आलोक में करें:
सूची-I सूची-II
A. पर-सामान्य i. द्रव्यत्व
B. अपर-सामान्य ii. इन्द्रियत्व
C. परापर-सामान्य iii. सत्ता
D. उपाधि iv. घटत्व
कूट :
A B C D
(a) ii iii i iv
(b) iii iv i ii
(c) i iv iii ii
(d) iv i ii iii
Ans. (b) : पर-सामान्य से सत्ता‚ अपर-सामान्य से घटत्व‚ परापरसामान्य से द्रव्यत्व तथा उपाधि से इन्द्रियत्व का सम्बन्ध है।
5. रामानुज के अनुसार उस संबंध का निर्धारण करें जिसके द्वारा ब्रह्म चित और अचित से सम्बद्ध होता है।
(a) तादात्म्य (b) समवाय
(c) स्वरूप (d) अपृथक्सिद्धि
Ans. (d) रामानुज के अनुसार ब्रह्म का चित्त और अचित्त से ‘अपृथकसिद्ध’ संबंध होता है। ध्यातव्य हो कि रामानुज चित्त और अचित्त को ब्रह्म का अंश मानते हैं। उनके अनुसार चित्त और अचित्त का ब्रह्म से तादात्म्य संबंध नहीं है।
6. अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार करें और सही
कूट का चयन करें:
अभिकथन (A):
त्रयणुक के अंश होते हैं (द्वयणुक)। कारण (R): जो भी दृश्यमान है वह अंशभूत है उदाहरणार्थ घट।
कूट:
(a) (A) सत्य है‚ किन्तु (R) असत्य है तथा (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(b) (A) सत्य है‚ किन्तु (R) असत्य है तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
(c) (A) और (R) दोनों सत्य है तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
(d) (A) और (R) दोनों सत्य है तथा (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
Ans. (c) : वैशेषिक के अनुसार समस्त जगत की दृश्यमान वस्तुएं परमाणु से निर्मित द्वयणुको का संयोग है। त्रयणुक के अंश होते हैं द्वयणुक। यह सत्य है तथा घट द्रश्यमान होने के नाते वह भी अंशभूत है। अभिकथन (A) सत्य है और कारण (R) सत्य भी सत्य है। (R) (A) की सही व्याख्या है।
7. अरस्तू के अनुसार निम्नलिखित में से कौन से स्वीकार्य है?
(A) अलग-अलग तरह के जीवों में अलग-अलग तरह की आत्मा होती है।
(B) आत्मा जीवित शरीर का रूप है।
(C) आत्मा का अस्तित्व शरीर से बाहर हो सकता है।
(D) कुछ मनुष्यों में आत्मा का बौद्धिक अंश पूर्णत: विकसित नहीं होता।
कूट:
(a) (A) और (B) (b) (B) और (C)
(c) (A), (B) और (d) (d) (A), (B) और (D)
Ans. (d) : अरस्तू के अनुसार‚ आकार और शरीर द्रव्य दोनों है। दोनों परस्पर अवियोज्य है। अरस्तू के अनुसार अलग-अलग तरह के जीवों में अत्मग -अलग तरह की आत्मा होती है। आत्मा जीवित शरीर का रूप है। आत्मा का अस्तित्व शरीर से बाहर हो ही नहीं सकता क्योंकि अशरीरी आत्मा का अस्तित्व असंगत है‚ तथा कुछ मनुष्यों में आत्मा का बौद्धिक अंश पूर्णत: विकसित नहीं होता है।
8. ‘दो पदार्थ परस्पर सर्वथा-समान नहीं हो सकते।’ इस मत का पक्षधर कौन है?
(a) केवल लाइब्नित्ज (b) केवल स्पिनोजा
(c) लाइब्नित्ज और देकार्त (d) लाइब्नित्ज और स्पिनोजा
Ans. (d) : ‘दो पदार्थ (द्रव्य) परस्पर सर्वथा समान नहीं हो सकते। यह कथन लाइब्नित्ज और स्पिनोजा को मान्य है।
9. ‘वैयक्तिक अनन्यता चेतना की समरूपता में समाहित है।’ इस मत का पक्षधर कौन है?
(a) देकार्त (b) बर्कले
(c) कांट (d) लॉक
Ans. (d) : ‘वैयक्तिक अनन्यता’ का निकष जान लॉक स्मृति को मानते हैं। उसे इस सिद्धान्त का जनक कहा जाता है। वह कहता है कि वर्तमान और अतीत कर्मों की चेतना रखने वाला व्यक्ति एक ही है‚ जिससे दोनों कर्म (वर्तमान तथा अतीत कर्म) संबंधित होते हैं। उसके अनुसार‚ ‘वैयक्तिक अनन्यता चेतना की समरूपता में समाहित है।’
10. सूची – I को सूची- II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिये गये कूटों से सही उत्तर का चयन करें:
सूची – I सूची- II
(दार्शनिक) (वस्तु-विषयक मत)
A. देकार्त i. प्रत्यय समुच्चय
B. स्पिनोजा ii. विस्तारित द्रव्य
C. लाइब्नित्ज iii. पर्याय
D. बर्कले iv. आध्यात्मिक अणुओं का समुच्चय
कूट :
A B C D
(a) ii i iii iv
(b) i iii ii iv
(c) ii iii iv i
(d) i iv i iii
Ans. (c) : देकार्त-विस्तारित द्रव्य‚ स्पिनोजा-पर्याय‚ लाइब्नित्ज आध्यात्मिक अणुओं का समुच्चय तथा बर्कले-प्रत्यय समुच्चय।
11. निम्नलिखित में से कौन सा एक कांट को स्वीकार्य नहीं है?
(a) दिक् और काल प्रागनुभविक है।
(b) दिक् और काल समान समप्रत्यय नहीं है।
(c) दिक् और काल अतीन्द्रिय आदर्श है।
(d) दिक् और काल आनुभविक यथार्थ है।
Ans. (d) : कांट के अनुसार‚ दिक् और काल प्रागनुभविक है। दिक् और काल सामान्य सम्प्रत्यय नहीं-विशेष है। दिक् और काल अतीन्द्रिय आदर्श है। दिये गये चौथा विकल्प यह होगा-दिक् -काल आनुभविक यथार्थ नहीं है जो गलत है। यह कांट को स्वीकार्य नहीं है। उसके अनुसार दिक्-काल आनुभविक रूप से यथार्थ और परमार्थत: काल्पनिक है।
12. अन्विताभिधानवाद का संबंध है
(a) कुमारिल से (b) प्रभाकर से
(c) जैमिनि से (d) गौतम से
Ans. (b) : ‘अन्विताभिधानवाद’ का संबंध प्रभाकर मीमांसा से है। वेद के विधिवाद तथा अर्थवाद दो भाग किये जा सकते हैं। मुख्य भाग विधिवाद तथा अर्थवाद वर्णनात्मक है। प्रभाकर के अनुसार‚ अर्थवाद भी कर्म का सहायक बनकर प्रमाणित हो सकता है।
13. कुमारिल द्वारा समर्थित भ्रम-सिद्धांत है
(a) सत् ख्याति (b) असत् ख्याति
(c) आत्म ख्याति (d) अन्यथा ख्याति
Ans. (b) : यह प्रश्न गलत है क्योंकि ‘सत् ख्याति’-रामानुजाचार्य द्वारा असत् ख्याति-शून्यवादी माध्यमिकों द्वारा‚ आत्म ख्यातिविज्ञ् ानवादी योगाचार द्वारा तथा अन्य व्याख्याति न्याय दर्शन द्वारा स्वीकृत है। जबकि कुमारिल का मत विपरीत ख्याति के नाम से जाना जाता है।
14. अद्वैत वेदान्त के अनुसार जब हम रज्जु में सर्प को देखते हैं तो
(a) सर्प अयथार्थ होता है
(b) सर्प यथार्थ होता है
(c) सर्प न तो यथार्थ है‚ न अयथार्थ
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans. (c) : अद्वैत वेदान्त का ‘भ्रम’ सिद्धान्त को ‘अनिर्वचनीय ख्याति’ के नाम से जाना जाता है। जिसके अनुसार रज्जू में हम जिस सर्प को देखते है तो वह सर्प न तो अयथार्थ है‚ न यथार्थ। अर्थात् वह न तो सत् है और न ही असत् है वह सदसतनिर्वचनीय अर्थात् मिथ्या है।
15. सूची – I को सूची- II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिये गये कूटों से सही उत्तर का चयन करें:
सूची – I सूची- II
A. सांख्य i. परत: प्रामाण्य परत: अप्रामाण्य
B. बौद्ध ii. स्वत: प्रामाण्य स्वत: अप्रामाण्य
C. न्याय वैशेषिक iii. परत: प्रामाण्य स्वत: अप्रामाण्य
D. मीमांसा iv. स्वत: प्रामाण्य परत: अप्रामाण्य
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) ii iii i iv
(c) iv iii ii i
(d) iii ii i iv
Ans.(b) : सांख्यदर्शन को स्वत: प्रामाण्य‚ स्वत: अप्रामाण्य; बौद्ध को परत:; प्रामाण्य‚ स्वत: अप्रामाण्य; न्याय-वैशेषिक को परत:
प्रामाण्य‚ परत: अप्रामाण्य तथा मीमांसा को स्वत: प्रामाण्य‚ परत:
अप्रामाण्य मान्य है।
16. प्रत्यक्ष ज्ञान वह है जिसके पूर्व कोई अन्य ज्ञान नहीं होता। यह मत स्वीकार किया है
(a) मीमांसकों को (b) नैयायिकों ने
(c) जैनों ने (d) वैयाकरणों ने
Ans. (b) : नैयायिकों के अनुसार प्रत्यक्ष ज्ञान वह है जिसके पूर्व कोई अन्य ज्ञान नहीं होता है। प्रत्यक्ष ज्ञान हमेशा इन्द्रिय तथा अर्थ के सन्निकर्ष से उत्पन्न‚ अन्य प्रदेशे‚ अव्यभिचारी और व्यवसायात्मक ज्ञान है।
17. न्याय के अनुसार भ्रम निम्नलिखित में से किस एक प्रत्यक्ष पर आधारित है?
(a) सामान्य लक्षण (b) ज्ञानलक्षण
(c) योगज (d) निर्विकल्पक
Ans. (b) : न्याय-दर्शन में ‘भ्रम’ को ज्ञान लक्षण नामक अलौकिक प्रत्यक्ष पर आधारित बताया गया है। ‘शुक्ति’ और रजत के समान धर्मों के कारण पूर्वदृष्ट रजत का स्मरण होता है और स्मृति में विद्यमान रजत रूप का बाहर शुक्ति के स्थान पर ज्ञान लक्षण प्रत्यासत्ति द्वारा असाधारण प्रत्यक्ष होता है।
18. लॉक के अनुसार ज्ञान सन्निहित है
(a) प्रत्ययों के बीच सहमति में
(b) प्रत्ययों के बीच असहमति में
(c) प्रत्ययों एवं वस्तुओं के बीच सहमति या असहमति के प्रत्यक्षीकरण में
(d) प्रत्ययों के बीच सहमति या असहमति के प्रत्यक्षीकरण में
Ans. (c) : लॉक के अनुसार वस्तुओं के मूलगुणों से प्राप्त मानसिक प्रत्ययों एवं वस्तुओं के बीच सहमति या असहमति के प्रत्यक्षीकरण में ज्ञान सन्निहित है। इसीलिए लॉक को प्रत्यय प्रतिनिधित्ववादी माना जाता है।
19. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें और निम्नलिखित कूटों की सहायता से सही उत्तर का चयन करें:
सूची – I (दार्शनिक) सूची- II (विभेद)
A. ह्मूम i. संभवता‚ सहसंभवता
B. लाइब्नित्ज ii. साक्षात् परिचय ज्ञान‚ विवरणात्मक ज्ञान
C. रसेल iii. ‘जानना कि’ ‘जानना कैसे’
D. राईल iv. पूर्ववर्ती संशयवाद‚ अनुवर्ती संशयवाद
कूट :
A B C D
(a) i iv iii ii
(b) iv i ii iii
(c) iii iv ii i
(d) i ii iii iv
Ans. (*) :
(a) ह्मूम – पूर्ववर्ती संशयवाद‚ अनुवर्ती संशयवाद
(b) लाइब्नित्ज – संभवता‚ सहसंभवता
(c) रसेल – साक्षात् परिचय ज्ञान‚ विवरणात्मक ज्ञान
(d) राईल – ‘जानना कि’ ‘जानना कैसे’
20. अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार तथा सही विकल्प का चयन करें:
अभिकथन (A):
क्वाइन अनुभववादियों के उत्कट स्थगनवाद का खंडन करते हैं।
तर्क (R): बाह्य जगत विषयक हमारे अभिकथनों की परीक्षा इन्द्रियानुभवों के न्यायाधिकरण में समग्र समूह के रूप में होती है।
कूट:
(a) (A) और (R) दोनों सत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य है परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या है।
(c) (A) सत्य है‚ परन्तु (R) असत्य है।
(d) (A) असत्य है और (R) सत्य है।
Ans. (a) : क्वाइन अनुभववाद को दो मताग्रहों पर आधारित मानते हैं। प्रथम मताग्रह विश्लेषणात्मक और संश्लेषणात्मक वाक्यों में आधारभूत भेद पर आधारित है और दूसरा मताग्रह स्थगनवाद
(Reductionism) से है। क्वाइन अनुभववादियों के उत्कट स्थगनवाद का खण्डन करते हैं और क्योंकि बाह्य जगत विषयक हमारे अभिकथनों की परीक्षा इन्द्रियानुभवों के न्यायाधिकरण में समग्र समूह के रूप में होती है।
21. निम्नलिखित में से किसने कहा कि ‘‘अनुभववादी चींटियों की तरह हैं‚ वे संग्रह करते हैं और उसका उपयोग करते हैं‚ किंतु बुद्धिवादी मकड़ियों की तरह अपने भीतर से धागों को बुनते हैं’’।
(a) लॉक (b) बेकन
(c) बर्कले (d) एयर
Ans. (b) : बेकन को आगमनात्मक तर्कशास्त्र का जनक कहा जा सकता है। बेकन इंग्लैंड की अनुभववादी प्रवृत्ति के पहले महत्वपूर्ण विचारक और विज्ञान दार्शनिक है। वह आगमनात्मक अनुभव को निरीक्षण‚ प्रयोग और बौद्धिक सूझ-बूझ (विश्लेषण) पर आधारित एक वैज्ञानिक पद्धति है। बेकन का रूपक है-अनुभववादी चीटियों की तरह है। वे संग्रह करते हैं और उसका उपयोग करते हैं‚ किन्तु बुद्धिवादी अपने भीतर से धागों को बुनते हैं।
22. निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प देकार्त और लॉक दोनों के द्वारा स्वीकार्य है?
(a) हम वस्तुओं को साक्षात् रूप से अनुभव द्वारा जानते है
(b) स्मृति वैयक्तिक अनन्यता की कसौटी है
(c) अन्त:प्रज्ञा और निदर्शन हमें निश्चित ज्ञान प्रदान करते हैं
(d) ईश्वर का अस्तित्व ईश्वर के विचार से प्रतिफलित है
Ans. (c) : देकार्त बुद्धिवादी तथा लॉक अनुभववादी दार्शनिक होने के बावजूद अन्त:प्रज्ञा और निदर्शन को निश्चित ज्ञान प्रदान करने का आधार मानते हैं। हालांकि दोनों के मतों में अंतर है।
23. ‘‘प्रत्यक्षम् कल्पनापोढ़म् नामजात्याद्यासंयुक्तम्’’- प्रत्यक्ष की यह परिभाषा दी गई है:
(a) धर्मकीर्ति (b) दिग्नाग
(c) वसुबंधु (d) रत्नकीर्ति
Ans. (b) : ‘‘प्रत्यक्षम् कल्पनापोढ़म् नामजात्याद्यासंयुक्तम्’’− आचार्य दिग्नाग। दिग्नाग अपने पुस्तक ‘प्रमाण समुच्चय’ में यह कहते हैं। उनके अनुसार ज्ञान के केवल दो साधन प्रत्यक्ष और अनुमान है।
24. अभिकथन (A) और तर्क (R) का परीक्षण करें तथा न्याय ज्ञान मीमांसा के संदर्भ में दिए गए कूटों में से सही विकल्प का चयन करें:
अभिकथन (A):
ध्वनि है।
तर्क (R): ध्वनि श्रव्य है।
कूट:
(a) (A) सत्य है लेकिन (R) असत्य है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) और (R) दोनों सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या है।
(d) (A) और (R) दोनों असत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या है।
Ans. (b): न्याय की ज्ञानमीमांसा में ‘ध्वनि का नित्य’ माना गया है तथा ‘ध्वनि को श्रव्य’ भी माना गया है। परंतु जो ‘ध्वनि श्रव्य है’ वह ‘श्रव्य’ ध्वनि नित्य नहीं है। अत: (A) और (R) सत्य है परंतु सही व्याख्या नहीं है।
25. ‘‘सभी वस्तुएँ नित्य हैं क्योंकि वे ज्ञेय हैं’’ – इस युक्ति में निम्नलिखित तर्कदोष है:
(a) असाधारण सव्यभिचार (b) आश्रयासिद्ध
(c) बाधित (d) अनुपसंहारी सव्यभिचार
Ans. (d) : ‘‘सभी वस्तुएँ नित्य है क्योंकि वे ज्ञेय है।’’ में ज्ञेय होना हेतु पक्ष के सर्वग्राही होने के कारण किसी सपक्ष दृष्टान्त में संभव नहीं है। अत: इसमें हेतु अनुपसंहारी है।
26. सही क्रम का चयन करें:
(a) प्रतिज्ञा‚ हेतु‚ उपनय‚ उदाहरण
(b) प्रतिज्ञा‚ हेतु‚ निगमन‚ उपनय
(c) प्रतिज्ञा‚ हेतु‚ उदाहरण‚ उपनय
(d) हेतु‚ उदाहरण‚ प्रतिज्ञा‚ निगमन
Ans. (c) : न्याय दर्शन में परार्थ अनुमान को पंचावयव माना गया है। इसीलिए परार्थानुमान को ‘पंचावयव अनुमान’ भी कहते हैं। जिसका क्रम निम्न है। प्रतिज्ञा‚ हेतु‚ उदाहरण‚ उपनय‚ निगमन।
27. बौद्ध मत के अनुसार अविनाभाव संबंध निर्भर करता है:
(a) तादात्म्य‚ कारणता‚ निषेध
(b) तादात्म्य‚ नियत साहचर्य‚ निषेध
(c) कारणता‚ निषेध‚ नियंत साहचर्य
(d) निषेध‚ नियत साहयचर्य‚ कारणता
Ans. (a): बौद्ध मत के अनुसार अविनाभाव संबंध तादात्म्य‚ कारणता‚ निषेध पर निर्भर करता है।
28. निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प बौद्धमत के अनुसार प्रत्यक्ष के रूपों का अभिकथन करता है?
(a) इंद्रियविज्ञान‚ मनोविज्ञान‚ सामान्यलक्षण‚ योगिज्ञान
(b) मनोविज्ञान‚ स्व-संवेदन‚ इंद्रियविज्ञान‚ ज्ञानलक्षण
(c) स्व-संवेदन‚ मनोविज्ञान‚ योगिज्ञान‚ ज्ञानलक्षण
(d) इंद्रियविज्ञान‚ मनोविज्ञान‚ स्व-संवेदन‚ योगिज्ञान
Ans. (a): बौद्ध मत के अनुसार‚ प्रत्यक्ष के रूपों का अभिकथन करता है कमश: इन्द्रियविज्ञान‚ मनोविज्ञान‚ स्व-संवेदन‚ योगिज्ञान। बौद्ध दर्शन में दो ही प्रमाण माने गये हैं- प्रत्यक्ष‚ अनुमान स्वलक्षण या परमार्थ सत बुद्धिगम्य नहीं है। वह प्रत्यक्ष का विषय है।
29. लोक संग्रह का अर्थ है?
(a) मुक्त आत्मा के हित में किए गए कर्म
(b) मानवता के हित में किए गए कर्म
(c) मुक्ति प्राप्ति के लिए किए गए कर्म
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (b) : भगवद्गीता में ‘लोकसंग्रह’ के दर्शन का वर्णन हुआ है। यह ‘स्थित प्रज्ञ’ की अवधारणा के साथ वर्णित हुआ है। लोकसंग्रह का अर्थ होता है ‘मानवता के हित में किये गये कर्म।’ गीता में ‘लोकसंग्रह’ के लिए कर्मयोग का उपदेश दिया गया है। ‘लोकसंग्रह’ एक सामाजिक आदर्श है।
30. गीता के संदर्भ में दिए गए अभिकथन (A) तथा तर्क
(R) का परीक्षण करें और सही विकल्प का चयन करें:
अभिकथन (A):
स्वधर्म का पालन करना चाहिए।
तर्क (R): यह सुखोत्पादक है।
कूट:
(a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य है लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) असत्य है‚ लेकिन (R) सत्य है।
(d) (A) सत्य है लेकिन (R) असत्य है।
Ans. (b) : गीता के संदर्भ में ‘स्वधर्म’ विशिष्ट धर्म है। ‘स्वधर्म’ का अर्थ है अपना-अपना धर्म या अपना-अपना कर्त्तव्य। जो आत्मा के विधान के अनुकूल हो उसे स्वधर्म का पालन करना चाहिए। यह सुखोत्पादक तो है परंतु इसके उद्देश्य सामाजिक एकता बनाये रखने के लिए है। अत: अभिकथन (A) और (R) दोनों सत्य है परंतु
(R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूपरेखा-राममूर्ति पाठक)
31. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिये गये कूटों से सही उत्तर का चयन करें:
सूची – I सूची- II
(लेखक) (पुस्तवेंâे)
A. शंकर i. न्याय मंजरी
B. जयराशि भट्ट ii. तत्त्वकौमुदी
C. जयंत भट्ट iii. ब्रह्मसूत्र
D. वाचस्पति मिश्र iv. तत्त्वोपप्लवसिंह
कूट :
A B C D
(a) i iii iv ii
(b) iii iv i ii
(c) ii i iv iii
(d) iv iii i ii
Ans. (b) :
(a) शंकर – ब्रह्मसूत्र
(b) जयराशि भट्ट – तत्त्वोपप्लवसिंह
(c) जयंत भट्ट – न्याय मंजरी
(d) वाचस्पति मिश्र – तत्त्वकौमुदी
32. बौद्धमत के अनुसार निम्नलिखित में से कौन ‘त्रिशरण’ के रूप में जाना जाता है?
(a) दर्शन‚ ज्ञान‚ चरित्र (b) मैत्री‚ करुणा‚ मुदिता
(c) बुद्ध‚ मनन‚ निदिध्यासन (d) बुद्ध‚ धम्म‚ संघ
Ans. (d): बौद्धमत के अनुसार‚ ‘बुद्ध’ धम्म‚ संघ‚ त्रिशरण के नाम से जाना जाता है।
33. भगवद्गीता को सर्वाधिक महत्ता इस कारण से प्रदान की गई है:
(a) जीवन का सामंजस्यपूर्ण दर्शन
(b) क्रिया‚ भक्ति और ज्ञान का समन्वय
(c) नैतिक शिक्षा
(d) उपरोक्त सभी
Ans. (d): ‘भगवद्गीता’ को ‘‘प्रस्थाने त्रयी’ में रखा गया है। ‘भगवद्गीता’ जीवन का सामंजस्यपूर्ण दर्शन है। इसमें क्रिया‚ भक्ति और ज्ञान का समन्वय किया गया है। ‘स्थितप्रज्ञ’ का आदर्श और लोकसंग्रह आदि इसकी प्रमुख नैतिक अवधारणाएँ हैं जो हमें नैतिक शिक्षा प्रदान करती है।
34. निम्नलिखित में से कौन सा सही क्रम है?
(a) क्षिप्त‚ विक्षिप्ति‚ मूढ़ (b) क्षिप्त‚ मूढ़‚ विक्षिप्त
(c) क्षिप्त‚ विक्षिप्त‚ एकाग्र (d) विक्षिप्त‚ मूढ़‚ एकाग्र
Ans. (b) : योग-दर्शन में चित्त की पांच भूमियाँ (अवस्थाएँ) मानी गयी है जो क्रमश: -क्षिप्त‚ मूढ़‚ विक्षिप्त‚ एकाग्र‚ निरुद्ध है। प्रथम तीन (क्षिप्त‚ मूढ़‚ विक्षिप्त) को योग के लिए अनुपयुक्त माना जाता है तथा अंतिम दो भूमियाँ ही योग के अनुकूल है।
(भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूपरेखा-डॉ0 राममूर्ति पाठक)
35. यह विचार निम्नलिखित में से किस एक का है कि ‘नीति सम्बन्धी बातों में राजकीय नियम ही सर्वोच्च न्यायालय है?
(a) स्पेन्सर (b) मिल
(c) कान्ट (d) हॉब्स
Ans. (d): थॉमस हॉब्स जो एक सामाजिक -राजनीतिक दार्शनिक है ने ‘सामाजिक समझौते का सिद्धान्त’ दिया। उसके अनुसार नीतिसंबंधी बातों में राजकीय नियम ही सर्वोच्च न्यायालय है। उसके प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘लेवियाथन’ है।
36. सूची-I के साथ सूची-II को सुमेलित करें एवं नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चुनाव करें:
सूची-I सूची-II
A. कान्ट i. स्वर्णिम माध्यम
B. हेगेल ii. मुख्य सद्गुण
C. प्लेटो iii. निरपेक्ष आदेश
D. अरस्तू iv. जीने के लिए मरो
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) i iii iv ii
(c) iii iv ii i
(d) iv i iii ii
Ans. (c):
(a) काण्ट – निरपेक्ष आदेश
(b) हेगेल – जीने के लिए मरो
(c) प्लेटो – मुख्य सद्गुण
(a) अरस्तू – स्वर्णिम माध्य
37. निम्नलिखित में से किस एक का मत है ‘मनुष्य सभी वस्तुओं का मापदण्ड है’?
(a) जीनो (b) प्रोटेगोरस
(c) अरस्तू (d) प्लेटो
Ans. (b): प्रोटेगोरस जो कि एक ग्रीक सोफिस्ट विचारक है के अनुसार‚ ‘मनुष्य सभी वस्तुओं का मापदण्ड है। (होमो मेन्सुरा)।
38. निम्नलिखित में से कौन एक भारतीय नीतिशास्त्र को पाश्चत्य नीतिशास्त्र से पृथक करता है?
(a) पुरुषार्थ की अवधारणा
(b) वर्ण एवं आश्रम की अवधारणा
(c) अहिंसा की अवधारणा
(d) दण्ड एवं पुरस्कार की अवधारणा
Ans. (d): भारतीय नीतिशास्त्र को पाश्चात्य नीतिशास्त्र से पृथक करती है− दण्ड एवं पुरस्कार की अवधारणा।
39. ‘नैतिक निर्णय का आधार कर्मफल है।’ निम्नलिखित में से किस एक का यह मत है?
(a) सुखवादी (b) अन्त:प्रज्ञावादी
(c) कठोरतावादी (d) आदर्शवादी
Ans. (a): सुखवादी विचारधारा में ‘नैतिक निर्णय का आधार पर कर्मफल है’माना गया है। अर्थात् यदि किसी निर्णय या कर्म से सुख उत्पन्न हो तो वह अच्छा कर्म या निर्णय है। हालांकि विभिन्न सुखवादी दार्शनिक ‘उपयोगिता’ पर अधिक जोर देते हैं।
40. निम्नलिखित में से किस एक विचारक ने ‘न्याय’ को ‘मुख्य सद्गुण’ के रूप में स्वीकार किया है?
(a) साफिस्ट (b) अरिस्टिपस
(c) बेन्थम (d) प्लेटो
Ans. (d): प्लेटो अपने नैतिक और राजनीतिक दर्शन को भी अपने प्रत्ययवादी तत्वमीमांसा के आधार पर निगमित करता है। उसके अनुसार यद्यपि भौतिक वस्तुएं परिवर्तनशील है तथापि ये मूलत:
अपरिवर्तनशील प्रत्ययों की अभिव्यक्तियाँ हैं। वह आत्मा के तीन भागों के अनुरूप विवेक‚ साहस‚ आत्मसंयम तथा इन तीनों के सामंजस्य से उत्पन्न न्याय को प्रमुख सद्गुण मानता है।
41. सूची-I के साथ सूची-II को सुमेलित करें एवं नीचे दिऐ गये कूट से सही उत्तर का चुनाव करें:
सूची-I सूची-II
(लेखक) (पुस्तवेंâे)
A. संवेगवाद i. कान्ट
B. परामर्शवाद ii. मिल
C. उपयोगितावाद iii. एयर
D. बुद्धिवाद iv. हेयर
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) i iii ii iv
(c) iii iv ii i
(d) iv ii i iii
Ans. (c):
(a) संवेगवाद – एयर
(b) परामर्शवाद – हेयर
(c) उपयोगितावाद – मिल
(d) बुद्धिवाद – कांट
42. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिये गये कूटों से सही उत्तर का चयन करें:
सूची-I सूची-II
A. उदारवादी नरीवाद i. सीमोन द बोउवार
B. मार्क्सवादी नारीवाद ii. मेरी वोल्स्टनक्राफ्ट
C. अस्तित्त्ववादी नारीवाद iii. जूलियट मिशेल
D. समाजवादी नारीवाद iv. फ्रेडरिक एंजेल्स
कूट :
A B C D
(a) ii iv i iii
(b) i iii iv ii
(c) ii i iv iii
(d) i iii ii iv
Ans. (a): सीमोन द बोउवार अस्तित्ववादी नारीवाद; मेरी वोल्स्टनक्राफ्ट उदारवादी नारीवाद‚ जूलियट मिशेल समाजवादी नारीवाद तथा फ्रेडरिक एंजेल्स मार्क्सवादी नारीवाद के समर्थक है।
43. मानवाधिकार सम्मेलनों के संदर्भ में सूची – I और सूची- II को सुमेलित करें और कूटों की सहायता से सही विकल्प का चयन करें। सूची – I सूची- II
A. मानवाधिकार की i. 2006 सार्वभौमिक घोषण
B. बच्चों के अधिकार पर ii. 1979 आधारित सम्मेलन
C. विकलांग व्यक्तियों के iii. 1948 अधिकार पर आधारित सम्मेलन
D. स्त्रियों के प्रति प्रत्येक iv. 1989 भेदभाव के उन्मूलन के के लिए सम्मेलन
कूट :
A B C D
(a) iv i iii ii
(b) iii iv i ii
(c) ii i iv iii
(d) iv iii i ii
Ans. (*):
(a) मानवाधिकार की सार्वभौमिक घोषणा – 1948
(b) बच्चों के अधिकार पर आधारित सम्मेलन – 1989
(c) विकलांग व्यक्तियों के अधिकार पर आधारित सम्मेलन – 2006
(d) स्त्रियों के प्रति भेदभाव के उन्मूलन के लिए सम्मेलन – 1979
44. निम्नलिखित में से कौन मानवाधिकार की संकल्पना की किसी भी रूप में आलोचना नहीं करता है?
(a) फ्रेडरिक नीत्शे (b) एडमंड बर्क
(c) जेरेमी बेंथम (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (d): मानवाधिकार की संकल्पना का फ्रेडरिक नीत्शे‚ एडमंड बर्क‚ जेरेमी बेंथम आदि सभी किसी न किसी रूप में आलोचना करते हैं।
45. ‘‘वैयक्ति राजनैतिक है’’ केरोल हेनिश का यह लोकप्रिय नारा पर्याय है
(a) प्रथम दौर के नारीवाद का
(b) तृतीय दौर के नारीवाद का
(c) नारीवादोत्तर का
(d) द्वितीय दौर के नारीवाद का
Ans. (d): ‘‘वैयक्तिक राजनैतिक है’’ केरोल हेनिश का यह नारा द्वितीय दौर के नारीवाद का पर्याय है।
46. यदि न्याय के प्रथम आकार में वृहत् वाक्य हो तो तर्कदोष् ा का नाम होगा
(a) अव्याप्त मध्यपद अथवा अनुचित वृहद्पद दोष
(b) अनुचित वृहद्प अथवा अनुचित लघुपद दोष
(c) चतुष्पद दोष अथवा अव्याप्त मघ्यपद दोष
(d) अनुचित लघुपद अथवा अव्याप्त मध्यपद दोष
Ans. (a): यदि न्याय के प्रथम आकार में बृहत आधार वाक्य ‘I’ अर्थात् अंशव्यापी स्वीकारात्मक हो तो वहां पर अव्याप्त मध्यपद अथवा अनुचित वृहद्पद दोष होता है।
47. आगमनात्मक सामान्यीकरण आधारित है:
(a) सिर्फ अनुभव पर
(b) सिर्फ सामान्यीकरण पर
(c) सिर्फ प्राकृतिक समरूपता पर
(d) उपरोक्त सभी पर
Ans. (d) आगमनात्मक सामान्यीकरण‚ विशिष्ट अनुभव पर आधारित सामान्यीकरण है। इसका आधार प्राकृतिक समरूपता है।
48. निम्नलिखित में से कौन अनुमान का नियम नहीं है?
(a) मोडस पोनेन्स (b) कम्युटेशन
(c) सिम्पलीफिकेशन (d) एडीशन
Ans. (b): मोडस पोनेन्स‚ सिम्पलीफिकेशन‚ एडीशन आदि अनुमान के नियम है जबकि कम्युटेशन को पुर्नस्थापन नियम के अंतर्गत रखते हैं।
49. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों में से सही विकल्प का चयन करें:
सूची – I सूची- II
A. एक्सपोटेशन i. [p.(q ∨ r]α [p.q) ∨ (p.r)
B. कम्युटेशन ii. p α (p.p)
C. डिस्ट्रीब्यूशन iii. [p.q) ⊃ r] α [p ⊃ (q ⊃ r)
D. टॉटोलॉजी iv. (p ∨ q]α ( q ∨ p)
कूट :
A B C D
(a) iii iv i ii
(b) i ii iii iv
(c) iv iii ii i
(d) iii iv ii i
Ans. (a):
(a) एक्सपोटेशन – [p.q) ⊃ r] α [p ⊃ (q ⊃ r)
(b) कम्युटेशन – (p ∨ q) α ( q ∨ r)
(c) डिस्ट्रीब्यूशन – [p ( q∨r] α [p.q) ∨ (p r)]
(d) टॉटोलॉजी – p α (p.p)
50. ‘पद की वस्तु वाचकता’ का अर्थ है:
(a) इसका विस्तार (b) इसके लक्षण
(c) उपरोक्त दोनों (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (c): ‘पद की वस्तु वाचकता’ का अर्थ इसका विस्तार तथा इसके लक्षण दोनेां है।
51. निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प ‘आगमनात्मक युक्ति’ का संकेतक है?
(a) ऐसा नहीं हो सकता कि आधार वाक्य सत्य हो लेकिन निष्कर्ष असत्य हो।
(b) यह संभव है कि आधार वाक्य निष्कर्ष से संगत न हो।
(c) ये युक्तियाँ न तो वैध हों न अवैध।
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं।
Ans. (a): इस प्रश्न का हिन्दी प्रारूप गलत है। अंग्रेजी प्रारूप के अनुसार ‘निगमनात्मक युक्ति’ (Deductive arraument) का संकेतक है कि ऐसा नहीं हो सकता कि आधार वाक्य सत्य हो लेकिन निष्कर्ष असत्य हो। हिन्दी में ‘आगमनात्मक’ की जगह निगमनात्मक होगा।
52. निम्नलिखित में से उस विकल्प का चयन करें जो सही नहीं है:
(a) एक सत्यताफलन अभिकथन में यदि पूर्ववर्ती और अनुवर्ती दोनों सत्य है‚ तो अभिकथन सत्य है।
(b) एक सत्यताफलन अभिकथन में यदि पूर्ववर्ती सत्य है तथा अनुवर्ती असत्य‚ तो अभिकथन सत्य है।
(c) एक सत्यताफलन अभिकथन में यदि पूर्ववर्ती और अनुवर्ती दोनों असत्य है‚ तो अभिकथन सत्य है।
(d) एक सत्यताफलन अभिकथन में यदि पूर्ववर्ती सत्य है और अनुवर्ती असत्य है‚ तो अभिकथन असत्य है।
Ans. (b): एक सत्यताफलन कथन में यदि पूर्ववर्ती सत्य है तथा अनुवर्ती असत्य तो अभिकथन सत्य है। गलत विकल्प है।
53. यदि A और B सत्य है‚ किन्तु X और Y असत्य है‚ तो निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही है?
(a) ∼ A ∨ (X.Y) (b) (A.X)
(c) उपरोक्त दोनों (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (b): यदि A और B सत्य है किन्तु X और Y असत्य है तो
(A. X) सही है।
54. दी गई युक्तियों का परीक्षण करें और सही विकल्प का चयन करें:
युक्ति I युक्ति II
M ∪ N P ∪ Q ∼ M. ∼ O -P.-R Q ∼ N QQ
कूट:
(a) I और II दोनों युक्तियाँ वैध है।
(b) I और II दोनों युक्तियाँ अवैध है।
(c) युक्ति I वैध है लेकिन युक्ति II अवैध है।
(d) युक्ति I अवैध है लेकिन युक्ति II वैध है।
Ans. (d):
युक्ति I युक्ति II M ∪ N P ∪ Q ∼ M. ∼ O -P ∪ -R Q ∼ N QQ अवैध वैध
55. दी गई युक्तियों के संदर्भ में नीचे दिए गए कूटों में से सही का चयन करें:
युक्ति I युक्ति II
(x) (Sx ∨ Tx ) ⊃ ∼ (Mx V Nx ) P.q
(∃x) (Sx ∼ Wx) Qq
(∃x) (Tx .-Xx)
(x) (∼Wx ⊃ Xx) Q(∃x) (Mx . Nx)
कूट:
(a) दोनों ही युक्तियाँ वैध हैं।
(b) दोनों ही युक्तियाँ अवैध है।
(c) युक्ति I वैध है‚ किन्तु युक्ति II अवैध है।
(d) युक्ति I अवैध है‚ किन्तु II वैध है।
Ans. (c): युक्ति I वैध है जबकि युक्ति II अवैध है।
56. उस विकल्प का चयन करें‚ जो सही नहीं है:
(a) एक भावात्मक व्यक्तिवाचक प्रतिज्ञप्ति यह निर्धारित करती है कि एक व्यक्ति-विशेष एक गुण-विशेष को धारण करता है।
(b) परिणामीकरण (क्वांटिफायर) अनुमान के नियमों को नहीं बदलता।
(c) एक वैध न्याय आकारिक रूप से वैध एक युक्ति है जिसकी वैधता इसकी विषयवस्तु पर आधारित है।
(d) ’p . q ⊃ m ∨ r’ एक आकस्मिक अभिकथन है।
Ans. (c): A, B, D सही है। परंतु (C) एक वैध न्याय आकारिक रूप से वैध एक युक्ति है जिसकी वैधता इसकी विषयवस्तु पर आधारित है।
57. मनुष्य के भीतर ईश्वर का सिद्धांत निम्नलिखित में से किनके द्वारा समर्थित है?
(a) रामानुज और कबीर (b) कबीर और गुरु नानक
(c) गुरु नानक और रामकृष्ण (d) उपर्र्युक्त सभी
Ans. (d): ‘मनुष्य’ के भीतर ‘ईश्वर’ है- रामानुज‚ कबीर‚ गुरुनानक‚ रामकृष्ण आदि मानते थे।
58. निम्नलिखित विकल्पों को पढ़ें और बौद्ध धर्म के प्रतीत्य समुत्पाद के सही क्रम का चयन करें:
(a) संस्कार‚ विज्ञान‚ नामरूप‚ षडायतन‚ स्पर्श
(b) संस्कार‚ स्पर्श‚ नामरूप‚ विज्ञाप‚ षडायतन
(c) संस्कार‚ विज्ञान‚ नामरूप‚ स्पर्श‚ षडायतन
(d) स्पर्श‚ संस्कार‚ विज्ञान‚ नामरूप‚ षडायतन
Ans. (a): ‘द्वादश निदान’ चक्र से संबंधित है। जो क्रमश:
संस्कार‚ विज्ञान‚ नामरूप‚ षडायतन‚ स्पर्श है।
59. सिख धर्म के दस गुरुओं के नाम निम्नलिखित है। उस विकल्प का चयन करें जिसमें गुरुओं के नाम पहले से शुरू करके दसवे तक क्रम से दिए गए हैं:
(a) गुरु नानक‚ गुरु अंगद‚ गुरु अमरदास‚ गुरु रामदास‚ गुरु हरगोविन्द‚ गुरु अर्जुन देव‚ गुरु हरिराय‚ गुरु हरिकिशन‚ गुरु तेगबहादर‚ गुरु गोविन्द सिंह।
(b) गुरु नानक‚ गुरु अंगद‚ गुरु अमरदास‚ गुरु रामदास‚ गुरु अर्जुन देव‚े गुरु हरगोविन्द‚ गुरु हरिराय‚ गुरु हरिकिशन‚ गुरु तेगबहादुर‚ गुरु गोविन्द सिंह।
(c) गुरु नानक‚ गुरु अंगत‚ गुरु रामदास‚ गुरु अमरदास‚ गुरु हरगोविन्द‚ गुरु अर्जुन देव‚ गुरु हरिराय‚ गुरु हरिकिशन‚ गुरु तेगबहादुर‚ गुरु गोविन्द सिंह।
(d) गुरु नानक‚ गुरु अंगद‚ गुरु अमरदास‚ गुरु रामदास‚ गुरु अर्जुन देव‚ गुरु हरगोविन्द‚ गुरु हरिकिशन‚ गुरु हरिराय‚ गुरु तेगबहादुर‚ गुरु गोविन्द सिंह।
Ans. (b): सिक्ख धर्म के गुरुओं के नाम क्रमश: गुरु नानक‚ गुरु अंगद‚ गुरु अमरदास‚ गुरु रामदास‚ गुरु अर्जुन देव‚ गुरु हरगोविन्द‚ गुरु हरिराय‚ गुरु हरिकिशन‚ गुरु तेगबहादुर‚ गुरु गोविन्द सिंह।
60. निम्नलिखित में से कौन इस मत के पक्षधर है कि व्यक्ति की संकल्पना प्रीमिटिव (मूल) है?
(a) देकार्त (b) एयर
(c) ऑस्टिन (d) स्ट्रासन
Ans. (d): साधारण भाषा दार्शनिक पी0एफ0 स्ट्रॉसन के अनुसार‚ व्यक्ति की संकल्पना को मूल प्रत्यय (Primitive concept) के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। इससे पहले पुरुष (व्यक्ति) के संबंध में दो सिद्धान्तों स्वामित्व और अस्वामित्व सिद्धांतों का खण्डन करते हैं।
61. जॉन ड्यूई से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही विकल्प का चयन करें:
(A) ड्यूई ने देकार्त की आत्मा विषयक अवधारणा की आलोचना की।
(B) ड्यूई ने तर्क दिया कि आत्मा सामाजिक की उपज है।
(C) ड्यूई कृत ‘प्रागमैटिज्म’ उपयोगितावादी दर्शन की आधारशिला है।
कूट :
(a) सिर्फ (A) सत्य है।
(b) सिर्फ (B) सत्य है।
(c) (A), (B) और (C) सत्य है।
(d) सिर्फ (A) और (B) सत्य है।
Ans. (d): जॉन ड्यूई ने विलियम जेम्स के अर्थक्रियावाद को उपकरणवाद में बदल दिया। ड्यूई ने अपने दर्शन में देकार्त के आत्मा विषयक अवधारणा की आलोचना किया तथा ड्यूई की कृत ‘‘प्रागमैटिज्म’’ उपयोगितावादी दर्शन की आधारशिला है।
62. सूची – I को सूची- II से सुमेलित करें और सही
कूट का चयन करें:
सूची – I सूची- II
A. राइल i. वाक् क्रिया
B. सर्ल ii. शब्दों के द्वारा वस्तुओं का संपादन कैसे हो।
C. डेविडसन iii. मन की अवधारणा
D. ऑस्टिन iv. सत्य और विवेचन विषयक अन्वेषण
कूट :
A B C D
(a) ii i iii iv
(b) iii i iv ii
(c) iv ii iii i
(d) iii i ii iv
Ans. (b): राइल मन की अवधारणा‚ सर्ल वाक् क्रिया‚ डेविडसन सत्य और विवेचन विषयक अन्वेषण तथा ऑस्टिन शब्दों के द्वारा वस्तुओं का सम्पादन कैसे हो से संबंधित है।
63. निम्नलिखित में से कौन शब्दार्थ मीमांसावादी परंपरा का अंग नहीं है?
(A) हेन्स जार्ज गेडेमर (B) फ्रेडरिक श्क्लेयरमेकर
(C) विल्हेल्म डेल्थी (D) विटगेन्स्टाइन
कूट:
(a) केवल (D) और (A) (b) केवल (C) और (A)
(c) केवल (B) (d) केवल (D)
Ans. (d): केवल विट्गेन्स्टाइन शब्दार्थ मीमांसावादी परंपरा का अंग नहीं है। हेन्स जार्ज गेडेमर‚ फ्रेडरिक श्क्लेयरमेकर और डेल्थी आदि शब्दार्थ मीमांसावादी दार्शनिक है।
64. निम्नलिखित में से कौन सा लेखन एडमंड हुसर्ल का नहीं है?
(A) लॉजिकल इन्वेस्टिगेसन्स
(B) आइडियाज फॉर ए प्योर फेनोमेनोलॉजी
(C) कार्टेसियन मेडिटेसन्स
(D) ट्रान्सेन्डेन्टल फेनोमेनालॉजी एंड द क्राइसिस ऑफ द यूरोपियन साइन्सेस
कूट:
(a) केवल (C) (b) केवल (C) और (D)
(c) केवल (B), (C) और (D)(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (d): ‘लॉजिकल इन्वेस्टिगेसन्स’ ‘कार्टेसियन मेडिटेसन्स’‚ ‘आइडियाज फॉर ए प्योर फेनोमेनोलॉजी’ ‘ट्रांसडेन्टल‚ फनोमेनालॉजी’ एण्ड ‘फेनोमेनोलॉजिकल फिलॉसफी द क्राइसिस ऑफ यूरोपियन साइन्सेज’ एण्ड आदि पुस्तकें एडमण्ड हुसर्ल की हैं।
65. निम्नलिखित में से कौन ‘पोर सोई’ और ‘एन सोई’ में अंतर करता है?
(a) हेडेगर (b) श्क्लेयरमेकर
(c) सार्त्र (d) विल्हेल्म डेल्थी
Ans. (c): सार्त्र अपने अस्तित्ववादी दर्शन में सत्ता के तीन आयामों का उल्लेख करते हैं। इन्हें सार्त्र अचेतन सत् (Insoi, Beingitself), चेतन सत्ता (Being for itself, Pour -soi) तथा अन्य सत्ता (Being or others) कहते हैं।
66. अद्वैत वेदान्त के पहले सुव्यवस्थित व्याख्याता है
(a) शंकर (b) रामानुज
(c) गौडपाद (d) पद्मपाद
Ans. (c): अद्वैत वेदान्त के पहले सुव्यवस्थित व्याख्याता गौडपादाचार्य को माना जाता है। यह पहले अद्वैत वेदान्ती है जिनकी कोई कृति उपलब्ध होती है। गौडपादाचार्य जी ने मान्डूक्य उपनिषद पर भाष्य लिखा जिसे ‘माण्डूक्यकारिका’ III ‘आगमशास्त्र’ कहते हैं।
67. ‘ब्रह्म स्वत: प्रकाश्य है‚ इसलिए माया ब्रह्म को आच्छादित नहीं कर सकती है’-यह मत सिद्ध किया गया है:
(a) आश्रयानुपपत्ति के द्वारा
(b) तिरोधानानुपपत्ति के द्वारा
(c) निवर्तकानुपपत्ति के द्वारा
(d) स्वरूपानुपपत्ति के द्वारा
Ans. (b): रामानुज शंकर के माया-सिद्धान्त का खण्डन करते हैं जिन्हें ‘सप्तानुपति’ कहते हैं। तिरोधानानुपपत्ति के अनुसार‚ ब्रह्म स्वत: प्रकाश्य है‚ इसलिए माया ब्रह्म को आच्छादित नहीं कर सकती है। रामानुज के अनुसार माया द्वारा ब्रह्म का तिरोधान तर्कत: असिद्ध है।
68. निम्नलिखित में से कौन सा सिद्धांत अद्वैत वेदान्त के द्वारा स्वीकृत नहीं है?
(a) प्रतिबिम्बवाद (b) अवच्छेदवाद
(c) आभासवाद (d) अंशवाद
Ans. (d): अद्वैत वेदान्त में ब्रह्म जीव संबंध को समझाने के लिए शंकराचार्य के अनुयायियों ने तीन सिद्धान्त-प्रतिबिम्बवाद‚ अवच्छेदवाद तथा आभासवाद का प्रतिपादन किया। ‘अंशवाद’ अद्वैत वेदान्त को मान्य नहीं है।
69. गाँधी के ‘स्वदेशी’ की अवधारणा की मूल आत्मा का आपादान है:
(a) केवल उसी का प्रयोग जो स्वोत्पादित हो।
(b) विदेशी वस्तुओं का सर्वथा बहिष्कार।
(c) अपने आस-पास की सेवाओं तक सीमित रहना।
(d) स्थानीय उत्पादों से परे न जाना।
Ans. (a): गाँधी जी के ‘स्वदेशी’ की अवधारणा की मूल आत्मा का अपादान केवल उसी का प्रकार जो स्वोत्पादित हो/है। गाँधी जी के अनुसार यदि विदेशी सामानों के प्रयोग से अपने देश के उद्योगों को हानि पहुंचे तो हमें स्वदेशी ही अपनाना चाहिए।
70. किस आन्दोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की अवधारणा का प्रतिपादन हुआ?
(a) भारत छोड़ो (b) होमरूल
(c) असहयोग (d) स्वदेशी
Ans. (d): राष्ट्रीय शिक्षा की अवधारणा का प्रतिपादन ‘स्वदेशी’ आन्दोलन के दौरान हुआ। गाँधी जी शिक्षा सिद्धांत में बुनियादी शिक्षा की बात करते हैं।
71. गाँधीजी ने सत्याग्रह तकनीक का प्रयोग पहली बार कहाँ किया?
(a) खेड़ा (b) दांडी
(c) चंपारण (d) अहमदाबाद
Ans. (c): गाँधी जी ने सत्याग्रह तकनीक का प्रयोग सर्वप्रथम चंपारण में किया। ‘सत्याग्रह’ ‘सत्य के प्रति आग्रह’ का सिद्धान्त है। ्रगाँधी जी के सिद्धान्त और व्यवहार में ज्यादा अंतर नहीं। वह जो कहते थे उसका पहले प्रयोग करते थे।
72. ‘समस्त सम्पत्ति ईश्वर की है जो इसे रखते हैं‚ इसके न्यासी हैं मालिक नहीं-कहा गया है:
(a) टालस्टॉय द्वारा (b) विनोबा भावे द्वारा
(c) गाँधी द्वारा (d) तिलक द्वारा
Ans. (c): गाँधी जी अपने न्यासिता सिद्धान्त में कहते हैं‚ समस्त सम्पत्ति ईश्वर की है जो इसे रखते हैं इसे न्यासी है मालिक नहीं।
73. ‘एक संपादन मूलक उच्चारण का प्रयोग कार्य संपादन है।’ यह मत है:
(a) सर्ल का (b) विटगेन्सटाइन का
(c) फ्रेगे का (d) ऑस्टिन का
Ans. (d): ऑस्टिन का दर्शन विश्लेषणात्मक दर्शनहै जिसमें वह भाषा विश्लेषण पर जो देते हैं। उनके अनुसार एक संपादन मूलक उच्चारण का प्रयोग कार्य संपादन के लिए होता है। इस प्रकार के उच्चारण का प्रतिपादन कार्य संपादन है।
74. निम्नलिखित में से कौन इस मत का समर्थन करता है कि नैतिक पदों में चुंबकत्व होता है तथा नैतिक निर्णयों में विवरणात्मक और संवेगात्मक दोनों ही प्रकार के अर्थ होते हैं?
(a) एयर (b) प्रीचर्ड
(c) स्टीवेंसन (d) ह्मूम
Ans. (c): स्टीवेन्सन ने भाषा की प्रवृत्तिपरिवर्तनपरक शक्ति पर अत्यधिक बल दिया है। उनके अनुसार‚ नैतिक पदों में चुबकत्व होता है तथा नैतिक निर्णयों में विवरणात्मक और संवेगात्मक दोनों ही प्रकार के अर्थ होते हैं। स्टीवेन्सन की पुस्तक का नाम ‘एथिक्स एण्ड लैंग्वेज’ है।
75. ‘मेरा स्थान एवं तत्संबंधी कर्त्तव्य’ -यह कथन है:
(a) हेगेल का (b) ब्रॉडले का
(c) मिल का (d) मूर का
Ans. (b): ब्रॉडले ने एक सिद्धान्त प्रतिपादित किया जिसे उन्होंने ‘मेरा स्थान तथा तत्संबंधी कर्त्तव्य कहा। जिसके अनुसार‚ प्रत्येक मनुष्य सामाजिक संस्था का एक अंग होता है। मनुष्यों के अपने-अपने विशिष्ट स्थान है और उन स्थानों के अनुरूप उनके कर्त्तव्य भी हो सकते हैं।

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