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UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2015

नोट: इस प्रश्न पत्र में पचास (50) बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के दो (2) अंक हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
1. नैतिक संदर्भ में अधोलिखित में से किसके साथ ऋत की साम्यता संभव है?
(a) अर्थ (b) मोक्ष
(c) सत्य (d) निषेध
Ans. (c) : ऋक्‌संहिता में ‘ऋत्‌’ का विचार मिलता है। वैदिक ऋषि ‘ऋत्‌’ का रक्षक ‘वरुण’ का माना है। वेदों में ‘सत्‌’ को सत्ता दृष्टि से ‘सत्य’ और नैतिक नियमन की दृष्टि से ‘ऋत्‌’ तथा ‘आनंद’ की दृष्टि से ‘मधु’ या ‘मधुमान’ कहा है। इसके अतिरिक्त सदाचार के स्तर पर ‘ऋत्‌’ शब्द का प्रयोग सत्य व्यवस्था और औचित्य है। ‘ऋत्‌’ का विपरीत ‘अनृत’ है।
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2. निम्नलिखित में कौन अर्थीभावना का संकेतक है?
(a) यज्‌ धातु (b) लिंग
(c) निपात (d) अख्यात
Ans. (d) : ‘अख्यात’ को अर्थीभावना का संकेतक माना जाता है।
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3. निम्नलिखित में से कौन सा सिद्धांत ख्याति को स्मृतिप्रमोष के रूप में स्वीकार करता है?
(a) असत्‌ ख्याति (b) अख्याति
(c) अनिर्वचनीय ख्याति (d) सत्‌ ख्याति
Ans. (b) : प्रभाकर के अनुसार‚ हमारा ‘भ्रम’ स्मृतिप्रमोष के कारण विवेकाग्रह (भेदभाव का आभाव) होने के कारण उत्पन्न है। ‘स्मृतिप्रमोष’ स्मरण शक्ति का दोष को कहते हैं। ‘स्मृतिप्रमोष’ के कारण उत्पन्न भ्रान्ति या भ्रम को प्रभाकर ‘अख्याति’ कहते हैं। उनके इस मत को ‘आख्यातिवाद’ कहते हैं।
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4. दूसरों की मानसिक स्थिति को प्रकट करने के ज्ञान को जैन दर्शन में निम्नलिखित में से किस रूप में जान जाता है?
(a) अवधि (b) केवल
(c) मति (d) मन:पर्याय
Ans. (d) : जैन दर्शन में ज्ञान दो प्रकार साधारण अथवा असाधारण; अथवा अप्रत्यक्ष तथा लौकिक अथवा अलौकिक अथवा परोक्ष अथवा अपरोक्ष माने गये हैं। अपरोक्ष ज्ञान के तीन भेद-अवधि मन: पर्याय‚ केवल। मन: पर्याय वह ज्ञान है जो दूसरों के मानसिक स्थिति को प्रकट करता है। यह ज्ञान आत्मपूर्वक‚ मनुष्य क्षेत्र तक सीमित और गुण के कारण उत्पन्न है।
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5. नैयायिकों के अनुसार‚ सभी प्रकार की धूम्र घटनाओं को हम जान सकते हैं‚ मात्र:
(a) योगज प्रत्यासत्ति से
(b) सामान्यलक्षण प्रत्यासत्ति से
(c) ज्ञानलक्षण प्रत्यासत्ति से
(d) समवाय सन्निकर्ष से
Ans. (b) न्याय-वैशेषिक दर्शन में तीन प्रकार के अलौकिक सन्निकर्ष को माना गया है। सामान्य लक्षण‚ ज्ञान लक्षण तथा योगज। विभिन्न तत्वों में समानता की प्रतीति के आधारभूत धर्म की सामान्य धर्म कहा जाता है। तत्वों या वस्तुओं के ‘सामान्य धर्मों’ का प्रत्यक्ष सामान्य लक्षण प्रत्यासत्ति है। उदाहरण स्वरूप ‘सभी प्रकार की धूम्र घटनाओं को हम सामान्य लक्षण प्रत्यासति के आधार पर ही जानते हैं।
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6. न्याय की किस अवधारणा के अनुसार‚ एक व्यक्ति भूतकाल‚ वर्तमान और भविष्य की वस्तुओं का अनुभव कर सकता है?
(a) सामान्यलक्षण से (b) योगज से
(c) श्रावण से (d) ज्ञानलक्षण से
Ans. (b) : न्याय-वैशेषिक में ‘योगज प्रत्यक्ष’ समस्त भूत‚ वर्तमान और भविष्य स्थूल और सूक्ष्म‚ समीपस्थ और दूरस्थ परार्थों का योगी प्रत्यक्ष करता है। अष्टांक योग के अनुष्ठान से साधकों की आत्मा में एक तरह की विलक्षण शक्ति उत्पन्न हो जाती है। जिसे ‘योगज सन्निकर्ष’ कहते हैं।
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7. ‘अग्नि शीतल है क्योंकि यह एक द्रव्य है।’ न्याय के अनुसार उपर्युक्त तर्क में किस प्रकार का दोष है?
(a) विरुद्ध (b) असिद्ध
(c) बाध (d) सत्प्रतिपक्ष
Ans. (c) : ‘बाधित’ हेत्वाभास वहां होता है जहां उसके साध्य के आभाव को अन्य प्रमाण द्वारा सिद्ध किया जा सके। ‘बाध’ या ‘बाधित’ हेतु में साध्यभाव अन्य प्रमाण द्वारा सिद्ध होता है। जैसे-
‘अग्नि शीतल है क्योंकि यह एक द्रव्य है। यहां शीतलता का आभाव अग्नि की उष्णता का प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा सिद्ध है।
(भारतीय दर्शन: आलोचन और अनुशीलन: चन्द्रधर शर्मा)
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8. सूची – I को सूची- II के साथ सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूटों में से सही का चयन कीजिए:
सूची – I सूची – II
a. प्रागाभाव (i) न्याय
b. प्रमाणाभाव (ii) मीमांसा
c. प्राज्ञ iii. वैशेषिका
d. प्रमाणसम्प्लव iv.वेदांत
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (ii) (i) (iv) (iii)
(c) (iii) (ii) (iv) (i)
(d) (iii) (i) (ii) (iv)
Ans. (c) : इस प्रश्न को गलत माना गया है।
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9. अभाव के संदर्भ में‚ ‘जले गंधो नास्ति’ कथन में‚ ‘जल’ से क्या अभिप्राय है?
(a) प्रतियोगी (b) अनुयोगी
(c) अनुयोगिता (d) प्रतियोगितावच्छेदकधर्म
Ans. (b) : ‘जले गंधो नास्ति’ में ‘जल’ अनुपयोगी है और गंध’ प्रतियोगी है। किसी भी द्रव्य में जिस द्रव्य का आभाव सिद्ध किया जाता है। वह आभाव का प्रतियोगी तथा जिस द्रव्य में किया जाता है वह आभाव का ‘अनुपयोगी’ कहलाता है। जल (अनुपयोगी’ में गंध
(प्रतियोगी) का आभाव।
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10. आकाश में ‘आकाशत्व’ निम्नलिखित में से किस भाव से निहित है?
(a) गुण-गुणी भाव (b) अवयव-अवयवी भाव
(c) जति-व्यक्ति भाव (d) विशेष-नित्यद्रव्य भाव
Ans. (d) : वैशेषिक दर्शन में ‘आकाश’ आदि नित्य पदार्थों परमाणु आदि को परस्पर भिन्न सिद्ध करने वाला ‘विशेष’ पदार्थ माना गया है। इसे स्वतोव्यावृत्त स्वीकार किया गया है। इन सबमे एक विशेषत्व नाम का साधारण धर्म है। पुन: न्याय-वैशेषिक दर्शन में एक व्यक्ति में रहने वाला धर्म जाति-रूप सामान्य न होकर मात्र ‘उपाधि’ है। न्याय-वैशेषिक के अनुसार आकाश‚ काल‚ दिक्‌ एक-एक है अनेक नहीं। इसलिए आकाशत्व‚ कालत्व और दिक्‌त्व उपाधियां है। अत:
‘आकाशत्व’ कोई जाति न होकर मात्र ‘विशेष नित्य द्रव्य भाव है।
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11. ‘‘संसार के निरंतर विकसित होने पर भी कुल ऊर्जा समान रहती है‚ एवं कारण-कार्य भी उसी शक्ति कमोवेश विकसित रूप है’’-यह विचारधारा निम्नलिखित में किसके द्वारा अनुमोदित की गई है?
(a) वेदांत (b) सांख्य
(c) न्याय (d) बौद्ध दर्शन
Ans. (b) : ‘संसार के निरन्तर विकसित होने पर कुल ऊर्जा समान रहती है‚ एवं कारण कार्य भी उसी शक्ति का कमोवेश विकसित रूप है। यह मत सांख्य दर्शन का है। वह कारण कार्य के संबंध में सत्कार्यवादी सिद्धांत को मानता है।
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12. चार्वाक के अनुसार तथाकथित आत्मा कुछ भी नहीं है; अपितु:
(a) शरीर ही है (b) चेतना ही है
(c) चेतनायुक्त शरीर है (d) चेतनारहित शरीर है
Ans. (c) : चार्वाक दर्शन एक भौतिकवादी दर्शन है। चार्वाकों आत्मा‚ ईश्वर आदि की अवधारणा का खण्डन किया है। उनके अनुसार हम जिसे आत्मा कहते हैं वह देह विशिष्ट (शरीरयुक्त) चैतन्य है। जो शरीर के नष्ट होने के बाद नष्ट हो जाती है। इनका मत ‘देहआत्मवाद’ शरीरात्मवाद कहलाता है।
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13. न्याय के अनुसार ज्ञान के किस प्रकार का कारण आत्मा है?
(a) समवायी (b) असमवायी
(c) निमित्त (d) उपादान
Ans. (b) : न्याय दर्शन में ‘ज्ञान’ को ‘आत्मा’ का ‘आगुन्तक धर्म’ माना गया है। न्याय दर्शन के अनुसार आत्मा में ज्ञान उत्पन्न होता है। ज्ञान आत्मा का एक विशेष गुण है। ‘आत्मा’ एक द्रव्य होने के कारण गुण ‘ज्ञान’ का समवायीकरण है।
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14. ‘पर्वत में अग्नि है क्योंकि वहाँ नील धूम्र है’ न्याय के अनुसार इस अनुमान में दोष है:
(a) अनैकांतिक (b) आश्रयासिद्ध
(c) व्याप्तत्वासिद्ध (d) बाधित
Ans. (c) : ‘पर्वत में अग्नि है क्योंकि वहां नील धूम्र है’ में ‘नील धूम्र’ सोपाधिक है। अत: यहां व्याप्तत्वासिद्ध दोष है। इसमें हेतु सोपाधिक होता है।
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15. शंकर के अनुसार जगत की स्थिति है:
(a) सत्‌ (b) असत्‌
(c) सदासद्‌विलक्षण (d) सदासत्‌
Ans.(c): आचार्य शंकर अपने अद्वैत वेदान्त में जगत्‌ को सदसद्‌विलक्षण मानते हैं। उनके अनुसार सत्‌ वह है जो त्रिकालबाधित है अर्थात्‌ तीनों कालों में विद्यमान है और असत्‌ वह है जिसका तीनों कालों में अभाव है। जगत्‌ सत्‌ नहीं है क्योंकि यह ज्ञान का विषय होने के कारण नष्टप्राय है। जगत्‌ असत्‌ भी नहीं है क्योंकि जगत का अनुभव होता है। इस प्रकार जगत्‌ प्रपंच सदसदविलक्ष् ाण होने के कारण मिथ्या है।
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16. रामानुज के अनुसार ईश्वर है:
(a) जगत का केवल निमित्तकारण
(b) जगत का केवल उपादानकारण
(c) जगत का अभिन्ननिमित्तोपादान कारण
(d) अकारण
Ans. (c) : रामानुज ईश्वर को जगत्‌ का निमित्त और उपादान दोनों कारण मानते हैं। ईश्वर की दो अवस्थाएँ-कारणावस्था तथा कार्यावस्था। प्रलयकाल में चित्‌ और अचित्‌ सूक्ष्मावस्था में रहते हैं यह ब्रह्म की कारणावस्था है और सृष्टि के समय चिद्‌चित्‌ स्थूलरूप धारण कर लेते हैं यह ब्रह्म की कार्यावस्था है। सूक्ष्म चिदचिद्‌विशिष्ट ब्रह्म कारण और स्थूल चिद्‌चिद ब्रह्म कार्य है। ब्रह्म ही कारण और कार्य दोनों रूपों में उपादान है। सृष्टि ईश्वर की इच्छा से होती है। इसका प्रयोजन केवल लीला है। अत: जगत्‌ का अभिन्ननिमित्तोपादान कारण ‘ब्रह्म’ सिद्ध होता है। शंकर भी ब्रह्म को जगत्‌ का अभिन्ननिमित्तोपादानकारण मानते हैं।
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17. महावाक्य ‘अहंब्रह्मास्मि’ की मध्य की व्याख्या का अर्थ है:
(a) जीव और ब्रह्म का तादात्मय
(b) जीव और ब्रह्म का सादृश्य
(c) जीव ब्रह्म का विशेषण है
(d) जीव और ब्रह्म का प्रकार-प्रकारी स्वरूप
Ans. (b) : महावाक्य ‘अहंब्रह्मास्मि’ की मध्व व्याख्या उनके द्वैतवादी वेदान्त दर्शन पर आधारित है। मध्व मुक्तअवस्था में जीव और ब्रह्म का सादृश्य मानते हैं। अत: उनके अनुसार‚ ‘अहं’ ब्रह्मास्मि’ का तात्पर्य यह नहीं है कि मैं ही ब्रह्म हूं। अपितु मैं
(आत्मा) ब्रह्म के सादृश्य हूं। मध्व ब्रह्म और जीव में साम्यता दिखाने के लिए इस महावाक्य की भेदवादी व्याख्या प्रस्तुत करते हैं।
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18. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिये गये कूटों की सहायता से सही उत्तर चुने:
सूची-I सूची-II
(A) विद्यारण्य (i) तत्त्वप्रकाशिका
(B) श्रीनिवास (ii) वेदान्तपारिजात
(C) जयतीर्थ (iii) पञ्चदशी
(D) निम्बार्क iv.यतीन्द्रमतदीपिका
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (i) (iii) (iv) (ii)
(b) (iii) (iv) (i) (ii)
(c) (ii) (iii) (iv) (i)
(d) (i) (ii) (iii) (iv)
Ans. (b) :
(a) विद्यारण्य (iii) पञ्चदशी
(b) श्रीनिवास (iv) यतीन्द्रमतदीपिका
(c) जयतीर्थ (i) तत्वप्रकाशिका
(d) निम्बार्क (iii) वेदान्तपारिजत
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19. निम्नलिखित में से कौन सा अम्बेडकर द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है?
(a) स्वतन्त्रता‚ समानता‚ बन्धुत्व
(b) शिक्षा‚ संगठन‚ आन्दोलन
(c) जाति‚ वर्ण‚ कर्म
(d) बुद्ध‚ धम्म‚ संघ
Ans. (c) : अम्बेडकर जाति‚ वर्ण‚ कर्म व्यवस्था की स्वीकार नहीं करते हैं। उनके अनुसार जाति‚ वर्ण‚ कर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
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20. निम्नलिखित में से किसे टैगोर द्वारा मनुष्य के लिए अनिवार्य पक्ष माना गया है?
(a) शारीरिक एवं मानसिक
(b) प्राणिक एवं मानसिक
(c) भौतिक एवं आध्यात्मिक
(d) मानसिक एवं आध्यात्मिक
Ans. (c) : टैगोर के अनुसार‚ मानव स्वरूप के दो अनिवार्य पक्ष भौतिक एवं आध्यात्मिक पक्ष है। प्रथमत: मानव के स्वरूप का एक अंश उसका भौतिक एवं जैविक अंश है जो उसे विकास प्रक्रिया से प्राप्त होता है‚ इसको टैगोर ससीम पक्ष भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त उसका दूसरा पक्ष उसका अभौतिक एवं आध्यात्मिक अंश है तथा जो उसे विशिष्टता प्रदान करता है और जिसके कारण उसमें स्वतंत्रता का ेभी अंश विद्यमान है। इसको असीमता का पक्ष कहा जा सकता है।
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21. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें तथा नीचे दिये गये
कूट से सही उत्तर का चयन करें:
सूची-I सूची-II
(A) गाँधी i. लाइफ अहेड
(B) टैगोर ii. दी रिकवरी ऑफ फेथ
(C) राधाकृष्णन्‌ iii. क्राइसिस इन सिविलाइजेशन
(D) जे. कृष्णमूर्ति iv. दी आर्ट ऑफ लीविंग
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (i) (iii) (ii) (iv)
(b) (iv) (iii) (ii) (i)
(c) (iii) (ii) (iv) (i)
(d) (ii) (i) (iii) (iv)
Ans. (b) :
(a) गाँधी (iv) दी आर्ट ऑफ लिविंग
(b) टैगोर (iii) क्राइसिस इन सिविलाइजेशन
(c) राधाकृष्णन (ii) दी रिकवरी आफ फेथ
(d) जे.कृष्णमूर्ति (iii) लाइफ अहेड
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22. श्री अरविन्द के अनुसार विकास की प्रक्रिया में निम्नलिखित का सही क्रम क्या है?
(a) ऊर्ध्वमन‚ उच्चतर मन‚ प्रदीप्त मन‚ अन्तर्भासिक मन
(b) उच्तर मन‚ प्रदीप्त मन‚ अन्तर्भासिक मन‚ ऊर्ध्वमन
(c) प्रदीप्त मन‚ उच्चतन मन‚ अन्तर्भासिक मन‚ ऊर्ध्वमन
(d) महात्मा गांधी
Ans. (b) : श्री अरविन्द के अनुसार‚ मानस तथा अतिमानस के मध्य कुछ क्रमिक स्तर है जो क्रमानुसार -‘उच्चतर मानस’ (Higher mind), ‘प्रदीप्त मानस’ (Illumined mind), ‘अन्तर्दृष्टि या अन्तर्भासिक मानस (Intuitive mind), ‘व्यापक मानस’ (Over mind) यह निम्न गोलाई से उच्च गोलाई में पहुंचने की विकास प्रक्रिया है। अर्थात्‌ मानस (mind) से अतिमान (overmind) तक की विकास प्रक्रिया है।
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23. वैशेषिक के अनुसार सृष्टि परमाणुओं के संयो से प्रारंभ होती है:
(a) परमाणु के स्वभाव के द्वारा
(b) ईश्वरीय इच्छा के द्वारा
(c) उत्पादक व्यवस्था के द्वारा
(d) आकस्मिक
Ans. (c) : वैशेषिक के अनुसार परमाणुओं में संयोग सृष्टि का कारण है। परमाणु भौतिक तथा निष्क्रिय है इसमें सक्रियता और गति ईश्वरीय इच्छा के द्वारा आती है। ईश्वर ‘अदृष्ट’ से गति लेकर परमाणुओं में डाल देता है जिससे परमाणुओं गति उत्पन्न होती है और परमाणु एक दूसरे से जुड़ने लगते हैं जिससे शृष्टि का प्रारंभ होता है।
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24. बौद्ध दर्शन में प्रतीत्यसमुत्पाद से अभिप्राय है:
(a) कारण में कार्य पूर्व -स्थित होता है
(b) प्रत्येक वस्तु का अस्तित्व क्षणिक है
(c) प्रत्येक वस्तु का अस्तित्व सशर्त होता है
(d) जो कुछ भी है‚ शाश्वत है
Ans. (c) : बौद्ध दर्शन के अनुसार‚ प्रत्येक वस्तु का कोई न कारण अवश्य होता है। अर्थात्‌ किसी भी वस्तु का अस्तित्व अपने पूर्ववर्ती अवस्था का परिणाम है। अर्थात्‌ वस्तु का अस्तित्व सशर्त
(उपाधिस्वरूप) होता है‚ वह अनौपधिक नहीं होता है। ‘प्रतीत्य’ का अर्थ है-‘अपेक्षा रखकर’ या निर्भर अथवा आश्रित रहकर एवं समुत्पाद का अर्थ है ‘उत्पत्ति’। अत: प्रतीत्यसमुत्पाद का अर्थ है कारण की अपेक्षा रखकर या निर्भर रहकर कार्य की उत्पत्ति। प्रतीत्यसमुत्पाद में प्रत्येक वस्तु के अस्तित्व को सशर्त माना गया है।
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25. निम्नलिखित में से कौन सा एक‚ सांख्य के अनुसार प्रकृति की सत्ता के लिए कारण नहीं हो सकता?
(a) भेदानाम्‌ परिमाणात्‌ (b) समन्वयात्‌
(c) भोक्तृभावात्‌ (d) कारण-कार्य विभागात्‌
Ans. (c) : प्रकृति की सत्ता के लिए कारण सांख्य दर्शन में भोक्तृभावात्‌ नहीं हो सकता है। यह पुरुष का गुण है। जिसका अर्थ है ‘भोक्ता पुरुष’ सांख्य दर्शन में प्रकृति की सत्ता को सिद्ध करने के लिए पांच युक्तियां दी गयी है- (1) भेदानाम्‌ परिमाणात्‌
(2) समन्वयात्‌ (3) शक्तित: प्रवृत्ते: (4) कारण-कार्य विभागात्‌ (5) अग्निभागाद्वैश्यरूपस्य।
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26. निम्नलिखित कथनों पर सेंट थॉमस एक्वीनस के दर्शन के परिपे्रक्ष्य में विचार कीजिए और सही कूट का चयन कीजिए:
(A) दर्शनशास्त्र तथ्यों से ईश्वर और धर्मशास्त्र ईश्वर से तथ्यों पर विचार करता है।
(B) उसने तर्क बुद्धि और विश्वास के बीच अंतर किया और यह तर्क दिया कि आस्था के विषय जैसे दैवी प्रकाशना आदि तर्क बुद्धि से परे हैं किन्तु उसके विरोधी नहीं है।
(C) आस्था इच्छा का विषय है और इच्छा उस स्वीकृति को निर्देशित करती है।
कूट:
(a) केवल (A) सही है
(b) केवल (B) सही है
(c) केवल (A) और (C) सही है
(d) (A), (B) और (C) सही है
Ans. (d) : सेन्ट थॉमस एक्वीनास का दर्शन ईसाई धर्म से प्रभावित था। उसके अनुसार दर्शन का क्षेत्र है तर्क तथा धर्म का क्षेत्र है श्रुति। एक्वीनस के अनुसार‚ दर्शनशास्त्र तथ्यों से ईश्वर और धर्मशास्त्र ईश्वर से तथ्यों पर विचार करता है।  उसने तर्कबुद्धि (Reason) और आस्था (faith) के बीच भी अन्तर किया और यह तर्क दिया कि आस्था के विषय जैसे-दैवी प्रकाशना आदि तर्कबुद्धि से परे हैं किन्तु उसके विरोध नहीं। अर्थात्‌ दर्शन और धर्म के क्षेत्र भले ही अलग-अलग हो परन्तु उनमें कोई विरोध नहीं।  उसके अनुसार‚ आस्था इच्छा का विषय है और इच्छा उस स्वीकृति को निर्देशित करती है।
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27. सूची – I के साथ सूची- II को सुमेलित कीजिउ और नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सूची-I सूची-II
(a) प्रोटागोरस i. जो कुछ है ‘है’ ‘जो है’ नहीं उसे जान नहीं जा सकता
(b) जार्जियस ii. मनुष्य सभी वस्तुओं का मानदंड है
(c) थ्रेसीमेकस iii. किसी का अस्तित्व नहीं है‚ यदि है इसे नहीं जान जा सकता
(d) पार्मेनाइडीज iv. न्याय शक्तिशालियों का हित है
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (iv) (iii) (ii) (i)
(b) (ii) (iii) (iv) (i)
(c) (ii) (iv) (iii) (i)
(d) (iii) (i) (ii) (iv)
Ans. (b) :
(a) प्रोटागोरस (ii) मनुष्य सभी वस्तुओं का मानदंड है।
(b) जार्जियस (iii) किसी का अस्तित्व नहीं है‚ यदि है तो इसे नहीं जाना जा सकता।
(c) थ्रेसीमेकस (iv) न्याय शक्तिशालियों का हित है।
(d) पार्मेनाइडीज (ii) जो कुछ है ‘है’ नहीं उसे जाना नहीं जा सकता।
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28. निम्नलिखित में से किस मध्यकालीन दार्शनिक ने कहा था: ‘‘इस प्रकार से समझे कि आप विश्वास कर सकें‚ विश्वास इस प्रकार करें कि आप समझ सकें। कुछ बातों पर हम तब तक विश्वास नहीं करते जब तक उन्हें समझ नहीं लेते; या फिर हम तब तक नहीं समझते जब तक कि हम विश्वास नहीं करते।’’
(a) सेंट एन्सल्म (b) सेंट एक्वीनस
(c) सेंट ऑगस्टीन (d) विलियम ओकैम
Ans. (c) : सेंट ऑगस्टीन के अनुसार‚ इस प्रकार से समझे कि आप विश्वास करें‚ विश्वास इस प्रकार करें कि आप समझ सकें। कुछ बातों पर हम तब तक विश्वास नहीं करते जब तक उन्हें समझ नहीं लेते या फिर हम तब तक नहीं समझते जब तक कि हम विश्वास नहीं करते।
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29. निम्नलिखित कथनों पर पाइथागोरस के दृष्टिकोण से विचार करें और सही कूट का चयन करें:
(A) पाइथागोरस शाश्वत पुन: आवर्तन की अवधारणा में विश्वास रखता थ।
(B) पाइथागोरस का विचार था कि आत्मा अमर है और इसका पुनर्जन्म होता है।
(C) पाइथागोरस ने इस विचार को अस्वीकृत किया कि विश्व की प्रक्रिया अंतहीन और अपरिवर्तनीय है।
कूट:
(a) केवल (a) सही है
(b) केवल (b) सही है
(c) केवल (a) और (c) सही है
(d) केवल (a) और (b) सही है
Ans. (d) : पाइथागोरस शाश्वत पुन: आवर्तन (Eternal recurrence) में विश्वास करते थे। उनके अनुसार आत्मा अमर है और इसका पुनर्जन्म होता है। यह उस पर आर्फिक सम्प्रदाय की धार्मिक और नैतिक मान्यताओं का उस पर प्रभाव था। जिसे आवगमन सिद्धान्त कहते हैं। पाइथागोरस विश्व की प्रक्रिया अंतहीन और अपरिवर्तनीय मानता है।
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30. प्लेटो के ज्ञान के सिद्धांत के संदर्भ में न्यूनतम से अधिकतम के सही क्रम का चयन करें।
(a) ज्ञानेन्द्रियों से उत्पन्न ज्ञान‚ काल्पनिक ज्ञान‚ विमर्शात्मक प्रज्ञा बुद्धी‚ तर्कबुद्धिपरक अंतर्दृष्टी
(b) काल्पनिक ज्ञान‚ ज्ञानेन्द्रियों से उत्पन्न ज्ञान‚ विमर्शात्मक प्रज्ञा बुद्धी‚ तर्कबुद्धिपरक अंतर्दृष्टी
(c) ज्ञानेन्द्रियों से उत्पन्न ज्ञान‚ काल्पनिक ज्ञान‚ तर्कबुद्धिपरक‚ अंतर्दृष्टी‚ विमर्शात्मक प्रज्ञा बुद्धी
(d) विमर्शात्मक प्रज्ञा बुद्धी‚ काल्पनिक ज्ञान‚ ज्ञानेन्द्रियों से उत्पन्न ज्ञान‚ तर्कबुद्धिपरक अंतर्दृष्टी
Ans. (b) :प्लेटो के ज्ञान सिद्धान्त में न्यूनतम से अधिकतम का सही क्रम-काल्पनिक ज्ञान‚ ज्ञानेन्द्रियां से उत्पन्न ज्ञान‚ विमर्शात्मक प्रज्ञा बुद्धि‚ तर्कबुद्धिपरक अंतदृष्टि। प्लेटो एक बुद्धिवादी दार्शनिक था जो ‘बौद्धिक अंतर्दृष्टि’ को सर्वोत्कृष्ट ज्ञान मानता था।
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31. नीचे दिए गए कथनों में से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) की संज्ञा दी गई है। अरस्तू के कोटि-सिद्धांत के आलोक में (A) और (R) पर विचार करते हुए सही कूट का चयन करें।
अभिकथन (A) पदार्थों में द्रव्य प्रमुख है।
तर्क (R) द्रव्य वह है जो उद्देश्य का विधेय हो सकता है और उद्देश्य में निहित है।
कूट:
(a) दोनों (A) और (R) सही है और (A) की सही व्याख्या
(R) है।
(b) दोनों (A) और (R) सही है लेकिन (A) की सही व्याख्या
(R) नहीं है।
(c) (A) सही है लेकिन (R) गलत है।
(d) (A) गलत है लेकिन (R) सही है।
Ans. (c) : अरस्तू के द्वारा मानी गयी कोटियों में द्रव्य
(Substance) का महत्वपूर्ण स्थान है। अरस्तू ने सत्ता (Reality) को द्रव्य (Substance) कहा। अरस्तू के कोटि सिद्धांत में द्रव्य सर्वाधिक प्रमुख पदार्थ है। कोटियों को अरस्तू तर्कशास्त्र के विधेय कहता है। अरस्तू का द्रव्य किसी वाक्य का विधेय अथवा किसी वस्तु का गुण नहीं हो सकता है। जगत की सभी वस्तुएँ उसके गुण और विधेय है। अत: यह कहना द्रव्य वह है जो उद्देश्य का विधेय हो सकता है और उद्देश्य में निहित है‚ गलत है। अत: अभिकथन
(A) सही तथा तर्क (R) गलत है।
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32. ‘जन्म जात प्रत्यय’ सिद्धांत निम्नलिखित में से किसको स्वीकार्य है?
(a) डेकार्ट और स्पिनोजा (b) डेकार्ड और बर्कले
(c) डेकार्ड और ह्मूम (d) लॉक और फित्शे
Ans. (a) : प्लेटो‚ डेकार्ट‚ स्पिनोजा तथा लाइबनित्ज जो कि बुद्धिवादी दार्शनिक है को जन्मजात प्रत्ययों का सिद्धान्त स्वीकार्य है। जबकि लॉक‚ बर्कले ह्यूम आदि अनुभववादी इसका खण्डन करते हैं।
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33. ईश्वर के अस्तित्व के समर्थन में ‘सत्तामीमांसा युक्ति’ को निम्नलिखित में से किसने विख्यात किया?
(a) डेकार्ट (b) डेकार्ट और सेंट एन्सेल्स
(c) ह्मूम (d) बर्कले
Ans. (b) : ‘सत्तामीमांसा युक्ति’ ईश्वर अस्तित्व की पूर्णता के प्रत्यय को सर्वाधिक महत्त्व देती है। यह युक्ति संतएन्सेलम और डेकार्ट द्वारा ईश्वर अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए दी गयी। यह युक्ति प्रत्यय सत्तामूलक युक्ति भी कहलाती है जो प्रागनुभविक अथवा अनुभव निरपेक्ष तर्क है।
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34. लॉक्स के ‘प्रत्यय’ विचार को निम्नलिखित में सही रूप से कौन चित्रित करता है?
(a) जिसको मनस अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करता है‚ जो प्रत्यक्ष विचार अथवा बुद्धि की त्वरित वस्तु है।
(b) जिसको मनस प्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करता है‚ जो प्रत्यक्ष विचार अथवा बुद्धि की त्वरित वस्तु है।
(c) जिसको मनस अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करता है‚ जो प्रत्यक्ष विचार अथवा बुद्धि की परीक्षा वस्तु है।
(d) जिसको मनस प्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करता है‚ जो प्रत्यक्ष विचार अथवा बुद्धि की परोक्ष वस्तु है।
Ans. (b) : लॉक के ‘प्रत्यय’ विचार के अनुसार‚ जिसको मनस प्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करता है‚ जो प्रत्यक्ष‚ विचार अथवा बुद्धि की त्वरित वस्तु है।
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35. निम्नलिखित में से किस आधुनिक दार्शनिक ने संकल्पना की है- ‘‘दर्शनशास्त्र संपूर्ण रूप में एक वृक्ष की भांति है जिसकी जड़ें तत्वमीमांसा‚ जिसका तना भौतिक विज्ञान और जिसकी शाखाएं‚ जो तने से उभरती हैं‚ सभी अन्य विज्ञान है।’’
(a) स्पिनो़जा (b) बर्कले
(c) डेकार्ड (d) लाइबनिट्‌ज
Ans. (c) : डेकार्ट के अनुसार‚ ‘‘दर्शनशास्त्र संपूर्ण रूप में एक वृक्ष की भांति है जिसकी जड़े तत्वमीमांसा‚ जिसका तना भौतिक विज्ञान और जिसकी शाखाएँ जो तने से उभरती हैं‚ सभी अन्य विज्ञान है।’’
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36. निम्नलिखित कथनों पर स्पिनोजा के ज्ञान के सिद्धांत के आलोक में विचार कीजिए और सही कूट का चयन कीजिए:
(A) अस्पष्ट और अपर्याप्त विचार संवेदन और कल्पना में अपना दोत रखते हैं।
(B) तर्क वस्तुओं के सार्वभौमिक तत्वों को ग्रहण करता है और इनको ईश्वर के संबंधे में समझता है।
(C) बाह्य संसार न करना
(D) प्रातिभ ज्ञान ईश्वर के कुछ गुण के वस्तुगत सार के पर्याप्त विचार के साथ वस्तुओं के पर्याप्त सेार की ओर बढ़ता है।
कूट:
(a) केवल (a) और (c) सही है
(b) केवल (b) और (c) सही है
(c) केवल (c) सही है
(d) केवल (a), (b) और (c) सही है
Ans. (d) : स्पिनोजा अपने ‘एथिक्स’ में ज्ञान की तीन अवस्थाएं बतलाता है- (1) काल्पनिक ज्ञान- इन्द्रियजन्य एवं लोकपरम्पराओं पर आधारित ज्ञान। अस्पष्ट और अपर्याप्त विचार संवेदन और कल्पना में अपना दोत रखते हैं इस स्तर पर तत्व के विश्वरूप का ज्ञान।
(2) बौद्धिक ज्ञान- यह वैज्ञानिक ज्ञान है जो तर्कबुद्धि पर आधारित है। भेदों में अनुस्युत अभेद का ज्ञान प्राप्त करते हैं। तर्क वस्तुओं के सार्वभौमिक तत्वों को ग्रहण करता है और इनको ईश्वर के संबंध में समझता है। यह ईश्वर के विश्वात्म रूप का ज्ञान है।
(3) प्रातिभ ज्ञान -ईश्वर के कुछ गुण के वस्तुगत सार के पर्याप्त विचार के साथ वस्तुओं के पर्याप्त सार की ओर बढ़ता है। अत:
यहां (a) (b) (c) तीनों सत्य है।
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37. लाइबनिट्‌जे के शक्ति सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(a) शक्ति तब भी रहती है जब गति रुक जाती है क्योंकि यह गति का आधार है।
(b) विस्तार शरीर का आवश्यक गुण है।
(c) कोई भी द्रव्य नहीं है जो शक्ति की अभिव्यक्ति है।
(d) जो सक्रिय है वह अवास्तविक है।
Ans. (a) : लाइबनिट्‌जे ‘शक्ति के संरक्षण के नियम’ में विश्वास करता है। उसके अनुसार चिदणुओं की शक्ति का योग सदा एक बना रहता है। अर्थात्‌ शक्ति तब भी रहती जब गति रुक जाती है। क्योंकि यह गति का आधार है।
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38. निम्नलिखित में से कौन सा कथन बर्कले के संदर्भ में सही है?
(a) बर्कले‚ लॉक के मूल अनुभववाद का प्रयोग प्रत्ययवाद की स्थापना के लिए करता है और इसके परिणाम स्वरूप भौतिकवाद और नास्तिकवाद का समर्थन करता है।
(b) बर्कले‚ लॉक के मूल अनुभववाद का प्रयोग प्रत्ययवाद की स्थापना के लिए करता है और इसके पणिाम स्वरूप भौतिकवाद और नास्तिकवाद को अस्वीकार करता है।
(c) मन में अमूर्त प्रत्यय की रचना की क्षमता होती है।
(d) किसी वस्तु का अस्तित्व उस वस्तु के मन के द्वारा प्रत्यक्ष होने या ज्ञान होने पर निर्भर नहीं करता।
Ans. (b) : बर्कले‚ लॉक के मूल अनुभववाद का प्रयोग प्रत्ययवाद की स्थापना के लिए करता है। इसके परिेणामस्वरूप जड़ वस्तु की सत्ता का निराकरण कर भौतिकवाद की जगह प्रत्ययवाद और प्रत्ययों का कारण ईश्वर को मानकर नास्तिकवाद को अस्वीकार देता है।
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39. ह्मूम के अनुसार कारण और कार्य के बीच तथाकथित संबंध निम्नलिखित में से है:
(a) अनुभव से पूर्वानुमान।
(b) निरीक्षण और अनुभव पर आधारित।
(c) कार्य-कारण से निहित है।
(d) दोनों एक दूसरे से अनिवार्य रूप से संबद्ध है।
Ans. (b) : ह्यूम अपने संशयवादी दर्शन के आलोक में कारण कार्य संबंधों पर भी प्रश्न चिन्ह उठाता है। उसके अनुसार‚ कारण और कार्य के बीच संबंध निरीक्षण और अनुभव पर आधारित है जो भूतकाल की घटनाओं के आधार पर वर्तमान और भविष्य की घटनाओं को निर्धारित करने के लिए नियत साहचर्य और प्रकृति की एकरूपता पर आधारित है।
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40. कांट ने शुद्ध बुद्धि के विप्रतिषेध की व्याख्या अपने निम्नलिखित में से किस सिद्धांत में की है?
(a) अनुभवातीत ईश्वर विज्ञान
(b) अनुभवातीत सृष्टि विज्ञान
(c) अनुभवातीत आत्म विज्ञान
(d) उपर्युक्त सभी
Ans. (b) : कांट के अनुसार प्रज्ञा के तीन संप्रत्यय जिन्हें आत्मा‚ सृष्टि और ईश्वर के नाम से जाना जाता है जिनको सिद्ध करने के लिए तीन शास्त्र क्रमश: बुद्धिपरक मनोविज्ञान‚ बुद्धिसृष्टि विज्ञान और बुद्धिपरक ईश्वरविज्ञान है। कांट के अनुसार ये तीनों शाध्Eों में जब बुद्धि विकल्पों का प्रयोग इनको (आत्मा‚ सृष्टि और ईश्वर) को सिद्ध करने के लिए होता है तो ये अंतर्विरोधों से ग्रस्त हो जाते हैं। जिन्हें क्रमश: बुद्धिपरक मनोविज्ञान में ‘तर्काभास’ (Paral Qgisms) सृष्टि विज्ञान में इन्हें विप्रतिषेध (Antinomies) और ईश्वरमीमांसा में इन्हें व्याघात (Contradictions) कहा जाता है।
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41. ‘प्राथमिक वाक्य वस्तु का सही चित्र प्रदर्शित करते हैं’ निम्नलिखित में से किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया?
(a) मूर (b) रसेल
(c) विट्‌गेन्स्टीन (d) हुसर्ल
Ans. (c) : विट्‌गेंसटाइन के अनुसार‚ प्राथमिक प्रतिज्ञप्ति (वाक्य) वस्तु का सही चित्र प्रदर्शित करते हैं। विट्‌गेन्सटाइन प्राथमिक प्रतिज्ञप्ति को अणु प्रतिज्ञप्ति भी कहते हैं।
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42. सूची – I को सूची- II के साथ सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सूची-I सूची-II
(a) हुसर्ल i. सत्यापन सिद्धान्त
(b) ए.जे. एयर ii. कोटि दोष
(c) विलियम जेम्स iii. इपोके
(d) जी. राइल iv. उपयोगितावादी सिद्धांत
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (iii) (i) (iv) (ii)
(b) (iii) (iv) (i) (ii)
(c) (iii) (i) (ii) (iv)
(d) (i) (ii) (iii) (iv)
Ans. (a) : हुसर्ल द्वारा इपोके‚ ए.जे.एयर द्वारा सत्यापन सिद्धान्त विलियम जेम्स द्वारा उपयोगितावादी सिद्धान्त और गिल्बर्ट द्वारा कोटि-दोष सिद्धांत प्रस्तुत किया गया।
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43. निम्नलिखित में से कौन-सी पुस्तक हाइडेगर के द्वारा लिखी गयी है?
(a) लेबन्सवेल्ट (b) बीईंग एंड टाइम
(c) प्रैगमेटिज्म (d) फिनॉमिनोलॉजी
Ans. (b) : मार्टिन हाइडेगर जो अस्तित्ववादी विचारक है। उसकी पुस्तक बीईंग एण्ड टाइम (Sein and Zeit) और What is Metaphysics है।
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44. तार्किक भाववाद निम्नलिखित में से किस आधार पर तत्त्वमीमांसा को अस्वीकार करता है?
(a) तत्त्वमीमांसीय प्रश्न मानवीय बुद्धि विकल्पों की सीमा से परे हैं।
(b) तत्त्वमीमांसीय प्रश्न संदिग्ध है।
(c) तत्त्वमीमांसीय प्रश्न अर्थहीन है क्योंकिे वे असत्यापनीय है।
(d) तत्त्वमीमांसीय प्रश्न देश और काल से परे है।
Ans. (c) : तार्किक भाववाद इन्द्रिय प्रत्यक्ष को सत्यापन का आधार मानता है। भाववादियों के सत्यापन सिद्धांत के अनुसार वही कथन सत्यापनीय है जिनका प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जा सके। उनके अनुसार तत्वमीमांसा के कथनों का प्रत्यक्ष निरीक्षण नहीं किया जा सकता है। क्योंकि यह असत्यापनीय है। अत: तत्त्वमीमांसा के प्रश्न अर्थहीन
(non-sensical) है।
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45. जी. राईल के अनुसार निम्नलिखित में कौन-सा एक सही है?
(a) सभी भौतिकवादी घटनाएं मानसिक घटनाओं से नि:सरित होने योग्य है।
(b) सभी मानसिक घटनाएं भौतिकवादी घटनाओं से नि:सरित होने योग्य है।
(c) दोनों प्रकार की घटनाएँ एक-दूसरे से नि:सरित होने योग्य है।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans. (b) : गिल्बर्ट राइल के अनुसार सभी मानसिक घटनाएँ‚ भौतिकवादी घटनाओं से नि:सरित होने योग्य है। वह अपनी पुस्तक ‘The concept of mind’ में साधारण भाषा-विश्लेषण के आधार यह सिद्ध करने का प्रयास करता है कि मन और शरीर का द्वैत ‘श्रेणीपरक भूल’ का परिणाम है। उसके अनुसार मानसिक तथ्यों से संबंधित कथनों की व्याख्या व्यवहार या व्यवहार की प्रवृत्ति में हो सकती है।
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46. मूर का परमाणुवादी विश्लेषण‚ किसके विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में है?
(a) कांट की ज्ञानमीमांसा एवं सत्तामीमांसा के बीच द्वन्द्व
(b) हेगल का विचार और सत्ता के बीच तादात्मय
(c) बे्रडले का परम तत्त्ववाद
(d) उपर्युक्त सभी
Ans. (d) : मूर अपने दर्शन को प्रत्ययवाद के खण्डन से प्रारंभ करता है। वह ब्रैडले के सत्ता दृश्यता है के विचार का अपने परमाणुवादी विश्लेषण में खण्डन करता है।
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47. अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार करते हुए कांट के ज्ञान के दृष्टिकोण के आलोक में सही विकल्प का चयन करें।
अभिकथन (A) सार्वभौमिकता‚ अनिवार्यता और नवीनता ज्ञान की शर्तें हैं।
तर्क (R) संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक निर्णय ज्ञान की सभी आवश्यक शर्तों को पूर्ण करता है।
कूट:
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R),(A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों गलत है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीें है।
(d) (A) गलत है और (R) सही है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं हैं
Ans. (a) कांट अपने आलोचनावादी दर्शने में ज्ञान की शर्तों के रूप में तीन मापदण्ड सार्वभौमिकता‚ अनिवार्यता और नवीनता को मानता है और इसी आधार पर कहता है कि संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक निर्णय ज्ञान की सभी आवश्यक शर्तों को पूर्ण करता है। अत: (A) और (R) दोनों सही है और (R) (A) की सही व्याख्या है।
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48. हेडेगर के अनुसार‚ अस्तित्व रचनाओं का सही क्रम निम्नलिखित में से क्या है?
(a) एग्जिसटेंज‚ फालेननैस‚ फैक्टिसिटी
(b) एग्जिसटेंज‚ फैक्टिसिटी‚ फालेननैस
(c) फैक्टिसिटी‚ फालेननैस‚ एग्जिसटेंज
(d) फालेननैस‚ फैक्टिसिटी‚ एग्जिसटेंज
Ans. (b) : हाइडेगर के अनुसार अस्तित्व रचनाओं (Structric) का सही क्रम ‘एग्जिस्टेज फैक्टिसिटी फालननैस है। मानव अपने आपको एकायक फेंका हुआ पाता है। उसके अस्तित्व का आभास कि वह है एक ‘तथ्य हैं।
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49. हुसर्ल ने विषयापेक्षी की अवधारणा को निम्नलिखित में से किस दार्शनिक से ग्रहण किया?
(a) कांट (b) हेगल
(c) ब्रेन्टानो (d) डेकार्ट
Ans. (c) : हुसर्ल विषयापेक्षी की अवधारणा को बे्रन्टानो से ग्रहण किया है। ब्रेन्टानो का चेतना के विषयापेक्षी सिद्धांत के अनुसार‚ चेतना एक दिशा है‚ जो किसी ओर उन्मुख होती है। चेतना कभी भी रिक्त नहीं होती‚ वह अनिवार्यत: किसी की चेतना है।
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50. अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार करते हुए विटगेन्सटीन के विचार के आलोक में सही विकल्प का चयन कीजिए:
अभिकथन (A) प्रत्येक तर्क वाक्य एक स्पष्ट और निश्चित अर्थ रेखता है।
तर्क (R) दैनिक जीवन के तर्क वाक्यों की मिश्रित अभिव्यक्तियां होती हैं‚ जो तार्किक रूप से व्यक्ति वाचक नाम है।
कूट:
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों गलत हैं लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(d) (A) गलत है और (R) सही है और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
Ans. (c) विटगेंस्टाइन के अनुसार‚ प्रत्येक तर्क वाक्य एक स्पष्ट और निश्चित अर्थ रखता है। यह अभिकथन (A) सत्य है जबकि
तर्क (R) दैनिक जीवन के तर्क वाक्यों की मिश्रित अभिव्यक्तियां होती है‚ जो तार्किक रूप से व्यक्तिवाचक नाम है। गलत है। और सही व्याख्या भी नहीं है।
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