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UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2016

1. वैशेषिक के अनुसार आत्मा शरीर के साथ इन संबंधों से रहता है−
(a) स्वरूप (b) समवाय
(c) संयोग (d) विशेषणता
Ans: (c) वैशेषिक दर्शन में आत्मा और शरीर का सम्बन्ध ‘संयोग सम्बन्ध माना गया है। मन और आत्मा का सन्निकर्ष (सम्बन्ध) भी संयोग है। दो द्रव्यों के सन्निकर्ष (सम्बन्ध) को संयोग कहते हैं।
(भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूपरेखा: राममूर्ति पाठक)
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2. वैशेषिक के अनुसार‚ ज्ञान का अभाव मानवीय आत्मा में निम्न में से किस सम्बन्धों से रहता है−
(a) समवाय (b) स्वरूप
(c) संयोग (d) वैशिष्ट्‌य
Ans: (b) ज्ञान का आभाव मानवीय आत्मा में ‘स्वरूप’ सम्बन्ध से रहता है। वैशेषिक दर्शन में ‘ज्ञान’ को ‘आत्मा’ का आगन्तुक लक्षण माना गया। आत्मा अपने स्वरूपावस्था मूलत: जड़ तथा अभौतिक है। यहाँ ‘जड़’ का तात्पर्य है कि आत्मा चैतन्य रहित है। आत्मा ज्ञान-स्वरूप नहीं है। अपितु ज्ञान नामक गुण का आश्रयभूत द्रव्य है। अत: ज्ञान का अभाव आत्मा में उसके ‘स्वरूप’ के कारण है।
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3. निम्न में से कौन वैशेषिक दर्शन में विश्व का समवायिकारण है?
(a) त्रसरेणु (b) द्वयणुक
(c) परमाणु (d) ईश्वर
Ans: (b) वैशेषिक दर्शन में विश्व का समवायिकारण ‘द्वयणुकों’ को माना गया है। सर्वप्रथम एक ही द्रव्य के दो परमाणु आपस में संयुक्त होकर द्वयुणु का निर्माण करते हैं। द्वयणु के उपरान्त त्र्यणुक का जिसे त्रसरेणु भी कहा जाता है। तीन द्वयणुकों से त्र्यणुक बनते हैं‚ चार त्र्यणुकों से चतुरणुक का निर्माण होता है। इसी प्रकार क्रमानुसार जगत की शृष्टि होती है। इसे ही परमाणुवाद कहते हैं।
(भारतीय दर्शन का सर्वेक्षण − संगम लाल पाण्डेय)
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4. आकाश‚ काल और दिक्‌ इन सभी तीन द्रव्यों की कुछ सामान्य विशेषताएँ होती हैं। निम्न में से उस एक का चयन कीजिए जो उन सभी विशेषताओं का सही-सही उल्लेख करता है−
(a) एक‚ भौतिक (भूत) और नित्य
(b) एक‚ नित्य और मिश्रित
(c) एक‚ सर्वव्यापी और नित्य
(d) अनेक‚ सर्वव्यापी और नित्य
Ans: (c) वैशेषिक दर्शन में स्वीकृत पाँच महाभूतों में पाँचवाँ आकाश है जो अपरमाणिविक और विभु (व्यापक) होने के कारण अन्य चार- पृथ्वी‚ जल‚ अग्नि और वायु से अलग हैं। यह भौतिक द्रव्य है और शब्द इसका गुण है। यह एक‚ नित्य‚ निरवयव‚ निष्क्रिय एवं अपरमाणविक है। दिक्‌ और काल क्रमश: सह-अस्तित्व और अनुक्रम का प्रतिपादन करते हैं। दिक्‌ एवं काल‚ अलग-अलग एक सर्वव्यापी‚ नित्य‚ अतीन्द्रिय‚ अभौतिक एवं गुणहीन है। इस प्रकार आकाश‚ काल और दिक्‌‚ एक‚ सर्वव्यापी नित्य है।
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5. निम्न में से कौन नित्य द्रव्य नहीं है?
(a) आत्मा (b) आकाश
(c) विशेष (d) काल
Ans: (c) वैशेषिक दर्शन अपनी पदार्थ मीमांसा में ‘विशेष’ को एक अलग पदार्थ माना है। ध्यातव्य हो वैशेषिक सात पदार्थों-द्रव्य‚ गुण‚ कर्म‚ सामान्य‚ विशेष‚ समवाय और अभाव को मानता है। द्रव्य नौ हैं− पृथ्वी‚ जल‚ अग्नि‚ वायु और आकाश भौतिक (मूर्त्त) द्रव्य हैं तथा दिक्‌‚ काल‚ आत्मा और मनस्‌ अभौतिक (अमूर्त्त) द्रव्य हैं। ये सब नित्य हैं। ‘विशेष’ एक अलग पदार्थ होने के कारण ‘द्रव्य’ नहीं हैं।
(भारतीय दर्शन− डॉ. नन्दकिशोर देवराज)
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6. अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए तथा दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन कीजिए−
अभिकथन (A) : आकाशत्व को एक जाति होनी चाहिए।
तर्क (R) : यह आकाश की अनिवार्य विशेषता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) गलत है और (R) सही है।
(d) (A) और (R) दोनों गलत हैं।
Ans: (c) आकाशत्व कोई जाति (सामान्य) नहीं हो सकती। ‘व्यक्तेर भेद:’ अर्थात्‌ एक व्यक्ति में रहने वाला धर्म जाति-रूप सामान्य न होकर उपाधि है। न्याय-वैशेषिक के अनुसार आकाश‚ काल‚ दिक्‌ एक-एक है‚ अनेक नहीं। इसलिए आकाशत्व‚ कालत्व और दिक्‌त्व उपाधियाँ हैं‚ जातियाँ नहीं। अत: दोनों कथन (A) और (R) गलत हैं। (भारतीय दर्शन− डॉ. नन्दकिशोर देवराज)
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7. ‘‘आत्म-पहचान विभिन्न अवधारणाओं को एक साथ मिलाने से संबंधित नहीं होती है बल्कि यह एकमात्र गुण है जिसे हम कल्पना में अपने एकत्रित विचारों के कारण इन अवधारणाओं में प्रकट करते हैं’’ निम्न में से किस दार्शनिक का यह विचार है?
(a) ह्यूम (b) स्पिनोजा
(c) कांट (d) किर्केगार्ड
Ans: (a) ‘Personal Identity’ (वैक्तिक अनन्यता) से सम्बन्धित यह कथन ह्यूम का है। जिसमें ‘आत्म-पहचान-’ को कल्पना में एकत्रित विचारों को अवधारणाओं में प्रकटीकरण की बात कर रहे हैं।
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8. ‘‘शरीर का मस्तिष्क के बिना कोई अस्तित्व नहीं है; और इस संदर्भ में यह कहना विरोधाभासी है कि द्रव्य मस्तिष्क के बिना ग्रहण किये अस्तित्ववान है’’ यह विचार किनका है?
(a) बर्कले (b) लाइब्नित्ज
(c) स्पिनोजा (d) ह्यूम
Ans: (a) किसी भौतिक पिंड (Bodies) का अस्तित्व मस्तिष्क
(Mind) के बिना नहीं हो सकता है। बर्कले समस्त प्रत्ययों को या ‘Mind’ पर उपश्रित मान लेता है अथवा ईश्वर (God) पर। उसके अनुसार ‘सत्ता दृश्यता है’ अर्थात्‌ कोई भी द्रव्य (Matter) जो अस्तित्व में हो और आत्मा/मन/मस्तिष्क (चाहे किसी का हो) के बिना के अस्तित्ववान हो ही नहीं सकता। अर्थात्‌ बिना मस्तिष्क के दृश्य हुए किसी वस्तु की सत्ता हो ही नहीं सकती।
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9. कांट के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए और सही कूट का चयन कीजिए।
1. कांट उस धारणा को अस्वीकार करता है कि देश और काल वैसी अवधारणाएँ हैं जो वस्तुओं और हमारे सम्बन्धों के अनुभव से आती हैं।
2. कांट उस धारण को स्वीकार करता है कि देश और काल वैसी अवधारणाएँ हैं जो वस्तुओं और हमारे सम्बन्धों के अनुभव से आती है।
3. कांट उस धारण को अस्वीकार करता है कि देश और काल वैसी अवधारणाएँ हैं जो वस्तुओं और हमारे सम्बन्धों के अनुभव से नहीं आती हैं।
कूट :
(a) केवल 1 सही है।
(b) केवल 1 और 2 सही हैं।
(c) केवल 2 सही है।
(d) केवल 2 और 3 सही हैं।
Ans: (a) कांट अपने देश-काल सम्बन्धी विचार में‚ देश-काल को अनुभव-निरपेक्ष कहता है‚ जिसे वह सर्वव्यापक और विशुद्ध संवेदन कहता है। कांट के दर्शन में देश-काल को प्रागनुभविक और प्रत्यक्ष के आकार कहा गया है। देश और काल संवेद वस्तुओं और घटनाओं के अनुभव की तार्किक प्रागपेक्षा है।
(पाश्चात्य दर्शन का उद्भव और विकास− डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)
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10. नीचे दो कथन दिए गए हैं जिनमें एक अभिकथन (A) और दूसरा तर्क (R) है। देकार्त की द्रव्य की अवधारणा के संदर्भ में (A) और (R) पर विचार करते हुए सही उत्तर का चयन कीजिए−
अभिकथन (A) : मन और शरीर दो सापेक्षिक द्रव्य हैं।
तर्क (R) : मन और शरीर एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) गलत है और (R) सही है।
(d) (A) और (R) दोनों गलत हैं।
Ans: (c) डेकार्ट के द्वैतवाद के अनुसार मन और शरीर दो सापेक्षिक द्रव्य हैं। मन और शरीर दोनों एक दूसरे के परस्पर विरुद्ध स्वभाव वाले द्रव्य हैं जो पूर्णत: परस्पर स्वतंत्र हैं। अर्थात्‌ यह अपनी सत्ता के लिए एक दूसरे पर निर्भर नहीं हैं।
(A History of Philosophy– FRANK THILLY)
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11. निम्न में से कौन-सा कथन लॉक के कारणता सिद्धांत के संदर्भ में सही है?
(a) कारणता का विचार ऐच्छिक कार्य से उत्पन्न नहीं होता है।
(b) कारणता का विचार अनविार्यत: एकरूपता से सम्बन्धित होता है।
(c) कारणता का विचार ऐच्छिक कार्य से उत्पन्न होता है और यह अनिवार्यत: एकरूपता से सम्बन्धित नहीं होता है।
(d) कारण और कार्य का एक-दूसरे से सम्बन्ध तथा उनकी एक-दूसरे पर निर्भरता हमारे विचारों में खोजी जा सकती है।
Ans: (c) लॉक के अनुसार‚ कारणता का विचार ऐच्छिक कार्य से उत्पन्न होता है और यह अनिवार्यत: एकरूपता से सम्बन्धित नहीं होता है। लॉक ने संवेदनों के कारण के रूप में जड़ तत्व की सत्ता को स्वीकार करता है। ‘दर्शन और विज्ञान’ के क्षेत्र में कारणता को वस्तु जगत्‌ का एक सार्वभौम और अनिवार्य सम्बन्ध माना जाता है।
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12. जागृत अनुभवों के प्रभाव द्वारा स्मृति में अविद्या के कारण जगत की रचना मन में होती है‚ इस मत का समर्थन किसके द्वारा किया गया?
(a) मीमांसा (b) वेदान्त
(c) न्याय (d) बौद्ध दर्शन
Ans: (b) वेदान्त दर्शन के अनुसार हम जो जाग्रत में देखते हैं वह हमारी स्मृति में होता है। उनके अनुसार स्मृति में अविद्या के कारण जगत की रचना मन में होती है। ध्यातव्य हो कि वेदान्त दर्शन विभिन्न स्तरों की सत्ताओं को तीन रूपों−प्रतिभ्यासिक‚ व्यावहारिक तथा पारमर्थिक में रखा गया है।
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13. अप्रमा का कारण दोष है और प्रमा का कारण गुण है‚ यह किसके द्वारा समर्थित है?
(a) विश्वनाथ (b) गौतम
(c) कुमारिल (d) अभिनवगुप्त
Ans: (a) अप्रमा का कारण दोष तथा प्रमा का कारण गुण हैं। यह कथन विश्वनाथ का है। ‘न्याय सिद्धान्त मुक्तावली’ इनकी रचना है। ये साथ पदार्थों में आत्मा को बुद्धि का आश्रय मानते हैं। बद्धि− अनुभूति तथा स्मृति भेद से दो। अनुभूति के अन्तर्गत प्रमाणों का निरूपण।
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14. ‘क्रियात्मक प्रत्यय वाक्य है’ यह मत किसके द्वारा समर्थित है?
(a) वेदान्त (b) बौद्ध दर्शन
(c) मीमांसा (d) न्याय
Ans: (c) क्रियात्मक प्रत्यय (Theveral suffix) वाक्य है। यह मीमांसा दर्शन को मानता है। मीमांसा दर्शन में वेद को क्रिया परक विधिवाक्य माना गया है। मीमांसा में शब्द या तो सिद्धार्थवाक्य या विद्यायक वाक्य हो सकते हैं।
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15. निम्नांकित में किस मत के अनुसार शब्दों के अर्थ केवल वाक्यों में उनके प्रयोग से सीखा जा सकता है?
(a) नव्य-न्याय (b) न्याय
(c) मीमांसा (d) वेदान्त
Ans: (c) शब्दों के अर्थ को हम वाक्यों में उनके प्रयोग द्वारा ही सीख सकते हैं। मीमांसा दर्शन में शब्द और उसके अर्थ को लेकर कुमारिल और प्रभाकर क्रमश: अभिहितान्वयवाद और अन्विताभिधानवाद मत के समर्थक हैं।
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16. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. ध्यान जो किसी वस्तु को i. निबन्ध मन में धारण करता है।
B. साहचर्य जो विभिन्न अनुभवों ii. परिग्रह को संयोजित करता है।
C. वह विशेषता जिससे पुन: iii. प्रणिधान स्मरण होता है कि विषय किससे सम्बन्धित है।
D. धारणा जो धारक को iv. लक्षण अभिव्यंजित करती है।
कूट :
A B C D
(a) ii i iii iv
(b) i iv iii ii
(c) iv i ii iii
(d) iii i iv ii
Ans: (d)
(a) प्रणिधान− वह ध्यान है जो किसी वस्तु को मन में धारण करता है।
(b) निबंध− साहचर्य जो विभिन्न अनुभवों को संयोजित करता है।
(c) लक्षण− वह विशेषता जिससे पुन:स्मरण होता है कि किससे सम्बन्धित है।
(d) परिग्रह− धारणा जो धारक को अभिव्यंजित करती है।
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17. भ्रम के सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए किस दार्शनिक ने यह तर्क दिया है कि ‘इन्द्रिय जगत एक भ्रम है’?
(a) फ्रांसिस बेकन (b) पार्मेनाइडीज
(c) प्रोटागोरस (d) विलियम जेम्स
Ans: (b) पार्मेनाइडीज अपने ‘सत्‌’ को कूटस्थ नित्य कहता है। उसके अनुसार इन्द्रियों से ज्ञात जगत परिवर्तनशील एवं उत्पत्तिमान है। जबकि ‘सत्‌’ कूटस्थ‚ नित्य और स्थिर है जिसका ज्ञान बुद्धि से होता है। और परिवर्तनयुक्त जगत इन्द्रियजन्य भ्रम है।
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18. निम्न में से किस दार्शनिक ने यह तर्क दिया कि त्रुटि का दोत मानवीय बुद्धि की सीमितता और मानवीय इच्छा की असीमितता के बीच का अन्तर होता है?
(a) देकार्त (b) लॉक
(c) ब्रैडले (d) किर्केगार्ड
Ans: (a) डेकार्ट के अनुसार किसी भी ज्ञान पर विश्वास करने से पहले हमें उस पर संशय करना चाहिए और इसका कारण मानव बुद्धि की सीमितता है। उसके अनुसार हमारे त्रुटि का स्रोत मानवीय बुद्धि की सीमितता और मानवीय इच्छा की असीमितता के बीच का अन्तर होता है।
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19. ‘तथ्य विषयक कथन’ और ‘विचार संबंधी कथन’ के बीच के अंतर को किसके द्वारा स्पष्ट किया गया?
(a) लॉक एवं बर्कले (b) केवल बर्कले
(c) ह्यूम और लॉक (d) केवल ह्यूम
Ans: (d) ह्यूम अपने दर्शन में मानव ज्ञान को दो वर्गों में बाँटता है− ‘तथ्य विषय कथन’ से हमें तथ्यात्मक ज्ञान’ तथा ‘विचार सम्बन्धी कथन’ से ‘आकारिक ज्ञान’ प्राप्त होता है। ‘तथ्य विषयक कथन’ का सम्बन्ध वस्तु जगत से है और ‘विचार सम्बन्धी कथन’ प्रत्ययों (विचारों) के पारस्परिक सम्बन्धों से है।
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20. हेगल के अनुसार निम्नलिखित अवधारणाओं के सही क्रम को लिखें−
(a) पक्ष‚ सपक्ष और विपक्ष (b) पक्ष‚ विपक्ष और सपक्ष
(c) सपक्ष‚ पक्ष और विपक्ष (d) विपक्ष‚ पक्ष और सपक्ष
Ans: (b) हेगेल के अनुसार प्रत्येक अपूर्ण प्रत्यय में उसका विरोधी तत्व निहित होता है। किन्तु यह विरोधी तत्त्व ज्ञान अथवा प्रत्यय का यथार्थ स्वरूप नहीं है। ज्ञान और सत्ता स्वरूपत: सामञ्जस्यपूर्ण होते हैं। अत: विकास की अन्तिम अवस्था में विरोध का पूर्ण समन्वय हो जाता है। यह त्रयी क्रमश: पक्ष‚ विपक्ष है।
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21. निम्नलिखित में से किस दार्शनिक द्वय का यह विचार है कि ‘मैं किसी वस्तु से अवगत हुए बिना स्वयं से अवगत हो सकता हूँ’?
(a) लॉक और ह्यूम (b) बर्कले और लॉक
(c) ह्यूम और स्पिनो़जा (d) ह्यूम और बर्कले
Ans: (d) बर्कले के अनुसार आत्म ज्ञान प्रत्ययात्मक नहीं है बल्कि ‘अंतर्बोध’ से होता है अर्थात्‌ में किसी वस्तु से अवगत हुए बिना स्वयं से अवगत हो सकता हूँ। इसी तरह ह्यम आत्मा को विषय के स्तर पर लेआता है अत: वह मैं को प्रत्यक्षानुभव का विषय मानता है। ह्यूम आत्मा को प्रत्ययों और संस्कारों का अविच्छिन्न प्रवाह मानता है जो हमें ‘आत्मा’ की एकता का आभास कराता है।
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22. मन अन्त:करण की संकल्पात्मिका वृत्ति है‚ यह निम्नलिखित में से किसकी दृष्टि है?
(a) न्याय (b) मीमांसा
(c) अद्वैत वेदान्त (d) बौद्ध
Ans: (c) अन्त:करण जब बाह्य विषयों के सम्पर्क में आता है तो तदाकार हो जाता है। जिसे ‘वृत्ति’ कहते हैं। अन्त: करण की चार आकृतियों अनिश्चय (संशय)‚ निश्चय (संकल्प)‚ आन्मचेतना और स्मरण। यहाँ प्रश्न में ‘मन’ की जगह अंग्रेजी का ‘मनस्‌’ होगा। ‘मनस्‌’ या ‘बुद्धि’ अंत:करण की संकल्पात्मिका वृत्ति है।
(भारतीय दर्शन का सर्वेक्षण: संगम लाल पाण्डेय)
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23. सीपी में रजत्‌ का ज्ञान भ्रमपूर्ण होता है क्योंकि यह गैर-अस्तित्व वाले रजत्‌ को प्रक्षिप्त करता है और हम तब सचेत होते हैं। जब रजत्‌ सम्बन्धी हमारा ज्ञान तत्पश्चात्‌ सीपी के ज्ञान द्वारा खण्डित होता है। यह किसका उदाहरण है?
(a) अख्याति (b) अन्यथाख्याति
(c) असत्ख्याति (d) आत्मख्याति
Ans: (c) असत्‌ख्यातिवाद सीपी में रजत्‌ का ज्ञान भ्रमपूर्ण मानता है। उसके अनुसार ‘रजत्‌’ जिसका अस्तित्व है ही नहीं अर्थात्‌ वहाँ असत्‌ है और असत्‌ ‘रजत्‌’ का ज्ञान जब सीपी के ज्ञान से खण्डित हो जाता है। यह माध्यमिक बौद्धों से सम्बन्धित है।
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24. न्याय के अनुसार‚ निम्न में किसमें भूतकाल का सचेतन संदर्भ और उसी वस्तु की वर्तमान दशा अपेक्षित होत है?
(a) स्मृति (b) अनध्यवसाय
(c) प्रत्यभिज्ञा (d) निर्विंकल्प प्रत्यक्ष
Ans: (c) न्याय दर्शन के अनुसार पहले जिस वस्तु का ज्ञान हो चुका है उसका पुन: प्रत्यक्षात्मक ज्ञान प्रत्यभिज्ञा है। अर्थात्‌ प्रत्याभिज्ञा में भूतकाल का संचेतन संदर्भ और उसी वस्तु की वर्तमान दशा अपेक्षित होती है। यह स्मरण और प्रत्यक्ष का मिश्रण नहीं है।
(भारतीय दर्शन− डॉ. नन्दकिशोर देवराज)
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25. न्याय के लिए कौन-सा कथन स्वीकार्य नहीं है?
(a) इन्द्रियार्थसन्निकर्ष जन्यम्‌ ज्ञानम्‌ प्रत्यक्षम्‌
(b) द्रव्याश्रिता ज्ञेया निर्गुण निष्क्रिया गुणा:
(c) संदिग्धसाध्यवान पक्ष:
(d) अर्थक्रियासामर्थ्य सत्‌ का मानदण्ड है।
Ans: (d) न्याय दर्शन को ‘अर्थक्रियासामार्थ्य सत्‌’ का मानदण्ड नही मानता है। न्याय दर्शन में ‘अर्ध प्रकाशों बुद्धि: माना गया है।
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26. सूची-I को सूची-II से मिलान कीजिए और दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. सभी सकारात्मक उदाहरणों i. विपक्षासत्व में मध्य पद की उपस्थिति
B. सभी नकारात्मक उदाहरणों ii. असत्प्रतिपक्ष में मध्य पद की अनुपस्थिति
C. मध्य पद में साध्य की iii. सपक्षसत्व विरोधी वस्तु नहीं होनी चाहिए।
D. विरोधी कारणों की iv.अबाधितविषयत्व अनुपस्थिति में विरोधी निष्कर्ष निकलते
कूट :
A B C D
(a) iii iv i ii
(b) ii iii iv i
(c) iii i iv ii
(d) i iii iv ii
Ans: (c)
A. सभी सकारात्मक उदाहरणों में मध्य पद की उपस्थिति−
iii. सपक्षसत्व
B. सभी नकारात्मक उदाहरणों में मध्य पद की अनुपस्थिति−
i. विपक्षासत्व
C. मध्य पद में साक्ष्य की विरोधी वस्तु नही होनी चाहिए−
iv. अबाधित विषयत्व
D. विरोधी कारणों की अनुपस्थिति में विरोधी निष्कर्ष निकलते हैं−
ii. असत प्रतिपक्ष
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27. किस प्रकार का हेत्वाभास निम्नलिखित अनुमान द्वारा किया जाता है? सही कूट का चयन कीजिए− ‘मणिमय: पर्वत: वहिनमान धूमात्‌ ।’
(a) अनुपसंहारी सव्यभिचार (b) आश्रयासिद्ध
(c) स्वरूपासिद्ध (d) बाधित
Ans: (b) जिसमें आश्रय या पक्ष काल्पनिक होता है‚ उस अनुमान को आश्रय सिद्ध या पक्षासिद्ध हेतु कहते हैं। ‘मृणमय पर्वत’ जो कि आश्रय/पक्ष है असत्‌ होने के कारण हेतु भी असिद्ध है।
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28. सही क्रम का चयन कीजिए−
(a) काम‚ अर्थ‚ धर्म‚ मोक्ष (b) मोक्ष‚ धर्म‚ अर्थ‚ काम
(c) धर्म‚ अर्थ‚ काम‚ मोक्ष (d) धर्म‚ काम‚ अर्थ‚ मोक्ष
Ans: (c) भारतीय दर्शन में चार प्रमुख पुरुषार्थ माने गये है जो क्रमश: धर्म‚ अर्थ‚ काम‚ मोक्ष है। इसका वर्णन भगवद्गीता में भी मिलता है।
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29. श्रीकृष्ण के अनुसार वर्ण के विभाजन का आधार है−
(a) जाति और कर्म (b) गुण और कर्म
(c) जाति और गुण (d) स्वधर्म और जाति
Ans: (b) भगवद्गीता में श्रीकृष्ण वर्ण विभाजन का आधार गुण और कर्म को मानते हैं। श्रीकृष्ण अर्जुन से स्पष्ट कहते हैं कि ‘चातुर्वर्ण्य मया सृष्ट गुण कर्मविभागश:। गीता चार वर्णों− ब्राह्मण‚ क्षत्रिय‚ वैश्य‚ शूद्र की सामाजिक व्यवस्था का समर्थक है।
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30. सम्यक्‌ चारित्र के प्रार्थी द्वारा किसकी आवश्यकता होती है?
(a) सिद्धशील (b) गुणस्थान
(c) सदसदविवेक (d) पंचव्रत
Ans: (a) जैन दर्शन में मोक्ष प्राप्ति के तीन सम्यक्‌ दर्शन‚ सम्यक्‌ ज्ञान और समाज चरित्र अपरिहार्य साधन माने गये हैं। सम्यक्‌ चरित्र‚ सम्यक ज्ञान को कर्म में परिणत करना है। यह ‘पंचव्रतों’ द्वारा ही सम्भव है। ये पंचव्रत‚ अहिंसा‚ सत्य‚ अस्तेय‚ ब्रह्चर्य एवं अपरिग्रह हैं।
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31. निम्न में से कौन-सा एक त्रिरत्न नहीं है?
(a) सम्यक्‌ दर्शन (b) सम्यक्‌ ज्ञान
(c) सम्यक्‌ चरित्र (d) सम्यक्‌ समाधि
Ans: (d) जैन दर्शन में सम्यक्‌ दर्शन‚ सम्यक्‌ ज्ञान और सम्यक्‌ चरित्र के साधन माने गये हैं। तीनों के सम्मिलित रूप से ही मोक्ष के साधन हैं। इसीलिए जैन दार्शनिक इन्हें ‘त्रिरत्न’ (Three Jewels) कहते हैं। ‘सम्यक्‌ समाधि’ बौद्ध दर्शन के अष्टांग मार्ग का अंग है।
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32. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. सुखानुशयी i. अभिनिवेष
B. दृग्दर्शनशक्तोरेकात्मेव ii. द्वेष
C. दु:खानुशयी iii. अस्मिता
D. स्वरसवाही विदृषोऽपि तथारुध: iv. राग
कूट :
A B C D
(a) iii ii i iv
(b) iv iii ii i
(c) ii iv i iii
(d) i iii ii iv
Ans: (c)
A. सुखानुशयी − द्वेष
B. दृग्दर्शनशक्तोरेकात्मेव − राग
C. दु:खानुशयी − अभिनिवेष
D. स्वरसवाही विदृषोऽपि तथारुध: − अस्मिता
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33. निम्नलिखित में से किसने कहा है कि ‘संकल्प स्वातूल्य सत्य है या नैतिक निर्णय भ्रम’?
(a) मार्टिन्यू (b) बेंथम
(c) कान्ट (d) स्पेन्सर
Ans: (a) मार्टिन्यु ‘संकल्प स्वातुल्य तथा सत्य (fact) है या नैतिक निर्णय भ्रम’ है। अर्थात्‌ मार्टिन्यु अनुसार या तो संकल्प की स्वतंत्रता एक तथ्य है या फिर नैतिकता एक भ्रम है।
(नीतिशास्त्र:सिद्धान्त और व्यवहार− प्रो. नित्यानंद मिश्र)
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34. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I (लेखक) सूची-II (विषय)
A. अर्बन i. द लैंग्वेज ऑफ मॉरल्स
B. ब्रॉड ii. फाइव टाइप्स ऑफ इथिकल थियरीज
C. आर.एम.हेयर iii. द प्लेस ऑफ री़जन इन इथिक्स
D. टुल्मिन iv. फन्डामेन्टल्स ऑफ इथिक्स
कूट :
A B C D
(a) i iii iv ii
(b) iv ii i iii
(c) iii iv ii i
(d) i ii iii iv
Ans: (b)
A. अर्बन iv. फन्डामेन्टल्स ऑफ इथिक्स
B. ब्रॉड ii. फाइव टाइप्स ऑफ इथिकल थियरीज
C. आर.एम.हेयर i. द लैंग्वेज ऑफ मॉरल्स
D. टुल्मिन iii. द प्लेस ऑफ री़जन इन इथिक्स
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35. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म असंगत है?
(a) संवेगवाद − ए.जे. एयर
(b) अन्त:प्रज्ञावाद − मार्टिन्यू
(c) प्रकृतिवाद − एस.ई. टुल्मिन
(d) बुद्धिवाद − कांट
Ans: (c) ए.जे.एयर‚ संवेगवादी‚ मार्टिन्यू अंत:प्रज्ञवादी कांट बुद्धिवादी लेकिन एस.इ.टूल्मिन प्रकृतिवादी नहीं हैं।
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36. अधोलिखित में से कौन प्रकृतिवादी नैतिक सिद्धान्त से सम्बन्धित कथन है?
(a) शुभ वह है जो एक बौद्धिक व्यक्ति चाहता है।
(b) शुभ वांछनीय है।
(c) ईश्वर द्वारा अनुमोदित कर्म ही सही कर्म है।
(d) स्वयं द्वारा अनुमोदित कर्म ही सही कर्म है।
Ans: (b) जब नैतिकता की कसौटी सुख का ज्ञान अर्थात्‌ सुखानुभूति का ज्ञान हो तो वहाँ प्राकृतिक नैतिक सिद्धान्त होता है। जब वैसे ज्ञान का विषय प्राकृतिक होता है और वह साधारण इन्द्रियों के द्वारा प्राप्त होता है। जैसे− शुभ वांछनीय है। अर्थात्‌ शुभ · इच्छा का विषय होना। उचित ·सामंजस्यपूर्ण सुख का कारक होना।
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37. अधोलिखित में से किसने कहा है ‘स्वतंत्रता ही मानव तथा समस्त बुद्धिजीवियों के गौरव का एकमात्र आधार है’?
(a) रॉस (b) हेगेल
(c) कान्ट (d) ग्रीन
Ans: (c) काण्ट अपने दर्शन में नैतिक की तीन पूर्णमान्यताओं को मानते हैं जो है− संकल्पस्वातन्त्रता‚ आत्मा की अमरता और ईश्वर का अस्तिव। उसके अनुसार‚ स्वतंत्रता‚ मानव तथा समस्त बुद्धिजीवियों गौरव का एकमात्र आधार है।
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38. ‘जॉन को इसलिए दण्डित नहीं किया गया कि उसने भेड़ चुराई थी अपितु इसलिए कि दूसरे इसे न चुरायें’ यह कथन दण्ड के किस सिद्धान्त से सम्बन्धित है ?
(a) प्रतीकारवादी (b) निवर्तनवादी
(c) सुधारवादी (d) परपीड़ाजनित सुजवाद
Ans: (b) दण्ड के तीन सिद्धान्त प्रचलित हैं− प्रतीकारवादी‚ निवर्तनवादी तथा सुधारवादी। निवर्तनवादी दण्ड सिद्धान्त में किसी व्यक्ति के द्वारा किये गये अपराध की सजा इसलिए दी जाती है ताकि कोई अगला अपराध करने का साहस न करे। अत: यहाँ निवर्तनवादी दण्ड सिद्धान्त है।
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39. बेन्थम एवं मिल के सन्दर्भ में‚ निम्नलिखत में कौन अभिकथन सही है/ हैं? सही कूट का चयन करें।
i. दोनों मानते हैं कि मनुष्य अनिवार्यत: सुख चाहता है।
ii. दोनों मानते हैं कि ‘चाहिए’ को ‘है’ से निगमित किया जा सकता है।
iii. दोनों स्वार्थ के आधार पर अधिकतम व्यक्तियों के अधिकतम सुख के आदर्श के औचित्य को सिद्ध करते हैं।
कूट :
(a) i और ii (b) i और ii
(c) ii और i (d) i, ii और iii
Ans: (b) बेथम और मिल दोनों सुखवादी हैं जो क्रमश: निकृष्ट और उत्कृष्ट सुखवाद की कोटि में रखे जाते हैं। दोनों का मानना है मनुष्य हमेशा सुख चाहता है। इनके अनुसार ‘चाहिए’ से ‘है’ से निगमित किया जा सकता है। मिल परार्थवादी सुखवाद को मानता है।
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40. ‘चाहिए’ की भावना बाह्य आदेशों से आती है। निम्नलिखित में से किस एक की यह मान्यता है?
(a) वैधानिक मत (b) अन्त:प्रज्ञावाद
(c) सुखवाद (d) आदर्शवाद
Ans: (a) जब नैतिक निर्णय का स्वरूप आदेशात्मक हो अर्थात्‌ चाहिए की भावना बाह्य आदेशों से आये तो वहां पर वैधानिक सिद्धान्त होता है। प्रत्येक विधान विधिमूलक और निषेधमूलक दोनों होता है। उसका रूप है ‘यह करो और उसे मत करो’।
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41. सत्यता निम्न में से किसका गुण है?
(a) पद (b) तर्कवाक्य
(c) न्यायवाक्य (d) वाक्य और न्यायवाक्य दोनों का
Ans: (b) सत्यता तर्कवाक्यों का गुण है। तर्कवाक्य ही सत्य या असत्य होते हैं। न्यायवाक्य तो इन्हीं तर्कवाक्यों से बनता है। जो वैध या अवैध होते हैं।
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42. यदि एकसमान उद्देश्य और विधेय वाले दो तर्क वाक्य सत्य नहीं हो सकते हैं किन्तु दोनों गलत हो सकते हैं‚ उनके संबंध को कहा जाता है।
(a) सब-अल्टरनेशन (b) कोंट्राडिक्ट्री
(c) कांट्रेरी (d) सबकंट्रेरी
Ans: (c) परम्परागत विरोध वर्ग के अनुसार यदि एकसममान उद्देश्य और विधेय वाले दोनों तर्कवाक्य सत्य नहीं हो सकते हैं किन्तु दोनों गलत हो सकते हैं तो उनके सम्बन्ध को ‘विपरीत’
(Contrary) कहते हैं। यह सम्बन्ध A और E में होता है।
(Datrodaction to Logic– Irving M. Copi)
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43. यदि O तर्कवाक्य गलत है तो इससे संबंधित A, E और I होगा।
(a) A सही‚ E गलत है और I गलत है।
(b) A सही है‚ E गलत है और I सही है।
(c) E गलत है और A एवं I दोनों अनिश्चित हैं।
(d) A गलत है और E एवं I दोनों अनिश्चित हैं।
Ans: (b) परम्परागत विरोध वर्ग के अनुसार यदि ‘O’ तर्कवाक्य गलत है तो ‘A’ का व्याघाती सम्बन्ध होने के कारण ‘A’ सही‚ ‘E’ का उपाश्रयण सम्बन्ध हाने के कारण ‘E’ गलत तथा ‘I’ के विरुद्ध होने के कारण विकल्प (b) सही है।
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44. निम्न में से कौन-सा एक विचार का नियम नहीं है?
(a) तादात्म्य का सिद्धांत
(b) पर्याप्त कारण का सिद्धांत
(c) मध्य बहिष्कार का सिद्धांत
(d) अविरोध का सिद्धांत
Ans: (*) विचार के तीन नियम− तादात्म्य का सिद्धान्त‚ व्याघात का नियम‚ मध्य−परिहार का नियम। संबंधित प्रश्न में एक से अधिक विकल्प सही है।
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45. निम्न में से कौन-सा एक पुनर्कथन है?
(a) P ∨ P (b) P ⋅ P
(c) P ⋅ ∼ P (d) P ⊃ P
Ans: (d) जिस वाक्याभर के केवल सत्य प्रतिस्थापन− उदाहरण होते हैं‚ वह पुनर्कथन होता है। यहाँ P ⊃ P एक पुनर्कथन होगा।
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46. निम्नलिखित युक्ति (a) और युक्ति आकार (b) पर विचार नहीं है?
i. (A B) (C D) A B
ii. (p q) (r s) p q
(a) i, ii का युक्ति आकार है।
(b) ii, i का युक्ति आकार है।
(c) i, ii का विशेष युक्ति आकार है।
(d) i, ii का विशेष युक्ति आकार है।
Ans: (a) दिये गये प्रश्न में एक से अधिक उत्तर सही है। इस प्रश्न में या तो कोई विकल्प नही सही है या पूरा प्रश्न ही गलत है।
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47. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. FERIO i. चौथा आकार
B. CAMESTRES ii. तीसरा आकार
C. DATISI iii. दूसरा आकार
D. DIMARIS iv. पहला आकार
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) iv iii ii i
(c) ii i iii iv
(d) iv iii i ii
Ans: (b)
A. FERIO – iv. पहला आकार
B. CAMESTRES– iii. दूसरा आकार
C. DATISI – ii. तीसरा आकार
D. DIMARIS – i. चौथा आकार
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48. ‘कोई भी मनुष्य पूर्ण नहीं हैं’ इस कथन का ऑबवर्जन है−
(a) सभी मनुष्य अपूर्ण हैं।
(b) सभी पूर्ण प्राणी मनुष्य हैं।
(c) कोई भी पूर्ण प्राणी मनुष्य नहीं है।
(d) कुछ पूर्ण प्राणी मनुष्य हैं।
Ans: (a) प्रतिवर्तन (Obversion) में उद्‌ेश्य पद अपरिवर्तित रहता है और प्रतिवर्तित होने वाले तर्कवाक्य का परिमाण भी अपरिवर्तित रहता है। किसी तर्कवाक्य के ‘प्रतिवर्तन’ (ऑबवर्जन) में हम तर्कवाक्य का गुण परिवर्तन करते हैं और विधेय के स्थान पर उसका पूरक रख देते हैं। जैसे− ‘कोई भी मनुष्य पूर्ण नहीं है’ ‘E’ तर्कवाक्य है जिसका प्रतिवर्तन ‘A’ तर्कवाक्य में ‘सभी मनुष्य अपूर्ण है।’ होगा।
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49. निम्न में से कौन-सा एक p ⊃ ∼ ∼ q के समतुल्य है?
(a) q ⊃ ∼ p (b) p ∨ q
(c) p ⊃ q (d) ∼ p ⊃ ∼ q
Ans: (b) ∼ p ⊃ ∼ ∼ q ∼ p ⊃ q ∼ ∼p ∨ q p ∨ q ∴ ∼ p ⊃ ∼ ∼ q α p ∨ q
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50. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. एक्सपोर्टेशन i. (p q) α (q ⊃ ∼ p)
B. टॉटोलॉजी ii. (p q) α (p q)
C. ट्रांसपोजिशन iii. p α (p p)
D. मैटिरियल iv. [(p p)r] α [ p (q r)] इम्प्लिकेशन
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) iv ii iii i
(c) iv iii i ii
(d) iii iv i ii
Ans: (c)
A. एक्सपोर्टेशन− iv. [(p ⋅ p) ⊃ r] α [ p ⊃ (q ⊃ r)]
B. टॉटोलॉजी− iii. p α (p ⋅ p)
C. ट्रांसपोजिशन− i. (p ⊃ q) α (∼ q ⊃ ∼ p)
D. मैटिरियल इम्प्लिकेशन− ii. (p ⊃ q) α (∼ p ∨ q)
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51. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. हिन्दू i. पाँच मुख्य स्तम्भ
B. बौद्ध ii. सप्त भंगीनय
C. जैन iii. प्रतीत्यसमुत्पाद
D. इस्लाम iv. वर्णाश्रम
कूट :
A B C D
(a) iii iv i ii
(b) iv iii ii i
(c) ii i iv iii
(d) i ii iv iii
Ans: (b)
A. हिन्दू − iv. वर्णाश्रम
B. बौद्ध − iii. प्रतीत्यसमुत्पाद
C. जैन − ii. सप्त भंगीनय
D. इस्लाम − i. पाँच मुख्य स्तम्भ
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52. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. पवित्र प्रेत i. जोरस्ट्रियन धर्म
B. अहरम़जदा ii. ईसाई धर्म
C. तालमड iii. सिक्ख धर्म
D. गुरुबानी iv. यहूदी धर्म
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) ii i iv iii
(c) iii iv i ii
(d) iv iii ii i
Ans: (b)
A. पवित्र प्रेत − ii. ईसाई धर्म
B. अहरम़जदा − i. जोरस्ट्रियन धर्म
C. तालमड − iv. यहूदी धर्म
D. गुरुबानी − iii. सिक्ख धर्म
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53. हिन्दू धर्म में कर्म सिद्धांत से अभिप्राय है−
(a) भाग्यवाद
(b) नैतिक कारणता का सिद्धांत
(c) परिणाम की आशा करते हुए कर्म करना
(d) यज्ञ संपन्न करना
Ans: (b) हिन्दू धर्म में कर्म से अभिप्राय नैतिक कारणता का सिद्धान्त है। हिन्दु ‘धर्म’ में कर्म एवं पुनर्जन्म का सिद्धान्त एक प्रमुख नैतिक कारण है।
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54. ‘‘किसी विषय के सभी पहलू यथार्थ हैं‚ जबकि विषय मात्र तार्किक संरचना है’’ यह किसका मत है?
(a) फ्रेगे (b) रसेल
(c) विट्‌गेन्स्टीन (d) आस्टिन
Ans: (b) रसेल अपने तार्किक परमाणुवाद में जगत्‌ को वस्तुओं को एक तार्किक संरचना प्रस्तुत करते हैं। उनके अनुसार ‘किसी विषय के सभी पहलू यथार्थ हैं‚ जबकि विषय (Things) मात्र तार्किक संरचना है।
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55. फ्रेगे द्वारा ‘‘होता है’’ और ‘‘है’’ के बीच विभेद के लिए सैद्धांतिक कारण को निम्नांकित में किसे स्पष्ट करने के लिए स्वीकार किया गया है?
(a) तादात्म्य (b) अभावात्मक सत्ता
(c) परोक्ष कथन (d) तर्कवाक्यीय अभिवृत्ति
Ans: (b) फ्रेगे द्वारा ‘होता है’ और ‘है’ के बीच विभेद के लिए सैद्धान्तिक कारण को स्पष्ट करने के लिए ‘अभावात्मक सत्ता’ को स्वीकार किया गया है।
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56. अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए तथा दिए गए सही विकल्प का चयन करें−
अभिकथन (A) : सत्यता की परीक्षा उसके व्यावहारिक फल में है।
तर्क (R) : फलवाद किसी तर्कवाक्य की सत्यता अथवा असत्यता का निर्धारण उसके द्वारा हमारे प्रयोजनों को पूरा करने अथवा नहीं करने के आधार पर निर्धारित करता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) गलत है और (R) सही है।
(d) (A) और (R) दोनों गलत हैं।
Ans: (a) फलवाद (Pragmaticism) सत्यता की परीक्षा उसके व्यावहारिक फल के आधार पर करता है। पियर्स के अनुसार विश्वासों की सत्यता का मूल्यांकन उसके व्यावहारिक परिणामों के आधार पर करना चाहिए। अत: फलवाद (अथक्रियावाद) किसी तर्कवाक्य की सत्यता अथवा असत्यता का निर्धारण उसके द्वारा हमारे प्रयोजनों को पूरा करने अथवा नहीं करने के आधार पर करता है।
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57. एक ही बाह्य वस्तु के बारे में दो लोगों की अवधारणाओं के सम्बन्ध में निम्नांकित में कौन शर्त डोनाल्ड डेविडसन को स्वीकार्य नहीं है?
(a) स्वयं के बारे में विश्वास
(b) अन्य लोगों के बारे में विश्वास
(c) भाषा नियमों के बारे में विश्वास
(d) विश्वास कि जगत का अस्तित्व संयुक्त रूप से होता है।
Ans: (c) डोनाल्ड डेविड्‌सन भाषा नियमों के बारे में विश्वास स्वीकार्य है‚ एक ही बाह्य वस्तु के बारे में दो लोगों की अवधारणाओं के सम्बन्ध में।
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58. हर्म्युनिटिक के संदर्भ में निम्नांकित युग्मों पर विचार कर सही कूट का चयन करें−
i. फ्रेडरिक स्लायरमाखर −रोमांटिक हर्म्युनिटिक्स
ii. हाइडेगर −रेडिकल हर्म्युनिटिक्स
iii. डैरिडा −हर्म्युनिटिक फेनेमेनोलॉजी
कूट :
(a) केवल i सही सुमेलित है।
(b) केवल i और ii सही सुमेलित हैं।
(c) केवल iii सही सुमेलित है।
(d) केवल ii और iii सही सुमेलित हैं।
Ans: (*) सभी युग्म सुमेलित हैं।
i. फ्रेडरिक स्लायरमाखर − रोमांटिक हर्म्युनिटिक्स
ii. हाइडेगर − रेडिकल हर्म्युनिटिक्स
iii. डैरिडा − हर्म्युनिटिक फेनेमेनोलॉजी
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59. हुसर्ल की फेनोमेनोलॉजी में ‘नोएसिस’ का अर्थ है−
(a) विषयापेक्षी क्रिया की वास्तविक अन्तर्वस्तु
(b) विषयापेक्षी क्रिया की आदर्श अन्तर्वस्तु
(c) अविषयापेक्षी क्रिया की वास्तविक अन्तर्वस्तु
(d) अविषयापेक्षी क्रिया की आदर्श अन्तर्वस्तु
Ans: (a) हुसर्ल की फेनोमेनोलॉजी में ‘नाएसिस’ विषयापेक्षी क्रिया की वास्तविक अन्तर्वस्तु है। हुसर्ल की फेनोमेनोलॉजी की दृष्टि की सार्थकता इस बात में है कि उस दृष्टि से जो आद्य रूप में ग्राह्य होता है‚ वह तास्त्विक सत्‌ की झलक है। फेनोमेनोलॉजिकल अध्ययन के केन्द्र को चेतना से सत्ता में परिवर्तित कर देते हैं। उनके अनुसार तत्वदर्शन फेनोमेनोलाजी के रूप में ही संभव है।
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60. निम्नांकित में से कौन दार्शनिक फेनोमेनोलॉजिकल अध्ययन के केंद को चेतना से सत्ता में परिवर्तित करने के लिए उत्तरदायी है?
(a) हुसर्ल (b) हाइडेगर
(c) हेगेल (d) किर्केगार्ड
Ans: (b) हाइडेगर के अनुसार दार्शनिक चिन्तन का मूल लक्ष्य तत्वमीमांसीय है‚ तथा उनकी फेनोमेनोलॉजी की दृष्टि की सार्थकता इस बात में है कि उस दृष्टि से जो आद्य रूप में ग्राह्य होता है‚ वह तात्विक सत्‌ की झलक है। फेनोमेनोलॉकिल अध्ययन के केन्द्र को चेतना से सत्ता में परिवर्तित कर देते हैं। उनके अनुसार तत्वदर्शन फेनोमेनोलॉजी के रूप में ही संभव है।
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61. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. शुद्धाद्वैत i. निम्बार्क
B. द्वैताद्वैत ii. वल्लभ
C. अद्वैत iii. मध्व
D. द्वैत iv. शंकर
कूट :
A B C D
(a) ii i iv iii
(b) i ii iii iv
(c) iii iv i ii
(d) iv iii ii i
Ans: (a)
A. शुद्धाद्वैत − ii. वल्लभ
B. द्वैताद्वैत − i. निम्बार्क
C. अद्वैत − iv. शंकर
D. द्वैत − iii. मध्व
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62. अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए तथा दिए गए सही विकल्प का चयन करें−
अभिकथन (A) : ब्रह्म विश्व का अभिन्ननिमित्तोपादान कारण है।
तर्क (R) : ब्रह्म के अलावा कुछ भी नहीं है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) गलत है और (R) सही है।
(d) (A) और (R) दोनों गलत हैं।
Ans: (b) शंकर वेदान्त में ब्रह्म को जगत का अभिन्ननिमित्तउपादान कारण माना गया है और ब्रह्म ही सबकुछ है अर्थात ब्रह्म के अलावा कुछ नही है। ब्रह्म ही एक मात्र सत्‌ है अर्थात्‌ ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवेाब्रह्मैवनापर:।)
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63. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. सत्‌ i. माध्यमिक बौद्ध
B. असत्‌ ii. मध्व
C. सदसत्‌ iii. भर्तृप्रपंच
D. सदसदविलक्षण iv. शंकर
कूट :
A B C D
(a) i ii iv iii
(b) ii i iii iv
(c) iv iii i ii
(d) iii iv ii i
Ans: (b)
A. सत्‌ − ii. मध्व
B. असत्‌ − i. माध्यमिक बौद्ध
C. सदसत्‌ − iii. भर्तृप्रपंच
D. सदसदविलक्षण − iv. शंकर
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64. वेदांत में मोक्ष से अभिप्राय है−
(a) संपूर्ण शरीर से मुक्त होने की स्वतंत्रता (स्थूल शरीर)
(b) सभी आनुभाविक सीमाओं से स्वतंत्र
(c) स्वर्ग में स्थायी रूप से ठहरना
(d) यदा-कदा स्वर्ग की यात्रा
Ans: (b) सभी आनुभविक सीमाओं से स्वतंत्र होना वेदांत में मोक्ष है। अदैत वेदान्त में ‘ब्रह्मसाक्षात्कार’ को मोक्ष कहा गया है। जीवन्मुक्ति और विदेह मुक्ति मोक्ष का स्वरूप है।
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65. अद्वैत के अनुसार मिथ्या शब्द का अर्थ है−
(a) जगत व्यावहारिक रूप से सत्‌ नहीं है।
(b) जगत पूर्णत: असत्‌ है।
(c) जगत पारमार्थिक रूप से सत्‌ नहीं है।
(d) जगत को ब्रह्म समझ लेना।
Ans: (c) अद्वैत वेदान्त दर्शन में ‘मिथ्या’ शब्द का प्रयोग भ्रम‚ अविद्या‚ माया‚ अभ्यास आदि के पर्यायवाची रूप में। जगत पारमार्थिक रूप से सत्‌ नहीं है; यह मिथ्या शब्द का अर्थ है।
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66. निम्न में से एक छोड़कर शेष सभी वाक्य गलत हैं−
(a) शंकर द्वारा कर्मयोग को मुक्ति के प्राथमिक साधन के रूप में प्रतिपादित किया गया है।
(b) शंकर द्वारा कर्मयोग को विदेह मुक्ति के प्राथमिक साधन के रूप में प्रतिपादित किया गया है।
(c) शंकर द्वारा ज्ञानयोग को जीवन मुक्ति के प्राथमिक साधन के रूप में प्रतिपादित किया गया है।
(d) शंकर द्वारा ज्ञानयोग को विदेह मुक्ति के प्राथमिक साधन के रूप में प्रतिपादित किया गया है।
Ans: (c) शंकर अविद्या निवृत्ति को ही मोक्ष मानते हैं। अविद्या निवृत्ति‚ ब्रह्म के स्वरूप के साक्षात्कार से होगा। मोक्ष के साधन के रूप में शंकराचार्य ‘ज्ञानमार्ग’ को प्राथमिक महत्व देते हैं। उनके अनुसार ज्ञान से ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।
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67. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I (लेखक) सूची-II (विषय)
A. जीव और ब्रह्म का तादात्म्य i. मध्व
B. जीव और ब्रह्म का सादृश्य ii. शंकर
C. ब्रह्म के विशेषण के रूप में जीव iii. निम्बार्क
D. ब्रह्म के साथ भेदाभेद सम्बन्ध iv. रामानुज के रूप में जीव
कूट :
A B C D
(a) iii iv ii i
(b) i i iv iii
(c) iv iii i ii
(d) iii ii i iv
Ans: (b)
A. शंकर जीव और ब्रह्म का तादात्म्य मानते हैं।
B. मध्व जीव और ब्रह्म का सादृश्य
C. रामानुज ब्रह्म के विशेषण के रूप में जीव
D. निम्बार्क ब्रह्म के साथ भेदाभेद सम्बन्ध के रूप में जीव को मानते
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68. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I (लेखक) सूची-II (विषय)
A. महादेव देसाई i. गांधी की शव परीक्षा
B. गांधी ii. द अनिहिलेशन ऑफ कास्ट एण्ड अ रिप्लाई
C. यशपाल iii. वोमेन एण्ड सोशल जस्टिस
D. अम्बेडकर टू iv. द स्टोरी ऑफ बारदोली महात्मा गांधी
कूट :
A B C D
(a) iv iii i ii
(b) i ii iv iii
(c) ii iv i iii
(d) iv iii ii i
Ans: (a)
A. महादेव देसाई − iv. द स्टोरी ऑफ बारदोली
B. गांधी − iii. वोमेन एण्ड सोशल जस्टिस
C. यशपाल − i. गांधी की शव परीक्षा
D. अम्बेडकर − ii. द अनिहिलेशन ऑफ कास्ट एण्ड अ रिप्लाई टू महात्मा गांधी
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69. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I (लेखक) सूची-II (विषय)
A. गांधी i. माया सामान्यत: तथ्यों का कथन है‚ जैसे कि वे हैं।
B. टैगोर ii. आरोहण अवरोहण की पूर्ववर्ती प्रक्रिया से प्रतिबद्ध है।
C. श्री अरविन्द iii. जैसे ही हम नैतिक आधार खो देते हैं हम धार्मिक नहीं होते हैं।
D. विवेकानन्द iv. वह (मनुष्य) पृथ्वीपुत्र तो है‚ किन्तु है स्वर्ग का उत्तराधिकारी
कूट :
A B C D
(a) i iv ii iii
(b) ii iv i iii
(c) iii iv ii i
(d) iv i iii ii
Ans: (c) गांधी‚ जैसे हम नैतिक आधार खो देते हैं हम धार्मिक नहीं होते हैं। टैगोर‚ वह पृथ्वीपुत्र तो है‚ किन्तु है स्वर्ग का उत्तराधिकारी। श्री अरविन्द‚ आरोहण अवरोहण की पूर्ववर्ती प्रक्रिया से प्रतिबद्ध है। विवेकानन्द‚ जैसे कि वे हैं− माया सामान्यत: तथ्यों का कथन है।
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70. निम्नलिखित में से गांधी के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) अहिंसा‚ सत्य की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।
(b) मनुष्य सम्पर्ण सत्य को जान सकता है।
(c) साध्य एवं साधन मूल्यों की एक शृंखला है।
(d) सत्य एवं अहिंसा अविभाज्य हैं।
Ans: (b) गांधी के अनुसार मनुष्य सम्पूर्ण सत्य को नहीं जान सकता है। गांधी के अनुसार हम ‘सत्य’ का पूर्ण दर्शन तो करते नहीं कहीं-कहीं हमें ‘सत्य’ की क्षणिक झांकी मिलती रहती है। इसी कारण हम ‘सत्य’ की पूर्ण शक्ति से अपरिचित रह जाते हैं। किन्तु अपनी पूर्णता में ‘सत्य’ सत्‌ को पूर्णतया प्रकाशित कर देता है।
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71. अस्पृश्यता विरोधी उपवास गांधी ने इनके विरुद्ध किया था−
(a) ब्रिटिश सरकार (b) सवर्ण हिन्दू
(c) ईसाई (d) सनातनी हिन्दू
Ans: (b) गांधी जी ने अस्पृश्यता विरोधी उपवास सवर्ण हिन्दुओं के विरुद्ध किया था। यरवदा जेल में जब गांधी जी को पता चला कि ब्रिटिश सरकार द्वारा दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र बनाया जा रहा है‚ तो यह उपवास 20 सितम्बर 1932 को शुरू किया गया। यहीं से ‘हरिजन’ शब्द दलितों के लिए प्रयुक्त हुए।
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72. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें एवं सही कूट का चयन करें− सूची-I (लेखक) सूची-II (ग्रन्थ)
A. गांधी i. गांधी जी इन इंडियन रिलेज्‌स
B. जे.बी.कृपलानी ii. इथिकल रिलिजन
C. महादेव देसाई iii. द फिलासफी ऑफ महात्मा गांधी
D. दत्ता डी.एम. iv. द गांधियन वे
कूट :
A B C D
(a) ii iv i iii
(b) i ii iv iii
(c) iii ii i iv
(d) iv i iii ii
Ans: (a)
A. गांधी − ii. इथिकल रिलिजन
B. जे.बी.कृपलानी − iv. द गांधियन वे
C. महादेव देसाई − i. गांधी जी इन इंडियन रिलेज्‌स
D. दत्ता डी.एम. − iii. द फिलासफी ऑफ महात्मा गांधी
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73. निम्न में से किसके विचार में प्राकृतिक अधिकार एक प्रकार का आत्म संरक्षण है?
(a) हॉब्स (b) पेन
(c) कांट (d) एक्विन्स
Ans: (a) हॉब्स के विचार में प्राकृतिक अधिकार एक प्रकार क आत्म−संरक्षण है। हॉब्स ‘सामाजिक समझौते का सिद्धान्त का प्रतिपादन’ करता है।
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74. गैडमर के अनुसार हर्म्युनिटिक समुदाय से तात्पर्य है−
(a) ग्रंथ और अध्येता का सहनिर्धारण
(b) ग्रंथ और लेखक का सहनिर्धारण
(c) ग्रंथ और संदर्भ का सहनिर्धारण
(d) लेखक और अध्येता का सहनिर्धारण
Ans: (a) गैडमर हर्म्युनिटिक के बहुत बड़े जानकार थे। उनके अनुसार हर्म्युनिटि समुदाय से तात्पर्य‚ ग्रन्थ और अश्र्येता का सहनिर्धारण है। यह 20वीं शताब्दी के महाद्वीपीय दार्शनिक के रूप में विख्यात है।
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75. स्लायर माखैर के हर्म्युनिटिक्स के सिद्धांत के आलोक में निम्नांकित अभिकथनों पर विचार करें तथा सही
कूट का चयन करें−
i. व्याख्या की समस्या बोध की समस्या है।
ii. हर्म्युनिटिक्स त्रुटिपूर्ण बोध के निवारण की कला है।
iii. हर्म्युनिटिक्स का क्षेत्र केवल पवित्र ग्रंथों का ही नहीं अपितु सभी मानवीय ग्रंथों एवं उनके संप्रेक्षण की विधि है।
(a) केवल i सही है।
(b) केवल i और ii सही हैं।
(c) केवल i ओर iii सही हैं।
(d) सभी i, ii और iii सही हैं।
Ans: (d) हर्म्युनिटिक्स भास्य की प्रविधि और सिद्धान्त है। श्लायर माखैर व्याकरण भाष्य और मनोवैज्ञानिक भाष्य में अन्तर करते हैं। श्लायर के विचारों में−
i. व्याख्या की समस्या बोध की समस्या है।
ii. हर्म्युनिटिक्स त्रुटिपूर्ण बोध के निवारण की कला है।
iii. हर्म्युनिटिक्स का क्षेत्र केवल पवित्र ग्रंथों का ही नहीं अपितु सभी मानवीय ग्रंथों एवं उनके संप्रेक्षण की विधि है।
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