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UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2012

नोट: इस प्रश्नपत्र में पचहत्तर (75) बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के दो (2) अंक हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
1. व्यावहारिक सत्ता खण्डन करती है
(a) परमार्थिका सत्ता
(b) प्रतिभाषिका सत्ता
(c) परमार्थिका सत्ता एवं प्रतिभाषिका सत्ता
(d) न परमार्थिका सत्ता और न ही प्रतिभाषिका सत्ता
Ans. (b) : आचार्य शंकर द्वारा तीन कोटियों की सत्ता का वर्णन किया गया है। प्रथम प्रातिभासिक सत्ता‚ दूसरी व्यावहारिक और तीसरी पारमार्थिक सत्ता कहलाती है। यद्यपि संसार एक रूप नहीं है लेकिन संसार समष्टिरूप में सत्‌-असत्‌ अनिर्वचनीय है।
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2. शरीर और आत्मा के बीच सम्बन्ध है
(a) संयोग (b) समवय
(c) स्वरूप (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (a) : कार्य समवाय संबंध में उपस्थित रहता है। समवाय कारण को उपादान कारण भी कहा जाता है। जैसे- तंतुओं के साथ पट का समवाय कारण है। संयोग संबंध दो द्रव्यों के मिलने से होता है। जैसे-पक्षी का पहाड़ पर बैठना संयोग संबंध है स्वरूप संबंध द्रव्य उस ची़ज का पूर्ण रहता है। जैसे-मीठा में कड़वापन का अभाव ही स्वरूप संबंध है।
नोट- आयोग ने इस प्रश्न का सबको समान लाभ दिया था।
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3. किसी वध्Eा के अंश का रंग का असमवयी कारण है
(a) धागे (b) धागों का रंग
(c) धागों का संयोजन (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (b) : असमवायी कारण वह गुण का कर्म है जो समवायी कारण में समवाय संबंध में रहते हुए कार्योत्पत्ति में सहायक होने से कारण कहा जाता है।
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4. वैशेषिकाओं के अनुसार द्रव्यत्व किसका उदाहरण है?
(a) केवल सामान्य (b) केवल विशेष
(c) सामान्य विशेष (d) जातिबोधक
Ans. (c) : वैशेषिक के अनुसार सामान्य नित्य है‚ एक है‚ वस्तु में रहता है। सामान्य तीन प्रकार के होते हैं। पर सामान्य जैसे सत्तत्व। अपर सामान्य जैसे घटत्व है। परापर सामान्य जैसेद्रव्यत्व।
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5. दो अणुओं के समागम का निर्मित कारण है
(a) ईश्वर (b) ईश्वर-इच्छा
(c) अणुओं की प्रकृति (d) युग्मों की सृजना
Ans. (b) वैशेषिक एक परमाणुवादी दार्शनिक है जो जगत का निर्माण परमाणुओं से मानते हैं लेकिन परमाणु नित्य होते हुए भी चेतन नहीं है‚ परमाणु जड़-तत्व है। अत: ईश्वर के द्वारा ही दो परमाणुओं का संयोग सम्भव है।
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6. उस सिद्धान्त को जो यह मानता है कि प्रभाव कारण में पहले से ही निहित रहता है‚ क्या कहते हैं?
(a) सत्कार्यवाद (b) असत्कार्यवाद
(c) परिणामवाद (d) प्रतीत्यसमुत्पादवाद
Ans. (c) : कारण में कार्य पहले से सत्‌ रहता है यह सत्‌कार्यवादियों का मानना है। सत्‌कार्यवाद का समर्थक सांख्य‚ योग‚ वेदान्ती है। वही असत्‌कार्यवाद के समर्थक न्याय -वैशेषिक है। प्रतीत्यसमुत्पादवाद बौद्ध दर्शन का सिद्धान्त है।
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7. किसी वस्तु में किसी वस्तु का जो उससे भिन्न हो‚ का आभास‚ शंकर के अनुसार है
(a) अविधा (b) अघस्य
(c) माया (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (b) : जगत एवं ब्रह्म के बीच संबंध स्थापित करने के लिए शंकराचार्य ने मायावाद का प्रतिपादन किया। माया न सत्‌ है‚ न असत्‌ है‚ अनादि और अनिर्वचनीय है। माया अनन्त नहीं है क्योंकि विद्या (ज्ञान) से बाधित है।
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8. स्व: के प्रति वैदिक सिद्धान्त की ओर बुद्ध का दृष्टिकोण है कि वह
(a) कट्टर (b) संशयशील
(c) उदासीन (d) अनीश्वरवादा
Ans. (a) : बुद्ध ईश्वर को नहीं मानते इसलिए वे अनीश्वरवादी है। वे वेद का खण्डन करते हैं इसलए बुद्ध नास्तिक है।
नोट- आयोग ने इस प्रश्न का सबको समान लाभ दिया था।
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9. ‘अपीअरेंस एण्ड रियल्टी’ का लेखक कौन है?
(a) ब्रेडले (b) हेगल
(c) देकार्ते (d) ह्यूम
Ans. (a) : डिसकोर्स ऑफ मेथर्ड-यह देकार्त की पुस्तक है। ए ट्रेटराइज ऑफ ह्यूमन नेचर- ह्ययूम की पुस्तक है। हेगल की पुस्तक ‘स्पिरिट ऑफ माइंड है। अपीअरेंस एण्ड रियल्टी -ब्रैडले की पुस्तक है‚ जो 1893 में प्रकाशित हुई थी।
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10. न्यायिकाओं के अनुसार हमें ‘गोत्त्व’ का ज्ञान किसके द्वारा होता है?
(a) अनुमान (b) तुलना
(c) इंद्रिय ज्ञान (d) सामान्य लक्ष्ण प्रत्यक्ष
Ans. (c) : प्रशस्तपाद अपनी पुस्तक पदार्थ धर्म संग्रह में वैशेषिक के सात पदार्थों का वर्णन किया है। द्रव्य‚ गुण‚ कर्म‚ समवाय‚ सामान्य‚ विशेष और अभाव। न्याय-
वैशेषिक सामान्य या जाति नामक स्वतंत्र पदार्थ की सत्ता स्वीकार करके मनुष्य में अनुव्यत्व तथा सभी गायों में ‘गोत्व’ तत्व का विश्लेषण करता है।
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11. वे विचारधाराएँ जो दो प्रमाणों को मानती है
(a) चार्वाक और बैद्ध (b) बौद्ध और वैशेषिक
(c) सांख्य और वैशेषिक (d) जैन और योग
Ans.(b ) : चार्वाक केवल प्रत्यक्ष प्रमाण को स्वीकार करता है। न्याय को चार प्रमाण स्वीकार है। सांख्य योग तीन प्रमाण स्वीकार करता है। वैशेषिक तथा बौद्ध दर्शन दो प्रमाण प्रत्यक्ष एवं अनुमान को स्वीकार करता है। जैन- प्रमाण स्वीकार करता है।
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12. निम्नलिखित में से कौन सा समस्त ज्ञान को प्रमा मानता है?
(a) कुमारिल (b) वसुबन्धु
(c) कणाद (d) प्रभाकर
Ans.( d) : भारतीय दर्शन में प्रमा को वास्तविक ज्ञान कहा गया है। न्याय-वैशेषिक के अनुसार समस्त यथार्थ ज्ञान प्रमा है। मीमांसा के अनुसार समस्त अनुभूति ज्ञान प्रमा है।
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13. निम्नलिखित में से कौन सा ‘शब्दग्रह’ का माध्यम नहीं है?
(a) आपत वाक्य (b) तर्क
(c) वृद्ध व्यवहार (d) व्याकरण
Ans. (b) : शब्दग्रह -शब्द के मूल अर्थ (अविद्या) को जानने का साधन है जो आठ है। (1) व्याकरण (2) उपमान (3) कोश
(4) आप्तवाक्य (5) व्यवहार (6) वाक्यशेष (7) विवृत्ति (विवरण)
(8) सिद्धपद (सान्निध्य)।
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14. अन्यथाख्यातिवाद का समर्थन करते हैं
(a) सांख्य और योग (b) मीमांसा और बौद्ध
(c) न्याय और वैशेषिका (d) रामानुज और कुमारिल
Ans. (c) : भारतीय दर्शन में भ्रम के सिद्धान्त को ख्यातिवाद कहते हैं। सत्‌ख्यातिवाद बौद्ध के विज्ञानवादियों का है असत्‌ख्यातिवाद बौद्ध के विज्ञानवादियों का है आत्मख्यातिवाद नागार्जुन का है अख्यातिवाद प्रभाकर का है विपरीतख्यातिवाद कुमारिल भट्ट अन्यथाख्यातिवाद न्याय वैशेषिक सदसत्‌ख्यातिवाद सांख्य योग अनिर्वचनीयख्यातिवाद शंकरचार्य (अद्वैतवेदान्त)
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15. प्रमाणों की स्वीकृत संख्या के अनुसार सही क्रम वाले समूह का चयन कीजिए:
(a) चार्वाक‚ बौद्ध‚ वैशेषिक
(b) बौद्ध‚ वैशेषिका‚ सांख्य
(c) न्याय‚ वैशेषिका‚ अद्वैत वेदान्त
(d) बौद्ध‚ न्याय‚ वैशेषिक
Ans.(a): चार्वाक – प्रत्यक्ष प्रमाण। सांख्य‚योग‚ जैन – प्रत्यक्ष‚ अनुमान शब्द। न्याय – प्रत्यक्ष अनुमान‚ उपमान‚ शब्द बौद्ध और वैशेषिक – प्रत्यक्ष‚ अनमान। वेदान्त/मीमांसा – प्रत्यक्ष‚ अनुमान‚ उपमान‚ शब्द‚ अर्थापत्ति‚ अनुलब्धि। प्रभाकर के पाँच प्रमाण स्वीकार किया है वहीं कुमारिलभट्ट छह प्रमाण स्वीकार किया है।
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16. भ्रम सिद्धान्त जिसे भारतीय दर्शन में अख्यातिवाद कहा जाता है‚ इस सिद्धान्त को प्रस्तुत किसने किया?
(a) अद्वैत वेदान्त (b) मीमांसा
(c) सांख्य (d) न्याय
Ans. (b) : अख्यातिवाद प्रभाकर है वहीं विपरीतख्यातिवाद कुमारिल भट्ट का है।
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17. विषयनिष्ठ एवं वस्तुनिष्ठ ज्ञान की अनन्यता जो बाह्य वस्तु का रूप धारण करती है उसे कहते हैं:
(a) प्रत्यक्ष ज्ञान (b) अनुमान
(c) शास्त्रीय प्रमाण (d) साम्यानुमान
Ans. (a) : ज्ञानेन्द्रियों एवं अर्थ के सन्निकर्ष से उत्पन्न ज्ञान प्रत्यक्ष ज्ञान है। प्रत्यक्ष प्रमा तथा प्रमाण दोनों है। ज्ञान आत्मा में उत्पन्न होता है। अत: आत्मा भी प्रत्यक्ष ज्ञान के लिए आवश्यक है। इस प्रकार प्रत्यक्ष ज्ञान के लिए इन्द्रिय‚ विषय और सन्निकर्ष की आवश्यकता होती है।
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18. समकालीन दार्शनिक पद्धति का झुकाव है
(a) विश्लेषणात्मक (b) संशयात्मक
(c) संश्लेषण (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (a) : समकालीन पाश्चात्य दार्शनिक मूर‚ रसेल तथा विटगेंस्टाइन एक भाषा विश्लेषणवादी दार्शनिक है। ह्यूम एक संशयवादी दार्शनिक है वह अनुभववादी भी है। कांट को अज्ञेयवादी कहा जाता है।
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19. जैन प्रमानस सिद्धान्त का अत्यावश्यक तत्त्व है
(a) प्रत्यक्ष ज्ञान (b) नय
(c) धार्मिक ग्रंथ (शास्त्र) (d) अनुमान
Ans. (b) : जैन दर्शन बहुलवादी वस्तुवादी है। सप्तभंगीनय सिद्धान्त जैन दर्शन का है। आंशिक एक साक्षेप ज्ञान को नय कहते हैं। नय एक तरह का निर्णय/परामर्श भी है। तीन प्रकार का परामर्श या निर्णय हो सकते हैं। जिसे -दुनीर्ति‚ नय‚ प्रमाण कहते हैं। किसी वस्तु के सन्दर्भ में यह कहना कि यह घट है‚ इसे नय कहते हैं। यहाँ वस्तु के एक धर्म को बताया गया है परन्तु अन्य धर्म का निषेध नहीं किया गया है। वस्तु के अनंत धर्मों में से एक धर्म का ज्ञान और उसकी अभिव्यक्ति को ही नय कहते हैं।
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20. पतंजलि योग का मूलभूत उद्देश्य है
(a) ईश्वर से मिलाप
(b) स्व: से मिलाप
(c) मन के आशोधन का समापन
(d) उत्कर्षों को प्राप्त करना
Ans. (c) : पतंजलि का मूल उद्देश्य चित्तवित्तओं का निरोध करना है। ‘चित्तवित्त निरोध योग:’ योग में चित्त की वित्तिया समाप्त हो जाती है।
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21. गौतम के अनुसार अनुमान के पूर्ववत और शेषवत दो प्रकार हैं‚ तीसरा प्रकार क्या होगा?
(a) अन्वय (b) व्यतिरेक
(c) सामान्योदृष्ट (d) उपरोक्त में से कोई भी नहीं
Ans. (c) : न्यायदर्शन के अनुसार‚ अनुमान दो प्रकार के होते हैं। स्वार्थानुमान तथा परार्थानुमान। एक अन्य दृष्टि से अनुमान तीन प्रकार का होता है – (1) पूर्ववत्‌ अनुमान (2) शेषवत्‌ अनुमान
(3) सामान्योतोदृष्ट अनुमान। एक अन्य दृष्टि से अनुमान तीन प्रकार के हैं- (1) केवलीन्वयी (2) केवल-व्यतिरेक अनुमान (3) अन्वयव्यतिरेकी अनुमान।
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22. व्याप्ति का ज्ञान किस के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है?
(a) तर्क (b) भूयो दर्शन
(c) सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष (d) उपरोक्त सभी
Ans. (d) : व्याप्ति ही अनुमान का प्राण है। व्याप्ति का ज्ञान अन्वयविधि‚ व्यतिरेक विधि‚ अन्वय एवं व्यतिरेक विधि‚ व्यभिचारग्रह‚ उपाधिनिरास‚ तर्क और सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष से होता है।
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23. यदि हम प्रत्यक्ष को ज्ञान के रूप में परिभाषित करते हैं तो हम किस प्रकार की भूल कर रहे होंगे?
(a) विरुद्ध (b) शंकर्य
(c) अतिव्याप्ति (d) अव्यप्ति
Ans. (c) : जब किसी परिभाषा के उद्देश्य के क्षेत्र से विधेय का क्षेत्र बढ़ा दिया जाता है तब उसमें अतिव्याप्त या अतिवृहत परिभाषा का दोष होता है। जैसे – मनुष्य पशु है। विधेय पद पशु है पशु में कुत्ता‚ बिल्ली‚ गाय‚ हाथी आदि आ जायेंगे।
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24. बौद्ध ज्ञान-मीमांसा में ‘कल्पना’ का अर्थ है
(a) वास्तविक संरचना
(b) काल्पनिक संरचना
(c) वास्तविक और काल्पनिक संरचना दोनों
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (b) : ⇒ द्विगनाग को बौद्ध का प्रमाण या तर्कशास्त्र का जनक माना जाता है उसके अनुसार ज्ञान सविकल्प न होकर केवल निर्विकल्प होता है। धर्मकीर्ति ने ज्ञान को अभ्रात कहा है।
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25. इन्द्रिय-वस्तु के सम्पर्क द्वारा ज्ञानोदय कहलाता है
(a) अनुभव (b) अनुमान
(c) प्रत्यक्ष ज्ञान (d) प्रमाण
Ans. (c) :⇒ इन्द्रिय वस्तु के सम्पर्क से प्राप्त ज्ञान को प्रत्यक्ष ज्ञान कहा जाता है। प्रत्यक्ष स्वयं एक प्रमाण है इसे किसी अन्य प्रभाव की जरुरत नहीं होती है। अनुमान भी एक प्रमाण है‚ ज्ञान प्राप्ति का साधन है लेकिन प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष का ज्ञान ही अनुमान है। ‘प्रमाप्रतीतिइति प्रमाणाम्‌’ प्रमा की प्राप्ति प्रमाण से होती है।
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26. किसान द्वारा खेत जोतना किसका उदाहरण है?
(a) निष्काम कर्म (b) स्वधर्म
(c) साधारण धर्म (d) ब्रह्म विहार
Ans. (b) : निष्काम कर्म तथा स्वधर्म का ज्ञान गीता में मिलता है। गीता के अनुसार सभी को अपने स्वधर्म का पालन करना चाहिए। अर्थात्‌ क्षत्रियों की रक्षा करना ही क्षत्रिय का स्वधर्म है। उसी प्रकार किसान का खेत जोतना किसान का स्वधर्म है। ब्रह्म विहार का सिद्धान्त बौद्ध दर्शन का है।
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27. देवऋण से कैसे उऋण हुआ जा सकता है?
(a) ब्रह्मचर्य (b) सन्तानोत्पत्ति
(c) यज्ञ-क्रिया (d) ईश्वर प्राणिधान
Ans. (c) : वेद में तीन ऋण की व्याख्या मिलती है। ऋषिऋण –
ब्रह्मचर्य का पालन करके ऋषिऋण से उऋण हुआ जा सकता है। पितृ ऋण -ग्रहस्थ आश्रम में पुत्र उत्पत्ति से इस ऋण से उऋण होते हैं। देवऋण -यज्ञ आदि क्रिया करके उऋण होते हैं।
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28. निम्नलिखित में कौन सा ऋत नहीं है?
(a) सत्य (b) अनृत
(c) धर्म (d) यज्ञ
Ans. (d) : ऋत एक नैतिक व्यवस्था है। ऋत का संरक्षण वरुण करता है। ऋत सत्य है ऋत धर्म है। इसीलिए ब्रह्माण्ड में सभी अपने धर्म का पालन करते हैं जो ऋत का ही आदेश है। इसे ब्रह्माण्डीय व्यवस्था भी कहते हैं।
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29. निम्नलिखित में कौन पुरुषार्थ नहीं है?
(a) अर्थ (b) ईश्वर
(c) काम (d) धर्म
Ans. (b) : पुरुषार्थ चार है। धर्म‚ अर्थ‚ काम‚ मोक्ष। अत: ईश्वर पुरुषार्थ नहीं है।
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30. सूची-I एवं सूची-II पर विचार कीजए एवं सही सुमेलित कूट का चयन करें :
सूची-I सूची-II
(A) वेद i. ऋत
(B) गीता ii. लोक संग्रह
(C) जैन मत iii. त्रिरत्न
(D) बौद्ध मत iv. पंचशील
कूट :
A B C D
(A) (i) (ii) (iii) (iv)
(B) (i) (iii) (iv) (ii)
(C) (iii) (ii) (i) (iv)
(D) (i) (ii) (iv) (iii)
Ans. (a) :
सूची – I सूची- I वेद ऋत गीता लोक संग्रह जैन मत त्रिरत्न बौद्ध मत पंचशील
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31. मानव अधिकार उस समाज में अपेक्षित होते हैं जिसमें निम्नलिखित विषमताएँ मौजूद है:
(a) जातिवाद (b) धर्म
(c) संस्कृति (d) सभी तीन
Ans. (d) : आधुनिक समय में मानवतावाद को बौद्धिकता धर्मनिरपेक्षतावाद‚ वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित किया गया है। इस प्रकार मानवतावाद मानवता को पोषण करने का सिद्धान्त है जिसमें मानवीय मूल्यों की समाज में लाया जा सके तथा संरक्षित किया जा सके।
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32. कॉन्ट द्वारा धार्मिक और सामाजिक दर्शन के बारे में निम्नलिखित में विचार किया गया है:
(a) क्रिटिक ऑफ जजमेंट
(b) क्रिटिक ऑफ प्योर री़जन
(c) रिलीजन विदइन द लिमिट्‌स ऑफ री़जन
(d) क्रिटिक ऑफ प्रैक्टिकल री़जन
Ans. (c) : ये सभी कांट की पुस्तक है। क्रिटिक ऑफ प्योर री़जन में ज्ञानमीमांसीय चर्चा है। क्रिटिक ऑफ प्रैक्टिकल रीजन में नीति या आचार्यमीमांसा की चर्चा है। क्रिटिक ऑफ जजमेंट सौन्दर्यशास्त्र से संबंधित है।
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33. किस सिद्धान्त के अन्तर्गत समाज में अधिकतम व्यक्तियों के हित के बारे में उल्लेख किया गया है?
(a) पूर्णतावाद (b) उपयोगितावाद
(c) बुद्धिवाद (d) अन्त:प्रज्ञावाद
Ans. (b) : वेंथम‚ मिलु‚ सिजविक एक उपयोगितावादी सुखवादी दार्शनिक है। वेंथम के अनुसार अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम सुख वाला कर्म ही नैतिक रूप से शुभ है। ब्रैडले‚ ग्रीन‚ हिगेल आत्मपूर्णतावादी दार्शनिक है।
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34. कर्त्तव्य के लिए कर्त्तव्य‚ निम्नलिखित में से किसमें शामिल है?
(a) निरपेक्ष द्वन्द्ववाद (b) निरपेक्ष आदेश
(c) निरपेक्ष तर्क (d) निरपेक्ष संवाद
Ans. (b) : ⇒ कांट सिद्धान्त कर्त्तव्य के लिए कर्त्तव्य करना ही निरपेक्ष आदेश है। कर्म का कोई वाह्य या आन्तरिक परिणाम नहीं होता बल्कि कर्म का अपना स्वयं का मूल्य होता है। काण्ट के अनुसार शुभ इच्छा ही नैतिक रूप से किया गया कर्म है। इसका वर्णन कांट अपनी पुस्तक ‘क्रिटिक ऑफ प्रेक्टिकल रीजन’ में करता है।
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35. किस नैतिक सिद्धान्त के अनुसार बौद्धिक नियम सार्वभौमिक नियम हैं जो सभी के लिए है और सभी को स्वीकार्य है।
(a) मिल (b) सिजविक
(c) कॉन्ट (d) बैन्थम
Ans. (c) : कांट अपनी पुस्तक ‘‘ग्राउंडवर्क ऑफ दी मेटाफिजिक ऑफ मारल्स’’ में पाँच सूत्रों को व्यक्त करता है।
1. सार्वभौम आदेश का सूत्र (2) प्रकृति आदेश का सूत्र
(3) स्वयं साध्य का सूत्र (4) स्वतंत्रता का सूत्र (5) साध्यों का राज्य का सूत्र।
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36. नैतिकता अपने से आगे बढ़कर अच्छाई के उच्चतर रूप को ग्रहण करती है और उसकी यह यात्रा वहाँ सम्पन्न होती है जिसे धर्म कहा जा सकता है‚ यह कथन किसका है?
(a) माक्टैग्गर्ड (b) श्लेमरमेकर
(c) मैथ्यू अर्नाल्ड (d) एफ.एच. ब्रेडले
Ans. (d) : ब्रैडले अपनी पुस्तक ‘एथिकल स्टडीज’ में मानव जीवन के लिए मूल नैतिक आदर्श की व्याख्या की है। ब्रैडले का कथन है-‘आत्म त्याग से आत्मसिद्धि’। ‘मेरा स्थान और उसके कर्त्तव्य’।
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37. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सुमेलित है?
(a) सभी समाजों में समान : सांस्कृतिक नैतिक सिद्धान्त नहीं होते निरपेक्षतावाद
(b) एक संस्कृति में दूसरी : सांस्कृतिक संस्कृतिक से रीति- सापेक्षवाद रिवाजों‚ वर्जनाओं इत्यादि में भारी अन्तर हेाते हैं।
(c) स्वतंत्रता निश्चयवाद : दृढ नियतत्त्ववाद के अनुरूप।
(d) यहाँ किसी भी प्रकार : क्षीण की कारणता नहीं है। नियतत्त्ववाद
Ans. (b) : ⇒ सांस्कृतिक सापेक्षतावाद का जनक जे0एल0 मैकी को माना जाता है।
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38. ईमानदारी अच्छी नीति है। यह कथन तर्क की दृष्टि से निम्नलिखित में से किस पर लागू नहीं होता?
(a) या तो ईमानदारी अच्छी नीति नहीं है अथवा बेईमान व्यक्तियों को सजा मिलेगी।
(b) यह असत्य है कि ईमानदारी अच्छी नीति है परन्तु बेईमान व्यक्ति सजा नहीं पाते।
(c) यदि ईमानदारी अच्छी नीति है तो बेईमान व्यक्ति सजा पायेंगे।
(d) ईमानदारी अच्छी नीति है यदि‚ केवल यदि बेईमान व्यक्तियों को सजा मिले।
Ans. (b) : ⇒ ईमानदारी अच्छी नीति है। इस कथन पर दो दृष्टिकोण से विचार किया जा सकता है। पहला संज्ञानवाद के दृष्टि से यह सत्य-असत्य है‚ इसका वर्णन भी किया जा सकता है। दूसरी दृष्टि असंज्ञानवाद की दृष्टि से इसे सत्य-असत्य नहीं कहा जाता क्योंकि यह मनोभाव की अभिव्यक्ति है।
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39. निम्नलिखित में से कौन सा नैतिकता का परम सिद्धान्त है?
(a) ईश्वर (b) समाज
(c) सद्‌व्यवहार (d) सामन्जस्यता
Ans. (a) : नैतिकता के परम सिद्धान्त के रूप में कांट तीन चीजे मानता है। इसे नैतिकता की पूर्वमान्यताएं भी कहते हैं। (1) स्वतंत्रता
(2) आत्मा की अमरमा (3) ईश्वर का अस्तित्व।
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40. दण्ड का कौन सा सिद्धान्त फाँसी की सजा का अनुमोदन करता है?
(a) सुधारात्मक
(b) प्रतिशोधात्मक
(c) सुधारात्मक और प्रतिशोधात्मक दोनों
(d) निषेधात्मक
Ans. (b) : ⇒ दण्ड का सुधारात्मक सिद्धान्त को छोड़कर शेष दोनों सिद्धान्त प्रतिरोधात्मक तथा प्रतिशोधात्मक मृत्यु दण्ड की वकालत करते हैं।
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41. यदि ए (A) प्रतिज्ञप्ति सत्य है तो ई (E), आई (I) और ओ (O) प्रतिज्ञप्तियाँ हैं
(a) असत्य‚ सत्य और असत्य
(b) असत्य‚ असत्य और असत्य
(c) सत्य‚ असत्य और असत्य
(d) सत्य‚ सत्य और असत्य
Ans. (a) : ⇒परम्परा विरोध वर्ग में यदि (A) तर्कवाक्य सत्य है तो E तथा ओ तर्कवाक्य असत्य होगा तथा आई तर्क वाक्य सत्य होगा। यदि E सत्य है तो -ओ सत्य होगा तथा A एवं I असत्य होगा।
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42. न्यायवाक्य की भावदशा निर्भर करती है
(a) आधारिका की गुणवत्ता
(b) आधारिका की गिनती
(c) आधारिकाओं की गुणवत्ता और गिनती दोनों
(d) आधारिकाओं की गुणवत्ता और गिनती तथा निष्कर्ष
Ans. (d) : निरपेक्ष न्यायवाक्य में तीन पद तथा दो या दो अधिक तर्कवाक्य होते हैं। न्यायवाक्य का भावदशा आधार वाक्यों की गुणवत्ता‚ गिनती निष्कर्ष‚ परिणाम पर निर्भर करता है।
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43. न्यायवाक्य के प्रथम आकृति की व्यवस्था है
(a) S P S M P M −−−(b) S P S M M P −−−(c) S P M S P M −−−(d) S P M S M P −−−Ans. (b):
प्रथम आकृति sp s m m p ∴द्वितीय आकृति s p s m p m ∴तृतीय आकृति s p m s m p ∴चतुर्थ आकृति sp m s p m ∴44. युक्तियों की वैधता अथवा अवैधता के निर्धारण किसके विषय क्षेत्र में आता है?
(a) आगमन तर्क (b) निगमन तर्क
(c) प्रतीक तर्क (d) पारम्परिक तर्क
Ans. (b) : तर्कवाक्य सत्य अथवा असत्य होते हैं। सभी तर्कवाक्य होते हैं लेकिन सभी वाक्य तर्कवाक्य नहीं होते हैं। निगमात्मक युक्तियां वैध-अवैध होती है। आगमात्मक युक्तियां उचित-अनुचित होती है।
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45. निम्नलिखित न्यायवाक्य को पढ़िए और इसमें त्रुटि को चिन्हित कीजिए :
‘‘सभी ग्रेजुएट मतदाता है। जॉन ग्रेजुएट नहीं है। जॉन मतदाता नहीं है।’’
(a) चार पद की त्रुटि (b) अवितरित मध्य की त्रुटि
(c) अवैध पद आभास (d) गौड़ पद आभास
Ans. (c) : ⇒ कोई भी निरपेक्ष न्यायवाक्य तभी वैध होती है जब निष्कर्ष में व्याप्त पद आधार में भी व्याप्त होना चाहिए। इस युक्ति के निष्कर्ष में मतदाता मुख्य पद व्याप्त है लेकिन आधार वाक्यों में मतदाता व्याप्त नहीं है। अत: यहां अव्याप्त मुख्य पद दोष है।
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46. निरपेक्ष न्यायालय में मध्य पद निम्नलिखित में से किसमें आता है?
(a) केवल मुख्य आधार वाक्य में
(b) केवल अमुख्य आधार वाक्य में
(c) दोनों मुख्य और अमुख्य में
(d) केवल निष्कर्ष में
Ans. (c) : निरपेक्ष न्याय वाक्य में तीन और केवल तीन पद ही होने चाहिए। मुख्य पद‚ अमुख्य पद तथा मध्यम्‌ पद। मध्यम्‌ पद दोनों आधार वाक्यों में मुख्य या अमुख्य में होते हैं।
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47. p q मिथ्या है‚ जब
(a) p सत्य है और q सत्य है।
(b) p सत्य है और q असत्य है।
(c) p असत्य है और q सत्य है।
(d) p असत्य है और q असत्य है।
Ans. (b) F F T F T T T F F T T T p q p q p ⊃ q केवल तभी असत्य है जब p सत्य हो लेकिन q असत्य हो।
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48. उस कथन को जिसके असत्य स्थानापन्न उदाहरण होते हैं उसको कहते हैं
(a) पुनरुक्ति (b) व्याघाती
(c) आपातिक (d) आपादान
Ans. (b) : जिसके सभी सत्य स्थानापन्न उदाहरण होते हैं उसे पुनरुक्ति कहते हैं। जिसके स्थानापन्न उदाहरण सत्य तथा असत्य दोनों होते हैं उन्हें आपातिक कहते हैं।
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49. निम्नलिखित में से कौन सी पुनरुक्ति है?
(a) p ⊃ – q (b) (p ⊃∼ p) . (∼ p ⊃ p)
(c) p ⊃ ( p ⊃ p) (d) (p ⊃ p) ⊃ p
Ans. (c) : जिनके सभी स्थापन्न उदाहरण सत्य होते हैं वही पुनरुक्ति कथन होते हैं।
(A) P ∼ P P ⊃ ∼ P T F F F T T
(B) P, ∼ P, (P ⊃ ∼ P), (∼ P⊃P), (P⊃P), (P⊃∼P) T F F T F F T T F F
(C) P, P (P⊃ P), P ⊃ (P ⊃ P) T T T T F F T T
(B) P, P (P⊃P), (P ⊃P) ⊃ P T T T T F F T F
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50. सूची-I (प्रतीकात्मक रूप) को सूची-II (नियम) से सुमेलित कीजिए और प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजए :
सूची-I सूची- II
(प्रतीकात्मक रूप) (अनुमान का नियम)
A. p ⊃ q p i. वियोजक न्याययुक्ति ∴ q
B. p ⊃ q ii. परिकल्पित न्याययुक्ति ∼ q ∴∼ p
C. p ⊃ q iii. मोडस टोलेन्स q ⊃ r
D. p v q iv. मोडस पोनेस ∼p ∴q
कूट :
A B C D
(a) iv i ii iii
(b) ii i iv iii
(c) iii iv i ii
(d) iv iii ii i
Ans. (d) :
(a) P q p q ⊂∴→ मोडस पोनेस
(b) P q P q ~ ~ ∴⊂→ मोडस टोलेंस
(c) ~ ~ ∴ ⊂⊂⊂p q p q → परिकल्पित न्याययुक्ति
(d) p v q p ∴ q _ → वैकल्पित न्यायवाक्य Disjunctiove syllogism (DS)
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51. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजए:
सूची-I सूची-II
A. जैन धर्म 1. गया
B. बौद्ध धर्म 2. आनन्दपुर साहिब
C. सिख धर्म 3. अजमेर
D. इस्लाम 4. वैशाली
कूट :
A B C D
(a) 4 1 2 3
(b) 4 2 3 1
(c) 3 2 1 4
(d) 3 4 1 2
Ans. (a) :
जैन धर्म → वैशाली बौद्ध धर्म → गया सिख धर्म → आनन्दपुर साहिब इस्लाम → अजमेर
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52. निम्नलिखित में से कौन सा धर्म है जो ‘साधु’ को अपना आदर्श मानता है?
(a) ईसाई धर्म (b) सिक्ख धर्म
(c) जैन धर्म (d) हिंदू धर्म
Ans. (c) : जैन धर्म के दो सम्प्रदाय दिगम्बर तथा श्वेताम्बर हैं दिगम्बर के मुनि होते हैं उनके वाक्यों को आगम कहा गया है। इन्हें तीर्थंकर भी कहते हैं। जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर का नाम मिलता है। प्रथम ऋषभेदव थे 24वें महावीर थे।
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53. निम्नलिखित में से कौन सा ईशदूतीय धर्मों का युग्म है?
(a) जैन धर्म और बाद्ध धर्म
(b) ईसाई धर्म और इस्लाम
(c) सिक्ख धर्म और इस्लाम
(d) हिंदू धर्म और जोराध्Eिायम धर्म
Ans. (b) : ⇒ ईसाई और इस्लाम ईशदूतीय धर्म माने जाते हैं। जैन-बौद्ध धर्म श्रमण परम्परा के माने गये हैं।
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54. निम्नलिखित में से किस पथ का समर्थन बुद्ध ने किया?
(a) श्रेय (b) मध्यम प्रतिपदा
(c) प्रेम (d) कैवल्य
Ans. (b) : श्रोयस तथा प्रेयस उपनिषद की अवधारणा है। कैवल्य जैन धर्म के केवली के लिए प्रयोग किया है। मध्यम्‌ प्रतिपदा महात्मा बुद्ध का मार्ग है।
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55. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए :
सूची-I सूची-II
A. थिरुवल्लूवर 1. दश आदेश (टेन कमांडमेंट)
B. लॉर्ड स्वामीनारायण 2. कुरल
C. मोसिस 3. नैतिशतक
D. भ्रतृहरि 4. शिक्षापत्री
कूट :
A B C D
(a) 3 4 1 2
(b) 4 2 1 3
(c) 2 4 1 3
(d) 3 1 2 4
Ans. (c) :
(a) थिरुवल्लूर → कुरल
(b) लार्ड स्वामीनारायण → शिक्षापात्री
(c) मोसिस → दश आदेश (टेन कमाडमेंट)
(d) भ्रतृहरि → नीतिशतक
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56. सुप्रसिद्ध पुस्तक ‘लिंग्यूस्टिक टर्न’ का लेखक कौन है?
(a) जी.ई.मूरे (b) बेरट्रंड रस्सेल
(c) विट्टिग्नस्टीन (d) रिचर्ड रोटरी
Ans. (d) :
लेखक पुस्तक जी.ई. मूर – कॉमन सेंस (Comman sense) विटगेंस्टाइन – टैक्टेटस‚ रिचर्ड रोटरी – लिग्यूस्टिक टर्न
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57. रस्सेल के विवरण सिद्धान्त को चुनौती दी
(a) ए.जे. अय्यर (b) पी.एफ. स्ट्रासन
(c) जे.एल. आस्टिन (d) डी. डेविडसन
Ans. (b) : रसेल का लेख On Denating के 45 वर्ष बाद पी.एस. स्ट्रासन ने अपने लेख On Refferring में रसेल के वर्णन सिद्धान्त का खण्डन करता है। रसेल The तथा A के आधार पर निश्चित वर्णन तथा अनिश्चित वर्णन का भेद करता है लेकिन स्ट्रासन अनुसार The का प्रयोग अनिश्चित तथा निश्चित वर्णन दोनों के लिए होता है।
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58. संवेदन और संदर्भ में भेद किसने किया?
(a) फ्रेगे (b) विट्‌गेन्सटाइन
(c) क्वाइन (d) डमेट्‌
Ans. (a) : विट्‌गेन्सटाइन के अनुसार मेरी भाषा की सीमा मेरी जगत की सीमा है। भाषा विचार के अभिव्यक्ति करती है और विचार की सीमा जगत की सीमा है। फ्रेगे sense और reference में भेद करता है वही विट्‌गेन्सटाइन भेद नहीं करता है।
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59. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए :
सूची-I सूची-II
(दार्शनिक) (सिद्धान्त)
A. जे.एल. आस्टिन i. भाषा के खेल
B. एल. विटगेन्सटाइन ii. भाषण क्रियाएँ
C. डब्ल्यू.वी. कूआइन iii. मन्तव्यता सिद्धान्त
D. जाह्न सीयरले iv. इंद्रियानुभववाद के दो सिद्धान्त
कूट :
A B C D
(a) iv iii ii i
(b) iii iv i ii
(c) ii i iv iii
(d) iii iv ii i
Ans. (c) :
(a) जे. एल. आस्टिन – भाषण क्रियाएँ
(b) एल. विटगेन्सटाइन – भाषा के खेल
(c) डब्लू.वा. कूआइन – इंद्रियानुभववाद के दो सिद्धान्त
(d) जाह्न सीयरले – मन्तव्यता सिद्धान्त
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60. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए :
सूची-I सूची-II
(पुस्तक) (लेखक)
A. फाउंडेशन आफ अरिथमैटिक i. डेविडसन
B. इंट्रोडक्शन टू ii. कूआइन मैथिमैटिकल फिलासोफी
C. फ्रौम ए लाजिकल प्वाइंट iii. रस्सेल ऑफ व्यू
D. इनक्वारी़ज इन टू ट्रूथ iv. फ्रेगे एण्ड इण्टरप्रिटेशन
कूट :
A B C D
(a) ii i iv iii
(b) iv iii ii i
(c) iv i ii iii
(d) iii iv i ii
Ans. (b) :
(a) फाउंडेशन ऑफ अरिथमैटिक – फ्रेगे
(b) इंट्रोडक्शन टू मैथिमैटिकल फिलासोफी – रस्सेल
(c) फ्रैम ए लाजिकल प्वाइंट ऑफ व्यू – कूआइन
(d) इनक्वारीज इन टू टूथ एण्ड इण्टरप्रिटेशन – डेविडसन
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61. संवृत्तिशास्त्रीय गवेषणा की पद्धति है
(a) द्वन्द्वात्मक (b) आनुभूतिक
(c) लोकातीत (d) कोष्टकीय तकनीक
Ans. (d) : एडमण्ड हुर्सरल वह पहला दार्शनिक है जो Phenomenology संवृत्तिशास्त्र (आभासिकीशास्त्र) शब्द का प्रयोग सम्पूर्ण दर्शन के लिए किया। अपनी पुस्तक ‘लॉजिकल इन्वेस्टिगेंशन’ में आभासिकी (Phenomenology) को आत्मनिष्ठ प्रक्रियाओं के वर्णनात्मक विश्लेषण के रूपे में परिभाषित किया है।
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62. संवृत्तिशास्त्र है।
(a) आत्मनिष्ठ घटना की विवरणात्मक व्याख्या
(b) घटना का भाषाशास्त्रीय अध्ययन
(c) जगत्‌ का यथार्थवादी अध्ययन
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (a) : हुर्सरल के अनुसार प्रत्येक चेतना का एक विषय होता है जो चेतना में अन्तरभूत वस्तुनिष्ठता के रूप में स्थित होता है। इसलिए चेतना को शुद्ध होना चाहिए। इसीलिए हुर्सरल कोष्टीकरण की तकनीक के चेतना को शुद्ध करता है।
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63. आधुनिक संवृत्तिशास्त्र के संस्थापक है
(a) ब्रिन्टानो (b) मिनांग
(c) हुसर्ल (d) पर्स
Ans. (c) : ब्रिन्टानो का चेतना का विषयपक्षी सिद्धान्त है। मिनांग एक ज्ञानमीमांसीय दार्शनिक है। पर्स एक अमेरिकी अर्थक्रियावादी दार्शनिक है।
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64. किसने कहा कि शब्दार्थ मीमांसा तत्त्वमीमांसा है?
(a) हाइडेगर (b) श्लेमरमेकर
(c) रैंकी (d) डिल्थी
Ans. (a) : हाइडेगर की पुस्तक (Being and time) है। हाइडेगर हरमूनिटिम्स के साथ अस्तित्ववादी दार्शनिक है। शब्दार्थ मीमांसा तत्वमीमांसा है। उसके अनुसार शब्द का विश्लेषण तथा शब्द का अर्थ यह तत्वमीमांसा के अध्ययन का विषय है।
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65. निम्नलिखित में से किसने समीक्षात्मक शब्दार्थ मीमांसा में योगदान किया है?
(a) हाइडेगर (b) हैबरमास
(c) रिचर्ड रोर्टी (d) गैडेमर
Ans. (b) : हाइडेगर एक तत्वमीमांसीय व्योत्पत्तिशास्त्री है। हैबरमास की पुस्तक – द फिलॉसाफिकल डिस्कर्स ऑफ मॉडर्निटी है। हैबरभास नए सामाजिक आन्दोलन नारी आन्दोलन‚ पर्यावरण‚ दलित एवं प्रति-संस्कृति आन्दोलन को विवेक सम्मत स्वरूप प्रदान करने का भी कार्य किया है। ‘ज्ञान और मानव’ सिद्धान्त भी दिया है।
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66. निम्नलिखित में से कौन सा वैष्णवाद के वर्ग में नहीं आता?
(a) रामानुज (b) शंकर
(c) माधव (d) वल्लभ
Ans. (b) : शंकराचार्य अद्वैतवाद के संस्थापक है लेकिन गौडपाद सर्वप्रथम अद्वैतवाद की व्याख्या किया है। शंकराचार्य ज्ञानमार्गी है। रामानुज‚ मध्व‚ निम्बकाचार्य तथा बल्लभाचार्य से सभी भक्तिमार्गी है और वैष्णववादी है।
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67. निम्नलिखित में से ‘पुष्टि’ का पक्षधर कौन है?
(a) रामानुजा (b) माधव
(c) वल्लभ (d) शंकर
Ans. (c) : रामानुज -विशिष्टाद्वैतवादी है। माधव द्वैतवादी है बल्लभाचार्य पुष्टि मार्ग का अनुसरण करते हैं। शंकराचार्य अद्वैतवादी तथा ज्ञानमार्ग है।
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68. निम्नलिखित में से कौन शाश्वत नरक का उपबन्ध करता है?
(a) शंकर (b) माधव
(c) निम्बार्क (d) वल्लभ
Ans. (b) : मध्यवाचार्य के अनुसार जीव अविद्या का आश्रय है। आत्मा अणु रूप है तथा चेतना आत्मा का अनिवार्यगुण है। जीवों की चार रूपों में अभिव्यक्ति होती है।
1. जीवाच्छेदक – जीव के ऊपर एवं आनन्द के ऊपर आवरण डालती है।
2. परमाच्छेदक – परमात्मा के रूप में जानने में बांधा डालती है।
3. शैवल- जीव को जगत के बंधन में डालती है।
4. मायिक- माया जनित कार्यों की रचना करती है।
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69. निम्नलिखित में से पंच भेद का समर्थन कौन करता है?
(a) शंकर (b) रामानुजा
(c) माधव (d) वल्लभ
Ans. (c) : माधवाचार्य ने भेदवाद की स्थापना किया है। वह पंच भेद का समर्थन करते है।
1. ईश्वर एवं जीव का भेद
2. जीव एवं जीव का स्पष्ट भेद
3. ईश्वर एवं जड़ का भेद
4. जड़ एवं जड़ का भेद
5. जीव एवं जड़ का भेद
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70. शंकर के अनुसार ‘तत्त्वमसि’ का अर्थ है
(a) जगत और ईश्वर के बीच तादात्म्य
(b) ज्ञाता और ज्ञेय के बीच तादात्म्य
(c) जीव और ब्रह्म के बीच तादात्म्य
(d) जगत और आत्मा के बीच तादात्म्य
Ans. (c) : छांदोग्य उपनिषद में कहा गया है कि ‘तत्त्वमसि’ यह तीन शब्दों से मिलकर बना है। तत्‌ + त्वम्‌ + असि – यहाँ तत्‌ परब्रह्म के लिए‚ त्वम्‌ सीमित जीव के लिए‚ जबकि असि का अर्थ है कि – ‘‘है’’। इस प्रकार तत्वमसि का अर्थ है-े जीव ही ब्रह्म है। अर्थात्‌ जीव एवं ब्रह्म में तादात्म्य संबंध है।
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71. गांधीजी के अनुसार सत्य के उच्चतम आदर्श का पालन होना चाहिए
(a) विचार (b) कथन
(c) कर्म (d) उपरोक्त सभी
Ans. (d) : जैन दर्शन की भांति गांधी का विचार है कि अहिंसा का पालन‚ मन‚ वचन‚ कर्म से करना चाहिए। गांधी के कुल 11 धर्म है जिनका पालन मनुष्य को करना चाहिए।
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72. जब किसी व्यक्ति ने अहिंसा को डरपोक का धर्म बतलाया तो गाँधी ने उस
(a) व्यक्ति की भर्त्सना की।
(b) प्रतिक्रिया की नहीं की।
(c) चुप रहे।
(d) व्यक्ति को मात्र ऩजर-अंदाज किया।
Ans. (a) : गांधी के अनुसार मनुष्य स्वभावत: अहिंसाप्रिय है। वह हिंसक केवल परिस्थितिवश ही होता है। मनुष्य में निरंतर हिंसक वृत्ति का विकास हो रहा है। गांधी कहा करते थे कि अहिंसक होना हिंसक होने से कठिन है क्योंकि अहिंसक होने पर किसी को कष्ट नहीं देना है।
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73. ‘स्वदेशी’ में गांधी विचारधारा में निहित है
(a) उसी का प्रयोग करना जिसका स्वयं ने उत्पादन किया है
(b) विदेशी वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार
(c) अपने आसपास की सेवाओं तक सीमित रहना
(d) स्थानीय उत्पादों से परे न जाना
Ans. (c) : गांधी का मानना था कि उत्पादन आवश्यकतानुसार किया जान चाहिए। स्वदेशी स्वयं के क्षेत्र पर उत्पादन का उपभोग करना है। इसी स्वदेशी से ही स्वराज्य का निर्माण होता है। गांधी राज्यविहीन समाज की कल्पना की थी। इसलिए वे राज्य को न्यूनतम शक्ति प्रदान की थी।
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74. गांधी के ‘रोटी के लिए श्रम’ के सिद्धान्त में अनिवार्यता सम्मिलित है
(a) मानसिक कार्य (b) शारीरिक कार्य
(c) सामाजिक कार्य (d) उपरोक्त सभी
Ans. (b) : गांधी के अनुसार‚ मानसिक श्रम तथा शारीरिक श्रम का समन्वय होना चाहिए। वे कहते थे कि शारीरिक श्रम भोजन के लिए अथवा जीविकोपार्जन के लिए करना चाहिए तथा मानसिक श्रम सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए करना चाहिए।
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75. गांधी विचारधारा के आर्थिक कार्यक्रम आधारित थे
(a) आर्थिक समझ के सैद्धान्तिक सिद्धान्त
(b) लोगों की आवश्यकताओं के लिए उत्पादन करना
(c) आत्म-निर्भरता का आदर्श
(d) समस्त आर्थिक उत्पादन में हिस्सेदारी
Ans. (c) : ⇒ गांधी ने समानता के लिए न्यासधारिता का सिद्धान्त दिया था उनके अनुसार सभी सम्पत्ति गोपाल की है‚ हम उसके रक्षक मात्र हैं। इस प्रकार समस्त निजी पूंजी एक ट्रस्ट के रूप में रखी जानी चाहिए और पूंजीपति को यह समझना चाहिए कि वह सम्पत्ति निजी लाभ के लिए नहीं है वरन्‌ समस्त समाज के लाभ के लिए है।
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