You are here
Home > ebooks > UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2012

नोट: इस प्रश्न पत्र में पचास (50) बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के दो (2) अंक हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
1. वेदों के चार भागों का सही क्रम है:
(a) संहिता‚ आरण्यक‚ ब्राह्मण‚ उपनिषद
(b) संहिता‚ ब्राह्मण‚ आरण्यक‚ उपनिषद
(c) उपनिषद‚ आरण्यक‚ ब्राह्मण‚ संहिता
(d) संहिता‚ ब्राह्मण‚ उपनिषद‚ आरण्यक
Ans. (b) : वेद का विभाजन वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन या वादनारायण) ने किया था। वेद के चार भाग है- (1) ऋग्वेद
(2) सामवेद (3) यजुर्वेद (4) अथर्ववेद। इन चारों भागों में प्रत्येक के चार भाग है। जो निम्न है -संहिता‚ ब्राह्मण‚ आरण्यक तथा उपनिषद।
(दोत-भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूपरेखा-राममूर्ति पाठक)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


2. उपनिषदों का मुक्ति के बारे में क्या विचार है?
(a) आत्मा का ज्ञान
(b) ब्रह्म का ज्ञान
(c) ब्रह्म और आत्मा की एकता
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (a) : उपनिषद्‌ का अर्थ -‘गुरु के समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त करना’ है। उपनिषद्‌ को वेद का अंत माना जाता है। स्वयं उपनिषदों में कहा गया है कि वेद-वेदांग आदि शाध्Eों का अध्ययन कर लेने से मनुष्य का ज्ञान तब तक पूर्ण नहीं होता जब तक वह उपनिषदों की शिक्षा प्राप्त नहीं करता।
(दोत-भारतीय दर्शन-चटर्जी एवं दत्ता)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


3. अथर्ववेद का निम्नलिखित में से कौन सा उदाहरण है?
(a) आमनायस्य क्रियार्थत्‌वात्‌
(b) स्वर्गकामो यजेत
(c) सप्तद्वीपा वसुमति
(d) अग्निना सिंचते
Ans. (c) : वेद चार है (1) ऋग्वेद इसमें देवताओं के अराधना के लिए श्लोक लिखे गये हैं। (2) सामवेद इसमें देवताओं की अराधना लयबद्ध गायन के माध्यम से किया गया है इस वेद को संगीत का जनक भी माना जाता है। (3) यजुर्वेद में यज्ञ संबंधी क्रिया-कलाप की विधि का वर्णन है। (4) अथर्ववेद – इसमें तंत्र-मंत्र‚ जादू-टोना‚ भूत-प्रेत की बात मिलती है। उसी में सप्तद्वीपों वसुमति की बात कही गयी है।
(दोत-प्रो. हरेन्द्र प्रसादे सिन्हा)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


4. रामानुज के कारणता सिद्धान्त को किस नाम से जाना जाता है?
(a) विवर्तवाद (b) प्रकृति परिणामवाद
(c) ब्रह्म परिणामवाद (d) असत्कार्यवाद
Ans. (c) : विवर्तवाद आचार्य शंकर का सिद्धान्त है। प्रकृति परिणामवाद सांख्य दर्शन का सिद्धान्त है। ब्रह्म परिणामवाद आचार्य रामानुज का है। असत्कार्यवाद न्याय-वैशेषिक का सिद्धान्त है।
(दोत- डॉ. सी.डी. शर्मा)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


5. मीमांसा पद्धति का प्रमुख उद्देश्य है:
(a) ब्रह्म सूत्रों के अधिकार को स्थापित करना
(b) वेदों के अधिकार को स्थापित करना
(c) त्रिपिटकों के अधिकार को स्थापित करना
(d) भगवद्‌गीता के अधिकार को स्थापित करना
Ans. (b) मीमांसा दर्शन वेद को अपौरुषेय मानता है। वही न्याय वैशेषिक वेद को पौरुषेय मानते हैं। मीमांसा वेद में प्रचलित कर्मकाण्डों को स्थापित करने का प्रयास किया तथा मुक्ति के लिए यज्ञ आदि कर्म को आवश्यक बताया।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


6. ‘सर्वम्‌ दु:खम्‌’ को किसने सत्य ठहराया है?
(a) जैन (b) सांख्य
(c) बौद्ध (d) योग
Ans. (c) : बौद्ध दर्शन चार आर्य सत्य की स्थापना करता है।
(1) सर्वम्‌ दु:खम्‌ -सब कुछ दु:ख है। संसार में दु:ख ही दु:ख व्याप्त है।
(2) दु:खों का कारण है या दु:ख समुदाय- इसी द्वितीय आर्य सत्य में दु:ख के कारणों की खोज की गयी है।
(3) दु:ख निरोध- दु:खों का निरोध सम्भव है।
(4) दु:ख निरोध मार्ग-इसमें दु:ख निरोध का मार्ग बताया गया है। इसी को दु:ख निरोधगामिनी प्रतिपद्‌ कहा जाता है इसी में अष्टांगिक मार्ग है।
(दोत-राममूर्ति पाठक)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


7. बौद्ध दर्शन में दु:ख के बारह कारणों का वर्णन किसमें है?
(a) प्रथम आर्य सत्य (b) द्वितीय आर्य सत्य
(c) तृतीय आर्य सत्य (d) चतुर्थ आर्य सत्य
Ans. (b) : बौद्ध दर्शन में चार आर्य सत्य की स्थापना की गयी है। द्वितीय आर्य सत्य में ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ या धर्म चक्र अथवा बारह कारणों का वर्णन है इसी को द्वादस निदान चक्र भी कहते हैं।
(दोत-राममूर्ति पाठक)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


8. भारतीय दर्शन के अनुसार ख्याति का अर्थ है
(a) भ्रान्ति (त्रुटि) सिद्धान्त
(b) सत्य का सिद्धान्त
(c) असत्य का सिद्धान्त
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं।
Ans. (a) : भारतीय दर्शन में भ्रम का सिद्धान्त को ख्यातिवाद के नाम से जाना जाता है। भारतीय दर्शन अपनी परम्परा के अनुसार ख्यातिवाद (त्रुटिवाद) का वर्णन किया है।
(दोत-राममूर्ति पाठक)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


9. वेदान्त ग्रंथों के अध्ययन का उद्देश्य क्या नहीं है?
(a) अज्ञान से मुक्ति
(b) आत्म साक्षात्कार
(c) ब्रह्म साक्षात्कार
(d) जागतिक समृद्धि
Ans. (d) : वेदान्त गं्रथों का उद्देश्य आत्मसाक्षात्कार‚ प्रमा की प्राप्ति‚ आत्मा-परमात्मा का मिलन तथा ब्रह्म साक्षात्कार करना है। तत्‌त्वमसि ही इसका मुख्य उद्देश्य है।
(दोत-चटर्जी एवं दत्ता)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


10. पक्ष में हेतु की विद्यमानता का ज्ञान कहलाता है
(a) पक्षधर्मता ज्ञान
(b) परामर्श ज्ञान
(c) व्याप्ति ज्ञान
(d) अनुमिती
Ans. (a) : पक्ष में हेतु का होना ही पक्षधर्मता है। जैसे -पर्वत पर धुआं होना। नियत सहचर्य संबंध को व्याप्ति कहते हैं। जैसे- धुआं के होने पर आग का निश्चित होना ही व्याप्ति ज्ञान है। प्रमा की प्राप्ति का साधन ही अनुमिती है।
(दोत- प्रो. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


11. वैशेषिकों के अनुसार मुक्ति (नि:श्रेयस) के द्वारा प्राप्त की जाती है।
(a) केवल तत्त्व ज्ञान
(b) ईश्वर द्वारा निर्धारित धर्मों का पालन करते हुए
(c) ईश्वर द्वारा निर्धारित धर्मों का पालन करने के साथ तत्त्व ज्ञान
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (c) : वैशेषिक दर्शन एक वस्तुवादी दर्शन है। इसका वस्तुवाद ्रबहुत्ववादी वस्तुवाद कहलाता है। वैशेषिक के अनुसार अंतिम मुक्ति
(नि:श्रेयस) को मोक्ष कहते हैं। जीवन के अंतिम लक्ष्य की प्राप्त ‘तत्व ज्ञान’ के साथ ही ईश्वर द्वारा निर्धारित धर्मों का पालन करने पर हो सकती है। न्याय वैशेषिक वेद के रचयिता ईश्वर को मानते हैं।
(दोत-दत्ता और चटर्जी)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


12. वैशेषिकाओं के अनुसार विश्व की रचना का असमवायि कारण है
(a) परमाणु (b) द्वयणुक
(c) परमाणुसंयोग (d) त्रसरेणु
Ans. (c) : वैशेषिक के अनुसार ‘परमाणु’ नित्य है जिससे जगत की रचना हुयी है। दो परमाणु के मिलन को द्वयणुक कहते हैं। तीन द्वयणक के मिलन को त्रसरेणु कहते हैं। परमाणु में अन्तर निहित संयोग की शक्ति के संबंध को असमवायि संबंध कहते हैं।
(दोत-डॉ. राममूर्ति पाठक)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


13. किसी वस्तु पर वह गुण आरोपण किया जाए जो उसमें नहीं है‚ तब वह कहलाता है
(a) अविधा (b) अध्यास
(c) अख्याति (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (b) : जो वस्तु जिस रूप में है उसे उस रूप में ना जानना ही अवद्यिा है। प्रभाकर के भ्रमविषयके सिद्धान्त को अख्यातिवाद कहते हैं। शंकराचार्य माया को अध्यास कहते हैं। माया के दो कार्य हैं। आवरण और विक्षेप अर्थात्‌ वास्तविक वस्तु को ढक लेना तथा उस वस्तु पर किसी की प्रतीत करवाना है। इसी को अध्यास भी कहते हैं।
(दोत-डॉ. सी.डी. शर्मा)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


14. चार्वाक दर्शन के अनुसार मानव का स्वरूप है
(a) भौतिक शरीर (b) चेतना
(c) आत्मा (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (a) : चार्वाक दर्शन नास्तिक सुखवादी दर्शन है। चार्वाक आत्मा‚ चेतना‚ शरीर सभी को भौतिक पदार्थों से ही बना मानता है। उसके अनुसार‚ चैतन्य विशिष्ट: काय: पुरुष: चैतन्यविशेष से युक्त शरीर को मानव (पुरुष) मानता है। इस प्रकार वह ईश्वर‚ आत्मा‚ वेद का खण्डन करता है।
(दोत-डॉ. सी.डी. शर्मा)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


15. नैयायिकों के अनुसार पंचावयवी न्याय के अवयवों का सही क्रम है
(a) उदाहरण‚ प्रतिज्ञा‚ हेतु‚ उपनय एवं निगमन
(b) प्रतिज्ञा‚ हेतु‚ उदाहरण‚ उपनय एवं निगमन
(c) प्रतिज्ञा‚ उदाहरण‚ हेतु‚ उपनय एवं निगमन
(d) प्रतिज्ञा‚ हेतु‚ उपनय‚ उदाहरण एवं निगमन
Ans. (b) : न्याय दर्शन के अनुसार-अनुमान के दो भेद होते हैंपहला-
स्वार्थानुमान स्वयं के ज्ञान प्राप्त करने के लिए। इसमें अवयवों के क्रम की जरुरत नहीं होती है। दूसरा-परार्थानुमान- दूसरे की शंका दूर करने के लिए किया जाता है इसमें पांच अवयव की क्रमश:
जरुरत होती है।
(1) प्रतिज्ञा (2) हेतु (3) उदाहरण‚ (4) उपनय (5) निगमन
(1) पर्वत वहनिमान है – प्रतिज्ञा
(2) क्योंकि पर्वत धूमवान है – हेतु
(3) जो धूमवान है वही वाहिमान है – उदाहरण
(4) क्योंकि पर्वत धूमवान है -उपनय
(5) अत: पर्वत वहनिमान है – निगमन
(दोत-डॉ. सी.डी. शर्मा)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


16. यह विचार कि ईश्वर विश्वसृजन का निमित कारण मात्र है‚ किसके द्वारा सही ठहराया गया है?
(a) न्याय (b) सांख्य
(c) अद्वैत वेदान्त (d) मीमांसा
Ans. (a) : न्याय-वैशेषिक के अनुसार -ईश्वर निमित कारण है पदार्थ (परमाणु) उपादान कारण है। इस प्रकार इस जगत का निमित कारण ईश्वर है। लेकिन वेदान्त ईश्वर (ब्रह्म) को जगत का उपादान तथा निमित्त दोनों ही कारण मानता है।
(दोत- भारतीय दर्शन की कहानी-प्रो. संगम लाल पाण्डेय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


17. पतंजलि के अनुसार पांच प्रकार के यम है
(a) अहिंसा‚ अस्तेय‚ सत्य‚ ब्रह्मचर्य एवं आसन
(b) अहिंसा‚ सत्य‚ अस्तेय‚ ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह
(c) सत्य‚ अस्तेय‚ ब्रह्मचर्य‚ अपरिग्रह एवं ध्यान
(d) अस्तेय‚ ब्रह्मचर्य‚ सत्य‚ ध्यान एवं आसन
Ans. (b) : योग दर्शन के प्रणेता-महर्षि पतंजलि है उन्होंने अष्टांगयोग का सिद्धान्त है। (1) यम (2) नियम (3) आसन
(4) प्राणायाम (5) प्रत्याहार (6) धारण (7) ध्यान (8) समाधि इसी यम के पांच प्रकार है – अहिंसा‚ सत्य‚ अस्तेय‚ ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह।
(दोत-डॉ. सी.डी. शर्मा)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


18. शङ्कर के अनुसार ‘माया’ का अर्थ है
(a) केवल सत्‌
(b) केवल असत्‌
(c) सत्‌ और असत्‌ दोनों
(d) न सत्‌ और न ही असत्‌ बल्कि अनिर्वचनीय
Ans. (d) : शंङ्कराचार्य ने माया को अविद्या‚ अध्यास‚ अध्यारोप भ्रान्ति‚ विवर्त‚ भ्रम‚ नामरूप‚ अव्यक्त‚ मूल प्रकृति आदि शब्दों के रूप में प्रयोग किया है। माया न सत्‌ है न असत्‌ है अनिर्वचनीय है‚ अनादि है। लेकिन माया अनन्त नहीं है। ज्ञान से माया का निराकरण संभव है।
(दोत-डॉ. हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


19. अभिकथन (A) : शब्द प्रमाण है।
तर्क (R) : शब्द ईश्वर को सिद्ध कर सकता है।
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (A) का (R) सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है परन्तु (A) का (R) सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है परन्तु (A) का सही स्पष्टीकरण (R) है।
(d) (A) सही है और (R) सही नहीं है‚ परंतु (A) का सही स्पष्टीकरण (R) नहीं है।
Ans. (b) : शब्द एक प्रमाण है इसे सांख्य-योग‚ न्याय-वेदान्त मीमांसा ने स्वीकार किया है। शब्द अर्थात्‌ शाध्Eों द्वारा ईश्वर को जाना जा सकता है। वेदान्त के अनुसार ईश्वर की सिद्धि शाध्Eों द्वारा होती है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


20. निम्नलिखित में से कौन सा अद्वैतीय परम्परा का सही क्रम है?
(a) व्यास‚ शंकर‚ गोविन्दपुर‚ गौड़पाद
(b) गौड़पाद‚ व्यास‚ शंकर‚ गोविन्दपाद
(c) शंकर‚ व्यास‚ गोविन्दपाद‚ गौड़पाद
(d) व्यास‚ गौड़पाद‚ गोविन्दपाद‚ शंकर
Ans. (d) : श्रीभगवान्‌ नारायण‚ श्री ब्रह्मा‚ श्री वशिष्ठ ऋषि‚ श्री शक्ति ऋषि‚ श्री पराशर ऋषि‚ श्रीवेदव्यास ऋषि‚ श्री शुकदेव परमहंस‚ श्री गौड़पाद आचार्य मुनि‚ श्री गोविन्दभगवत्पादाचार्य‚ श्री आद्य शंकराचार्य है। शंकराचार्य ने चार दिशाओं के चारों पीठ पर पृथक-पृथक चार शिष्यों का अभिषिक्त किया था- जिनके माध्यम से गुरू परम्परा प्रवाहित हुयी। श्री सुरेश्वराचार्य (पश्चिम में) श्री पद्मपदाचार्य (पूर्व में) श्रीतोटकाचार्य (उत्तर में) श्री हस्तामलकाचार्य
(दक्षिण में)।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


21. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और कूट से सही क्रम का चयन कीजए। सूची-I सूची-II
A. शंकर i. तत्त्वकौमुदी
B. जयराशिभट्ट ii. तत्त्वोपप्लवसिंह
C. जयन्त भट्ट iii. न्यायमंजरी
D. वाचस्पति मिश्र iv. ब्रह्मसूत्र भाष्य
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) i iv iii i
(c) iv ii iii i
(d) i iii ii iv
Ans. (c) :
सूची – I सूची- II से शंकराचार्य ब्रह्मसूत्रभाष्य जयरामशिभट्ट तत्वोपप्लवसिंह जयन्त भट्ट न्यायमंजरी वाचस्पति मिश्र तत्व कौमुदी
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


22. निम्नलिखित में से किसने उपनिषद के इस कथन कि ‘‘उठो‚ जागो और उद्देश्य-प्राप्ति तक मत रुको’’ पर लोगों के ध्यान को आधुनिक काल में केन्द्रित किया?
(a) स्वामी दयानंद (b) राजा राममोहन राय
(c) स्वामी विवेकानन्द (d) महात्मा गांधी
Ans. (c) : उठो‚ जागो और उद्देश्य प्राप्ति तक मत रुको उपनिषदों का यह वाक्य स्वामी विवेकानन्द ने आधुनिक समाज में प्रचारित किया है। इसी प्रकार उन्होंने उपनिषदों की व्यवहारिक व्याख्या किया है जिससे उनके दर्शन को व्यवहारिक वेदान्त कहा जाता है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


23. निम्नलिखित में से किसे टैगोर द्वारा मानवीय आत्मा के लिए अनिवार्य पक्ष माना गया है?
(a) शारीरिक एवं मानसिक
(b) प्राणतत्त्व एवं मानसिक
(c) शारीरिक एवं आध्यात्मिक
(d) मानसिक एवं आध्यात्मिक
Ans. (c) : टैगोर ने अपनी पुस्तक ‘जीवन देवता’ और परसोनाल्टी में आत्मा के दो पक्ष शारीरिक एवं अध्यात्मिक की बात कही है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


24. के.सी. भट्टाचार्य के अनुसार दर्शनशास्त्र है
(a) परमतत्त्व का ज्ञान
(b) आत्मा का स्व-प्रमाणित विस्तारण
(c) स्वत: प्रमाणित का स्व-प्रमाणित विस्तारण
(d) स्वत: प्रमाणित का अध्ययन
Ans. (c) : के. सी. भट्टाचार्य की पुस्तक आइडियाज इन स्वराज
(विचारों में स्वराज) नामक पुस्तक लिखी। दर्शनशास्त्र को स्वत:
प्रमाणित का स्व-प्रमाणित विस्तारण कहा है। जहां स्वयं का स्वयं विकास होता है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


25. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सूची-I सूची-II
A. सब्जेक्ट ए़ज फ्रीडम i. श्री अरविन्द
B. अज्ञेय तत्त्व ii. रवीन्द्रनाथ टैगोर
C. सार्वभौम धर्म iii. विवेकानन्द
D. जीवन देवता iv. के.सी. भट्टाचार्य
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) i iii ii iv
(c) iv i iii ii
(d) iv ii i iii
Ans. (c) :
सूची – I सूची- II सब्जेक्ट के.सी. भट्टाचार्य अज्ञेय तत्व श्री अरविन्द सार्वभौम धर्म श्री विवेकानन्द जीवन देवता रवीन्द्र नाथ टैगोर
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


26. द्वन्द्वात्मक पद्धति के प्रवर्तक कौन थे?
(a) अरस्तू (b) प्लेटो
(c) जीनो (d) थेलिस
Ans. (c) : अरस्तू ने अपनी पुस्तक ‘सोलिस्ट’ में जीनो को तर्कविद्या का अविष्कर्ता कहा है। जीनो पार्मेनाइडीज का अनुयायी था। जो द्वन्द्वात्मक पद्धति का प्रवर्तक था बाद में प्लेटो ने इसका प्रयोग किया तथा आधुनिक दर्शन में हिगेल ने प्रयोग किया।
(दोत-ग्रीक मध्य दर्शन का वैज्ञानिक इतिहास-जगदीश सहाय श्रीवास्तव)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


27. किसके दर्शन में ईश्वर को सृष्टिकर्ता कहा गया है?
(a) पारमेनिड़िज (b) हैराक्लिटस
(c) अनैक्जिमेंडर (d) प्लेटो
Ans. (d) : प्लेटो के अनुसार ईश्वर (Dimurge) प्रत्ययों के अभाव में सृष्टि की रचना नहीं कर सकता है। प्रत्ययों या सामान्यों को प्लेटो सृष्टि का मूल प्रारूप (Prototype) कहता है। सृष्टि की रचना करने के लिए ईश्वर को जड़-द्रव्य (Matter) और प्रत्यय का सहारा लेना पड़ता है। ईश्वर सृष्टि का केवल निमित्त कारण है।
(दोत-डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


28. सुकरात ने कितनी पुस्तवंâे/निबन्ध लिखें?
(a) तीन (b) चार
(c) एक (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (d) : सुकरात ने कई पुस्तक लिखी हैं।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


29. ‘‘विचार (चिन्तन) में जो व्याघातक है‚ वह वास्तविक नहीं हो सकता।’’ यह कथन किसका है?
(a) प्लेटो (b) अरस्तु
(c) पारमेनिड़िज (d) अनैक्जिमेंडर
Ans. (c) : पार्मेनाइडीज इलियाई सम्प्रदाय का संस्थापक है। उसके अनुसार सृष्टि का मूल आधार एक अपरिवर्तनशील अद्वितीय‚ अविनाशी विशुद्ध सत्ता (Being) है। इसलिए परिवर्तन असत्‌ है तथा व्याघातक सत्‌ नहीं है।
(दोत-डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


30. प्लेटो की द्वन्द्वात्मक पद्धति के अन्तर्गत आती है
(a) ज्ञानमीमांसा (b) तर्कशास्त्र
(c) तत्वमीमांसा (d) उपरोक्त सभी
Ans. (d) : द्वन्द्वात्मक पद्धति का प्रयोग सर्वप्रथम इलियाई दार्शनिक ‘जीनो’ ने किया था। इसके बाद प्लेटो ने अपनी समस्त विचारधारा में इसका प्रयोग किया।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


31. यह किसी मान्यता है कि विचारों की सहमति अथवा असहमति ज्ञान है?
(a) प्लेटो (b) अरस्तु
(c) हेराक्लिटस (d) पाइथागोरस
Ans. (b) : अरस्तू ने नीति-विज्ञान (Ethics) में मध्यम मार्ग का अनुसरण किया है। अरस्तू के अनुसार form (आकार) और matter (द्रव्य) में अन्योन्याश्रय संबंध है। दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते हैं। इसी प्रकार आत्मा एवं शरीर के बीच भी अन्योन्याश्रय संबंध है। इस प्रकार वह कहता है कि विचारों की सहमति-असहमति ज्ञान है।
(दोत-जगदीश सहाय श्रीवास्तव) – ग्रीक दर्शन
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


32. यह किसका विश्वास था कि आध्यात्मिक एवं बुभुक्ष आत्मा के भाग के दो खण्ड है?
(a) प्लेटो (b) अरस्तु
(c) पारमेनिड़िज (d) अनैक्जिमेंडर
Ans. (a) : ग्रीक भाषा में ‘आत्मा’ का तात्पर्य किसी प्राणी की जीवन-शक्ति से है। रिपब्लिक में ‘आत्मा’ का संबंध अमरता से संयुक्त कर दिया गया । मृत्यु के बाद जो अंश अवशिष्ट रहता है वह आत्मा (Psyche) है। प्लेटो के अनुसार जीवात्मा-विश्वात्मा के ही समान है।
(दोत-जगदीश सहाय श्रीवास्तव) -ग्रीक दर्शन
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


33. वैज्ञानिक तर्कशास्त्र के संस्थापक है
(a) प्लेटो (b) अरस्तु
(c) पाइथागोरस (d) पारमेनिडिज
Ans. (b) : नीतिशास्त्र में मध्यम्‌ मार्ग का प्रतिपादन अरस्तू है‚ वही वैज्ञानिक तर्कशास्त्र के जनक भी अरस्तू है। प्लेटो-प्रत्ययवाद या copy theory के जनक है पाइथागोरस-सांख्यसिद्धान्त के जनक है वही पारर्मेनिडिज परमसत्‌ को Being तथा शाश्वत कहते हैं।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


34. यह घोषणा किसने की कि संसार की सर्वोत्तम रचना मानव है?
(a) संत अन्सेलम (b) संत आगस्ताइन
(c) संत थामस अक्यूनास (d) उपरोक्त तीनों
Ans. (b) : यह सृष्टि ही ईश्वर की सर्वोत्तम रचना एवं सर्वाधिक शुभ है। प्लेटो की इस मान्यता का प्रभाव मध्य युग के ईसाई दार्शनिक संत आगस्ताइन‚ थॉमस एक्वीनॉस से लेकर आधुनिक युग में लाइबनित्ज एवं एफ. एच. ब्रैडले के दर्शन पर पड़ा।
(दोत-डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


35. संत आगस्ताइन के अनुसार नैतिक परिवर्तन का पड़ाव है
(a) आस्था (b) आशा
(c) स्पष्टता (d) उपरोक्त तीनों
Ans. (d) : संत आगस्ताइन के अनुसार मैं विश्वास करता हूँ ताकि मैं समझ सकू‚ मैं समझ सकू इसलिए विश्वास करता हूं। अत:
नैतिक अथवा अध्यात्मिक परिवर्तन के लिए आस्था‚ आशा‚ स्पष्टता का होना आवश्यक है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


36. देकार्त का प्राथमिक उद्देश्य है-
(a) शरीर और मस्तिष्क के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करना
(b) ईश्वर के अस्तित्व को प्रमाणित करना
(c) बाह्य संसार की वास्तविकता का खण्डन करना
(d) स्पष्ट एवं असंदिग्ध ज्ञान तक पहुँचना
Ans. (d) : देकार्त एक बुद्धिवादी गणितज्ञ है। देकार्त गणितज्ञ होने के नाते दर्शन को भी गणित की भांति शुद्ध एवं असंदिग्ध बनाना चाहता है। उसके अनुसार गणित निर्विवाद है जबकि दर्शन विवादों का केन्द्रे है। अत: विवादों का समाधान करके स्पष्ट एवं असंदिग्ध ज्ञान तक पहुंचा जा सकता है।
(दोत-डॉ. दयाकृष्ण)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


37. कान्ट के अनुसार ज्ञान में सम्मिलित है
(a) संश्लेषणात्मक प्रागानुभविक निर्णय
(b) संश्लेषणात्मक आनुभविक निर्णय
(c) विश्लेषणात्मक निर्णय
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans. (a) : कांट संश्लेषणात्मक प्रागानुभविक निर्णय को मानता है। उसके अनुसार ज्ञाने में तीन चीजें होनी चाहिए। निश्चितता‚ सार्वभौमिकता तथा नवीनता का यर्थाथता/संश्लेषणात्मक प्रागानुभविक निर्णय में सार्वभौमिकता के साथ नवीनता तथा निश्चितता भी है।
(दोत-डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


38. निम्नलिखित में से कौन सी रचना बेरट्रंड रसल की नहीं है?
(a) डिस्कोर्स ऑन मेथड
(b) अवर नालिज ऑफ दि एक्सटर्नल वर्ल्ड
(c) एन इनक्वायरी इन टू मीनिंग एण्ड टूथ
(d) ह्यूमन नालिज: इट्‌स स्कोप एण्ड लिमिट्‌स
Ans. (a) : डिस्कोर्स ऑन मेथड-डेकार्ट की पुस्तक है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


39. ‘‘ईश्वर मर चुका है।’’ यह कथन किसका है?
(a) नित्शे (b) विट्टेगनस्टीन
(c) हिडेगर (d) सी.एस. पर्स
Ans. (a) : नित्शे‚ विट्टेगनस्टीन‚ हिडेगर‚ सी0एस0 पर्स सभी ईश्वर का खण्डन करते हैं। नीत्शे कहता है कि ईश्वर मर चुका है। हाइडेगर निरीश्वरवादी अस्तित्ववादी है। पर्स निरीश्वरवादी अर्थ क्रियावादी (Pragmutism) के दार्शनिक है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


40. ईश्वर को ‘न्यूज नेचूराटा’ किसने कहा है?
(a) लॉक (b) कांट
(c) स्पिनो़जा (d) ह्यूम
Ans. (c) : लॉक ईश्वर को निर्देशात्मक ज्ञान के रूप में मानता है। कांट-नैतिकता की पूर्वमान्यतओं के रूप में ईश्वर को मानता है। स्पिनोजा ने ईश्वर को नेचूरा नेचूराटा कहा है। ह्यूम के अनुसार ईश्वर की कोई संवेदना नहीं मिलती है इसलिए ईश्वर नहीं है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


41. देकार्त शरीर-मस्तिष्क के संबंध को किस प्रकार स्पष्ट करता है?
(a) मनोवैज्ञानिक-शारीरिक समानान्तरवाद
(b) अन्तर-क्रियावाद
(c) पूर्व स्थापित सामंजस्य
(d) उपतत्त्ववाद
Ans. (b) : मनोवैज्ञानिक-शारीरिक समानांतर वाद‚ स्पिनोजा का सिद्धान्त है। अन्तर क्रियावाद या क्रियाप्रतिक्रियावाद-देकार्त का सिद्धान्त है। पूर्व स्थापित सामंजस्य वाद लाइब्नीज का सिद्धान्त है।
(दोत-डॉ. हरिशंकर उपाध्यय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


42. निम्नलिखित में से तार्किक प्रत्यक्षवादी का चयन कीजिए :
(a) हुसर्ल (b) हिडेगर
(c) ए.जे. अय्यर (d) सी.एस. पर्स
Ans. (c) : हुसर्ल एक फेनोमेगेलॉजिस्ट दार्शनिक है। हाइडेगर अस्तित्ववादी निरीश्वरवादी दार्शनिक है। ए0जे0 एयर-तार्किक प्रत्यक्षवादी तथा असंज्ञानवादी है। सी0 एस0 पर्स एक अमेरिकी अर्थक्रियावादी दार्शनिक है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


43. पर्याप्त कारण् सिद्धान्त के प्रतिपादक है
(a) लॉक (b) बर्कले
(c) लाइब्नित़्ज (d) प्लेटो
Ans. (c) : लाइब्नित़्ज का दावा है कि केवल उसी वस्तु को सत्य माना जा सकता है जिसका कोई पर्याप्त कारण Sufficient reason हो। इसलिए सृष्टि का कोई न कोई पर्याप्त कारण अवश्य होगा। सृष्टि का पर्याप्त कारण ईश्वर ही हो सकता है।
(दोत-हरिशंकर उपाध्याय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


44. यह दार्शनिक कौन था जिसने ‘इतिवृत्तात्मक’ और ‘प्रत्ययों का सहाचर्य’ के बीच के अन्तर को दर्शाया?
(a) देकार्त (b) ह्मूम
(c) लाइब्नित्ज (d) स्पिनोजा
Ans. (b) : ह्यूम अपनी पुस्तक A Treatise on Human Nature में लिखता है कि यदि हम धर्मशास्त्र अथग ज्ञानमीमांसा की कोई पुस्तक लेते हैं तो हमे पूछना चाहिए कि इसमें वस्तु-तथ्य और अस्तित्व संबंधी प्रयोजन का चिंतन है कि ‘नहीं’। यदि नहीं तो इसमें कुतर्क और वितण्डा है‚ इसे जला देना चाहिए। अर्थात्‌ ह्यूम ज्ञान को दो भागों में बांटता है।
(1) आकारिक ज्ञान Formal knowledge
(2) तथ्यात्मक ज्ञान Factual knowledge ह्यूम ज्ञान का आधार संस्कार तथा प्रत्यय मानते हैं।
(दोत-डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


45. यह किसने कहा था कि कारण और परिणाम के बीच का संबंध तार्किक नहीं है‚ केवल मनोवैज्ञानिक है?
(a) ह्मूम (b) कांट
(c) रसल (d) हिडेगर
Ans. (a) : ह्यूम के अनुसार कारण कार्य का संबंध तार्किक न होकर केवल मनोवैज्ञानिक है। उसने कारण कार्य संबंध का खण्डन नहीं करता है बल्कि केवल तार्किक संबंध का खण्डन करता है। ह्यूम ज्ञान का आधार संस्कार तथा प्रत्यय को मानता है‚ जिसका संस्कार नहीं मिलता उसका ज्ञान भी नहीं हो सकता।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


46. डेविड ह्मूम का दार्शनिक मत है
I. इंद्रियानुभविक
II. गोचरवादीप
IV. उपरोक्त सभी प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) केवल I और II सही है।
(b) केवल II और III सही है।
(c) केवल I और III सही है।
(d) IV सही है।
Ans. (c) : डेविड ह्यूम एक अनुभववादी दार्शनिक है। वह इन्द्रियानुभव को ही ज्ञान का दोत स्वीकार करता है। इसलिए वह जगत को बाह्य संस्कारों का समूह कहता है। आत्मा को आंतरिक संस्कारों का समूह कहता है। वह अज्ञेयवादी नहीं बल्कि संशयवादी दार्शनिक है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


47. विट्‌गेनस्टाइन ने पुस्तकें लिखी:
I. ट्रैक्टेटस लोजीको फिलोसोफिकस
II. फिलोसोफिकल इनवेस्टिगेशन्स
III. आन सर्टेनटी
IV. जैट्टल प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) केवल I और II सही है।
(b) केवल II और III सही है।
(c) केवल I और IV सही है।
(d) I, II, III और IV सही है।
Ans. (d) विट्‌गेनस्टाइन की पुस्तक – The Blue Book और The Brown Book है।
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


48. निम्नलिखित दो कथनों में से पहले को अभिकथन
(A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): लॉक के अनुसार मस्तिष्क से प्रारम्भ करना रिक्त पट्टिका है।
तर्क (R): लॉक सहज प्रत्यय को रद्द करता है। उपरोक्त कथनों में से‚ प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए :
(a) (A) और (R) दोनों सही है और (A) का (R) सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है परन्तु (A) का (R) सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही है परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है परन्तु (R) सही है।
Ans. (a) : लॉक अनुभववादी दार्शनिक है। उसके अनुसार ज्ञान इन्द्रियानुभव से होता है। जन्म के समय हमारा मस्तिष्क सफेद कागज या टनुला रस्सा या रिक्त पट्टिका की भांति खाली होता है उस पर संवेदन स्वसंवेदन से ज्ञान अंकित होता है। जन्मजात ज्ञान का खण्डन करते हुए कहा है कि हमारी बुद्धि में ऐसा कुछ भी नहीं है जो पहले इन्द्रियों में न हों।
(दोत-डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


49. निम्नलिखित में से सही क्रम का चयन कीजिए:
(a) थेलस‚ प्रोटागोरस‚ प्लेटो‚ थामस अक्यूनास
(b) लाइब्नित़्ज‚ स्पिनोजा‚ देकार्त‚ लॉक
(c) लॉक‚ बर्कले‚ ह्मूम‚ देकार्त
(d) देकार्त‚ कांट‚ हीगल‚ लॉक
Ans. (a) : क्रमश: दाशनिकों का नाम ग्रीक दार्शनिक थेलीज‚ ऐलेक्जमेण्डर‚ ऐनेक्जमीनीज‚ पाइथागोरस‚ पार्मेनाइडीज‚ हेराक्लाइटस‚ प्रोटागोरस‚ सुकरात‚ प्लेटो‚ आरस्तू‚ संत आगस्टाइन‚ संत अंसेलम‚ संत एक्वीनास‚ देकार्त‚ स्पिनोजा‚ लाइब्नीज‚ लॉक‚ बर्कले‚ ह्यूम‚ कांट‚ बैडले‚ हिगेल।
(दोत-डॉ. हरिशंकर उपाध्याय)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


50. सूची – I को सूची- II से सुमेलित और प्रदत्त कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सूची – I सूची – II
(विचारक) (धारणा)
A. देकार्त i. पर्याय सिद्धान्त
B. बर्कले ii. चिदणु सिद्धान्त
C. लाइब्नित्ज iii. एस्से एस्ट परसिपी
(दृश्यते इति चलते)
D. स्पिनोजा iv. सहज प्रत्यय सिद्धान्त
कूट :
A B C D
(a) iv i ii iii
(b) iv iii ii i
(c) ii iii iv i
(d) iii iv ii i
Ans. (b) देकार्त – सहज प्रत्यय सिद्धान्त बर्कले – एस्से एस्ट परसिपी‚ (होना प्रत्यक्ष होना है।) लाइब्नीज – चिदणु सिद्धान्त स्पिनोजा – पर्याय सिद्धान्त
(दोत-डॉ. दया कृष्ण)
UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi)


Leave a Reply

Top