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UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2014

1. मनुष्य एवं समाज के मध्य अवयवी सम्बन्ध का प्रतिपादन कौन करता है?
(a) हेगेल (b) अरस्तू
(c) मिल (d) बेन्थम
Ans: (a) हेगल अपने दर्शन में मनुष्य एवं समाज के मध्य अवयवी सम्बन्ध (organ in relation) का प्रतिपादन करता है। हेगेल के अनुसार नैतिक चेतना की अभिव्यक्ति क्रमश: परिवार‚ समाज और राज्य के रूप में होती है।
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2. ‘साध्यों के साम्राज्य के सदस्य के रूप में कार्य करें’-
यह कौन प्रतिपादित करता है?
(a) अरस्तू (b) स्पिनोजा
(c) मिल (d) केण्ट
Ans: (d) काण्ट अपने अहैतुक आदेश के पांचवे सूत्र साध्यो के राज्य का सूत्र में कहता है कि ‘साध्यों के साम्राज्य के सदस्य के रूप में कार्य करें।
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3. ‘एक असन्तुष्ट मनुष्य होना बढ़िया है एक सन्तुष्ट सूअर की अपेक्षा‚ एक असन्तुष्ट सुकरात होना बढ़िया है‚ एक सन्तुष्ट मूर्ख की अपेक्षा’- यह कथन है
(a) केण्ट का (b) ह्यूम का
(c) मिल का (d) बेन्थम का
Ans: (c) मिल अपने सुखवादी चिंतन के आलोक में कहते है कि‚ ‘एक असन्तुष्ट मनुष्य होना बढ़िया है एक सन्तुष्ट सूअर की अपेक्षा‚ एक असन्तुष्ट सुकरात होना बढ़िया है‚ एक सन्तुष्ट मूर्ख की अपेक्षा’। मिल बेन्थम के उपयोगितावाद में मौलिक संशोधन करता है।
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4. ‘शुद्ध सत्‌’ की अवधारणा का प्रतिपादन निम्नलिखित दार्शनिकों में से किसने किया है?
(a) पाइथागोरस (b) डिमोक्रिटस
(c) हेराक्लाइटस (d) पार्मेनाइडी़ज
Ans: (d) इलियाई विचारक पार्मेनाइडीज ने अपने दर्शन ‘शुद्ध सत्‌’ की अवधारणा का प्रतिपादन करने वाले ग्रीक विचारक माने जाते है। पाइथागोरस ने ‘संख्या-सिद्धान्त’‚ हेराक्लाइटस ने परिवर्तनसिद्धांत तथा डेमोक्रिटस ने परिमाणात्मक परमाणुवाद की स्थापना किया।
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5. मिथ्या प्रतीति के विषय में रामानुज को निम्नलिखित सिद्धांतों में से कौन सा एक मान्य है?
(a) सत्‌ ख्याति (b) असत्‌ ख्याति
(c) आत्म ख्याति (d) अनिर्वचनीय ख्याति
Ans: (a) ‘मिथ्या प्रतीति के सन्दर्भ में रामानुज का मत ‘सत्‌ ख्याति’ को मानते हैं जिसके अनुसार हमें जो मिथ्या ज्ञान होता है वह एक तरह का सत्‌ ज्ञान ही है।
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6. निम्नलिखित में से किसे ‘प्रच्छन्न बौद्ध’ कहा जाता है?
(a) महावीर (b) सांख्य
(c) शंकर (d) चार्वाक
Ans: (c) अद्वैत वेदान्त दर्शन के कुछ आलोचक जो शंकर मत की आलोचना करते है को ‘प्रच्छन्न बौद्ध’ कहते है।
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7. ‘जिन’ संबंधित है
(a) बौद्ध धर्म से (b) जैन धर्म से
(c) सिक्ख धर्म से (d) इस्लाम धर्म से
Ans: (b) ‘जिन’ शब्द जैन धर्म से संबंधित है। ‘जिन’ शब्द से ही ‘जैन’ शब्द की व्युत्पत्ति मानी जाती है। ‘जिन’ शब्द का अर्थ है ‘जीतना’। जो अपने निम्नकोटि के स्वभाव या मनोवेगों पर विजय प्राप्त करके सर्वोच्च सत्ता का साक्षात्कार कर लिया है वह ‘जिन’ है।
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8. प्रज्ञा‚ शील और समाधि मुख्य अवधारणाएँ हैं:
(a) हिन्दू धर्म (b) जैन धर्म
(c) बौद्ध धर्म (d) इनमे से कोई नहीं
Ans: (c) अष्टांगिक मार्ग के अन्तर्गत बौद्ध दर्शन में निर्वाण प्राप्ति के लिए शील‚ समाधि और प्रज्ञा की शिक्षा दी जाती है। जिसे ‘दिशिक्षा’ कहते है। प्रज्ञा के अन्तर्गत सम्यक्‌ दृष्टि और सम्यक्‌ संकल्प आते है। शील में सम्यक्‌ वाक्‌‚ सम्यक्‌ कर्मान्त‚ सम्यक्‌ आजीव और सम्यक्‌ व्यायाम आते है। ‘समाधि’ में सम्यक स्मृति और सम्यक्‌ समाधि आते हैं।
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9. नैतिकता में आन्तरिक आदेश को कौन स्वीकार करता है?
(a) बेन्थम (b) मिल
(c) सिजविक (d) ह्यूम
Ans: (b) स्वार्थवाद से परार्थवाद की ओर जाने के लिए बेन्थम चार प्रकार की बाह्य अनुशास्तियां (आदेश sanctions) मानता है। मिल इन्हे अपर्याप्त बताता है और उसने परहित पर आन्तरिक आदेश (अनुशस्ति- sanction) को भी इसमें जोड़कर नैतिकता के लिए आवश्यक मानता है।
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10. कोई भी प्राक्कल्पना वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण तब है जब वह
(a) स्थापित वैज्ञानिक नियम के विरूद्ध हो।
(b) धार्मिक विश्वास के विरूद्ध हो।
(c) धार्मिक विश्वास से संगति रखता हो।
(d) सत्यापनीय हो।
Ans: (d) कोई भी प्राक्कल्पना महत्वपूर्ण तब होती है जब वह सत्यापनीय हो। चूंकि प्रत्येक वैज्ञानिक व्याख्या प्राक्कल्पना मानी जाती हैं प्राक्कल्पना के रूप में सत्य या असत्य का प्रश्न सदैव खुला रहता है।
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11. ‘पंचलब्धि’ का अर्थ क्या है?
(a) उपलब्धि‚ महालब्धि‚ कारणालब्धि‚ मोचनलब्धि‚ अनुपलब्धि
(b) क्षयोपशमलब्धि‚ विशुद्धिलब्धि‚ देशनालब्धि‚ प्रायोग्यलब्धि‚ कारणलब्धि
(c) लाभालब्धि‚ देशनालब्धि‚ कृपालब्धि‚ संवरालब्धि‚ निर्जरालब्धि
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (b) पंचलब्धि का अर्थ है- क्षयोपशमलब्धि‚ विशुद्धिलब्धि‚ देशनालब्धि‚ प्रायोग्यलब्धि‚ कारणलब्धि।
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12. दिए गए अभिकथन के लिए सही प्रतीकात्मक रूप का चयन करें:
अभिकथन यदि कुछ नष्ट होता है‚ तो कोई-न-कोई दोषी ठहराया जाएगा। प्रतीकात्मक रूप:
(a) (∃x) Dx ⊃ (∃y) (Py . By)
(b) (∃x) Dx ⊃ (Py . By)
(c) (∃x) – Dx ⊃ – (∃y) (Py . By)
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (b) ‘यदि कुछ नष्ट होता है‚ तो कोई-न-कोई दोषी ठहराया जाता है। का प्रतीकाषक रूप है- (∃x) Dx ⊃ (Py . By)
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13. सूची – I को सूची – II से सुमेलित करें तथा नीचे दिए गए विकल्पों में से सही को चिह्नित करें :
सूची I सूची II
(A) – (pvq) α (- p . – q) i. डिस्ट्रीब्यूशन
(B) [p . (q v r)] α ii. डबल-निगेशन [(p . q) v (p . r)]
(C) p α – – p iii. एक्सपोर्टेशन
(D) [(p . q) ⊃ r] α iv. डी मॉर्गन थ्यूरम [p ⊃ ( q ⊃ r)] विकल्प:
(A) (B) (C) (D)
(a) iv i ii iii
(b) i iii ii iv
(c) ii iv i iii
(d) iv iii ii i
Ans: (a) – (pvq) α (- p . – q) – डी मॉर्गन थ्यूरम [p . (q v r)] α[(p . q) v (p . r)] – डिस्ट्रीब्यूशन p α – – p – डबल-निगेशन [(p . q) ⊃ r] α[p ⊃ ( q ⊃ r)] – एक्सपोर्टेशन
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14. दी गई युक्ति की परीक्षा करें तथा दिए गए विकल्पों में से सही का चयन करें:
युक्ति
(V ⊃ – W) . (X ⊃ Y)
(- W ⊃ Z) . (Y ⊃ – A)
(Z ⊃ -B) . (-A ⊃ C) V . X ∴ -B . C विकल्प
(a) वैध
(b) अवैध
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (a)
(V ⊃ – W) . (X ⊃ Y)
(- W ⊃ Z) . (Y ⊃ – A)
(Z ⊃ -B) . (-A ⊃ C) V . X ∴ -B . C यह एक वैध युक्ति है।
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15. रामानुज के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा एक आत्मा की सही स्थिति निरूपित करता है?
(a) आत्मा और ईश्वर में अनौपाधिक अभेद है।
(b) ईश्वर और आत्मा दो भिन्न सत्ताएँ हैं।
(c) आत्मा और शरीर अभिन्न है।
(d) आत्मा और ईश्वर का संबंध अवयव एवं अवयवी का है।
Ans: (d) रामानुज के दर्शन में जीव (आत्मा) एवं जगत का ईश्वर से अवयव-अवयवी का संबंध माना गया है। यह ‘अपृथक-सिद्ध’ सम्बन्ध को मानते हैं। इनका दर्शन विशिष्टाद्वैत वेदान्त कहलाता है।
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16. निम्नलिखित में से कौन सा एक बौद्धमत के बारे में सही है?
(a) इस जीवन में ही निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है।
(b) मृत्योपरान्त जीवन में ही निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है।
(c) इस जीवन और मृत्योपरांत जीवन दोनों में निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है।
(d) तथागत की अनुकम्पा से निर्वाण प्राप्त किया जा सकता हैं।
Ans: (c) बौद्ध दर्शन में निर्वाण के दो भेद प्राप्त होते हैंउपाधिशेष् ा और निरूपाधिशेष। उपाधिशेष निर्वाण जीवन के रहते हुए निर्वाण प्राप्त कर लेना है तथा निरूपाधिशेष निर्वाण में शरीरपात या मृत्योपरांत निर्वाण प्राप्त होता है। उपाधिशेष निर्वाण प्राप्त व्यक्ति अर्हत कहलाता है। वस्तुत: ‘अर्हत्‌’ को ही निरूपाधिशेष निर्वाण प्राप्त होता है।
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17. लम्बाई एवं चौड़ाई के विचार को नीतिशास्त्र में कौन स्वीकार करता है?
(a) मिल (b) स्पिनो़जा
(c) स्पेन्सर (d) मूर
Ans: (c) हर्बट स्पेन्सर ने सुख और विकास का समन्वय कर सुखवाद को विकासवादी आयाम दिया था। स्पेन्सर ने जीवन के दो आयाम बताएं हैं जिससे जीवन की अच्छाई तथा बुराई की माप की जा सकती हैं। ये आयाम है जीवन की ‘लंम्बाई’ तथा चौड़ाई। जीवन की ‘लम्बाई’ से तात्पर्य ‘आयु’ से है तथा जीवन की ‘चौड़ाई’ का अर्थ जीवन की ‘सक्रियता’ या ‘कर्मठता’ है।
(नितिशास्त्र का सर्वश्रण- संगम लाला पाण्डेय)
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18. ब्रह्म किस प्रकार की सत्ता है?
(a) व्यावहारिक
(b) पारमार्थिक
(c) व्यावहारिक और पारमार्थिक दोनों
(d) प्रतिभासिक
Ans: (b) शांकर अद्वैत वेदान्त दर्शन में तीन तरह की सत्ताएं क्रमश: प्रतिभासिक‚ व्यावहारिक तथा पारमार्थिक सत्ता मानी गयी है। भ्रम और स्वप्न के प्रत्यय प्रतिभासिक सत्ता‚ ‘जगत’‚ व्यावहारिक सत्ता तथा ‘ब्रह्म’ को पारमार्थिक सत्ता माना गया है।
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19. ईश्वर से प्रार्थना और योगाभ्यास करने के लिए व्यक्ति किस आश्रम व्यवस्था में वन में जाता है?
(a) ब्रह्मचर्य (b) गृहस्थ
(c) वानप्रस्थ (d) संन्यास
Ans: (c) भारतीय दर्शन एवं जीवन पद्धति में चार प्रकार के आश्रमों के माध्यम से किसी व्यक्ति के कर्मों आदि का निर्धारण किया गया था जो क्रमश: – ब्रह्मचर्य‚ गृहस्थ‚ वानप्रस्थ तथा संन्यास। वानप्रस्थ आश्रम में कोई भी मनुष्य गृहस्थावस्था का त्याग कर वन में ईश्वर से प्रार्थना और योगाभ्यास करने के लिए व्यक्ति जाता है।
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20. नीचे दो वाक्य कथन (A) तथा तर्क (R) के रूप में दिए गए हैं। उनके अनुसार दिए गए कूट से सही का चयन करें:
कथन (A) : मीमांसा मतानुसार वेद नित्य हैं।
तर्क (R) : मीमांसा मतानुसार शब्द नित्य हैं।
कूट:
(a) (A) तथा (R) दोनों सत्य हैं तथा (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सत्य हैं‚ किन्तु (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सत्य हैं‚ (R) असत्य है तथा (R)‚ (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत नहीं है।
(d) (A) असत्य है‚ (R) सत्य हैं तथा (R)‚ (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
Ans: (b) मीमांसा शब्दनित्यत्ववाद का प्रतिपादन करके वेद-वाक्यों के प्रामाण्य का समर्थन करती है। उसके अनुसार वेद जिन शब्दों से बने हैं वे शब्द नित्य है। जैमिनी के अनुसार वेद की नित्यता का तात्पर्य उसके पाठ के स्थायित्व से है।
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21. सूची – I को सूची – II से सुमेलित करें और सही विकल्प का चयन करें:
सूची I सूची II
(A) पुरूषार्थ i. वर्ण
(B) ब्रह्मविहार ii. मूषावादा
(C) पंचशील iii. मोक्ष
(D) वैश्य iv. करूणा विकल्प:
(A) (B) (C) (D)
(a) i ii iii iv
(b) iii iv ii i
(c) iv ii i iii
(d) iii i ii iv
Ans: (b) पुरूषार्थ – मोक्ष ब्रह्मविहार – करूणा पंचशील – मूषावादा वैश्य – वर्ण
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22. बैन्थम के संदर्भ से‚ निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही कोड का चयन करें:
1. अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम सुख
2. प्रकृति ने मानवमात्र को दो सर्वसमर्थ स्वामियों के शासन में रखा है- वेदना और प्रसन्नता
3. समुदाय वैयक्तिक व्याष्टियों का कल्पित निकाय है। कोड:
(a) 1 और 2 सत्य हैं। (b) 1 और 3 सत्य हैं।
(c) केवल 1 सत्य है। (d) 1, 2 और 3 सत्य हैं।
Ans: (d) बेन्थम एक सुखवादी विचारक हैं। जो ‘सुख’ को नैतिकता का मापदण्ड मानते है। उनके सन्दर्भ अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम सुख‚ प्रकृति ने मानवमात्र को दो सर्वसमर्थ स्वामियों के शासन में रखा है- वेदना और प्रसन्नता‚ तथा समुदाय वैयक्तिक व्यष्टियों का कल्पित निकाय है‚ सही है।
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23. ‘प्रबुद्ध अराजकता’ का अर्थ है:
(a) अव्यवस्था
(b) राज्य की अविद्यमानता
(c) बुद्धिमान लोगों की अराजकता
(d) साम्राज्यवाद
Ans: (c) ‘प्रबुद्ध अराजकता’ का अर्थ है बुद्धिमान लोगों की अराजकता है।
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24. यह विचार कि ‘जाति उतनी वास्तविक है जितना कि व्यक्ति’ किसका है?
(a) न्याय सम्प्रदाय (b) बौद्ध सम्प्रदाय
(c) चार्वाक सम्प्रदाय (d) अद्वैत वेदान्त सम्प्रदाय
Ans: (a) न्याय दर्शन एक वस्तुवादी दर्शन है जो जाति की सत्ता को मानता है। उसके अनुसार जाति की वस्तुगत सत्ता हैं। उसके अनुसार ‘जाति उतनी वास्तविक है‚ जितना कि व्यक्ति’।
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25. निम्नलिखित में से कौन सा कथन गांधी के जीवनदर्श न का सही चित्रण प्रस्तुत नहीं करता?
(a) पाप से घृणा करो‚ पापी से नहीं।
(b) अहिंसा दुष्टता के विरूद्ध नैतिक संघर्ष है।
(c) ऊपर के दोनों विकल्प सही हैं।
(d) उपर्युक्त दोनों विकल्प (a) और (b) सही नहीं हैं।
Ans: (c) गांधी जी के विचार में सत्य‚ अहिंसा‚ प्रेम का विशिष्ट स्थान है। उनके अनुसार‚ पाप से घृणा करो‚ पापी से नहीं’ तथा ‘अहिंसा दुष्टता के विरूद्ध नैतिक संघर्ष है।
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26. गांधीजी के अनुसार संरचनात्मक कार्यक्रम का लक्ष्य है:
(a) बेरोजगारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना
(b) कातने वाले और बुनाई करने वालों को कुछ मजदूरी वितरित करना
(c) अहिंसावादी समाज का सृजन
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (c) गांधी जी के संरचनात्मक कार्यक्रम का लक्ष्य अहिंसामुक्त समाज का सृजन करना था। विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों की रूपरेखा गांधी जी बनाते हैं।
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27. गांधीजी के अनुसार सर्वधर्म समभाव का अर्थ है
(a) सही धर्मों में एकता है।
(b) सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
(c) सभी धर्मों का संश्लेषण किया जाना चाहिए।
(d) सभी धर्म नैतिक मूल्य सिखाते हैं।
Ans: (b) गांधी जी के अनुसार सर्वधर्म समभाव का अर्थ है कि सभी धर्मों के समान व्यवहार करना चाहिए। गांधी जी धर्म को एक दृष्टि से जीने का ढंग मानते हैं‚ जिसके चयन में स्वतंत्रता होनी चाहिए। अत: प्रत्येक व्यक्ति को अपने चुने हुए ढंग के साथ-साथ दूसरे के चुने हुए ढंगों की स्वतंत्रता के प्रति आदरभाव रखना चाहिए।
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28. सम्यक्‌ दर्शन‚ सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण को जैन नीतिशास्त्र में निम्नलिखित कहा जाता है जो अच्छे जीवन में चमकता है:
(a) त्रिरत्न (b) त्रिगुण
(c) त्रिज्ञान (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (a) जैन नीतिशास्त्र में बंधन से छुटकारा पाने के लिए तथा मोक्ष की प्राप्ति के लिए तीन आचार बतलाये गये हैं‚ जिन्हें ‘त्रिरत्न’ कहा जाता है‚ जो क्रमश:- सम्यक्‌ दर्शन‚ सम्यक्‌ ज्ञान और सम्यक्‌ आचरण है।
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29. गांधीजी के अनुसार‚ न्यासिता का अर्थ है
(a) रोटी के लिए श्रम
(b) स्वदेशी
(c) सम्पदा रखना और जरूरतमंद में उसका वितरण
(d) लालच
Ans: (c) गांधीजी श्रम और पूंजी के सम्बन्ध में प्रेम एवं विवास पर आधारित ‘न्यासता सिद्धांत’ देते है। किसी भी व्यक्ति के जरूरत से अधिक सम्पत्ति है तो वह उसका अपने आपको न्यासी समझे अर्थात उसका संरक्षक समझे उसे सम्पदा को अपनी अमानत समझे जिसे उसने इसलिए संजोया है ताकि वह इसे जरूरत में ही वितरित कर सके।
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30. नीचे दिये गये कूट का इस्तेमाल करते हुए निम्नलिखित सिद्धांतों को उनके सही क्रम में सजाइये:
I. प्रतीत्य समुत्पाद
II. निर्वाण
III. प्रथम आर्य सत्य
IV. आष्टांगिक मार्ग (दु:ख निरोध मार्ग)
कूट:
(a) I, II, III, IV (b) IV, III, II, I
(c) III, I, II, IV (d) II, III, I, IV
Ans: (c) बौद्ध दर्शन के ये सभी सिद्धान्त किसी न किसी आर्य सत्य से सम्बन्धित हैं। जो क्रमश: प्रथम आर्यसत्य‚ प्रतीत्य समुत्पाद‚ निर्वाण तथा आष्टांगिक मार्ग है।
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31. सत्याग्रह के दर्शन का श्रेय मूल रूप से किसे दिया जाता है?
(a) रस्किन (b) महात्मा गाँधी
(c) डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (d) कौटिल्य
Ans: (b) सत्याग्रह का तात्पर्य सत्य के प्रति आग्रह है। इस प्रकार के दर्शन का श्रेय महात्मा गांधी को जाता है‚ जिन्होंने सत्य को साध्य बना दिया है।
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32. अहिंसा शब्द का उपयोग सर्वप्रथम निम्नलिखित भारतीय ग्रंथ में किया गया था:
(a) भगवद्‌ गीता (b) छान्दोग्योपनिषद्‌
(c) रामायण (d) ऋग्वेद
Ans: (b) बौदिक साहित्य में सर्वप्रथम अहिंसा शब्द को सर्वप्रथम प्रयोग छान्दोग्यउपनिषद्‌ में मिलता है। यज्ञ स्वरूप परमात्मा की उपासना के लिए 17वें खण्ड में बताया गया है जो तप‚ दान‚ आर्जव‚ अहिंसा तथा सत्य वचन है‚ वे ही इस यज्ञ की दक्षिणा है।
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33. गाँधीजी के अनुसार धर्म
(a) न्याय है। (b) प्रार्थना है।
(c) नैतिक सिद्धांत है। (d) स्वतन्त्रता है।
Ans: (c) गांधीजी धर्म को एक नैतिक सिद्धान्त से जोड़कर देखते है। गांधी जी के अनुसार वास्तविक धर्म और शुद्ध नैतिकता एक दूसरे से अटूट रूप में बंधे रहते है।
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34. ‘हम व्यापक उत्पादन नहीं चाहते हैं‚ परन्तु हम जनता के लिए उत्पादन चाहते हैं’ इस कथन की हिमायत किसने की है?
(a) मार्क्स (b) गाँधी
(c) नेहरू (d) अमर्त्य सेन
Ans: (a) गांधी जी उद्योगों की अतिशयता के विरूद्ध थे। उनके अनुसार हम व्यापक उत्पादन नहीं चाहते हैं‚ परन्तु हम जनता के लिए उत्पादन चाहते है। गांधी जी के अनुसार उत्पादन उतना ही किया जाना चाहिए जितना जरूरत हो।
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35. सूची – I एवं सूची – II पर विचार कीजिये एवं सही सुमेलित कूट का चयन करें:
सूची I सूची II
(A) अद्वैत वेदान्त i. निम्बार्क
(B) विशिष्टाद्वैतवाद ii. शंकर
(C) द्वैतवाद iii. रामानुज
(D) द्वैताद्वैतवाद iv. मध्व
कूट:
A B C D
(a) iii ii i iv
(b) ii iii iv i
(c) iv ii iii i
(d) i ii iii iv
Ans: (b) शंकर का अद्वैत वेदान्त‚ रामानुज का विशिष्टाद्वैतवाद‚ मध्व का द्वैतवाद तथा निम्बर्क का द्वैताद्वैतवाद।
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36. निम्नलिखित में से कौन से कथन गाँधीजी के सत्य के प्रत्यय से संबंधित हैं?
1. सत्य एक तत्त्वमीमांसीय पदार्थ हैं।
2. सत्य एक नैतिक पदार्थ है।
3. सत्य केवल प्रतिज्ञप्तियों का गुण है। नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिये:
(a) 1, 2 और 3 (b) 1 और 2
(c) 2 और 3 (d) 1 और 3
Ans: (b) गांधी जी के अनुसार‚ सत्य ईश्वर हैं और ईश्वर सत्य हैं। उन्होंने सत्य के प्रत्यय को तत्वमीमांसीय कोटि में रखा तथा सत्य को नैतिकता की कोटि में स्थापित किया।
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37. नीचे दो कथन दिए गए हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) का नाम दिय गया है:
अभिकथन (A): न्याय का निष्कर्ष आधारवाक्य की तुलना में ज्यादा सामान्य नहीं हो सकता है। कारण (R) : न्याय वाक्य का निष्कर्ष तभी सत्य होता है‚ जब आधारवाक्य सत्य हैं। उपर्युक्त दो कथनों के संदर्भ में‚ नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें:
कूट:
(a) (A) (R) दोनों सत्य हैं और (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य हैं‚ परन्तु (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सत्य हैं‚ परन्तु (R) असत्य है।
(d) (A) असत्य है‚ परन्तु (R) सत्य है।
Ans: (b) किसी भी न्याय का निष्कर्ष आधारवाक्य की तुलना में ज्यादा व्यापक (सामान्य) नहीं हो सकता है। और एक न्याययुक्ति में यदि आधारवाक्य सत्य है तो निष्कर्ष को भी सत्य होना होता है अत: अभिकथन (A) और कारण (R) सत्य तो है परन्तु व्याख्या नहीं।
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38. केण्ट के अनुसार स्वच्छता के नियम स्वास्थ्य के लिये सहायक होते हैं:
(a) निरपेक्ष आदेश (b) सापेक्ष आदेश
(c) नैतिक आदेश (d) इनमें से कोई नहीं
Ans: (b) काण्ट के अपने नैतिकता से सम्बन्धित आदेशों के दो रूपों में विभाजित होता है- निरूपाधिक तथा सोपाधिक आदेश। उसके अनुसार‚ स्वच्छता के नियम स्वास्थ्य के लिए सहायक होते हैं- ऐसे आदेश सोपाधिक होते है।
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39. निम्नलिखित का मिलान करें और नीचे दिए कोड से सही उत्तर का चयन करें:
सूची I सूची II
(प्रवृत्ति) (दार्शनिक)
(A) आलोचनात्मक दर्शन i. रसेल
(B) बुद्धिवाद ii. लॉक
(C) अनुभववाद iii. स्पिनोजा
(D) विश्लेषणात्मक दर्शन iv. केण्ट
कूट:
A B C D
(a) iv iii ii i
(b) iii iv i ii
(c) iv i iii ii
(d) ii i iv iii
Ans: (a) काण्ट का अलोचनात्मक दर्शन‚ स्पिनोजा का बुद्धिवाद‚ लॉक का अनुभववाद तथा रसेल का विश्लेषणात्मक दर्शन।
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40. वैशेषिक के अनुसार‚ जगत्‌ का समवायिकरण है
(a) ईश्वर (b) परमाणु संयोग
(c) द्वयणुक (d) परमाणु
Ans: (a) वैशेषिक दर्शन में जगत्‌ का समवायिकरण परमाणुओं की स्वीकार किया गया है। समवायिकरण एक तरह से उपादान कारण ही न्याय-वैशेषिक में माने जाते है।
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41. पारमार्थिक सत्ता का निम्नलिखित के द्वारा खंडन किया जा सकता है:
(a) व्यावहारिक सत्ता (b) प्रातिभासिक सत्ता
(c) (a) और (b) दोनों (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (d) अद्वैत वेदान्त के अनुसार तीन प्रकार की रचनाएं हैं। प्रतिभासिक सत्ता‚ जो भ्रम‚ स्वप्नाति का विषय है‚ का बोध व्यावहारिक सत्ता द्वारा और जगत से सम्बन्धित व्यावहारिक सत्ता का बोध पारमार्थिक सत्ता के ज्ञान द्वारा हो सकता है परमार्थिक सत्ता ब्रह्म की सत्ता है।
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42. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
(a) चिद्‌बिंदु का सिद्धांत – लाइब्नित़्ज
(b) विकार का सिद्धांत – स्पिनोजा
(c) बर्कले का दर्शन – अहंमात्रवाद
(d) ‘प्रत्ययों का संबंध-विषयक – केण्ट ज्ञान’ तथा ‘वस्तु स्थितिविष् ायक ज्ञान’ के बीच भेद की स्थापना
Ans: (d) यह युग्म ‘प्रत्ययों के संबंध-विषयक ज्ञान’ तथा ‘वस्तु स्थिति विषयक ज्ञान’ के बीच भेद की स्थापना’ काण्ट के दर्शन में नहीं है।
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43. यह विचार कि ‘‘ईश्वर मात्र यथार्थ है और अन्य सीमित वस्तुएँ ईश्वर के अस्तित्व में दबा दी जाती है या नष्ट कर दी जाती है’’‚ कहलाता है:
(a) ईश्वरवाद (b) सर्वेश्वरवाद
(c) जीववाद (d) तटस्थेश्वरवाद
Ans: (a) यह विचार कि ‘ईश्वर मात्र यथार्थ है और अन्य सीमित वस्तुएं ईश्वर के अस्तित्व में दवा दी जाती है या नष्ट कर दी जाती है।’ यह एक सर्वेश्वरवादी विचार है।
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44. हेगेल के दर्शन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही नहीं है?
(a) ईश्वर का प्रत्यय ≠ उच्चतम सामान्य
(b) सत्‌ बौद्धिक है।
(c) शुद्ध सत्ता = अ-सत्ता
(d) चरम सत्ता की व्याख्या कारणता के पदों में संभव है।
Ans: (c) हेगेल का विचार निरपेक्ष प्रत्ययवाद है। जिनके अनुसार ‘सत्‌ बौद्धिक है’। ‘शुद्ध सत्ता’ स्वयं सत्ता का सूचक है। अत:
असत्ता का प्रश्न ही नहीं उठता।
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45. कौन प्रतिपादित करता है कि ईश्वर आभास है?
(a) स्पिनोजा (b) देकार्त
(c) ह्यूम (d) ब्रैडले
Ans: (d) ब्रैडले का दर्शन ‘आभास और सत्‌’ का दर्शन है। जिसमें वह सम्पूर्ण जगत में आभास दिखा कर ‘सत्‌’ की सत्ता का प्रतिपादन करते है। ब्रैडले के अनुसार हम ‘सत्‌’ को आभासों के माध्यम से ही जानते है।
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46. कौन कहता है कि ‘अव्याघात परमसत्‌ की कसौटी है’?
(a) हेगेल (b) प्लेटो
(c) ब्रैडले (d) इनमें से कोई नहीं
Ans: (*)
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47. नीत्शे के दर्शन के सर्वाधिक उपयुक्त समूह कौन सा है?
(a) इन्द्रिय-प्रदत्त‚ स्वानुभवमूलक कथन‚ इपोखे और त्रासदी
(b) संकट‚ अतिमानव‚ ईसाई धर्म पर आघात‚ विकास
(c) अधिमानस‚ त्रासदी‚ इपोखे‚ वाक्‌-क्रिया
(d) संकट‚ त्रासदी‚ स्वानुभवमूलक कथन‚ ईसाई धर्म पर आघात
Ans: (b) नीत्शे एक विकासवादी दार्शनिक था। उसने इसाई धर्म पर जितना आघात किया उतना किसी ने नहीं किया। इस पर समूह का क्रम संकट‚ अतिमानव‚ ईसाई धर्म पर आघात‚ विकास है।
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48. कौन सा कथन सत्य नहीं है?
(a) आत्मनिष्ठ प्रत्ययवाद का परिणाम अहंमात्रवाद होता है।
(b) प्रत्ययवाद वह सिद्धांत है जो सामान्य की व्याख्या के लिये दिया गया है।
(c) कारणता आगमन का आधार है।
(d) केण्ट दिक्‌ और काल को प्रागानुभविक प्रत्यय का नाम देता है।
Ans: (d) काण्ट देश और काल को संवेदानाओं को प्रागनुभविक तो कहता है परन्तु इन्हें संवेदना के आकार कहता है। यह संप्रत्यय या प्रत्यय नहीं है।
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49. किसने कहा है – ‘‘ज्ञान‚ मुख्य रूप से एक निश्चित वस्तु का होता है और अनिश्चित के बोध से इसका भेद होना चाहिए’’?
(a) अम्बेडकर (b) राधाकृष्णन
(c) के.सी.भट्टाचाय (d) टैगोर
Ans: (c) के.सी. भट्टाचार्य की एक परात्ममूलक अध्यात्मवादी विचारक माना जा सकता है। उनके अनुसार‚ ज्ञान‚ मुख्य रूप से एक निश्चित वस्तु का होता है और अनिश्चित के बोध से इसका भेद होना चाहिए।
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50. नीचे दो समूह – I और – II दिए गए हैं। समूह I में प्रतिपादक और समूह II में सिद्धांत दिए गए हैं। नीचे दिए कोडों से सही मेलित का चयन करें:
सूची- I सूची- II
(a) शंकर i. प्रपत्ति
(b) रामानुज ii. शून्यता
(c) मध्व iii. जीवन मुक्ति
(d) नागार्जुन iv. आनन्द तारतम्य
कूट:
a b c d
(a) i ii iii iv
(b) iii i iv ii
(c) ii i iii iv
(d) i iii ii iv
Ans: (b) शंकर जीवन मुक्ति रामानुज प्रपत्ति मध्व आनन्द तारतम्य नागार्जुन शून्यता
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51. स्पिनोजा ने मन और देह के बीच सम्बन्ध को निम्नलिखित की सहायता से स्पष्ट किया है:
(a) अंत:क्रियावाद (b) समानांतरवाद
(c) पूर्व-स्थापित सामंजस्य (d) भेद में अभेद
Ans: (b) पाश्चात्य दर्शन जगत में आधुनिक बुद्धिवादियों में मन-
शरीर के द्वैत को स्थापित करने की समस्या एक प्रमुख समस्या रही है। स्पिनोजा‚ जो मन और शरीर को दो भिन्न गुण मानता है‚ का सम्बन्ध स्थापित करने के लिए ‘समान्तरवाद’ का सहारा लेता है।
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52. बौद्ध दर्शन में अविनाभाव सम्बन्ध आधारित है
(a) तादात्म्य‚ निषेध‚ नियत साहचर्य पर
(b) तादात्म्य‚ कारणाता‚ निषेध पर
(c) कारणाता‚ निषेध‚ नियत साहचर्य पर
(d) कारणाता‚ तादात्म्य‚ नियत साहचर्य पर
Ans: (b) बौद्ध दर्शन में अविनाभाव सम्बन्ध तादात्म्य‚ कारणता‚ निषेध पर आधारित है।
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53. निम्नलिखित उदाहरण में दोष है: ‘आकाशपुष्प सुगन्धित है क्योंकि उसमें पुष्पतत्व है’:
(a) अनेकान्तिक (b) सत्प्रतिपक्ष
(c) बाधित (d) आश्रयासिद्ध
Ans: (d) ‘आकाशपुष्प सुगन्धित है क्योंकि उसमें पुष्पत्व है।’ में ‘आकाशपुष्प’ काल्पनिक है अत: हेतु (पुष्पत्व) असिद्ध है। अत:
यहां ‘आश्रयासिद्ध’ दोष है।
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54. नीचे दी गई युक्ति के दोष का निर्धारण दिए गए कूट के आधार पर करें:
युत्ति:
सभी हिंदू आर्य हैं:
कोई भी पारसी हिंदू नहीं है। ∴ कोई भी पारसी आर्य नहीं है।
कूट:
(a) अनुचित बृहद्‌-पद दोष
(b) अनुचित लघु-पद दोष
(c) चतुष्पद-दोष
(d) अव्याप्त मध्यम-पद दोष
Ans: (a) दी गयी युक्ति में अनुचित वृहद्‌पद दोष है। क्योंकि बृहद पद आधारवाक्य में अव्याप्त है और निष्कर्ष में व्याप्त है। अत: यहां अनुचित ब्रहद्‌पद होगा।
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55. ‘विचार के नियम’ के संदर्भ में दिए गए नियमों के सर्वोत्तम संयोजन का चुनाव दिए गए कूट में से करें।:
नियम:
I. तादात्म्य का नियम
II. व्याघात का नियम
III. मध्य-दशा परिहार का नियम
IV. पर्याप्त कारणता का नियम
(संयोजन)कूट:
(a) I और II सही हैं।
(b) III और IV सही हैं।
(c) I‚ II और IV सही हैं।
(d) I‚ II‚ III और IV सही हैं।
Ans: (d) ‘विचार के नियम’ – तादात्म्य का नियम‚ व्याघात नियम‚ मध्य-दशा परिहार का नियम‚ पर्याप्त कारणता का नियम।
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56. सूची – I तथा सूची – II को सुमेलित करें तथा नीचे दिए गए कोड से सही उत्तर का चुनाव करें:
सूची- I सूची- II
(A) AAA i. फेरियो
(B) AII ii. केलारेंट
(C) EAE iii. डारी
(D) EIO iv. बारबरा
v. बारोको
कूट:
A B C D
(a) iii v iv i
(b) iii iv i ii
(c) iv iii ii i
(d) v iv i iii
Ans: (c) AAA – बारबरा AII – डारी EAE – केलारेंट EIO – फेरियो
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57. फेनोमेनॉलॉजी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा सत्य है?
(a) फेनोमेनॉलॉजिस्ट तथ्य-विशेष से सरोकार नहीं रखता।
(b) फेनोमेनॉलॉजी की विषय-सामग्री आदर्श-अर्थ और सामान्य-संबंध हैं‚ जिनके साथ अहम्‌ का संघर्ष अपनी अनुभूति में होता है।
(c) उपर्युक्त कथनों में से केवल (a) सत्य है तथा (b) असत्य है।
(d) उपर्युक्त कथनों में से (a) और (b) दोनों सत्य हैं।
Ans: (d) ‘फेनोमेनोलॉजी’ हुसर्ल के दर्शन का मुख्य बिन्दु रही है। फेनोमेनोलॉजी में फेनोमेनोलॉजिस्ट तथा-विशेष से सरोकार नहीं रखता। फेनोमेनॉलॉजी की विषय-सामग्री आदर्श-अर्ध और सामान्य संबंध है‚ जिनके साथ अहम्‌ का संघर्ष अपनी अनुभूति में होता है।
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58. फेनोमेनॉलॉजी के विचारणीय विषय हैं
(a) बाह्य वस्तु (b) प्रयोजनमूलक वस्तुएँ
(c) विस्तारपरक वस्तुएँ (d) आदर्श वस्तुएँ
Ans: (b) हुसर्ल के अनुसार चेतना का विषय अभिप्राय होता है। फेनोमेनॉलॉजी में विचारणीय प्रयोजनमूलक वस्तुएँ होती है।
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59. नीचे दो कथन दिए गए हैं‚ एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) का नाम दिय गया है:
अभिकथन (A): क्वाइन के अनुसार‚ सत्यापनवादी सिद्धांत में भाषा को टुकड़ों में विभाजित करके लिया गया है। कारण (R) : इसलिये इसका परिणाम एक प्रकार के अव्याख्यावाद का हुआ है। उपर्युक्त दो कथनों के संदर्भ में‚ नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें:
कूट:
(a) (A) (R) दोनों सत्य हैं और (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य हैं‚ परन्तु (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सत्य हैं‚ परन्तु (R) असत्य है।
(d) (A) असत्य है‚ परन्तु (R)सत्य है।
Ans: (c) क्वाइन के अनुसार‚ सत्यापनवादी सिद्धान्त में ‘भाषा को टुकड़ो में विभाजित करके लिया गया है’ तो सही है‚ परन्तु कारण
(R) न ही सही है और न इसकी व्याख्या है।
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60. सूची – I को सूची – II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कोडों से सही उत्तर का चयन करें:
सूची- I सूची- II
(A) ऑन दि लॉजिक ऑफ i. गैडामर सोशल साइन्सिस
(B) बीइंग एण्ड टाइम ii. हैबरमास
(C) फिलोसोफिकल iii. हाइडैगर हर्मेनॉटिक्स
(D) हर्मेनॉटिक्स एण्ड iv. श्लीयरमैकर क्रिट्‌सिज्म
कूट:
A B C D
(a) ii iii i iv
(b) iv iii i ii
(c) i iii iv ii
(d) ii iii iv i
Ans: (a) हैबरमास का ‘ऑन दि लॉजिकल ऑफ सोशल साइन्सिस’‚ हाइडैगर का ‘बीइंग एण्ड टाइम’‚ गैडामर का फिलोसोफिकल‚ हर्मेनॉटिक्स तथा श्लीयरमैकर का हर्मेनॉटिक्स एण्ड क्रिटिसिज्म‚ से सम्बन्धित है।
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61. सूची – I को सूची – II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कोडों से सही उत्तर का चयन करें:
सूची- I सूची- II
(लेखक) (पुस्तक)
(A) जी. ई. मूर i. फाउंडेशन्स ऑफ दि मैटाफिजिक्स ऑफ मोरल्‌स
(B) केण्ट ii. राइट एण्ड दि गुड
(C) एफ. एच. ब्रैडले iii. प्रिंसिपीया ऐथिका
(D) डब्ल्यू. डी. रॉस iv. ऐथिकल स्ट्‌डीस
कूट:
A B C D
(a) iv i iii ii
(b) iii i iv ii
(c) i ii iv iii
(d) ii i iii iv
Ans: (b) जी. ई. मूर का प्रिंसिपीया ऐथिका‚ काण्ट का फाउंडेशन्स ऑफ दि मैटाफिजिक्स ऑफ मोरल्‌‚ एफ. एच. ब्रैडले का एथिकल स्ट्‌डीस‚ डब्ल्यू. डी. रॉस का राइट एण्ड दि गुड सम्बन्ध है।
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62. जब ‘A’ तर्कवाक्य सत्य है‚ तो E और I तर्कवाक्य
(a) असत्य और सत्य (b) सत्य और असत्य
(c) असत्य और संदिग्ध (d) सत्य और संदिग्ध
Ans: (a) परम्परागत विरोध वर्ग के अनुसार यदि ‘A’ तर्कवाक्य सत्य है। तो ‘E’ असत्य तथा ‘I’ सत्य होगें।
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63. सामाजिक अधिकार जो मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (1948) का अंश है निम्नलिखित में से किस पहलू को सम्बोधित करता है?
(a) शिक्षा (b) खाद्य
(c) रोजगार (d) उपर्युक्त सभी
Ans: (d) सामाजिक अधिकार जो मानवाधिकारों की घोषणा
(1948) के अंश शिक्षा‚ खाद्य‚ रोजगार आदि है। यह मानव के मूलभूत अधिकारों से सम्बन्धित है जो जीवन और विकास के लिए आवश्यक है।
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64. निम्नलिखित में से कौन सा एक मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) का भाग नहीं है?
(a) सुरक्षा का अधिकार (b) स्वतन्त्रता का अधिकार
(c) समानता का अधकार (d) समूह का अधिकार
Ans: (d) मानवधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) में शामिल है- सुरक्षा को अधिकार स्वतंत्रता का अधिकार तथा समानता का अधिकार।
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65. निम्नलिखित में से कौन सा सही सुमेलित नहीं है?
(a) अर्थ का उपयोग सिद्धांत प्रतिपादित किया था- (बाद के विट्टगेंस्टीन ने)
(b) विवरण के सिद्धांत का समर्थन किया था – (रसेल ने)
(c) ‘स्वीप एक्ट (वाक क्रिया)’ सिद्धांत का सर्वप्रथम प्रयोग किया था- (ऑस्टिन ने)
(d) अर्थ के सम्पूर्णतावादी पद्धति का समर्थन किया था-
(एयर)
Ans: (d) ए.जे. एयर के सिद्धान्त को तार्किक भाववाद कहा जाता है। अर्थ उपयोग सिद्धान्त- विट्टगेंस्टाइन‚ विवरण सिद्धान्त- रसेल ‘स्वीप एक्ट’ (वाक क्रिया) सिद्धान्त- ऑस्टिन। और ए. जे. एयर का अर्थ का सत्यापन सिद्धान्त।
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66. गुणवत्ता में भिन्न‚ दो समान्य तर्कवाक्य इस स्थिति में कहे जाते हैं:
(a) व्याघातक विरोध (b) उपाश्रयण विरोध
(c) वैपरीत्य विरोध (d) उप-वैपरीत्य विरोध
Ans: (c) परम्परागत विरोध वर्ग के अनुसार यदि दो सामान्य तर्कवाक्य गुणवत्ता में भिन्न हो तो उनके बीच विपरीत विरोध सम्बन्ध होगा। ‘A’ और ‘E’ तर्कवाक्य।
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67. पद और पदार्थ के बीच सम्बन्ध के बारे में नैयायिकों का क्या मत है?
(a) शक्ति एवं लक्षणा
(b) गौणी एवं व्यंजना
(c) शक्ति‚ लक्षणा एवं व्यंजना
(d) व्यंजना‚ गौणी एवं लक्षणा
Ans: (a) पद और पदार्थ के बीच सम्बन्ध शक्ति एवं लक्षणा के माध्यम से नैयायिक व्यक्त होना मानते हैं। उनके अनुसार शब्द अक्षरों से जिससे अभिधा या लक्षणा से किसी पदार्थ का संकेत मिलता हैं जबकि सार्थक शब्द को पद कहते हैं। अर्थात जिस शब्द में किसी अर्थ को व्यक्त करने की शक्ति होती है पद कहते है। हम जैसे-जैसे पद के अन्तिम अक्षर को सुनते हैं‚ हमें उसके अर्थ का ज्ञान होता है।
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68. ‘‘अपराधी को सुधारने अथवा शिक्षित करने के लिए उसे दण्ड दिया जाता है’’ यह किस सिद्धांत का विचार है?
(a) दण्ड निरोधक सिद्धांत
(b) दण्ड का प्रतिकारी सिद्धांत
(c) दण्ड का सुधारात्मक सिद्धांत
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (c) जब कभी भी अपराधी को सुधारने अथवा शिक्षित करने के लिए उसे दण्ड दिया जाता है तो यह दण्ड का सिद्धान्त दण्ड का सुधारात्मक सिद्धान्त कहलाता है।
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69. अर्थ के निम्नलिखित सिद्धांतों में से क्वाइन किसका समर्थन करते हैं?
(a) अर्थ का परमाणुवाद सिद्धांत
(b) अर्थ का सम्पूर्णवाद सिद्धांत
(c) अर्थ का प्रत्यक्षवादी सिद्धांत
(d) अवव्याख्यावादी (अपचयी) सिद्धांत
Ans: (b) क्वाइन अर्थ के सम्पूर्णतावादी सिद्धान्त के समर्थक है। इसके क्वाइन ‘आमूल अनुवाद’ अनुभववाद के दो मतग्रहों की समीक्षा प्रस्तुत करते है।
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70. अनुमान का वह रूप जिसमें ‘‘प्रदत्त तर्क वाक्य की गुणात्मकता में परिवर्तन होता है जबकि उसका अर्थ अपरिवर्तित रहता है’’ क्या कहलाता है?
(a) परिवर्तन (b) प्रतिवर्तन
(c) प्रतिपरिवर्तन (d) विपरिवर्तन
Ans: (b) ‘प्रतिवर्तन’ अनुमान का वह रूप है जिसमें ‘प्रदत्त तर्कवाक्य की गुणात्मकता में परिवर्तन होता है‚ जबकि उसका अर्थ अपरिवर्तित रहता है। इसमें उद्देश्य पद अपरिवर्तित रहता है और तर्कवाक्य का परिमाण भी अपरिवर्तित रहता है। किसी वर्कवाक्य के प्रतिवर्तन में हम तर्कवाक्य का गुण परिवर्तन करते हैं और विधेय के स्थान पर उसका पूरक पद रखते है।
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71. ऑस्टिन के अनुसार‚ कुछ कह कर कुछ करने का कर्म कहलाता है:
(a) वचन कर्म/लोक्यूशनरी एक्ट
(b) इल्लोक्यूशनरी एक्ट/वचनेत्तर कर्म
(c) प्रभावी वचन कर्म
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (c) ऑस्टिन ‘वॉक-क्रिया सिद्धान्त में विभिन्न प्रकार की वचनों में भेद करते है। उनके अनुसार‚ ‘कुछ कह कर कुछ करने का कर्मप्रभावी वचन कर्म है।
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72. सूची – I को सूची – II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कोडों से सही उत्तर का चयन करें:
सूची- I सूची- II
(विचारक) (पुस्तक)
(A) जी. फ्रेगे i. फ्रोम ए लॉजिकल पॉइंट ऑफ व्यु
(B) बी. रसेल ii. फिलोसोफिकल एनालिसिस
(C) एल.विट्टगेंस्टीन iii. दि ब्लू एण्ड ब्राऊन बुक्‌स
(D) डब्ल्यू. वी. क्वाइन iv. माई फिलोसोफिकल डेवलेपमेंट
v. फाउंडेशन्स ऑफ अर्थमेटिक कोड:
A B C D
(a) iv iii ii i
(b) ii iv v iii
(c) v iv iii i
(d) iv v ii iii
Ans: (c) जी.फ्रेग्रे का फाउंडेशन ऑफ अरिथमेटिक‚ बी रसेल का माई फिलॉसफिकल डेवलेपमेंट‚ एल.विट्‌गेंस्टीन का दि ब्लू एण्ड ब्राउन बुक्‌स‚ डब्ल्यू वी. क्वाइन का फ्रोम ए लॉजिकल प्वांइट ऑफ व्यू से सम्बन्ध है।
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73. एकमात्र वस्तु जिसे काण्ट के अनुसार शुभ समझा जा सकता है वह है
(a) निरपेक्ष आदेश (b) नैतिक नियम
(c) शुभ संकल्प (d) ईश्वर का प्रत्यय
Ans: (c) काण्ट के दर्शन में ‘शुभ संकल्प’ को एकमात्र शुभ कहा गया है। वह ‘शुभ संकल्प’ मात्र को निरपेक्ष या परम शुभ कहता है। सदिच्छ (शुभ संकल्प) देश‚ काल‚ व्यक्ति तथा परिस्थिति से निरपेक्ष होकर सदा शुभ रहती है। उसके अनुसार परमशुभ नि:श्रेयस या महत्तम श्रेय है।
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74. सूची – I को सूची – II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कोड में से सही उत्तर का चयन करें:
सूची- I सूची- II
(A) सिमोन दि बुवा i. जेडर ट्रबुल
(B) ज्यूडिश बटलर ii. सेक्सुअल पॉलिटिक्स
(C) केटे मिलेट iii. सेकेण्ड सेक्स
(D) ल्यूस इरिगेरे iv. एन एथिक्स ऑफ सेक्सुअल डिफरेंस
कूट:
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) iii ii iv i
(c) iii iv i ii
(d) iii i ii iv
Ans: (d) सिमोन दि बुवा का सेकण्ड सेक्स‚ ज्यूडिश बटलर का जेडर ट्रबुल‚ केटे मिलेट का सेक्सुअल पॉलिटिक्स तथा ल्यूस इरिगेरे का एन एथिक्स ऑफ सेक्सुअल डिफरेंस है।
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75. निम्नलिखित दार्शनिकों में से कौन ‘मैं सोचता हूँ‚ इसलिये मेरी सत्ता है’ से संबंधित है?
(a) स्पिनोजा (b) देकार्त
(c) लाइब्नित़्ज (d) ह्यूम
Ans: (b) देकार्त के दर्शन में उसकी ‘संदेह पद्धति’ बहुत महत्वपूर्ण है। उसने सभी सत्ताओं पर सन्देह किया परन्तु सन्देह पर नहीं। अत:
एक सन्देहकर्ता के रूप में वह कहता है कि मैं सोचता हूँ‚ इसलिए मेरी सत्ता है। वह अपनी आत्मा की सत्ता को सिद्ध करता है।
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