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UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2014

1. निम्नलिखित में से किसके योगक्षेम के लिए भूतयज्ञ किया जाता है?
(a) मृत व्यक्तियों की आत्माएँ (b) पूर्वजों की आत्माएँ
(c) अनुष्ठानकर्त्ता (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (d) शतपथ ब्राह्मण के अनुसार ‘केवल पांच महायज्ञ है‚ वे महान सच है वे है भूतयज्ञ‚ मनुष्ययज्ञ‚ पितृयज्ञ‚ देवयज्ञ‚ एवं ब्रह्मयज्ञ। ‘भूतयज्ञ’ पशु-पक्षियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए आहार देकर चुकाए जा सकते है।
(नीतिशास्त्र सिद्धांत और व्यवहार‚ नित्यानन्द मिश्र)
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2. बौद्धों के अनुसार‚ द्वादशनिदान के कुछ चरणों का सही अनुक्रम है:
(a) नामरूप विज्ञान‚ षडायतन‚ स्पर्श
(b) विज्ञान‚ नामरूप‚ षडायतन‚ स्पर्श
(c) विज्ञान‚ नामरूप‚ स्पर्श षडायतन
(d) षडायतन‚ विज्ञान‚ नामरूप‚ स्पर्श
Ans: (b) द्वादशनिदान को पूर्ण चरण है- अविद्या‚ संस्कार‚ विज्ञान‚ नामरूप‚ षडायतन‚ स्पर्श‚ वेदना‚ तृष्णा‚ उपादान‚ भव‚ जाति तथा जरामरण। इसे भवचक्र भी कहते हैं।
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3. बन्धन दो प्रकार का होता है- भावबन्धन और द्रव्यबन्धन- यह विचार किसका है?
(a) न्याय (b) योग
(c) जैन (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (c) जैन धर्म एवं दर्शन में बन्धन को दो प्रकार से माना गया है- भावबन्ध तथा द्रव्यबन्ध। मन दूषित भावों का अस्तित्व ही भावबन्ध तथा जीव का पुद्‌गल से आक्रांत हो जाना द्रव्य बंध कहलाता है।
(भारतीय दर्श्न:चटर्जी एण्ड दत्त)
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4. किस सम्प्रदाय का मानना है कि ईश्वर विद्यमान है‚ परन्तु उसने विश्व का सृजन नहीं किया है?
(a) वैशेषिक (b) चार्वाक
(c) योग (d) न्याय
Ans: (c) योग दर्शन को ‘सेश्वर संख्या’ भी कहा जाता है। योग दर्शन में ईश्वर को माना तो गया है परन्तु सृष्टि (विश्व) के उद्‌भव और विकास में उसकी कोई भूमिका नहीं है। ईश्वर को पुरूष विशेष माना गया हैं। ईश्वर प्राणिधान‚ चिन्त की एकाग्रता के‚ कैवल्य-प्राप्ति के अनेक उपायों में से एक है।
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5. बौद्बों के अनुसार स्वरलक्षण है:
(a) केवल क्षणिक
(b) केवल वास्तविक/यथार्थ
(c) क्षणिक और वास्तविकता दोनों
(d) शाश्वत और वास्तविक/यथार्थ
Ans: (c) बौद्धों ने ‘स्वलक्षण’ को क्षणिक तो माना है परन्तु इन्हे वास्तविक भी माना है। उनके अनुसार स्वलक्षण वस्तुएं तो हैं परन्तु प्रतिक्षण परिवर्तनशील है।
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6. नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। बौद्ध दर्शन के संदर्भ में उन पर विचार करें और सही कोड का चयन करें।
अभिकथन (A) : निर्वाण भी दु:ख की स्थिति है। कारण (R) : सर्वम्‌ दु:खम्‌ दु:खम्‌।
कूट:
(a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) सत्य है और (R) असत्य हैं‚ और (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(c) (A) असत्य हैं और (R) सत्य है और (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(d) (A) और (R) दोनों असत्य हैं और (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
Ans: (c) ‘निर्वाण’ को बौद्ध दर्शन में एक अवर्णीय अवस्था बताया गया हैं। तथा बौद्ध दर्शन का प्रथम आर्य सत्य ‘सर्व दु:खम्‌ दु:खम’ है। अभिकथन (A) गलत है और कारण (R) सत्य है परन्तु
(R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
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7. न्यायदर्शन के अनुसार‚ कौन सा प्रमाण अभाव के ज्ञान का साधन है?
(a) प्रत्यक्ष (b) अनुमान
(c) अनुपलब्धि (d) शब्द
Ans: (a) न्यायदर्शन आभाव के ज्ञान का साधन प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रत्यक्ष सिद्धान्त का आधार इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष है। न्याय दर्शन में अभाव का ज्ञान विशेषण-विशेष्य -भाव सन्निकर्ष से होता है।
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8. निम्नलिखित में से कौन सा एक विकल्प कतिपय बौद्ध-मत में स्वीकार्य है?
(a) स्वत:- प्रामाण्य‚ परत:-अप्रामाण्य।
(b) स्वत:- प्रामाण्य‚ स्वत:-अप्रामाण्य।
(c) परत:- प्रामाण्य‚ स्वत:-अप्रामाण्य।
(d) परत:- प्रामाण्य‚ परत:-अप्रामाण्य।
Ans: (c) भारतीय दर्शन विविध सम्प्रदायों में ज्ञान के प्रामाण्य के विषय में विभिन्न सिद्धान्त निम्न हैंसांख्य दर्शन – स्वत: प्रामाण्य एवं स्वत: अप्रामाण्य बौद्ध दर्शन – परत: प्रामाण्य एवं स्वत: अप्रामाण्य न्याय दर्शन – परत: प्रामाण्य एवं परत: अप्रामाण्य मीमांसा दर्शन – स्वत: प्रामाण्य एवं परत: अप्रामाण्य
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9. योग दर्शन के अनुसार‚ पाँच क्लेशों का सही क्रम क्या है?
(a) अविद्या‚ अस्मिता‚ राग‚ द्वेष‚ अभिनिवेश
(b) अस्मिता‚ अविद्या‚ राग‚ द्वेष‚ अभिनिवेश
(c) राग‚ अस्मिता‚ अविद्या‚ द्वेष‚ अभिनिवेश
(d) अभिनिवेश‚ राग‚ अस्मिता‚ अविद्या‚ द्वेष
Ans: (a) योग दर्शन में पांच क्लेशों को माना गया है जो क्रमश:
है- अविद्या‚ अस्मिता‚ राग‚ द्वेष‚ अभिनिवेश। इन क्लेशों के कारण सत्व‚ रजस्‌ एवं तमस्‌ गुणों में परिणाम उत्पन्न होते रहते है।
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10. श्री अरविन्द के अनुसार‚ ब्रह्म एवं जगत्‌ के मध्य कड़ी क्या है?
(a) मन (b) उच्चतर मन
(c) प्रदीप्त मन (d) अतिमन
Ans: (d) श्री अरविन्द अपने दार्शनिक चिन्तन को समग्र अद्वैत या पूर्ण अद्वैत कहते है। श्री अरविन्द के अनुसार ब्रह्म एवं जगत के मध्य कड़ी ‘अतिमन’ को मानते है।
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11. वैदिक परम्परा के अनुसार‚ कर्म नियम का आधार निम्नलिखित में से कौन सा एक है?
(a) ईश्वर (b) प्रकृति
(c) मनुष्य (d) ऋत
Ans: (d) वैदिक परम्परा में कर्म नियम‚ नैतिक नियम‚ ब्रह्माण्ड मूलक निमय आदि का आधार ‘ऋत्‌को माना जाता था।
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12. निम्नलिखित में से किसकी गणना चित्तवृत्ति के अन्तर्गत नहीं होती है?
(a) स्मृति (b) विपर्यय
(c) वितर्क (d) प्रमाण
Ans: (c) पातंजलि के अनुसार योगस्य चित्तवृात्तिनिरोध:। योग दर्शन में चित्त की पांच वृत्तियों का उल्लेख मिलता है। जो क्रमश: –
प्रमाण‚ विपर्यय‚ विकल्प‚ निद्रा और स्मृति है। चिन्त का विषयाकार होना ही चित्तवृत्ति है।
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13. निम्नलिखित उदाहरण में हेत्वाभास है जिसे इस रूप में जाना जाता है:
‘शब्द नित्य है क्योंकि उसमें शब्दत्व है।’
(a) साधारण अनेकान्तिक के रूप में
(b) असाधारण अनेकान्तिक के रूप में
(c) अनुपसंहारी अनेकान्तिक के रूप में
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans: (b) ‘शब्द नित्य है क्योंकि उसमें शब्दत्व है’। में हेतु
(शब्दत्व) शब्द का निजी गुण होने के कारण सजातीय द्‌ष्टान्तों में अनुपस्थित है। अत: यहां असाधारण सत्यभिचार है। इसमें सपक्षवृत्ति अर्थात हेतु को पक्ष के साथ सपक्ष में भी रहना चाहिए का अल्लंघन होता है। इसे असाधारण अनेकान्तिक भी कहते है।
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14. जीवन-मुक्त की अवधारणा निम्नलिखित का आदर्श है:
(a) मीमांसा (b) द्वैत-वेदान्त
(c) विशिष्टा-द्वैत (d) अद्वैत-वेदान्त
Ans: (d) अद्वैत वेदान्त में दो तरह से मोक्ष की अवधारणा मानी गयी है एक‚ जीवनमुक्त तथा दूसरी‚ विदेह मुक्त। जीवनमुक्त उसे कहते है जब जीव शरीर अवस्था में ही रहते हुए ‘ब्रह्म’ साक्षात्कार प्राप्त करके अथवा मुक्त हो जाये तथा अ….. अवस्था के मोक्ष को विदेह मुक्ति कहा जाता है।
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15. मन से अतिमन तक विकास की प्रक्रिया का सही क्रम श्री अरविन्द के अनुसार क्या है?
(a) प्रदीपत मन‚ उच्चतर मन‚ अन्तर्मासिक मन‚ उर्ध्वमन एवं अतिमन
(b) उच्चतर मन‚ प्रदीपत मन‚ अन्तर्मासिक मन‚ उर्ध्वमन एवं अतिमन
(c) अन्तर्मासिक मन‚ उर्ध्वमन‚ अतिमन‚ उच्चतर मन‚ प्रदीप्त मन
(d) अतिमन‚ उच्चतर मन‚ प्रदीप्त मन‚ अन्तर्मासिक मन एवं उर्ध्वमन
Ans: (d) श्री अरविन्द मानस से अतिमानस के बीच क्रमिक विकास स्तरों की बात करते है। उनके अनुसार मानस से अतिमानस तक पहुँचने के लिए कुछ स्तरों का होना जरूरी है। जो क्रमश: है-
(मानस)‚ उच्चतर मन‚ प्रदीप्त मन‚ अन्तर्मासिक मन (अन्तदृष्टि)‚ उर्ध्वमन (over mind) (व्यापकमान) तथा अतिमन (अतिमानस)
(The super mind)
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16. श्री अरविन्द के अनुसार‚ अज्ञान का जनक कौन है?
(a) अतिमन (b) उर्ध्वमन
(c) प्रदीप्तमन (d) अन्तर्मासिक मन
Ans: (b) श्री अरविन्द के अनुसार व्यापक मानस या उर्ध्वमन
(over mind) को अज्ञान के क्षेत्र का कहा जा सकता है क्योंकि यह व्यापक मानस अनेकता को द्वैत भाव में परिणत कर लेता है और इसी को सत्‌ मान लेता है‚ क्योंकि इनका वह समन्वय नहीं कर पाता है।
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17. परमसत को अतिनैतिक के रूप में किसने प्रतिपादित किया है?
(a) नीत्शे (b) गाँधी
(c) श्री अरविन्द (d) के.सी.भट्टाचार्य
Ans: (c) श्री अरविन्द अपने दर्शन में परम्‌ सत्‌ को सत्‌ चित्त‚ आनन्द कहते है। वह अपने दर्शन में परमसत्‌ को अतिनैतिक
(Supra-ethical) कहते है।
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18. श्री अरविन्द के अनुसर‚ विकास की त्रिविध प्रक्रिया का सही क्रम क्या है?
(a) उर्घ्वीकरण‚ विस्तारण एवं समाकलन
(b) विस्तारण‚ उर्ध्वीकरण एवं समाकलन
(c) समाकलन‚ उर्ध्वीकरण एवं विस्तारण
(d) उपर्युक्त में कोई नहीं
Ans: (b) श्री अरविन्द के अनुसार विकास-प्रक्रिया के तीन प्रक्रियाएं समाविष्ट है। जो क्रमश: है- विस्तारण (Widening), उच्चत्व की ओर उन्मुखता या उर्ध्वीकरण (Heightening)‚ तथा समाकलन (Integration)
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19. मीमांसा के अनुसार‚ ज्ञान का प्रामाण्य है
(a) स्वत: (b) परत:
(c) स्वत: और परत: दोनों (d) न स्वत: न ही परत:
Ans: (a) मीमांसा दर्शन में ज्ञान का प्रामाण्य स्वत: तथा अप्रामाण्य परत: माना गया है। मीमांसा के अनुसार ज्ञान का प्रमाण स्वत: होता है।
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20. कुमारिल के अनुसार जाति का व्यक्ति से संबंध जाना जाता है
(a) भेदाभेद सम्बन्ध (b) बहिर्रंग सम्बन्ध
(c) अयुतसिद्ध सम्बन्ध (d) सभी तीन
Ans: (a) कुमारिल के अनुसार जाति (सामान्य) का व्यक्ति (विशेष) से सबंध भेदाभेद सम्बन्ध है। जबकि बौद्ध दर्शन में ‘जाति’ को अपोह ‘काल्पनिक’ कहा गया है।
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21. निम्नलिखित को नीचे प्रदत्त कूट के आधार पर सुमेलित कीजिये:
सूची I सूची II
(चिन्तक) (सिद्धांत)
(A) विवेकानन्द i. मनुष्य में अतिरिक्तता
(B) टैगोर ii. सार्वभौम धर्म
(C) श्री अरविन्द iii. नव-बौद्धवाद
(D) अम्बेडकर iv. पूर्णाद्वैत
कूट:
(A) (B) (C) (D)
(a) ii i iv iii
(b) i iv ii iii
(c) iv ii iii i
(d) iii i ii iv
Ans: (a) विवेकानन्द सार्वभौम धर्म टैगोर मनुष्य में अतिरिक्तता श्री अरविन्द पूर्णाद्वैत अम्बेडकर नव-बौद्धवाद
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22. यह किसने प्रतिपादित कियाहै कि ‘खाली पेट वाले के लिये धर्म निरर्थक है’?
(a) राधाकृष्णन्‌ (b) टैगोर
(c) कृष्णमूर्ति (d) विवेकानन्द
Ans: (d) स्वामी विवेकानन्द के अनुसार जो भूखा है उसको रोटी की जरूरत है। उनके अनुसार ‘खाली पेट वाले के लिए धर्म निरर्थक है।’ वह अपने दर्शन में शन्ति का चिंतन करते है।
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23. यह किसने प्रतिपादित किया है कि जड़ एवं आत्मतत्व एक ही सत्ता की निम्नतम और उच्चतम अवस्थाएँ हैं?
(a) गाँधी (b) शंकर
(c) टैगोर (d) श्री अरविन्द
Ans: (d) श्री अरविन्द अपने विकासवादी दर्श्न में यह प्रतिपादित करते है कि जड़ एवं आत्मत्व एक ही सत्ता की निम्नतम और उच्चतम अवस्थाएं है।
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24. सूची – I को सूची – II से सुमेलित करें तथा प्रदत्त
कूट के आधार पर सही उत्तर चुनें:
सूची I (लेखक) सूची II (ग्रन्थ)
(A) गाँधी i. दि ह्यूमन साइकिल
(B) श्री अरविन्द ii. माई एक्सपरिमेन्ट्‌स विथ ट्रुथ
(C) टैगोर iii. दि हिन्दू व्यू ऑफ लाइ़फ
(D) राधाकृष्णन्‌ iv. दि रेलिजन ऑफ मैन
कूट:
(A) (B) (C) (D)
(a) ii i iv iii
(b) i ii iv iii
(c) iii ii i iv
(d) ii iii iv i
Ans: (a) गांधी – माई एक्सपरिमेन्ट्‌स विथ ट्रुथ‚ श्री अरविन्द दि ह्यूमन साइकिल‚ टैगोर-दि रिलिजन ऑफ मैन तथा राधाकृष्णन-दि हिन्दु व्यू ऑफ लाइफ।
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25. ‘इन्द्रिय संवेदनाओं के बिना बुद्धिविकल्प पंगु है और बुद्धिविकल्पों के बिना इन्द्रिय संवेदन अन्ध है।’ यह किसका कथन है?
(a) केण्ट (b) लॉक
(c) बर्कले (d) स्पिनोजा
Ans: (a) काण्ट अपने समन्वयवादी दर्शन में बुद्धिवाद और अनुभववाद की समीक्षा प्रस्तुत कर उनका समन्वय करता है। उसके अनुसार ‘इन्द्रिय संवेदनाओं के बिना बुद्धिविकल्प पंगु है और बुद्धि विकल्पों के बिना इन्द्रिय संवेदन अंधे है।
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26. निम्नलिखित में से किसे प्राथमिक गुण नहीं समझा जाता है?
(a) सघनता और विस्तार (b) आकृति और गति
(c) विश्रन्ति और संख्या (d) वर्ण और ध्वनि
Ans: (d) लॉक अपने दर्शन में दो तरह के गुणों का भेद करता है प्रथम प्राथमिक या मूल गुण तथा द्वितीयक या गौण गुण। उसके अनुसार प्राथमिक गुण वस्तुओं में स्थित मूल गुण है। जैसे- सघनता‚ विस्तार‚ आकृति‚ गति‚ विश्रान्ति और संख्या आदि। परन्तु वे गुण जो मानसिक होते है और मूलगुणों के मस्तिष्क द्वारा ग्रहण के बाद उत्पन्न होते गौण गुण कहते है जैसे- मनोभावों को रख सकते है। वर्ण‚ ध्वनि‚ आदि।
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27. अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार करें और सत्तामीमांसीय तर्क के प्रकाश में सही विकल्प का चयन करें:
अभिकथन (A) : ईश्वर निरपेक्ष पूर्ण सत्ता के रूप में अस्तित्ववान है। कारण (R) : पूर्णता के लिये अस्तित्व अपरिहार्य नहीं है।
कूट:
(a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों असत्य हैं‚ और (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सत्य हैं और (R) असत्य है और (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(d) (A) असत्य है और (R) सत्य हैं और (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
Ans: (c) सत्तामीमांसीय तर्क में पूर्णता के लिए अस्तित्व अपरिहार्य माना गया है। अत: अभिकथन (A) ईश्वर निरपेक्ष पूर्ण सत्ता के रूप में अस्तित्ववान है सत्य है परन्तु कारण (R) असत्य है तथा (R)‚
(A) की व्याख्या नहीं है।
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28. प्लेटो के अनुसार‚ विज्ञानों के अधिक्रम का सही क्रम बताइए।
(a) गणित‚ ज्यामिति‚ खगोलविज्ञान‚ संनाद-विश्लेषण और तर्कशास्त्र
(b) तर्कशास्त्र‚ गणित‚ खगोलविज्ञान‚ संनाद-विश्लेषण और ज्यामिति
(c) तर्कशास्त्र‚ खगोलविज्ञान‚ गणित‚ ज्यामिति और संनादविश्लेष् ाण
(d) गणित‚ खगोलविज्ञान‚ तर्कशास्त्र‚ ज्यामिति और संनादविश्लेष् ाण
Ans: (b) प्लेटों विज्ञानों निम्न अधिक्रमों में बांटता है- तर्कशास्त्र‚ गणित‚ खगोलविज्ञान‚ संनाद-विश्लेषण और ज्यामिति। प्लेटों का शिक्षा सिद्धान्त स्पाटो की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित थी।
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29. निम्नलिखित में से माइलेशियन सम्प्रदाय के दार्शनिक कौन हैं ? सही कोड पर चिह्न लगाए।
1. थेल़िज 2. एनैक्सीमेण्डर
3. पर्मेनाइडी़ज 4. एनैक्सीमेऩिज
कूट:
(a) 2 और 3 (b) 1, 2 और 4
(c) 2 और 4 (d) उपर्युक्त सभी
Ans: (b) थेल़िज‚ एनैक्सीमेण्डर तथा एनैक्सीमेनीज माइलेशियन सम्प्रदाय के दार्शनिक हैं जिन्होने क्रमश: जल‚ असीमित तत्व
(एपिस) तथा वायु नामक तत्व को शृष्टि का मूल आधार कहा है। ‘पार्मेनाइडीज’ को इलियाई सम्प्रदाय से सम्बन्धित किया जाता है जिनकी ‘सत्‌’ की अवधारणा महत्वपूर्ण।
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30. नैतिकता से सम्बन्धित कथन ए.जे. एयर के अनुसार
(a) संज्ञानात्मक (b) अ-संज्ञानात्मक
(c) विश्लेषणात्मक (d) प्रागानुभविक
Ans: (b) ए.जे. एयर नैतिकता से सम्बन्धित कथनों को असंज्ञानात्मक मानता है। वह इन कथनों को संवेदात्मक कहता है। उसका मत संवेगात्मक नैतिक मत है।
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31. सामान्य से अधिष्ठान को उसके समवर्ती सिद्धांत के साथ सुमेलित करें:
(a) सामान्य का स्वतन्त्र i. अरस्तूवाद अस्तित्व होता है।
(c) सामान्य केवल विशिष्ट ii. नाममात्रवाद में विद्यमान होता है।
(a) सामान्य मन में विद्यमान iii. प्रत्ययवाद होता है।
(c) सामान्य का न तो स्वतन्त्र iv. वस्तुवाद अस्तित्व होता है न ही यह मन में रहता है।
कूट:
(a) (b) (c) (d)
(a) i iii iv ii
(b) iv i iii ii
(c) iv ii iii i
(d) ii iii iv i
Ans: (b) वस्तुवाद के अनुसार‚ सामान्य का स्वतंत्र अस्तित्व होता है। प्रत्ययवाद के अनुसार सामान्य मन में विद्यमान होता है। नाममात्रवाद के अनुसार सामान्य का न तो स्वतन्त्र अस्तित्व होता है और न ही मन में रहता है। अरस्तूवाद के अनुसार सामान्य केवल विशिष्ट में विद्यमान होता है।
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32. नीचे दिए गए तत्वों के समूह में से कौन सा अरस्तू के अनुसार‚ ‘द्रव्य’ के अन्तर्गत आता है?
1. सामान्य
2. गुण
3. सम्बन्ध
4. एक अज्ञात अधिष्ठान जो स्वयं में पदार्थ कहलाता है। कोड:
(a) 1, 2 और 3 (b) केवल 1 और 3
(c) केवल 4 (d) उपर्युक्त सभी
Ans: (d) अरस्तू ने सत्ता (Reality) को द्रव्य (substance) कहा है। द्रव्य को नित्य कूटस्थ एवं सत्‌ कहा है। उसके अनुसार द्रव्य एक अज्ञात अधिष्टान है जो स्वयं में पदार्थ कहलाता है। अरस्तू का द्रव्य सामान्य से युक्त विशेष है। इसके अतिरिक्त सामान्य‚ गुण‚ सम्बन्ध भी द्रव्य के अन्तर्गत आते है।
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33. निम्नलिखित में से दार्शनिकों का कौन सा समूह परिमाणात्मक परमाणुवाद से सम्बन्ध रखता है?
नीचे दिए कोडों में से सही को चिह्नित करें:
1. एनैक्सागोरस 2. लूसीपस
3. डेमोक्रिट्‌स 4. एम्पीडॉकलेस कोड:
(a) 1, 3 और 4 (b) केवल 3
(c) 2 और 3 (d) उपर्युक्त सभी
Ans: (c) ग्रीक विचारक ल्यूसीयस और डेमोक्रिटस को परिमाणात्मक परमाणुवादी विचारक माना जाता है।
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34. अनन्त और सीमारहित तत्व के रूप में ईश्वर के दार्शनिक प्रत्यय की सर्वप्रथम किसने वकालत की थी?
(a) अरस्तू (b) एनैक्सीमैंडर
(c) ऐन्सेलम (d) हेराक्लिट्‌स
Ans: (b) अनन्त और सीमारहित तत्व के रूप में ईश्वर के दार्शनिक प्रत्यय की सर्वप्रथम एनैक्सीमेंडर ने वकालत की। इन्होंने अपने दर्शन में ‘ऐपिस’ (असीम) नामक तत्व की कल्पना की। जो सूक्ष्म विषयों पर ध्यान करता है।
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35. काल के आधार पर निम्नलिखित प्राचीन ग्रीक दार्शनिकों के सही क्रम का चयन करे:
(a) हेराक्लाइटस‚ पाइथागोरस‚ डेमोक्रिटस‚ पार्मेनाइडी़ज
(b) डेमोक्रिटस‚ हेराक्लाइटस‚ पार्मेनाइडी़ज‚ पाइथागोरस
(c) पार्मेनाइडी़ज‚ हेराक्लाइटस‚ पाइथागोरस‚ डेमोक्रिटस
(d) पाइथागोरस‚ पार्मेनाइडी़ज‚ हेराक्लाइटस‚ डेमोक्रिटस
Ans: (d) पाइथागोरस (छठी शताब्दी ई.पू.) थार्मेनाइडीज (520 ई.पू.) हेराक्लाइटस (532 – 475 ई. पू.)‚ डेमोक्रिटस।
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36. ‘मशीन में प्रेत’ सिद्धांत निम्नलिखित में किससे सम्बन्धित है?
(a) मन का अधिकारिक सिद्धांत
(b) जीवन और मृत्यु का सिद्धांत
(c) मन का आध्यात्मिक सिद्धांत
(d) रहस्यवाद
Ans: (a) गिल्बर्ट राइल अपने दर्शन में डेकार्ट के आत्मा (मन) शरीर सम्बन्ध की आलोचना करते है और इसे मशीन में प्रेत सिद्धान्त कहा जाता है।
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37. नीचे दिए वाक्यों को पढ़े और नीचे दिए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें:
वाक्य:
I. ह्यूम ने संवेदन और प्रत्यक्ष बोध के बीच भेद किया है।
II. ह्यूम प्रत्ययवादी है।
III. ह्यूम प्रत्ययवादी है‚ परन्तु अनुभववादी भी है।
IV. ह्यूम संशयवादी तथा तर्कवादी दोनों हैं। विकल्प:
(a) I और II असत्य हैं‚ परन्तु III और IV सत्य हैं
(b) I और II सत्य हैं‚ परन्तु III और IV असत्य हैं।
(c) I को छोड़कर सभी सत्य हैं।
(d) I को छोड़कर सभी असत्य है।
Ans: (d) ह्यूम का दर्शन संशयवादी है किन्तु तर्कवादी (बुद्धिवादी) न होकर अनुभववादी है। ह्यूम ने संवेदन और प्रक्ष्यक्ष बोध के बीच भेद किया है।
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38. हाईडेगर के अनुसार ‘केयर’ के तीन पक्ष कौन है?
(a) ताथ्यिकता‚ संभाविता‚ फॉलेनेस
(b) ताथ्यिकता‚ अवधान‚ अनुशासन’
(c) अनुशासन‚ फॉलेनेस‚ संभावित
(d) अवधान‚ ताथ्यिकता‚ फॉलेनेस
Ans: (a) हाइडेगर अपेन अस्तित्ववादी दर्शन में ‘केयर’ या ‘कन्सर्न’ अथवा ‘serge’ को अस्तित्व की एक विद्या मानता हैं। उसके ‘केयर’ के तीन पक्ष है क्रमश: तथ्यता (Pacticity), संभाविता
(Possibility) तथा गिरावट (fallness) है। उसके अनुसार मानव का जगत के साथ सम्बद्ध होने का कारण उसका उद्वेगपूर्ण लगाव
(केयर) है।
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39. सत्य के अर्थक्रियापरक सिद्धांत के अनुसार
(a) सत्य विश्वासों की एक व्यवस्था है और इसे यथार्थ के साथ सहमत नहीं होना चाहिए।
(b) सत्य को वस्तुस्थिति की प्रतिलिप्ति होना चाहिए और यथार्थ के साथ असहमत नहीं होना चाहिए
(c) सत्य को वस्तुस्थिति के साथ असहमत नहीं होना चाहिए और उसे कार्यकारित्व होना चाहिए
(d) एक विचार तभी सत्य होता है जब उसमें और जब वह वस्तुस्थिति की प्रतिलिपि कार्यकारित्व हो।
Ans: (c) सत्य का अर्थ क्रियापरक सिद्धान्त अर्थ क्रियावादियों ने दिया है। जिसके अनुसार‚ सत्य को वस्तुस्थिति के साथ असहमत नहीं होना चाहिए और उसे कार्यकारित्व होना चाहिए।
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40. सूची – I को सूची – II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए विकल्पों से सही का चयन करें :
सूची I सूची II
(A) डिफेंस ऑफ कॉमन-सेंस i. विटगेंस्टीन
(B) प्रोब्लम्स ऑफ फिलोसफी ii. रसेल
(C) दि ब्राऊन बुक iii. मूर
(D) कांसेप्ट ऑफ माइंड iv. राईल विकल्प:
(A) (B) (C) (D)
(a) iii ii i iv
(b) iv iii ii i
(c) iii ii iv i
(d) i iv iii ii
Ans: (a) मूर – डेफंस ऑफ कॉमनसेंस‚ रसेल- प्रोब्लम ऑफ फिलोसफी‚ विटगेंस्टीन – दि ब्राउन बुक तथा राइल- दी कन्सेण्ट ऑफ माइण्ड।
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41. नीचे दिए कथनों – अभिकथन (A) और कारण (R) का परीक्षण करें और नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव करें:
अभिकथन (A) : बर्कले के अनुसार‚ प्राथमिक और गौण गुणों के बीच कोई अन्तर नहीं है। कारण (R) : रसेल का मानना है कि सामान्य तर्क वाक्य कभी भी अस्तित्वपरक नहीं होते हैं।
कूट:
(a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य हैं‚ परन्तु (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) और (R) दोनों असत्य है‚ परन्तु (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(d) (A) सत्य है (R) असत्य हैं परन्तु की सही व्याख्या है।
Ans: (b) अभिकथन (A) बर्कले‚ प्राथमिक और गौण गुणों के बीच कोई अन्तर नहीं करते है सही है तथा कारण (R) रसेल का मानना है कि सामान्य तर्क वाक्य कभी भी अस्तित्वपरक नहीं होते है भी सही है परन्तु (R)‚ (A) की वयाख्या नहीं है।
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42. काण्ट के अनुसार‚ संवेदना के दो प्रागनुभविक आकार हैं:
(a) विश्व और आत्मा (b) आत्मा और ईश्वर
(c) विश्व और ईश्वर (d) दिक्‌ और काल
Ans: (d) काण्ट देश-काल को संवेदना के दो प्रागनुभविक आकार कहता है। वह देश-काल को दो दरवाजे कहता है जिनसे होकर संवेदन बौद्धक कोटियों तक पहुँचते है और ज्ञान का विषय बनते है।
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43. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही मेलित है?
(a) विट्टगेंस्टीन – दर्शन तथा विश्लेषण
(b) सी.एस. पीयर्स – आलोचनात्मक दर्शन
(c) हुसरल – अर्थ और उपयोग
(d) जी.ई.मूर – प्रत्ययवाद का खंडन
Ans: (d) जी.ई. मूर ने प्रत्ययवाद का खण्डन किया। उन्होने बर्कले के ‘सत्ता दृश्यता है’ कथन को आधार बनाकर प्रत्ययवाद का खण्डन किया है।
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44. रामानुज की सत्‌ख्याति को निम्नलिखित नाम से भी जाना जाता है:
(a) अनिर्वचनीय ख्याति (b) अख्याति
(c) सदसत्‌ ख्याति (d) यथार्थ ख्याति
Ans: (b) रामानुज की सतख्याति को यथार्थ ख्याति भी कहते है। भ्रम अज्ञान या अपूर्ण‚ किन्तु सत्य‚ ज्ञान है। भ्रम अन्यथा ज्ञान नहीं। समस्त ज्ञान यथार्थ होता है। भ्रम भी आंशिक ज्ञान के रूप में अंशत: सन्य है।
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45. यह विचार कि ‘भाषा के अनेक कार्य सम्पादित करने होते हैं’- सम्बद्ध है:
(a) अर्थ का चित्र सिद्धांत
(b) अर्थ का उपयोग सिद्धांत
(c) (a) और (b) दोनों
(d) न (a) तो और न (b)
Ans: (b) विट्‌गेन्सटाइन के अर्थ का चित्र सिद्धान्त के अनुसार‚ भाषा के कुछ निश्चित कार्य होते हैं‚ किन्तु उसके परवर्ती विचार अर्थ के उपयोग सिद्धान्त के अनुसार ‘भाषा को अनेक कार्य सम्पादित करने होते हैं। इसे भाषा-खेल सिद्धान्त के नाम से भी जानते हैं।
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46. चार्वाक के अनुसार‚ ज्ञान प्राप्ति के साधन के रूप में अनुमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि
(a) पक्ष तथा साध्य में कोई अनिवार्य सम्बन्ध नहीं है।
(b) पक्ष के ज्ञान के सम्बनध में सन्देह है।
(c) व्यप्ति की स्थापना नहीं की जा सकती है।
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans: (c) चर्वाक दर्शन एक भौतिकवादी दर्शन है। चर्वाक दर्शन के प्रत्यक्ष को एक मात्र प्रमाण माना गया है। अनुमान‚ शब्द उपमान आदि का खण्डन किया गया है। उनके अनुसार ज्ञान प्राप्ति के साधन के रूप में अनुमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि व्याप्ति की स्थापना नहीं की जा सकती है।
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47. निम्नलिखित विचारकों में से किसने ‘भक्ति’ को गीता का सर्वप्रमुख सिद्धांत बतलाया है?
(a) शंकर (b) रामानुज
(c) लोकमान्य तिलक (d) गाँधी
Ans: (b) रामानुज अपने दर्शन में भक्तियोग को बहुत महत्व देते है। उन्होने भगवद्‌गीता को सर्वप्रमुख सिद्धान्त ‘भक्ति’ को ही माना। उनके अनुसार हमें अपने आपको ईश्वर के चरणों में पूर्णत: समर्पण करना होगा। तभी मोक्ष की प्राप्ति होगी।
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48. बौद्ध-मत के अपोहवाद से निम्नलिखित विकसित होता है:
(a) नाममात्रवाद (b) प्रत्ययवाद
(c) वस्तुवाद (d) अर्थक्रियावाद
Ans: (a) बौद्ध के अपोहवाद से नाममात्रवाद का विकास होता है। बौद्ध दर्शन में जाति (सामान्य) के ‘अपोह’ माना गया है। अर्थात जाति ‘नाम’ मात्र है।
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49. रसेल के अनुसार‚ निम्नलिखित में से किसका अपना स्वयं का एक अर्थ है?
(a) व्यक्तित्वाचक नाम (b) निश्चित विवरण
(c) अनिश्चित विवरण (d) (a) और (c) दोनों
Ans: (a) रसेल के अनुसार व्यक्तिवाचक नामों का अपना स्वयं का अर्थ होता है। वह किसी निश्चित व्यक्ति‚ वस्तु‚ स्थान का निर्देश करते है।
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50. रसेल ने कहा है कि उनके द्वारा प्रतिपादित तार्किक परमाणुवाद का सिद्धांत निम्नलिखित विद्वान के लेखों से व्युत्पन्न है:
(a) श्लिक (b) कार्नेप
(c) फ्रेगे (d) विट्‌गेंस्टीन
Ans: (d) रसेल ने खुद स्वीकार किया है कि उनके द्वारा प्रतिपादित तार्किक परमाणुवाद का सिद्धान्त विट्‌गेंस्टीन के लेखों से पे्ररित है।
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