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UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2014

1. विवेकानन्द के लिए ‘माया’ है−
(a) ब्रह्म की शक्ति (b) एक प्रकार का अशुभ
(c) तथ्यों का विवरण (d) चेतना की अवस्था
Ans: (c) स्वामी विवेकानन्द वेदान्त की व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तु करते हैं। उन्होंने ‘माया’ को तथ्यों का विवरण’ कहा है। उनका कहना है कि माया से जगत्‌ का एक विशेष तथ्य सूचित होता है।
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2. श्री अरबिन्द के अनुसार आरोहण की प्रक्रिया………..के द्वारा पूर्व-प्रतिबद्ध है।
(a) रूपान्तरण (b) अवरोहण
(c) आरोहण (d) मन
Ans: (b) श्री अरविन्द के अनुसार शृष्टि ‘अवतरण’ तथा उत्थान की प्रक्रिया है। इस उत्थान प्रक्रिया को श्री अरविन्द विकास-प्रक्रिया भी कहते हैं। ‘अवतरण’ की प्रक्रिया को अवरोह (Involution) या अन्तवर्तन-प्रक्रिया कहते हैं। उत्थान अथवा विकास (Evolution) आरोहण है। आरोहण की प्रक्रिया अवतरण द्वारा पूर्व-प्रतिबद्ध है।
(समकालीन भारतीय दर्शन− बसन्त कुमार लाल)
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3. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. सत्कार्यवाद i. सांख्य
B. असत्कार्यवाद ii. विशिष्टाद्वैत
C. विवर्तवाद iii. न्याय
D. ब्रह्म-परिणामवाद iv. अद्वैत वेदान्त
कूट :
A B C D
(a) i iii iv ii
(b) iii i iv ii
(c) i iii ii iv
(d) iii i ii iv
Ans: (a) सत्कार्यवाद को सांख्य दर्शन‚ असत्कार्यवाद को न्याय दर्शन‚ विवर्तवाद को अद्वैतवेदान्त तथा ब्रह्मपरिणामवाद को विशिष्टाद्वैत दर्शन में कारण-कार्य के रूप में माना जाता है।
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4. रामानुज के अनुसार वैयक्तिक आत्मा है−
(a) ज्ञाता मात्र (b) ज्ञाता और कर्ता
(c) कर्ता और भोक्ता (d) ज्ञाता‚ कर्ता और भोक्ता
Ans: (d) रामानुज अपने विशिष्टाद्वैत दर्शन में वैयक्तिक आत्मा को ज्ञाता‚ कर्ता और भोक्ता स्वीकार करते हैं। ‘आत्मा’ को रामानुज ने ‘जीव’ नाम से सम्बोधित किया है।
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5. निम्नलिखित में से किसने अन्विताभिधानवाद का समर्थन किया है?
(a) गौतम (b) प्रभाकर
(c) कुमारिल (d) कणाद
Ans: (b) मीमांसा दर्शन में शब्दार्थ से सम्बन्धित दो मत मिलते हैं। एक कुमारिल का ‘अभिहितत्वयवाद’ तथा दूसरा प्रभाकर का ‘अन्विताभिधान वाद’ है।
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6. किसके मतानुसार भक्ति के बिना मोक्ष प्राप्तव्य नहीं है?
(a) शंकर (b) प्रभाकर
(c) महावीर (d) रामानुज
Ans: (d) रामानुज के अनुसार ‘भक्ति’ के बिना मोक्ष नहीं प्राप्त हो सकता है। क्योंकि भगवद्‌कृपा तभी प्राप्त होगी जब हम भगवद्‌ के समक्ष अपने आपका पूर्ण समर्पण कर देंगे। उनके अनुसार ‘कर्म’ और ‘ज्ञान’ भक्ति के सहकारी है।
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7. पूर्वमीमांसा के अनुसार वेद निर्मिति है।
(a) ईश्वर की (b) भगवान कृष्ण की
(c) व्यास की (d) इनमें से किसी की नहीं
Ans: (d) पूर्वमीमांसा वेद को ‘अपौरुषेय’ मानता है। अर्थात्‌ वेद किसी के द्वारा निर्मित नहीं है। यह नित्य है और स्वत: प्रमाण हैं।
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8. न्याय-वैशेषिक के अनुसार सामान्य अवस्थित है।
(a) गुण‚ सामान्य और विशेष में
(b) द्रव्य‚ गुण और कर्म में
(c) द्रव्य‚ कर्म और अभाव में
(d) केवल द्रव्य में
Ans: (b) वैशेषिक दर्शन के सप्त पदार्थों में ‘सामान्य’ को भी एक पदार्थ माना गया है। वैशेषिक का सह ‘सामान्य’ द्रव्य गुण और कर्म‚ में अवस्थित है। न्याय को भी यह मान्य है।
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9. सांख्य के अनुसार मुक्ति का अभिप्राय है।
(a) केवल जीवनमुक्ति
(b) केवल विदेहमुक्ति
(c) जीवनमुक्ति और विदेहमुक्ति दोनों
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans: (c) सांख्य दर्शन में मोक्ष की दो अवस्थाएं मानी गयी हैं− जीवनमुक्ति और विदेहमुक्ति। जीवन काल में ही दुःखों की आत्यन्तिक निवृत्ति जीवनमुक्ति है। प्रारब्ध कर्मों के समाप्त हो जाने पर जीवन्मुक्त का शरीर भी समाप्त हो जाता है। इसे विदेहमुक्ति कहते हैं। सांख्य दर्शन में ‘मोक्ष’ को ‘कैवल्य’ कहा गया है।
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10. वैशेषिक मतानुसार ‘पूर्व’ और ‘पश्चिम’ की अवधारणा का कारण है।
(a) आकाश (b) काल
(c) दिक्‌ (d) तेज
Ans: (c) वैशेषिक दर्शन में दिक्‌-काल की अवधारणा द्रव्य के रूप में अलग-अलग मिलती है। इसके अनुसार ‘दिक्‌’ सह-अस्तित्व का और ‘काल’ ‘अनुक्रम’ का प्रतिपादन करते हैं। दिक्‌ उपाधि के कारण सभी दिशाओं (पूर्व‚ पश्चिम‚ उत्तर‚ दक्षिण) का ज्ञान कराता है। ‘काल’ भी उपाधि के कारण भूत‚ वर्तमान‚ भविष्य‚ वर्ष‚ मास‚ पक्ष का ज्ञान करता है। दिक्‌ और काल सर्वव्यापी‚ निन्य‚ अतीन्द्रिय‚ अभौतिक एवं गुणहीन हैं।
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11. चार्वाक के अनुसार जल……..के कारण नीचे की ओर बहता है।
(a) स्वभाव (b) द्रव्यत्व
(c) गुरुता (d) तरलता
Ans: (a) चार्वाक दर्शन भौतिकवादी दर्शन है। उसका मत स्वभाववाद कहलाता है। उसके अनुसार जल अपने स्वभाव के कारण नीचे की ओर बहता है।
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12. निम्नलिखित में से कौन शक्तिग्रह के साधन का सही कथन नहीं करता है?
(a) व्याकरण‚ आप्तवाक्य‚ विवरण
(b) विवरण‚ उपमान‚ अनुमान
(c) उपमान‚ कोश‚ वृद्धव्यवहार
(d) विवरण‚ वाक्यशेष‚ आप्तवाक्य
Ans: (b) ‘शक्तिग्रह’ के साधन‚ अनुमान नहीं है। जबकि व्याकरण‚ उपमान‚ कोश‚ आप्तवाक्य‚ वाक्यशेष‚ विवृत्ति‚ वृद्धव्यवहार हैं।
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13. निम्नलिखत में से कौन माया को ‘वैश्विक भ्रम का सिद्धांत’ स्वीकार करता है?
(a) विवेकानन्द (b) राधाकृष्णन्‌
(c) के.सी. भट्टाचार्य (d) टैगोर
Ans: (d) टैगोर भी वेदान्त के समान कहते हैं कि सृष्टि की प्रतीति ‘माया-आधृत’ है। माया को वे सबसे व्यापक अज्ञान का आधार कहते हैं यह ‘विश्व-भ्रान्ति का कारक’ या वैश्विक भ्रम का सिद्धान्त है। उनके अनुसार सत्य एकरूपता में है‚ माया भ्रमकारक है उनके अनुसार माया का कोई ‘सत्‌’ या तत्व नहीं है। न ही इसका कोई अस्तित्व है। यह ईश्वरीय रूप को सीमित भी नहीं करता है।
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14. रामानुज के अनुसार ‘अपृथकसिद्धि’ का सम्बन्ध है।
(a) मात्र ब्रह्म का जीव के साथ
(b) मात्र जीव का जगत के साथ
(c) ब्रह्म का जीव एवं जगत के साथ
(d) मात्र ब्रह्म का जगत के साथ
Ans: (c) रामानुज ब्रह्म का जीव एवं जगत के बीच ‘अपृथक सिद्धि’ सम्बन्ध को मानते हैं। अर्थात्‌ ईश्वर जीव और जगत की अपृथकसिद्ध एक ही रामानुज का ब्रह्म है।
(भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूप रेखा− राममूर्ति पाठक)
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15. वैदिक परंपरा में दक्षिणा का भाव संयुक्त है।
(a) ऋत्‌ से (b) ऋण से
(c) धर्म से (d) यज्ञ से
Ans: (d) वैदिक परम्परा में दक्षिणा का भाव ‘यज्ञ’ से सम्बन्धित होता था।
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16. मनुष्य में ‘गोत्व’ का अभाव किस प्रकार का अभाव है?
(a) अत्यंताभाव (b) अन्योन्याभाव
(c) प्रागभाव (d) ध्वन्साभाव
Ans: (b) ‘अन्योन्याभाव’ के अनुसार दो वस्तुओं में एक का दूसरे का त्रैकालिक अभाव अन्योन्याभाव है। इसका अर्थ है दो वस्तुओं में तादात्म्य नहीं हो सकता है।
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17. सही क्रम का चयन करें−
(a) गार्हस्थ्य‚ वानप्रस्थ‚ ब्रह्मचर्य‚ सन्यास
(b) वानप्रस्थ‚ ब्रह्मचर्य‚ गार्हस्थ्य‚ सन्यास
(c) ब्रह्मचर्य‚ वानप्रस्थ‚ गार्हस्थ्य‚ सन्यास
(d) ब्रह्मचर्य‚ गार्हस्थ्य‚ वानप्रस्थ‚ सन्यास
Ans: (d) आश्रमधर्म किसी व्यक्ति के जीवनक्रम से सम्बन्धित होता है। आश्रम धर्म को चार भागों में क्रमश: रखा गया है− ब्रह्मचर्य‚ गृहस्थ्य‚ वानप्रस्थ‚ सन्यास जो क्रमश: विद्याअध्ययन गृहस्थ के रूप में घर छोड़कर तपस्या‚ चिंतन आदि तथा अन्त में सांसारिक जीवन को छोड़कर पूरी तरह यायावर बनकर‚ भिक्षाटन कर जीवनयापन करना।
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18. कौन-सा एक सही सुमेलित नहीं है?
(a) अन्वय‚ व्यतिरेक‚ भूयोदर्शन
(b) अन्वय‚ व्यतिरेक‚ उपाधिनिरास
(c) उपधिनिरास‚ तर्क‚ सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष
(d) तर्क‚ सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष‚ आप्तवाक्य
Ans: (d) अन्वय‚ व्यतिरेक‚ भूयोदर्शन उपाधिनिरास‚ तर्क‚ सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष आदि अनुमान प्रमाण से सम्बन्धित है। जबकि आप्तवाक्य ‘शब्द’ प्रमाण से सम्बन्धित है।
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19. ऋत्‌ सहयुक्त है−
(a) केवल सत्य से (b) केवल धर्म से
(c) सत्य एवं धर्म दोनों से (d) न सत्य‚ न ही धर्म से
Ans: (c) ऋत्‌ को सत्य और धर्म दोनों कहा गया है।
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20. निम्नलिखित दो सूचियों में से सूची-I दर्शन के संप्रदाय एवं सूची-II उनके द्वारा धारित सिद्धांतों से युक्त है। निम्नलिखित में से कौन-सा कूट सही सुमेलित है?
सूची-I सूची-II
A. जैन i. पंचशील
B. न्याय ii. पंचव्रत
C. बौद्ध iii. पंचक्लेश
D. योग iv. पंचावयव
कूट :
A B C D
(a) i ii iii iv
(b) i c d b
(c) b d i iii
(d) ii i iv iii
Ans: (c) जैन दर्शन में पंचव्रत‚ न्याय दर्शन में पंचावयव‚ बौद्ध दर्शन में पंचशील तथा योग दर्शन में पंचक्लेश को मानते हैं।
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21. निम्नलिखित में कौन एक सही क्रम को प्रदर्शित करता है?
(a) तृष्णा‚ वेदना‚ भव‚ जाति
(b) वेदना‚ तृष्णा‚ उपादान‚ भव
(c) वेदना‚ तृष्णा‚ भव‚ उपादान
(d) तृष्णा‚ भव‚ वेदना‚ जाति
Ans: (b) बौद्ध दर्शन कारण-कार्य को ‘द्वादशनिदान चक्र’ कहा गया है। जिसमें 12 (बारह) अंश हैं क्रमश: अविद्या‚ संस्कार‚ विज्ञान‚ नाम-रूप‚ स्पर्श‚ वेदना‚ तृष्णा‚ उपादान भव‚ जाति‚ जरामरण।
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22. चंदन के एक टुकड़े को देखने से‚ न्याय-दर्शन के अनुसार‚ किस सन्निकर्ष से हमें सुगंध का प्रत्यक्ष होता है?
(a) विशेषणता (b) संयुक्त-समवाय
(c) योगज (d) ज्ञानलक्षण
Ans: (d) न्याय दर्शन में तीन प्रकार के अलौकिक प्रत्यक्ष माने गये हैं− सामान्य लक्षण‚ ज्ञानलक्षण और योगज प्रत्यक्ष। न्याय दर्शन के अनुसार जब कोई ज्ञानेन्द्रिय अपने विषय से भिन्न विषय का ज्ञान प्राप्त करती है तो इसे ‘ज्ञान लक्षण प्रत्यक्ष’ कहते हैं। दिये गये प्रश्न में चंदन के एक टुकड़े को देखने से हमें जो सुगंध का प्रत्यक्ष हुआ है वह सन्निकर्ष ‘ज्ञान लक्षण’ होगा।
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23. निम्नलिखित में से कौन-सा अंबेडकर द्वारा स्वीकार नहीं किया गया?
(a) स्वतंत्रता‚ समानता‚ बंधुत्व
(b) शिक्षा‚ संगठन‚ आंदोलन
(c) बुद्ध‚ धम्म‚ संघ
(d) जाति‚ वर्ण‚ कर्म
Ans: (d) बी.आर. अम्बेडकर ने जाति‚ वर्ण‚ कर्म को स्वीकार नहीं किया गया है। वह जाति-प्रथा‚ अस्पृश्यता रीति के घोर विरोधी थे।
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24. न्याय के अनुसार निम्नलिखित अनुमान में किस प्रकार का दोष है?
अनुमान : शाश्वत अणुवों से निर्मित होने के कारण जगत शाश्वत है। विकल्प:
(a) विरुद्ध (b) कालातीत
(c) सत्प्रतिपक्ष (d) सव्यभिचार
Ans: (a) ‘शाश्वत अणुओं से निर्मित होने के कारण जगत शाश्वत है’ इसमें अणुओं की शाश्वता को आधार बनाकर जगत को शाश्वत कहा जा रहा है‚ परन्तु कोई यह भी कह सकता है कि जितने भी निर्मित वस्तु है वह अशाश्वत होती है अत: जगत भी शाश्वत नहीं है अर्थात्‌ ‘निर्मित होना’ हेतु अशाश्वत पदार्थों का लक्षण है। अत: यहां हेतु स्वव्याघाती होने के कारण विरुद्ध हेतु है।
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25. ‘प्रत्येक अनुभूति प्रमा है’ यह सिद्धांत……..के द्वारा प्रतिपादित किया गया।
(a) न्याय (b) चार्वाक
(c) प्रभाकर (d) कुमारिल
Ans: (c) प्रभाकर के अनुसार प्रत्येक अनुभूति प्रमा है। अनुभूति स्वत: प्रकाश होती है। अर्थ की अनुभूति सदा यथार्थ होती है और स्वत: प्रमाण होती है।
(भारतीय दर्शन: आलोचन और अनुशीलन− चन्द्रधर शर्मा)
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26. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. तत्त्व मीमांसा का निरसन i. विश्लेषणात्मक दर्शनशास्त्र
B. अर्थ का चित्र सिद्धांत ii. संवृत्तिशास्त्र
C. असम्बन्ध iii. अस्तित्त्ववाद
D. बीइंग एंड नथिंग्रेस iv. तार्किक भाववाद
कूट :
A B C D
(a) iv iii ii i
(b) iii i ii iv
(c) ii iii i iv
(d) iv i ii iii
Ans: (d) तार्किक भाववाद से तत्व मीमांसा का निरसन‚ विश्लेषणात्क दर्शन शास्त्र में अर्थ का चित्र सिद्धान्त‚ संवृतिशास्त्र से असम्बन्धन और अस्तित्ववाद बीइंग एंड नथिंग्नेस सम्बन्धित है।
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27. नीत्शे के दर्शन के संदर्भ में दिए गए अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए तथा दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन कीजिए−
अभिकथन (A) : अतिमानव का संप्रत्यय नीत्शे के निरीश्वरवाद और इच्छाशक्ति के सिद्धांत की परिणति है।
तर्क (R) : निरीश्वरवाद की परिणति ईश्वर प्रदत्त सभी आदेशों और मूल्यों की समाप्ति है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) गलत है और (R) सही है।
(d) (A) और (R) दोनों गलत हैं।
Ans: (b) नीत्शे का दर्शन ‘अतिमानव वाद’ है जिसमें अतिमानव का संप्रत्यय उसके निरीश्वरवाद और इच्छाशक्ति सिद्धान्त पर आधारित है। निरीश्वर वाद की परिणति ईश्वर प्रदत्त सभी आदेशों और मूल्यों की समाप्ति है। दोनों (A) और (R) सही हैं। परन्तु यह प्रश्न संदिग्ध है।
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28. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. तार्किक भाववाद i. विलियम जेम्स
B. संवृत्तिशास्त्र ii. हुस्सर्ल
C. तार्किक अणुवाद iii. एयर
D. उपयोगितावाद iv. रसेल
कूट :
A B C D
(a) i iii iv ii
(b) iii ii iv i
(c) iv iii ii i
(d) ii iv i iii
Ans: (b) तार्किक भाववाद-एयर‚ संवृत्तिशास्त्र-हुर्सल‚ तार्किक अणुवाद-रसेल तथा उपयोगितावाद-विलियम जेम्स।
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29. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. स्पिनो़जा i. गुणों का विभाजन
B. ह्यूम ii. द्रव्यों का विभाजन
C. लॉक iii. प्रत्ययों का विभाजन
D. बर्कले iv. विकारों का विभाजन
कूट :
(a) (A) और (i) (b) (B) और (iv)
(c) (C) और (i) (d) (D) और (ii)
Ans: (c) लॉक ने गुणों का विभाजन किया। उन्होंने मूलगुण और उपगुण नामक दो प्रकार के गुणों को माना। मूलगुण बाह्य वस्तुओं के वास्तविक गुण है और ‘उपगुण’ इन्हीं मूलगुणों से उत्पन्न है। इन्हें वह क्रमश: प्राथमिक गुण और द्वितीयक गुण कहता है।
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30. ‘फेनोमेनालॉजी ऑफ माइंड’ पुस्तक की रचना किसने की?
(a) हुस्सर्ल (b) हीगल
(c) कांट (d) इनमें से काई नहीं
Ans: (b) ‘फेनोमेनालॉजी ऑफ माइंड’ पुस्तक हीगल ने लिखी।
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31. निम्नलिखित में से कौन ‘चुंबक’ की तरह की निर्जीव वस्तुओं में भी आत्मा का अभिधान करते हैं?
(a) थेलीज (b) एनेक़्जीमेंडर
(c) ़जेनो़फेनी़ज (d) एम्पेडाक्ली़ज
Ans: (a) ‘चुंबक’ को किस तरह निर्जीव वस्तुओं में भी आत्मा को थेलीज मानते है। थेलीज ग्रीक परम्परा के प्रथम दार्शनिक माने जाते हैं। यह आयोनियन सम्प्रदाय के प्रतिस्थापक माने जाते हैं।
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32. निम्नलिखित कथनों में से हेराक्लाइट्‌स के संदर्भ में कौन सही हैं?
i. हेराक्लाइट्‌स ने ब्रह्माण्डोत्पत्ति को अस्वीकार किया है।
ii. विश्व निरंतर प्रवाह में है।
iii. हेराक्लाइट्‌स विरुद्धों की एकता में विश्वास नहीं करता। सही कूट का चयन करें−
(a) केवल ii सही है।
(b) केवल i और ii सही हैं।
(c) i, ii और iii सही हैं।
(d) केवल iii और i सही हैं।
Ans: (b) हेराक्लाइट्‌स ने ब्रह्माण्डोत्पत्ति को अस्वीकार कर विश्व के निरन्तर प्रवाह को स्वीकार किया है। वह ‘विरुद्धों को एकता’ का सिद्धान्त देता है। जिसे ‘विरोधियों शक्तियों का संवाद’ सिद्धान्त कहा जाता है।
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33. राईल के दर्शन के संदर्भ में दिए गए अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए तथा दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन कीजिए−
अभिकथन (A) : मन का आधिकारिक सिद्धांत स्वीकार्य नहीं है।
तर्क (R) : क्योंकि यह अर्थ के चित्र सिद्धांत को नष्ट करता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) गलत है और (R) सही है।
(d) (A) और (R) दोनों गलत हैं।
Ans: (c) राईल अपने व्यावहारवादी दर्शन के डेकार्ट के मन सिद्धान्त की कटु आलोचना करता है। वह मन के अधिकारिक सिद्धान्त को अस्वीकार करता है। वह इनमें कोटि दोष बताता है। परन्तु वह नहीं कहता कि यह अर्ध के चित्र सिद्धान्त को नष्ट करता है। अत: (A) तो सही है परन्तु (R) कलत और यह व्याख्या भी नहीं है।
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34. ‘प्रत्ययवाद का निषेध’ का पक्षधर कौन है?
(a) रसेल और बर्कले (b) मूर और बर्कले
(c) रसेल और मूर (d) रसेल और हीगल
Ans: (a) ‘प्रत्ययवाद का निषेध’ पेरी‚ मूर तथा रसेल ने अपने-
अपने दर्शन के आलोक में किया है।
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35. दिए गए अभिकथनों का कौन-सा कुलक (कूट) विटगेंस्टाइन के संदर्भ में सही है? सही कूट का चयन करें− अभिकथन:
i. विश्व वह सब है जो एक स्थिति है।
ii. विश्व तथ्यों का समूह है‚ वस्तुओं का नहीं
iii. वस्तुस्थिति वस्तुओं का संकलन है।
iv. यदि सभी वस्तुएँ प्रदत्त हैं तो ठीक उसी रूप में सभी संभावित वस्तु स्थितियाँ भी प्रदत्त हैं।
कूट:
(a) सभी अभिकथन सही हैं।
(b) सभी अभिकथन गलत हैं।
(c) i, ii, iii सही हैं किन्तु iv गलत है।
(d) ii, iii और iv सही हैं किन्तु i गलत है।
Ans: (a) विट्‌गेंस्टाइन अपने ‘ट्रैक्टेटेस’ में यह बातें करता है−
i. विश्व वह सब है जो एक स्थिति है।
ii. विश्व तथ्यों का समूह है‚ वस्तुओं का नहीं।
iii. वस्तुस्थिति वस्तुओं का संकलन है।
iv. यदि सभी वस्तुएँ प्रदत्त हैं तो ठीक उसी रूप में सभी संभावित वस्तु स्थितियाँ भी प्रदत्त हैं।
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36. अर्थ के चित्र सिद्धांत का पक्षधन इनमें से कौन है?
(a) मूर (b) रसेल
(c) एयर (d) इनमें से कोई नहीं
Ans: (d) ‘अर्थ के चित्र सिद्धान्त’ को विट्‌गेन्सटाइन ने प्रस्तुत किया। वह इसे अपनी पूर्व कालीन अवस्था में अपनी पूर्वकालीन अवस्था में अपनी पुस्तक ‘ट्रैक्टेटस’ में देता है।
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37. निम्नलिखित में से कौन से कथन प्लेटो के प्रत्यय सिद्धांत के संदर्भ में सही हैं?
i. प्रत्यय उस अमूर्त वस्तुओं के जगत में वास करता है जो जगत‚ देश और काल में उनके मूर्त उदाहरणीकरण से भिन्न है।
ii. प्रत्यय अथवा आकार वास्तविक हैं; विशेष प्रतीतिमात्र् ा हैं।
iii. प्रत्यय अथवा आकार वास्तविक हैं; विशेष प्रतीतिमात्र् ा हैं। ऊपर के अभिकथनों के संदर्भ में सही कूट का चयन करें−
(a) केवल i और ii सही हैं।
(b) i, ii और iii सही हैं।
(c) केवल i और iii सही हैं।
(d) केवल ii और iii गलत हैं।
Ans: (a) प्लेटो जगत के ‘प्रत्ययो’ की अभिव्यक्ति मानता है। उसके अनुसार‚ प्रत्यय उस अमूर्त वस्तुओं के जगत में वास करता है जो जगत‚ देश और काल में उनके मूर्त उदारणीकरण से भिन्न है तथा प्रत्यय अथवा आकार वास्तविक है विशेष प्रतीति-मात्र है। प्रत्यय स्थायी‚ कालातीत‚ शाश्वत और अपरिवर्तनशील है।
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38. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. जल i. एनेक्जिमिनी़ज
B. असीमित ii. हेराक्लाइटस
C. वायु iii. एनेक्जीमेंडर
D. परिवर्तन iv. थेली़ज
कूट :
A B C D
(a) ii iii iv i
(b) iv i iii ii
(c) iv iii i ii
(d) iv ii i iii
Ans: (c) थेलीज ‘जल’ को ‘असीमित’ को एनेक्जीमेंडर‚ वायु की एनेक्जिमिनीज और ‘परिवर्तिन’ को हेराक्लाइट्‌स मूल मानते है।
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39. निम्नलिखित में से ‘ज्ञान क्या है’ के संदर्भ में से किसे प्लेटों द्वारा अस्वीकार किया गया था?
i. ज्ञान इंन्द्रीय प्रत्यक्ष है।
ii. ज्ञान धारण है।
iii. ज्ञान निर्णय है।
iv. ज्ञान सत्य निर्णय है।
कूट:
(a) केवल iii, iv और i सही हैं।
(b) केवल i और ii सही हैं।
(c) केवल i, ii और iii सही हैं।
(d) केवल i और iii सही हैं।
Ans: (c) प्लेटो अपने बुद्धिवादी दर्शन के आलोक में ‘ज्ञान क्या है’ संदर्भ पर विचार करता है। वह सर्वप्रथम इसके निषेधात्म पक्ष क्या ज्ञान नहीं है।’ पर विचार करता है। उसके अनुसार ‘ज्ञान इन्द्रिीय प्रत्यक्ष‚ धारण‚ निर्णय नहीं है। उसके अनुसार ज्ञान न्यायोचित सत्य विश्वास है।
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40. कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) संत ऑगस्टाइन सृष्टिवाद के पक्षधर हैं
(b) संत ऑगस्टाइन उद्भवमूलक सिद्धांत को नकारते हैं।
(c) संत ऑगस्टाइन ईश्वरवादी हैं।
(d) संत ऑगस्टाइन संशयवाद के पक्षधर हैं।
Ans: (d) संत ऑगस्टाइन संशयवादी दार्शनिक नहीं है। वह एक मध्ययुगीन इसाई-दार्शनिक है। वह संशयवाद के विपरीत सृष्टिवादी‚ ईश्वरवादी चिंतन हैं।
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41. ज्ञान के प्रतिनिधिवादी सिद्धांत का प्रतिपादन करने वाले विद्वान के नाम का चयन निम्नलिखित विकल्पों में से करें?
(a) लाइब्ऩिज (b) देकार्त
(c) बर्कले (d) लॉक
Ans: (d) ज्ञान के प्रतिनिधिवादी सिद्धान्त के समर्थक/प्रतिपादक लॉक हैं। इन्हें ‘प्रत्यय प्रतिनिधित्ववादी’ दार्शनिक माना जाता है। बाह्य जगत से प्राप्त प्रत्यय ही हमारे ज्ञान के विषय हैं।
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42. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें और सही उत्तर का चयन करें− सूची-I सूची-II
A. स्पिनो़जा i. बहुवाद
B. लाइब्नित़्ज ii. सर्वेश्वरवाद
C. देकार्त iii. द्वैतवाद
D. लॉक iv. संशयवाद
कूट :
(a) i और ii (b) ii और iv
(c) iii और i (d) iv और iii
Ans: (a) स्पिनोजा का मत सर्वेश्वरवाद कहलाता है। लॉक अनुभववाद लाइबनित्ज बहुलवाद तथा देकार्त-द्वैतवाद है।
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43. सही विकल्प का चयन करें− देकार्त के अनुसार मन-शरीर के संबंध को जाना जाता है।
(a) बुद्धिवाद (b) क्रिया-प्रतिक्रियावाद
(c) अनुभववाद (d) समानान्तरवाद
Ans: (b) देकार्त का मन-शरीर का सम्बन्ध क्रिया-प्रतिक्रियावाद कहलाता है। स्पिानोजा का मत ‘समानान्तरवाद’ तथा लाइबनित्ज का पूर्व-स्थापित सामंजस्य नियम।
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44. सही विकल्प का चयन करें− आधुनिक बुद्धिवाद का आधारभूत संप्रत्यय है।
(a) अवसरवाद (b) संदेह का सिद्धांत
(c) जन्मजात प्रत्यय (d) द्रव्य का विभाजन
Ans: (c) आधुनिक बुद्धिवाद का आधारभूत संप्रत्यय है जन्मजात प्रत्यय लाइबनित्ज के अनुसार‚ समस्त ज्ञान जन्मजात है। डेकार्ट‚ स्पिनोजा जैसे बुद्धिवादियों का भी कुछ ऐसा ही विचार है। जन्मजात प्रत्ययों का सिद्धान्त आधुनिक बुद्धिवाद और अनुभवाद के बीच एक विभाजक रेखा का कार्य करता है।
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45. सही विकल्प का चयन करें− किस तर्क में ‘अस्तित्व’ उसकी अवधारण में निहित रहता है?
(a) रकारणतामूलक तर्क (b) प्रयोजनमूलक तर्क
(c) सत्तामूलक तर्क (d) सृष्टिमूलक तर्क
Ans: (c) सत्तामूलक तर्क के अनुसार किसी विचार की पूर्णता में उसका अस्तित्व अनिवार्य रूप से संयुक्त रहता है। ईश्वर की पूर्णता के अवधारणा में उसकी सत्ता (अस्तित्व) निहित है।
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46. लॉक के संदर्भ में सही विकल्प का चयन करें−
(a) मस्तिष्क गौण गुणों को ग्रहण करता है।
(b) मस्तिष्क मूल गुणों को ग्रहण करता है।
(c) मस्तिष्क मूल एवं गौण दोनों गुणों को ग्रहण करता है।
(d) मस्तिष्क मूल गुणों की रचना करता है।
Ans: (b) लॉक दो प्रकार के गुणों को मानता है मूल गुण एवं बाह्य है जिनका ग्रहण मस्तिष्क द्वारा होता है। जब हमारी ज्ञानेन्द्रियों का सम्पर्क वस्तुओं के मूलगुणों से होता है तो ये मूलगुण आत्मा में अपनी संवेदना उत्पन्न करते हैं। मूलगुणों के माध्यम से ही हमारी आत्मा भी उपगुणों के प्रत्यय उत्पन्न होते हैं।
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47. सही विकल्प का चयन करें− बर्कले के अनुसार प्रत्यय हैं।
(a) मूर्त (b) अमूर्त
(c) मूर्त एवसं अमूर्त दोनों (d) न अमूर्त और न ही मूर्त
Ans: (a) लॉक के अमूर्त प्रत्ययों की अवधारण का खण्डन करके बर्कले के अनुभव से प्राप्त प्रत्ययों को ही हमारे ज्ञान का विषय बताया है। उसके अनुसार प्रत्यय मूत्र्त है। उसके अनुसार मन के द्वारा उन्हीं विशिष्ट वस्तुओं के प्रत्ययों की रचना की जा सकती है जो हमारे अनुभव के विषय है। अमूर्त प्रत्यय ‘नाम’ के अतिरिक्त कुछ भी नहीं।
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48. सही विकल्प का चयन रकें− कांट के अनुसार ज्ञान का सही रूप है।
(a) प्रागनुभविक विश्लेषणात्मक निर्णय
(b) प्रागनुभविक संश्लेषणात्मक निर्णय
(c) आनुभविक विश्लेषणात्मक निर्णय
(d) आनुभविक संश्लेषणात्मक निर्णय
Ans: (b) कांट के अनुसार‚ प्रागनुभविक संश्लेषणात्मक निर्णय ही ज्ञान का सही रूप हैं। काण्ट ऐसे निर्णयों की खोज में था। जो यथार्थ (वस्तुनिष्ठ) और नीवन ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ अनविार्य और सार्वभौम भी हों।
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49. सही विकल्प का चयन करें− कांट के अनुसार बुद्धि-विकल्पों की कुल संख्या है।
(a) 8 (b) 10
(c) 12 (d) 16
Ans: (c) काण्ट ने बुद्धि-विकल्पों की संख्या ‘12’ माना है। काण्ट आकारिक तर्कशास्त्र के बारह प्रकार के निर्णयों के आधार पर बारह प्रकार के बुद्धि-विकल्पों का भी निगमन करता है। बुद्धि विकल्पों के द्वारा जानना‚ निर्णय लेना है।
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50. ईश्वर के अस्तित्व को प्रमाणित करने के लिए सत्तामूलक युक्ति प्रतिपादन किसने किया?
(a) अरस्तु (b) संत ऑगस्टाइन
(c) संत एन्सेल्म (d) संत एक्वीनस
Ans: (c) सत्तामूलक युक्ति का प्रतिपादन संत अन्सेल्म (एन्सेल्म) ने अपने मध्यकालीन ईसाई दर्शन में ईश्वर की सत्ता को सिद्ध करने के लिए। आधुनिक युग में डेकार्ट ने भी इस युक्ति का प्रयोग अपने दर्शन में किया है।
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