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UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2015

1. ‘‘नाम सामान्य का अवबोध कराते हैं जो शुद्ध रूप से कल्पना प्रसूत‚ भ्रमात्मक और निषेधात्मक हैं।’’ यह मत प्रतिपादित किया गया है:
(a) धर्मकीर्ति द्वारा (b) दिङ्‌नाग द्वारा
(c) प्रभाकर द्वारा (d) कमलशील द्वारा
Ans: (b) बौद्ध दर्शन का ‘जाति’ अथवा ‘सामान्य’ सम्बन्धी मत अपोहवाद कहलाता है। अपोहवाद के अनुसार ‘नाम सामान्य का अवबोध करात्+ो है जो शुद्ध रूप से कल्पना प्रसूत‚ भ्रमात्मक और निषेधात्मक है।’ यह कथन आचार्य दिङनाग अपने दर्शन में प्रतिपादित करते हैं। इन्हीं को अपोहवाद का प्रतिपादक माना जाता है। ‘अपोह’ शब्द का प्रयोग दिङनाग ने अपने ग्रन्थ प्रमाण समुच्चय में एक सिद्धांत के रूप में किया है।
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2. ‘जब द्रव्य अस्तित्ववान नहीं है तो गुण‚ जो इन पर आश्रित हैं‚ भी अस्तित्ववान नहीं हैं।’ यह मत है:
(a) जैनों का (b) नैयायिकों का
(c) मीमांसकों का (d) बौद्ध का
Ans: (d) बौद्ध दर्शन अनित्यवादी विचार को मानता है। उसके अनुसार प्रत्येक वस्तु प्रतिक्षण परिवर्तनशील है। संसार की जितनी वस्तुएं प्रतीत समुत्पन्न हैं। उनकी एक क्षण के लिए भी सत्ता नहीं है। कोई नित्य या कूटस्थ द्रव्य नहीं है जिसकी सत्ता हो। गुण द्रव्यों पर आश्रित माने जाते है। अत: जब द्रव्य द्रविअनित्य‚ परिवर्तनशील है तो गुण जो इन पर आश्रित हैं के अस्तित्वा में होने का प्रश्न ही नहीं उठता। ये सब कल्पना जन्य प्रत्यय है।
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3. जैन विचार संप्रदाय द्वारा स्वीकार्य और समर्थित‚ निम्नलिखित में से त्रिरत्न की कौन सी श्रेणी नहीं है?
(a) सम्यक्‌ ज्ञान (b) सम्यक्‌ चारित्र्य
(c) सम्यक्‌ प्रयास (d) सम्यक्‌ दर्शन
Ans: (c) जैन-दर्शन में साधना मागे की तीन महत्वपूर्ण सधनों को तिरत्न कहा जाता है। जिनके बिना मोक्ष प्राप्ति सम्भव नहीं है। जो क्रमश: है – सम्यक दर्शन‚ सम्यक चरित्र और सम्यक ज्ञान।
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4. ख्याति कोई एक ज्ञान नहीं है अपितु दो असंबद्ध अवबोधों का समुच्चय है। यह मत प्रतिपादित किया गया है:
(a) प्रभाकर द्वारा (b) कुमारिल द्वारा
(c) रामानुज द्वारा (d) उद्योतकर द्वारा
Ans: (a) प्रभाकर का भ्रम सिद्धांत अख्यातिवाद है। उनके अनुसार ख्याति कोई एक ज्ञान नहीं है‚ आपेतु दो असंबद्ध अवबोधों का समुच्चय है। भ्रम दो आंशिक ज्ञानों और उनके शिष्यों के भेद का अग्रहण या अज्ञान है। अर्थात भेदाग्रह है।
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5. पूर्वमीमांसा के अनुसार निम्नलिखित में से कौन ज्ञान की नवीनता को सूचित करता है?
(a) यथार्थ (b) बाधक ज्ञानरहित
(c) अग्रहिताग्राहि (d) कारणदोषरहित
Ans: (c) पार्थसारधि मिश्र के अनुसार प्रभा को ‘प्रभा के कारण दोष रहित बाधकज्ञानरहित‚ अग्रहतग्राहि और यथार्थ होना चाहिए
(कारणदोषबाधकज्ञान-रहितमग्रहीतग्राहि ज्ञान प्रमाणमशास्त्रदीपिका)। पूर्व-मीमांशा के अनुसार‚ अग्रहिताग्राहि से तात्पर्य वह ज्ञान है जो पूर्व में अज्ञात हो अर्थात‚ नवीन हो। यह शब्द ज्ञान की नवीनता का सूचक है।
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6. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुने:
सूची-I सूची-II
(A) पक्षधर्मता (i) अग्नि शीतल है
(B) विपक्षसत्त्व (ii) शब्द शाश्वत है क्योंकि यह उत्पन्न होता है
(C) बाधित (iii) पर्वत पर धूम्र है
(D) विरूद्ध (iv) जलाशय में अग्नि है
कूट:
A B C D
(a) iv i iii ii
(b) i ii iii iv
(c) ii iii i iv
(d) iii iv i ii
Ans: (d) पश्रधर्मता – पक्ष में सत्ता है यथा – पर्वत पर धूम्र है। विपक्षसत्व – विपक्ष में सत्ता है यथा – जलाशय में अग्नि है। बाधित – हेतु का प्रत्यक्ष आदि प्रमाणों से बाधित होना यथा – अग्नि शीतल है। विरूद्ध – साध्य की सत्ता की जगह साध्य के आभाव को सिद्ध करना यथा शब्द शाश्वत है क्योंकि यह उत्पन्न होता है।
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7. निम्नलिखित में से कौन-सा ऋत्‌ के समान है?
(a) अदिति (b) इन्द्र
(c) सोम (d) उषस्‌
Ans: (a) ऋत्‌ की अवधारणा के समान ही देवी आदिति की अवधारणा में भी नैतिक व्यवस्था का आधार प्राप्त होता है। आदिति संज्ञा शब्द है और इसका अर्थ बन्धन शहित्य है। इस शब्द का स्वतंत्रता मुक्ति और निसीमता के अर्थ में प्रयोग हुआ है। आदिति को आदित्यों की माता कहा गया है। इसी तरह देवताओं के लिए ऋत्‌ जात शब्द का प्रयोग किया गया है।
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8. भगवद्‌गीता में योग शब्द का प्रयोग इस आशय से नहीं किया गया है:
(a) समत्व (b) कौशल
(c) कर्म (d) क्रिया
Ans: (d) भगवद्‌गीता में योग की परिभाषा कई प्रकार से की गयी है। समत्व का ही नाम योग है। कर्मों में कुशलता को ही योग कहते हैं। क्रिया का प्रयोग योग के लिए नहीं किया गया है।
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9. जैन मत में आत्मोत्थान के क्रमिक चरण जाने जाते हैं:
(a) अप्रमत्तसंयत (b) अविरत
(c) उपशान्तकषाय (d) गुणस्थान
Ans: (d) जैन दर्शन में अन्मिक गुणों के विकास की आत्मोत्थान के क्रमिक अवस्थाओं को गुणस्थान कहते हैं। गुण स्थान चौदह है। अप्रभतसेयत‚ अविरत‚ उपशान्तकषाय आदि गुणस्थान ही है। अत:
विकल्प d सही है।
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10. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म ‘भूत’ को ‘क्षर’ की तरह और ‘कूटस्थ’ को ‘अक्षर’ की तरह उद्‌ घाटित करता है?
(a) प्रकृति-पुरुष (b) जीव-माया
(c) ब्रह्म-जीव (d) माया-जीव
Ans: (a) भगवद्‌गीता में सब भूतों को क्षर तथा कूटस्थ का अक्षर कहा गया है। ये तत्व सांख्य की पुरुष तथा प्रकृति के समान है। उत्तम पुरुष को इन दोनों से भिन्न परमात्मा कहा गया है। रामानुज क्षर और अक्षर का अर्थ बद्ध एवं मुक्त जीव करते है तथा शंकर क्षर का अर्थ मायाशक्ति बतलाते है। विकल्प a यहां सही है।
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11. निम्नलिखित में से कौन-सा सृष्टि की प्रक्रिया को ‘यज्ञ’ के रूप में स्वीकार करता है?
(a) पुरुष सूक्त (b) नासदीय सूक्त
(c) हिरण्यगर्भ सूक्त (d) तैत्तिरीय ब्राह्मण
Ans: (a) यज्ञ की अवधारणा के विकास के साथ यज्ञ के रूप में सृष्टि प्रक्रिया का कल्पित किया गया है। पुरुष सूक्त के अनुसार‚ पुरुष की छवि बनाकर किय गये यज्ञ से ब्रह्माण्ड की समस्त वस्तु की रचने (सृष्टि) की सामग्री प्राप्त हुई। हिरण्यगर्भ में हिरण्यगर्भ प्रकृतिरूपी उपादान से सृष्टि का निर्माण करने वाला वर्णित है। नासदीयसूक्त द्वैतपरक आध्यात्मिक ज्ञान का अतिक्रमण कर उच्चतर अद्वैतवाद को स्वीकार करता है। तैत्तिरीय ब्राह्मण‚ ब्रहमन को शृष्टि का निर्माण कर्त्ता माना गया है।
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12. भगवद्‌गीता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा ‘कर्तव्य’ और ‘अकर्तव्य’ के बीच निर्णय का प्राधिकारी है?
(a) आप्तवाक्य (b) परम्परा
(c) शास्त्र (d) स्वात्म
Ans: (c) गीमा में कहा गया है कि निष्काम भाव से‚ कलाशक्ति किो त्यागकर कर्म करने की यह शिक्षा ही गीता का मौलिक उपदेश है। ज्ञानमार्ग की तरह गीता ने इस उपदेश को भक्तिमार्ग से भी जोड़ दिया है। कर्त्ताव्याकर्त्तव्य की व्यवस्था में शास्त्र ही तेरे प्रमाण है। यह कहकर गीता ने शाध्Eों का सम्मान भी कर लिया है।
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13. भगवद्‌गीता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन प्रकृति से संबंधित नहीं है?
(a) महत्‌ (b) चैतन्य
(c) कार्त्री (d) बुद्धि
Ans: (b) गीता में प्रकृति को महद्‌ब्रह्म भी कहा गया है। प्रकृति‚ असृधा है – भूमि‚ जल‚ अनल‚ वायु‚ आकाश‚ मन‚ बुद्धि और अहंकार। प्रकृति के गुण ही हमारे कर्मों के लिए उत्तर दायी है। प्रकृति ही वास्तविक कार्ती है। अहंकार के वश होकर हम अपने को कर्त्ता मानते है।
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14. वैशेषिक के अनुसार नित्य द्रव्य है:
(a) प्रयणुक (b) आत्मा
(c) द्वयणुक (d) कर्म
Ans: (b) वैशेषिक दर्शन में आत्मा को नित्य द्रव्य माना गया है। परमाणु के संयोग से उत्पन्न द्रयणुक‚ त्रयणुक आदि को तथा कर्म को अनित्य कहा गया है।
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15. निम्नलिखित में से कौन-सा संबंध नहीं है?
(a) स्वरूप (b) अपृथक्‌सिद्धि
(c) गुण (d) समवाय
Ans: (a) स्वरूप कोई सम्बन्ध न होकर यह तो सम्बन्धित द्रव्य का अपना स्वभाव है। अर्थात यह सम्बन्धों का आभाव है। अपृथकसिद्धि‚ गुण‚ समवाय आदि सम्बन्ध है।
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16. ‘धर्म घर के लिए आतुरता है’ के द्वारा कहा गया है:
(a) राधाकृष्णन्‌ (b) विवेकानन्द
(c) टैगोर (d) गाँधी
Ans: (c) टैगोर के अनुसार धर्म एक प्रकार से घर से अलग हुए व्यक्ति की घर के लिए आतुरता () है। जिस प्रकार गृहातुर पहाड़ी पक्षी समय आने पर रात दिन उड़ता हुआ पहाड़ पर अपने घोसले तक पहुँचना चाहता है वैसे ही मनुष्य आत्म अपने घर वापस जाना चाहती है जहां मृत्यु नहीं है। यही घर पहुँचने की आकांक्षा धर्म है।
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17. नैयायिकों के अनुसार दिक्‌‚ आत्मा और मनस्‌ हैं:
(a) भौतिक (b) मूर्त
(c) भौतिक और मूर्त दोनों (d) न तो भौतिक न मूर्त
Ans: (d) नैयायिकों के अनुसार दिक्‌काल आत्मा‚ और मनस न तो भौतिक न मूर्त तत्व है। जबकि पृथ्वी‚ अग्नि‚ जल‚ वायु और आकाश भौतिक द्रव्य है।
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18. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए। नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए:
सूची-I सूची-II (ा)
(A) ब्रह्म (i) व्यावहारिक सत्ता
(B) स्वप्न (ii) पारमार्थिक सत्ता
(C) जगत्‌ (iii) प्रातिभासिक सत्ता
(D) तुरीय (iv) तादात्म्य
कूट:
A B C D
(a) iii ii iv i
(b) i iv ii iii
(c) ii iii i iv
(d) i ii iv iii
Ans: (c) ब्रह्म‚ पारमार्थिक सत्ता‚ स्वप्न‚ प्रातिभासिक सत्ता‚ तुरीय तादाम्य अवस्था और जगत व्यावहारिक सत्ता है।
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19. कान्तवादी नैतिक‚ दर्शन में ‘क्रिया का वस्तुपरक सिद्धांत’ कहलाता है:
(a) सूत्र (b) नियम
(c) व्यावहारिक नियम (d) आदेश
Ans: (d) काण्ट के नैतिक दर्शन में प्रक्रिया का वस्तुपरक सिद्धांत आदेश कहलाता है। जिसका वर्णन वह अपनी पुस्तक क्रिटिक ऑफ प्रेक्टिकल रीजन में करता है।
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20. निम्नलिखित में से किसने आन्तरिक अनुशास्तिओं की अनुशंसा की है:
(a) बेन्थम (b) स्पेन्सर
(c) मिल (d) एपीक्यूरस
Ans: (c) मिल का नीतिदर्शन सुखवादी उपयोगितावाद है। जिसमें मिल ने बेन्थम द्वारा स्वीकृति नैतिक अंकुशों के अतिरिक्त एक अन्य अंकुश को भी स्वीकार किय है। वह है मनुष्य की परोपकार सम्बन्धी स्वाभाविक भावना। इसे मिल ने आन्तरिक अनुशक्ति की संज्ञा दिया है।
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21. ‘संकल्प स्वातंत्र्य सत्य है या नैतिक निर्णय एक भ्रम’ यह कथन है:
(a) मार्टिन्यू का (b) हॉब्स का
(c) काण्ट का (d) मिल का
Ans: (a) मार्टिन्यू अंत:प्रज्ञावाद के समर्थक है। उनके अनुसार संकल्प स्वातंत्र्य सत्य है या नैतिक निर्णय एक भ्रम है।
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22. ‘ईश्वरीय नियम ही चरम नैतिक नियम है’ निम्नलिखित में से किस एक का यह मत है:
(a) हॉब्स (b) देकार्त
(c) बेन (d) स्पेन्सर
Ans: (b) डेकार्ट ईश्वरीय नियमों को ही चरम नैतिक नियम कहते है। डेकार्क एक ईश्वरवादी दार्शनिक थे। वह ईश्वर में अस्तित्व को परम शुभ और सर्वशक्तिमान सत्ता मानते थे।
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23. निम्नलिखित में से सही विकल्प को चिह्नित करें। पूर्णतावाद के अनुसार:
(a) मात्र सुख नैतिकता का मापदण्ड है।
(b) मात्र विवेक नैतिकता का मापदण्ड है।
(c) अन्त: अनुभूति नैतिकता का मापदण्ड है।
(d) उपयोगिता नैतिकता का सूचकांक है।
Ans: (b) पूर्णतावाद अन्त: अनुभूति को नैतिकता का मापदण्ड मानता है। यह नैतिकता को आध्यात्मिक रूप प्रदान करती है। आत्मपूर्णत‚ आत्मसाक्षात्कार‚ आत्मज्ञान को नैतिक आदर्श स्वीकार किया गया है। पूर्णतावाद में आत्मनिर्माण पर‚ स्वार्थवाद एवं परार्थवाद का समन्वय सम्भव‚ सुखवाद और कर्त्तव्यवाद में भी समन्वय पर बल दिया गया है।
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24. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूटों से सही उत्तर का चयन करें:
सूची-I (लेखक) सूची-II (रचना)
(A) रॉस (i) प्रोलेगोमेना टू इथिक्स
(B) मूर (ii) फांउन्डेशन्स ऑफ इथिक्स
(C) कान्ट (iii) इथिक्स
(D) ग्रीन (iv) मेटाफिजिक्स ऑफ मॉरल्स
कूट:
A B C D
(a) ii iii iv i
(b) i iv ii iii
(c) ii iii i iv
(d) iv ii i iii
Ans: (a) रॉस‚ फाउन्डेशन्स ऑफ इथिक्स‚ मूर‚ इथिक्स‚ काण्ट‚ मेटाफिजिक्स ऑफ मारल्ज तथा ग्रीन‚ प्रोलेगोमेना टू इथिक्स।
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25. अधोलिखित में से किसने कहा है ‘शुभ संकल्प के अतिरिक्त अन्य कुछ भी निरपेक्ष रूप से शुभ नहीं है’?
(a) क्लार्क (b) मार्टिन्यू
(c) सिजविक (d) कान्ट
Ans: (d) काण्ट अपने ‘शुभ-संकल्प’ सम्बन्धी सिद्धांत में‚ शुभसंकल्प को निरपेक्ष रूप से शुभ बताया है। काण्ट का नैतिकता संबंधी मत कर्त्तव्य के लिए कर्त्तव्य काण्ट के अनुसार शुभ-संकल्प से युक्त कर्म हमेशा ही शुभ होता है। यह किसी वस्तु की प्राप्ति का साधन नहीं है।
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26. ‘‘मात्र कार्य का प्रयोजन ही उसके नैतिक निर्णय का आधार है’’‚ निम्नलिखित में से किस एक का यह मत है?
(a) सुखवादी (b) बुद्धिवादी
(c) अंतर्ज्ञानवादी (d) कठोरतावादी
Ans: (c) अंतर्ज्ञानवादी मत में कार्य मात का प्रयोजन ही उसके नैतिक निर्णय का आधार है। इसमें कार्य के साध्य को महत्व् नहीं दिया जाता है। इसमें कार्य के हेतु पर ध्यान दिया जाता हे। अंतर्तानवाद एक तरह का हेतुवाद है। जो कार्य के साध्य को जाने भी अंतर्ज्ञानवादी कार्य को अच्छा या बुरा कह देता है। अर्थात‚ चोरी का साध्य जाने बिना ही इसको अच्छा कह देते है।
(नीतिशास्त्र का सर्वेक्षण: संगमलाल पाण्डेय)
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27. निम्नलिखित विचारकों में से किस एक ने ए-वर्ड‚ डी-
वर्ड तथा जी-वर्ड को एक परिवार माना है?
(a) मूर (b) रॉस
(c) स्पेन्सर (d) नॉवेल स्मिथ
Ans: (d) अधिनीतिशास्त्री नॉवेल स्मिथ को परामर्शवादी माना जाता है। नावेल स्मिथ का विचार है नैतिक निर्णययों का प्रयोग परामर्श देने के अतिरिक्त अन्य बहुत से कार्यों के लिए किया जा सकता है। नैतिक भाषा सम्बन्धित अपने मत में उन्होंने ए-वर्ड‚ डी-वर्ड तथा जी-वर्ड को एक परिवार माना है
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28. निम्नलिखित में से किसने कहा है कि नैतिक निर्णयों में संवेगात्मक तत्व होते हैं?
(a) मूर (b) रॉस
(c) एयर (d) स्टीवेन्शन
Ans: (c) नैतिक निर्णयों में संवेगात्मक तत्व होते है यह कथन ए.जे. एयर का है। एयर नैतिक निर्णयों से सम्बन्धित मत संवेगाभिव्यक्तिवाद है। मूर गैरप्रकृतिवाद या अप्रकृतिवादी है। स्टीवेन्शन ने नैतिक अभिव्यक्ति के बजाय उत्प्रेरणा पर अधिक बल दिया है। इन्होंने भी संवेगवाद का समर्थन किया है। गैर प्रकृतिवादी या अप्रकृतिवादी अन्त:प्रज्ञावादी मूर‚ रॉस दोनों है। नीतिशास्त्र के मूल सिद्धांत: वेद प्रकाश वर्मा
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29. गैलवे धर्म के प्रकार के रूप में निम्नलिखित को स्वीकार नहीं करता है?
(a) जन जातीय धर्म (b) राष्ट्रीय धर्म
(c) पूर्णव्यापी धर्म (d) आरम्भिक धर्म
Ans: (d) गैलवे धर्म के प्रकार के रूप में आरम्भिक धर्म को स्वीकार नहीं करता जबकि जनजातीय धर्म‚ राष्ट्रीय धर्म और सार्वभौमिक धर्म को स्वीकार करते है।
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30. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘ताओ’ का दोत है?
(a) आरम्भिक धर्म (b) प्रकृतिवादी धर्म
(c) मानववादी धर्म (d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans: (b) ताओ क दोत प्राकृतिवादी धर्म है। ताओ धर्म चीन में उत्पन्न धर्म है। इस धर्म में प्राकृतिक अराधना होती है। ताओ के दो सम्प्रदाय ‘छवुआनचनताओ पंथ’ और ‘चड़यीताओ पंथ’। ताओ धर्म चीन का मूल धर्म और दर्शन है। इसमें सर्वोच्च देवी और देवता क्रमश: यिन और यान है। ताओ-त्सी द्वारा रचित ग्रन्थ दाओ-दे-चिंग और जुआंग-जी इस धर्म और दर्शन प्रमुख ग्रन्थ।
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31. निम्नलिखित में से कौन-सी बात गाँधी के विषय में सत्य है?
(a) ईश्वर और सत्य सार्वभौमिक अवधारणाएं हैं।
(b) ईश्वर निरपेक्ष है और सत्य सापेक्ष हैं।
(c) ईश्वर और सत्य परस्पर परिवर्तनीय है।
(d) ईश्वर सत्य है और सत्य ईश्वर है।ृ
Ans: (d) गांधी जी के दर्शन में सत्य को बड़ा महत्व दिया गया है। उन्होंने सत्य को सर्वोच्च साध्य माना है। और अहिंसा को उसका साधन। उनके अनुसार‚ सत्य ईश्वर है और ईश्वर सत्य है। गांधी जी के अनुसार सत्य के अतिरिक्त ईश्वर कुछ और है तो वैसे ईश्वर की उन्हें आवश्यकता नहीं है।
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32. गाँधी ‘रोटी के लिए श्रम’ के सिद्धांत में अनिवार्यत:
सम्मिलित है:
(a) मानसिक कार्य (b) शारीरिक कार्य
(c) सामाजिक कार्य (d) राजनैतिक कार्य
Ans: (b) गांधी जी के रोटी के लिए श्रम के सिद्धांत में शारीरिक श्रम अनिवार्यत: सम्मिलित है। उनका यह सिद्धांत सामाजिक असमानता को कम करने में उपयोगी होगा। जीवित रहने के लिए हर व्यक्ति को श्रम करना आवश्यक है। हर व्यक्ति को शारीरिक श्रम की गरिमा को समझना चाहिए। यह श्रम स्वेच्छापूर्ण सहयोग है।
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33. गाँधी के अनुसार अहिंसा नहीं है:
(a) मानव प्रजाति का नियम
(b) मानव क्रिया की गाथा
(c) समस्त जीवन के प्रति शुभेच्छा
(d) निष्क्रिय प्रतिरोध
Ans: (d) गाँधी जी के अनुसार‚ अहिंसा निष्क्रिय प्रतिरोध नहीं है। अहिंसा सर्वप्रमुख सद्‌गुण है। अहिंसा सक्रिय प्रतिरोध है। यह बिना किसी को क्षति पहुँचाये हिंसक शक्ति को नियंत्रित रखने की संकल्प शक्ति है। अहिंसता निर्भयता और प्रेम है। अहिंसा समस्तकर्मों को प्रेरणा है। यह उघसीनता या निस्क्रियता की मनोवृत्ति नहीं है।
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34. गाँधी विचारधारा के आर्थिक कार्यक्रम आधारित थे:
(a) आर्थिक समझ के आदर्शात्मक सिद्धांत
(b) लोगों की आवश्यकताओं के लिए उत्पादन करना
(c) आत्मनिर्भरता का आदर्श
(d) समस्त आर्थिक उत्पादन में हिस्सेदारी
Ans: (b) गांधी यह समझते हैं कि पूर्ण आर्थिक समानता का आदर्श प्राय: अप्रात्य आदर्श है। उनके अनुसार समाज की आर्थिक संरचना का आधार भी नैतिक ही होना अनिवार्य है। महात्मा गांधी के अनुसार अगर मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार उत्पादन करे तो दुनिया में कोई भूखा नहीं मरेगा।
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35. वल्लभ के अनुसार ब्रह्म है:
(a) निर्गुण-मात्र (b) सगुण-मात्र
(c) निर्गुण और सगुण दोनों (d) इनमें से कोई नहीं
Ans: (b) वल्लभ सगुण ब्रह्म के उपासक है। उनके दर्शन को शुद्धाद्वैत वेदान्त कहा जाता है। शुद्धाद्वैत अर्थात माया के सम्बन्ध से रहित शुद्ध ब्रह्म का अद्वैत। वल्लभ वेदान्त में प्रमेयतत्व एकमात्र ब्रह्म है जो सर्वधर्मविशिष्ट‚ सविशेष‚ सगुण‚ शुद्ध धर्म के समान हेयगुणरहित है।
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36. मध्व के अनुसार ब्रह्म और जीव का संबंध है:
(a) अभेद (b) भेद
(c) भेदाभेद (d) उपरोक्त सभी
Ans: (b) मध्व ब्रह्म और जीव में भेद सम्बन्ध को मानते है। मध्व का दार्शनिक मत द्वैतवादी वेदान्त है। वह पंचविद्य भेद को मानते है। (1) ब्रह्म का जीव से (2) ब्रह्म का जड़ से (3) जीव का जड़ से (4) जीव का जीव से तथा (5) जड़ का जड़ से भेद मानते है।
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37. किस के द्वारा ‘संवृत्ति’ का ‘तथ्यसंवृत्ति’ एवं ‘मिथ्यासंवृत्ति’ में भेद किया गया है:
(a) आर्यदेव (b) दिङनाग
(c) नागार्जुन (d) चंद्रकीर्ति
Ans: (d) चन्द्रकीर्ति ने संवृत्ति को लोकसंवृत्ति (तथ्यसंवृत्ति) तथा मिथ्यसंवृत्ति में विभक्त किया है। संवृत्ति मूलाविद्या है‚ व्यक्तिगत अविद्या नही। अत: इसका निरोध निर्विकल्प प्रज्ञा द्वारा सम्भव है बौद्धिक ज्ञान द्वारा नहीं क्योंकि यह स्वयं बुद्धि-विकल्प है।
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38. कूटों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित को सुमेलित करें:
सूची-I सूची-II
(A) शंकर (i) विष्णुतत्वविनिर्णय
(B) वल्लभ (ii) दृगदृश्य विवेक
(C) मध्व (iii) प्रस्थानरत्नाकर
(D) निम्बार्क (iv) वेदांत पारिजात कुसुम
कूट:
A B C D
(a) iii i iv ii
(b) iii iv ii i
(c) ii iii i iv
(d) iv i iii ii
Ans: (c) शंकर – दृगदृश्य विवेक वल्लभ – प्रस्थानरत्नाकर मध्व – विष्णुतत्वविनिर्णय निम्बार्क – वेदांत पारिजात कुसुम
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39. शब्द संबंध मूलक हैं अत: ये मात्र सामान्य (जाति) का बोध करते हैं न कि वास्तविक (स्वलक्षण) का:
(a) आर्यदेव (b) चंद्रकीर्ति
(c) नागार्जुन (d) दिङनाग
Ans: (d) शब्द संबंधमूलक है अत: ये मात्र सामान्य (जाति) का बोध करते है न कि वास्तविक (स्वलक्षण) का यह कथन दिङनाग का है। दिङनाग का सामान्य सम्बन्धी मत अपोहवाद है।
(भारतीय दर्शन: डॉ. नन्द किशोर देवराज)
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40. हरमन्यूटिक्स को अपने आप को ज्ञानमीमांसीय समस्याओं की व्याख्या तक सीमित कर लेना चाहिए तथा मानव अस्तित्व की गहन अवस्थाओं में संलिप्त होने की चेष्टा नहीं करनी चाहिए। यह मत है:
(a) पॉल रिकर (b) एमीलिओ बेट्टी
(c) हैबरमास (d) देरीदा
Ans: (b) हरमन्यूटिक्स को अपने आप को ज्ञानमीमांसीय समस्याओं की व्याख्या तक सीमित कर लेना चाहिए तथा मानव अस्तित्व की गहन अवस्थाओं में संलिप्त होने की चेष्टा नहीं करनी चाहिए। यह कथन एमीलिओ बेट्टी का है।
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41. निम्नलिखित में से किसने व्याकरणिक व्याख्या और मनोवैज्ञानिक व्याख्या के बीच भेद किया है?
(a) विल्हेल्म डिल्थे (b) फ्रेडरिक श्लेयमाकर
(c) गैडेमर (d) हैडेगर
Ans: (b) फ्रेडरिक श्लेयमाकर अपने हर्म्युनिटिक्स में व्याकरणिक व्याख्या और मनोवैज्ञानिक व्याख्या के बीच अन्तर क्रिया है। उन्हें रोमांटिक हर्म्युनिटिक्स का समर्थक कहा जाता है।
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42. सत्य प्रणालीबद्ध संसक्त समग्रता का एक अनिवार्य संघटक है- यह मत हो सकता है:
(a) सत्य के व्यावहारवादी सिद्धांत का
(b) सत्य के संवाद सिद्धांत का
(c) सत्य के संसक्तता सिद्धांत का
(d) सत्य के संबंधमूलक सिद्धांत का
Ans: (c) सत्य का संसक्तता सिद्धांत के अनुसार सत्य प्रणालीबद्ध संसक्त समग्रता का एक अनिवार्य संघटक है। संसक्तता या सुसंगति सिद्धांत के अनुसार‚ कोई संप्रत्यय अथवा विश्वास तभी सत्य हो सकता है। जब वह पूर्वमान्य एवं पहले से स्थापित विश्वासों के साथ सामंजस्य रखता हो अर्थात उनके विरूद्ध न हो।
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43. निम्नलिखित दार्शनिकों में किस का मत है कि सत्यता का संवाद सिद्धांत तथ्य के संघटक तथा प्रतिज्ञपित के संघटक के बीच का तादात्म्य है?
(a) फ्रेगे (b) रसेल
(c) कार्नेप (d) क्वाइन
Ans: (b) रसेल सत्य के संवादिता के तार्किक सिद्धांत का समर्थक हैं। उनके अनुसार किसी प्रतिज्ञप्ति की सत्यता का अर्थ तथ्यों से संवाद है‚ न कि अनुभव से संवाद। यदि प्रतिज्ञप्ति के संघटक तथा तथ्य के संघटक के बीच तादाम्य है तो वह संवादिता सिद्धांत
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44. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘अत्यन्ताभाव’ की संकल्पना की सही तरह से उद्‌घाटित करता है?
(i) वायु में रंग का पूर्ण अभाव।
(ii) दो वस्तुओं के बीच भूत‚ वर्तमान और भविष्य में संबंध का अभाव।
(iii) इस अभाव का एक आरंभ होता है किन्तु अंत नहीं होता।
कूट:
(a) केवल (i) और (iii) सही है।
(b) केवल (i) और (ii) सही है।
(c) केवल (i) सही है।
(d) केवल (ii) सही है।
Ans: (b) अत्यन्ताभाव संसर्ग का नित्य आभाव है। अर्थात किसी भी प्रकार के संसर्ग (संबंध) के त्रकालिक आभाव को अत्यन्ताभाव कहां है। जैसे- वायु में रंग का पूर्ण आभाव। वायु में रंग – रूप आदि का वैकालिक आभाव होता है। अत: यहां अत्यन्तभाव है। अत्यन्ताभाव दो वस्तुओं के बीच भूत‚ वर्तमान और भविष्य में संबंध का अभाव है। इस आभाव का न आरम्भ होता है और न ही अंत होता है।
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45. निम्नलिखित में से कौन-सा मत अवस्तुवादियों का है?
(a) इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि प्रत्येक घोषणा वाक्य निश्चित रूप से सत्य या असत्य होता है।
(b) प्रत्येक घोषणा वाक्य निश्चित रूप से सत्य या असत्य होता है।
(c) प्रत्येक घोषणा वाक्य सदैव सत्य होता है।
(d) प्रत्येक घोषणा वाक्य सदैव असत्य होता है।
Ans: (a) अ-वस्तुवादी (Anti-realism)‚ इस बात की कोई गारण्टी नही कि प्रत्येक घोषणा वाक्य निश्चित रूप से सत्य या असत्य हो।
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46. फ्रेगे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और सही कूट चिह्नित करें।
(i) फ्रेगे संदर्भ और अभिव्यक्ति की समझ के बीच भेद प्रस्तुत करता है।
(ii) वस्तुएँ वह हैं जिनके लिए नाम विशेष प्रयुक्त हैं।
(iii) उसने परिमाणीकरण के सिद्धांत की खोज की।
कूट:
(a) केवल (i) और (ii) सही है।
(b) केवल (i) और (iii) सही है।
(c) केवल (iii) सही है।
(d) सभी (i)‚ (ii) और (iii) सही है।
Ans: (d) फ्रेगे के अनुसार नाम एवं वर्क वाक्य दोनों में अर्थ एवं निर्देश होता है। तादात्म्य कथनों को सार्थक कथन बतलाने के लिए फ्रेगे ने यह विभेद किया है। वस्तुएं वह है जिनके लिए नाम विशेष प्रयुक्त है। उसने परिमाणीकरण के सिद्धांत की खोज की।
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47. निम्नलिखित में किस दार्शनिक द्वारा मानव अधिकारों की अवधारणा की आलोचना यह कह कर की जाती है कि ‘‘ऐसा कोई भी अधिकार तथा विश्वास नहीं है तथा इसमें विश्वास करना वैसा ही है जैसे चुडैलों और एकशृंग में विश्वास करना।’’
(a) जेरेमी बेन्थम (b) एल्सडेयर मैकेन्टेयर
(c) एडमण्ड बर्क (d) जॉन लॉक
Ans: (b) जान लॉक मानव अधिकारों का प्राकृतिक अधिकार कहता है। लेकिन एल्सडेयर मैकेनृेयर ने इसको आलोचना करते हुए कहता है कि ऐसा कोई भी अधिकार तथा विश्वास नहीं है इसमें विश्वास करना वैसा ही है जैसे चुड़ैलों और एक शृंग में विश्वास करना।
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48. न्यायमत के अनुसार अणु निष्क्रिय और गतिहीन हैं यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है:
(i) आत्मा में रहने वाले धर्म एवं अधर्म के अनुरूप अदृष्ट द्वारा अणुओं में गति प्रदान की जाती है।
(ii) अणुओं का संयोग ज्यामितीय प्रगति में होता है न कि अंक अणितीय तरीके में।
(iii) भौतिक व्यवस्था के पीछे एक नैतिक व्यवस्था होती है।
कूट:
(a) (i) एक वैध अनुमान है।
(b) (ii) एक अवैध अनुमान है।
(c) (i), (iii) एक वैध अनुमान है।
(d) (i), (ii), (iii) वैध अनुमान है।
Ans: (d) (i), (ii), (iii) वैध अनुमान है। न्यायमत में अणुओें का निस्क्रिय और गतिहीन माना जाता है। जिसके परमात्मा‚ अदृष्ट से गति लेकर संचालित करता है। अदृष्ट नैतिक व्यवस्था है।
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49. उस कूट को चिन्हित करें जिसमें सही अभिकथन न हो:
(a) एक संयोजक सत्य है यदि इसके सभी संघटक सत्य हैं अन्यथा यह असत्य है।
(b) प्रत्येक यौगिक अभिकथन एक सत्यता-फलन अभिकथन होता है।
(c) द्विमूल्याश्रित तर्कशास्त्र में प्रत्येक अभिकथन या तो सत्य होता हैं या असत्य।
(d) एक सरल अभिकथन वह अभिकथन है जिसका संघटक इसके भाग के रूप में अन्य कोई अभिकथन नहीं होता।
Ans: (-) सत्य कथन (a)‚ (c)‚ (d) असत्य कथन (b) प्रत्येक यौगिक अभिकथन एक सत्यता-फलन अभिकथन है।
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50. निम्नलिखित में से किसके अनुसार देश और काल प्रागनुभविक प्रत्यक्ष हैं?
(a) ह्यूम (b) काण्ट
(c) लाइब्नित्स (d) आईस्टीन
Ans: (b) काण्ट अपने दर्शन में देश-काल को प्रागनुभाविक प्रत्यक्ष मानता है। वह इन्हें संवेदना शक्ति तथा संवेदन द्वार कहता है। काण्ट देश-काल को प्रत्यक्ष के आकार मानता है। उसके अनुसार देश काल स्वरूपता अनुभव न होकर प्रागनुभविक है। किन्तु वे संप्रत्यय न होकर शुद्ध संवेदनाएं है।
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51. उपमान के संदर्भ में सही अभिकथन का परीक्षण करें तथा सही कूट का चयन करें।
(i) वेदान्ती तर्क देते हैं कि उपमान आधार वाक्यों से निगमित किया जा सकता है।
(ii) सांख्या संप्रदाय के चितंकों के अनुसार उपमान का आविर्भाव प्रत्यक्ष में संभव है।
(iii) न्याय मतानुसार उपमान एक शब्द और उसके द्वारा इंगित वस्तु के बीच के संबंध का ज्ञान है।
कूट:
(a) केवल (i) और (ii) सही है।
(b) केवल (ii) और (iii) सही है।
(c) केवल (iii) सही है।
(d) सभी (i)‚ (ii) और (iii) सही है।
Ans: (d) भारतीय दर्शनों में उपमान को प्रमाण माना गया है। न्यय दर्शन में उपमान को स्वतंत्र प्रमाण के रूप में माना गया है। वैदान्त दर्शन में उपमान को स्वतंत्र प्रमाण माना गया है। वेदान्तियों के अनुसार उपमान का निगमन आधार वाक्यों से किया जा सकता है। सांख्य दर्शन में उपमान को स्वतंत्र प्रमाण न मानकर उसका अविर्भाव प्रत्यक्ष प्रमाण में कर लिया गया है। जबकि न्याय मतानुसार उपमान एक शब्द और उसके द्वारा इंगित वस्तु के बीच तुलनात्मक संबंध का ज्ञान है।
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52. दिये गये अभिकथन (A) और तर्क (R) की परीक्षा आगमनात्मक अनुमान के आलोक में करें और नीचे दिये गये कूट में से सही का चयन करें।
अभिकथन (A) : आगमनात्मक अनुमान में ज्ञात से अज्ञात की ओर जाते हैं।
तर्क (R) : आगमनात्मक अनुमान में किसी जाति विशेष के सभी सदस्यों के निर्णय के द्वारा उस जाति विशेष के सभी सदस्यों के बारे में निर्णय तक पहुँचते है।
कूट:
(a) दोनों (A) तथा (R) सही हैं और (R)‚ (A) की सही व्याख्या है।
(b) दोनों (A) तथा (R) सही हैं‚ और (R)‚ (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है‚ और (R) गलत है।
(d) (R) सही है‚ और (A) गलत है।
Ans: (c) आगमनात्मक अनुमान में हम ज्ञात विशिष्ट तर्कवाक्यों से सामान्य/व्यापक अज्ञात की ओर अग्रसर होते है। कथन (A) सही है लेकिन कथन (R) गलत है।
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53. किसका मत है कि द्रव्य‚ गति‚ देश और काल सापेक्षताएँ हैं?
(a) न्यूटन (b) आइन्स्टीन
(c) ह्यूम (d) लाइबनिज
Ans: (b) आइन्सटीन द्रव्य‚ गति‚ देश और काल को सापेक्षताएं कहते है। उनका सिद्धांत सापेक्षतावादी है। न्यूटन के अनुसार देश और काल पारमार्थिक दृष्टिवास्तविक और स्वतंत्रता सत्ता है। लाइवनित्ज देश-काल में वस्तुओं का संबंध मानते है और उन्हें व्यावहारिक दृष्टि से अयथार्थ मानते है।
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54. मिल के अनुसार निम्नलिखित में कौन-सा ‘एकरूपता’ का प्रकार नहीं है। सही विकल्प को चिह्नित करें।
(a) अनुक्रम की एकरूपता
(b) विज्ञान की एकरूपता
(c) सह-अस्तित्व की एकरूपता
(d) समानता की एकरूपता
Ans: (b) मिल के अनुसार एकरूपता का प्रकार हे-
(1) अनुक्रम‚ (2) सह अस्तित्व‚ (3) समानता की एकरूपता।
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55. नैतिक निर्णय का आधार कर्म फल है। निम्नलिखित में से किस एक का यह मत है?
(a) सुखवादी (b) अंतर्ज्ञानवादी
(c) कठोरतावादी (d) आदर्शवादी
Ans: (a) नैतिक निर्णय का आधार कर्म फल को मानने वाला नैतिक संप्रदाय सुखवादी है। यदि कोई कर्म कर्त्ता के लिए सुखनुभूति को सम्भव बनाता है तो वह कर्म नैतिक दृष्टि से अच्छा कर्म है। और यदि कोई कर्म वैसा नही है तो वह बुरा होगा।
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56. ऑस्टिन जब संवाद का विवरण प्रस्तुत कर रहे होते हैं तब निम्नलिखित में से किसके बीच भेद करते हैं?
(a) डिस्क्रिप्टिव एण्ड डेमाँनस्ट्रेटिव कन्वेंशन्स
(b) डिस्क्रिप्टिव एण्ड कोरिलेटिव कन्वेंशन्स
(c) डेमाँस्ट्रेटिव एण्ड लोक्युशनरी कन्वेंशन्स
(d) लोक्युशनरी एण्ड परलोक्युशनरी कन्वेंशन्स
Ans: (a) ऑस्टिन जब संवाद का विवरण प्रस्तुत कर रहे होते हैं तो डिस्क्रिप्टिव एण्ड डेमॉन्स्ट्रेटिव कन्वेंशन्स के बीच अन्तर करते हैं। ऑस्टिन भी विट्‌गेसटाइन और राइल की भाँति भाषा विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सर्वप्रथम उसने भाषा के दो गुप्त प्रयोगों में अन्तर्गत करता है- शाश्वत (Constrative) तथा सम्पादनात्मक
(Performance) अभिव्यक्तियां।
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57. निम्नलिखित में से कौन दार्शनिक फ्रेगे के स्वाभाविक अंकों के श्रेणी निर्माण की विधि की मात्र तार्किक धारणाओं के कारण आलोचना करता है?
(a) विट्‌गेन्स्टाइन (b) ऑस्टिन
(c) बट्रेंण्ड रसेल (d) स्ट्रॉसन
Ans: (c) बर्ट्रेण्ड रसल दार्शनिक फ्रेगे के स्वाभाविक अंको की श्रेणी निर्माण की विधि की मात्र तार्किक घटनाओं की आलोचना करता है। रसेल का मत तार्किक अनुवाद और फ्रेगे का मात्र तर्कान्तर्भूटगाण्डिहवाद (Logi) है।
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58. रसेल के अनुसार ‘डिनोटिंग फ्रेजेज’ वे मुहावरे हैं:
(a) जो पूर्णार्थक है।
(b) जिनका स्वयं में कोई अर्थ नहीं होता है।
(c) तर्कवाक्य से स्वतंत्र अर्थ वाले है।
(d) स्वयं में अर्थ रखते हैं।
Ans: (c) रसेल के अनुसार ‘डिनोटिंग फ्रेजेज’ के मुहावरे है जिनका स्वयं में कोई अर्थ नहीं है। लेकिन यह हो सकता है जिन वाक्यों में उनका प्रयोग हो वह वाक्य अर्थपूर्ण हो। रसेल के अनुसार ऐसे वाक्यांश केवल अपने भारतीय आकार से कुछ कहते है‚ वस्तुत: अपने में कोई वस्तु सूचित नहीं करते। समकालीन पाश्चात्य दर्शन – बसन्त कुमार लाल
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59. तर्क निष्ठ भाववाद के अनुसार ‘प्रोटोकाल स्टेटमेंट’ सन्दर्भित करते हैं:
(a) पूर्णत: आनुभाविक अभिकथन को
(b) साधारण सम्बन्धात्मक को
(c) प्राथमिक अभिकथन को
(d) लाक्षणिक अभिकथन को
Ans: (c) कारनैप के अनुसार अर्थपूर्ण भाषा अर्थपूर्ण इसी कारण है कि उसके आधार कुछ ऐसे निरीक्षण वाक्य या स्वानुभवमूल वाक्य
() या प्रोटोकॉल स्टेटमेंट है जो उसके सत्यापन के आधार है। तार्किक भाववाद में प्रोटोकॉल स्टेटमेंट प्राथमिक अभिकथन के सन्दर्भ में प्रयुक्त हुआ है।
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60. आगमन के सन्दर्भ में सही कथनों पर विचार करें और सही कूट का चयन करें।
(i) जे. एस. मिल आगमन को अनिवार्यत: एक प्रमाणदायी प्रक्रिया मानते हैं।
(ii) ह्वेवेल इसे अनिवार्यत: अन्वेषण मानते है।
(iii) चार्ल्स पीयर्स इसे सामान्यीकरण के रूप में देखते हैं तथा इसे अनुमान के विरूद्ध कहते हैं।
कूट:
(a) केवल (i) और (ii) सही हैं।
(b) केवल (i) और (iii) सही है।
(c) सभी (i)‚ (ii) और (iii) सही है।
(d) केवल (iii) सही है।
Ans: (c) जे.एस. मिल आगमन को अनिवार्यत: प्रमाणदायी प्रक्रिया मानते है। ह्वेल इसे अनिवार्यत: अन्वेषण मानते है। चार्ल्स पियर्स इसे सामान्यीकरण के रूप में देखते है तथा इसे अनुमान के विरूद्ध कहते है। जबकि ह्यूम आदि दार्शनिक आगमन की प्रक्रिया पर ही सन्देह करते है।
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61. निम्नलिखित में से कौन सा अभिकथन संशयवादी को स्वीकार नहीं है?
(a) कोई भी निरपेक्ष‚ प्रश्नातीत‚ पूर्ण ज्ञान संभव नहीं है।
(b) जब प्रमाण अनिश्चित हो‚ निर्णय को स्थगित रखा जाना चाहिए।
(c) ऐसे निश्चित और शाश्वत मूलय हैं जो समय और स्थान से निरपेक्ष रहते हैं।
(d) प्रश्नात्मकता और संशयात्मकता ज्ञान प्राप्ति के साधन के रूप में है।
Ans: (c) संशयवादी किसी भी वस्तु की निश्चयता और शश्वता पर संशय करता है। संशयवाद किसी भी वस्तु के अस्तित्व में पूर्ण विश्वास नहीं करता है। उसके अनुसार कोई भी निरपेक्ष‚ प्रश्नतीत‚ पूर्ण ज्ञान संभव नहीं है। प्रश्नात्मकता और संशयात्मकता ज्ञान प्राप्ति के साधन के रूप में है।
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62. प्लेटो के संदर्भ में निम्नलिखित में कौन-सा अभिकथन सही है/हैं? सही कूट का चयन करें।
(i) न्याय आत्मा का गुण हे।
(ii) सामुहिकता की आत्मा को व्यक्ति को व्याप्त करना चाहिए।
(iii) नैतिकता शाश्वत परंपरामात्र नहीं है।
कूट:
(a) केवल (i) सही हैं।
(b) केवल (ii) सही है।
(c) केवल (i) और (iii) सही है।
(d) (i), (ii) और (iii) सही है।
Ans: (d) प्लेटो न्याय को आत्मा का गुण मानता है। उसके अनुसार सामुहिकता की आत्मा को व्यक्ति का व्याप्त करना चाहिए। नैतिकता को प्लेटो शाश्वत परम्परागत नहीं मानता।
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63. सूची-I के संदर्भ में सूची-II से सुमेलित कीजिए और सही कूट का चयन करें। सूची- I सूची- II
(A) वैयक्तिक प्रत्ययवाद (i) सीमीत आत्मा एक का अंश‚ प्रकार अथवा अभास है।
(B) एकतत्व प्रत्ययवाद (ii) मूर्तसत्ता वैयक्तिक आत्मत्व है।
(C) आत्मनिष्ठ प्रत्ययवाद (iii) वस्तुओं के आदर्श रहित रूपों की यथार्थता को स्थापित करते है।
(D) यथार्थवादी प्रत्ययवाद (iv) प्रकृति सीमित मन का प्रक्षेपण मात्र है।
कूट:
(A) (B) (C) (D)
(a) iv iii ii i
(b) ii iv i iii
(c) ii i iv iii
(d) i ii iii iv
Ans: (c)
(A) वैयक्तिक प्रत्ययवाद (ii) मूर्तसत्ता वैयक्तिक आत्मत्व है।
(B) एकतत्व प्रत्ययवाद (i) सीमीत आत्मा एक का अंश‚ प्रकार अथवा अभास है।
(C) आत्मनिष्ठ प्रत्ययवाद (iv) प्रकृति सीमित मन का प्रक्षेपण मात्र है।
(D) यथार्थवादी प्रत्ययवाद (iii) वस्तुओं के आदर्श रहित रूपों की यथार्थता को स्थापित करते है।
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64. प्रत्यक्ष स्वलक्षण का भ्रमरहित ज्ञान है‚ यह मत है:
(a) बौद्धों का (b) प्रभाकर का
(c) नैयायिकों का (d) वेदांतियों का
Ans: (a) बौद्ध दर्शन में दो प्रमाण माने गये है – प्रत्यक्ष‚ अनुमान। प्रतिक्षण परिवर्तित पदार्थों को बुद्धि रचित मानने वाले आचार्यदिङनाग ने प्रत्यक्ष का विषय केवल स्वलक्षणों को माना है। स्वलक्षण को वो समस्त कल्पनाओं से रहित मानते है।
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65. ‘पर्याप्त हेतु का नियम’ का प्रतिपादक कौन है?
(a) अरस्तु (b) प्लेटो
(c) लाईब्नित्स (d) काण्ट
Ans: (c) पर्याप्त हेतु (कारणता) का नियम लाईब्नित्स ईश्वर अस्तित्व के प्रमाण के लिए प्रतिपादित करता है। लाईब्नित्स के अनुसार केवल वही वस्तु सत्य है जिसका पर्याप्त कारण हो। इसी प्रकार इस शृष्टि का भी कोई पर्याप्त कारण होना चाहिए। शृष्टि का यह पर्याप्त कारण ईश्वर ही हो सकता है। लाईब्नित्स का दिया गया यह तर्क प्रथम कारण के स्थान पर पर्याप्त कारण की मान्यता पर आधारित है।
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66. दी गई युक्ति की परीक्षा करें और नीचे दिए गए कूटों में से तर्कदोष के सही नाम का चयन करें। यूक्ति:
सभी घोड़े चौपाया हैं। कोई भी बैल घोड़ा नहीं है। कोई भी बैल चौपाया नहीं है।
कूट:
(a) अनुचित बृहत-पद-दोष
(b) अनुचित मध्य-पद-दोष
(c) अनुचित लघु-पद-दोष
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (a) दी गई उपरोक्त युक्ति में अनुचित वृहत-पद () दोष है। क्योंकि वृहत पद आधार वाक्यों में व्याप्त नहीं है। जो नियम-3 वैध निरपेक्ष न्यायवाक्य में कोई भी ऐसा पद निष्कर्ष में व्याप्त नहीं हो सकता जो आधारवाक्यों में न व्याप्त हो/का उलंघन है।
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67. ‘तर्क वाक्यों के विरोध’ के अनुसार यदि तर्क वाक्य‚ ‘गर्मी के दिन सामान्यत: गर्म होते हैं’ सत्य है तो तर्क वाक्य ‘गर्मी के सीभी दिन गर्म है’ होगा:
(a) सत्य (b) असत्य
(c) संदिग्ध (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans: (c) परम्परागत विरोध वर्ग के अनुसार‚ ‘गर्मी के दिन सामान्यत: गर्म होते है।’ को अंशव्यापी स्वीकारात्मक ‘’तर्कवाक्य माना जा सकता है। वहीं गर्मी के सभी दिन गर्म है को सर्वव्यापी स्वीकारत्मक तर्कवाक्य माना जा सकता है। ‘’ और ‘’ में उपाश्रयण उपाश्रित सम्बन्ध है। लेकिन इस विरोध वर्ग के अनुसार यदि सत्य होगा तो संदिग्ध हो जायेगा।
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68. एक युक्ति में अनिवार्यत: होते हैं:
(a) आकार और प्रतिज्ञप्ति
(b) सत्यता और आकार
(c) सत्यता और असत्यता
(d) आकार‚ प्रतिज्ञप्ति और सत्यता
Ans: (a) प्रत्येक युक्ति में एक आकार और कुछ प्रतिज्ञप्तियां होती है। जिनके आधार पर निष्कर्ष निगर्मित किया जाते है। यह अनिवार्य है।
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69. तर्कवाक्य ‘‘मक्खियाँ और ततैया डंक तभी चुभोती हैं जब वे या तो क्रुद्ध अथवा डरी हुई हों’’ का सही प्रतीकात्मक रूप निम्नलिखित में से कौन है? (Ax, Wx, Sx, Ax, Fx)
(a) (∃x){(Bx,Wx) ⊃ [(Ax Fx) ⊃ Sx]}
(b) (x) (Bx Wx) ⊃ [(Ax Fx) ⊃ Sx]}
(c) (x) (Bx Wx) ⊃ Ax Fx Sx
(d) (x) (Bx Wx) ⊃ (Ax Fx) ⊃ Sx
Ans: (b) Bx = ‘Bees’, Wx = Waps, Sx = Sting, Ax = Angry, Fx = Frightined मक्खियां (Bees) और ततैया (Waps) डंक तभी चुभोती (Sting) है जब या तो क्रुद्ध (Angry) अथवा डरी (Frightened) हुई हो। का प्रतीकात्मक रूप है-
(x) (Bx Wx) ⊃ [(Ax Fx) ⊃ Sx]}

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70. नीचे दी गई युक्ति की परीक्षा करें और सही कूट को चिह्नित करें। P U T S T U P Q R ∴ ⊃−⊃⊃ ∨( . )
( )
कूट:
(a) मान्य (b) अमान्य
(c) सत्य (d) असत्य
Ans: (b) अमान्य है। यह युक्ति आकार ही अवैध है।
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71. युक्ति I और युक्ति II को सावधानी पूर्वक पढ़ें और सही कूट को चिह्नित करें। युक्ति I : यदि वहाँ धूम्र है तो अग्नि है। वहाँ धूम्र नहीं है। इसलिए वहाँ अग्नि नहीं है। युक्ति II: मृत्यु जीवन का अंत है। जीवन का अंत पूर्णता है। इसलिए मृत्यु पूर्णता है।
(a) युक्ति I पूर्ववर्ती निषेध दोष है तथा II एक वैध युक्ति है।
(b) I वैध है तथा II में मध्य पद निषेध दोष है।
(c) I और II दोनों वैध युक्तियाँ हैं।
(d) युक्ति I में पूर्ववर्ती निषेध दोष है तथा युक्ति II में चतुष्पादी दोष है।
Ans: (d) युक्ति I का युक्त आकार P ⊃ Q ~ P ~Q यह युक्ति आकार पूर्ववर्ती निषेध दोष से ग्रस्त है। युक्ति (II) में मृत्यु‚ जीवन का अंत‚ पूर्णता‚पक्ष का प्रयोग हुआ है। परन्तु मृत्यु के सन्दर्भ में जीवन का अंत का एक अर्थ और पूर्णत:
के सन्दर्भ में दूसरा अर्थ है। अत: यहां चतुष्पदो दोष है।
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72. निम्नलिखित में से कौन प्रथम आकार का वैध योग्य नहीं है?
(a) बारबरा (b) दरिआई
(c) क्लारेंट (d) बारोको
Ans: (d) बारोको प्रथम आकार का वैध योग्य नहीं है।
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73. सूची को सूची से सुमेलित करें तथा दिए गए कूट में से सही का चयन करें। सूची- I सूची- II
(A) p.q (i) मोडस पोनेंस ∴ p
(B) p>q (ii) कंस्ट्रक्टीव डाइलेमा p ∴ q
(C) p (iii) सिम्प्लीफिकेशन ∴ p∨q
(D) (p>q).(r>s) (iv) ऐडीशन p∨r ∴ q∨s
कूट:
(A) (B) (C) (D)
(a) iii ii iv i
(b) iii i iv ii
(c) iv ii iii i
(d) iii ii i iv
Ans: (b)
(A) p.q (iii) सिम्प्लीफिकेशन ∴ p
(B) p>q (i) मोडस पोनेंस p ∴ q
(C) p (iv) ऐडीशन ∴ p∨q
(D) (p>q).(r>s) (ii) कंस्ट्रक्टीव डाइलेमा p∨r ∴ q∨s
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74. उस कूट को चिह्नित करें जो रूल ऑफ इन्फरेंस को नहीं बतला रहा है:
(a) हाईेपोथेटिकल सिलोजज्म
(b) डिस्जंक्‌टिव सिलोजज्म
(c) केटागोरिकल सिलोजज्म
(d) सिम्प्लाअेफिकेशन
Ans: (*)
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75. इकोफेमेनिज्म का समर्थन निम्नलिखित में से कौन करता है?
(a) वंदना शिवा और मारिया माइस
(b) वंदना शिवा और सिमोन दि बुवा
(c) मारिया माइस और सिमोन दि बुवा
(d) सिमोन दि बुवा और महाश्वेता देवी
Ans: (*)
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