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UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) Book

UGC NTA NET JRF Subject Philosophy Solved Previous Papers (In Hindi) 2015

1. निम्नांकित में nslJeeYeeme की पहचान करें। सभी धूम्रवान वस्तुएं वह्निवान हैं। पर्वत धूम्रवान है। इसलिए‚ पर्वत वह्निवान है।
कूट :
(a) विरुद्ध (b) प्रकरणसम
(c) असिद्ध (d) सव्यभिचार
Ans. (d) : सव्यभिचार को अनैकान्तिक भी कहते हैं। दिये गये अनुमान में व्याप्ति अपूर्ण या दोषपूर्ण है। अर्थात्‌ यह दोष तब उत्पन्न होता है जब हेतु का सम्बन्ध कभी साध्य से और कभी साध्य से भिन्न किसी अन्य वस्तु से होता है।
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2. निम्नांकित में से कौन यह अस्वीकार करता है कि प्रत्यक्षानुभवों को शब्दों में अभिव्यक्त किया जा सकता है।
(a) केवल जयराशि भट्ट (b) केवल धर्मकीर्ति
(c) केवल महावीर (d) धर्मकीर्ति और विश्वनाथ
Ans. (d) : धर्मकीर्ति और विश्वनाथ अपने दर्शन में ‘प्रत्यक्षानुभव’ के शब्दों में अभिव्यक्त किया जा सकता है‚ को अस्वीकार करते हैं। धर्मकीर्ति एक स्वतंत्रविज्ञानवादी के योगोचार सम्प्रदाय से हैं जो शब्द को अनुमान के अन्तर्गत रखते हैं।
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3. निम्नांकित में किस दर्शन संप्रदाय के अनुसार अभाव का अनुभव विशेषणता सन्निकर्ष के द्वारा किया जाता है?
(a) सांख्य (b) बौद्ध
(c) न्याय (d) जैन
Ans. (c) : न्याय दर्शन में अभाव का ज्ञान विशेषण-विशेस्य-भाव
(विशेषणत) सन्निकर्ष से होता है। न्याय दर्शन में सन्निकर्ष के छ:
भेद माने गये हैं यथा-संयोग‚ संयुक्त-समवाय‚ संयुक्त समवेत समवाय‚ समवाय‚ समवेत समवाय‚ विशेषण-विशेस्य भाव।
(भारतीय दर्शन की समीक्षात्मक रूपरेखा-सममूर्ति पाठक)
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4. समान उद्देश्य और विधेय वाले दो तर्कवाक्य सत्य हो सकते हैं‚ लेकिन दोनों असत्य नहीं हो सकते हैं‚ तो उनके बीच संबंध होता है :
(a) विरोध (b) विपरीत
(c) उप-विपरीत (d) उपाश्रित
Ans. (c) : परम्परागत विरोध वर्ग में जब समान उद्देश्य और विधेय वाले हो तर्कवाक्य सत्य हो सकते हैं‚ लेकिन दोनों असत्य नहीं हो सकते हैं तो उनमें उपविपरीत (Sub-contrary) सम्बन्ध होता है। अंशव्यापी सकारात्मक (II) तथा अंशव्यापी निषेधाघात्मक (O) तर्कवाक्यों के बीच यह सम्बन्ध होता है।
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5. दूसरों का व्यवहार देखकर पद के अर्थ को जानना किसके रूप में जाना जाता है?
(a) आप्तवाक्य (b) प्रसिद्धपदसान्निध्य
(c) वृद्धव्यवहार (d) विवरण
Ans. (c) : दूसरों का व्यवहार देखकर पद के अर्थ को जानना ‘वृद्धव्यवहार’ है। न्याय दर्शन की शब्द मीमांसा के अनुसार‚ ‘वृद्धव्यवहार’ ‘लम्बी रूढ़ परम्परा’ से स्थापित एक तरह की शक्ति है।
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6. सूची I को सूची II के साथ सुमेलित करें और सही
कूट का चयन करें :
सूची I सूची II
(A) असत्ख्यातिवाद (i) योगाचार बौद्ध
(B) आत्मख्यातिवाद (ii) प्रभाकर मीमांसा
(C) अन्यथाख्यातिवाद (iii) माध्यमिक बौद्ध
(D) अख्यातिवाद (iv) न्याय दर्शन कोड :
(A) (B) (C) (D)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (i) (ii) (iv) (iii)
(c) (iii) (i) (iv) (ii)
(d) (iii) (ii) (i) (iv)
Ans. (): (a) असत्ख्यातिवाद (iii) माध्यमिक बौद्ध
(b) आत्मख्यातिवाद (i) योगाचार बौद्ध
(c) अन्यथाख्यातिवाद (iv) न्याय दर्शन
(d) अख्यातिवाद (ii) प्रभाकर मीमांसा
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7. बरतन के मामले में कुम्भकार का जनक माना जाता है:
(a) समवायीकारण (b) असमवायीकारण
(c) अन्यथासिद्ध (d) निमित्तकारण
Ans. (c) : ‘अन्यथासिद्ध’ कारण वह है जिसके बिना कार्य की उत्पत्ति हो जाती है। बरतन बनाने के मामले में कुम्भकार का पिता
(जनक) भले ही कुम्भकार का कारण हों‚ परन्तु उसकी अनुपस्थिति में भी बर्तन का निर्माण निर्विघन चलता रहता है अत: ‘कुम्भकार का जनक’ अन्यथा सिद्ध है।
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8. द्वयणुक के उत्पादन में परमाणु संयोग की कारणता है:
(a) समवायीकारणता (b) असमवायीकारणता
(c) निमित्तकारणता (d) सामग्रीकारणता
Ans. (a) : शंकराचार्य जगत्‌ की व्यावहारिक सत्ता मानते है। जिसे वह सद्‌सदनिर्वचनीय कहते हैं। वह जगत के इसी अर्थ में मिथ्या भी कहते हैं। उनके अनुसार तीन तरह की सत्ताएं प्रतिभासिक सत्ता‚ व्यावहारिक सत्ता और पारमार्थिक सत्ता प्रतिभासिक सत्ता का बाध व्यावहारिक सत्ता में स्तर पर‚ और पारमार्थिक सत्ता के स्तर पर व्यावहारिक सत्ता का बाध हो जाता है। ध्यातव्य हो कि पारमार्थिक सत्ता अद्वितीय ब्रहम की सत्ता है। जो मोक्ष की अवस्था है।
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9. शंकर के अनुसार निम्नांकित में किसकी प्राप्ति होने पर जगत की ‘व्यावहारिकसत्ता’ समाप्त हो जाती है?
(a) केवल ब्रह्मा की hejceeefLe&keâmeòee
(b) स्वप्न वस्तुओं की ØeefleYeeefmekeâmeòee
(c) ब्रह्म की hejceeefLe&keâmeòee तथा स्वप्न-वस्तुओं की ØeefleYeeefmekeâmeòee दोनों
(d) सांसारिक वस्तुओं की ueewefkeâkeâ DeJemLee
Ans. ():
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10. कौन-से भूतद्रव्य नित्य हैं?
(a) केवल आकाश
(b) केवल मारूत
(c) केवल क्षिति‚ अप‚ तेज‚ मारुत के परमाणु
(d) आकाश और क्षिति‚ अप‚ तेज और मारुत के परमाणु
Ans. (d) : क्षिति‚ अप‚ तेज और मारूत को परमाणु रूप में नित्य माना गया है। आकाश को परमाणु रूप नहीं माना गया है। फिर भी नित्य‚ एक और विभु माना गया है।
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11. निम्नांकित में किसके अनुसार मुक्त आत्मा भक्त है?
(a) शंकर (b) रामानुज
(c) मध्व (d) निम्बार्क
Ans. (c) : शंकर ने मुक्त आत्मा को ‘ज्ञानस्वरूप ब्रहम’ माना है। रामानुज मुक्त जीव को ‘बह्म-प्रकार’ मानते हैं। मध्व के अनुसार मुक्त जीव (आत्मा) ‘भक्त’ हैं।
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12. मध्व के अनुसार निम्नांकित में से कौनसा सही नहीं है?
(a) जगत वास्तविक है।
(b) ब्रह्म सर्वोच्च है।
(c) मोक्ष जीव द्वारा अन्तर्निहित आनन्द की प्राप्ति है।
(d) ब्रह्म निर्गुण है।
Ans. (d) : माध्वाचार्य द्वैतवादी परम्परा के विचारक है। यह ब्रह्म को ‘निर्गुण’ न मानकर सगुण मानते है। उनके अनुसार जगत वास्तविक है‚ ब्रह्म सर्वोच्च शक्ति है। मोक्ष जीव द्वारा अन्तर्निहित आनन्द है।
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13. रामानुज के अनुसार निम्नांकित में से कौन सही है?
(a) सारत: peerJe और yeÇÿe समान हैं।
(b) ØelÙe#e सदैव efveefJe&keâuhe होता है।
(c) Øeheefòe cees#e का राजमार्ग है।
(d) yeÇÿe DeJeefÅee का आश्रय है।
Ans. (c) : रामानुज के अनुसार‚ प्रपत्ति मोक्ष का राजमार्ग है। प्रपत्ति मार्ग को मोक्ष प्राप्ति का साधन मानते हैं। प्रपत्ति ईश्वर के प्रति अपने को पूर्णतया समर्पण कर देना है। यह सर्वसुलभ मार्ग है। प्राप्ति का अर्थ है ‘शरणगति’। प्रपत्तिमार्ग में छ: अंग हैं-आनुकूल्यसंकल्प प्रातिकूल्यवर्जन‚ महावश्विास‚ कार्यव्य‚ गोतृत्व वरण और आत्मनिरपेक्ष।
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14. ‘cees#e के चार क्रम’ के मत का प्रतिपादन किसने किया?
(a) शंकर (b) रामानुज
(c) निम्बार्क (d) मध्व
Ans. (d) : माध्वाचार्य अपने दर्शन में ‘मोक्ष के चार क्रम’ या चार अवस्थाएं बताते हैं। कर्मक्षय‚ उत्क्रान्तिलय‚ अर्चिरादिगमन‚ और भाग ये चार अवस्थाएं हैं।
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15. peerJevecegefòeâ यद्यपि वांछनीय है‚ लेकिन तार्किक रूप से युक्तिसंगत नहीं हैं − यह मत किनका था?
(a) शंकर और मध्व (b) रामानुज और शंकर
(c) रामानुज और मध्व (d) वल्लभ और वाचस्पति
Ans. (c) : वेदान्तियों में शंकर‚ जीवन्मुक्ति की अवधारणा को मानते हैं। परन्तु रामानुज और मध्व इस अवधारणा की तार्किकता को नहीं मानते हैं। रामानुज के अनुसार जब तक शरीर है तब तक मोक्ष नहीं मिल सकता क्योंकि जीवात्मा का शरीर धारण कर्म के ही कारण है। मुक्ति कर्मों के क्षीण हो जाने पर तथा भौतिक शरीर के पात के अनन्तर ही सम्भव है। यह विदेह मुक्ति है।
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16. शंकर के अनुसार cees#e का अंतिम साधन है :
(a) keâce& (b) %eeve keâce& mecegÛJeÙe
(c) %eeve और केवल %eeve (d) उपर्युक्त सभी
Ans. (c) : शंकर मोक्ष का अंतिम साधन ‘ज्ञान’ को ही मानते है। उनके अनुसार कर्म से मुक्ति सम्भव नहीं हैं। वह भक्तिमार्ग को भी मोक्ष प्राप्ति का साधन मानते है। लेकिन कर्म को वे चित्त शुद्धि के लिए और भक्ति को एकाग्रता में सहायक मानते हैं। परन्तु यह अपर्याप्त है।
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17. साधक में कर्माचरण‚ मोक्ष प्राप्ति की इच्छा जागृत करता है − यह विचार किसके द्वारा प्रतिपादित है :
(a) प्रकाशात्मन्‌ (b) वाचस्पति मिश्रा
(c) पद्मपाद (d) आनन्दगिरि
Ans. (b) : ‘साधक में कर्माचरण‚ मोक्ष प्राप्ति की इच्छा जागृत करता है। वाचस्पति मिश्र का यह विचार अद्धैत वेदान्त से सम्बन्धित है। जिनकी कृति ‘भामती’ से ‘भामती-प्रस्थान’ नामक अद्धैत वेदान्त का एक सम्प्रदाय ही विकसित हो गया।
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18. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए और कूटों का प्रयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
सूची I सूची II
(a) रामानुज (i) सांख्य कारिका
(b) मध्व (ii) तत्व वैशार्दी
(c) वाचस्पति मिश्र (iii) श्रीभाष्य
(d) ईश्वर कृष्ण (iv) महाभारत तात्पर्य निर्णय
कूट :
(a) (b) (c) (d)
(a) (iii) (iv) (ii) (i)
(b) (ii) (i) (iv) (iii)
(c) (iv) (iii) (i) (ii)
(d) (ii) (iii) (i) (iv)
Ans. (a) : रामानुज का ‘श्रीभाष्य’‚ मध्व का ‘महाभारत तात्पर्य निर्वाय’‚ वाचस्पति मिश्र का ‘तत्व वैशार्दी’‚ और ईश्वर कृष्ण की ‘सांख्य कारिका’ नामक ग्रन्थ है।
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19. किसी शब्द का अर्थ ‘जातिविशिष्ट व्यक्ति’ है‚ यह विचार किसके द्वारा दिया गया है?
(a) विश्वनाथ (b) जगदीश
(c) उदयनाचार्य (d) रामाकृष्ण
Ans. (a) : इस प्रश्न को संदिग्ध माना गया है।
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20. ‘mebmkeâejpevÙe %eevece’ का अभिप्राय है :
(a) प्रत्यक्ष (b) अनुमान
(c) विपर्याय (d) स्मृति
Ans. (d) : संस्कारजन्य ज्ञान को ‘स्मृति’ कहते हैं। किसी वस्तु का अनुभव होने पर उसके संस्कार आत्मा में रह जाते हैं। कालान्तर में ये सूत्र संस्कार प्रबुद्ध होकर दृष्टा के मन में पूर्वानुभूत वस्तु को उपस्थित कर देते हैं। इसे स्मृति कहते हैं। न्याय दर्शन में स्मृति को भी यथार्थ और अययार्थ माना गया है। लेकिन यह अनुभव नहीं है।
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21. नीचे दो कथन दिए गए हैं‚ जिनमें एक अभिकथन (A) और दूसरा तर्क (R) के रूप में हैं। वेदांत के संदर्भ में
(A) और (R) पर विचार करते हुए‚ सही कूट का चयन कीजिए।
अभिकथन (A) : ‘‘व्यापारवद्‌ असाधारणम कारणम कर्णम’’
तर्क (R) : सभी प्रकार के ज्ञान के लिए मन के एक सामान्य कारक होने के कारण इसे एक असाधारण कारण माना जाता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है लेकिन (R) गलत है।
(d) (A) सही है लेकिन (R) सही है।
Ans. (c) : वेदान्त दर्शन के अनुसार ‘व्यापारवद्‌ असाधारणम कारणम कर्णम’ सत्य है परन्तु ‘सभी प्रकार के ज्ञान के लिए मन के एक सामान्य कारक होने के कारण इसे एक असाधारण कारण माना जाता है’ गलत है।
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22. क्रियात्व और कारकत्व के बीच के संबंध को किस रूप में जाना जाता है?
(a) आकांक्षा (b) योग्यता
(c) सन्निधि (d) तात्पर्य
Ans. (a) : यदि बिना क्रिया पद का उच्चारण किये बिना कारक पद का अर्थ समक्ष न आये तो इन दोनों पदों के परस्पर संबंध को ‘आकांक्षा’ कहते हैं। यह संबंध क्रियात्व और कारकत्व के बीच होता है। ध्यातव्य हो कि प्रत्येक वाक्य का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आकांक्षा‚ योग्यता‚ सन्निधि तथा तात्पर्य ज्ञान नामक हेतुओं की आवश्यकता होती है।
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23. भारतीय दर्शन की किस प्रणाली का विचार है कि संज्ञान का प्रामाण्य और अप्रामाण्य परत: है?
(a) बौद्ध (b) पूर्व-मीमांसा
(c) वेदांत (d) न्याय
Ans. (d) : न्याय दर्शन प्रामाण्य और अप्रामाण्य के संबंध में परत:
प्रामाण्यवादी है। न्याय के अनुसार किसी भी ज्ञान की प्रामाणितता का परीक्षण उसके ‘सफलप्रवृत्तिसामर्थ्य’ के आधार पर किया जाता है। ‘सफलप्रवृत्तिसामर्थ्य’ से ज्ञान में प्रामाण्य या अप्रामाण्य का अनुमान किया जाता है। यदि सफल प्रवृति सामर्थ्य है तो प्रामाण्य और नहीं है तो अप्रामाण्य।
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24. भारतीय दर्शन की किस प्रणाली के अनुसार संज्ञान का प्रामाण्य‚ स्वत: है और अप्रामाण्य‚ परत: है?
(a) न्याय (b) बौद्ध
(c) वेदांत (d) पूर्व-सीमांसा
Ans. (a)
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25. नीचे दो कथन दिए गए हैं जिनमें एक अभिकथन (A) और दूसरा तर्क (R) के रूप में हैं। अद्वैतियों के संदर्भ में
(A) और (R) पर विचार करते हुए सही कूट का चयन कीजिए :
अभिकथन (A) : धुएं के सभी मामले आग के मामले हैं।
तर्क (R) : धुएं और अग्नि के बीच सर्वव्यापी सहवर्तिता से वास्तव में सर्वव्यापी तर्क-
वाक्य निकाले जाते हैं।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है लेकिन (R) गलत है।
(d) (A) सही है लेकिन (R) सही है।
Ans. (a) : अद्धैत वेदान्त भी अनुमान को परोक्ष प्रमाण स्वीकार करता है। जिसमें व्याप्ति ज्ञान के आधार पर पक्ष में हेतु को देखकर साध्य का ज्ञान प्राप्त किया जाता है। अभिकथन (A) धुएं के सभी मामले आग के मामले है। सही है और तर्क (R) ‘धुएं-धुएं और अग्नि के बीच सर्वव्यापी सहवर्तिता से वास्तव में सर्वव्यापी तर्क-
वाक्य निकाले जाते हैं‚ भी सही हैं। जो अनुमान और व्याप्ति में सम्बन्ध को बताते हैं।
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26. नीचे दो कथन दिए गए हैं जिनमें एक अभिकथन (A) और दूसरा तर्क (R) के रूप में हैं। (A) और (R) पर विचार करते हुए सही कूट का चयन कीजिए :
अभिकथन (A) : कांट का तर्क है कि सभी मानव के लिए स्थान और समय किसी वस्तु को समझने के व्यक्तिनिष्ठ रूप हैं।
तर्क (R) : कांट का मानना है कि चूँकि सभी मानव के लिए स्थान और समय एक ही प्रकार से व्यक्तिनिष्ठ हैं‚ वे वास्तव में वस्तुनिष्ठ हैं।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है लेकिन (R) गलत है।
(d) (A) सही है लेकिन (R) सही है।
Ans. (b) : कांट के अनुसार स्थान (देश) और समाज (काल) हमारे संवेदन के मुख्य द्वार है जो किसी वस्तु को समझने के व्यक्तिनिष्ठ रूप है। इसके अतिरिक्त वह मानता है कि चूँकि सभी मानव के लिए स्थान और समय एक ही प्रकार से व्यक्तिनिष्ठ हैं‚ वे वास्तव में वस्तुनिष्ठ हैं। परन्तु यह अभिकथन (A) के लिए पर्याप्त व्याख्या नहीं है।
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27. निम्नलिखित में से कौन-सा समूह ह्यूम के‚ केवल विचारों पर निर्भर संबंधों की अवधारणा को सही रूप में चित्रित करता है?
(a) सादृश्यता‚ विपरीतता‚ तादात्म्य‚ समय और स्थान।
(b) सादृश्यता‚ विपरीतता‚ गुण में मात्रा और परिमाण में मात्रा।
(c) सादृश्यता‚ विपरीतता‚ समय और स्थान‚ कारण और कार्य।
(d) सादृश्यता‚ तादात्म्य‚ गुण में मात्रा औरपरिमाण में मात्रा।
Ans. (b) : डेविड ह्यूम विभिन्न प्रकार के संबंधों को मानता है यथासादृश्य संबंध‚ अभेद संबंध‚ देश-काल पर आश्रित संबंध‚ परिमाणात्मक संबंध‚ गुण की मात्रा का संबंध‚ विपरीत संबंध और कारण-कार्य संबंध। परन्तु केवल विचारों (Ideas) पर निर्भर संबंध सादृश्यता‚ विपरीतता‚ गुण में भिन्नता‚ परिमाण में मात्रा हैं।
(History of Western Philosophy: Frank Thilly)
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28. ब्रैडले के आभास और वास्तविकता के सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए सही
कूट चिह्नित करें।
(a) हम वास्तविकता की प्रकृति को आभास के माध्यम से समझते हैं जो दैनिक जीवन की चीजें हैं।
(b) वास्तविकता आभास से संबंधित है और आभास वास्तविकता का आभास है।
(c) वास्तविकता सभी आभासों में पाई जाती है लेकिन एक समान मात्रा में नहीं।
कूट :
(a) केवल (b) गलत है।
(b) केवल (b) और (c) गलत हैं।
(c) केवल (a) और (b) गलत हैं।
(d) (a), (b) और (c) सही हैं।
Ans. (d) : ब्रैडले एक प्रत्ययवादी विचारक है। उसकी रचना ‘आभास और सत्‌’ (Appearance and Reality) है। आभास और सत्‌ (वास्तविकता) के संदर्भ में-हम वास्तविकता को प्रकृति के आभास के माध्यम से समझते है जो दैनिक जीवन की चीजें हैं। वास्तविकता (Reality) आभास से संबंधित है और आभास वास्तविकता का आभास है। वास्तविकता सभी आभासों मे पाई जाती है परन्तु एक समान मात्र में नहीं। इसके अतिरिक्त ब्रैडले निरपेक्षसत्‌ को प्रत्येक आभास में अन्तर्व्याप्त मानता है। सत्‌ (वास्तविकता) और आभास परस्पर आश्रित है।
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29. हेडेगर की दुश्चिंता की अवधारणा वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति आ जाता है :
(a) जब उसे लगता है कि सिर्फ वही अस्तित्व का प्रश्न है और उत्तर देने की जवाबदेही भी उसी की है।
(b) जब उसे लगता है कि सभी प्रश्नों के उत्तर उसी के पास हैं।
(c) जब उसे लगता है कि सभी के पास अस्तित्व का प्रश्न है।
(d) जब वह अस्तित्व के प्रश्न और उसके उत्तर देने की जवाबदेही को अस्वीकार कर देता है।
Ans. (a) : हाइडेगर (Heidegger) एक आस्तित्ववादी विचारक माने जाते हैं। हाइडेगर का कहना है कि मानव-अस्तित्व की एक अनुभूति फेंके हुए होने तथा ‘तव्यता की अनुभूति है। दूसरी ओर उसकी तात्विकता उसे ‘सत्‌’ की ओर उन्मुख करती है।‚ वह सत्‌ को भी पाना चाहता है-इस तनाव मे जो अभिवृति जागती है। उसे हाइडेगर चिन्ता (दुश्चिंता) (Anxiety) कहते हैं। ऐसा तब होता है जब उसे लगता है वही अस्तित्व का प्रश्न है और उत्तर देने की जवाबदेही भी उसी की है।
(समकालीन भारतीय दर्शन-बसन्त कुमार लाल)
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30. लाईबनित्ज के अनुसार वास्तविकता है :
(a) यह एक नहीं हो सकती है बल्कि अनेक होती है और प्रत्येक शाश्वत एवं वास्तविक होती है।
(b) यह एक नहीं हो सकती है बल्कि अनेक होती है और प्रत्येक अस्थायी एवं अवास्तविक होती है।
(c) यह अनेक नहीं हो सकती बल्कि एक होती है और वह शाश्वत एवं वास्तविक होती है।
(d) यह अनेक नहीं हो सकती है बल्कि एक होती है और वह अस्थायी एवं अवास्तविक होती है।
Ans. (a) : लाईबनित्ज (1696-1716 ई0) एक बुद्धिवादी दार्शनिक था। उसके अनुसार ‘वास्तविकता’ (सत्‌) एक नहीं हो सकती है बल्कि अनेक होती है और शाश्वत एवं वास्तविक होती है। लाइबनित्ज का मत ‘चिदणुवाद’‚ बुद्धिवाद‚ बहुलवाद है।
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31. निम्नलिखित में से ‘‘जेंडर ट्रबल’’ के लेखक कौन हैं?
(a) सिमोन द बोआ (b) ल्यूस इरिगैरी
(c) जूडिथ बटलर (d) एलन शोवाल्टर
Ans. (c) : ‘जेंडर ट्रबल’ − जुडिथ बटलर सिमोन द बोआ − द सेकण्ड सेम्स
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32. निम्नलिखित में से किस दार्शनिक ने ‘‘समूहगत विभेदक अधिकारों’’ की अवधारणा प्रतिपादित की?
(a) थॉमस हूब्स (b) अमर्त्य सेन
(c) विल किमलिका (d) मैकेनटायर
Ans. (c) : ‘‘समूहगत विभेदक अधिकारों’’ की अवधारणा विल किमलिका ने प्रतिपादित किया। उसके अनुसार‚ लैंगिक पृथक्करण के आधार जेंग्र निस्पक्षता पर आधारित हैं। सार्वजनिक निजी भेद पर आधारित है और न्याय की अवधारणा स्वयं पुरूषों के व्यवहार एवं हितों के ध्यान में रखकर बनाई गयी हैं।
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33. निम्नलिखित में से किसने ‘अन्नदायी श्रम सिद्धान्त’ की अवधारणा की शुरुवात किया?
(a) गाँधी (b) विनोबाभावे
(c) तिलक (d) जे.बी. कृपलानी
Ans. (a) : गाँधी जी ने ‘अन्नदायी श्रम’ (Bread Labour) सिद्धान्त’ की अवधारणा को शुरू किया। जिसका तात्पर्य है कि जीवित रहने के लिए हर व्यक्ति को श्रम करना आवश्यक है। हर व्यक्ति स्वेच्छा से प्रत्येक दिन जाने से पहले कुछ न कुछ शारीरिक श्रम करें। गाँधी जी का यह सिद्धान्त अनुशंसा करता है कि हर व्यक्ति को पूर्णतया समान समझा जाय। ‘टालस्टाय’ तथा रस्किन के लेखों एवं बाइबिल के कुछ सन्दर्भों से प्रभावित।
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34. सूची I को सूची II से सुमेलित करें और निम्नलिखित कूटों में से सही उत्तर का चयन करें :
सूची I सूची II
(लेखक) (रचना)
(a) गाँधी (i) राष्ट्रीयता और समाजवाद
(b) जे.बी. कृपलानी (ii) गाँधीजी इन इण्डियन विलेजेज
(c) महादेव देसाई (iii) पॉलिटिक्स ऑफ चरखा
(d) नरेन्द्र देव (iv) इथिकल रीलीजन
(नीति-धर्म)
कूट :
(a) (b) (c) (d)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (iv) (iii) (ii) (i)
(c) (ii) (iii) (iv) (i)
(d) (ii) (ii) (i) (iv)
Ans. (b) : गाँधी जी-इथिकल रीलीजन (नीति धर्म)‚ जे.बी.
कृपलानी‚ पॉलिटिक्स ऑफ चरखा‚ महादेव देसाई- गाँधीजी इन इण्डियन विलेजेस तथा नरेन्द्र देव-राष्ट्रीयता और समाजवाद।
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35. निम्नलिखित कथनों में से गाँधी के सन्दर्भ में कौन सही नहीं है?
(a) अहिंसा मानव जाति का नियम है।
(b) साधन‚ साध्य के औचित्य को सिद्ध करना है।
(c) साध्य‚ साधन के औचित्य को सिद्ध कारता है।
(d) समस्त भूमि गोपाल की है।
Ans. (c) : गाँधी जी अपने कर्म और चिंतन दोनों में ही साध्य को महत्वपूर्ण तो मानते थे‚ परन्तु वह साधन की पवित्रता पर भी जोर देते थें। उनके अनुसार साधन के औचित्य का प्रमाण या आधार नहीं बन सकता। इसके अतिरिक्त ‘अहिंसा’ मानव जाति का नियम है‚ तथा ‘समस्त भूमि गोपाल की है’ मानते थे।
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36. निम्नलिखित में से किसने ‘ग्रामीण गणतन्त्र’ का समर्थन किया है?
(a) टैगोर (b) गाँधी
(c) विवेकानन्द (d) राधाकृष्णन्‌
Ans. (b) : गाँधी जी ने ‘ग्रामीण गणतन्त्र’ की बात कही है। गाँधी जी के अनुसार शक्ति एक स्थान पर केन्द्रित नहीं रहनी चाहिए। यह शोषण का आधार बन जाता है। विकेन्द्रीकरण की नीति को राज्य में अपनाना चाहिए।
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37. गाँधी के ‘रचनात्मक कार्यक्रम’ के उद्देश्य के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सही है?
(a) केवल बेरोजगारों को आर्थिक राहत पहुँचाना
(b) केवल कटाई-बुनाई करने वालों को कुछ मजदूरी दे पाना
(c) केवल समाज में अहिंसात्मक व्यवस्था को निर्मित करना
(d) उपरोक्त सभी
Ans. (d) : गाँधी जी के ‘रचनात्मक कार्यक्रम’ उनके सिद्धान्तों के आधार पर ही है। उनके अनुसार केवल बेरोजगारों को आर्थिक राहत पहुँचना‚ केवल कटाई-बुनाई करने वालो को कुछ मजदूरी दे पाना तथा केवल समान में अहिंसात्मक व्यवस्था को निर्मित करना।
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38. निम्नलिखित में से कौन-सा ईशदूतीय धर्म का सही युग्म है?
(a) जैन धर्म और बौद्ध धर्म
(b) ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म
(c) सिक्ख धर्म और इस्लाम धर्म
(d) हिन्दू धर्म और जोरोष्ट्रियन धर्म
Ans. (b) : ‘ईशदूतीय’ (Prophetic) ‘या पैगम्बर’ के माध्यम से स्थापित धर्म ‘ईसाई धर्म’ और ‘इस्लाम धर्म’ हैं। ऐसे धर्मों में दावा किया जाता है कि ईश्वर ने उनके पैगम्बरों को आकर कुछ ‘इल्हाम’ कराया और उन्हें समाज सम्बन्धित ‘धर्म’ का प्रचार-प्रसार करने का ‘आदेश’ दिया।
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39. सूची I को सूची II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिये गये कूटों से सही उत्तर का चयन करें :
सूची I सूची II
(धर्म) (अभीष्ट प्रक्रिया)
(a) बौद्ध धर्म (i) गुणस्थानक
(b) इस्लाम (ii) नामस्मरण
(c) सिक्ख धर्म (iii) अष्टाङ्गिक मार्ग
(d) जैनधर्म (iv) दिन में पाँच बार प्रार्थना करना
कूट :
(a) (b) (c) (d)
(a) (iii) (iv) (ii) (i)
(b) (iii) (i) (ii) (iv)
(c) (i) (iii) (iv) (ii)
(d) (iv) (ii) (i) (iii)
Ans. (a) : बौद्ध धर्म-अष्टाङ्गिक मार्ग‚ इस्लाम-दिन में पाँच बार प्रार्थना करना‚ सिक्ख धर्म-नामस्मरण तथा जैनधर्म-गुणस्थानक।
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40. निम्नलिखित में से किस दार्शनिक का मानना था कि ‘‘आगमन में अत:प्रज्ञा एक आवश्यक तत्व है‚ ऐसी प्रक्रिया जिसमें इन्द्रिय प्रत्यक्ष से सार्वभौमिक ज्ञान प्राप्त होता है।’’
(a) अरस्तु (b) पाइथागोरस
(c) डेमोक्रेटस (d) प्रोटोगोरस
Ans. (a) : अरस्तु (389-322 ई0पू0) को तर्कशास्त्र का जनक कहा जाता है। उसके द्वारा स्थापित तर्कशास्त्र एक बौद्धिक अनुशासन का विज्ञान है। उसके अनुसार‚ ‘आगमन में अत: प्रज्ञा एक आवश्यक तत्व है‚ ऐसी प्रक्रिया जिसमें इन्द्रिय प्रत्यक्ष से सार्वभौंमिक ज्ञान प्राप्त होता है।’
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41. नीचे दिए गए दो कथनों में से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) की संज्ञा दी गई है। (A) और
(R) पर विचार करते हुए सही कूट का चयन कीजिए :
अभिकथन (A) : स्पिनो़जा त्रुटि को ज्ञान के विकार के रूप में नहीं देखते।
तर्क (R) : कोई भी विचार अपने आप में सही या गलत नहीं हैं‚ एक उपर्युक्त वस्तु की उपस्थिति एक विचार को सही बनाती है।
कूट :
(a) दोनों (A) और (R) सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) दोनों (A) और (R) सही हैं लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है लेकिन (R) गलत है।
(d) (A) गलत है लेकिन (R) सही है।
Ans. (): स्पिनोजा त्रुटि (भ्रम) को ज्ञान के विकार के रूप में देखते हैं। अत: कथन (A) गलत है। तर्क (R) ‘कोई भी विचार अपने आप में सही या गलत नहीं है‚ एक उपर्युक्त वस्तु की उपस्थिति एक विचार को सही बनाती है।’ यह विचार स्पिनोजा के दर्शन के लिए सही है।
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42. निम्न में से किस दार्शनिक ने यह तर्क दिया कि दो पारस्परिक विरोधाभासी कथन समान रूप से सत्य हो सकते हैं‚ लेकिन एक‚ दूसरे को तुलना में ‘‘बेहतर’’ हो सकता है?
(a) अरस्तु (b) प्रोटोगोरस
(c) परमेनाइडीज (d) डेमोक्रेट्‌स
Ans. (b) : प्रोटोगोरस का मानना था कि ‘मनुष्य प्रत्येक वस्तु का मापदण्ड है’। तथा प्रत्येक व्यक्ति के लिए वही सत्य है‚ जो उसे सत्य प्रतीत होता है सत्य व्यक्ति की संवदेना और अनुभूति तक ही सीमित है। ये सत्य को आत्मनिष्ठ बना देते हैं। उसके अनुसार‚ दो पारस्परिक विरेधाभासी कथन समान रूप से सत्य हो सकते है‚ लेकिन एक‚ दूसरे की तुलना में ‘बेहतर’ हो सकता हैं प्रोटोगोरस
(481-411 ई0पू0) सोफिस्ट सम्प्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं।
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43. लाइवनी़ज की ज्ञान मीमांस के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(a) संपूर्ण ज्ञान मस्तिष्क में पहले से निहित है।
(b) अनुभव ज्ञान उत्पन्न नहीं करता।
(c) सार्वभौमिक और अनिवार्य तर्क वाक्यों को केवल संवेदन द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।
(d) लाइवनी़ज सूक्ष्म प्रत्यक्ष को स्वीकार करता है ऐसा प्रत्यक्ष जिसका प्रति मनस अचेतन है।
Ans. (c) : लाइबनित्ज की ज्ञानमीमांसा बुद्धिवाद पर आधारित है। उसके अनुसार सम्पूर्ण ज्ञान मस्तिष्क में पहले से निहित है। अनुभव द्वारा ज्ञान उत्पन्न नहीं होता बल्कि वह हमारे पूर्व ज्ञान को और अभिव्यक्त कर देता है। लाइबनित्ज जन्मजात प्रत्ययों के ज्ञान को मानता है। सार्वभौमिक और अनिवार्य नियम केवल बुद्धि के माध्यम से निगमित किये जा सकते हैं। लाइबनित्ज सूक्षम प्रत्यक्ष को स्वीकार करता है‚ यह‚ ऐसा प्रत्यक्ष जिसके प्रति मनस अवचेतन है।
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44. ‘‘सभी वस्तुओं के प्रति विश्वास अत्यंत नैसर्गिक एवं अत्यंत पराभौतिक हैं; विश्वास‚ ज्ञान का प्रायोगिक विकास है और विश्वासें‚ यथार्थ को बदलते और आकार प्रदान करते हैं’’-यह धारणा निम्नलिखित में से कौन-से दार्शनिक की है?
(a) जॉन डिवी (b) कांट
(c) डेकार्ट (d) अरस्तु
Ans. (a) : ‘जॉन डिवी’ (1859-1952) एक उपकरणवादी दार्शनिक है। जिन्होंने अर्थक्रियावाद के उपकरणवाद मे परिणत कर दिया। इनका योगदान शिक्षाशास्त्र एवं मूल्यशास्त्र में अनुकरणीय हैं उनके अनुसार सभी वस्तुओं के प्रति विश्वास अत्यंत नैसर्गिक एवं अत्यंत पराभौतिक है; विश्वास‚ ज्ञान का प्रयोगिक विकास है और विश्वासें‚ यथार्थ को बदलते और आकार प्रदान करते हैं’’।
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45. सूची I के साथ सूची II को सुमेलित करें एवं नीचे दिये गये कूटों से सही उत्तर का चुनाव करें :
सूची I सूची II
(A) बुद्धिवाद (i) एअर
(B) संवेगवाद (ii) हेयर
(C) उपयोगितावाद (iii) कांट
(D) परामर्शवाद (iv) मिल
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (iii) (i) (iv) (ii)
(c) (iv) (ii) (iii) (i)
(d) (iv) (iii) (ii) (i)
Ans. (b) : सम्बन्धित प्रश्न को संदिग्ध माना गया है। परन्तु फिर भी एअर संवेगवाद‚ मिल उपयोगितावाद‚ एअर परामर्शवाद तथा कांट- समन्वयवाद।
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46. ‘नीति सम्बन्धी प्रकरणों में राजकीय नियम ही सर्वोच्व न्यायालय हैं‚’ यह विचार निम्नलिखित में से किसका है?
(a) स्पेन्सर (b) मिल
(c) कान्ट (d) हॉब्स
Ans. (d) : हॉब्स के अनुसार‚ ‘नीति सम्बन्धी प्रकरणों में राजकीय नियम ही सर्वोच्य न्यायालय हैं। हॉब्स अपने राज्य सम्बन्धी विचार अपनी पुस्तक ‘लेवियाथन’ में देता हैं हॉब्स सामान्यों के नामवादी सिद्धान्त का समर्थक है तथा ‘सामाजिक समझौते का सिद्धान्त’ को प्रतिपादित किया।
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47. सूची I को सूची II के साथ सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गये कूटों से सही उत्तर का चयन करें :
सूची I सूची II
(लेखक) (रचना)
(A) हेयर (i) मेटॉफिजिक्स ऑफ मॉरल्स
(B) स्टीफेन (ii) दी राइट एण्ड दी गुड
(C) रॉस (iii) साइन्स ऑफ इथिक्स
(D) कान्ट (iv) फ्रीडम एण्ड री़जन
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (ii) (iii) (i) (iv)
(c) (iii) (ii) (iv) (i)
(d) (iv) (iii) (ii) (i)
Ans. (d) : हेयर-फ्रीडम एण्ड रीजन‚ स्टीफेन-साइन्स इथिक्स‚ काण्ट मेटाफिजिक्स ऑफ मारल्स तथा रॉस-दी राइट एण्ड दी गुड
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48. निम्नलिखित में से किस एक सिद्धान्त का विचार ‘आँख के लिए आँख’ है?
(a) निवर्तनवाद (b) सुधारवाद
(c) प्रतीकारवाद (d) उपरोक्त सभी
Ans. (c) : दण्ड सिद्धान्त के तीन प्रकार- प्रतीकारवाद‚ निर्वसनवाद‚ सुधारवाद। जब दण्ड का स्वरूप ‘आंख के बदले आंख’ का हो तो वहां प्रतिक्रिया स्वरूप दण्ड दिया जाता है अर्थात्‌ जैसों का तैसा’। ऐसे दण्ड सिद्धान्त को प्रतिकारवाद (Retributive) दण्ड सिद्धान्त कहते हैं इसमें दण्ड की मात्रा के अनुसार दण्ड दिया जाता हैं।
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49. निम्नलिखित में से किसने कहा है कि ‘यदि सुख शुभ है‚ तो जिस अर्थ में अन्य क्रियायें शुभ हैं‚ उससे भिन्न अर्थ में ही वह शुभ हो सकता हैं’?
(a) मूर (b) रॉस
(c) एयर (d) हेयर
Ans. (b) : रॉस के अनुसार ‘यदि सुख शुभ है‚ तो जिस अर्थ में अन्य क्रियाएं शुभ है‚ उससे भिन्न अर्थ में ही वह शुभ हो सकता है।’
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50. निम्नलिखित में से किसने हा है कि ‘स्वतन्त्रता ही मानव तथा समस्त बुद्धिजीवियों के गौरव का एक मात्र आधार है’?
(a) हॉब्स (b) कान्ट
(c) स्टीवेन्शन (d) बेन्थम
Ans. (b) : काण्ट अपने नीतिशास्त्र विवेचन में ‘संकल्प की स्वतंत्रता’ को महत्व देते है और इसे पूर्वस्थापित मान्यता मानते है। उनके अनुसार ‘स्वतंत्रता ही मानव तथा समस्त बुद्धिजीवियों के गौरव का एक मात्र आधार है।’
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51. निम्नलिखित में से यह किसका कथन है?
‘उसी सूत्र के अनुसार कार्य कीजिये जिसे आप तत्क्षण संकल्प द्वारा सामान्य नियम के रूप में प्रस्तुत कर सकें’।
(a) कान्ट (b) हेगेल
(c) हॉब्स (d) मिल
Ans. (a) : काण्ट के शब्दों में कर्त्तव्य का रूप अहैतुक आदेश हैं। अहैतुक आदेश के पांच सूत्र काण्ट अपने दर्शन में बताता है-
1. सार्वभौम विधान का सूत्र 2. प्रकृति-विधान का सूत्र 3. स्वयं साध्य का सूत्र 4. स्वतंत्रता का सूत्र 5. साध्यों के राज्य का सूत्र। उनके सार्वभौम विधान के सूत्र के अनुसार ‘उसी सूत्र के अनुसार कार्य कीजिए जिसे आपे तत्क्षण संकल्प द्वारा सामान्य नियम के रूप में प्रस्तुत कर सकें।
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52. नीचे दिये गये तर्क और तर्क आकार का अध्ययन कर नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।
(A.B) ⊃ C p ⊃ q
(1) (A.B) (2) p  ∴ C ∴ q  (a) (a), (b) का तर्काकार है।
(b) (b), (a) का विशिष्ट तर्काकार है।
(c) (b), (a) का तर्काकार है।
(d) (a), (b) का विशिष्ट तर्काकार है।
Ans. (c) : युक्ति आकार या तर्काकार प्रतीकों का वह विन्यास‚ जिसमें वाक्यचर होते है किन्तु कोई वाक्य नहीं होता। जब वाक्यचरों के स्थान पर वाक्य रख दिये जाते है तब युक्ति आकार युक्ति बन जाती है जैसे –
(A.B) ⊃ C का युक्ति आकार या तर्काकार p ⊃ q
(A.B) P ∴ C ∴ q
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53. विकल्पीय वाक्यों के सबल एवं निर्बल के निर्धारण में निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है?
(a) विकल्पावय के निर्बल अर्थ में केवल एक विकल्प सत्य होता है जबकि सबल अर्थ में दोनों विकल्प सत्य होते हैं।
(b) विकल्पावय के निर्बल एवं सबल दोनों अर्थों में दोनों विकल्प सत्य होते हैं।
(c) विकल्पावय के निर्बल और सबल अर्थ में केवल एक विकल्प सत्य होता है।
(d) विकल्पावय के निर्बल अर्थ में दोनों विकल्प सत्य होते हैं जबकि सबल अर्थ में केवल एक विकल्प सत्य होता है।
Ans. (d) : दो कथनों का विकल्प उनके बीच या (or) रखकर किया जाता है। इस संगठित होने वाले दोनों कथन विकल्पावयव कहलाते हैं। विकल्पावय के निर्बल अर्थ में दोनों विकल्प सत्य होते है जबकि सबल अर्थ में केवल एक विकल्प सत्य होता है।
(दर्शन पुज एक गहन दृष्टि – विनोद तिवारी)
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54. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिये और नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिये :
सूची I सूची II
(A) डी.आई.एम.ए.आर.आई. (i) पहली आकृति एस.
(B) एफ.ई.एल.ए.पी.टी.ओ. (ii) दूसरी आकृति एन.
(C) बी.ए.आर.ओ.सी.ओ. (iii) तीसरी आकृति
(D) डी.ए.आर.आई.आई. (iv) चौथी आकृति
कूट :
(A) (B) (C) (D)
(a) (i) (ii) (iii) (iv)
(b) (ii) (iii) (i) (iv)
(c) (iii) (iv) (ii) (i)
(d) (iv) (iii) (ii) (i)
Ans. (d) :
DIMARIS चौथी आकृति FELAPTON तीसरी आकृति BAROCO दूसरी आकृति DARII पहली आकृति
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55. नीचे दिये कथनों से सही उत्तर को चीन्हित कीजिए।
(1) व्याघात तर्कवाक्यों के बीच एक संबंध है जिसमें तर्कवाक्य गुण और परिमाण दोनों में भिन्न होते हैं।
(2) विपरीत संबंध सर्वव्यापी तर्कवाक्यों के बीच होता है।
(3) विरुद्ध संबंध अंशव्यापी तर्कवाक्यों के बीच होता है।
(4) सर्वव्यापी तर्कवाक्य अंशव्यापी तर्कवाक्यो के उपाश्रय हैं।
कूट :
(a) (a) और (b) सही है।
(b) (b) और (c) गलत हैं।
(c) (c) और (d) गलत हैं।
(d) उपर्युक्त सभी कथन सही हैं।
Ans. (d) : परम्परागत विरोध वर्ग गुण और परिमाण में अलग-
अलग तर्कवाक्यों में सम्बन्ध की व्याख्या करता हैं चार प्रकार के तर्कवाक्य सर्वव्यापी स्वीकारात्म (A), सर्वव्यापी निषेधात्मक (E), अंशव्यापी स्वीकारात्मक (I) अंशव्यापी निषेधात्मक (O) इस वर्ग के अनुसार संबंध-
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56. निम्नलिखित में से किस स्थिति में दो कथन तार्किक रूप से समतुल्य होंगे?
(a) जिनके द्विउपाधिक पुनर्कथन हैं।
(b) जिनके द्विउपाधिक व्याघात हैं।
(c) जिनके द्विउपाधिक संभाव्य हैं।
(d) दोनों समान सत्यता मूल्य रखते हैं।
Ans. (a) : दो कथन तार्किक रूप से समतुल्य तब होते है जब उनके द्विउपाधिक (Bicnditional) पुनर्कथन हो। जैसे- द्विधानिष् ोध- ‘P α ~ ~ P’ इसके लिए प्रतीक ‘ α ‘ प्रतीक का प्रयोग होता है।
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57. निम्नलिखित में से कौन सा व्यंजक डेमार्गन सिद्धान्त का सही आकार है?
(a) [(pαq)]α[(p>q).(q>p)] और [(pαq)]α[(p.q)∨(~p.~q)]
(b) [~(p.q)]α[(~p∨~q)] और [~(p∨q)]α[(~p.~q)]
(c) [(pα(p.p)] और [(pα(p∨p)]
(d) [(p.p)]α (q.p)] और [(p∨q)α(q∨p)]
Ans. (b) : डेमार्गन सिद्धान्त – [~(p.q)] α [(~p∨~q)] और [~(p∨q)]α[(~p.~q)]
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58. निम्नलिखित में से किस प्रकार लघु सत्यतासारणी विधि द्वारा किसी युक्ति की अवैधता सिद्ध की जा सकती है?
(a) दोनों आधार वाक्यों एवं निष्कर्षों को ‘सत्य’ सत्यता मूल्य निर्धारित कर
(b) दोनों आधार वाक्यों एवं निष्कर्षों को ‘असत्य’ सत्यता मूल्य निर्धारित कर
(c) आधार वाक्यों को ‘असत्य’ सत्यता मूल्य एवं निष्कर्ष को ‘सत्य’ सत्यता मूल्य निर्धारित कर
(d) आधार वाक्यों को ‘सत्य’ सत्यता मूल्य तथा निष्कर्ष को ‘असत्य’ सत्यता मूल्य निर्धारित कर
Ans. (d) : लघु सत्यतासारणी विधि द्वारा किसी युक्ति की अवैधता‚ आधार वाक्यों को ‘सत्य’ सत्यता मूल्य तथा निष्कर्ष को ‘असत्य’ सत्यता मूल्य निर्धारित कर सिद्ध की जाती है।
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59. तर्क वाक्य ‘‘सभी पत्तियाँ हरित हैं’’ का प्रतिवर्तन है।
(a) कोई अ-पत्तियाँ अहरित नहीं हैं।
(b) सभी पत्तियाँ अहरित हैं।
(c) कछ पत्तियाँ अहरित हैं।
(d) कोई पत्तियां अहरित नहीं हैं।
Ans. (d) : प्रतिवर्तन में उद्देश्य और परिमाण तर्कवाक्य के अपरिवर्तित रहते है लेकिन विधेय के स्थान पर उसके पूरक से तथा गुण बदल दिया जाता है जैसे- ‘‘सभी पत्तियां हरित है’’ का प्रतिवर्तन है ‘‘कोई पत्तियां अहरित नहीं है।’’
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60. सभी धर्मों की सामान्य और आवश्यक शिक्षा है :
(a) नैतिकता जीवन का सार है।
(b) सामाजिक मूल्यों का उन्नयन
(c) आपसी प्रेम और सम्मान के मानव धर्म की स्थापना
(d) उपर्युक्त सभी
Ans. (d) : सभी ‘धर्मो’ की कुछ शिक्षाएं होती है। जो लगभग सभी में समान होती है‚ वो है- 1. नैतिकता जीवन का सार है। 2.
सामाजिक मूल्यों का उन्नयन 3. आपसी प्रेम और सम्मान के मानव धर्म की स्थापना।
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61. स्ट्रासन ने अपनी पुस्तक ‘लॉजिकल थियरी’ में ‘औपचारिक प्रणालियों’ के निम्नलिखित में से किसका मूल्यांकन करने में लाभदायक होने की व्याख्या की है?
(a) ‘संदर्भ मुक्त’ परिचर्चा (b) ‘संदर्भ सापेक्ष’ परिचर्चा
(c) ‘संदर्भ निरपेक्ष’ परिचर्चा (d) उपर्युक्त सभी
Ans. (a) : स्ट्रॉसन अपनी पुस्तक लॉजिकल थियरी में औपचारिक प्रणालियों’ के मूल्यांकन में ‘सन्दर्भ मुक्त’ परिचर्चा के उपयोगी होने की बात करता है।
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62. मूल तर्क वाक्य‚ सत्यापन और तत्व‚ मीमांसीय कथनों के संदर्भ में दिए गए अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार करते हुए नीचे दिए गए कूटों में से सही कूट को चिह्नित कीजिए।
अभिकथन (A) : यदि सभी कथन मूल तर्क-वाक्यों के सत्यता-फलन हैं जो कि प्रेक्षण की सूचना देते हैं तो वे सभी या तो अपने आप में आनुभविक होंगे अन्यथा पुनर्कथन या व्याघात होंगे।
तर्क (R) : तत्व मीमांसीय कथनों का उपर्युक्त घटकों के अंतर्गत वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है।
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है।
(d) (A) गलत है लेकिन (R) सही है।
Ans. (b) : मूल तर्कवाक्य (प्राथमिक प्रतिज्ञप्ति)‚ सत्यापन के सन्दर्भ में यदि सभी कथन प्राथमिक प्रतिज्ञप्ति मूल तर्कवाक्य के सत्यता-
फलन है जो कि प्रेक्षण की सूचना देते है तो वे सभी तर्कवाक्य या तो अपने आप में आनुभविक होंगे अन्यथा पुनर्कथन या व्याघात होंगे। लेकिन इन वाक्यों का सत्यता फलन सूचनाओं का तत्वमीमांसीय कथनों से कोई सम्बन्ध नहीं है। अत: अभिकथन (A) सही हैं तथा (R) भी सही है। परन्तु (R) व्याख्या नहीं हैं।
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63. विटगेंसटाइन ने ‘इनवेस्टिगेशन्स’ में अर्थ का सिद्धान्त प्रतिपादित किया है‚ इसे किस नाम से जाना जाता है?
(a) अर्थ का चित्र सिद्धान्त
(b) अर्थ का प्रयोग सिद्धान्त
(c) अर्थ का भाषायी-खेल सिद्धान्त
(d) अर्थ का वाक्‌ कृत्य सिद्धान्त
Ans. (b) : विटगेन्सटाइन अपनी पुस्तक ‘इन्वेस्टिगेशन्स’ में अर्थ का सिद्धान्त का प्रतिपादन करता है। जिसे ‘अर्थ का प्रयोग सिद्धान्त’ कहते है। चुंकि यह सिद्धान्त फुटबॉल मैच के खेल को देखने के बाद विटगेन्सटाइन के मन में आया था अत: इसे ‘भाषा- खेल सिद्धान्त’ भी कहते है।
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64. रसेल के डिफिनिट डिस्क्रिप्शन के सिद्धान्त के अनुसार तर्क वाक्य ‘वेवरली का लेखक स्काट है’ निम्न प्रकार विश्लेषित किया जा सकता है :
(1) कम से कम एक व्यक्ति ने वेवरली को लिखा है।
(2) अधिक से अधिक एक व्यक्ति ने वेवरली को लिखा है।
(3) जिस किसी भी वेवरली को लिखा है स्काट है। रसेल के अनुसार नीचे दिए गए कूटों में से कौन में से कौन-सा सही हैं?
(a) (a) और (b) का समन्वय
(b) (b) और (c) का समन्वय
(c) (a) और (c) का समन्वय
(d) (a), (b) और (c) का समन्वय
Ans. (d) : रसेल डिफिनिट डिस्टिक्रप्शन (निश्चित वर्णन) के सिद्धान्त के अनुसार ‘‘वेवरली का लेखक स्काट है’’ का विश्लेषण निम्न प्रकार करता है-
1. कम से कम एक व्यक्ति ने वेवरली को लिखा है।
2. अधिक से अधिक एक व्यक्ति ने वेवरली को लिखा है।
3. जिसने भी वेवरली लिखा वह स्काट है। रसेल के अनुसार‚ ‘वेवरली का लेखक’ एक अपूर्ण प्रतीक है। जो एक वर्णनात्मक पदावली और जटिल प्रतीक है। जबकि ‘एकार’ एक व्यक्तिवाचक नाम और एक सरल प्रतीक है।
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65. सूची I को सूची II के साथ सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन पियर्स के अपनी पुस्तक ‘फाउंडेशन्स ऑफ दी थ्योरी ऑफ साइन्स’ में किए गए संकेत परक वृत्ति के वर्गीकरण के आलोक में करें :
सूची I सूची II
(A) वाक्य विन्यास विज्ञान (i) यह चिह्नों एवं उनके भाष्यों के बीच संबंध का वर्णन करता है।
(B) संकेत विज्ञान (ii) यह एक चिह्न से दूसरे चिह्नों के संबंधों का वर्णन करता है।
(C) व्यवहार विज्ञान (iii) यह उस तरीके का वर्णन करता है जिनमें वे निर्धारित होते हैं।
कूट :
(A) (B) (C)
(a) (ii) (iii) (i)
(b) (iii) (ii) (i)
(c) (i) (ii) (i)
(d) (i) (iii) (ii)
Ans. (a) : ‘वाक्य विन्यास विज्ञान’ में एक चिन्ह से दूसरे चिन्हों के संबंधों का वर्णन किया जाता है। ‘संकेत विज्ञान’ (Semontic) में उस तरीके का वर्णन किया जाता है जिनमें वे निर्धारित होते है। तथा व्यवहार विज्ञान में चिन्हों एवं उनके भाष्यों के बीच संबंध का वर्णन किया जाता हैं।
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66. अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार करते हुए विटगेन्सटाइन के तर्कवाक्य के विचार के आलोक में नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।
अभिकथन (A) : किसी तर्क वाक्य की परिसीमा का उसके सत्यता आधार से तादात्म्य होता है।
तर्क (R) : किसी तर्क वाक्य की परिसीमा परमाण्विक तर्कवाक्यों का संयोजन होता है।
कूट :
(a) दोनों (A) और (R) सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) दोनों (A) और (R) सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है और (R) गलत है।
(d) (A) गलत है और (R) सही है।
Ans. (b) : विट्‌गेन्सटाईन (1889-1959) अपने तर्कवाक्य के विचार के अनुसार किसी तर्कवाक्य की परिसीमा का उसके सत्यता आधार से तादात्म्य होता है। और तर्कवाक्यों की परिसीमा परमाण्विक तर्कवाक्यों का संयोजन होता है। परन्तु (R), (A) की व्याख्या नहीं है।
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67. ‘‘भाषा हमारी द्वितीय प्रकृति है। यह भाषा के कारण ही संभव है कि जगत हमारे लिये खुला हुआ है। यह निम्नलिखित में से किस शास्त्र मीमांसीय चिंतक का विचार है?
(a) श्लाइरमेकर (b) डिल्थे
(c) गडैमर (d) हाइडेगर
Ans. (c) : ‘हैंस जार्ज गैडामर’ (1900-2002) एक जर्मन शादामीमांसक है। उनके अनुसार ‘भाषा हमारी द्वितीय प्रकृति है। यह भाषा के कारण ही संभव है कि जगत हमारे लिए खुला हुआ है।
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68. शास्त्रमीमांसा को ‘सत्तामीमांसीय मोड़’ देने में निम्नलिखित में से किस दार्शनिक का योगदान है?
(a) मार्टिन हाइडेगर (b) रिकोवर
(c) डेरिडा (d) हाबरमास
Ans. (c) : मार्टिन हाइडेगर जो कि एक अस्तित्ववादी विचारक थे‚ ने शास्त्रमीमांसा को ‘सत्तामीमांसीय मोड़’ देने में योगदान दिया। उन्होंने शास्त्रमीमांसा को अपने ढंग से व्याख्यापित करते है।
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69. निम्नलिखित में से किस शास्त्रमीमांसीय चिंतक ने सत्तामीमांसीय शास्त्र एवं समीक्षात्मक शास्त्रमीमांसा में समन्वय स्थापित किया?
(a) गडैमर (b) डेरिडा
(c) रिकोवर (d) हाबरमास
Ans. (a) : पॉल रिकोवर (1913 – 2015) फ्रांस के एक शास्त्रमीमांसीय चिंतक हैं। जिन्होंने शास्त्रमीमांस्य (hermeneutics) को फेनोमेनोलॉजिकल वर्णन के साथ जोड़ा। इन्होने सत्तामीमांसीय शास्त्र एवं समीक्षात्मक शास्त्रमीमांस में समन्वय स्थापित किया।
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70. ‘चेतनता का’ संवृत्तशास्त्रीय विश्लेषण के दो पक्ष हैं (i) नोएमैटिक और (ii) नोएटिक। उनके संबंध के बारे में नीचे दिए गए विकल्पों से सही विकल्प का चयन करें :
(a) विभाज्य (b) विभाजन से परे
(c) अविभाज्य (d) संयुक्त
Ans. (c) : चेतना का संवृत्तिशास्त्रीय विश्लेषण हुसर्ल अपने फेनोमेनोलॉजी में प्रस्तुत करता है। उसके अनुसार इसके दो अविभाज्य पक्ष है- 1. नोएमैटिक तथा 2. नोएटिक।
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71. धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन के लक्ष्य की आवश्कता है :
(a) अन्तरधर्म संवादों को समझने के लिए
(b) धर्मों के बीच समानता तथा अंतर को समझने के लिए
(c) धर्मों की विविधता के मूल तथा समन्वय को प्राप्त करने के लिए
(d) उपर्युक्त सभी
Ans. (d) : धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए हमें कुछ मूलभूत लक्ष्यों की आवश्यकता है-
1. अन्तधर्म संवादों को समझने के लिए
2. धर्मों के बीच समानता तथा अंतर को समझने के लिए
3. धर्मों की विविधता के मूल तथा समन्वय को प्राप्त करने के लिए।
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72. ‘प्रत्यक्षम कल्पनापोढम नामजात्याद्‌य-संयुक्तम’ प्रत्यक्ष की इस परिभाषा को किसने सही बताया?
(a) धर्मकीर्ति (b) धर्मोत्तर
(c) वात्स्यायन (d) दिङ्गनाग
Ans. (d) : प्रत्यक्षम कल्पनापोढ़म नामजात्याद्‌य-संयुक्तम प्रत्यक्ष की इस परिभाषा को दिये गये विकल्पों के सन्दर्भ में सन्दिग्ध माना गया है। यह प्रश्न UGC ने।
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73. ‘ज्ञानकरणकं ज्ञानं प्रत्यक्षम्‌’‚ प्रत्यक्ष की यह परिभाषा सर्वप्रथम किसके द्वारा प्रतिपादित की गई थी?
(a) दिङ्गनाग (b) गौतम
(c) गंगेश (d) वाचस्पति मिश्र
Ans. (c) : ‘ज्ञानकरणकं ज्ञानं प्रत्यक्षम्‌’ – गंगेश। गंगेश को नव्यन्याय के प्रवर्तक माने जाते है। गंगेश की पुस्तक का नाम ‘तत्वचिंतामणि’ है।
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74. निम्नलिखित में से किस एक दार्शनिक का कथन है कि ‘प्रत्येक अपने लिए से प्रत्येक अन्य के लिए कोई मार्ग नहीं हैं’?
(a) मिल (b) बेन्थम
(c) कान्ट (d) मार्टिन्यू
Ans. (d) : मर्टिन्यू ‘प्रत्येक अपने लिए से प्रत्येक अन्य के लिए कोई मार्ग नहीं है।’ इसके अतिरिक्त उनके अनुसार‚ या तो संकल्प की स्वतंत्रता एक कथन है या फिर नैतिकता एक भ्रम है।
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75. निम्नलिखित में से कौन नैतिकता का तत्व सीमांसीय आधार प्रदान करता है?
(a) आधारभूत गुण (b) स्वतन्त्रता तथा उत्तरदायित्व
(c) आत्मा की अमरता (d) चरित्र का विकास
Ans. (c) : नैतिककता का तत्व मीमांसीय आधार ‘आत्मा की अमरता’ पर जोर देता है। नैतिकता की तीन पूर्वमान्यताएं – ईश्वर की अवधारणा‚ आत्मा की अमरता‚ स्वतंत्रता की अवधारणा।
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