9 Hindi Chapter 7 अरूण कमल नए इलाके में खुशबू रचते हैं हाथ

Chapter Notes and Summary
‘नए इलाके में‘ कविता प्रसिद्ध कवि अरुण कमल द्वारा रचित है। यह कविता विकास के नाम पर अंधाधुंध निर्माणों की ओर संकेत करती है। प्रस्तुत कविता एक ऐसी दुनिया में ले जाती है‚ जहाँ स्मृतियाँ पुरानी और बे-असर हो जाती हैं। कवि अपनी स्मृतियों के आधार पर एक ऐसा मकान ढूँढ़ रहा है जिसे वह कुछ दिनों पहले छोड़ गया था‚ परंतु कुछ ही दिनों में यहाँ इतना परिवर्तन हो गया कि उस मकान को खोज पाना कवि के लिए संभव नहीं हो रहा है। कवि पुराने निशानों और स्मृति के आधार पर अपने गंतव्य तक पहुँचना चाह रहा है परंतु पुराने निशान पीपल का पेड़‚ ढहा हुआ घर‚ जमीन का खाली टुकड़ा तथा बिना रंग वाले फाटक का इकमंजिला मकान अब वहाँ नहीं रहे। स्मृति भी धोखा दे रही है। बारिश की संभावना है और मकान नहीं मिल रहा है। कवि को इस तीव्र परिवर्तन को देख ऐसा भाव होता है जैसे वह कई महीनों बाद आया है। वह आशा कर रहा है कि इससे पूर्व कि आरिश हो कोई उसे पहचान ले और उसका इस तरह भटकना समाप्त हो।
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खुशबू रचते हैं हाथ
अरुण कमल की कविता ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ सामाजिक विसंगतियों की ओर संकेत करती है। कवि समझ नहीं पा रहा कि जो हाथ पूरे संसार को खुशबू से भर देते हैं‚ वे हाथ इतने तंग और बदबू से भरे माहौल में जीने को अभिशप्त हैं। यह कैसी विडंबना है कि समाज का सर्वाधिक श्रम करने वाला वर्ग इतना उपेक्षित और मरने को अभिशप्त और दूसरा इन श्रमिकों से प्राप्त होने वाले लाभ से दिनो-दिन धनी होता जा रहा है।
भयानक तंगहाल और कूड़ा-करकट के ढेर के बीच रहने वाले मजदूर निरंतर अपने हाथों से खुशबू फैलाने वाली अगरबत्तियाँ बनाते हैं। ये मुल्क की सबसे बेहतरीन अगरबत्तियाँ बनाते हैं परंतु उनका अपना जीवन ही दुर्गंधपूर्ण है‚ वह किसी नरक से कम नहीं है। यह विश्वास क्यों। यह प्रश्न ही कवि की रचना-प्रक्रिया का मुख्य आधार है।

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