9 Hindi Chapter 4 जाबिर हुसैन सॉंवले सपनों की याद

Chapter Notes and Summary
जाबिर हुसैन द्वारा रचित पाठ ‘साँवले सपनों की याद’ प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी सालिम अली से संबंधित है। इसमें लेखक ने सालिम अली की मौत से उत्पन्न संवेदनाओं को व्यक्त किया है। सालिम अली पक्षियों की मधुर आवाज सुनकर झूम उठते थे।
लेखक कहता है कि पता नहीं कब कृष्ण ने वृंदावन में रासलीला रची थी‚ गोपियों को अपनी शरारत से तंग किया था‚ माखन भरे मटके फोड़े थे‚ दूध-छाछ पिया था‚ कुँजों में विश्राम किया था और अपनी बाँसुरी की धुन से वृंदावन को संगीतमय किया था।
सालिम कमजोर शरीर वाले व्यक्ति थे। वह सौ वर्षों के होने ही वाले थे कि कैंसर की बीमारी ने उन्हें धर दबोचा और उनकी मृत्यु हो गई। वे जीवन के अंतिम क्षणों तक पक्षियों की खोज व उनकी सेवा में लगे रहे। उनके जैसा ‘बर्ड वाचर’ शायद ही कोई हो। उनके इस कार्य में उनकी जीवनसाथी तहमीना भी उनके साथ थीं। उन्होंने बड़ी मेहनत से अपनी जादुई दुनिया बनाई थी जो आकाश से लेकर पृथ्वी तक फैली थी। सालिम अली केरल की साइलेंट वैली को रेगिस्तानी हवा के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए तत्कालीन प्रधानतमंत्री चौधरी चरण सिंह से मिले थे।
आज सालिम और चौधरी चरणसिंह दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं। इस कारण लेखक को लगता है कि अब पर्यावरण के संभावित खतरों से हिमालय और लद्दाख की बर्फीली जमीनों पर जीने वाले पशु-पक्षियों की रक्षा कौन करेगा? सालिम अली ने ‘फाल आफ ए स्पैरो’ के नाम से अपनी आत्मकथा लिखी थी।
डी एच लॉरेंस की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी फ्रीडा लॉरेंस से जब अपने पति के बारे में लोगों ने कुछ लिखने के लिए कहा‚ तो उन्होंने कहा कि छत पर बैठने वाली गौरैया उनके पति के बारे में उनसे ज्यादा जानती है।
बचपन में सालिम अली ने अपनी एयरगन से एक गौरैया को मार गिराया था।
इसी घटना ने उन्हें पक्षियों की आजीवन सेवा करने के लिए बाध्य कर दिया। लंबी दूरबीन लटकाकर वे जगह-जगह पक्षियों की तलाश में घूमते रहते थे। अपनी उपलब्धियों को वे अपनी रचनाओं में व्यक्त करते थे। लेखक की आँखें उनके जाने पर भीग गई हैं।

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