9 Hindi Chapter 1 महादेवी वर्मा गिल्लू

Chapter Notes and Summary
‘गिल्लू’ महादेवी वर्मा की एक संस्मरणात्मक गद्य रचना है। महादेवी वर्मा के संस्मरण ‘मेरा परिवार’ से ‘गिल्लू’ को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
जिसके माध्यम से पशु-पक्षियों का सूक्ष्म अवलोकन तो हुआ ही है साथ ही यह भी बताया गया है कि इन्हें मुक्त व स्वतंत्र रखकर ही हम इनका स्वाभाविक विकास होने में मदद कर सकते हैं।
सोनजुही को देखकर लेखिका की स्मृति ताजा हो जाती है और उसे सोनजुही की लता के रूप में गिल्लू याद हो आता है। गिल्लू एक नन्हा गिलहरी है‚ जो कौए की चोंच से घायल हो गया था और लेखिका ने उस नन्हे जीव (गिलहरी) की मरहम पट्टी की‚ उसे दूध व पानी की बूँद पिलाकर स्वस्थ किया। इस तरह स्वस्थ होकर गिल्लू लेखिका के साथ उसके पास ही रहता था।
लेखिका ने फूल रखने की हल्की डलिया में रूई बिछाकर उसे तार से खिड़की पर लटका दिया। दो वर्ष तक वही गिल्लू का घर था। गिल्लू उस झूले को स्वयं ही हिलाता था। लेखिका जब कभी लिखने बैठती‚ गिल्लू उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए बहुत प्रयास करता। वह लेखिका के पैर तक आकर सर्र से परदे पर चढ़ जाता। वह ऐसा तब तक करता जब तक लेखिका उसे पकड़ने के लिए न उठ जाती।
इस तरह लेखिका कभी उसे लिफाफे में आधा बंद कर देती और गिल्लू टुकुर-टुकुर देखता रहता।
गिल्लू के जीवन का प्रथम बसंत आया। बसंत की खुशबू घर में फैलने लगी।
गिल्लू खिड़की से बाहर की गिलहरियों को झाँकता और जब लेखिका ने यह देखा‚ तो उसने जाली का एक कोना खोल दिया। गिल्लू ने बाहर जाकर जैसे मुक्ति की साँस ली हो। अब जब लेखिका घर से बाहर होती‚ तो गिल्लू भी बाहर चला जाता और जैसे ही चार बजे लेखिका आती‚ गिल्लू भी अपने झूले पर झूलने लगता। इस तरह लेखिका का लगाव उससे बढ़ता ही गया। यह लगाव इतना अधिक हो गया था
कि जब मोटर दुर्घटना के बाद लेखिका अस्पताल से घर पहुँची‚ तो गिल्लू ने एक नर्स की भाँति उसकी सेवा की‚ घंटों बैठे-बैठे लेखिका के बाल सहलाता।
चूँकि गिलहरी की उम्र दो वर्ष से अधिक की नहीं होती है‚ इसलिए गिल्लू का अंत समय भी समीप ही था। यह बात जैसे गिल्लू जानता था इसलिए वह उस दिन न तो बाहर खेलने ही गया और न ही कुछ खाया। बस ठंडे पंजों से लेखिका की वही उंगली पकड़कर चिपका रहा‚ जो उसने अपने बचपन में घायल होने पर पकड़ी थी। लेखिका ने गरमाहट के लिए हीटर भी जलाया पर प्रात: होते ही गिल्लू के प्राण किसी और ही जीवन में जन्म लेने के लिए जा चुके थे। लेखिका ने सोनजुही के पास ही गिल्लू की समाधि बना दी। इसे देख उसकी स्मृति सदैव तरोताजा रहती और साथ ही यह विश्वास भी कि शायद सोनजुही का यह पीला फूल ही उसका गिल्लू हो।

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