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9. पर्यावरण अध्ययन एवं पर्यावरणीय शिक्षा (EVS Environment Studies for CTET & TET in Hindi)

9. पर्यावरण अध्ययन एवं पर्यावरणीय शिक्षा

विद्यालयी स्तर पर पर्यावरणीय शिक्षा की स्थिति

महात्मा गांधी ने सन् 1937 में प्राथमिक शिक्षा में स्थानीय पर्यावरण की आवश्यकताओं को देखते हुए एक आन्दोलन छेड़ा। भारतीय शिक्षा प्रणाली में पहले से ही पर्यावरणीय शिक्षा को स्कूली शिक्षा में सम्मिलित किया गया था। प्रारम्भ में प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान पढ़ाने का मुख्य उद्देश्य भौतिक एवं जैव पर्यावरण में मुख्य तथ्यों, धारणाओं, सिद्धान्तों व प्राविधियों की सही समझ का विकास करना होना चाहिए। पर्यावरणीय शिक्षा को प्रभावशाली बनाने के लिए इसकी विशय-वस्तु को अधिक वैज्ञानिक बनाया जाना चाहिए। 1981 में पर्यावरणीय शिक्षा पर भारतीय पर्यावरण संस्था ने जोर दिया। सन् 1986 में राश्ट्रीय नीति और बाद में सन् 1988 एवं 2000 में एनसीईआरटी पाठ्यचर्या की रूपरेखा में पर्यावरण शिक्षा के महत्व को देते हुए उसे स्कूली शिक्षा में शामिल करने का प्रावधान किया गया। जीव विज्ञान, भौतिकी, रसायन, सामाजिक विज्ञान, गणित आदि की माध्यमिक स्तर की पाठ्य-पुस्तकों ने भी पर्यावरण के सम्बन्ध में पर्याप्त विशय-वस्तु प्रदान की है, जिससे माध्यमिक स्तर तक इनसे सम्बन्धित ज्ञान, कौशल एवं समझ की जड़ मजबूत हो सके।

एनसीईआरटी द्वारा पर्यावरण अध्ययन हेतु उठाये गये कदम

एनसीईआरटी ने पर्यावरण अध्ययन से संबंधित जो प्रयास किये वे निम्नलिखित हैं:

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