7 Hindi Chapter 7 पापा खो गए

Chapter Notes and Summary
विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित इस एकांकी में निर्जीव वस्तुओं का सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है और उनमें संवेदना भी दर्शायी गयी है। वहीं एक आदमी जो बच्चे उठाने का काम करता है, उसके हृदय में संवेदना का कोई स्थान नहीं है।
समुद्र के सामने एक पुळटपाथ पर एक बिजली का खंभा, एक पेड़ और लैटरबॉक्स है। वहीं एक दीवार पर एक सिनेमा का पोस्टर लगा है जिस पर नृत्य की भंगिमा में एक औरत की आस्रति है। शुरू-शुरू में खंभा पेड़ से बातें नहीं करता था, लेकिन एक बार आँधी-तफूान की रात में पेड़ खंभे को गिरने से बचाता है और उसे अपने ऊपर रोक लेता है। तभी से दोनों की दोस्ती हो जाती है।
यह एकांकी एक रात की घटना का वर्णन है जिसमें एक दुष्ट व्यक्ति एक छोटी बच्ची को अपने कंधे पर उठाकर लाता है और उसे पेड़ की ओट में डाल देता है। वह बच्ची के ऊपर अपना कोट फैला देता है और भोजन की खोज में चला जाता है।
थोड़ी देर में वह दुष्ट आदमी वापस आ जाता है। पेड़, खंभा और लैटरबॉक्स अपनी जगह से खिसक-खिसक कर बच्ची को छिपाने का प्रयास करते हैं। अचानक कौआ भूत-भूत चिल्लाने लगता है। उसके साथ-साथ सभी चिल्ला पड़ते हैं और वह आदमी डर कर भाग जाता है। उसके जाने के बाद सभी खुश होते हैं। लड़की थककर सो जाती है। अब सभी उस लड़की को उसके घर पहुँचाने का उपाय सोचने लगते हैं। कौए को एक तरकीब सूझती है। वह पेड़ से कहता है कि सुबह तक वह लड़की के ऊपर छाया किए रहे, जिससे वह देर तक सोती रहेगी और खंभे से कहता है कि वह थोड़ा झुक कर पेड़ पर टिककर खड़ा रहे। इससे लोगों को लगेगा कि यहाँ एक्सीडेंट हो गया है। वे पुलिस को बुलाएँगे। पुलिस लड़की को देखेगी और उसके घर का पता मालूम कर उसे वहाँ पहुँचा देगी।
सुबह होते ही सब लोग देखते है कि खंभा टेढ़ा खड़ा है। कौआ कावँ-काँव कर सबका ध्यान आकर्षित कर रहा है और पोस्टर पर लिखा है-‘पापा खो गए’। लैटर बॉक्स धीरे से सबसे कहता है कि यदि किसी ने इस प्यारी बच्ची के पापा को देखा हो, तो उसे यहाँ ले आएँ।

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