7 Hindi Chapter 30 सातवाँ आठवाँ और नवाँ दिन

Chapter Notes and Summary
सातवें दिन का युद्ध कई मोर्चों पर चल रहा था। हर मोर्चे पर विख्यात वीरों में घमासान युद्ध होता रहा। एक मोर्चे पर अर्जुन के सामने भीष्म थे। एक तरफ द्रोण और विराटराज में भीषण युद्ध हो रहा था। शिखण्डी और अश्वत्थामा में लड़ाई हो रही थी। एक स्थान पर धृष्टद्युम्न और दुर्योधन में युद्ध चल रहा था। नवुळल और सहदेव अपने मामा शल्य पर बाण बरसा रहे थे। एक अलग मोर्चे पर भीम अकेला दुर्योधन के चार भाइयों से लड़ रहा था। एक तरफ घटोत्कच और भगदत्त में भयानक द्वंद्व छिड़ा हुआ था। युधिष्ठिर का श्रुतायु के साथ द्वंद्व युद्ध हो रहा था।
स्रपाचार्य और चेकितान एक अन्य मोर्चे पर लड़े रहे थे। सातवें दिन के युद्ध में द्रोणाचार्य के हाथों विराट की हार हुई तथा वुळमार शंख ने पिता के सामने प्राण त्याग दिए। सूर्य के अस्त होते ही युद्ध बंद हो गया।
आठवें दिन के युद्ध में भीम ने धृतराष्ट्र के आठ बेटों को मार दिया। उस दिन के युद्ध में अर्जुन का साहसी और वीर बेटा इरावान जो एक नागकन्या से पैदा हुआ था, उसकी मौत हो गई। इरावान को मरते देखकर भीमसेन के पुत्र् घटोत्कच ने जोरों की गर्जना की जिससे सारी कौरव सेना थर्रा उठी। उसके बाद वह कौरवों की सेना पर टूट पड़ा और घोर तबाही मचाने लगा। वुळछ देर में सूर्यास्त हुआ और उस दिन का युद्ध समाप्त हो गया। नवें दिन के युद्ध में अभिमन्यु और अलंबुष में घोर संग्राम छिड़ गया। पितामह ने पांडवों की सेना की उस दिन बड़ी तबाही की।
यहाँ तक कि पितामह ने अर्जुन और श्रीस्रष्ण दोनों को ही बड़ी पीड़ा पहुँचाई। थोड़ी देर में सूर्यास्त हुआ और उस दिन का युद्ध बंद कर दिया गया।

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