7 Hindi Chapter 17 वीर कुँवर ¥सह

Chapter Notes and Summary
सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्र्ता संग्राम में जिन वीरों ने हिस्सा लिया वीर वुँळवर सिंह उनमें से एक हैं। इनका जन्म सन् 1782 ई. में बिहार के शाहाबाद जिले के जगदीशपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता जगदीशपुर रियासत के जमींदार थे। पारिवारिक उलझनों के कारण वुँळवर सिंह की शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था घर पर ही की गई, जहाँ उन्होंने हिन्दी, संस्स्रत और प़ळारसी सीखी। पढ़ने-लिखने से ज्य़ादा उनका मन घुड़सवारी, तलवारबाज़ी और वुळश्ती लड़ने में लगता था। सन् 1827 में पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने रियासत की जिम्मेदारी सँभाली। उस समय अंग्रेजों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। लोगों में उनके विरुद्ध गहरा असंतोष था।
जगदीशपुर के जंगलों में ‘बसुरिया बाबा’ नामक सिद्ध संत की प्रेरणा से वुँळवर सिंह के मन में देशभक्ति की भावना उत्पन्न हुई। सन् 1845 से 1846 तक वे गुप्त रूप से सक्रिय विद्रोह की योजनाएँ बनाते रहे। 25 जुलाई, 1857 को उनकी दानापुर की सैन्य टुकड़ी ने विद्रोह कर दिया और आरा जेल की सलाखें तोड़ कैदियों को आज़ाद कर दिया। आगे की योजना बनाते हुए वे रीवा, कालपी, कानपुर एवं लखनऊ तक पहुँच गए। वहाँ अशांति देख उन्होंने आज़मगढ़ की ओर प्रस्थान किया। वहाँ आज़ादी की विजय पताका फहराते हुए वे जगदीशपुर पहुँच गए। उसी दिन विजयोत्सव मनाते लोगों ने अंग्रेजों का झंडा उतारकर अपना झंडा फहराया। इसके तीन दिन बाद ही 26 अप्रैल 1858 को यह वीर सदा के लिए संसार से विदा हो गया।
कहा जाता है एक बार वीर वुँळवर सिंह सेना सहित गंगा पार कर रहे थे। तब डगलस ने उन पर गोलियों की बौछार करवा दी। एक गोली उनके बाएँ हाथ की कलाई को भेदती हुई निकल गई। गोली का ज़हर फैलने के डर से उन्होंने उसी क्षण तलवार से अपना बायाँ हाथ काटा और गंगा मैया को अ£पत कर दिया। वीर वुँळवर सिंह ने अपने जीवन में कई सामाजिक कार्य भी किए। उन्होंने आरा जिला स्वूळल के लिए ज़मीन दान में दे दी। वे आजीवन निर्धन व्यक्तियों की सहायता करते रहे। उन्होंने आरा-जगदीशपुर तथा आरा-बलिया सड़क का निर्माण कराया। जलापू£त के लिए उन्होंने वुळएँ खुदवाए, तालाब बनवाए। वे एक उदार एवं संवेदनशील व्यक्ति थे। उनके यहाँ हिन्दू-मुसलमानों के सभी त्योहार एक साथ मनाए जाते थे। उन्होंने पाठशाला तथा मक़तब भी बनवाए। उनकी लोकप्रियता लोकगीतों के रूप में आज भी बिहार की कई लोकभाषाओं में
गाई जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *