7 Hindi Chapter 12 कंचा

Chapter Notes and Summary
अप्पू कंधे पर बस्ता लटकाए विद्यालय जा रहा है। चलते-चलते वह एक दुकान के सामने पहुँचता है। वहाँ अलमारी में काँच के बड़े-बड़े ज़ार में चॉकलेट, पिपरमेंट और बिस्वुळट रखे थे। अप्पू उन पर ध्यान नहीं देता है, क्योंकि उसके पिता अक्सर ही उसे ये चीजें लाकर देते रहते थे। उसका ध्यान तो उस ज़ार पर अटक जाता है, जिसमें कंचे रखे थे। दुकानदार ने उससे पूछा कि क्या उसे कंचे चाहिए तो अप्पू ने ना में सिर हिला दिया। उसी समय स्कूल की घंटी बजने की आवाज़ आई। अप्पू बस्ता थामे दौड़ पड़ा। देर से पहुँचने वाले पीछे बैठते थे इसलिए आज अप्पू को भी पीछे बैठना पड़ा। अप्पू को याद आया रामन ने उसे बताया था कि जॉर्ज को बुखार है। जॉर्ज कंचे खेलने में माहिर है। इसलिए अप्पू उसी के साथ जाकर कंचे खरीदने की सोचता है। अप्पू का ध्यान कक्षा में नहीं था। उसका ध्यान तो कंचों में था। अप्पू को देख कर मास्टर जी समझ जाते हैं कि उसका ध्यान पढ़ाई में नहीं है। वह गुस्से में उससे पूछते हैं कि कक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है? अप्पू काँपते हुए बोल उठता है, ‘कंचा’। कक्षा में हँसी का ठहाका छा जाता है। मास्टर जी अप्पू को बेंच पर खड़ा कर देते हैं। बेंच पर खड़ा सुबकता हुआ अप्पू फिर से कंचों के बारे में सोचने लगता है। अब कक्षा में बच्चे मास्टर जी से अपनी-अपनी शंका का समाधान करा रहे थे। मास्टर जी ने देखा कि अप्पू फिर कहीं खोया हुआ है। उन्होंने अप्पू से पूछा कि वह क्या सोच रहा है? अप्पू ने कहा-‘पैसे’। मास्टर जी ने समझा कि वह रेलगाड़ी खरीदने के लिए पैसों के बारे में सोच रहा है। वह उसे बताने लगे कि रेलगाड़ी पैसों से नहीं खरीदी जा सकती है। उसी समय कक्षा में चपरासी फीस जमा कराने का नोटिस लेकर आता है। मास्टर जी के आदेश पर बहुत से छात्र् फीस जमा कराने चले गए। लेकिन मास्टर जी ने अप्पू को जाने नहीं दिया और उसे बेंच पर खड़ा कर दिया। अप्पू रोने लगता है। मास्टर जी उसे कक्षा में ध्यान देने की हिदायत देकर छोड़ देते हैं। अप्पू द“तर जाता है, लेकिन वह फ़ीस नहीं जमा करता है। घर लौटते समय वह उसी दुकान पर जाकर रुकता है। दुकानदार उसे देखकर हँस पड़ता है और पूछता है कि उसे कितने कंचे चाहिए। जवाब में अप्पू ने फीस के लिए मिले डेढ़ रुपए उसके सामने रख दिये। पोटली में कंचे लिए अप्पू ने घर पहुँच कर अपनी माँ को कंचे दिखाए। इतने कंचे देखकर माँ को आश्चर्य हुआ। माँ सोचने लगी कि वह खेलेगा किसके साथ। उसकी छोटी बहन तो अब रही नहीं। माँ की आँखों में आँसू आ गए। अप्पू ने समझा शायद माँ को कंचे पसंद नहीं आए। उसने माँ से कहा ‘बुरे कंचे हैं न।’ माँ ने कहा-‘नहीं, अच्छे हैं।’ वह हँस पड़ा। माँ भी हँस पड़ी तो अब वह बहुत खुश दिखाई दे रहा था।

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