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7. पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा (EVS Environment Studies for CTET & TET in Hindi)

7. पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा

पर्यावरण की परिभाषा

पर्यावरण दो शब्द ‘परि’ तथा ‘आवरण’ से मिलकर बना है। परि का अर्थ है चारों ओर तथा आवरण का अर्थ है ढका होना या घिरा होना। अर्थात् चारों ओर से घिरे हुए वातावरण को पर्यावरण कहा जाता है। पर्यावरण को भौतिक, जैविक तथा रासायनिक कारक प्रभावित करते हैं। पर्यावरण मनुष्य को चारों तरफ से घेरे हुए है। मानव जीवन पर विभिन्न क्रियाओं का प्रभाव पड़ता है।
सी.सी. पार्क के अनुसार – ’’मनुष्य जिन विशेष स्थान और समय पर एक विशेष परिस्थिति से घिरा हुआ है, उसे पर्यावरण कहते हैं।’’ होलैंड एवं डगलस के अनुसार – ’’संसार के प्राणियों के विकास, परिपक्वता, प्रकृति, व्यवहार तथा जीवन शैली को प्रभावित करने वाली समस्त घटनाओं को पर्यावरण के अंतर्गत रखा जाता है।
जे.एस. रास के अनुसार – वह बाह्य शक्ति जो हमें प्रभावित करती है पर्यावरण या वातावरण कहलाती है।
बोरॉन के अनुसार- किसी भी व्यक्ति को उसके जन्म से लेकर मृत्यु तक जो कुछ उसे प्रभावित करती है वही पर्यावरण है।
गिंसबर्ट के अनुसार – ’’पर्यावरण में उन सभी वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है जो जैव स्वरूप या वस्तु को नजदीकी से एवं प्रत्यक्ष रूप से घेरे हुए हैं। जनसामान्य के अर्थ में देखा जाए तो संपूर्ण पृथ्वी तथा इस पर उपस्थित समस्त वस्तु ही हमारा पर्यावरण है।

पर्यावरण के घटक

पर्यावरण के मुख्यत: दो घटक हैं:

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