6 Hindi Chapter 4 चाँद से थोड़ी सी गप्पें शमशेर बहादुर सिंह

Chapter Notes and Summary
कविता का सारांश
इस कविता में श्री शमशेर बहादुर सिंह ने बाल सुलभ कल्पनाओं का बहुत ही मनोरम वर्णन किया है। बच्चों ने चाँद से अनेक ढंग से अपना सम्बन्धा जोड़ रखा है। वे चाँद को देखकर अनेक कल्पनाएँ करते हैं। इस कविता में छोटी लड़की आकाश को चाँद का वस्त्र् समझती है, जिस पर सितारे जड़े हैं। चाँद का वस्त्र् सभी दिशाओं में फैला है। उस वस्त्र् में चाँद का केवल गोरा-चिटा मुँह ही दिखता है। कविता के अंत में वह चाँद के घटने-बढ़ने को बीमारी बताती है, जो ठीक होने को ही नहीं आती है।

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