You are here
Home > Books > 4. जल (EVS Environment Studies for CTET & TET in Hindi)

4. जल (EVS Environment Studies for CTET & TET in Hindi)

4. जल

परिचय

पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में जल का महत्वपूर्ण योगदान है। जल पृथ्वी की सतह पर सबसे अधिक भाग को घेरे हुए है। जल पृथ्वी के नीचे भी पाया जाता है। पृथ्वी के लगभग 3 4 भाग जल में से बहुत कम मात्रा में पीने योग्य जल प्राप्त होता है। यह शुद्ध जल बर्फ के रूप में धु्रवों पर तथा बर्फ से ढके पहाड़ों पर पाया जाता है। अधिकांश पानी समुद्र और महासागरों में पाया जाता है। परंतु यह पानी बहुत ही खारा होता है। जल एक अकार्बनिक पदार्थ है। यह मानव शरीर का 60–75 % भाग का निर्माण करता है। जल पाचन, परिवहन एवं उत्सर्जन में सहायक होता है। जल की कमी से निर्जलीकरण (Dehydration) हो जाता है।

जल तथा उसका महत्व

जल जीव-जंतु तथा वनस्पतियों के जीवित रहने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कहा जाता है- ’जल ही जीवन है।’ अर्थात् जल के बिना पृथ्वी पर किसी भी जीव जंतु अथवा वनस्पति का जीवित रहना संभव नहीं है। इसका प्रयोग मानव पीने, भोजन पकाने, कपड़े धोने, नहाने, साफ-सफाई आदि क्रिया करने में करता है तथा पेड़-पौधे जल का प्रयोग केवल अपने भोजन का निर्माण करने में करते हैं। जल का उपयोग खेतों की सिंचाई के लिए भी किया जाता है। जल से अनेक प्रकार की औषधियाँ तैयार की जाती हैं। अत: जल समस्त जीव-जंतु तथा वनस्पति के जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

जल स्रोत

पृथ्वी पर जल का प्रमुख स्रोत वर्षा है। वर्षा द्वारा जल पृथ्वी के सतह पर उपस्थित विभिन्न स्रोतों में एकत्रित रहता है तथा पुन: सूर्य के तापमान या ऊष्मा के कारण जल वाष्पित होकर वायुमंडल में पहुँचता है और उन्हें संघनन द्वारा वर्षा के रूप में पृथ्वी पर पहुँच जाता है। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। इस प्रक्रिया को जल चक्र कहते हैं। जल के स्रोतों को दो भागों में बांटा गया है, जो निम्न हैं:

Top
error: Content is protected !!