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16. शिक्षण सहायक सामग्री (EVS Environment Studies for CTET & TET in Hindi)

16. शिक्षण सहायक सामग्री

पर्यावरण अध्ययन शिक्षण की समस्याएँ

पर्यावरण शिक्षण में अनेक प्रकार समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जिनमें से कुछ निम्न हैं: छात्रों की व्यक्तिगत भिन्नता: कक्षा में अलग-अलग आयु के बच्चे होते हैं तथा उनकी बौद्धिक क्षमता भी भिन्न-भिन्न होती है। इसीलिए कुछ बच्चों को आसानी से समझ आ जाता है तथा कुछ बच्चों को कुछ भी समझ में नहीं आता है। इससे विज्ञान विषय एक कठिन विषय के रूप में उभरकर सामने आता है तथा बच्चे विज्ञान विषय में
रुचि नहीं लेते हैं।
पाठ्यक्रम संबंधी समस्याएँ: पर्यावरण अध्ययन का पाठ्यक्रम बहुत ही विस्तृत है तथा अनेक प्रकार की विभिन्नताओं से घिरा हुआ है, जो बच्चों की आयु और समझ से अधिक जटिल विषय माना जाता है, जिसे बच्चे इसे क्रम से तथा सरलता से नहीं सीख पाते हैं।
विद्यालय में संसाधनों का अभाव: विद्यालय में पर्यावरण अध्ययन से संबंधित संसाधनों का अभाव पर्यावरण अध्ययन में विशेष बाधा है। संसाधनों की कमी के कारण बच्चे अच्छे से जानकारी नहीं प्राप्त कर पाते, जिससे उनका ज्ञान अधूरा रह जाता है।
सामुदायिक संसाधनों का पर्याप्त मात्रा में प्रयोग न होना: पर्यावरण का अध्ययन केवल कक्षा में संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न सामुदायिक संसाधनों की भी आवश्यकता पड़ती है, जिनका प्रयोग न हो पाना पर्यावरण शिक्षा की प्रमुख समस्या है। प्रयोग के बिना पर्यावरण अध्ययन संभव नहीं है।
प्रयोगिक कार्य की समस्या: पर्यावरण अध्ययन विज्ञान से संबंधित विषय है। प्रयोग के बिना विज्ञान को समझना असंभव है। बच्चों का प्रयोगिक विषयों के प्रति रुझान कम होता चला जा रहा है, जो पर्यावरण अध्ययन के लिए एक समस्या है।
योग्य शिक्षकों का अभाव: उच्च प्राथमिक तथा माध्यमिक स्तर के बच्चे तथा अध्यापक दोनों ही प्रयोगिक विषयों से दूर भागते हैं, जिससे योग्य शिक्षकों का अभाव होता जा रहा है। प्रशिक्षित शिक्षक की कमी भी पर्यावरण अध्ययन के शिक्षक की प्रमुख समस्या है।
तकनीकी शैली के प्रयोग की कमी: विभिन्न विषयों का पाठ्यक्रम बच्चों को विशय से संबंधित जानकारी प्रस्तुत करने की व्याख्यान पद्धति को अपनाता है, जिससे प्रयोगात्मक कार्य पर कम बल दिया जाता है।
पर्यावरण अध्ययन में पिछड़े बच्चों की समस्या: कमजोर छात्र शिक्षण के प्रति स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं। उनका आत्मबल कमजोर होता है क्योंकि उनकी बुद्धि मंद होती है तथा शारीरिक विकास भी सही रूप से नहीं हुआ होता है। उनके अंदर अस्थिरता होती है। अपनी आयु के बच्चों के साथ अच्छे संबंध नहीं होते हैं। अत: यह पर्यावरण के शिक्षण में एक समस्या है।

पर्यावरण शिक्षण को प्रभावी बनाने हेतु महत्वपूर्ण शिक्षण सूत्र

सरल से कठिन की ओर: पर्यावरण शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए बच्चों को धीरे-धीरे छोटी-छोटी बातों को बताते हुए आगे बढ़ना चाहिए। इससे बच्चों के अंदर सीखने की इच्छा प्रकट होगी और उनमें रुचि उत्पन्न होगी जो सफलता की कुंजी है।

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