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13. पर्यावरण संबंधी क्रियाकलाप (EVS Environment Studies for CTET & TET in Hindi)

13. पर्यावरण संबंधी क्रियाकलाप

कक्षा में होने वाली गतिविधियाँ

कक्षा में अध्ययन-अध्यापन के दौरान अनेक प्रकार की गतिविधियाँ होती हैं। जिनमें से कुछ निम्न हैं: वादविवाद: कक्षा में अध्यापन के दौरान शिक्षक बच्चों के बीच वाद-विवाद की प्रतियोगिता करा सकता है। इस से बच्चों की तर्कशक्ति तथा दूसरे के सामने खुलकर बोलने की शक्ति का विकास होगा। इससे बच्चों को अपनी योग्यता के प्रदर्शन करने का मौका मिलता है।
निर्देशन: जब कक्षा में अध्यापक बच्चों को समझाता है तथा उनके समक्ष विश्लेषण तथा संश्लेषण के आदर्श रूपों को प्रस्तुत करता है, तो उस समय बच्चों की भूमिका सूचना तथा कौशलों को नोट करने की होती है।
प्रश्न पूछना: कक्षा में अध्यापक बच्चों से पढ़ाये गये विषय-वस्तु या पर्यावरण से संबंधित प्रश्न पूछता है तथा उनसे संबंधित जानकारी को कक्षा में विस्तारकपूर्वक समझाता है। अध्यापक बच्चों से प्रश्न इसलिए पूछता है ताकि वह पता कर सके कि उसके द्वारा बताये गये तथ्यों में से बच्चों को कितना समझ में आया है और कितना समझ में नहीं आया है। जो समझ में नहीं आता अध्यापक उसे पुन: समझाने का प्रयत्न करता है।

कक्षा से संबंधित ध्यान देने वाली बातें

कक्षा में शिक्षक को हर विषय पर 3-4 सत्र की ईकाई योजना बनानी चाहिए। जिससे विभिन्न स्थितियों में एवं विभिन्न तरीकों से बच्चों को प्रयोग करने का अवसर बार-बार मिल सके और उनकी समझ और योग्यताओं का विकास हो। बच्चों के मूल्यांकन का सत्र लंबा होना चाहिए। कक्षा में शिक्षक को चाहिए कि वह प्रत्येक बच्चे पर ध्यान दे और उसकी जरूरत और रुचि के अनुसार उसे शिक्षा प्रदान करे। कक्षा कार्य में शिक्षक बच्चों और अपेक्षाकृत बड़े बच्चों को भी शामिल कर सकता है। इस प्रकार की विविधता कक्षा में चल रहे कार्यों को अधिक रोचक बना देती है। इससे अध्यापक विशिष्ट बच्चों की तरफ अधिक ध्यान दे सकेंगे। समावेशी कक्षा के शिक्षक की पाठ योजना और इकाई योजना को इस ओर इंगित करना चाहिए कि शिक्षक बच्चों की विभिन्न जरूरतों के अनुसार कक्षा में जारी गतिविधि को कैसे बदलता है। शिक्षकों को यह सोचना चाहिए कि पाठ योजना को किस प्रकार बनाया जाए कि बच्चे उसे सिर्फ पढ़ें नहीं बल्कि वे उसमें रुचि लें तथा उसे प्रयोगात्मक तरीके से करने का प्रयास करें। पाठ योजना को एक स्तरीय पाठ्य-पुस्तकों पर आधारित करने की बजाय शिक्षकों को विषयक मुद्दों की योजना बनाने की आवश्यकता होगी। जिससे छात्र अपने स्तर के अभ्यासों में व्यस्त रहें। कक्षा में अध्यापक का व्यवहार सामंजस्यपूर्ण होना चाहिए।

कक्षा के बाहर होने वाली गतिविधियाँ

कक्षा के बाहर छात्र द्वारा अनेक प्रकार की गतिविधियाँ होनी चाहिए। कुछ गतिविधियाँ निम्न हैं: साहित्यिक गतिविधियाँ: बच्चों को संगोष्ठी मंडल, कहानी लेखन, कविता-पाठ, पत्रिका, नाट्य कला आदि को करना और पढ़ना चाहिए।
शारीरिक विकास गतिविधियाँ: बच्चों को खेल-कूद, सामूहिक अभ्यास, परेड आदि खेलने चाहिए, जिससे शारीरिक विकास होता है।
सांस्कृतिक विकास गतिविधियाँ: संगीत, नृत्य, पेंटिंग, मूर्तिकला आदि विविध मनोरंजन करना चाहिए।
अवकाश समय के लिए गतिविधियाँ: फोटोग्राफी करना, पिकनिक पर जाना, चिड़ियाघर जाना आदि।

पाठ्यक्रम सहगामी गतिविधियों के उद्देश्य

पाठ्यक्रम सहगामी गतिविधियों के उद्देश्य निम्न हैं:
► विद्यालय की शैक्षिक एवं चारित्रिक भावना को बनाए रखना
► छात्रों का सर्वांगीण विकास करना
► अलग-अलग जगहों से आये हुए बच्चों में सहयोग एवं सह-अस्तित्व की भावना का विकास करना।
► छात्रों की भावना को संतुलन में रखना जिससे वे अच्छे नागरिक बन सकें।
► बालक को समय का महत्व बताना और उसका सदुपयोग करना सिखाना आदि।

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