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11. विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का संबंध (EVS Environment Studies for CTET & TET in Hindi)

11. विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का संबंध

परिचय

इस आधुनिक युग को विज्ञान का युग कहा जाता है। मनुश्य का जीवन वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित है। मनुश्य की हर क्रियाकलाप में विज्ञान है। अत: विज्ञान का ज्ञान होना सभी के लिए आवश्यक है। विज्ञान और सामाजिक विज्ञान एक दूसरे से जुडे़ हैं क्योंकि विज्ञान जिन वस्तुओं का निर्माण या खोज करता है उसका उपयोग समाज के लोग करते हैं। उसके महत्व को समाज द्वारा समझा जाता है। विज्ञान का पर्यावरण से घनिश्ठ सम्बन्ध है और समाज पर पर्यावरण का सीधा प्रभाव पड़ता है।

सामाजिक विज्ञान की आवधारणा

मानवीय संबंधों के निर्माण का अध्ययन सामाजिक अध्ययन की आवधारणा है। मानवीय संबंधों का मतलब उन संबंधों से है, जो मनुश्य और समुदायों, संस्थाओं, राज्यों आदि के बीच स्थित रहते हैं। सामाजिक तथा भौतिक परिवेश का अध्ययन भी सामाजिक विज्ञान की अवधारणा है। मनुश्य के भूत, भविश्य और वर्तमान में होने वाले सामाजिक और भौतिक अध्ययन को सामाजिक अध्ययन कहा जाता है। सामाजिक विज्ञान की विशय-वस्तु के बारे में अनेक मत दिये गये हैं। प्रत्येक विशय की मूल ईकाइयों को इकट्ठा करके एक पाठ्यक्रम में पढ़ना या पढ़ाना सामाजिक विज्ञान के अर्न्तगत आता है। सामाजिक विज्ञान को अलग-अलग विशयों में पढ़ाया जाता है। परन्तु परीक्षा के उद्देश्य से देखा जाए तो सभी सामाजिक विज्ञान के अन्तर्गत आते हैं। सामाजिक विज्ञान की पाठ्य-पुस्तकों को बृहद् तरीके से तैयार किया गया है तथा छठी से दसवीं के विद्यार्थियों को सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से पढ़ाया जाता है। सामाजिक विज्ञान में समाज के विविध रूपों का समावेश है। सामाजिक विज्ञान के अन्तर्गत इतिहास, भूगोल, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र आदि विशय आते हैं।

सामाजिक विज्ञान संबंधी विचारणीय मुद्दे विविधता और स्थानीय विषय-वस्तु

हमारा समाज विविधता से भरा हुआ समाज है। सामाजिक अध्ययन के लिए समस्त क्षेत्र और सामाजिक समुदाय विशय-वस्तु से जुड़ा होना चाहिए। जिससे शिक्षक, विद्यार्थी और स्थानीय समुदाय के लोग अपने विचारों को, अनुभवों को शामिल कर गौरवान्वित हो सकें। ऐसा पाठ्य-पुस्तकों में हो पाना असम्भव है, परन्तु इसका विकल्प ढूँढ़ना चाहिए तथा पठन-पाठन की मदद से स्थानीय शिक्षण की गतिविधियों को जोड़ा जाना चाहिए।

वैज्ञानिक दृढ़ता

इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र आदि की प्रकृति को वैज्ञानिक नहीं माना जाता है। जबकि प्राकृतिक और भौतिक तत्वों का वैज्ञानिक परीक्षण सम्भव माना जाता है। परन्तु प्राकृतिक व भौतिकी की तरह सामाजिक विज्ञान भी वैज्ञानिक परीक्षण के लिए उपयुक्त है तथा सामाजिक विज्ञान के सिद्धान्त और तरीके भी अधिक उपयोगी हैं।

मनुष्य सम्बन्धी सरोकर

समाजिक विज्ञान के अर्न्तगत मनुश्य की स्वतन्त्रता, विश्वास, सम्मान आदि की सैद्धान्तिक जिम्मेदारी का भी निर्माण होता है। सामाजिक विज्ञान के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को जागृत करना भी है, जिससे वे सामाजिक बाधाओं से मुक्ति पा सकें तथा अपने सम्मान, विश्वास, स्वतन्त्रता आदि मूल्यों की रक्षा कर सकें। पाठय-पुस्तकों की मदद से बच्चों की विचार प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने का प्रयास करना चाहिए।

विषयों के बीच अंत:संबंध

सामाजिक विज्ञान के अन्तर्गत कई विशय आते हैं। जैसे इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र , अर्थशास्त्र आदि। बच्चों की आयु को ध्यान में रखते हुए उनके विशय-वस्तु का निर्माण करना चाहिए। इस प्रकार के विशय-वस्तुओं के चयन की आवश्यकता है जिसके जरिये बच्चे सहजता से विभिन्न विशय को गहराई से समझ सकें। उप-विशयों का चुनाव सावधानी से करना चाहिए।

पर्यावरण अध्ययन का अन्य विषयों के साथ सम्बन्ध पर्यावरण अध्ययन एवं भाषा

साहित्य का माध्यम भाशा है। हिन्दी, अंग्रेंज़ी आदि भाशाओं में अनेक प्रकार की कविताएँ, कहानियाँ आदि बतायी जाती हैं, जो समाज में पर्यावरण से संबंधित होती हैं। अर्थात् भाशा और पर्यावरण एक दूसरे से संबंधित है।

पर्यावरण अध्ययन एवं गणित

भूगोल, अर्थशास्त्र, भौतिकी, रसायन, जीव आदि विशय जो सामाजिक अध्ययन के अन्तर्गत आते हैं गणित के बिना अधूरे हैं। इनका आधार ही गणित है। अत: सामाजिक विज्ञान और गणित का गहरा सम्बन्ध है।

पर्यावरण अध्ययन एवं विज्ञान

हमारे जीवन को विज्ञान प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। इस प्रकार हमारा सामाजिक जीवन विज्ञान से प्रत्य़क्षत: प्रभावित है। इसी कारण विज्ञान के समस्त पहलुओं का अध्ययन सामाजिक अध्ययन के अन्तर्गत किया जाता है।

पर्यावरण अध्ययन एवं कला

मनुश्य की भावनाओं को प्रकट करने में कला का महत्वपूर्ण योगदान है। सामाजिक अध्ययन के अर्न्तगत विभिन्न समय की कलाओं जैसे – चित्रकला, हस्तकला, मूर्तिकला आदि का अध्ययन करते हैं। अत: कला का सामाजिक अध्ययन से विशेश संबंध है।

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